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कांग्रेस Vs कांग्रेस : कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों की लड़ाई का सोनिया गांधी बंद आंख से देख रही तमाशा

गाँधी परिवार को संरक्षण देने वाले नेताओं को कांग्रेस की कितनी चिंता होती है, उस ओर किसी का ध्यान नहीं। दो मुख्यमंत्रियों की लड़ाई में पार्टी और जनता को कितना नुकसान हो रहा है, किसी नेता को परवाह नहीं। 
कांग्रेस की ‘स्वयंभू’ अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने ही दो मुख्यमंत्रियों की लड़ाई का तमाशा बंद आंख से देखने में लगी हैं। गहलोत की चिट्ठी मिल जाने के बावजूद सोनिया गांधी ने न तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अनावश्यक रोड़े अटकाने के लिए डांट पिलाई है और न ही कोई बीच-बचाव का रास्ता सुझाया है। हालात यह हैं कि छत्तीसगढ़ में राजस्थान की पुरानी कोल माइंस में कोयला बिल्कुल खत्म हो गया है और नई माइंस में खनन की अनुमति छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दे नहीं रहे हैं। दो कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के झगड़े में कोयले की आपूर्ति न होने से राजस्थान में अब कभी भी बिजली संकट छा सकता है।

राजस्थान में कोयला संकट की स्थिति में छत्तीसगढ़ ने मदद से किया इनकार
कोयला खनन से जुड़े मुद्दे पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकारें आमने-सामने हैं. कोयले की एक खान को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच ठन गई है। राजस्थान में कोयला संकट की स्थिति है लेकिन छत्तीसगढ़ ने मदद करने से इनकार कर दिया है. राजस्थान को छत्तीसगढ़ में अलॉट पारसा कोल ब्लॉक खान में माइनिंग के लिए छत्तीसगढ़ सरकार मंजूरी नहीं दे रही है, जबकि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इसकी क्लीयरेंस पहले ही दे दी है।

बीजेपी सरकार के दो मंत्रालयों ने क्लीयरेंस दी, कांग्रेस सरकार ने अटकाई
बीते महीने कोयला संकट के दौर में मुख्यमंत्री गहलोत ने हाईलेवल की बातचीत कर 2 नवंबर को कोल मिनिस्ट्री से इस खनन के लिए क्लीयरेंस जारी करवाई थी। इससे पहले वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से 21 अक्टूबर को ही क्लीयरेंस ले ली गई थी। बीजेपी सरकार के दो केंद्रीय मंत्रालयों से राजस्थान 15 दिनों में दो महत्वपूर्ण क्लीयरेंस लेने में सफल रहा। अब अपनी ही पार्टी की कांग्रेस सरकार ने क्लीयरेंस फाइल अटका दी है और इस पर कोई स्पष्ट बातचीत भी नहीं की जा रही है।

सीएम गहलोत ने पहले बघेल को फिर सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर जरूरी स्वीकृतियां जारी करने का आग्रह भी किया था। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने टका सा जवाब दे दिया और अपने सियासी फायदे को देखते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की थी, ताकि उनके कहने पर भूपेश बघेल खनन की अनुमति दे दें। लेकिन अब तक सोनिया गांधी ने इस पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की है।

राजस्थान महंगी बिजली खरीद का भार उपभोक्ताओं पर ही डालेगा
इस बीच पुरानी माइंस में कोयला खत्म होने से राजस्थान में बहुत जल्द बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है। अन्यथा राजस्थान को दूसरे राज्यों से ज्यादा महंगी बिजली खरीदनी होगी। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ेगा। बता दें कि कोयला की कमी से बिजली संकट झेल रहे राजस्थान के लिए यह माइन लाइफ लाइन की तरह है। इस कोल ब्लॉक से रोजाना 12 हजार टन यानी करीब 3 रैक कोयला मिलेगा। मोटे अनुमान के अनुसार यहां से 5 मिलियन टन कोयला हर साल निकाला जा सकेगा। इस नए ब्लॉक से सालाना 1 हजार रैक से ज्यादा कोयला मिलने की संभावना है। अगले 30 साल के लिए 150 मिलियन टन कोयले का भंडार है। इससे राजस्थान केंद्र की कोल इंडिया और सब्सिडियरी कंपनियों पर कम निर्भर रहेगा।

जयपुर में 12 दिसंबर को ही कांग्रेस की महंगाई के खिलाफ हुई रैली में छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल और राजस्थान सीएम अशोक गहलोत के बीच मुलाकात हुई थी। इस रैली में सोनिया-गांधी और राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। आपसी बातचीत में राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने कोल माइंस की मंजूरी का मुद्दा उठाया भी था। लेकिन तब बात नहीं बन पाई। दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद मामला फंसा हुआ है। दरअसल, बघेल स्थानीय सियासत के चलते नहीं दे रहे हैं मंजूरी। पारसा के सेकेंड ब्लॉक और एक दूसरे ब्लॉक में राजस्थान सरकार को माइंस अलॉट है। कोल माइंस का इलाका वन विभाग के अंडर आता है और वहां ग्रामीण-आदिवासी खनन का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय हल्के-फुल्के विरोध के कारण छत्तीसगढ़ सीएम बघेल कोल माइंस का मंजूरी देने में देरी कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : ‘थोड़ी-थोड़ी पी कर सो जाया करो’: कांग्रेस मंत्री अनिला भेड़िया की लोगों को सलाह

छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर जहाँ शराबबंदी की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर भूपेश बघेल सरकार की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया लोगों को एक-एक पेग लगाने सलाह दे रही हैं। दरअसल, सिंघोला गाँव में गुरुवार (14 अक्टूबर, 2021) को लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री अनिला ने महिलाओं से कहा, ”तनाव से दूर रहने के लिए सोने जाने से पहले एक पेग पी लिया करो।” उन्होंने कहा कि महिलाएँ घर और परिवार की देखभाल करती हैं और वह मानसिक रूप से तनाव महसूस करती हैं। ऐसे में थोड़ी-थोड़ी पी लिया करो और सो जाया करो। मंत्री के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार की मंत्री द्वारा दिए गए विवादित बयान को लेकर उनकी जमकर आलोचना हो रही है। एक ट्विटर यूजर ने लाफिंग इमोजी के साथ भेड़िया पर निशाने साधते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार में महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया महिलाओं को शराब पीने की सलाह दे रही है।” बता दें कि भाजपा लगातार ये आरोप लगाती रही है कि चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने राज्य में शराबबंदी की कसम खाई थी।

वहीं, बीजेपी जशपुर ने भी उनके बयान की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया, “सत्ता के नशे में चूर छत्तीसगढ़ की सरकार में मंत्री ​अनिला भेड़िया प्रदेश की महिलाओं को शराब पीने की नसीहत दे रही हैं, जिनके ऊपर महिलाओं एवं बच्चों की उत्थान की जिम्मेदारी है। शर्मनाक।”

हालाँकि, इस पर विवाद होने के बाद मंत्री ने कहा कि उनके बयान को घुमाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि उनके बयान के साथ किसी ने राजनीतिक छेड़छाड़ की है। मेरे बयान का मतलब था कि शराब के आदि पुरुषों को कम पीनी चाहिए। शराब एक बुरी लत है और इससे छुटकारा पाना चाहिए। अगर पुरुष घर में शराब पीता है तो उस कारण पत्नी और बच्चों पर मानसिक दबाव रहता है।

छत्तीसगढ़ : भूपेश बघेल के पिता को पुलिस ने किया गिरफ्तार, हिरासत में राजसी सत्कार

           मुख्यमंत्री के पिता का पुलिस हिरासत में स्वागत, इसे कहते हैं गिरफ़्तारी  
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल को ब्राह्मणों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। रायपुर पुलिस ने मंगलवार को उन्हें 
आगरा से गिरफ्तार किया। उन्हें दोपहर को रायपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जनक कुमार हिडको की कोर्ट पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 15 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इसके पहले ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। नंद कुमार बघेल ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, “वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा। हम ब्राह्मणों को गंगा से वोल्गा (रूस की एक नदी) भेजेंगे, क्योंकि वे परदेशी हैं। जिस तरह से अंग्रेज लोग आए और चले गए। उसी तरह से ये ब्राह्मण लोग या तो सुधर जाएँ या गंगा से वोल्गा जाने के लिए तैयार हों।”

सीएम बघेल के पिता नंद कुमार बघेल ने जमानत लेने और वकील रखने से मना कर दिया है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में चल रहे सत्ता संघर्ष के बीत सहानुभूति पाने के लिए बघेल ऐसा कर रहे हैं।

लेकिन पुलिस हिरासत में सीएम के पिता को मिल रहे राजसी सत्कार पर यूजर्स सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। आप भी देखिए…

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल ने उत्तर प्रदेश में विवादस्पद बयान देते हुए ब्राह्मणों के “बहिष्कार” का आह्वान किया था और उन्हें विदेशी बताते हुए लोगों से उन्हें अपने गांव में नहीं जाने देने का आग्रह किया था।

पिता द्वारा ब्राह्मणों के खिलाफ विवादस्पद बयान दिए जानें के बाद सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि ‘एक पुत्र के रूप में मैं अपने पिता जी का सम्मान करता हूँ लेकिन एक मुख्यमंत्री के रूप में उनकी किसी भी ऐसी गलती को अनदेखा नहीं किया जा सकता जो सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाली हो। हमारी सरकार में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है फिर चाहे वो मुख्यमंत्री के पिता ही क्यों न हों।

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी उमड़ा दामाद प्रेम, 125 करोड़ रुपये में दिवालिया मेडिकल कॉलेज खरीदने का किया ऐलान

सारे नियम-कायदे ताक पर रख दामाद सेवा कांग्रेस के DNA है। सोनिया गाँधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा का झगड़ा निपटा भी नहीं कि कांग्रेस पार्टी के एक और दामाद इन दिनों खासे चर्चा हैं। ये हैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दामाम। भूपेश बघेल ने अपने दामाम प्रेम में सारे नियम कानूनों को दरकिनार कर उसके दिवालिया हो चुके विवादित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का फैसला लिया है। विपक्ष ही नहीं सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भी इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन भूपेश बघेल को कोई फर्क नहीं है और उन्होंने कानून बना कर इस मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की तैयारी शुरू कर दी है।

दुर्ग में स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का मालिकाना हक जिस परिवार के पास है, उसी परिवार में भूपेश बघेल की बेटी की शादी हुई है। इस कॉलेज का स्वामित्व चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल हॉस्पिटल (CCMH) के पास है, जो एक ग़ैर-सूचीबद्ध कंपनी है। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन मार्च 1997 में हुआ था। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन मार्च 1997 में हुआ था। दुर्ग से 5 बार सांसद रहे कॉन्ग्रेस नेता चंदूलाल चंद्राकर का निधन 1995 में 74 वर्ष की अवस्था में हुआ था। वो केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन हेतु आंदोलन चलाने के लिए भी उन्हें जाना जाता है। CCMH के निदेशक मंगल प्रसाद चंद्राकर और चंद्राकर समुदाय की मांग के बाद इस अस्पताल को विकसित किया गया था। मंगल प्रसाद चंद्राकर इस अस्पताल के 5% शेयर्स के मालिक हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ड्राफ्ट किए गए बिल में इस अस्पातल के अधिग्रहण की योजना है, क्योंकि ये वित्तीय रूप से कमजोर हो चुका है। बिल में बताया गया है कि जनहित में इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार कॉलेज की चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण करेगी और बदले में रुपये CCMH को देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ड्राफ्ट को तैयार कर रहे अधिकारी भी असहज हैं, क्योंकि सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या की शादी मंगल प्रसाद चंद्राकर के भतीजे क्षितिज चंद्राकर से हुई है। भूपेश बघेल के दामाद क्षितिज चंद्राकर ‘ऑल इंडिया प्रोफेसनल कॉन्ग्रेस’ की छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष भी हैं।

भूपेश बघेल ने इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करने की घोषणा फरवरी में ही सोशल मीडिया पर कर दी थी। CCMH पर फ़िलहाल 125 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा अनसिक्योर्ड है। अप्रैल 2018 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने इस कॉलेज को धोखाधड़ी में लिप्त पाया था। 2017 के बाद से इस कॉलेज के पास कोई मान्यता ही नहीं है। अधिकारीगण कह रहे हैं कि बिल के विधानसभा में आने से पहले वो कुछ नहीं कह सकते।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल अपने दामाद का निजी महाविद्यालय बचाने के लिए उसे सरकारी कोष से खरीदने की कोशिश में हैं। श्री सिंधिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश की राशि का उपयोग अपने दामाद के लिए किया जा रहा है, वो भी एक ऐसा मेडिकल कॉलेज जिस पर धोखाधड़ी के आरोप MCI द्वारा लगाए गए थे।

मुख्यमंत्री बघेल ने इसे छात्रों का भविष्य बचाने वाला फैसला करार देते हुए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने दावा किया कि इससे प्रदेश में नया मेडिकल कॉलेज बनाने का खर्च बचेगा और हर साल 150 नए डॉक्टर मिलेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के पक्षधर लोग हैं और रहेंगे, साथ ही ये भी दावा किया कि हम ‘उनकी’ तरह जनता की संपत्ति बेच नहीं रहे हैं।

इधर सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग सीएम भूपेश बघेल के दामाद प्रेम और जनता के पैसे की बर्बादी को लेकर लानत-मलानत कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ : भगवान राम के ननिहाल में बनेगा माता कौशल्या का भव्य मंदिर

चंदखुरी, छत्तीसगढ़, राम, मंदिर
छत्तीसगढ़ के चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर
को किया जाएगा विकसित (फोटो साभार: CG Dekho Blog )
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक कहावत है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?, इस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घंटी क्या बाँधी, इतने वर्षों से जो कांग्रेस अयोध्या में राममंदिर का विरोध करती आ रही थी, राम के अस्तित्व को नकार रही थी, काल्पनिक तक कहा दिया था, उसी कांग्रेस की राज्य सरकार अपने राज्य में रामायण से जुड़े स्थलों को विकसित करने में लग गयी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने माता कौशल्या के मंदिर एवं अन्य स्थानों के लिए 134 करोड़ खर्च करने जा रही है। अब जनता, चाहे हिन्दू है या मुसलमान, अपनी आँखों खोलकर सच्चाई को जानने का प्रयत्न करना चाहिए कि कांग्रेस किस तरह मुसलमानों को मोहरा बनाकर अयोध्या में राममंदिर की सच्चाई को जनता से छुपाकर अपनी कुर्सी की खातिर दोनों कौमों को लड़वा रही थी? अरविन्द केजरीवाल भी अयोध्या जाने को बेताब नज़र आ रहे हैं। 
इतना ही नहीं, हर कांग्रेसी को 5 अगस्त को अपने-अपने घरों पर हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए कहा जा रहा है। 
भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को भूमिपूजन के साथ ही हो जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में कभी राम के अस्तित्व को नकारने वाली कांग्रेस भी अब खुद को रामभक्त दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। जहाँ एक तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदिर निर्माण का स्वागत कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू है।
माता कौशल्या की शरण में सीएम भूपेश ...
माता कौशल्या की शरण में कांग्रेस
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 
कांग्रेस सरकार ने दिए रामायण से जुड़े 9 स्थलों के विकास के लिए ₹134 करोड़
छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में ही राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या का मंदिर है, जो राम की माता भी हैं। इस हिसाब से इसे राम का ननिहाल भी माना जाता है। अगस्त के तीसरे हफ्ते के बाद से ही चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भुवेश बघेल ने जुलाई 29 को अपनी पत्नी के साथ जाकर वहाँ के तैयारियों का जायजा लिया।
प्राचीन मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसका पुनर्निर्माण करें और पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए हो रही तैयारियों का जायजा खुद मुख्यमंत्री ने लिया। इसके लिए भूमि पूजन पहले ही किया जा चुका है और अब जब अयोध्या में भूमि पूजन के लिए सरगर्मियाँ तेज हैं, ऐसे समय में चंदखुरी प्रोजेक्ट को गतिशील बनाने का निर्णय लिया गया है। भगवान राम ने वनवास के दौरान भी इस इलाक़े में अच्छा-खासा समय व्यतीत किया था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि ‘राम वन गमन मार्ग’ योजना के अंतर्गत पूरे राज्य में भगवान राम की वनवास यात्रा के मार्गों को चिह्नित कर उन्हें एक बड़े पर्यटन स्थल नेटवर्क में तब्दील किया जाएगा। इसी क्रम में 15 करोड़ रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ स्थित चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर व आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तालाब में पुल और गोलाकार मार्ग बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा:
Mata Kaushalya Temple in Chandrakhuri,Raipur (कौशिल्या ...
प्रभु श्री राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गाँव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। योजना के मुताबिक, चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। बीते 22 दिसंबर को चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि-पूजन किया गया था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चंदखुरी में शौचालयों और धर्मशालाओं की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था की जाए। वहाँ ग्रामीणों ने एक राष्ट्रीय बैंक का ब्रांच खोलने की भी माँग की है। साथ ही मंदिर के पास ही एक बाईपास रोड के निर्माण की भी अनुमति दे दी गई है। बता दें कि रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल के रूप में जाना जाता था और ये दण्डकारण्य का एक भाग था।


त्रेता युग में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में 4 महीने बीता कर वहाँ से लंका के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने हरचौका सीतामढ़ी के माध्यम से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया थे। वो गवाई नदी में कोरिया जिले फिर उन्होंने सुकमा स्थित रामराम पहुँचने से पहले 75 जगहों पर डेरा डाला था। इनमें से 9 जगहों को ‘राम वेब गमन पर्यटन परिपथ’ के रूप में चिह्नित कर पहले फेज में पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
इनमें हरचौकी सीतामढ़ी (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चंपा), तुरतुरिया (बलोदा बाजार), चंदखुरी (रायपुर) राजिम (गरीबन्द), सिहावा-सप्तर्षि आश्रम (धमतारी), जगदलपुर (बस्तर) और रामराम (सुकमा) शामिल है। इन 9 जगहों को विकसित करने के लिए 134.45 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट कॉस्ट रखा गया है। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 5 करोड़ रुपए पिछले बजट में जारी किया गया था।
जहाँ तक चंदखुरी की बात है, वहाँ मंदिर के पास स्थित झील के चारों तरफ परिक्रमा के लिए रास्ता भी तैयार किया जाएगा। इस पर एक हाईटेक ब्रिज भी बनेगा। झील के सामने पार्किंग स्थल बनेगा और लाइट-साउंड शो की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही एक फ़ूड जॉइंट भी बनेगा। मंदिर परिसर में व उसके आसपास विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे भी लगाए जाएँगे। भूपेश बघेल पहले भी इस स्थल का दौरा करते रहे हैं।
5 अगस्त को कांग्रेसी अपने-अपने घरों पर हनुमान चालीसा का पाठ करें 
चंदखुरी में भगवान राम के प्रति लोगों में आस्था का आलम ये है कि हर वर्ष दीपावली के मौके पर लोग पहले कौशल्या माता के मंदिर में दीपक जलाते हैं, उसके बाद ही अपने-अपने घरों में रोशनी करते हैं। ऐसे में सीएम भूपेश बघेल द्वारा वहाँ मंदिर बनवा कर और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को अयोध्या में मोदी सरकार द्वारा राम मंदिर के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रत्युत्तर के रूप में भी देखा जा रहा है।
इधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इस दिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। कहा था कि मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है। 

छत्तीसगढ़ : शराब बिक्री से मिले ₹2856 करोड़ कौन गटक गया?

छत्तीसगढ़ शराब
कांग्रेस सरकार हो और कोई घोटाला न हो, हो ही नहीं सकता। परन्तु जनता भी अब इन घोटालों पर होते शोर की परवाह नहीं करना चाहती। क्योकि महाराष्ट्र में जिस तरह भाजपा और शिवसेना ने भ्रष्ट अजित पवार से हाथ मिलाकर घोटालों पर पर्दा डालना शुरू कर दिया है, अब जनता भी भाजपा से मुंह मोड़ने का मन बना रही है। घोटालों का शोर राजनीती से ज्यादा कुछ नहीं। कल सत्ता परिवर्तन होने पर जब आबकारी मंत्री सत्तारूढ़ दल में शामिल हो जाएगा, कोई घोटाले की जाँच नहीं होगी, क्योकि वही आबकारी मंत्री गंगाजल की भांति पवित्र हो जाएगा। 
खैर मुद्दे पर आते हैं:
छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री से मिला राजस्व सरकारी खजाने के बदले कहॉं गया? ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब राज्य की कांग्रेस सरकार के मंत्री तक को ठीक से नहीं पता। राज्य सरकार ने इस वर्ष 31 अक्टूबर तक 11,000 करोड़ की शराब बेची है। नियमानुसार, ये पूरी की पूरी रक़म सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए थी। लेकिन, इसमें से मात्र 8271 करोड़ 42 लाख रुपए ही सरकारी खजाने में पहुँचे। शेष 2855 करोड़ 70 लाख रुपए कहाँ गए, इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ये धनराशि कोषालय में पहुँची ही नहीं और ख़र्च भी कर दी गई। मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस मामले ने तूल पकड़ा।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक धर्मजीत सिंह ने इस बाबत विधानसभा में सवाल पूछा। सरकार ने बताया कि ये रक़म शराब की नई खेप ख़रीदने, उनके परिवहन, ढुलाई और कर्मचारियों को वेतन देने में ख़र्च हो गई, इसीलिए सरकारी खजाने में इसका रिकॉर्ड नहीं है। 
चर्चा यह भी हो गयी है कि "क्या शराब की नई खेप खरीदने, परिवहन, और कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन का कोई हिसाब नहीं रखा जाता? आखिर किस मद में इन खर्चों का अंकित किया जाता है?" 
विपक्षी विधायकों ने इसे क़ानून के ख़िलाफ़ बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। नियमानुसार, इस रक़म को पहले कोषालय में जमा किया जाना चाहिए था और फिर ख़र्च किया जाना था। विपक्षी नेताओं ने कहा कि बिना सरकारी खजाने में रुपए डाले इसे बाहर ही बाहर ख़र्च कर देना मनमानी है।
आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने दावा किया कि ये कोई गड़बड़ी नहीं है, जबकि विधायक धर्मजीत जाँच कराने पर अड़े रहे। मंत्री ने कहा कि जाँच की कोई ज़रूरत ही नहीं है। आबकारी मंत्री ने बताया कि शराब दुकानों में लूटपाट और गबन की वजह से इस वर्ष सरकार को 13 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार अभी तक 4 करोड़ रुपए ही रिकवर कर सकी है। वहीं भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा शराब पी जा रही है, सरकार को ‘उड़ता छत्तीसगढ़’ फ़िल्म बनानी चाहिए। बता दें कि शाहिद कपूर अभिनीत ‘उड़ता पंजाब’ में पंजाब की ड्रग्स समस्या दिखाई गई थी। चंद्राकर ने पूरी छत्तीसगढ़ कैबिनेट को ही अवैध करार दिया।

धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और कर्जमाफी के फ्लॉप होने जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही विपक्ष के विरोध का सामना कर रही भूपेश बघेल सरकार अब शराब से हुई कमाई में गड़बड़ी के सामने आने से चारों ओर से घिर गई है। यहाँ तक कि बसपा विधायकों ने भी सदन में कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य में जनप्रतिनिधियों का कोई सम्मान नहीं रह गया है।

Journalist Vinod Verma linked to ‘sex CD’ case named Chhattisgarh CM’s advisor

Vinod Verma Verma, a close confident of Baghel, was arrested from Ghaziabad in October 2017 by Raipur police after a case of blackmailing and extortion was registered at the Pandri Police Station in Raipur on a complaint by BJP leader Prakash Bajaj. (Photo: File | PTI)
Vinod Verma Verma, a close confident of Baghel,
was arrested from Ghaziabad in October 2017
by Raipur police after a case of blackmailing
and extortion was registered at the Pandri
Police Station in Raipur on a complaint
by BJP leader Prakash Bajaj. (Photo: File | PTI)
Senior journalist Vinod Verma, whose name had cropped in the "sex CD" episode last year, was appointed political advisor to Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel on December 20.
The General Administration Department (GAD) appointed four advisors to the chief minister, an official statement said.
While Verma was appointed political advisor to Baghel, another journalist Ruchir Garg, who quit as an editor of a Hindi daily and joined the Congress ahead of the just concluded assembly polls, was named media advisor to the Congress chief minister.
Besides, Pradip Sharma was appointed planning, policy, agriculture and rural development advisor and Rajesh Tiwari parliamentary advisor to Baghel, the statement said.
Verma, a close confident of Baghel, was arrested from Ghaziabad in October 2017 by the Raipur police after a case of blackmailing and extortion was registered at the Pandri Police Station in Raipur on a complaint by Bharatiya Janata Party (BJP) leader Prakash Bajaj.
Bajaj had alleged that he was "being harassed over phone by an unidentified caller", who told him he had a CD of his "aaka" (master).
The police had claimed to have recovered 500 CDs and some pen drives from Verma’s residence during a raid.
After Verma's arrest, a "sex CD", purportedly featuring the then PWD Minister Rajesh Munat, had surfaced in Raipur.
Munat had termed the CD as "fake" and alleged it was made and circulated to tarnish his image. He had later filed a complaint against Baghel, the then state Congress president.
On recommendation of the then BJP government, the Central Bureau of Investigation (CBI) took over the investigation of two cases related to the circulation of the CD.
Verma was released on bail in December last year after the police failed to file a charge sheet against him in the mandatory 60 days.
In September this year, the CBI had filed the charge sheet in a special court in Raipur in the case, naming Baghel, Verma and three others as accused.
During the investigation, one more accused, Rinku Khanuja, had allegedly committed suicide in June this year. All the accused were booked under IPC sections 469 (forgery for purpose of harming reputation), 471 (using as genuine a forged document), 120B (criminal conspiracy) and 67A of the IT Act (whoever publishes or transmits or causes to be published or transmitted in the electronic form any material which contains sexually explicit act), according to the charge sheet.
Verma and Baghel had denied any involvement in the preparation or circulation of the CD.
Baghel had initially refused to apply for bail and stayed in judicial custody for a couple of days. The Congress leader, who had said he was falsely implicated in the case, later obtained bail from the court.