Showing posts with label karnataka govt in crisis. Show all posts
Showing posts with label karnataka govt in crisis. Show all posts

क्या से क्या हो गया! कर्नाटक सरकार पर संकट, ICU में

क्या से क्या हो गए देखते-देखते! जब कुमारस्वामी का शपथग्रहण बना था विपक्षी एकता की मिसाल, PM मोदी को हराने का था सपना
कर्नाटक विधानसभा में हुए महागठबन्धन में पड़ी दरार खाई का रूप धारण कर रही है। 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनाव पूर्व गठबन्धन से लेकर महागठबन्धन होने का खूब शोर मच रहा था। जनता को मोदी सरकार के वापस आने पर सन्देह होने लगा। लेकिन लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही गठबंधन धराशाही होने लगे। झूठे सब्जबाग बंजर होने लगे, जिसको देखो अब अपनी दुकान यानि पार्टी बचाने में व्यस्त है, गठबंधन की चिन्ता नहीं। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव(उपरोक्त चित्र) में महागठबंधन के कसीदे पढ़े जा रहे थे। जो लोकसभा चुनाव होने पर मात्र गठबंधन बनकर रहा गया और अब उसमें भी पड़ी दरार खाई का रूप धारण कर रही है। जिसे पाटना निकट भविष्य में तो संभव नहीं।  
कर्नाटक के मंत्री एवं निर्दलीय विधायक एच. नागेश ने एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में चल रही गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और इसके साथ ही उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस नए घटनाक्रम के चलते राज्य सरकार पर संकट और गहरा गया है. उधर कांग्रेस के सांसदों ने संसद में भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश रही है और इसके लिए वह राजभवन का इस्तेमाल कर रही है. वहीं डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस के सभी मंत्री इस्तीफा दे देंगे और उनकी जगह पर नाराज विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. फिलहाल देखने वाली बात यह होगी कि राज्यपाल को इस्तीफा सौंप चुके विधायक कितनी सुनते हैं. लेकिन इस नए घटनाक्रम से इतर अगर हम पीछे जाएं तो पता चलेगा कि जबसे राज्य में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी है वह लगातार छिचकोले खा रही है. साल 2018 में हुए चुनाव में बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसको 104 सीटें मिली थीं. लेकिन वह बहुमत से 10 सीटें पीछे रह गई. तत्कालीन सीएम सिद्धारमैया की अगुवाई में कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलीं. खास बात यह है कि राज्य में तीनों ने ही अलग-अलग चुनाव लड़ा था.  इसके बाद बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका दिया उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली. कई दिनों तक चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद जिसमें कांग्रेस को अपने विधायकों को होटल तक में बंद करना पड़ा, के बाद बीजेपी को बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाई और विधानसभा में बिना शक्ति परीक्षण के ही सीएम पद से इस्तीफा दे दिया.
इसके बाद राज्य में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाने की घोषणा कर दी. दोनों की सीटें मिलाकर बहुमत के जरूरी आंकड़े से ज्यादा थीं. कांग्रेस ने सीएम पद का दावा छोड़ते हुए जेडीएस नेता कुमारस्वामी को सीएम बनाने की घोषणा कर दी. यह एक बड़ा घटनाक्रम था जिसे कांग्रेस के लिए राजनीतिक संजीवनी माना गया क्योंकि कुमारस्वामी का शपथग्रहण विपक्षी एकता का भी मंच बन गया था. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के तमाम दिग्गज पहुंचे थे. सरकार बनने के बाद कुछ दिन तक तो सब ठीक था लेकिन अंदर ही अंदर मंत्रिमंडल के बंटवारे और डिप्टी सीएम पद के लिए खींचतान जारी थी. कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता खुद को उपेक्षित समझ रहे थे. इसी बीच कई मु्द्दों पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे और कुमारस्वामी ने राहुल गांधी से मिलकर कांग्रेस नेताओं को समझाने के लिए कहा. लेकिन हालात नहीं संभले और एक दिन सीएम कुमारस्वामी ने सार्वजनिक मंच पर रोते हुए कहा, 'आप मेरा मान-सम्मान रखने के लिए गुलदस्ते के साथ खड़े हैं, क्योंकि आपका भाई सीएम बन गया है और आप सभी खुश हैं, लेकिन मैं नहीं हूं. मुझे गठबंधन सरकार का दर्द पता है. मैं विषकांत बन गया और इस सरकार के दर्द को निगल लिया.'
Embedded video
: Karnataka CM HD Kumaraswamy breaks down at an event in Bengaluru; says 'You are standing with bouquets to wish me, as one of your brother became CM & you all are happy, but I'm not. I know the pain of coalition govt. I became Vishkanth&swallowed pain of this govt' (14.07)
सरकार में अंदर ही अंदर ही उबाल था लेकिन किसी तरह से वह चल रही थी. इसके बाद लोकसभा चुनाव आया और दोनों पार्टियों के गठबंधन पर फिर एक संकट आ गया. कांग्रेस के रवैये से सीएम कुमारस्वामी नाराज थे क्यों कि कांग्रेस के नेता अब उनकी सरकार गिराने की धमकी भी दे रहे थे. इस पर कुमारस्वामी ने खुले मंच पर कांग्रेस से कहा कि वह जेडीएस के साथ चौथे दर्जे के चपरासी की तरह न पेश आए. इतना ही नहीं मंच पर प्रचार के दौरान फिर एक बार कुमारस्वामी के आंसू निकल आए. इस बार उन्होंने कहा, हर रोज मीडिया में कहा जा रहा है कि कल मैं चला जाउंगा (सीएम के पद से). लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से सारी कसर पूरी दी. राज्य की 28 सीटों में बीजेपी ने 25 सीटें जीत लीं और एक सीट भी उसके समर्थन से प्रत्याशी जीती. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास सिर्फ 2 ही सीटें आईं. पीएम मोदी पहले से और अधिक ताकतवर बनकर उभरे. उसी के बाद से माना जाने लगा था कि कर्नाटक सरकार अब ज्यादा दिन की सरकार नहीं है. और अब 11 विधायक इस्तीफा देकर मुंबई के होटल में ठहरे हैं और कांग्रेस-जेडीए मिलकर सत्ता बचाने के लिए जूझ रहे हैं.
क्या है अभी का समीकरण 
कर्नाटक विधानसभा में कुल 225 सीटें हैं. इसमें 1 सीट नामांकित हैं. वर्तमान में 78 सीट कांग्रेस, 37 जेडीएस, बसपा 1, निर्दलीय-2, बीजेपी 105 और अन्य अन्य के खाते में कुल 1 सीट है. गठबंधन का दावा था कि उसके पास 118 विधायक हैं. अब 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधायकों की संख्या 210 और बहुमत के लिए 106 विधायकों की जरूरत होगी. बीजेपी के पास पहले ही 105 विधायक हैं.

कैसे बच सकती है सरकार 
अगर कांग्रेस अपने नाराज विधायकों को यह समझाने में कामयाब हो जाती है कि अगर चुनाव हुए तो सबकी हार होगी क्योंकि लोकसभा चुनाव नतीजे सभी देख चुके हैं. इसलिए साथ बने रहने में भी भलाई है.

कर्नाटक सरकार में मंत्री और निर्दलीय विधायक एच नागेश ने दिया इस्तीफा​

कर्नाटक में गरम है माहौल; गठबन्धन सरकार पर संकट के बादल

डी के शिवकुमार
भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रचंड बहुमत से वापसी करने पर देश के कई नेताओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। 
कर्नाटक में सियासी उठापठक जारी है। राजनीतिक हलचल और संकट का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। कांग्रेस के विधायक खुद इस बात के गवाह बन रहे हैं कि राज्य में सरकार शायद लंबे समय तक चल पाए। इन सबके बीच कर्नाटक सरकार में मंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि यह मुझे पता है कि कौन जीता और किसके खाते में हार आई है। सामान्य तौर पर उन्हें कुछ संदेश मिलते हैं। लेकिन वो गांधी जी के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं। जैसे बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो और बुरा मत देखो। 
Karnataka Minister DK Shivakumar in Benagluru: I just know who won and who lost. I don't have further details. Usually I get messages, I don't know anything further. I'm just following Gandhi ji's theory "Don't hear bad, don't speak bad and don't see bad." (27.05.2019) pic.twitter.com/RAChLT9GFX
— ANI (@ANI) May 28, 2019
कर्नाटक में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अपनी सक्रियता बढ़ा दी है जिससे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के कान खड़े हो गए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि कांग्रेस के करीब 15 से 20 विधायक उसके संपर्क में हैं। भाजपा के इस दावे के बाद कांग्रेस हरकत में आ गई है और उसने 29 मई को विधायकों की आपात बैठक बुलाई है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक इस्तीफा दे सकते हैं जिसके बाद कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी। 
कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर संकट के बादल पहले भी मंडराते रहे हैं लेकिन गठबंधन ने हर बार अपनी सरकार संभाल ली है। इस सरकार में बीच-बीच में असंतोष के स्वर भी सुनाई दिए। सरकार बनने के पूर्व से ही कांग्रेस और जेडी-एस नेताओं के बीच तालमेल की कमी दिखी है और दोनों दल के नेताओं ने एक दूसरे के खिलाफ बयान दिया।
सरकार पर मंडराते खतरे को कांग्रेस ने अपनी 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' से दूर करते आई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे उस पर भारी पड़ सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में देख उसके कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। 
कर्नाटक में भाजपा नेताओं का दावा है कि कांग्रेस के करीब 20 विधायक उसके संपर्क में हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के दर्जन विधायक अपने पद से इस्तीफा से दे सकते हैं। विधायकों के इस्तीफे के बाद कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि भाजपा राज्य में सरकार बनाने की कोशिश नहीं करेगी बल्कि वह राज्य में नए सिरे से चुनाव कराएगी। कर्नाटक की लोकसभा की 28 सीटों में से भाजपा ने इस बार 25 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस और जेडीएस के खाते में एक-एक सीटें आई हैं। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ है।
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद (एस) सरकार की चिंताओं को और बढ़ाते हुए कांग्रेस नेता के एन रजन्ना ने मई 27 को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर पर तीखा निशाना साधा और दावा किया कि राज्य की मौजूदा गठबंधन सरकार 10 जून के बाद नहीं रहेगी। परमेश्वर पर निशाना साधते हुए रजन्ना ने कहा, ‘यह सरकार अब तक गिर गयी होती...मुझे पता चला है कि चूंकि मोदी 30 मई को शपथ ले रहे हैं (प्रधानमंत्री के रूप में), ऐसे में उनकी पार्टी (भाजपा) में फैसला किया गया है कि कुछ भी नहीं किया जाए। यह सरकार अधिक से अधिक 10 जून तक रहेगी। 

मैं छह महीने से चुप था, पर अब नहीं : कांग्रेस पर भड़के एचडी देवगौड़ा

अब मैं चुप नहीं बैठूंगा
आज हर पार्टी अपने मतभेद भुलाकर गठबन्धन कर रहे हैं, लेकिन क्यों कांग्रेस से दूरी बनाये हुए हैं? क्योकि पूर्व में हुए कांग्रेस के साथ हुए गठबन्धन किसी को रास नहीं आये। कांग्रेस ने हमेशा एक हसीना की तरह व्यवहार किया, मतलब जिस तरह कोई हसीना अपनी जरा-सी मांग या अपने इशारे पर अपने आशिक द्वारा नाचने से मना करने पर, उस आशिक को छोड़ दूसरे के आगोश में चली जाती है, ठीक वही स्थिति कांग्रेस की रही है। अब कर्नाटक में ही देख लो इसका प्रमाण, किस तरह जेडीयू सरकार को नचाने में लगी है। ऐसी स्थिति में कर्नाटक सरकार कितने दिन इस कलह में निकालती है, कहना मुश्किल है। 
जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा है कि कांग्रेस का बर्ताव एक सहयोगी के तौर पर अच्छा नहीं है। देवगौड़ा ने कहा कि छह महीने से कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन की सरकार है और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री हैं लेकिन कांग्रेस का रवैया ऐसा नहीं है जैसा कि एक सहयोगी का होना चाहिए। 
अब मैं चुप नहीं बैठूंगा 
अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में देवगौड़ा ने कहा, कुमारस्वामी के मुख्यमन्त्री बनने के बाद पिछले छह महीने के बहुत सारीबातें हुई हैं लेकिन मैं लगातार चुप रहा लेकिन अब शांत नहीं बैठूंगा। गठबंधन सरकार चलाने का आखिर यह कौन सा तरीका है जहां पर हर रोज अपने सहयोगी को यह अनुरोध करना पड़ता है कि वे कोई असंसदीय टिप्पणी न करें।
अवलोकन करें:--
इस वेबसाइट का परिचय
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
एक तरफ भाजपा को शिकस्त देने कांग्रेस और अन्य दल एक दूसरे के साथ गठबंधन में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में हुए .....

कांग्रेस अपने नेताओं को रोके 
 कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को सुनाया
देवगौड़ा ने कहा, कांग्रेस के साथ हम आगे बढ़ना चाहते हैं, हम नहीं चाहते कि कांग्रेस के साथ संबंध खराब हों। कांग्रेस अगर दोस्ती चाहची है तो ये जरूरी है कि खराब भाषा बोलने वाले अपने विधायकों और नेताओं को रोके नहीं तो हम भी इसे नहीं सहेंगे।कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को सुनाया 
इसी कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस को बर्ताव में सुधार लाने के कहा। उन्होंने कहा, वो उन लोगों में से नहीं हैं जो कुर्सी के लालच में किसी से कुछ भी सुनेंगे और चुप रहेंगे। मैं सीएम की कुर्सी की क्या परवाह करूंगा जब उस मेरे पिता ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक छोड़ दी थी। इससे पहले भी कुमारस्वामी कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए इस्तीफे की बात कही थी। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही दोनों पार्टियों में कभी मंत्रिमंडल तो कभी दूसरे मुद्दों को लेकर लगातार टकराव होता रहा है।

कर्नाटक: गठबंधन सरकार में नहीं सबकुछ ठीक, कुमारस्वामी पद छोड़ने को तैयार

HD Kumaraswamy
एक तरफ भाजपा को शिकस्त देने कांग्रेस और अन्य दल एक दूसरे  के साथ गठबंधन में व्यस्त हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक में हुए जेडीएस के साथ कांग्रेस गठबंधन में दरार पड़ गयी है। अब देखना यह है कि आखिर कब तक कर्नाटक में सरकार चलती है। 
कांग्रेस इतिहास के अवलोकन करने पर यही ज्ञात होता है कि सरकारें गिराने में कांग्रेस का इतिहास रहा है। कर्नाटक में कोई नहीं बात नहीं। 
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है। जनवरी 28 को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने यहां तक कह दिया कि मैं पद छोड़ने के लिए तैयार हूं। इसके बाद से कांग्रेस बैकफुट पर है और स्थिति संभालने में लगी हुई है। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि सहयोगी JDS से कोई परेशानी नहीं है और वह मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से बात करेंगे।
मीडिया से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, 'आप (मीडिया) परेशानी पैदा करने वाले लोग हैं। आप एक व्यक्ति, दूसरे व्यक्ति और फिर तीसरे व्यक्ति से पूछते हैं। कोई परेशानी नहीं है; मैं एचडी कुमारस्वामी से बात करूंगा।' 
दरअसल, जनवरी 28 को कुमारस्वामी ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, 'कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि सिद्धारमैया उनके नेता हैं। कांग्रेस नेताओं को इन मुद्दों पर संज्ञान लेना होगा। मैं इसके लिए संबंधित व्यक्ति नहीं हूं। अगर वे इसे जारी रखना चाहते हैं, तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं। वे लाइन पार कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को अपने विधायकों को नियंत्रित करना चाहिए।' 


Karnataka Dy CM on 'Congress MLAs say Siddaramaiah is their leader'': Siddaramaiah has been best CM. He is our CLP leader. For the MLA, he (Siddaramaiah) is the CM. He has expressed his opinion. What is wrong in that? We are all happy with him (Karnataka CM HD Kumaraswamy).
जनवरी 27 को एक कार्यक्रम में एसटी सोमशेखर, एमटीबी नागराज सहित कुछ कांग्रेस विधायकों ने कथित तौर पर कहा कि वे केवल सिद्धारमैया को अपना नेता मानते हैं, एचडी कुमारस्वामी को नहीं। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी परमेस्वर ने कहा कि अपनी राय व्यक्त करने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, 'सिद्धारमैया सर्वश्रेष्ठ सीएम रहे हैं। वह हमारे CLP नेता हैं। विधायक के लिए वह (सिद्धारमैया) सीएम हैं। उन्होंने अपनी राय व्यक्त की है। इसमें गलत क्या है? हम सभी कुमारस्वामी से खुश हैं।' 


Former Karnataka CM & Congress leader Siddaramaiah on 'Congress MLAs say Siddaramaiah is their leader': You (media) are the people who create trouble. You ask one person, then second person and then third person. There is no trouble, I will speak to HD Kumaraswamy
वहीं कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'उन्हें (कर्नाटक कांग्रेस के विधायकों को) मीडिया के सामने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। बीजेपी-आरएसएस से लड़ने के लिए हम सब साथ आए हैं। किसी भी सदस्य के लिए पार्टी आलाकमान की इच्छाओं के खिलाफ बोलना उचित नहीं है। इस तरह की घटनाओं से गठबंधन में भ्रम पैदा होगा।'

नौ महीने पहले कांग्रेस-जेडीएस ने बनाई सरकार


कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 विधायकों की जरूरत है. अभी कुमारस्वामी सरकार के साथ कांग्रेस के 80 और जेडीएस के 37 यानी कुल 117 विधायक हैं. जबकि 2 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया है, वहीं बसपा का 1 विधायक पहले ही समर्थन वापस ले चुका है. वहीं बीजेपी के पास अभी 104 विधायक हैं।

कर्नाटक की राजनीति में उठापठक ; सरकार बचाने की कवायद शुरू

कर्नाटक में सियासी 'नाटक' एक बार फिर शुरू हो गया है। यहां कि सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडी (एस) सरकार से दो निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। यह एचडी कुमारस्वामी सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायकों के नाम एच नागेश और आर शंकर हैं। 
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बीच कांग्रेस के कुछ विधायकों ने मुंबई में कथित रूप से भाजपा नेताओं से मुलाकात की है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने जनवरी 15 को गुरुग्राम में अपने विधायकों के साथ बैठक की। कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का आरोप है कि भाजपा कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। 
विधायक एच नागेश ने कहा, 'राज्य में अच्छी एवं स्थाई सरकार के लिए मैंने अपना समर्थन दिया था लेकिन यह सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। गठबंधन के साथियों के बीच कोई तालमेल नहीं है। इसलिए मैंने स्थाई सरकार के गठन के लिए भाजपा के साथ जाने का फैसला किया है।'View image on Twitter
View image on Twitter
Independent MLA, R Shankar: Today is Makar Sankranti, on this day we want a change in the govt. The govt should be efficient, so I am withdrawing my support (to the Karnataka govt) today.
निर्दलीय विधायक आर शंकर ने कहा, 'आज मकर संक्रांति है। आज के दिन हम सरकार में बदलाव चाहते हैं। सरकार सक्षम होनी चाहिए। मैं कर्नाटक सरकार से समर्थन वापस ले रहा हूं।' इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह सरकार गिराने के लिए उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि दो विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद भी उसकी सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है। 
कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार गिरने की अटकलों पर सीएम एचडी कुमारस्वामी ने खुद विराम लगा दिया है। सीएम कुमारस्वामी ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा है कि, ‘कांग्रेस के जिन तीन विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की बात हो रही है, वे हमारे संपर्क में हैं।  
कुमारस्वामी ने कहा कि ये विधायक मुझे बताकर मुंबई गए हैं। मेरी सरकार को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। मैं जानता हूं कि भाजपा हमारे विधायकों को लुभा रही हैं, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। मैं सरकार संभालने में पूरी तरह सक्षम हूं, मीडिया को इसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए
इससे पहले जनवरी 13 को मीडिया में खबर आने के बाद ये अटकलें तेज हो गई थी कि कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार 17 जनवरी से पहले गिर सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि भाजपा, कर्नाटक की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन वो इस प्रयास में कभी कामयाब नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के तीन विधायक मुंबई की एक होटल में भाजपा नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं।