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ईरान में प्रदर्शनों के समर्थन में X ने बदला ईरानी झंडे का इमोजी, लगाया 1979 से पहले वाला ‘शेर-सूरज’ का झंडा


ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने एक प्रतीकात्मक डिजिटल कदम उठाया है। प्लेटफॉर्म ने ईरान के आधिकारिक झंडे के इमोजी को बदलकर उसमें 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला ऐतिहासिक ‘शेर और सूरज’ का झंडा दिखाना शुरू कर दिया है।

अब जब भी कोई यूजर X पर ईरानी झंडे का इमोजी इस्तेमाल करता है, तो वहाँ मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा नहीं बल्कि शेर और सूरज वाला पुराना झंडा दिखाई देता है।
इस बदलाव को ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान इस समय पिछले कई वर्षों के सबसे बड़े जन आंदोलन से गुजर रहा है। दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुके हैं। इसकी वजह देश की खराब अर्थव्यवस्था, रिकॉर्ड महँगाई, मुद्रा अवमूल्यन और बेरोजगारी है। अब ये आंदोलन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को हटाने की माँग तक पहुँच गया है।

Finally!
The true flag of Iran. 
🇮🇷🇮🇷🇮🇷🇮🇷🇮🇷🇮🇷
Thanks @X pic.twitter.com/ljUerbvABy

— Ehsan Ebrahimzadeh (@Ehsan_Ebr) January 9, 2026
प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हड़तालें हुई हैं, सुरक्षा बलों से झड़पें हुई हैं और सरकारी प्रतीकों को जलाने जैसे विरोध के तरीके अपनाए गए हैं। कई जगह शाह की वापसी या निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे भी लगे हैं। प्रदर्शनकारी बड़े पैमाने पर शेर और सूरज वाले पुराने झंडे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
X की प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने इस बदलाव की पुष्टि की। एक यूज़र ने उनसे ईरान के इमोजी को अपडेट करने की मांग की थी, जिस पर उन्होंने ‘कुछ घंटे दीजिए’ कहकर जवाब दिया। बाद में उन्होंने GitHub पर X के इमोजी रिपॉजिटरी का लिंक शेयर किया, जहाँ ईरानी झंडे की इमेज बदली हुई दिखाई दी। इसके बाद यह बदलाव वेब प्लेटफॉर्म पर दिखने लगा।
इस बदलाव का असर पुराने सभी पोस्ट्स पर भी पड़ा है। यहाँ तक कि ईरानी सरकारी अकाउंट्स, सरकारी मीडिया और खुद खामेनेई के प्रोफाइल पर भी अब वही इमोजी दिख रहा है। इससे बचने के लिए कई सरकारी अकाउंट्स ने अपने प्रोफाइल से झंडे का इमोजी हटा दिया है। हालाँकि, मोबाइल फोन पर अभी कई जगह पुराना झंडा दिख रहा है क्योंकि वहाँ ऑपरेटिंग सिस्टम अपने इमोजी इस्तेमाल करता है।

इमोजी कैसे काम करते हैं और X ने ईरानी झंडे का इमोजी कैसे बदला

इमोजी दरअसल Unicode के जरिए तय किए गए मानक चिन्ह होते हैं, ताकि एक ही इमोजी अलग-अलग डिजिटल सिस्टम पर पहचाना जा सके। हालाँकि, इमोजी का दिखने का तरीका हर प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग हो सकता है। इसकी वजह है अलग ऑपरेटिंग सिस्टम, फॉन्ट, सॉफ्टवेयर सपोर्ट और डिजाइन स्टाइल।
जैसे आईओएस (iOS) और मैकओएस (macOS) में एप्पल का अपना इमोजी फॉन्ट ‘एप्पल क्लर इमोजी’ इस्तेमाल होता है, जो ज्यादा रंगीन और डिटेल्ड होता है। एंड्रॉयड में गूगल का ‘नोटो क्लर इमोजी’ जबकि विंडो में ‘सेगो UI इमोजी’ का इस्तेमाल किया जाता है।
X इमोजी दिखाने के लिए अपनी ओपन-सोर्स लाइब्रेरी ‘Twemoji’ का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए Unicode इमोजी को SVG या इमेज फाइल में बदला जाता है, जिससे हर प्लेटफॉर्म पर एक-जैसा लुक मिल सके। जरूरत पड़ने परX डिवाइस के अपने इमोजी फॉन्ट को भी ओवरराइड कर देता है।
वेब वर्जन पर Twemoji सीधे टेक्स्ट में मौजूद इमोजी को पहचानकर X के सर्वर से कस्टम इमेज दिखाता है। इससे Unicode स्टैंडर्ड बदले बिना इमोजी का डिजाइन बदला जा सकता है। ईरानी झंडे का इमोजी बदलने के लिए X ने अपने Twemoji GitHub रिपॉजिटरी में डिजाइन अपडेट किया।
इस बदलाव में इस्लामिक रिपब्लिक के मौजूदा प्रतीक की जगह 1979 से पहले वाला ‘शेर और सूरज’ का ऐतिहासिक चिन्ह जोड़ा गया। यह अपडेट पहले वेब प्लेटफॉर्म पर लागू हुआ और फिर धीरे-धीरे मोबाइल डिवाइसों पर दिखने लगा।

‘भारत रत्न’ का हो रहा अपमान : झारखंड बनाने वाले का नाम मिटाने पर तुली हेमंत सरकार, ‘अटल क्लीनिक’ का नाम बदलकर रखा ‘मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक’

 

अटल क्लिनिक का नाम बदल कर मदर टेरेसा के नाम पर रख रही है झारखंड सरकार (साभार-@jharkhand cmo, abp news, HT)
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने अटल मोहल्ला क्लिनिक का नाम बदल दिया है। राज्य सरकार ने इसका नाम मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक कर दिया है जिसके बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है।

बीजेपी ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान बताया है। पार्टी का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड की आत्मा का अपमान किया है। जनता ऐसे फैसलों के लिए कभी माफ नहीं करेगी। ये तुच्छ राजनीति का परिचायक है।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम को हटाकर मदर टेरेसा के नाम पर रखने से बिलकुल साफ हो गया है कि संविधान और लोकतंत्र के रक्षा का शोर मचाने वालों को भारत से नहीं देश विरोधियों से प्रेम है। मदर टेरेसा भक्त बताए कि टेरेसा के आश्रमों में रहने वाले बच्चे कहाँ है? क्या वह अपने वास्तविक धर्म/मजहब में ही है या ईसाई बन गए हैं? जनता को किसी भेदभाव के इस प्रश्न का उत्तर मांगना चाहिए।    

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा है कि झारखंड को जिस व्यक्ति ने राज्य के रूप में नई पहचान दी। वे हैं अटल बिहारी वाजपेयी। आज उनका नाम मिटाया जा रहा है।

उनके नाम पर बने क्लिनिक का नाम मदर टेरेसा के नाम पर रखा जा रहा है। ये सरासर गलत है। झारखंड सरकार से उन्होंने सवाल किया है कि आखिर राष्ट्रीय शख्सियत से सरकार को इतनी नफरत क्यों है?

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाह ने मदर टेरेसा की संस्था मिशनरी ऑफ चैरिटी को लेकर कहा है कि ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस और अरूप चटर्जी ने अपने किताब में मदर टेरेसा की संस्था पर धर्मांतरण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

2021 में संस्था की एफसीआरए लाइसेंस को रिन्यू नहीं किया गया। इसकी वजह धर्मांतरण में संलिप्त होना और संविधान विरोधी होना बताया गया।

झारखंड बीजेपी के नेता अजय साह ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार राज्य में विकास की हर सकारात्मक पहल को विवादित बना रही है।

आयुष्मान योजना और अटल मोहल्ला क्लिनिक जनता की फ्री स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू किया गया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉन्ग्रेस की सरकार इसका नाम बदलकर राजनीति कर रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार से अलग झारखंड राज्य का निर्माण किया। उनका नाम हटाने का विरोध जनता करेगी। अगर राज्य सरकार कोई नई स्वास्थ्य सेवा शुरू करना चाहती है तो वह किसी के भी नाम पर रख सकती है, लेकिन पुरानी योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी है।

ये पहली बार नहीं है जब झारखंड की कॉन्ग्रेस समर्थित सोरेन सरकार ने महापुरुषों को अपमानित किया है। इनलोगों ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर दूसरे स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम पर रख दी। ये दोनों महापुरुषों का ही अपमान था।

रांची में शुक्रवार (24 जुलाई 2025) को हेमंत कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगी।

अवलोकन करें:-

मदर टेरेसा सेवा का मुखौटा भारत में ईसाईकरण का जन्मदाता
किसी मंद बुद्धि से कहो "देख देख कौआ तेरा कान ले गया" और वह मंद बुद्धि अपना कान देखने की बजाए कौए 
 

कैबिनेट ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। नाम बदलने के मुद्दे पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का कहना है कि मेडिकल सुविधाओं को आधुनिक बनाने के बाद नाम बदला जा रहा है।