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कौन था मोसाद का एजेंट ‘M’ जिनकी झील में डूबने से हुई मौत, ईरान के जुटाए थे सारे सीक्रेट


दुनिया की और इजरायल की सबसे बड़ी जासूसी एजेंसी ‘मोसाद’ के काम करने का तरीका हमेशा एक राज रहा है। कुछ समय पहले ही इजरायल ने अपने एक ऐसे ही जाबांज एजेंट की कहानी से पर्दा उठाया है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश की सुरक्षा के लिए अंधेरे में रहकर काम किया। मई 2023 में इटली में एक नाव हादसे के दौरान इस एजेंट की जान चली गई थी।

यह एजेंट कोई साधारण व्यक्ति नहीं था, बल्कि ईरान के खतरनाक मंसूबों को रोकने में इजरायल का सबसे बड़ा हथियार था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस एजेंट की वजह से ही इजरायल को ईरान के खिलाफ चल रही गुप्त जंग में बड़ी कामयाबी मिली थी।

कौन था एजेंट ‘M’ और क्या थी उनकी पहचान?

एजेंट ‘M’ का असली नाम आज भी एक गहरा राज बना हुआ है। इजरायल की सरकार और मोसाद ने कभी भी उनकी पहचान को पूरी तरह नहीं खोला। इटली की मीडिया ने उन्हें ‘एरेज शिमोनी’ नाम दिया था, लेकिन माना जाता है कि यह उनकी असली पहचान छिपाने के लिए एक नकली नाम था। उन्होंने मोसाद में लगभग 30 साल तक अपनी सेवा दी और इजरायल की सबसे मजबूत दीवार बने रहे।

वह स्वभाव से बहुत ही शांत और नेक इंसान था। उनके दोस्तों और साथियों का कहना है कि वह हर किसी से बहुत प्यार से मिलते थे और बड़ों से लेकर बच्चों तक, सबकी भाषा समझते थे। वह दुनिया की नजरों में एक साधारण इंसान थे, लेकिन असल में वह इजरायल के सबसे बड़े रक्षक थे। उनकी मृत्यु के बाद जब उन्हें विदा किया गया, तो मोसाद के बड़े अधिकारियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए टोपी और मास्क लगाकर उन्हें अंतिम सलाम दिया।

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ईरान के खिलाफ भूमिका और ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’

एजेंट ‘M’ ने ईरान के खिलाफ चल रही लड़ाई में बहुत ही खास भूमिका निभाई थी। मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने बताया कि ‘M’ ने उन गुप्त मिशनों को संभाला था जिनकी वजह से इजरायल को ईरान पर बड़ी जीत मिली। उन्होंने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ नाम के एक बड़े अभियान में अपनी बुद्धि और नई तकनीक का ऐसा इस्तेमाल किया कि दुश्मन के पास कोई जवाब नहीं था।

मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने आगे बताया कि उन्हें ‘M’ की बहादुरी पर बहुत गर्व है। ‘M’ ने इजरायल की सरहद से दूर रहकर उन खतरों को खत्म किया जो देश की सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते थे। उनके काम करने का तरीका इतना शानदार था कि दुश्मन को पता भी नहीं चलता था और मिशन पूरा हो जाता था। वह उन चुनिंदा लोगों में से थे जिन्होंने ईरान के खतरनाक हथियारों और परमाणु मंसूबों को रोकने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

इटली की झील में वो दर्दनाक नाव हादसा

मई 2023 की एक शाम इटली की ‘लेक मैगीगोर’ झील में एक बहुत ही दुखद हादसा हुआ। एजेंट ‘M’ वहाँ किसी छुट्टी पर नहीं, बल्कि एक बहुत ही जरूरी मीटिंग के लिए गए थे। उस नाव पर उनके साथ इजरायल और इटली के कई और जासूस भी सवार थे। अचानक मौसम बिगड़ा और नाव पलट गई। इस हादसे में ‘M’ के साथ इटली के दो एजेंट और नाव के कप्तान की पत्नी की डूबने से मौत हो गई।

उस नाव पर क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे, जिस कारण यह हादसा हुआ। नाव जब डूबी तो वह किनारे से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर थी, लेकिन ‘M’ को बचाया नहीं जा सका। हादसे के तुरंत बाद इजरायल ने अपने बाकी बचे जासूसों को एक प्राइवेट जेट से तुरंत वापस बुला लिया। यह पूरी घटना इतनी रहस्यमयी थी कि इसने पूरी दुनिया की मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया।

देश की श्रद्धांजलि और आखिरी सलाम

एजेंट ‘M’ को इजरायल के अश्कलोन शहर में पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई। मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया उनके जनाजे पर भावुक हो गए और उन्हें एक सच्चा दोस्त और महान इंसान बताया। उन्होंने कहा कि ‘M’ ने अपनी पूरी जवानी देश की सेवा में लगा दी। उनकी बहादुरी की कई ऐसी कहानियाँ हैं जिन्हें शायद देश की सुरक्षा की वजह से कभी भी जनता को नहीं बताया जा सकेगा।

इजरायल के प्रधानमंत्री और बड़े नेताओं ने भी उनकी शहादत को याद किया। उन्होंने कहा कि ‘M’ जैसे गुमनाम हीरोज की वजह से ही देश आज सुरक्षित है। आज इजरायल की आधिकारिक यादगारों पर उनका नाम बड़े सम्मान के साथ दर्ज है। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए महान काम इजरायल के इतिहास में हमेशा चमकते रहेंगे।

ST महिला से रेप में गिरफ्तार आफताब अंसारी पुलिस की गिरफ्त से भागा, बाद में नदी में मिली लाश: झारखंड पुलिस ने शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं पर ही ठोक दिया केस

                                                                                                                             साभार: जी न्यूज

झारखंड के रामगढ़ में आफताब अंसारी ने एक विवाहित जनजातीय महिला का रेप किया था। इसके बाद उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बना रहा था। उसकी शिकायत होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि वह हिरासत से भाग निकला था। शनिवार (26 जुलाई 2025) को नदी में उसकी लाश मिली है। पुलिस ने उसकी शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

हिंदू जनजातीय महिला को आफताब ने नौकरी का लालच देकर अर्शी गारमेंट्स नाम की एक दुकान पर बुलाया था। बाद में दुकान के पीछे लेजाकर महिला के साथ रेप किया। मामले की सूचना मिलने पर बुधवार (23 जुलाई 2025) को ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ नामक एक संगठन से जुड़े हिंदू कार्यकर्ताओं ने आफताब अंसारी की पहले पिटाई की। इसके बाद रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

हालाँकि, आफताब पुलिस हिरासत से भाग निकला और अधिकारियों से बचने के लिए दामोदर नदी में कूद गया। इसका सीसीटीवी फुटेज भी जारी हुआ है। इसमें अंसारी को जेल से भागते हुए देखा जा सकता है।

इसके बाद शनिवार ( 26 जुलाई 2025) को आफताब अंसारी का शव उसी नदी में मिला। हालाँकि उसकी मौत से इलाके में काफी तनाव पैदा हो गया है। उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत में लेकर उसकी हत्या कर दी। स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी परिवार के समर्थन में सामने आया है और आरोप लगाया है कि आफताब की हत्या पुलिस ने की है।

आफताब अंसारी की मौत के बाद, स्थानीय पुलिस ने हिंदू संगठन ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ के 12 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं एक सदस्य राजेश सिन्हा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले एक वीडियो को ऑनलाइन पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस बीच हजारीबाग से भाजपा सांसद मनीष जायसवाल ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है कि लिखित शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए पीड़ित महिला ने मदद के लिए सिन्हा से संपर्क किया था।

इसके अलावा रविवार (27 जुलाई 2025) को बड़कागाँव के भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी के नेतृत्व में हिंदू संगठनों ने न्याय की इस चूक के खिलाफ करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया।

बोकारो रेंज के IGP क्रांति कुमार गरिदेशी ने घटना के बाद कार्रवाई में लापरवाही के लिए रामगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी प्रमोद कुमार सिंह और तीन कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।

इस बीच पार्टी के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रामगढ़ SP अजय कुमार से मुलाकात की। उन्होंने अंसारी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

इजरायल ने ईरान में की एयर स्ट्राइक, न्यूक्लियर संयंत्रों को बनाया निशाना… सेना प्रमुख-परमाणु वैज्ञानिकों की मौत: ऑपरेशन ‘राइजिंग लॉयन’ लॉन्च करके बोले PM नेतन्याहू- ये हमारी अगली पीढ़ी के लिए जरूरी

  हमले में मारे गए ईरान के चीफ कमांडर हुसैन सलामी (बाएँ), इजरायली हमले से क्षतिग्रस्त इमारत (दाएँ), (साभार : Aajtak)
इजरायल ने शुक्रवार (13 जून 2025) सुबह ईरान पर एक बड़ा हमला किया है। इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बमबारी की है। इजरायल ने ईरानी सेना के ठिकानों के साथ-साथ उनके परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इजरायली मीडिया के अनुसार, तेहरान में बड़े धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।

इजरायल ने जानकारी दी है कि 200 से ज़्यादा फाइटर जेट से ईरान में किए गए हमलों में ईरानी सेना के तीन बड़े कमांडर मारे गए हैं। इनमें ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर और ईरान के इमरजेंसी कमांड के कमांडर शामिल हैं।

 इजरायल का कहना है कि ये तीनों बहुत ही क्रूर हत्यारे थे, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खून बहाया है। इजरायल के अनुसार, इनके बिना दुनिया अब ज़्यादा सुरक्षित है।

इजरायल हमले का दावा

इजरायल ने घोषणा की है कि उसने ईरान के दर्जनों परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इस हमले में ईरान का नतांज स्थित मुख्य परमाणु संयंत्र, परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिक और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के केंद्र शामिल हैं।

इस ऑपरेशन को ‘राइजिंग लॉयन’ (Rising Lion) नाम दिया गया है और यह कई दिनों तक जारी रह सकता है।

परमाणु बम वाले वैज्ञानिकों पर हमला- बेंजामिन नेतन्याहू

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि की है। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने ईरान के परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिकों पर भी हमला किया है। बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को उनके नेतृत्व और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का सामना करने के लिए धन्यवाद दिया।

इजरायली हमले में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ कमांडर हुसैन सलामी भी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। ईरान का रेवोल्यूशनरी गार्ड देश के मुख्य शक्ति केंद्रों में से एक है। यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों के जखीरे को भी नियंत्रित करता है।

द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, इजरायल का मानना ​​है कि सलामी के अलावा, इस हमले में ईरान के सैन्य प्रमुख मोहम्मद बाघेरी, सेना के शीर्ष अधिकारियों के अन्य सदस्य और वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक भी मारे गए।

ईरान के नतांज शहर में मौजूद न्यूक्लियर साइट ध्वस्त

द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, ईरान के केंद्रीय प्रांत इस्फ़हान के नतांज शहर में विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जहां एक प्रमुख परमाणु स्थल स्थित है। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने यह जानकारी ईरानी सरकारी टीवी की रिपोर्ट के आधार पर दी है।

जानकारी के अनुसार, "नतांज में जोरदार विस्फोटों की आवाज सुनी गई," जहां मुख्य यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं में से एक स्थित है। ईरान के पास फ़ोर्डो और नतांज में दो भूमिगत परमाणु साइट हैं।

ईरान के सरकारी समाचार पत्र नूर न्यूज ने पुष्टि की कि शुक्रवार की सुबह तेहरान के उत्तर-पूर्व में धमाके की सूचना मिली है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स से पुष्टि की कि "इजरायल ने ईरान में हमले किए हैं" और स्पष्ट रूप से कहा कि इसमें "अमेरिका की कोई भागीदारी या सहायता नहीं थी।" इजरायल की ओर से किए गए इस हमले के बाद मध्य-पूर्व में तनाव में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.

नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि अगर इजरायल अभी कार्रवाई नहीं करेगा, तो अगली पीढ़ी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। बेंजामिन नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के पास अब 9 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम जमा हो गया है और इजरायल उसे ऐसा करने से रोकेगा।

इजरायल में आपातकाल और सुरक्षा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने ईरान पर हमले के बाद पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की है। इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दी है कि ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले होने की आशंका है। पूरे इजरायल में सायरन बज रहे हैं और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने सुरक्षा मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है।
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी आक्रामकता के जवाब में यह हमला किया है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

हमले में अमेरिका का रुख सामने आया है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स से पुष्टि की है कि इजरायल ने ईरान में हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि इसमें अमेरिका की कोई भागीदारी या सहायता नहीं थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की है और अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता क्षेत्र में अमेरिकी सेना की सुरक्षा है।
इस हमले के बाद इराक ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जिससे विमानों की आवाजाही रुक गई है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त यूरेनियम जमा होने की खबरें आ रही थीं, जिसे इजरायल अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है।

भारत विरोधी मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा बीमार भारतीय के लिए भारतीय विमान को इलाज के लिए इजाजत न देने से तड़प-तड़प कर मर गया बीमार बच्चा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बीमार बच्चे की मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भारत के प्लेन में ले जाने की मंजूरी ना देकर इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया है। मुइज्जू के इस निर्णय के कारण 14 साल के बच्चे को वक्त पर इलाज नहीं मिला पाया और शनिवार (20 जनवरी 2024) को उसकी मौत हो गई।

दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू को भारत विरोधी माना जाता है। वे जब से मालदीव राष्ट्रपति बने हैं, तभी से भारत द्वारा दिए गए हेलीकॉप्टरों और प्लेनों का इस्तेमाल इमरजेंसी निकासी (Emergency Evacuation) के लिए नहीं किया जाता है। इनका इस्तेमाल केवल राष्ट्रपति से सीधे मंजूरी मिलने पर ही किया जा सकता है।

चीन की कठपुतली राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस बीमार बच्चे को एयरलिफ्ट करके एक द्वीप से मुख्य द्वीप पर भारत के डोर्नियर प्लेन से ले जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। बच्चे के लिए मालदीव के रक्षामंत्री ने मुइज्जू से इसके लिए अनुमति माँगी थी। मुइज्जू के इस निर्णय के भारत ही नहीं, बल्कि मालदीव में भी आलोचना हो रही है।

ब्रेन ट्यूमर और फिर स्ट्रोक से पीड़ित इस बच्चे के परिवार ने मालदीव के एविएशन अधिकारियों पर तुरंत चिकित्सा निकासी मुहैया न कराने का आरोप लगाया है। मालदीव की समाचार एजेंसी अधाधु ने बच्चे के पिता के हवाले से लिखा है कि आइलैंड एविएशन ने परिवार की कॉल का तुरंत जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा, “स्ट्रोक के तुरंत बाद बेटे को माले ले जाने के लिए हमने आइलैंड एविएशन को फोन किया था, लेकिन उसके कर्मचारियों ने हमारी कॉल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने गुरुवार सुबह 8:30 बजे फोन का जवाब दिया। ऐसे मामलों के लिए समाधान केवल एक एयर एम्बुलेंस ही है।”

मालदीव के सांसद मीकैल नसीम ने मिहारू न्यूज की रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीट्वीट कर लिखा है, “भारत के लिए राष्ट्रपति की दुश्मनी को संतुष्ट करने के लिए लोगों को अपनी जान की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”

परिवार के आपातकालीन निकासी का आग्रह करने के 16 घंटे बाद बीमार बच्चे को माले ले जाया गया। निकासी आग्रह लेने वाली आसंधा कंपनी लिमिटेड ने दावा किया कि विमान में तकनीकी दिक्कत की वजह से देरी हुई।

इस पर रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन ने सफाई में कहा है कि 93 फीसदी निकासी अभी भी मालदीव एयरलाइंस ही करती है। उन्होंने कहा, “मेडिकल ऑपरेशन के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाओं) में राष्ट्रपति को सूचित करने या उनसे इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। यह संबंधित संस्थानों के समन्वय के जरिए किया गया काम है।”

जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद से ही भारत और मालदीव के बीच तनाव का माहौल है। वहाँ की सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। इसके बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया था, लेकिन दोनों के बीच राजनयिक टकराव अभी चल ही रहा है।

मुइज्जू की पार्टी ने बीते साल 2023 में इंडिया आउट आंदोलन के आधार पर चुनाव जीता था। इसके तहत मालदीव में तैनात लगभग 100 भारतीय सैनिकों को देश से हटाना था। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारतीय सशस्त्र बलों को मार्च 2024 तक मालदीव छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। मुइज्जू ने हाल ही में अपनी पहली आधिकारिक यात्रा चीन से शुरू की थी और वहाँ कई समझौतेे किए।