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क्या ओवैसी की चुनौती कबूल करेंगे राहुल गाँधी? वायनाड छोड़ो प्यारे, हैदराबाद में आकर दो-दो हाथ करो

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस  के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को हैदराबाद से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। अभी ओवैसी इसी सीट से सांसद हैं। एआईएमआईएम के मुखिया ने कहा है कि राहुल गाँधी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उन्हें चैलेंज है कि वे वायनाड छोड़ें और हैदराबाद आकर मुकाबला करें।

ओवैसी ने कहा, “कांग्रेस के लोग बहुत आएँगे। मैं तो कांग्रेस के लीडर से कहूँगा कि अब की बार वायनाड नहीं हैदराबाद से मुकाबला करो। मैं चैलेंज कर रहा हूँ, वायनाड छोड़ो और हैदराबाद आओ। हम दो-दो हाथ आजमा लेंगे। पंजा आजमा लेंगे आ जाओ।”

ओवैसी ने राहुल गाँधी को चुनौती देते हुए कहा, “कहाँ वायनाड जाते हो प्यारे, यहाँ आओ। सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें क्यों करते हो? अरे, जमीन पर आओ मुकाबला करेंगे। शेरवानी-काली टोपी वाले से मुकाबला करके देखो मजा आएगा। कांग्रेस के लोग बहुत बातें करेंगे। मैं तैयार हूँ। लेकिन तेलंगाना की जनता से भी अपील करता हूँ कि याद रखो हैदराबाद में मासूमों का लुट जाना, मिट जाना कांग्रेस की देन है।”

असुदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि यही कांग्रेस थी जब अयोध्या स्थित बाबरी ढाँचे को तोड़ दिया गया था। सचिवालय की मस्जिद को भी कांग्रेस सरकार में ही तोड़ी गई थी। इसके बाद अयोध्या में मस्जिद नहीं बन पाई। बताओ कांग्रेसियों नरसिम्हा राव तुम्हारा बाप था या नहीं बताओ?

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के खिलाफ वोट डालने पर ओवैसी ने कहा, “भाजपा के लोग हमसे कहते हैं कि AIMIM के दो सांसदों ने संसद में महिला आरक्षण के खिलाफ वोट दिया। मैंने और इम्तियाज जलील ने पूरी संसद को हिला कर रख दिया। महिला आरक्षण के पक्ष में 450 वोट पड़े और 2 वोट खिलाफ में पड़े। हम हवा के साथ चलने वाले लोग नहीं है। हम हवा के खिलाफ चलने वाले हैं।”

साल 20919 के लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी ने कांग्रेस की पारंपरिक सीट अमेठी के साथ ही केरल की मुस्लिम बाहुल्य सीट वायनाड से भी चुनाव लड़ा था। उन्हें अमेठी में हार का सामना करना पड़ा था। वहीं वायनाड में जीत दर्ज की थी। अगले 2 महीनों में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी पार्टियाँ एड़ी-चोटी का जोर आजमाने में जुटी हुई हैं। वहीं 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन दोनों चुनावों को देखते हुए नेताओं के बीच जुबानी जंग चल रही है। 

I.N.D.I.A गठबंधन में एक और कलह, केजरीवाल की नजर 2024 पर नहीं, 2025 पर!

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने I.N.D.I.A गठबंधन को झटका देना शुरू कर दिया है। केजरीवाल के करीबी, राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के महासचिव संदीप पाठक ने यह कहकर I.N.D.I.A गठबंधन में हलचल मचा दी है कि AAP बिहार में चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी के इस एलान के बाद I.N.D.I.A गठबंधन में सहयोगी दल सकते में आ गए हैं। AAP नेता ने कहा कि पार्टी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में तो गठबंधन के साथ लड़ेगी लेकिन 2025 में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। यही नहीं उन्होंने बिहार में गंदी राजनीति होने का आरोप भी लगा दिया। आम आदमी पार्टी के बिहार के सभी सीटों से विधानसभा का चुनाव लड़ने के एलान के बाद बिहार के सियासी हलके में खलबली मच गया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में अभी काफी समय है। इस समय लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी गठबंधन के घटक दलों के बीच आम सहमति बनी है और आम आदमी पार्टी भी इसका हिस्सा है। इससे समझा जा सकता है कि विपक्षी गठबंधन में किस कदर घबराहट है।

केजरीवाल ने अपनी अहमियत जताने के लिए ‘ बिहार बम’ फोड़ा
विपक्षी दलों के नए गठबंधन I.N.D.I.A. की बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच मुंबई में होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कई मुद्दों पर फैसला हो सकता है। इस बैठक पर बिहार की सियासी निगाहें भी टिकी हुई हैं। नीतीश कुमार इस गठबंधन का संयोजक बनने को लेकर सपना पाले हुए हैं। वहीं केजरीवाल अपना महत्व भी जताना चाहते हैं। वैसे तो सभी दलों को पता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी के लिए बड़ी उम्मीद की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मजबूती से भारत की समृद्धि के द्वार खोल रहे हैं, उसका मुकाबला करना किसी विपक्षी दल के बूते की बात नहीं है। यानि 2024 में पुन: भाजपा की पूर्ण बहुमत से विजय होगी। केजरीवाल भी भलीभांति इस बात को समझते हैं और इसीलिए उन्होंने राज्यों के चुनाव पर फोकस करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बिहार चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया गया। सियासी हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार की तरह ही केजरीवाल भी अपनी हसरतें हैं और विपक्षी गठबंधन में अपनी अहमियत जताने के लिए उन्होंने ‘ बिहार बम’ फोड़ दिया है। देखना यह होगा कि गठबंधन की बैठक में नीतीश कुमार और केजरीवाल में किसको क्या तवज्जो मिलती है।

बिहार में बहुत गंदी राजनीति हो रहीः संदीप पाठक
संदीप पाठक ने कहा कि बिहार में आम आदमी पार्टी कब चुनाव लड़ेगी, इसका फैसला पार्टी फोरम में होगा। संदीप पाठक ने कहा कि आज की तारीख में बिहार में बहुत गंदी राजनीति हो रही है, इसे बंद किया जाना चाहिए। इसी गंदगी को दूर करने के लिए हमारी पार्टी अब बिहार में चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। इस बयान से केजरीवाल की पार्टी ने कांग्रेस, राजद और जेडीयू पर एक तरह से प्रहार किया जिनकी वर्तमान में सरकार है। इससे समझा जा सकता है कि I.N.D.I.A. गठबंधन में कितनी एकता है।

बिहार में पहले लोकल बॉडी के चुनाव में उतरेगी AAP
आप सांसद संदीप पाठक ने बताया कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में 95 फीसदी गांवों में हमारी कमेटी है। उससे पहले हमने गुजरात में भी चुनाव लड़कर दिखा दिया है। किसी भी पार्टी के संगठन की मजबूती का अंदाजा गांव की कमेटी से ही चलता है। पंजाब, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तरह बिहार में भी हमें संगठन को मजबूत बनाना है। आम आदमी पार्टी बिहार में पहले जिला पंचायत, नगर पंचायत और नगर परिषद का चुनाव लड़ेगी। इसी से आगे के रास्ते बनेंगे। विधानसभा और लोकसभा का चुनाव का भी रास्ता साफ होगा।

AAP नेता ने कहा- अब हमारी पार्टी नेशनल पार्टी है
आदमी पार्टी के सांसद संदीप पाठक ने हमारी पार्टी की सरकार एक राज्य से बढ़कर दो राज्यों में हो चुकी है। वहीं गोवा और राजस्थान में भी हमारी परफॉर्मेंस अच्छी रही है। अब हम बिहार जैसे राज्य में भी संगठन को मजबूत बनाना चाहते हैं। I.N.D.I.A. गठबंधन को लेकर संदीप पाठक ने कहा कि किसी मुद्दे पर हममें सबकी राय अलग-अलग हो सकती है लेकिन सबका यही मानना है कि देश सबसे ऊपर है। अब हमारी पार्टी नेशनल पार्टी है, हम लोकसभा का चुनाव तो लड़ेंगे ही लेकिन इसकी रूप रेखा क्या होगी, सीटों का बंटवारा कैसे होगा- यह फैसला आने वाले समय में होगा।

केजरीवाल लोकसभा चुनाव पर फोकस करेंः केसी त्यागी
आम आदमी पार्टी के बिहार में चुनाव लड़ने के एलान के बाद बिहार के विपक्षी दलों में हलचल हो गई है। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने साफ कहा कि केजरीवाल और उनकी पार्टी फिलहाल लोकसभा चुनाव पर फोकस करें। बिहार चुनाव में अभी काफी वक्त है। विधानसभा चुनाव में क्या सियासी समीकरण बनेंगे, उसके बारे में अभी से क्यों परेशान होना है।

मानहानि मामले में केजरीवाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर खतरे के बादल
उधर केजरीवाल और उनके करीबी और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर सवाल उठाकर मानहानि के मामले में बुरी तरह फंसे हुए हैं। दोनों नेताओं पर गुजरात विश्वविद्यालय ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। विश्वविद्यालय ने इन दोनों नेताओं पर संस्थान की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। दोनों नेताओं ने मानहानि केस में सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने के लिए गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया था लेकिन हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और वहां से भी अंतरिम राहत नहीं मिली। दरअसल, निचली अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मानहानि मामले में दोनों नेताओं को समन जारी किया है। अब इस मामले में उन्हें 31 अगस्त मेट्रोपोलिटन अदालत में पेश होना है। वहीं इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट में 29 अगस्त को सुनवाई है। केजरीवाल को अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती और निचली अदालत सजा सुनाती है तो उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।

सात साल पुराना है यह केस, केजरीवाल पर लग चुका 25 हजार जुर्माना
पीएम मोदी की डिग्री से जुड़ा यह पूरा मामला सात साल पुराना है। अप्रैल, 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग ने केजरीवाल से उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में केजरीवाल ने कहा था कि वह सीआईसी को जानकारी देने के लिए तैयार हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री का खुलासा करने के लिए कहा जाना चाहिए। केजरीवाल के जवाब को आरटीआई का आवेदन मानते हुए सीआईसी ने एक ऑर्डर पास किया था। इसमें गुजरात यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की डिग्री का ब्योरा देने का निर्देश दिया था। इस ऑर्डर के खिलाफ गुजरात यूनिवसिर्टी हाई कोर्ट चली गई थी। हाई कोर्ट ने इस 31 मार्च, 2023 को फैसला सुनाते हुए सीआईसी को ऑर्डर को रद्द कर दिया था और केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। केजरीवाल ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस की थी। गुजरात यूनिवर्सिटी का आरोप है कि इसमें केजरीवाल ने विश्वविद्यालय की मानहानि की। इसके बाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की तरफ से केस दाखिल किया गया, जिसमें केजरीवाल के साथ-साथ संजय सिंह मानहानि के आरोपी हैं।

I.N.D.I.A में दरारें: दिल्ली में आप के सामने कांग्रेस लड़ेगी लोकसभा चुनाव, बदले में आप राजस्थान में कांग्रेस की खिलाफत!

I.N.D.I.A गठबंधन का मुख्य आधार राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा को स्थापित करना और दूसरे अरविन्द केजरीवाल द्वारा भारत में अपनी पैठ बनाना। लेकिन केजरीवाल की हरकतों को देख केवल कांग्रेस ही नहीं, दूसरे दल भी केजरीवाल से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, इन सब बातों को देख इस गठबंधन का समय पूर्व ही गर्भपात होना जान प्रतीत हो रहा है। केजरीवाल पार्टी को हाशिए पर लाने के लिए कांग्रेस को मजबूत ही नहीं बल्कि अपने वोट बैंक को सुरक्षित करना होगा, क्योकि जहां-जहां कांग्रेस कमजोर हुई है, केजरीवाल कांग्रेस समर्थकों के वोट अपनी झोली में डाल कांग्रेस को हो नुकसान होता है। ताजा उदाहरण पंजाब है, कांग्रेस की आपसी फूट का लाभ केजरीवाल लेने में सफल हुए, अन्यथा पंजाब में केजरीवाल सरकार नहीं बना सकते थे।  
मोदी सरकार के खिलाफ टुकड़े-टुकड़े जोड़कर बनाया गया ‘घमंडिया गठबंधन’ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले ही निजी स्वार्थों के चलते तार-तार होने लगा है! आम चुनाव में केवल बीजेपी के विरोध के लिए 26 विपक्षी दल एक साथ तो आ गए, लेकिन अब राज्यों में इनके स्वार्थ टकराने लगे हैं। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और राजस्थान तक इस गठबंधन में आने वाली दरारें सुर्खियां बटोर रही हैं। ‘घमंडिया गठबंधन’ के कुनबे की सूत्रधार कांग्रेस ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के खिलाफ टाल ठोंक दी है तो आप ने भी राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपनी मर्जी की सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। उधर महाराष्ट्र में शरद पवार को लेकर ‘कंफ्यूजन’ की स्थिति पैदा हो गई है, जबकि गठबंधन की अगली बैठक मुंबई में होना तय हुई है। ऐसे हालात में गठबंधन की अन्य पार्टियां पसोपेश में हैं कि भविष्य की रणनीति साझा मुद्दों पर बनाएं, या फिर अपनी ढपली-अपने राग अलापना जारी रखें।

गठबंधन की मुंबई बैठक से पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में उफान
बता दें कि INDIA गठबंधन की पहली मीटिंग पटना में 23 जून को हुई थी। दूसरी मीटिंग 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में हुई। अब तीसरी मीटिंग 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में होनी है। मुंबई की बैठक से पहले ही महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार को लेकर उफान आया है। गठबंधन बनने के करीब 1 महीने बाद ही इसमें खींचतान शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में जहां अजित-शरद पवार की सीक्रेट मीटिंग और कथित ऑफर को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। दोनों नेताओं के बीच लगातार हो रहीं मुलाकातों ने कांग्रेस और शिवसेना की टेंशन बढ़ा दी है। कांग्रेस अभी से लोकसभा की तैयारियों में जुट गई है। इसके लिए पार्टी ने बुधवार (16 अगस्त) को महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों को लेकर रिव्यू मीटिंग की. बैठक के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने दावा किया कि उनकी पार्टी गठबंधन के साथ मिलकर 42 सीटों पर जीट हासिल करेगी।


शरद पवार को लेकर महाराष्ट्र की जनता के मन में तो भ्रम है- पटोले
इसके साथ ही नाना पटोले ने एनसीपी चीफ शरद पवार को लेकर कहा कि वह एक बड़े नेता हैं। इस बात का कांग्रेस के मन में कोई भ्रम नहीं है लेकिन जनता के मन में है। नाना पटोले ने कहा, “यह उनकी पार्टी के लिए चिंता का विषय है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार और राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार गुप्त तरीके मुलाकात कर रहे हैं। शरद पवार शिव सेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी के महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि उनके भतीजे अजित पवार पिछले महीने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना-बीजेपी सरकार में शामिल हो गए थे।

कांग्रेस दिल्ली की सभी सीटों पर लड़ेगी तो इंडिया गठबंधन का औचित्य ही क्या है?
दिल्ली में कांग्रेस की एक बैठक के बाद पार्टी के नेताओं ने संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने की तरफ से दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर मजबूत तैयारी करने के निर्देश मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के मूड में नहीं है और दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर लड़ना चाहती है। कांग्रेस नेताओं के बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो INDIA गठबंधन बनाने का औचित्य ही क्या है? आम आदमी पार्टी नेता विनय मिश्रा ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं का ये बहुत हैरान करने वाला बयान है। ऐसे बयानों के बाद गठबंधन का क्या मतलब रह जाता है?

सात महीने में दिल्ली की सातों सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगे- लांबा
कांग्रेस की मीटिंग के बाद पार्टी नेता अलका लांबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “लगभग 3 घंटे की मीटिंग में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, मौजूदा अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और दिपक बाबरिया मौजूद रहे। तीन घंटे की मीटिंग में संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। संगठन में कमजोरियां क्या हैं? उसपर कैसे काम किया जाए? मीटिंग में हमें सुझाव मिले कि कैसे संगठन को मजबूत कर सकते हैं। सुझाव ये भी आया कि लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां अब हमें करनी है, मकसद वही था। हर नेता को आज से अभी से निकलना है। 7 महीने और 7 सीटें हैं। ये बात हुई कि जिसकी दिल्ली हुई, उसका देश होता है। यही इतिहास बताता है। इसलिए हमें कहा गया कि दिल्ली की सातों सीटों पर तैयारी रखनी है। आदेश हुआ कि हमें दिल्ली की सातों सीटों पर मजबूत संगठन के साथ लड़ना है।

18 राज्यों की लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों को लेकर हो चुकी है मीटिंग
क्या दिल्ली में कांग्रेस ‘एकला चलो’ पर काम कर रही है? इसके जवाब में अलका लांबा ने कहा, “एकला चलो पर तो अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसलिए ये कहना कि हम दो सीटों पर लड़ेंगे, चार सीटों पर लड़ेंगे या बाकी पर काम नहीं करेंगे… ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन ये तो सब जानते हैं कि दिल्ली की सात सीटों पर हम (कांग्रेस) 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे। अब भारत जोड़ो यात्रा के बाद हम देख रहे हैं कि लोग बीजेपी के खिलाफ देश में एक मजबूत विकल्प के तौर पर कांग्रेस को देख रहे हैं। दिल्ली से पहले 18 राज्यों की लोकसभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों को लेकर मीटिंग हो चुकी है। दिल्ली 19वां राज्य था, 2024 का चुनाव कैसे जीतना है इसपर चर्चा हुई।

कांग्रेस का वोटों से ही जीती AAP, उसके दो मंत्री भ्रष्टाचार के चलते जेल में बंद
कांग्रेस नेता लांबा ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस का जो वोट है, वो आम आदमी पार्टी की तरफ गया है। बीजेपी का पक्का वोट बैंक और एक स्थिर लाइन है। हमारी लड़ाई बीजेपी से है, लेकिन वोट हमारा आम आदमी पार्टी के पास है। आम आदमी पार्टी के दो बड़े नेता इस समय भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल पर भी शिकंजा कस सकता है। इसलिए कांग्रेस संगठन को अभी से मजबूत करना है। सातों सीटों पर हमें अपनी तैयारियों को पुख्ता करना है। कांग्रेस नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस पार्टी संगठन को मजबूत करके एकजुट होकर लड़ेगी। हमने आम आदमी पार्टी की या गठबंधन की कोई चर्चा नहीं की। हमारा अपना अलग रास्ता है। हमने पोल खोल यात्रा से लेकर हर एक कोशिश की है कि अरविंद केजरीवाल सरकार की नीतियों को एक्सपोज करें।

कांग्रेस के ये छुटभय्ये नेता, एमएलए इलेक्शन में दोनों की जमानत तक नहीं बची-आप
कांग्रेस की बैठक और दिल्ली को लेकर मिला दिशा-निर्देशों के बाद अब आप नेताओं का कहना है कि ऐसे हालात में अरविंद केजरीवाल को इस पर फैसला करना चाहिए कि आगे क्या करना है। आम आदमी के सौरभ भारद्वाज ने कांग्रेस नेताओं के इस तरह के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन की मूल भावना का खिलाफ बयान देने वाले बहुत छोटे-मोटे नेता हैं, जिनकी जमानतें विधानसभा चुनाव तक में नहीं बची हैं। उनके बयानों की क्या वैल्यू है, इसे आसानी से समझा जा सकता है। अनील चौधरी और अल्का लांबा ने बयान दिया है और सभी जानते हैं कि दोनों की ही जमानत कहां बची। दोनों की मिला लो तो भी नहीं जीतेंगे। जब सौरभ भारद्वाज से पूछा गया कि क्या आम आदमी पार्टी भी दिल्ली में लोकसभा की सातों सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है? या वे मानते हैं कि दिल्ली में आप-कांग्रेस का गठबंधन होना चाहिए? तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ये सभी PAC के लेवल की चीजे हैं। हमारी पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी है, वो इस पर चर्चा करेगी, निर्णय करेगी।

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ प्रत्याशी उतारेगी AAP
आप एक ओर दिल्ली में कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव लड़ने का विरोध कर रही है, दूसरी ओर राजस्थान में कांग्रेस के खिलाफ ही अपने उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी ने गंगानगर, हनुमानगढ़, बांसवाड़ा, सीकर, जयपुर, अलवर, कोटा, दौसा, चुरू, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर जिले की 26 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले चेहरे लगभग तय कर लिए हैं। अगले सप्ताह इन 26 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो सकती है। आम आदमी पार्टी के प्रभारी विनय मिश्रा के मुताबिक कई सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले उम्मीदवार तय कर लिए हैं। राजस्थान में हम तीन-चार फेज में विधानसभा उम्मीदवार घोषित करेंगे। राजस्थान की चुनाव तैयारियों को लेकर 18 अगस्त को पार्टी की अहम बैठक होने वाली है। इसके बाद पहली सूची 25 अगस्त से पहले जारी कर देंगे।

‘इंडिया’ अलायंस के बावजूद आप की विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तैयारी
पार्टी ने तय किया है कि इन 26 सीटों पर चुनाव लड़ाए जाने वाले लोगों को पहले विधानसभा प्रभारी बनाया जाएगा। कम से कम एक माह तक इनको पार्टी की ओर से संगठन विस्तार का काम देकर परफोर्मेंस देखी जाएगी। इसके बाद इनको टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। संभावना है कि 26 में से एक-दो ऐसे लोग जो परफॉर्मेंस में खरे नहीं उतरेंगे उनकी जगह नए नाम भी शामिल हो सकते हैं। मिश्रा ने साफ-साफ कहा कि ‘इंडिया’ अलायंस को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए कि हम राजस्थान में चुनाव नहीं लड़ रहे, बल्कि पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह से गंभीर है।

राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और गुजरात से सटी सीटों पर ज्यादा फोकस
पंजाब, गुजरात और दिल्ली से लगते राजस्थान के जिलों को पार्टी ने पहली प्राथमिकता में रखा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है। इन दोनों राज्यों से जुड़े इलाकों में पार्टी की सरकारों के काम और योजनाओं को लेकर पहले से हो रही माउथ पब्लिसिटी को भुनाने की रणनीति है। वहीं गुजरात में भी पिछले चुनाव में आप पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। यही कारण है कि तीनों राज्यों की सीमाओं से सटे राजस्थान के जिलों में पार्टी अपने लिए ज्यादा संभावनाएं देख रही हैं। इसी लिहाज से पहली सूची में ज्यादातर सीमावर्ती जिलों से जुड़ी सीटों पर फोकस रहेगा। चुनाव से पहले अपना धरातल मजबूत करने के लिए पार्टी प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर बड़ा कार्यक्रम करेगी। इसके आधार पर पार्टी चुनावी एजेंडा तय करेगी। पार्टी ने तय किया है कि राजस्थान के सभी जिलों में इसी माह के अंतिम सप्ताह से तिरंगा यात्राओं की शुरुआत होगी। दिल्ली, पंजाब और गुजरात से प्रत्येक जिले में पार्टी का कोई न कोई बड़ा नेता इन यात्राओं का नेतृत्व करेगा।