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क्या है शराब घोटाला? सिसोदिया ने 14 फोन क्यों बदले, कहाँ है सब फोन?

ईमानदारी का चोला ओढ़े घूम रहे अरविन्द केजरीवाल काफी समय से उतारा जा रहा है, लेकिन मंदबुद्धि फ्री के लालच में उसी भांति फंस रहे हैं, जैसे चूहेदान में रोटी देख चूहा फंस जाता है। दिल्लीवालों भगवान का अहसान मानो कि पूरी दिल्ली इन घोटालेबाज़ों के हाथ नहीं, वरना पंजाब से बुरा हाल होता।   
दिल्ली के शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार आरोपित मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। जहाँ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड में भेज दिया है। इसका मतलब साफ है कि अब सीबीआई सिसोदिया से और कड़ी पूछताछ करेगी।

दिल्ली के शराब नीति को लेकर केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि इससे राजस्व में 3500 करोड़ रुपए का फायदा होगा। हालाँकि इस पूरे मामले की जाँच करते हुए ईडी ने पाया है कि इस शराब घोटाले से राजस्व में 2873 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

15 पॉइंट्स में समझिए क्या है शराब घोटाला

1.) नवंबर 2021 में लागू की गई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति के तहत राज्य में कुल 849 दुकानें खोली गईं। इस शराब नीति से पहले 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट होती थीं। वहीं, घोटाले के लिए तैयार की गई शराब नीति में सभी दुकानें प्राइवेट कर दी गईं। इससे सरकार को सीधी तरह नुकसान हुआ।
2.) दिल्ली सरकार ने शराब बेचने के लिए मिलने वाले लाइसेंस की फीस कई गुना बढ़ा दी। L-1 लाइसेंस पहले ठेकेदारों को 25 लाख रुपए में मिल जाता था। हालाँकि नई शराब नीति लागू होने के बाद इसके लिए ठेकेदारों को 5 करोड़ रुपए देने पड़े। इसी तरह अन्य लाइसेंस के लिए भी फीस कई गुना तक बढ़ा दी गई। इससे छोटे ठेकेदार लाइसेंस नहीं ले सके। इसका सीधा फायदा बड़े व्यपारियों को मिला।
3.) उप मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया के कहने पर आबकारी विभाग द्वारा L-1 बिडर को 30 करोड़ रुपए वापस कर दिए। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में किसी भी बिडर का पैसा वापस करने का नियम नहीं है। लेकिन सिसोदिया के कहने पर भी यह भी हुआ।
4.) कोरोना काल में शराब कंपनियों को हुए नुकसान की भरपाई करने के नाम पर केजरीवाल सरकार ने लाइसेंस फीस में बड़ी छूट दी। वास्तव में सरकार ने कंपनियों की 144.36 करोड़ रुपए की लाइसेंस फीस माफ कर दी थी।
5.) विदेशी शराब और बियर के पर मनमाने ढंग से 50 रुपए प्रति केस की छूट दी गई। यह छूट कंपनियों को फायदा देने के लिए दी गई थी।
6.) दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति के तहत राज्य को 32 जोन में बाँटा था। इसमें से 2 जोन के ठेके एक ऐसी कंपनी को दिए गए जो ब्लैक लिस्टेड थी।
7.) शराब बेचने वाली कंपनियों के बीच कार्टेल पर प्रतिबंध होने के बाद भी केजरीवाल सरकार ने शराब विक्रेता कंपनियों के कार्टेल को लाइसेंस दिए थे। इसके तहत शराब कंपनियों को शराब पर डिस्काउंट देने और एमआरपी पर बेचने के बजाय खुद कीमत तय करने की छूट मिल गई। इसका फायदा भी शराब बेचने वालों को हुआ।
8.) नई शराब नीति को लेकर कैबिनेट की बैठकों में मनमाने ढंग से फैसले लिए गए। यही नहीं, नियमों को ताक पर रखते हुए कैबिनेट नोट सर्कुलेशन के बिना ही प्रस्ताव पास करा दिए गए।
9.) शराब विक्रेताओं को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से ड्राई डे की संख्या घटा दी गई। यह संख्या पहले 21 थी, वहीं नई शराब नीति के तहत दिल्ली में ड्राई डे महज 3 दिन ही था।
10.) शराब ठेकेदारों को पहले 2.5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। वहीं नई शराब नीति के तहत इसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इससे शराब ठेकेदारों को फायदा हुआ। वहीं सरकारी खजाने को नुकसान झेलना पड़ा।
11.) केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के 2 जोन में शराब निर्माता कंपनी को रिटेल में शराब बेचने की अनुमति दी। वहीं, नियम यह है कि शराब निर्माता और रिटेल विक्रेता अलग-अलग होगा।
12.) उपराज्यपाल से अनुमति लिए बिना ही दो बार आबकारी नीति को आगे बढ़ाया गया। साथ ही मनमाने ढंग से छूट दी गई। इसका शराब कंपनियों ने फायदा उठाया। कैबिनेट की बैठक बुलाकर ही सारे फैसले ले लिए गए।
13.) दिल्ली सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के टेंडर में नई शर्त जोड़ते हुए कहा था कि हर वार्ड में कम से कम दो दुकानें खोलनी पड़ेंगीं। इसके लिए दिल्ली के आबकारी विभाग ने भी केंद्र सरकार से अनुमति लिए बिना ही अतिरिक्त दुकानें खोलने की अनुमति दे दी। इसका शराब निर्माता कंपनियों ने फायदा उठाया।
14.) सोशल मीडिया, बैनर्स और होर्डिंग्स के जरिए शराब को बढ़ावा देने वालों पर दिल्ली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह दिल्ली एक्साइज नियम 2010 के 26 और 27 नियम का उल्लंघन है।
15.) नई आबकारी नीति लागू करने के लिए केजरीवाल सरकार ने जीएनसीटी एक्ट-1991, ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 का सीधे तौर पर उल्लंघन किया।
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शराब नीति बनाने वाले आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी हँगामा कर रही है। कहा जा रहा है कि चार्जशीट में नाम न होने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया। दरअसल, सिसोदिया की गिरफ्तारी में दिनेश अरोड़ा का नाम सबसे अहम माना जा रहा है। अरोड़ा सिसोदिया का करीबी था। अब वह सरकारी गवाह बन गया है। अरोड़ा ने ही सिसोदिया समेत कई अन्य आरोपितों के नाम लिए हैं।
कहा जा रहा है कि सीबीआई मनीष सिसोदिया से अन्य आरोपितों व डिजिटल सबूतों को लेकर भी पूछताछ कर रही है। दरअसल, शराब घोटाले के आरोपितों ने 170 फोन बदले थे। इसमें से सिसोदिया ने 14 फोन बदले थे। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इन फोन में ही अहम सबूत थे। इसलिए सिसोदिया समेत अन्य आरोपितों ने या इन्हें तो बदल दिया या तोड़ दिया। अब सीबीआई तमाम सबूतों को इकट्ठा करने के बाद सिसोदिया से पूछताछ कर रही है।

क्या डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की बारी?

सीबीआई द्वारा आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया पर कार्यवाही करने जो आम आदमी पार्टी द्वारा हंगामा क्यों किया जा रहा है, जबकि कुछ दिन पूर्व तक दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल स्वयं कहते फिर रहे थे कि अगर मनीष सिसोदिया कसूरवार है तो केंद्र सीबीआई से जाँच करवाकर क्यों नहीं जेल भेजती? ऐसे में चर्चा यह भी है कि क्या केजरीवाल को इस शराब घोटाले की नहीं थी? 

डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बारी

कानून के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अभी सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया गया है, लेकिन सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ पहली बार अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल किया था। 03 फरवरी, 2023 को पीएमएलए कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दी। चार्जशीट में सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ उनके करीबी विजय नायर, इंडोस्पिरिट्स के प्रमुख समीर महेंद्रू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ईडी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव के रूप में तैनात रहे दानिक्स अधिकारी सी अरविंद के बयान के आधार पर केजरीवाल को इस घोटाले में आरोपी बनाया। ईडी के मुताबिक दानिक्स अधिकारी अरविंद ने कहा कि उन्हें उनके बॉस सिसोदिया द्वारा केजरीवाल के आवास पर बुलाया गया था, जहां एक बैठक में उन्हें आबकारी नीति पर मंत्रियों की रिपोर्ट का एक मसौदा सौंपा गया था।

5 दिनों की CBI कस्टडी में भेजे गए मनीष सिसोदिया: अदालत में LG पर फोड़ा ठीकरा, 3 फोन कर चुके हैं नष्ट
शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को सीबीआई (CBI) ने 27 फरवरी 2023 दोपहर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान जाँच एजेंसी ने CBI के स्पेशल जज एमके नागपाल से सिसोदिया की 5 दिन की कस्टडी माँगी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सिसोदिया को 4 मार्च तक रिमांड में भेजा।

जानकारी के मुताबिक सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह पूरा मामला प्रॉफिट से जुड़ा है। इस पर हमारी आगे की जाँच होना बाकी है। आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया मंत्रियों के एक समूह को लीड कर रहे थे। शराब नीति के मॉडल को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई।

इसके जवाब में सिसोदिया के वकील दयान कृष्णन ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना ने मई 2021 में आबकारी नीति को मंजूरी दी थी। प्रॉफिट मार्जिन के बारे में सारी बहस हो रही है। उन्होंने (LG) बदलावों को लेकर अपनी रजामंदी दी थी। पहले दिन CBI ने फोन के बारे में बात की थी। कहा था कि सिसोदिया ने 4 फोन इस्तेमाल किए, 3 को नष्ट कर दिया। क्या सिसोदिया अपना फोन सेकेंड हैंड शॉप पर नहीं दे सकते हैं। वो क्या अपना फोन रखे रहते, क्या उन्हें पता था कि CBI आएगी और उन्हें गिरफ्तार करेगी।

कृष्णन ने आगे कहा कि CBI कह रही है कि जिस तरह वो चाहती है, सिसोदिया उस तरह जवाब नहीं दे रहे हैं। जहाँ तक जाँच में सहयोग की बात है तो सिसोदिया ने सहयोग किया है। उनके घर पर छापा मारा गया। उनके फोन एजेंसी के पास हैं। अब एजेंसी कह रही है कि सिसोदिया गोलमोल जवाब दे रहे हैं। उनके पास यह अधिकार है। एक व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार होते हैं।

 जाँच में सहयोग करने के लिए सिसोदिया को 19 फरवरी को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए एक सप्ताह का समय माँगा। उनके अनुरोध पर फिर नोटिस जारी किया गया। लेकिन बाद में भी वह जवाब देने में टालमटोल करते रहे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी हुई। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ AAP के कार्यकर्ताओं ने मुंबई और दिल्ली में प्रदर्शन किया।

मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार करने के बाद से सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भी निशाने पर आ गए हैं। ज्ञान गंगा नाम के ए​क ट्विटर यूजर ने ‘आप’ के नेताओं पर निशाना साधते हुए लिखा, “आप के ज्यादातर नेता भ्रष्ट हैं। चुनाव से पहले उनके पास कुछ नहीं था। चुनाव के बाद उनके पास कार, बंगले और सभी विलासिता की चीजें हैं। मनीष सिसोदिया जेल गए। लेकिन ‘आप’ के अन्य भ्रष्ट नेता अभी भी खुले घूम रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर मनीष सिसोदिया को यूजर्स लुटेरा कह रहे हैं।

वहीं, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सिसोदिया के खिलाफ CBI के पास सबूत नहीं थे। कई अफसर उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ थे। सिसोदिया को राजनीतिक दबाव में गिरफ्तार किया गया है।