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झारखंड : फरार हो गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या हो गया अपहरण? दिल्ली आवास पर डेरा डाल कर बैठी है ED

क्या झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन घोटाला कर के फरार हो गए हैं? कम से कम मीडिया में तो यही चल रहा है। साथ ही भाजपा का भी यही आरोप है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) जमीन घोटाले में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच चल रही है। अब ED उनसे दोबारा पूछताछ करने के लिए उन्हें खोज रही है। खबर है कि वो मिल ही नहीं रहे हैं। उन्हें पेश होने के लिए बुधवार (31 जनवरी, 2024) तक का समय दिया गया है। उनके दिल्ली स्थित आवास पर एजेंसी के अधिकारी डेरा डाले हुए हैं।

झारखंड में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “ED अधिकारियों के डर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लापता होने की सूचना समाचार चैनलों के माध्यम से प्राप्त हो रही है। अगर इस खबर में सत्यता है तो यह झारखंड के लिए संवैधानिक संकट की स्थिति है। महामहिम CP राधाकृष्णन से निवेदन है कि वो मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को तलब कर जाँच एजेंसी से भागने का कारण पूछें।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की साख और प्रतिष्ठा दाँव पर है। उन्होंने कहा कि अपनी इन हरकतों से हेमंत ने उनके जनजातीय समाज की प्रतिष्ठा और गौरव को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। साथ ही उन्होंने झारखंड के DGP से जवाब माँगा कि CM हेमंत सोरेन सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर रात को कैसे बाहर निकल कर भाग सकते हैं? उन्होंने की सुरक्षा में लगे कर्मियों को बर्खास्त करने की माँग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत सुरक्षित रूप से पेश किया जाना चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि आखिर एक राज्य का मुख्यमंत्री भगोड़ा कहलाने का पाप कैसे कर सकता है? उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। वहीं गोड्डा के सांसद एवं भाजपा नेता निशिकांत दुबे भी इस मामले में मुखर हैं। डॉ दुबे ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि झारखंड सरकार का महाधिवक्ता मेरे झारखंड की आन बान और शान वीर शिबू सोरेन जी के बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को भगोड़ा घोषित कर देगा। आज मेरी बात सही साबित होती दिख रही है।”

निशिकांत दुबे ने कहा कि मीडिया के ख़बरों के अनुसार या तो हेमंत सोरेन जी भाग गए दिल्ली से या तो बीमार हो गए या तो अपहरण हो गया। उन्होंने झारखंड के राज्यपाल CP राधाकृष्णन से माँग की कि सीएम के सुरक्षा अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड का नाक कट गया। हेमंत सोरेन को अब तक 10 बार समन भेजा जा चुका है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके साथ पूछताछ जारी होने की बात भी कही जा रही है।


क्यों हुआ ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम फरार ?

ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम फरार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों का सरगना ताहिर हुसैन अब पुलिस की ​गिरफ्त में है। चाँदबाग में हिंसा भड़काने और आईबी के अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को गुरुवार(मार्च 5) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब खबर आ रही है कि दंगों में उसके भाई शाह आलम का भी हाथ था। हालाँकि अब तक उस पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। न ही उससे पूछताछ हुई है। इस बीच मौके का फायदा उठा वह फरार हो चुका है।
क्या हिन्दू विरोधी बताएंगे ताहिर का भाई शाह आलम क्यों फरार हुआ और कहाँ है? यदि समय रहते पुलिस हरकत में नहीं आयी होती, ये दंगाई पता नहीं क्या से क्या कर बैठते? ताहिर के घर से मिले सबूत साबित कर रहे हैं कि हिन्दू विरोधी लॉबी की हिन्दुओं के विरुद्ध कितनी गहरी खुनी साज़िश रची गयी थी। लेकिन लिबरल मीडिया हिन्दुओं की हत्याओं और हुए नुकसान को दिखाने की बजाए मुस्लिमों का ही नुकसान दिखा, उन्हें निर्दोष सिद्ध करने में दिन-रात एक किए हुए हैं। क्या किसी के मकान में मकान मालिक की अनुमति के बिना इतना जमावड़ा, ईंट, पत्थर, एसिड और पेट्रोल बम कहाँ से आया? किसने यह सब जमा किए? क्या कर्तव्य होता है जन प्रतिनिधि का? क्या हिन्दुओं ने इसी काम के लिए उसे वोट दिया था? 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शाह आलम का नाम गवाहों ने अपने बयान में लिया है। इसके मद्देनजर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उससे पूछताछ करनी चाहती है। जब उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि वह फरार है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था और हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है।
हालाँकि, शाह आलम के खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं है, लेकिन क्राइम ब्रांच को पूछताछ में लोगों ने उसका नाम बताया है। इसलिए उसकी तलाश की जा रही है। चश्मदीदों का कहना है कि अंकित शर्मा को ताहिर के गुंडे उसकी इमारत में ले घसीटकर ले गए थे। बाद में उनका शव नाले से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था। चश्मदीदों ने बताया है कि इस इमारत में शाह आलम भी मौजूद था। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ताहिर हुसैन भी फरार हो गया था। बाद में उसने दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका डाली। गुरुवार को अदालत में सरेंडर करने से पहले ही पुलिस ने दबोच लिया।
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उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के कई विडियो सोशल मीडिया में छाए हुए हैं। बुधवार (मार्च 4, 2020) को एक नया वि.....
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर की खोज में बुधवार (मार्च 4, 2020) को यूपी के अमरोहा में भी छापेमारी की थी। ताहिर मूल रूप से यहीं का रहने वाला है। पुलिस के पहुँचने पर रिश्तेदार के घरों पर ताला लगा हुआ मिला। इसके बाद पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की। लोगों ने बताया कि मकान में चार दिन से ताला लगा हुआ है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ताहिर के पुश्तैनी गाँव पोरारा पहुँची। लेकिन वहाँ भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। बाद में पुलिस ने दबिश देकर ताहिर के ससुराल में भी छापेमारी की। मगर वहाँ से भी पुलिस को अभी कुछ हाथ नहीं लगा। अंकित शर्मा की हत्या को बांग्लादेशी आतंकियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि ताहिर के आतंकी लिंक की अंकित शर्मा जॉंच कर रहे थे। इसलिए दंगों की आड़ में उन्हें जान बूझकर निशाना बनाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अंकित की हत्या की गई उस वक्त वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिले हैं।

कागज़ माँगे तो गाड़ी लेकर फ़रार हो गए सपा विधायक नाहिद हसन

Image result for सपा विधायक नाहिद हसनउत्तर प्रदेश के कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन को समर्थकों संग मिल एसडीएम को धमकी देना और गाड़ी के कागज़ात न दिखाना भारी पड़ता दिख रहा है। पुलिस ने उन्हें गाड़ी का कागज़ दिखाने के लिए पाँच दिनों की मोहलत दी थी, जिसकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है। उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी व सर्च वारंट जारी किया जा चुका है और पुलिस टीम उनके घर पर दबिश दे रही है। विधायक संदिग्ध गाड़ी के साथ फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस की 11 टीमें उनकी तलाश में लगी है।
सपा विधायक नाहिद हसन अगर फरार रहते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही उन पर इनाम भी घोषित किया जाएगा। कई थानों की पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवान उनके आवास पर कैम्प कर रहे हैं। उनके ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में 11 संगीन मामले दर्ज हैं। सुरक्षा बलों ने उनके घर को घेर कर तलाशी अभियान चलाया। शामली जिले के एसपी ने भी इसकी पुष्टि की है कि विधायक संदिग्ध गाड़ी लेकर समर्थकों समेत फरार हो गए हैं।
समाजवादी पार्टी विधायक नाहिद हसन पर धोखाधड़ी, जानलेवा हमला करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और अभद्रता करने समेत कई मामले दर्ज हैं। ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी होने के कारण उनकी गिरफ़्तारी तय मानी जा रही है। उनके संभावित ठिकानों पर पुलिस की दबिश जारी है और लखनऊ में उच्चाधिकारियों को भी पल-पल की अपडेट दी जा रही है। लखनऊ के साथ-साथ दिल्ली में भी पुलिस की टीमें भेजी गई हैं। जिले के डीएम और एसपी ने भी दिन भर कैराना में ही डेरा डाला। कैराना में सुरक्षा के लिए चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं।
कैराना में एक दर्जन से भी अधिक चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं। शहर के बाहर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। डीएम अखिलेश सिंह और एसपी अजय कुमार ने पुलिस बल समेत इलाक़े में पैदल मार्च किया ताकि जनता में भय का माहौल न बने। उन्होंने सीसीटीवी के माध्यम से घटनाक्रम पर नज़र रखा। विधायक का आवास आलदरम्यान में है, जिसे एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
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ट्रैफिक पुलिस ने काटा भारी चालान तो ऐसे कर सकते हैं कम, खुद पुलिसवाले ने दी Tips. एक पुलिसकर्मी का वीडियो काफी वायरल हो ...

पूरे तलाशी अभियान की वीडियोग्राफ़ी भी कराई गई। पुलिस बलों ने कैमरा और मोबाइल से पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की। विधायक पक्ष ने प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए कैराना में 1 लाख लोगों के साथ धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति माँगी थी लेकिन उनकी एक न चली। एसपी ने बताया कि सारी कार्रवाई कोर्ट से ऑर्डर लेकर और स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर की जा रही है।