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महागठबंधन के दोस्त घोटालों के सरदार, सोनिया-राहुल ने रची 2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने की साजिश, लालू ने चारे के साथ हफ्ता भी खाया; फिर भी आज़ाद घूम रहे हैं, क्यों? क्या इन बड़े घोटालेबाज़ों के लिए अलग कानून है? केजरीवाल ने औरतों को बनाया मूर्ख(देखिए वीडियो)

संविधान की शपथ लेने वाले ही जब संविधान की धज्जियाँ उड़ाएंगे फिर किस मुंह से संविधान बचाने की माला जपते हैं? ये जो संविधान की किताब लाल रंग की दिखाई जाती है ये संविधान या जादूटोने वाली "लाल किताब"? दूसरे, जनता भी ऐसे ही घोटालेबाज़ों को सिरमौर बनाये हुए हैं। जब जनता ही ऐसे घोटालेबाज़ों को सिरमौर बनाएगी तो घोटाले तो होंगे ही। आम आदमी पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल भी पीछे नहीं रहा। ईमानदारी का चोला ओढे घूमने वाला भी एक बड़ा घोटालेबाज़ निकला। दिल्ली की भूतपूर्व मुख्यमंत्री (अब स्व) शीला दीक्षित को भ्रष्टाचारों के आरोप में जेल भेजने सत्ता में आया, लेकिन दीक्षित को तो जेल भेज पाए खुद ही जेल घूम आये और जमानत पर घूम रहे हैं।    

   
महागठबंधन के पार्टनर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति के बजाए घोटालों के चलते ज्यादा सुर्खियों में आ रहे हैं। नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी अपनी करतूतों के चलते पहले ही घिर चुके हैं। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि नेशनल हेराल्ड मामले में 2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने की साजिश सोनिया-राहुल गांधी ने ही रची थी। ईडी ने यह बड़ा दावा बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान किया है। ईडी ने बताया कि कांग्रेस और राहुल-सोनिया की करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। इसके चलते इन्होंने साजिशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) का पूरा स्वामित्व मात्र 50 लाख देकर हासिल किया था। प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुमन दुबे भी अभियुक्त हैं। 

लोगों के जेहन में अभी बड़ा सवाल यही है कि सोनिया-राहुल नेशनल हेराल्ड केस में कैसे फंसे? दरअसल, नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) करती है। इसका मालिकाना हक यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के पास है। यही वह कंपनी है, जिसमें सोनिया-राहुल की हिस्सेदारी है। यही वजह है कि ईडी की जांच की आंच इन दोनों तक जा पहुंची है। दूसरी ओर महागठबंधन के एक अन्य पार्टनर राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव भी करोड़ों के घोटाले में एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले का जिन्न एक बार फिर निकल आया है।

आखिर इतने बड़े घोटाले करने के बाद भी घोटालेबाज़ नेता बने ऐश कर रहे हैं, क्या किसी आम नागरिक ने इन घोटालों का 1% प्रतिशत भी घोटाला किया होता क्या वह भी ऐसे खुला घूम ऐश कर रहा होता? क्या कोर्ट और सरकार इन घोटालेबाज़ों के आगे बौने हैं?    

 कंपनी पर कब्जे के लिए सोनिया-राहुल ने मात्र 50 लाख का भुगतान किया

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा दावा किया है। ईडी ने साफ-साफ कहा कि कांग्रेस और सोनिया-राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड की करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पना चाहते थे। ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में कहा, ‘नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों पर कंट्रोल करने के लिए यंग इंडियन लिमिटेड बनाने की साजिश रची गई थी, जिसमें कांग्रेस संसदीय पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी प्रमुख हिस्सेदार हैं। इसका लक्ष्य पार्टी नेतृत्व को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाना था।’ एएसजी ने कहा कि दो हजार करोड़ रुपये की पूरी कंपनी को अपने कब्जे में लेने के लिए सोनिया-राहुल ने मात्र 50 लाख का भुगतान किया था।
कांग्रेस के बड़े नेताओं के निर्देश पर फर्जी तरीके से भुगतान किए गए
एएसजी राजू ने दावा किया कि कांग्रेस के कई सीनियर नेता एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को किए गए ‘फर्जी लेनदेन’ में शामिल थे। ईडी के मुताबिक, कांग्रेस के बड़े नेताओं के निर्देश पर कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से किराए का भुगतान किया था। इन लेन-देन के साथ फर्जी किराया रसीदें तैयार की गई थीं। ईडी ने दावा किया कि साजिश थी कि यंग इंडिया के माध्यम से 2,000 करोड़ की संपत्ति कब्जे में लेकर 90 करोड़ का कर्ज लिया जाए। अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि एजेएल के पास दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, इंदौर, पंचकूला, पटना और अन्य स्थानों पर संपत्तियां हैं। हालांकि, एजेएल का अधिग्रहण करने के तुरंत बाद यंग इंडिया (गांधी परिवार द्वारा नियंत्रित एक इकाई) ने घोषणा की कि वह नेशनल हेराल्ड सहित किसी भी समाचार पत्र के प्रकाशन में शामिल नहीं होगी। एएसजी राजू ने कोर्ट को बताया कि ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यंग इंडिया पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नियंत्रण था। दोनों ने मिलकर 76 प्रतिशत शेयर अपने पास रखे थे। वास्तव में ये कंपनियां उनके नियंत्रण में थीं और इनके संचालन के लिए वो जिम्मेदार थे।
करोड़ों की कंपनी को खरीदने और बेचने वाला एक ही पक्ष- भाजपा
अब भाजपा की तरफ से भी यही दावा किया गया है कि नेशनल हेराल्ड का मामला बड़ा विचित्र है, जिसमें हजारों करोड़ रुपए की संपत्तियों वाली एक कंपनी महज 90 करोड़ रुपए की देनदारी में बिक गई और इसे खरीदने और बेचने वाला दोनों एक ही पक्ष के थे। जो कांग्रेस देश में इतने साल तक सत्ता में रही, उसके रहते 2008 में यह अखबार बंद हो गया। यानी सत्ता में रहते हुए भी कांग्रेस अपनी इस विरासत को नहीं बचा पाई। भाजपा की तरफ से तो यह भी दावा किया गया है कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता चाहते ही नहीं थे कि यह अखबार चले। भाजपा की तरफ से यह भी कहा गया कि 5 मई से पहले 3 मई 1950 को भी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा था, जिसका स्पष्ट उल्लेख कॉरेस्पोंडेंस ऑफ सरदार पटेल में मिलता है। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि यदि यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के द्वारा शुरू किया गया अखबार था, तो सरकार से जुड़े हुए लोगों की इसमें इतनी संलिप्तता आपत्तिजनक है।
2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जे की सरेआम साजिश
सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप था कि ऐसा दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया था। स्वामी ने 2000 करोड़ रुपए की कंपनी को केवल 50 लाख रुपए में खरीदे जाने को लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत केस से जुड़े कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी। जून 2014 ने कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया। अगस्त 2014 में ED ने इस मामले में एक्शन लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। दिसंबर 2015 में दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने सोनिया, राहुल समेत सभी आरोपियों को जमानत दे दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की गिरफ्तारी को माना जायज, कहा- ‘शराब नीति बनाने और घूस लेने में शामिल थे अरविंद केजरीवाल’: CM के लिए अलग कानून नहीं होता


दिल्ली उच्च न्यायालय ने AAP के संयोजक व प्रदेश के CM अरविंद केजरीवाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अपनी याचिका में केजरीवाल ने कहा था कि उनकी गिरफ़्तारी PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग कानून) की धारा-19 का उल्लंघन है। जस्टिस स्वर्ण कान्त शर्मा ने कहा, “ED द्वारा जुटाए गए तथ्यों से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की शराब नीति बनाने की साजिश रची, वो इसका हिस्सा बने और फिर इस अपराध से हुई आय का इस्तेमाल किया।”

केजरीवाल समेत पूरी पार्टी यह समझने में नाकाम है कि कांग्रेस द्वारा लगाए आरोपों के ही कारण तिहाड़ जाना पड़ा है और मनु सिंघवी भी कांग्रेस से ही है। देखिए वीडियो: 

दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि वो कठोर रूप से दिल्ली में शराब नीति बनाने और घूस माँगने में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं, साथ ही AAP के संयोजक के रूप में भी वो इस अपराध में शामिल हैं। इस मामले में सरकारी गवाह बने आरोपितों के संबंध में कोर्ट ने कहा कि इससे जुड़ा कानून 100 वर्ष पुराना है और ये कोई 1 साल पुराना कानून नहीं है कि याचिकाकर्ता को झूठ का फँसा दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को गवाहों को क्रॉस-एग्जामिन करने का अधिकार है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि कौन चुनाव लड़ने के लिए टिकट देता है और कौन इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदता है ये हमारी चिंता का मसला नहीं है। जज ने कहा कि जाँच एजेंसी को ये निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वो एक व्यक्ति की सहूलियत के हिसाब से जाँच को दिशा दे, वो अपने हिसाब से काम करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक आम आदमी और एक मुख्यमंत्री के लिए अलग-अलग कानून नहीं हो सकता। गिरफ़्तारी की टाइमिंग को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ़्तारी और रिमांड को कानून के हिसाब से देखना है, चुनावों को बिना मद्देनजर रखते हुए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ED द्वारा खुद को गिरफ्तार किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उच्च न्यायलय ने इस संबंध में फैसला सुरक्षित रख लिया था। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने पहले ही कहा था कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा नहीं है। बुधवार (3 अप्रैल, 2024) को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई थी। कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट विक्रम चौधरी ने दिल्ली CM की तरफ से पैरवी की थी।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी K कविता की कस्टडी 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। BRS की के कविता भी शराब घोटाले में फँसी हुई हैं। हालाँकि, उन्होंने अदालत को लिखे पत्र में खुद को पीड़िता बताते हुए कहा है कि ED और CBI पिछले ढाई वषों से मीडिया ट्रायल चला रही है। उन्होंने दावा किया कि शराब घोटाले से उन्हें कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला है, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके व्यक्तिगत एवं राजनीतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई गई है।

K कविता ने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर उनके मोबाइल फोन को दिखाया जाता है, जो उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन है। BRS की नेता ने जाँच में पूर्ण सहयोग का दावा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बैंक खाते की जानकारियाँ भी जाँच एजेंसियों से साझा कर दी है। उन्होंने जाँच एजेंसियों पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि छापेमारियों से उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना हुई है। K कविता ने कहा कि जिन मोबाइल फोन्स के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने नष्ट कर दिया, वो सब वो सौंप देंगी।