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उत्तर प्रदेश : 10वीं की फिरकापरस्त मुस्लिम छात्रा द्वारा भगवान गणेश पर बनाए आपत्तिजनक मीम

10वीं की छात्रा ने हिंदुओं के प्रति दिखाई नफरत
                                                     लड़की का प्रतीकात्मक चित्र 

जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हो, उस राज्य में हिन्दू के देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक मीम बनाए जाएं, उससे ज्यादा दुःखद यह है कि जिस समाचार एजेंसी ने इस समाचार को प्रसारित किया है, वह छात्रा के स्कूल से संपर्क कर सकती हैं लेकिन छात्रा का नाम छुपाने के साथ-साथ स्कूल का नाम भी सार्वजनिक करने से डर रही है, लेकिन क्या स्थिति विपरीत होती क्या तब भी दोनों ही नाम गोपनीय रखे जाते। 
यह कौन-सा सर्वधर्म सद्भाव है? बेंगलुरु में देखा नहीं हाल? कमलेश तिवारी हत्या को भी क्या भूल गए क्या? आखिर किस कारण ऐसी साम्प्रदायिक छात्रा और उसके स्कूल, गांव, जिला, शहर को छिपाया गया? यह बलात्कार पीड़ित नहीं है, जिस कारण इसकी शक्ल और नाम को गोपनीय रखा जाए। 
योगी पुलिस और सरकार को इस गरीब, मजलूम नादान लड़की, इसके अब्बू, अम्मी और भाई-बहनों के बैंक खातों की भी जाँच करे, क्योकि बिना किसी प्रलोभन के कोई भी साम्प्रदायिक हरकत नहीं कर सकता। ताकि कोई इसका समर्थक Victim Card खेलने का साहस न कर सके। भारत में बहुत बह लिया हिन्दू-मुसलमान का खून। अगर इस सरकार के रहते भी साम्प्रदायिकतों के नकेल नहीं डाली गयी, फिर योगी सरकार और अन्य अखिलेश और मायावती आदि की सरकारों में कोई अंतर नहीं रह पाएगा।   
वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक बेहद पुराने और प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती है। 10वीं कक्षा की वह छात्रा है। वह आजकल दोस्तों के बीच हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को लेकर चर्चा में है।
उसने भगवान गणेश और जीसस को लेकर किए आपत्तिजनक पोस्ट की है। इस ओर हमारा ध्यान उसके ही कुछ सहपाठियों ने दिलाया। असल में जब सहपाठियों ने इसके लिए आपत्ति जाहिर की तो समुदाय विशेष से आने वाली इस इस छात्रा ने उनसे कथित तौर पर कहा कि हिंदू धर्म पर क्यों नहीं हॅंस सकते?
हालाँकि अब छात्रा ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया है। मगर उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि कक्षा 10 में पढ़ने वाली बच्ची के दिमाग में किस तरह की गंदगी और दूसरे धर्मों के प्रति नफरत भरी हुई है। यह बेहद दुखद और चिंतनीय है।
छात्रा द्वारा किया गया आपत्तिजनक पोस्ट
हमने इस बारे में स्कूल का पक्ष जानने के लिए प्रिंसिपल को कई बार फोन किया। मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद हमने छात्रा की क्लास टीचर को फोन किया। जब हमने इस बारे में उनसे बात की तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।
छात्रा द्वारा किया गया आपत्तिजनक पोस्ट
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। छात्रा का व्यवहार पूछने पर वो कहती हैं कि वो उसे अच्छी तरह से नहीं जानती। अभी ऑनलाइन क्लासेस चल रही है, तो वो कभी आती है, कभी नहीं।
जब उसकी क्लास के बच्चों ने उससे पूछा कि क्या उसी ने इस तरह का पोस्ट डाला है, तो उसने कहा कि हाँ, उसी ने ये पोस्ट डाला है और आगे भी डालती रहेगी। उसने कहा कि तुमलोग भी तो मुसलमानों पर बने मीम्स पर हँसते हो तो हिंदू धर्म के मीम पर क्यों नहीं हँस सकते।
मीम पोस्ट करने पर छात्रा का
अपने दोस्तों को जवाब
फिलहाल छात्रा ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। उसकी क्लास की ही एक छात्रा ने ऑप इंडिया को बताया कि वो पहले भी अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दुओं के खिलाफ मीम्स और पोस्ट डाला करती थी। वो बताती है कि किसी ने भी उसके धर्म के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा था, इसके बावजूद उसने इस तरह का पोस्ट डाला।
मीम पोस्ट करने पत्र छात्रा का
अपने दोस्तों को जवाब
सवाल उठता है कि आखिर इन बच्चों के मन में ये जहर भर कौन रहा है। कहाँ से इनके दिमाग में इतनी गंदगी आती है? बच्ची की ये हरकत उसकी परवरिश पर भी सवाल उठाता है। क्या उनके परिवार में सभी धर्मों का सम्मान करना नहीं सिखाया जाता? क्या उन्हें नहीं बताया जाता कि जिस तरह उसे अपनी मजहब के प्रति आस्था है, बाकी धर्म के लोगों की भी अपनी आस्था होती है।
क्या उनके परिवार के लोगों की इस पोस्ट पर कोई आपत्ति नहीं होगी? इसके साथ ही स्कूल के शिक्षकों का इस बारे में पता न होना भी सवाल के दायरे में आता है। जब ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, तो फिर उनकी नजर में कैसे नहीं आया? 
14-15 साल की बच्ची के जेहन में इतनी कट्टरता कहाँ से आई होगी? वैसे ये पहली बार नहीं है, जब बच्चों के ऐसी कट्टरता सोशल मीडिया में दिखी हो। नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने के समय भी आपने ऐसे अनगिनत वीडियो और फोटो देखा होगा, जिसमें बच्चे गालियाँ दे रहे हैं, देश के प्रधानमंत्री के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं, आजादी के नारे लगा रहे हैं।
भला एक छोटा सा बच्चा, जिसे न तो आजादी का मतलब पता होगा और न ही सीएए का, वह कैसे इस तरह की बातें कर सकता है। हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पाकिस्तान का लगभग 4-5 साल का बच्चा कहता है कि अगर इस्लामाबाद में मंदिर बना तो ये याद रखना मैं उन हिंदुओं को चुन-चुनकर मारूँगा।
हैरानी की बात है कि लोग इसे गर्व के साथ शेयर करते हैं और उसे शाबासी भी देते हैं। हिंदुओं के देवी-देवता पर आए दिन धड़ल्ले से टिप्पणी कर दी जाती है, मगर जब इस्लाम या पैगंबर टिप्पणी की जाती है, तो बात कत्लेआम तक पहुँच जाती है। कमलेश तिवारी की हत्या और हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगे तो याद ही होंगे आपको। तो क्या धर्मनिरपेक्षता, सर्वधर्म सद्भाव का बोझ सिर्फ हिंदुओं के कंधों पर है?
नोट: छात्रा की पहचान उजगार नहीं हो इसकी वजह से हमने स्कूल और शिक्षकों के नाम का भी जिक्र नहीं किया है। इस स्टोरी का मकसद हमारा ध्यान उस बेहद गंभीर समस्या की ओर खींचना है जो एक खास समुदाय के बच्चों को मजहबी तौर पर कट्टर बना रहा। जब आधुनिक स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा के मन में दूसरे धर्म के लोगों के लिए इतनी नफरत भरी है तो आप समझ सकते हैं कि उनका क्या हाल होगा जो मुल्लों से तालीम ले रही हैं या फिर जो शिक्षा से दूर हैं।

उत्तर प्रदेश : ‘बेटियों के सामने पैंट उतार जय श्रीराम के नारे लगाने वाले, हस्तमैथुन करने वाले’: पंकज पुनिया, कांग्रेसी नेता के बिगड़े बोल

पंकज पुनिया ट्वीट योगी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  इस कोरोना बीमारी के संकट काल में भी कांग्रेस अपनी गन्दी,  अपमानजनक और हिन्दू विरोधी हरकतों से बाज नहीं आ रही। चुनावों के समय हिन्दू वोट लेने के लिए राहुल गाँधी कोट पर जनेऊ पहनकर मन्दिरों में माथा टेकते नज़र आएंगे। लेकिन चुनावों उपरांत वही कांग्रेस हिन्दुओं का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। जिसे कांग्रेस में समस्त हिन्दू चुपचाप बर्दास्त कर रहे हैं, क्यों? क्या उनका हिन्दुत्व मार गया है? आखिर कब तक गुलामी करते रहेंगे? क्या उन्हें आत्मसम्मान की कोई चिन्ता नहीं? क्या उन्हें आत्मसम्मान की कोई चिन्ता नहीं?
यूपीए के कार्यकाल में इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने बेगुनाह साधु, संत और साध्वियों को हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम पर हिन्दुओं को बदनाम किया जाने पर कांग्रेस में सम्मिलित समस्त हिन्दू मुंह में दही जमाए बैठे रहे। उस दौरान तुष्टिकरण का कोई मौका नहीं छोड़ने पर कांग्रेस में हिन्दू किस कारण खामोश रहे? 
कांग्रेस नेता पंकज पुनिया ने मई 19, 2020 को नैतिकता की हर सीमा पार करते हुए अपने एक ट्वीट में हिन्दुओं की भावनाओं को खुलेआम ठेस पहुँचाई। अपने ट्वीट में पुनिया ने ‘संघियों’ को बलात्कारी बताया, श्रीराम के नाम का गलत इस्तेमाल किया और योगी सरकार की आलोचना करते हुए उनके लिए आपत्तिजनक शब्द लिखे।
पुनिया ने यूपी सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “कांग्रेस सिर्फ़ मजदूरों को अपने खर्च पर उनके घरों तक पहुँचाना चाहती थी। बिष्ट सरकार ने राजनीति शुरू की। भगवा लपेटकर नीच काम संघी ही कर सकते हैं। ये कब्र से निकालकर लाशों का बलात्कार करने वाले लोग हैं। बेटियों के सामने पैंट उतारकर जय श्रीराम के नारे लगाने वाले हस्तमैथुन करने वाले लोग हैं।”
इस ट्वीट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता पंकज पुनिया की गिरफ्तारी को लेकर लगातार माँग की जाने लगी। हालाँकि, 19 मई की शाम किए गए इस ट्वीट को कांग्रेस नेता ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से डिलीट कर दिया है। मगर, ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है।
यूजर्स न केवल पुनिया के ट्वीट को बकवास बता रहे हैं बल्कि ये भी पूछ रहे हैं कि आखिर इन्हें हिन्दुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने की आजादी किसने दी?
उत्तर प्रदेश के वकील प्रशांत पटेल उमराव ने तो पंकज पुनिया के ट्वीट के बाद सूचना भी दे दी है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व संघ को गाली देने व हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए पंकज पुनिया के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश पुलिस में शिकायत दर्ज करवा रहे हैं।

हिन्दुत्व के मुद्दों पर अक्सर अपनी बेबाक राय रखने वाले पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के ट्विटर अकॉउंट से भी पंकज पुनिया की भाषा पर बात रखी गई। उन्होंने लिखा, “इतनी गन्दी भाषा का प्रयोग वो भी सोशल मीडिया पर कैसे कोई कर सकता है! आखिर क्यों सत्ता के लिए ये लोग इस हद तक गिर रहे हैं कि भाषा की मर्यादा को भी भूल गए। इस हद तक नफरत सनातन के खिलाफ क्यों कर रहे हैं ये कांग्रेसी…?

एक यूजर पुनिया की गिरफ्तारी की माँग करते हुए लिखते हैं, “आप मोदी से नाखुश हो सकते हैं, आप योगी की नीतियों का विरोध कर सकते है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं की भाजपा विरोध में आकर तुम्हारे जैसे दो कौड़ी के नेता हिन्दुओं की आस्था पर चोट पहुचाएँ, जेल के सलाखों के पीछे तुम जरूर आओगे लिख कर रख लो।”
वहीं दीपक कुमार नाम का यूजर सोशल मीडिया पर पुनिया के लिए लिखते हैं, “ये इंसान पंकज पुनिया राजनीति में अंधा होकर हिन्दुओं के प्रभु श्रीराम को लेकर भद्दी-भद्दी बातें कर रहा है, जिससे की हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। जल्द से जल्द कार्रवाई करके इसे जेल में डालें।”

ऐसे ही प्रभात अवस्थी लिखते हैं, ”बेटी का अपमान, बलात्कार से पीड़ित महिलाओं का अपमान और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का अपमान, यहाँ तक की भारत देश की संस्कृति का अपमान। किस हद तक गिर चुका है ये इंसान पंकज पुनिया… इससे भी ज्यादा शर्मनाक तो यह है कि कांग्रेस फिर भी इसके समर्थन में खड़ी है!”
पंकज पुनिया का ये ट्वीट प्रियंका गाँधी और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 1000 बसों को लेकर उठे विवाद के बाद आया। जहाँ पहले प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति माँगी कि वे 1000 बसें चलवाकर प्रवासी मजदूरों को घर भेजना चाहती हैं। लेकिन जब योगी सरकार ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया और सुरक्षा लिहाज से गाड़ियों का विवरण माँगा, तो प्रियंका गाँधी लेटरबाजी पर उतर आईं और बाद में ये भी पता चला कि जिन गाड़ियों का विवरण उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा, उनमें से कुछ ऑटोरिक्शा हैं और कुछ ब्लैकलिस्ट वाहन हैं।
FIR दर्ज 
पंकज पुनिया के खिलाफ उत्तर प्रदेश में केस दर्ज किया गया है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। पुनिया के खिलाफ लखनऊ के हज़रतगंज थाने में FIR दर्ज की गई है। उन पर आपत्तिजनक ट्वीट करने और उससे एक धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है।

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पंकज पुनिया के खिलाफ यूपी में साइबर क्राइम में आपराधिक केस दर्ज कर लिया गया है। देश भर में अलग अलग थानों में सैकड़ों FIR सुबह से दर्ज हो चुकी हैं। पंकज पुनिया माफी माँग रहा हैं। लेकिन अपराध अक्षम्य हैं। भगवान राम और धर्म का अपमान अस्वीकार्य।”
पुलिस ने FIR में लिखा है कि सोशल मीडिया पर मॉनिटिरिंग के दौरान देखा गया कि पंकज पुनिया के ट्वीट राजनीतिक और धार्मिक आपत्तिजनक ट्वीट, धर्म विशेष, समुदाय विशेष और आराध्य विशेष का नाम लेकर किया गया, जिससे समाज में द्वेष की भावना भड़क रही है।
कांग्रेस नेता पंकज पुनिया ने मंगलवार (मई 19, 2020) को एक ट्वीट किया था, जिस पर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया। पंकज पुनिया ने अपने ट्वीट में ‘संघियों’ को बलात्कारी बताया, श्रीराम के नाम का गलत इस्तेमाल किया और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते हुए उनके लिए आपत्तिजनक शब्द लिखे थे।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार संकट की इस घडी में भी कांग्रेस अपनी ओछी राजनीति से बाज नहीं आ रही। जिन वाहनों की सूची प....
इसके बाद से ही ट्विटर पर उनकी आलोचना हुई और पुनिया की गिरफ्तारी की माँग की जाने लगी। FIR और कार्रवाई के डर से पुनीया ने ये ट्वीट तो डिलीट कर दिया था लेकिन इसके बाद भी वो जहर छोड़ते नजर आए। जिस पर कुछ लोगों ने उन्हें परेशान ना होने की सलाह भी दी।

दिल्ली दंगा : ‘मैं मरे हुए ठुल्ले के लिए संवेदना नहीं जता सकता’: AAP संयोजक मयूर पंघाल

मयूर पंघार
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दिल्ली पुलिस को अपने अधीन लिए जाने के लिए चीखते-चिल्लाते हैं, तो दूसरी तरफ इन्हीं की पार्टी के अन्य संयोजक मयूर पंघाल दिल्ली हिंसा में दंगाइयों द्वारा IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या किए जाने पर आपत्तिजनक बयान देकर सिद्ध कर रहे हैं कि अरविन्द केजरीवाल के अधीन पुलिस न देना पुलिस हित में हैं। दूसरे यह कि आप की निगाह में पुलिस का कोई सम्मान नहीं। मयूर की जहरीली मानसिकता इस बात को सिद्ध कर रही है। क्या अरविन्द केजरीवाल मयूर को पार्टी से निकालने का साहस कर पाएंगे या फिर अंकित के लिए उनकी संवेदना को मात्र एक छलावा माना जाए?
ऐसे समय में, जब कि दिल्ली में हो रहे दंगों में कई पुलिस अधिकारी से लेकर आम जनता अपनी जान गँवा रहे हैं, आम आदमी पार्टी और इसके नेता राजनीतिक उद्देश्यों के कारण अपनी जहरीली मानसिकता से बाज नहीं आ रहे हैं। आज सुबह ही दिल्ली के चाँदबाग इलाके में दंगाइयों द्वारा एक 26 साल के IB अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की बेरहमी से हत्या करने की खबर सामने आई। अंकित शर्मा की लाश के बारे में किसी को पता न चले इसके लिए उनकी लाश को एक गंदे नाले में छुपा दिया गया।

लेकिन आम आदमी पार्टी के संयोजक मयूर पंघाल (Mayur Panghaal) ने IB अधिकारी को अपमानित करते हुए सोशल मीडिया पर कई अपमानजनक ट्वीट किए। उसने ना सिर्फ मृतक अंकित शर्मा को ठुल्ला कहा, बल्कि यह भी कहा कि मरे हुए ठुल्ले के लिए उसे कोई अफ़सोस नहीं है।
मयूर पंघाल नवी मुंबई के आम आदमी पार्टी का नेता है। उसने फेसबुक से लेकर ट्विटर पर IB अधिकारी मृतक अंकित शर्मा के खिलाफ बेहूदे और शर्मनाक भाषा का प्रयोग किया।
एक ट्वीट में आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा- “आज अंकित शर्मा नाम का एक ठुल्ला गटर में पड़ा मिला। लेकिन किसी मरे हुए ठुल्ले के लिए मुझे कोई अफ़सोस नहीं है।”
इसके अतिरिक्त एक अन्य पोस्ट में मयूर पंघाल ने लिखा, “क्या अंकित शर्मा भी अपने साथियों की तरह दंगाइयों की मदद कर रहा था? वर्दी वाले अपराधी की मौत का कोई अफ़सोस नहीं है।”
एक और पोस्ट करते हुए आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा कि अंकित शर्मा को अपने हत्यारे साथी ठुल्लों की मदद करने का नतीजा भुगतना पड़ा है। इसके आगे उसने लिखा, “कोई ठुल्ला अपनी किस्मत से टकराए, इसके लिए मैं दुखी नहीं महसूस कर सकता हूँ। माफ़ करना अंकित शर्मा, तुम गलत लोगों की तरफ थे। जो लोग तलवार के साथ जीते हैं, तलवार से ही मारे भी जाते हैं।”
मनोज पंघाल नवी मुंबई में आम आदमी पार्टी का संयोजक है। अंकित शर्मा के खिलाफ अपने विवादित पोस्ट करने के कारण लोगों के निशाने पर आने के बाद उसने पोस्ट डिलीट कर दिया है और साथ ही अपना अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया है। हालाँकि, तब तक लोग उसके पोस्ट का स्क्रीनशॉट ले चुके थे।
मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम जब वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे, उसी समय चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया। अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा भी IB में हेड कॉन्स्टेबल हैं। उनका कहना है कि पिटाई के साथ अंकित को गोली भी मारी गई है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया है। अंकित के पिता रविंदर शर्मा ने मौके पर मौजूद मीडिया को बताया कि उनका बेटा अंकित 2017 में IB में शामिल हुआ था। अंकित की अभी तक शादी नहीं हुई थी। उनके लिए लड़की की तलाश की जा रही थी।
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