Showing posts with label aap government. Show all posts
Showing posts with label aap government. Show all posts

दिल्ली : जब तक न हो विज्ञापनों पर उड़ाए गए 163 करोड़ रूपए की वसूली, तब तक सीज रहें AAP के बैंक खाते


दिल्ली के ‘सूचना एवं प्रचार निदेशालय (DIP)’ ने ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के खिलाफ 163.62 करोड़ रुपए की वसूली का नोटिस जारी किया था। यह वसूली विज्ञापनों में मनमाने ढंग से किए गए खर्च को लेकर होनी है। विज्ञापन में करोड़ों रुपए खर्च करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अरविंद केजरीवाल सरकार की जमकर आलोचना की है।

12 जनवरी, 2022 को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेता मनोज तिवारी ने माँग करते हुए कहा है कि वसूली पूरी होने तक आम आदमी पार्टी (AAP) के बैंक खातों को सीज कर देना चाहिए। उन्होंने कहा है, “दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपना और ‘आम आदमी पार्टी’ का चेहरा चमकाने के लिए जनता का पैसा पानी की तरह बहाया है। हम चाहते हैं कि, जब तक यह पैसा वापस नहीं आता, तब तक AAP के अकाउंट को तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया जाना चाहिए।”

मनोज तिवारी ने कहा है, “आम आदमी पार्टी की सरकार विज्ञापनों पर दिल्लीवासियों की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर रही है। हम लंबे समय से कह रहे हैं कि यह सरकार फर्जी विज्ञापनों की सरकार है। AAP को अब 163 करोड़ रुपए देने होंगे। उन्हें विज्ञापनों पर इतना पैसा खर्च करने की अनुमति किसने दी?”

मनोज तिवारी ने यह भी कहा है कि एक समय दिल्ली को नादिर शाह ने लूटा था। अब आम आदमी पार्टी लूट रही है। आज 163 करोड़ रुपए वापस करने की बात आई तो ये लोग छटपटा गए। मनीष सिसोदिया कह रहे हैं कि अधिकारियों के ऊपर दवाब बनाकर ये नोटिस भेजा है। ये अराजकता का परिचय है। AAP ने अपनी पार्टी का चेहरा चमकाया, इसमें सरकार या सरकार की योजनाओं का कोई लेना देना नहीं। केजरीवाल और सिसोदिया की बौखलाहट से ये माफ नहीं हो सकता।

दरअसल इससे पहले DPI द्वारा 163 करोड़ रुपए की वसूली का नोटिस जारी किए जाने के बाद, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि भाजपा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सरकारी अधिकारियों का उपयोग कर रही है। 

सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाते हुए कहा था, “दिल्ली में अफसरों पर असंवैधानिक नियंत्रण का नाजायज इस्तेमाल देखिए, बीजेपी ने दिल्ली सरकार की सूचना विभाग सचिव ऐलिस वाज (IAS) से नोटिस दिलवाया है कि वर्ष 2017 से दिल्ली से बाहर राज्यों में दिये गए विज्ञापनों का खर्चा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से वसूला जाएगा।”

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर सूचना और प्रचार निदेशालय (DPI) ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को 163 करोड़ रुपए का नोटिस जारी किया था। यह रकम जमा करने के लिए केजरीवाल को 10 दिन का समय दिया गया है। 163 करोड़ रुपए की इस कुल राशि में 99.31 करोड़ रुपए मूलधन व 64.31 करोड़ रुपए पेनाल्टी इंटरेस्ट के रूप में वसूल होना है।

अवलोकन करें:-

सील हो सकता है AAP का ऑफिस: 10 दिन में 164 करोड़ रूपए जमा करने का निर्देश; माकन जी मेहनत रंग लाई

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
सील हो सकता है AAP का ऑफिस: 10 दिन में 164 करोड़ रूपए जमा करने का निर्देश; माकन जी मेहनत रंग लाई

यह पूरी कार्रवाई उप-राज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर हो रही है। उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव को कहा था कि राजनीतिक विज्ञापनों को सरकारी विज्ञापनों के तौर पर प्रकाशित करने के लिए आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपए की रिकवरी की जाए।

दिल्ली : ‘दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों के शिक्षकों को महीनों से वेतन नहीं, अंधेरे में 2000 परिवार’

जब से दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार आयी है, कभी किसी को वेतन नहीं मिलता तो कभी किसी को। परन्तु जब वेतन न दिए जाने की बात आती है, आरोप केंद्र में मोदी सरकार पर डाल अपनी ईमानदारी का ढोल पीटने लगते हैं और जनता केजरीवाल के झूठे आरोपों को सच मान लेती है। दिल्ली से बाहर जाकर जो दिल्ली की मिसाल देकर उस राज्य की भोली-भाली जनता को मुफ्त की बिजली पानी का लालच देकर सत्ता हथियाने का प्रयास के रहे, लेकिन दिल्ली से बाहर वालों को यह नहीं मालूम की केजरीवाल अपने प्रचार में दूसरों का वेतन प्रयोग कर रहे हैं। मुस्लिम वोट को खुश करने के लिए वक़्फ़ बोर्ड और इमामों पर कर्मचारियों का वेतन रोक धनवर्षा करते रहते हैं।  
दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के 12 कॉलेजों के शिक्षकों को पाँच महीने से वेतन न दिए जाने का आरोप मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगा है। प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने इस सम्बन्ध में उन्हें पत्र लिखा है और उनके घर के बाहर धरने का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुभकामनाएँ देते हैं, लेकिन इसी समय उनकी आँखों में 2000 परिवारों की बुझी हुई दीवाली भी है। राकेश सिन्हा ने 3 नवंबर, 2021 को पत्र लिखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेज जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते हैं, उन्हें पिछले 4-5 महीनों से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने उदाहरण के लिए रूप में महाराजा अग्रसेन कॉलेज के 116 शिक्षकों, 75 कर्मचारियों और 7 सेवानिवृत्त लोगों का जिक्र किया। उन्होंने जानकारी दी कि दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज के 122 शिक्षकों और 80 कर्मचारियों को क्रमशः 4 एवं 3 महीने से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये AAP सरकार का उच्च शिक्षा पर सीधा प्रहार है।

प्रोफेसर व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा है, “कॉलेजों को मृतप्राय कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल निजी शिक्षण संस्थानों की मदद कर रहे हैं। आपकी सरकार ये सब सोचे-समझे साजिश के तहत कर रही है। राजगुरु कॉलेज को 3 वर्ष से भवन के रखरखाव के रुपए नहीं मिले हैं। दिल्ली सरकार के विज्ञापनों को देख कर लग रहा है कि आप लोगों का दर्द का उपहास उड़ा रहे हैं। आपकी संवेदनशीलता मर चुकी है, वरना आप 2000 परिवारों को अँधेरे में रहने और अपने हक़ से वंचित होने को बाध्य नहीं करते।”

राकेश सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने पिछले साल भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था, परन्तु जिनका जनतंत्र में ही विश्वास नहीं है वो सदन में कही गई बातों की क्या परवाह करेंगे? उन्होंने अपील की कि जल्द ही इन कॉलेजों के बकाया फंड को जारी किया जाए और भविष्य में नियमित वेतन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ऐलान किया कि त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो वो 6 नवंबर, 2021 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर सांकेतिक धरना देंगे। उन्होंने कहा कि ‘केजरीवाल की संवेदनहीनता’ को वो जगाने की कोशिश करेंगे।

‘दिल्ली गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन (DGTA)’ भी दिल्ली सरकार द्वारा फंडेड कॉलेजों के शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने से नाराज़ है। साथ ही कॉलेजों को ग्रांट देने का जो उन्होंने वादा किया था, उसे भी पूरा नहीं किया गया है। DUTA ये मामला UGC के समक्ष भी था चुका है। त्योहारों के मौसम में रुपए न मिलने के कारण शिक्षकों के परिवारों को खासी परेशानी हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि वो पहले से ही कोरोना की मार झेल रहे हैं।

दिल्ली दंगों का 1 साल: मस्जिदों को राशन, पीड़ित हिन्दुओं को लंबी कतारें, प्रत्यक्षदर्शी ने किया खालसा व केजरीवाल सरकार की करतूत का खुलासा

                                दिल्ली में 1 साल पहले भड़की थी हिंसा (फाइल फोटो साभार: The Tribune)
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को एक साल पूरा हो चुका है। महीनों तक चला यह हिंसक CAA विरोधी उपद्रव भयावह रूप से हिंसक हो पड़ा था। लगभग 3 दिनों तक चली इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। अब जब इस हिंसा को एक वर्ष पूरे हो चुके हैं, ऑपइंडिया ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के स्थानीय लोगों से बातचीत की, जिन्होंने हमारे साथ इस एक साल के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने हमें दिल्ली के AAP सरकार के दोहरे रवैये के बारे में भी बताया।

दिल्ली दंगों के एक पीड़ित ने हमें बताया कि खालसा ऑर्गनाइजेशन के लोगों ने मदद देते समय हिन्दुओं और मुस्लिमों में खासा भेदभाव किया, अधिकतर हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ किया गया। ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए राहुल शर्मा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि खालसा वालों ने केवल मुस्लिमों की ही सहायता की और हिन्दुओं को मदद के नाम पर टोकन दे दिया। वो चांँदबाग इलाके के रहने वाले हैं।

चाँदबाग वही क्षेत्र है, जहाँ आईबी अधिकारी रहे अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उन्हें ‘अल्लाहु अकबर’ का मजहबी नारा लगाती हुई भीड़ घसीट कर ले गई थी। दिल्ली की गलियों में हो रही इस हिंसा में इस्लामी भीड़ ने ऐसा क्रूर प्रदर्शन किया है, जैसा हाल के दिनों में नहीं देखने को मिला है। अंकित शर्मा और दिलबर नेगी की हत्या का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में आया था। दिलबर नेगी को ज़िंदा आग में झोंक दिया गया था।

एक पीड़ित ने बताया, “दिल्ली में हुए दंगों के कुछ महीनों बाद खालसा वालों को सहायता बाँटते हुए देखा गया था। उन्होंने पीड़ितों के पुनर्वास का जिम्मा उठाया हुआ था। हालाँकि, उनका समर्थन भेदभाव से भरा हुआ था। खालसा वालों ने हिन्दुओं के खिलाफ भेदभाव किया और मुस्लिमों को सहायता दी।” उसने यहाँ तक दावा किया कि 100 में से 90% के औसत से उन्होंने मुस्लिमों की मदद की और हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ किया।

दंगे के प्रत्यक्षदर्शियों ने दिल्ली में चल रही अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार पर भी पक्षपात के आरोप लगाए। इस व्यक्ति ने कहा कि दिल्ली सरकार ने भी हिन्दू पीड़ितों पर ध्यान नहीं दिया। उसने बताया कि केजरीवाल सरकार ने मस्जिदों में अनाज और फल भेजे, जबकि हिन्दुओं को दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लगा कर संघर्ष करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मस्जिदों में सरकार से आई सामग्रियों का मुस्लिमों में वितरण किया गया।

प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी बताया कि इलाके में अभी भी शांति कायम नहीं है, बल्कि तनाव और हिन्दुओं के बीच डर का माहौल है। उसने हमें बताया कि मुस्तफाबाद में मुस्लिम भीड़ ने बाइक से जा रहे एक हिन्दू युवक की पिटाई की, जिसके बाद तनाव फ़ैल गया। उसने बताया कि इस खबर को मीडिया ने भी प्राथमिकता नहीं दी। हिन्दुओं को वहाँ जाना पड़ा, ताकि मामला शांत हो।

दिल्ली दंगों के दौरान ‘शिव विहार’ के लोगों ने भी बताया था कि चौक के पास की सड़क के एक तरफ मुस्लिमों के घर सलामत थे, दूसरी तरह हिन्दुओं की दुकानें ख़ाक में मिली हुई थीं। लोगों ने बताया था कि हमले इन्हीं मुस्लिमों के घर से हुए थे और मुस्लिम महिलाएँ भी अपनी छतों पर खड़े होकर पुलिस बलों पर एसिड से हमले कर रही थीं। बताया गया कि राजधानी स्कूल की छत पर काफ़ी ऊँचाई पर थे, जहाँ से हिन्दू ही अधिकतर निशाना बने।(साभार)