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दिल्ली में सरकार बनाओ, 1 भी गैर क़ानूनी मस्जिद को नहीं छोडूंगा : प्रवेश वर्मा, बीजेपी सांसद

दिल्ली ही नहीं बल्कि ये देश के सभी राज्यों और शहरों का हाल है, हर जगह गैर क़ानूनी मस्जिदें, मदरसे, मजारों ने सरकारी भूमि पर कब्ज़ा जमाया हुआ है। 
सेक्युलर सरकारों के दौर में सरकारी जमीनों को बड़े पैमाने पर इस्लामिक माफिया और कट्टरपंथियों ने हडपा है और सरकारी जमीने हड़पने के लिए वहां पर मस्जिद, मजारें बनाई गयी है।
दिल्ली में भी काफी बड़े सरकारी भूभाग पर गैर क़ानूनी मस्जिदें बनी हुई है, और अब दिल्ली के बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने डंके की चोट पर बड़ा ऐलान किया है।
प्रवेश वर्मा ने आज ऐलान करते हुए कहा की अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार बनती है तो सारी गैर क़ानूनी मस्जिदों को हटा दिया जायेगा, प्रवेश वर्मा ने कहा की - मेरी लोकसभा सीट के इलाके में जितनी भी मस्जिदें सरकारी जमीनों पर बनी है उनमे से 1 भी मस्जिद को नहीं छोडूंगा।

जहाँ प्रवेश वर्मा के ऐलान के बाद आम लोगों ने इस बात का समर्थन किया है क्योकि लोग गैर क़ानूनी कब्जे के खिलाफ है वहीँ सेक्युलर तत्वों ने प्रवेश वर्मा को सांप्रदायिक घोषित कर दिया है।
अब देखना ये है की दिल्ली के लोग क्या चाहते है, अगर वो गैर क़ानूनी कब्जे से आज़ादी चाहते है तो प्रवेश वर्मा का समर्थन वोट के द्वारा करेंगे और अगर लोग मुफ्तखोरी और सेकुलरिज्म ही चाहते है तो गैर क़ानूनी मस्जिदें दिल्ली की भूमि पर जमी रहेंगी।
जहाँ तक अवैध कब्जे की बात है, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में यह आम बात है। जामा मस्जिद क्षेत्र जिसे भीड़भाड़ वाला क्षेत्र कहा जाता है, अगर हकीकत में देखा जाए, यहाँ इतनी भीड़ नहीं जितनी दिखती है। जिस दिन दुकानदारों के अवैध कब्जे हटा दिए जाएंगे, भीड़ अपने आप झंट जाएगी। एक अवैध अधिक्रमण दूसरे दो/तीन फुट आगे तक सामान रखना, सरकारी जमीन पर दुकानें खोलना आदि के कारण ट्रैफिक और पैदल चलने वालों को जो समस्या होती है, उस ओर किसी सरकार एवं पार्टी ने अपने वोटों के हित के कारण कभी गंभीरता से नहीं लिया। पटरियों पर कारें और रिक्शा खड़े रहने से पैदल चलने वालों को सड़क पर ही चलना पड़ता है। इस विषय पर कई बार इस गंभीर समस्या पर लिखता रहा हूँ।     

‘सरकार में आते ही दिल्ली की सभी 54 अवैध मस्जिद-मदरसे, कब्रिस्तान को गिराएगी BJP’

दिल्ली मस्जिददिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिदों और कब्रिस्तानों का मसला एक बार फिर से उठा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने शनिवार (जनवरी 18, 2020) को बयान दिया है कि अगर भाजपा दिल्ली में सत्ता में आती है, तो शहर की सरकारी जमीनों को धार्मिक संरचनाओं के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।

कोई भी मन्दिर या गुरुद्वारा अवैध जमीन पर नहीं 
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए मतदान फरवरी 08, 2020 को होगा और 11 फरवरी को चुनाव परिणाम की घोषणा होगी। BJP सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ट्वीट में लिखा है, “दिल्ली में भाजपा की सरकार बनते ही उन सरकारी जमीनों को खाली कराया जाएगा, जिन पर धार्मिक स्थलों का निर्माण किया गया है। दिल्ली में 54 से ज्यादा मस्जिद, मदरसे सरकारी जमीन पर बने होने की शिकायत अभी तक आई है। सूची दिल्ली के उपराज्यपाल को पहले ही दी जा चुकी है।”
गत सोमवार को ही वर्मा ने कहा था कि अगर उन्हें दिल्ली में किसी भी मंदिर या गुरुद्वारा द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मिलेगी तो वह इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाएँगे। हालाँकि, उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा, “लेकिन कोई भी मंदिर या गुरुद्वारा सरकारी जमीन पर बना हुआ नहीं मिला। सिर्फ मस्जिद ही सरकारी जमीन पर बने हुए मिले हैं।”
दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तान का अवैध कब्ज़ा 
लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले दिल्ली में केजरीवाल सरकार पर सरकारी जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को लेकर चुप्पी साधे रहने को लेकर दबाव बनाया गया था। दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने जुलाई 11, 2019 को सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की थी।
इस दौरान 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी गई थी, जिन पर अवैध रूप से मजार, मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए हैं। उपराज्यपाल ने कहा था कि इन सभी जगहों की पड़ताल की जाएगी और अगर ऐसा कुछ पाया जाएगा तो उन कब्जों को हटाया जाएगा।