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'जन-गण-मन' बीच में रोक 'वंदे मातरम' गाने लगे पार्षद

इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कुछ लोगों की गफलत के कारण बुधवार को विवाद खड़ा हो गया, जब राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' का गायन बीच में रोककर अचानक राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाना शुरू कर दिया. इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसके एक दृश्य में महापौर और स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ भी दिखायी दे रही हैं. इंदौर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है..
चश्मदीद सूत्रों ने बताया कि नगर निगम के बजट सम्मेलन की शुरुआत के दौरान पार्षदों और अन्य लोगों ने राष्ट्रगान (जन-गण-मन) गाना शुरू कर दिया. वहां उपस्थित अन्य लोगों ने भी इसका समवेत स्वर में अनुसरण शुरू कर दिया. लेकिन गलती का अहसास होते ही निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के सम्मेलन में कुछ ही सेकंड बाद 'जन-गण-मन' को अधूरा छोड़ दिया गया और अचानक 'वंदे मातरम' का गायन शुरू कर दिया गया. फिर राष्ट्रगीत को पूरा गाया गया.




@BJP4India @BJP4MP controlled Indore Municipal Corporation leaders confused over recital of the national anthem ''Jana gana mana'' for singing of ''Vande Mataram? @JVSinghINC @INCIndia @INCMP @MehboobaMufti @MisaBharti @avinashonly @rahulreports @MickyGupta84 @digvijaya_28
सूत्रों ने बताया कि नगर निगम के बजट सम्मेलन की शुरुआत के दौरान पार्षदों और अन्य लोगों ने राष्ट्रगान (जन-गण-मन) गाना शुरू कर दिया. वहां उपस्थित अन्य लोगों ने भी इसका समवेत स्वर में अनुसरण शुरू कर दिया. लेकिन गलती का अहसास होते ही निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के सम्मेलन में कुछ ही सेकंड बाद 'जन-गण-मन' को अधूरा छोड़ दिया गया और अचानक 'वंदे मातरम' का गायन शुरू कर दिया गया. फिर राष्ट्रगीत को पूरा गाया गया.
बहरहाल, कुछ विपक्षी पार्षदों ने नगर निगम के सम्मेलन में हुई चूक को राष्ट्रगान के अपमान का मामला करार देते हुए दोषी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है. इस बारे में पूछे जाने पर नगर निगम के सभापति अजय सिंह नरूका ने कहा, 'यह चूक संभवतः किसी पार्षद की जुबान फिसलने से हुई. हालांकि, इस चूक के पीछे मुझे किसी की कोई दुर्भावना प्रतीत नहीं होती. लिहाजा इस मामले को बेवजह तूल नहीं दिया जाना चाहिये." 
उन्होंने कहा कि यह पुरानी परंपरा है कि नगर निगम के सत्र की शुरूआत में राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान "जन-गण-मन" के गायन के साथ सदन का सत्रावसान होता है.

मनोज तिवारी ने सील हुए घर का तोड़ा ताला

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली में सीलिंग से आम आदमी और व्यापारी वर्ग काफी परेशान है। सीलिंग का मुद्दा ऐसा है जिसे लेकर आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस हमेशा एक दूसरे की आलोचना करते रहे हैं। इन सबके बीच दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो कथित रूप से एक सीलबंद घर ताला तोड़ रहे हैं। यह घर मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी का बताया जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति गरमा गई है। सीलिंग के मुद्दे को लेकर अब आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने इस वीडियो को दिल्ली के भाजपा शासित नगर निगमों से जोड़ दिया है। 
बताया जा रहा है कि तिवारी अपने संसदीय क्षेत्र के गोकलपुरी में सीलिंग को लेकर आयोजित महापंचायत में शामिल होने गए थे। जहां लोगों ने सीलिंग से निजात दिलाने की मांग की। इस पर तिवारी ने एक मकान पर पूर्वी दिल्ली नगर निगम की ओर से लगाई गई सील को तोड़ दिया।
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इतनी भीड़ और पुलिस  के बीच मकान मालिक क्या कर सकता है? निगम आयुक्त डॉ सिंह को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए। 
जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले निगम की ओर से उस मकान को अवैध निर्माण के चलते सील कर दिया गया था। वहीं कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान में व्यवसायिक कार्य भी होता था। इस मामले में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त डा. रणबीर सिंह ने बताया कि इस मामले में संपत्ति मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी, क्योंकि नियमानुसार संपत्ति पर लगी सील की सुरक्षा की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है। डा. सिंह का कहना है कि मामले में नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
डॉ सिंह का  रवैया पक्षपातपूर्ण है, मकान मालिक के विरुद्ध कार्यवाही क्यों? सील तोड़ने वाले के विरुद्ध क्यों नहीं? क्योकि सील तोड़ने वाला सत्तारूढ़ पार्टी का सांसद है? कानून हाथ में किसने लिया, मकान मालिक ने या भाजपा सांसद ने? 
मनोज तिवारी ने कहा कि, कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल अब अनाधिकृत को अधिकृत के तौर पर परिवर्तित करने के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वह घर अनधिकृत कॉलोनी में था जिसे सील किया गया, लेकिन वहां करीब 1000 घर है ऐसे में सिर्फ एक घर को ही क्यों सील किया गया? मैं किसी एक को निशाना बनाने के सिस्टम का विरोध करता हूं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब सीलिंग ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘ये ख़द ही सुबह सीलिंग करते हैं और खुद ही शाम को जाकर ताला तोड़ देते हैं। इन्हें क्या लगता है कि लोग बेवकूफ हैं? नोटबंदी, GST और अब सीलिंग करके भाजपा ने पूरी दिल्ली को बर्बाद कर दिया।’
आम आदमी पार्टी सीलिंग का मुद्दा जोर-शोर से उठाए हुए है। वहीं सीलिंग के मुद्दे पर ‘न्याययुद्ध’ अभियान चला रही कांग्रेस ने सीलिंग अभियान से प्रभावित लोगों को बचाने में विफल रहने पर तिवारी समेत भाजपा सांसदों के इस्तीफे की मांग की है।
आज जनता के मष्तिक में प्रश्न कौतुहल कर रहा है कि नेता क्या कानून की धज्जियाँ उड़ाने के लिए हैं? जिस सील को भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने तोडा है, क्या उन्होंने ऐसा करने से पूर्व न्यायालय से अनुमति ली थी? यदि नहीं, तो क्या कोर्ट मनोज तिवारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही करेगी? यदि नहीं, तो क्यों? 
Image result for केजरीवाल बिजली का तार जोड़ते हुएज्ञात हो, दिल्ली का मुख्यमन्त्री बनने से पूर्व, अरविन्द केजरीवाल ने बिजली विभाग द्वारा बिजली चोरी या बिल का भुगतान न किए जाने के कारण काटे कनेक्शनों को जोड़ने पर क्या कार्यवाही की गयी? यदि मनोज तिवारी या अरविन्द केजरीवाल की बजाए किसी आम नागरिक ने यही काम किया होता, शायद ही कोई नेता उस नागरिक के पक्ष में खड़ा होता। और कानून अपने हाथ में लेने के आरोप में उस नागरिक का जलूस निकाल दिया होता। लगता है, कानून केवल जनता को डराने एवं धमकाने के लिए हैं, नेताओं के लिए कोई कानून नहीं।