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भारत से लड़ने के लिए पाकिस्तानी सेना के पास न टैंक, न डीजल: कमर जावेद बाजवा, पूर्व आर्मी चीफ

पाकिस्तान ने मान लिया है कि वो भारत से युद्ध करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान के दो पत्रकारों ने दावा किया है कि देश के पूर्व सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) ने एक बार कहा था कि उनके देश की सेना के पास ऐसा टैंक नहीं है, जो भारत के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जा सके। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

पाकिस्तान के दो प्रमुख पत्रकार- हामिद मीर और नसीम ज़हरा ने अपने एक टेलीविजन शो के दौरान पुरानी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर खुलासा किया। उस दौरान तत्कालीन सेना प्रमुख बाजवा ने कम-से-कम 25 पत्रकारों से कहा था कि पाकिस्तानी सेना और युद्धक टैंक भारतीय सेना के खिलाफ लड़ने की स्थिति में नहीं हैं।

पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने शो के दौरान कहा कि बाजवा ने कहा था कि सैनिकों की आवाजाही के लिए कोई गाड़ी नहीं है और ना ही डीजल है। इस पर नसीम जाहरा ने कहा कि उस प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वह मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि बाजवा की टिप्पणी से वह नाराज़ हो गई थीं। ऐसे सेना प्रमुख का तो कोर्ट मार्शल होना चाहिए।

शो के दौरान मीर ने यह भी दावा किया कि जनरल बाजवा ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ ‘डील’ की थी। मीर ने यह भी आरोप लगाया कि बाजवा भारत के साथ युद्धविराम समझौते के लिए तैयार थे और वह बदले में नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करना चाहते हैं।

पत्रकार ने दावा किया, “इसके तहत साल 2021 में भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के महानिदेशक 24-25 फरवरी 2021 की आधी रात से नियंत्रण रेखा और अन्य सभी क्षेत्रों में सभी समझौतों और संघर्ष विराम का कड़ाई से पालन करने के लिए सहमत हुए।” मीर ने यह भी दावा किया कि जनरल बाजवा ने NSA अजीत डोभाल के साथ गुप्त वार्ता भी की थी।

मीर ने ने यह भी कहा कि जनरल बाजवा ने पीएम नरेंद्र मोदी की यात्रा का कार्यक्रम यह जानते हुए भी तय किया था कि उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में हवाई हमला किया। जिस वक्त पुलवामा में हमला हुआ था और भारत ने एयर स्ट्राइक की थी, उस वक्त पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा ही थे।

पूंछ में आतकी हमले के बाद पाकिस्तान ने सर्जिकल स्ट्राइक का डर जताया था। हमले में 5 सैनिकों के बलिदान होने के बाद पड़ोसी देश के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने यह डर जाहिर की है। बासित ने कहा कि फिलहाल ऐसा डर नहीं है, लेकिन अगले साल चुनावों से पहले ऐसा हो सकता है।

अब्दुल बासित ने कहा था, “पाकिस्तान में लोग भारत द्वारा एक और सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अब वह ऐसा करेगा, क्योंकि वह इस साल SCO की बैठक और जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जब तक भारत अध्यक्षता कर रहा है, तब तक ऐसा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन अगले साल चुनावों के दौरान भारत फिर से ऐसा कर सकता है। यह भारत में चुनावों से ठीक पहले हो सकता है। भारत जानता है कि हम कहाँ खड़े हैं।” बासित यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

जब मनेगा 370 हटने और भूमि पूजन का जश्न, क्या कर रहा होगा पाकिस्तान

राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पीएम ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जिन हिन्दुओं को लेशमात्र भी अपने शास्त्र, वेद एवं अन्य हज़ारों ग्रंथों का ज्ञान हो, ज्ञात होगा कि जब भी ऋषि-मुनि यज्ञ एवं अनुष्ठान आदि करते थे, राक्षस और दुरात्माएं विध्न डालने आते थे। उसी भांति फिरकापरस्त एवं साम्प्रदायिक लोगों द्वारा ही संविधान की आड़ लेकर जनता में भ्रम फ़ैलाने का तानाबाना बुनकर देश में डर का माहौल बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है, निकट भविष्य में यही विरोध उनको काँटों भरी शैया प्रदान करेगा, इस कटु सच्चाई से उन्हें अच्छी तरह अवगत होना चाहिए। 
तरह-तरह के अवरोध उत्पन्न करना और जनता को साम्प्रदायिकता की लगने वाली आग से डराना आदि खेल न देशहित में हैं और न ही उस जनमानस के जो उन्हें अपना नेता मान सिर-माथे बैठाती है। जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो रहा था तब भी तुष्टिकरण पुजारी जवाहर लाल नेहरू ने इस घिनौने खेल से डराने की कोशिश की थी और राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को भी उद्घाटन में जाने से रोकने के लिए इसी घिनौना खेल से भयभीत करवाने का असफल प्रयास किया था, और डॉ राजेंद्र बाबू नेहरू द्वारा दिखाए डर को दरकिनार कर उद्घाटन करने महादेव की शरण में पहुँच गए। 
देश में 5 अगस्त 2020। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन का दिन। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने की पहली वर्षगांठ। कुछ दस्तावेज सामने आए हैं जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान सेना ने भारत विरोधी लंबा-चौड़ा प्लान बनाया है।

 5 अगस्त तक भारत को बदनाम करने की तैयारी
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करने वाले हैं,  दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं के लिए यह गर्व का क्षण होगा। यह मामला करोंड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। लेकिन कुछ लोग 5 अगस्त तक भारत को बदनाम करने की तैयारी में जुट गए हैं। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से जुड़े लोग आर्टिकल 370 खत्म करने की वर्षगांठ पर 5 अगस्त तक भारत में पल रहे उनके गुर्गे सोशल मीडिया पर प्रोपगैंडा फैलाने में लग गए हैं।
मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या ने ये दस्तावेज सोशल मीडिया में शेयर किए हैं। इसके मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने एक लंबा-चौड़ा प्लान बनाया है। 5 अगस्त को कई चरणों में इसे अंजाम दिया जाएगा। सबका मकसद एक ही है भारत के खिलाफ अशांति भड़काना।

इसके तहत कश्मीरियों के साथ एकजुटता का ढोंग रचा जाएगा। भारत के कदम के खिलाफ विरोध के प्रतीक के रूप में सभी चैनल का लोगो काला कर दिया जाएगा। इसके अलावा हिलाल का एक विशेष संस्करण और कश्मीरियों के लिए एक विशेष गीत भी कमीशन किया गया है।

पाकिस्तान
मेजर गौरव आर्य द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाक पीएम इमरान खान मुजफ्फराबाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का दौरा करेंगे। यहाँ वह भारत के खिलाफ संबोधित करेंगे और अनुच्छेद 370 को खोखला करने एवं जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के विरोध में बोलेंगे।
पाकिस्तान के पब्लिक रिलेशन डिवीजन को भी लगभग 2:28 मिनट के प्रचार वीडियो को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें कथित भारतीय क्रूरताओं और कश्मीरियों का लचीलापन को दिखाया जाएगा।
इसकी मेजबानी पाकिस्तान के पब्लिक रिलेशन डिवीजन, ISPR (इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ISI और पब्लिकेशन डिवीजन कर रहे हैं।
पाकिस्तान द्वारा परिकल्पित योजना के तहत, ISPR DG को कश्मीरियों के लिए पाकिस्तानी सेना के समर्थन को आश्वस्त करते हुए, 5 अगस्त, 2020 को एक बयान जारी करना है। साथ ही एक उच्च-वोल्टेज मीडिया ब्लिट्जक्रेग को कश्मीरियों के बीच भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ाने का आदेश दिया जाना है।
इसके अलावा UN में पाकिस्तान की बात नहीं सुने जाने के मुद्दे को भी उठाया जाएगा और भारत के खिलाफ UNMOGIP को श्वेत पत्र भी सौंपा जाएगा। इतना ही नहीं, इस दिन OIC और इंटनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के साथ ही तुर्की के राष्ट्रपति, मलेशिया के पीएम और चीनी फॉरेन ऑफिस को मेंशन करके ट्वीट एवं बयान जारी किए जाएँगे।
पाकिस्तान द्वारा उल्लिखित प्रोपेगेंडा तमाशा में कश्मीरी मूल के पाकिस्तानी मुल्लों, पाकिस्तानी प्रचारकों और कुछ पाकिस्तानी समर्थक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से भारत सरकार की आलोचना का वीडियो पैकेज भी शामिल है। इसके अलावा, पाकिस्तान के जनसंपर्क विभाग ने भारत सरकार की अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का एक पैकेज भी तैयार किया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी योजना में भारतीय नेताओं द्वारा भारत सरकार की आलोचना के एक वीडियो पैकेज का भी जिक्र है।


देश में फिलहाल 5 अगस्त की तारीख का हर तरफ जिक्र हो रहा है। इसके दो कारण हैं- पहला, साल भर पहले इसी दिन जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था और दूसरा, 5 अगस्त को ही अयोध्या में राम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे।
खुफिया एजेंसियों के हवाले से खबर है कि आतंकी इस दिन हमले को अंजाम दे सकते हैं। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। बताया जा रहा है कि 5 अगस्त को आर्टिकल 370 और 35ए के निरस्त होने की पहली सालगिरह पर पाक प्रशिक्षित आतंकी जम्मू-कश्मीर में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।
पिछले साल जब 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था तो पूरे प्रदेश में कर्फ्यू लगाया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वजह से आतंकी मंसूबों कामयाब नहीं हो पाए थे।
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शंकराचार्य होते हुए पादरियों से आशीर्वाद लेना ही उनकी योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है द्वारिकापीठ के शंकराचार्.....
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसके बावजूद घाटी में 150 से 200 आतंकी सक्रिय हैं और उन्हें पनाह देने वाला तंत्र भी बना हुआ है। पाकिस्तान पंजाब के रास्ते या फिर ड्रोन से हथियार भेजने की कोशिश में जुटा है। अधिकारी ने कहा कि पाँच अगस्त को आतंकियों का मंसूबा विफल होना उनके मनोबल को तोड़ने वाला होगा।

पाकिस्तान से जान बचा अमेरिका भागीं इस्माइल, बलात्कार और लोगों को गायब कर रही सेना

गुलालाई इस्माइलपाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल जान बचाकर अमेरिका पहुॅंचने में कामयाब रही हैं। उनके पीछे पूरी पाकिस्तानी मशीनरी पड़ी थी। उन्होंने अमेरिका से शरण मॉंगी है। साथ ही पाकिस्तानी सेना की प्रताड़ना को जगजाहिर करते हुए कहा है कि सैनिक महिलाओं के साथ रेप और मर्दों को अगवा कर रहे हैं।
इस्माइल अगस्त में पाकिस्तान से भागी थीं, क्योंकि वहाँ के अधिकारियों ने उनका जीना दूभर कर दिया था। उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज हो गया था और पुलिस चप्पे-चप्पे पर उन्हें पकड़ने को खड़ी थी। उनके दोस्तों और करीबियों के घर छापे मारे जा रहे था, उन्हें तंग किया जा रहा था। ये सब सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस्माइल फिलहाल अमेरिका में अपनी बहन के घर ब्रुकलीन में रह रहीं हैं। उन्होंने अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वो पाकिस्तानी अधिकारियों से बचकर अमेरिका आने में कैसे सफल हुईं। केवल इतना बताया है कि वो हवाई जहाज से अमेरिका नहीं पहुँचीं।

उनके मुताबिक, “पाकिस्तान से जान बचाकर यहॉं तक पहुॅंचने की अपनी यात्रा के बारे में मैं ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकती। इससे बहुत से लोगों की जान को खतरा हो सकता है।”
उन्होंने न्यूयॉर्क में मानवाधिकारों कार्यकर्ताओं और कॉन्ग्रेस के नेताओं से मुलाकात भी की है। डेमोक्रेट पार्टी के सदस्य सीनेटर चार्ल्स स्कूमर ने कहा है कि इस्माइल को शरण दिलाने के लिए वे हर मुमकिन कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान लौटने पर इस्माइल की जान को खतरा है।
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि इस्माइल के देश से निकलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि सुरक्षा अधिकारी लगातार उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन फिर भी उन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका।

उल्लेखनीय है कि इस्माइल पाकिस्तानी फौज द्वारा किए जा रहे महिलाओं पर अत्याचार के ख़िलाफ़, बलात्कारों के खिलाफ़, अपहरणों की घटनाओं पर और अन्य कृत्यों के विरोध में रोषपूर्ण प्रदर्शन कर चुकी हैं। 32 साल की यह महिला करीब 16 साल की उम्र से ही मानवाधिकारों का हनन करने वालों के खिलाफ़ आवाज उठाती रही हैं।
इस्माइल इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता की खैरियत को लेकर भी चिंतित हैं। उनके माता-पिता को आतंकवाद बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए निगरानी में रखा गया है।
इस्माइल ने इस साल जनवरी में पाकिस्तान आर्मी पर कई महिलाओं के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। पश्तून में हुए प्रदर्शन में भी उन्होंने भाग लिया था, जिसे पाकिस्तान सेना ने दबाने की पूरी कोशिश की थी। इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने उन पर राजद्रोह, राजद्रोह के लिए लोगों को उकसाने और राज्य संस्थानों को बदनाम करने का आरोप लगाया था।(साभार)

दो दिन चली एससीओ सैन्य कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के कमांडर केवल खाने पहुॅंचे

पाकिस्तानी प्रतिनिधि
आजकल लगता है कि पाकिस्तान के नेता हों या सैनिक खुद की किरकिरी कराने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। ऐसा ही एक कारनामा पाकिस्तानी सैन्य कमांडरो ने दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में कर दिखाया। मिलिटरी मेडिसिन पर दो दिन चले इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान ने शिरकत नहीं की लेकिन दूसरे दिन उसके प्रतिनिधि डिनर करने पहुॅंच गए।
सूत्रों ने बताया, “पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने शंघाई सहयोग संगठन के दो दिवसीय मिलिटरी मेडिसिन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा नहीं लिया और सिर्फ गुरुवार को आयोजित में डिनर में पहुँचे। इस सम्मेलन के पहले दिन 27 विदेशी और 40 भारतीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।”
नस्लीय और धार्मिक कट्टरपंथ से निपटने और व्यापार-निवेश को बढ़ाना देना एससीओ का मकसद है। भारत सहित आठ देश इसके सदस्य हैं। इनमें चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान शामिल है। कुछ मुल्क ऑब्जर्वर देश और कुछ डायलॉग सहयोगी के तौर पर भी इससे जुड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाहट भरी प्रतिक्रिया दे रहा है। इसके बावजूद एससीओ के कॉन्फ्रेंस में उसे आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैव आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि आज यह वास्तविक खतरा है सशस्त्र बलों तथा उनकी चिकित्सा सेवाओं को इससे मुकाबले के लिए आगे रहने की जरूरत है।

इमरान खान के बालाकोट हमले के कबूलनामे से चिढ़ी पाकिस्तानी सेना

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पाकिस्तान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हर बार उसे मुंह की खानी पड़ रही है। संयुक्त राष्ट्र से उसे करारा झटका लगा और दुनिया के देश की उसकी गुहार नहीं सुन रहे हैं। इस बीच खबर आ रही है कि पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री इमरान खान में दूरियां बढ़ गई हैं। पाकिस्तानी सेना इमरान के अमेरिका दौरे और भारतीय हमले पर बयानबाजी से नाराज है।
पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। अमेरिका दौरे और भारत से संबंधों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण मौकों पर इमरान खान के बयानों से पाकिस्तानी सेना चिढ़ गई है।
पाकिस्तान की आजादी दिवस पर इमरान खान यह भी कबूल कर बैठे कि भारत पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बालाकोट से भी बड़ा हमला करने की योजना बना रहा है। इमरान के इस कबूलनामे से भी पाकिस्तानी सेना बेहद नाराज है, क्योंकि पाकिस्तानी सेना इस बात से इंकार करती रही है कि बालाकोट के हवाई हमले में भारत को कोई कामयाबी मिली थी।
पाकिस्तानी सेना भारत में बड़े पैमाने पर आतंकियों की घुसपैठ कराने की लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन कभी पाकिस्तानी सेना की कठपुतली कहे जाने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान ने कई दफा दावा किया कि उनकी सरकार आतंकियों पर कार्रवाई कर रही है। इमरान के इस बयान से पाकिस्तानी सेना नाराज है।
10 साल तक अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को अपने देश में छिपाने वाली पाकिस्तानी सेना का इरादा सेना के लोगों को राजनीति के जरिए मुख्यधारा में लाने का है। अक्टूबर 2017 में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था कि सशस्त्र बल के लोगों को राजनीतिक प्रक्रिया में लाने के लिए एक विशेष योजना पर काम किया जा रहा है।
इमरान के नए पाकिस्‍तान में लोगों को खाने के लाले
नया पाकिस्‍तान का नारा देने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान जब से सत्‍ता में आए हैं तब से देश की हालत लगातार खराब हो रही है। एक तरफ बेकाबू होती महंगाई तो दूसरी तरफ गैस और तेल के दामों में होती बढ़ोतरी सभी ने आम इंसान की हालत पतली कर रखी है। इस पर भारत से संबंध तोड़ना पाकिस्‍तान के लिए खुदकुशी करने जैसा कदम रहा है। पाकिस्‍तान पर चीन का कर्ज भी इस खराब होती हालत की एक बड़ी वजह है। यही वजह है कि इस बार की ईद भी वहां पर कमोबेश सूनी ही रही है। भारत संबंध तोड़ने के फैसले पर लोगों ने पीएम इमरान खान से यहां तक पूछ डाला कि वह आखिर क्‍या घास खाएं।
हर मोर्चे पर विफल इमरान
पाकिस्‍तान में इस्‍तेमाल की जाने वाली कई सारी चीजें भारत से ही जाती हैं। इनमें टमाटर और प्‍याज खास हैं। 18 अगस्‍त 2019 को उनकी सरकार को एक साल पूरा हो गया। इस एक साल के दौरान वह हर मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं। आतंकवाद को रोकने का मसला हो या फिर देश के विकास की बात हो इमरान की सरकार किसी भी मोर्चे पर न तो अपनी आवाम को न ही दुनिया को संतुष्‍ट कर सकी है। इसका जीता जागता सुबूत एफएटीएफ की वो तलवार है जो पिछले करीब दो वर्ष से पाकिस्‍तान के ऊपर टंगी हुई है।
बीते एक वर्ष में बढ़ी आम आदमी की मुश्किलें
पाकिस्‍तान की मीडिया में भी यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि इमरान सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2011 के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि देश में मुद्रास्फिति की दर दहाई के आंकड़े को पार कर गई है। इतना ही नहीं सरकार के अपने अनुमान के मुताबिक इसके 11 फीसद तक बढ़ने की उम्‍मीद की गई है।
हर क्षेत्र में बढ़ी महंगाई
पाक मीडिया के मुताबिक सीएनजी, पीएनजी, रुपये में गिरावट, जरूरत की चीजों के दाम और टैक्‍स में बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब ढीली हो रही है। एक डॉलर की कीमत बीते एक वर्ष में 35 रुपये तक बढ़ी है। अगस्‍त 2018 में एक डॉलर की कीमत 123 थी वह अब बढ़कर 158 तक पहुंच चुकी है। वहीं पेट्रोल के दाम 95.24 रुपये से बढ़कर 117.84 तक हो चुके हैं और डीजल 112.94 रुपये से बढ़कर 132 रुपये के पार हो चुका है। इमरान सरकार की काबलियत और उनकी विफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब वह सरकार में आए थे तब सीएनजी की कीमत 81.70 रुपये थी जो अब 123 प्रति किग्रा तक पहुंच चुकी है। यह कीमत भी स्थिर नहीं है। उम्‍मीद की जा रही है कि यह अभी और बढ़ेगी।
रोटी से लेकर ब्रेड तक हुई महंगी
अब जरा दूसरी चीजों पर भी गौर कर लिया जाए। चपाती और नान की कीमत इमरान के सत्‍ता में आने के बाद से दो रुपये से बढ़कर 12 रुपये तक हो चुकी है। इसके अलावा श्रीमल और ताफतान जो रोटी के ही एक प्रकार हैं की कीमत 40 रुपये तक हो चुकी है। ब्रेड की कीमत की बात करें तो रमजान से पहले ही इसकी कीमतों में आठ फीसद की तेजी आ चुकी थी, ईद के बाद इसमें नौ फीसद की तेजी देखने को मिली है।
स्‍टील, तेल, घी और चीनी की कीमत भी बढ़ी
चीनी की कीमतों में इमरान के सत्‍ता में आने के बाद 12 रुपये तक का इजाफा हुआ है। स्‍टील की कीमतों में भी जबरदस्‍त इजाफा इमरान के सत्‍ता में आने के बाद दिखाई दिया है। पिछले वर्ष अगस्‍त में इसकी कीमत 103,000 रुपये हुआ करती थी जो अब बढ़कर 120,000 प्रति टन तक हो चुकी है। इसी तरह से सीमेंट के दामों में बीते एक वर्ष में सौ रुपये तक का इजाफा हो चुका है। घी और तेल से लेकर दालों की कीमत में 100-150 रुपये तक बढ़ चुकी है। इसी तरह से दूध और घी का भी हाल है। इसमें 20-30 रुपये की तेजी इमरान सरकार के बाद आई है।
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भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान द्वारा बार बार दी जा रही परमाणु धमकी के जवाब में कहा कि हमारी नीति रह.....

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रेहम ने इमरान पर लगाया कश्मीर को लेकर सौदा करने का आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खा...

किसानों पर भी पड़ी महंगाई की मार
पाकिस्‍तान में बढ़ती महंगाई की मार किसी एक क्षेत्र में ही नहीं पड़ी है, बल्कि हर क्षेत्र में इसका जबरदस्‍त असर देखा गया है। किसान भी इससे अछूता नहीं रहा है। यूरिया या खाद के लिए किसानों को 300 रुपये तक अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं बिजली की कीमतें बढ़ चुकी हैं। जहांं तक बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी की बात है तो आपको बता दें कि सरकार ने इस पर से सब्सिडी कम की है। मीठ के लिए भी लोगों को अब पहले से ज्‍यादा रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। चाय हो या दूध के पैकेट सभी पर महंगाई की मार पड़ी है। पाउडर वाले दूध की कीमत में तो करीब दो सौ रुपये की बढ़ोतरी बीते एक वर्ष में हो चुकी है।

महाभारत युद्ध के बाद क्या फिर से परमाणु हमले में तबाह हो जाएगा पाकिस्तान?

mabharat pakistanभारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान द्वारा  बार बार दी जा रही परमाणु धमकी के जवाब में कहा कि हमारी नीति रही है कि हम परमाणु हथियार का पहले प्रयोग नहीं करेंगे। लेकिन आगे क्या होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। राजनाथ सिंह ने यह बयान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर पोखरण में दिया था। भारत के विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु हमले का इंतज़ार करने के बाद फिर परमाणु हमला करना मूर्खता होगी।
इस बयान के बाद समूचे पाकिस्तान में डर का माहौल कायम हो गया और खौफजदा प्रधानमंत्री इमरान खान ने लगातार कई ट्वीट्स करके भारत के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई है। इमरान खान ने लिखा कि भारत के परमाणु हथियार का नियंत्रण फासीवादी मोदी सरकार के हाथ में है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे केवल क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इमरान खान ने एक ट्वीट में लिखा, "हिन्दुत्ववादी मोदी सरकार केवल पाकिस्तान के लिए ही नहीं बल्कि भारत के अल्पसंख्यकों और 'नेहरू-गांधी के भारत' के लिए भी खतरा है।"
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ज्ञात हो, जब से पाकिस्तान ने परमाणु बनाया है, तब से पाकिस्तान के हुक्ममरान भारत को परमाणु धमकियों से नवाज़ते रहे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने पाकिस्तान की धमकी का माकूल जवाब नहीं दिया। और पाकिस्तान इस धमकी को अपना ब्रह्मास्त्र समझने की भूल में फलीफूत हो, भारत की धरती को लाल करता रहा। समय ने पलटा खाया, कि जब उसी की भाषा में धमकी का जवाब धमकी देते ही, बिलख रहा है। दूसरे, जब भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परिक्षण किए थे, तब भारत के परमाणु का असर दूर देशों तक हुआ था, जबकि पाकिस्तान परमाणु का असर केवल अफ़ग़ानिस्तान तक ही महसूस किया गया था। जो सिद्ध करता है कि भारत के परमाणु पाकिस्तान से कहीं अधिक खतरनाक हैं। 
फिर कहते हैं कि इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है, जो धूमिल हुए इतिहास को मुखरित कर देता है। पाकिस्तान को रामायण और महाभारत ग्रंथों को अध्धयन करने की जरुरत है।  
क्या महाभारत में छोड़े गए ब्रह्मास्त्र से नष्ट हुई थी सिंधु घाटी?
अब हम जरा इतिहास में जाते हैं। महाभारत काल में कंबोज, गांधार, कैकय, कुरु, पांचाल, वृत्सु, सीबीर, बल्हिक, यदु और मद्र जनपद अस्तित्व में थे। इन्हीं के कुछ हिस्सों को मिलाकर आज का पाकिस्तान है। दरअसल, उस काल में अधिकतर लोग सिंधु और सरस्वती के किनारे ही रहते थे। यहीं पर उसी काल में सिंधु घाटी की सभ्यता अपने चरम पर थी। यह सभी लोग दृविड़ ही थे जिन्हें आर्य कहा जाता था। वर्तमान में सिंधु घाटी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में हैं।
आज जिस हिस्से को पाकिस्तान और अफगानिस्तान कहा जाता है, महाभारत काल में उसके उत्तरी हिस्से को गांधार, मद्र, कैकय और कंबोज की स्थली कहा जाता था। अयोध्या और मथुरा से लेकर कंबोज (अफगानिस्तान का उत्तर इलाका) तक आर्यावर्त के बीच वाले खंड में कुरुक्षेत्र होता था, जहां यह युद्ध हुआ। उस काल में कुरुक्षेत्र बहुत बड़ा क्षेत्र होता था। आज कल यह हरियाणा का एक छोटा-सा क्षेत्र है।
उस काल में सिन्धु और सरस्वती नदी के पास ही लोग रहते थे। सिन्धु और सरस्वती के बीच के क्षेत्र में कुरु रहते थे। यहीं सिन्धु घाटी की सभ्यता और मोहनजोदड़ो के शहर बसे थे, जो मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी तक फैले थे। सिन्धु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि स्थानों की प्राचीनता और उनके रहस्यों को आज भी सुलझाया नहीं जा सका है। मोहनजोदड़ो सिन्धु नदी के दो टापुओं पर स्थित है।
जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोहनजोदड़ो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था तो उन्होंने देखा कि वहां की गलियों में नरकंकाल पड़े थे। कई अस्थिपंजर चित अवस्था में लेटे थे और कई अस्थिपंजरों ने एक-दूसरे के हाथ इस तरह पकड़ रखे थे, मानो किसी विपत्ति ने उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुंचा दिया था।
उन नरकंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो एक्टिविटी के चिह्न थे, जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गए थे। मोहनजोदड़ो स्थल के अवशेषों पर नाइट्रिफिकेशन के जो चिह्न पाए गए थे, उसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था, क्योंकि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि उसी काल में महाभारत का युद्ध हुआ था। उस दौरान गुरु द्रोण के पुत्र अश्‍वत्थामा ने भगवान कृष्ण के मना करने के बावजूद ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ा, प्रत्युत्तर में अर्जुन ने भी छोड़ा। अश्वत्थामा ने पांडवों के नाश के लिए छोड़ा था और अर्जुन ने उसके ब्रह्मास्त्र को नष्ट करने के लिए। दोनों द्वारा छोड़े गए इस ब्रह्मास्त्र के कारण लाखों लोगों की जान चली गई थी। महाभारत में इस ब्रह्मास्त्र के प्रभाव का वर्णन मिलता है।
तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम।
सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम।
चचाल च मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा।। महाभारत ।। 8-10-14 ।।
अर्थात : ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद भयंकर वायु जोरदार तमाचे मारने लगी। सहस्रावधि उल्का आकाश से गिरने लगे। भूतमात्र को भयंकर महाभय उत्पन्न हो गया। आकाश में बड़ा शब्द हुआ। आकाश जलने लगा। पर्वत, अरण्य, वृक्षों के साथ पृथ्वी हिल गई।
महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम दिए गए हैं। यह परिणाम ऐसे ही हैं जैसा कि वर्तमान में परमाणु अस्त्र छोड़े जाने के बाद घटित होते हैं। कुछ जानकारों के अनुसार अश्‍वत्थामा द्वारा छोड़ा गया ब्रह्मास्त्र परमाणु बम जैसा ही था। इसमें इसका उल्लेख भी मिलता है कि ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने के बाद 12 वर्ष तक धरती पर निर्जन रहता है। वर्षा नहीं होती है और प्रभावित होने वाले संपूर्ण क्षेत्र में जीव जंतु और सभी तरह के प्राणी मर जाते हैं।
परमाणु बम छोड़े जाने के बाद भी कुछ इसी तरह के प्रभाव होने का उल्लेख मिलता है। आधुनिक काल में जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया ट्रिनिटी (त्रिदेव)। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 का बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह कार्य किया। 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया था।
शोध कार्य के बाद विदेशी वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में महाभारत में परमाणु बम का प्रयोग हुआ था। 42 वर्ष पहले पुणे के डॉक्टर व लेखक पद्माकर विष्णु वर्तक ने अपने शोध कार्य के आधार पर कहा था कि महाभारत के समय जो ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया गया था वह परमाणु बम के समान ही था। डॉ. वर्तक ने 1969-70 में एक किताब लिखी ‘स्वयंभू’। इसमें इसका उल्लेख मिलता है।
एरिक वॉन अपनी बेस्ट सेलर पुस्तक 'चैरियट्स ऑफ गॉड्स' में लिखते हैं, 'लगभग 5,000 वर्ष पुरानी महाभारत के तत्कालीन कालखंड में कोई योद्धा किसी ऐसे अस्त्र के बारे में कैसे जानता था जिसे चलाने से 12 साल तक उस धरती पर सूखा पड़ जाता, ऐसा कोई अस्त्र जो इतना शक्तिशाली हो कि वह माताओं के गर्भ में पलने वाले शिशु को भी मार सके? इसका अर्थ है कि ऐसा कुछ न कुछ तो था जिसका ज्ञान आगे नहीं बढ़ाया गया अथवा लिपिबद्ध नहीं हुआ और गुम हो गया।'
भारतीय सेना पाकिस्तान का वजूद मिटा देने की क्षमता रखती है फिर भले ही इसमें चीन किसी भी प्रकार का अडंगा डाले। वर्तमान में चीन और पाकिस्तान ने भारत के डर से भारत को उलझाने के लिए कश्मीर और अन्य राज्यों में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। वे दोनों मिलकर दक्षिण एशिया में एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं और आने वाले समय में यदि यह खेल और बढ़ता है तो ऐसी आशंका है कि पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा, क्योंकि भारत अब पहले का भारत नहीं रहा। वर्तमान सरकार की नीति घर में घुसकर मारने की है और जैसा की रक्षा मंत्री राजनाथ ने संकेत दिए हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के हित में पहले भी परमाणु हमला कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं। भारत किसी भी हालत में नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को कोई मौका दिया जाए।
पिछले वर्ष अमेरिका में दक्षिण एशियाई मामलों के एक शीर्ष परमाणु विशेषज्ञ ने दावा किया था कि अगर भारत को यह आशंका हुई कि पाकिस्तान उस पर परमाणु हथियार से आक्रमण कर सकता है तो वह परमाणु का 'पहले इस्तेमाल नहीं करने' की अपनी नीति को संभवत: त्याग सकता है और पाकिस्तान के खिलाफ उसके हमला से पहले ही हमला कर सकता है।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दक्षिण एशियाई परमाणु रणनीति के विशेषज्ञ विपिन नारंग ने वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा 'ऐसे दावे बढ़ रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को पहले कदम उठाने की इजाजत नहीं देगा।' उन्होंने कहा कि भारत पहले परमाणु इस्तेमाल नहीं करने की अपनी नीति छोड़ सकता है और अगर उसे शक हुआ कि पाकिस्तान उसके खिलाफ परमाणु हथियारों या 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है तो वह पाकिस्तान के हमला करने से पहले ही हमला कर सकता है। बहरहाल, उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारत का पहले हमला परंपरागत हमला नहीं होगा और वह पाकिस्तान के 'टैक्टिकल' परमाणु हथियारों के मिसाइल लॉन्चरों को भी निशाना बना सकता है।
लेकिन यदि जवाब में पाकिस्तान ने परमाणु हमला किया तो फिर विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत ने जवाब में सिर्फ एक ही परमाणु बम छोड़ दिया तो पाकिस्तान का वजूद ही मिट जाएगा। पाकिस्तान के नदी, तालाब, जंगल सभी जलकर नष्ट हो जाएंगे। यह विश्व की सबसे भयानक त्रासदी होगी। निश्चित ही भारत का जवाब बहुत तगड़ा होगा। क्या आप सोच सकते हैं कि पाकिस्तान के जवाब में भारत चुप बैठा रहेगा? पाकिस्तान और भारत में पल रहे पाकिस्तान समर्थकों को वर्तमान मोदी सरकार की नीतियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। इन्हें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। परन्तु पाकिस्तान ने अपनी फौज के इशारों पर चलते खुद ही अपनी दुर्दशा कर ली है। अगर वर्तमान इमरान सरकार कश्मीर को भूल वहां बढ़ती महंगाई और जनता में होते रोष को शांत करने का प्रयास करती है,तो फौज अपना बगावती तेवर दिखाने में संकोच नहीं करेगी या फिर वहां पनप रहे आतंकवाद पर लगाम कसती है तो भी फौज बगावत पर आकर तख्ता पलट सकती है। स्थिति यह है कि खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर कटना खरबूजे ने ही है, यानि पाकिस्तान सरकार इस समय हाशिये पर है, इस कटु सच्चाई को जानने और समझने की जरुरत है। 

सफेद झंडा लेकर आओ, लाशें पड़ी हैं उठाकर ले जाओ : भारतीय सेना का पाकिस्तान को संदेश

भारतीय सेना ने पाकिस्तान को भेजा संदेश- सफेद झंडा लेकर आओ, लाशें पड़ी हैं उठाकर ले जाओजम्मू-कश्मीर के केरन के सेक्टर में अगस्त 3 को पाकिस्तानी की बॉर्डर एक्शन टीम यानी BAT की ओर से की जा रही घुसपैठ की साजिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया गया है. इस कार्रवाई में पाक सेना  या फिर पांच से सात आतंकी मारे गये हैं. अब भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान की सेना से कहा गया है कि वह सफेद झंडा लेकर आए और इन शवों को ले वापस ले जाए. लेकिन पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब नहीं आया है. गौरतलब है कि पिछले 36 घंटे में घाटी में जैश के 4 आतंकवादी भी मारे गए हैं. आतंकियों के पास से स्नाइपर राइफ़ल, IED और पाक में बनी बारूदी सुरंग बरामद हुई है. वहीं पूंछ ज़िले के मेंढर सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने सीज़फ़ायर को तोड़ा है..पाक की ओर से छोटे हथियारों से फ़ायरिंग की गई और मोर्टार से गोले भी दागे गए.  सेना के मुताबिक पाकिस्तान सेना आतंकियों को घुसपैठ कराने में न केवल लगी रहती है बल्कि उन्हें हथियार भी मुहैया कराती है. ये बात भारतीय सेना हमेशा डीजीएमओ लेवल बातचीत में उठाती रही है. सेना ने ये भी साफ किया है कि वो ऐसी हरकतों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करता रहेगा सेना एलओसी के साथ साथ कश्मीर में आतंकियों की हर हरकत का जवाब देती रहेगी.  वहीं सेना की ओर से जानकारी दी गई है कि पिछले 36 घंटों में पाकिस्तान की ओर से कोई हरकत नहीं की गई है और न अमरनाथ जी यात्रा को निशाना बनाया गया है. 
कश्मीर में कयासों का दौर
जम्मू-कश्मीर में पुलिस की एडवायज़री और फ़ौज की नयी कंपनियों की तैनाती के बीच क़यासों का दौर जारी है..इन सबके बीच सियासी दलों के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी मुलाक़ात की. लेकिन राज्यपाल ने नेताओं को जो भरोसा दिया है उससे वो संतुष्ट नहीं हैं.
सिविल एविएशन मंत्रालय ने दी हिदायत
सिविल एविएशन मंत्रालय ने अमरनाथ यात्रियों और सैलानियों के कश्मीर घाटी से लौटाने के मद्देनज़र एयरलाइन्स कंपनियों को श्रीनगर से उड़ान भरने वाले विमानों का किराया नियंत्रण में रखने की सलाह दी है.  मंत्रालय ने ट्वीट किया है कि ... ''नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सभी एयरलाइनों को अमरनाथ यात्रा से लौट रहे तीर्थयात्रियों के लिए विमान किराये में तेजी से हो रही वृद्धि को नियंत्रण में रखने को कहा है.'' श्रीनगर-दिल्ली के बीच चार अगस्त के लिए विमानों का किराया 11,000 रूपये से लेकर 20,000 रूपये के बीच देखने को मिला. वहीं, चार अगस्त के लिए श्रीनगर-मुंबई के बीच का किराया 14,000 रूपये से शुरू होता दिखा. 

पाकिस्तान में सेना और आईएसआई पर उंगली उठाने वाले ब्लॉगर मोहम्मद बिलाल खान की हत्या

मोहम्मद बिलाल खान को ताकतवर सेना एवं उसकी कुख्यात जासूसी एजेंसी के आलोचक के तौर पर जाना जाता था ! मृतक के पिता अब्दुल्ला ने बताया कि खान के शरीर पर किसी धारदार हथियार के निशान थे !
पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना एवं जासूसी एजेंसी आईएसआई की आलोचना करने के लिए जाने जानेवाले 22 वर्षीय पाकिस्तानी ब्लॉगर एवं पत्रकार की यहां अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी! 
अब प्रश्न यह है कि पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान पत्रकार बिलाल खान की हत्या की निष्पक्ष जाँच करवा कर हत्यारों को सजा दिलवाने का साहस करेंगे? क्योकि बिलाल पाकिस्तान सेना और आईएसआई के कठोर आलोचक थे। जबकि इन दोनों के विरुद्ध सरकार तक कुछ बोलने का साहस नहीं कर पाती। यदि इमरान खान हत्यारों को उनके उचित स्थान पर पहुँचाने में सफल होते हैं, केवल तभी उनसे उम्मीद की जा सकती है कि पाकिस्तान में पनप रहे,आतंकवाद पर लगाम लगाने में गंभीर हैं, अन्यथा हाथी के दाँत खाने के और दिखाने और। 
‘डॉन’ समाचार पत्र ने पुलिस के हवाले से बताया कि, मोहम्मद बिलाल खान अपने मित्र के साथ थे, तभी उन्हें एक फोन आया जिसके बाद एक व्यक्ति रविवार(जून 16) रात को उन्हें निकटवर्ती जंगल लेकर गया। खान के ट्विटर पर 16000, यू-ट्यूब पर 48000 और फेसबुक पर 22000 फोलोवर्स हैं ! पुलिस अधीक्षक सद्दार मलिक नईम ने बताया कि, संदिग्ध ने हत्या के लिए छुरे का इस्तेमाल किया। कुछ लोगों ने बंदूक चलने की भी आवाज सुनी!
खान का मित्र इस दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया। ब्लॉगर एवं पत्रकार खान की हत्या के बाद ‘#जस्टिसफॉरमोहम्मदबिलालखान’ सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा। कई ट्विटर यूजर्स ने कहा कि, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के आलोचक होने के कारण उनकी हत्या की गई। एक व्यक्ति ने ट्वीट किया, ‘‘पाकिस्तानी पत्रकार मोहम्मद बिलाल खान की इस्लामाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
मोहम्मद बिलाल खान को ताकतवर सेना एवं उसकी कुख्यात जासूसी एजेंसी के आलोचक के तौर पर जाना जाता था ! मृतक के पिता अब्दुल्ला ने बताया कि खान के शरीर पर किसी धारदार हथियार के निशान थे ! इस संबंध में आतंकवाद रोधी कानून समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। खान के पिता ने कहा कि, ‘इस घटना ने लोगों में भय पैदा कर दिया है !’

क्या एक बार फिर बड़े हमले की तैयारी में आतंकी?

जम्‍मू और कश्‍मीर में आतंकी एक बार फिर सुरक्षाबलों पर बड़े हमले की तैयारी में जुटे हैं। एजेंसियों के खुफिया इनपुट में यह खुलासा हुआ है
इसके मुताबिक आतंकी जम्‍मू-कश्‍मीर के शोपियां में पुलवामा आतंकी हमले की तरह ही सुरक्षाबलों के काफिले या वाहनों पर घात लगाकर आईईडी ब्‍लास्‍ट कर सकते हैं। 14 फरवरी को जम्‍मू से श्रीनगर जा रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के काफिले पर आतंकियों ने आत्‍मघाती हमला किया था इसमें 40 जवान शहीद हुए थे
इस बार भी एजेंसियों को जो इनपुट मिला है, उसके अनुसार आतंकी एक बार फिर कश्‍मीर घाटी में सुरक्षाबलों के काफिले को अपना निशाना बना सकते हैं पुलवामा आतंकी हमले की जिम्‍मेदारी पाकिस्‍तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद ने ली थी इसके बाद सुरक्षाबलों और सेना ने अभियान चलाकर कश्‍मीर में पुलवामा हमले के मास्‍टरमाइंड आतंकी मुदासिर समेत जैश के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है
पाकिस्तान के नए बने प्रधानमंत्री इमरान खान के दिल में क्या है, कहना कठिन है। दरअसल, पाकिस्तान की फौज का सरकार पर इतना ज्यादा दबदबा है कि सरकार कोई भी पार्टी बनाए, उसे फौज के इशारे पर ही काम करना पड़ेगा, अन्यथा फौज कब तख्ता पलट दे, और जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को एक पल भी सोंचने का मौका नहीं होगा। जैसाकि पीछे होता रहा है। हालाँकि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पाकिस्तान को कुछ दिन पूर्व ही सचेत कर चुके हैं कि "अब अगर भारत में कोई आतंकी हमला हुआ तो उसके भयंकर परिणाम होंगे।" इस चेतावनी के बावजूद अगर पाकिस्तान समर्थक आतंकी पुनः पुलवामा जैसी घटना को अंजाम देने का दुस्साहस करने का मतलब तो खुद ही अपनी मौत को बुलावा देने से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। 
शायद यही कारण था कि ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो और उनकी पुत्री बेनज़ीर भुट्टो हज़ार साल तक भारत से युद्ध करते रहने की बात करते थे। यह भारत ही है, जहाँ आतंकवादियों पर सख्त कार्यवाही करने पर नेता जनरल को "सड़क का गुण्डा" कह सकते हैं, "बलात्कार" के आरोप लगा सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान में किसी में साहस नहीं, कि फौज के विरुद्ध एक भी शब्द निकाल सके। वास्तव में जबकि भारत की सरकार और वर्तमान सरकार की कार्यशैली और सोंच में ज़मीन आसमान का अन्तर है। अब भारत पर होने वाले आतंकी हमले का मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा।       

UN में PoK के एक्टिविस्‍ट का बयान : 'पाकिस्‍तानी सेना कश्‍मीरियों को आत्‍मघाती हमले के लिए उकसाती है'

यूनाइटेड कश्‍मीर पीपुल्‍स नेशनल पार्टी के चेयरमैन एस अली कश्‍मीरी
एक तरफ जहाँ भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विरोधी आतंकवाद पर किए कठोर प्रहार जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, और हवाई हमले आदि को चुनावी चाल बताकर सबूतों की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पीओके में पाकिस्तान सेना द्वारा आतंकवाद में शामिल होने के लिए उकसाए जाने का विरोध UN तक पहुँच गया है। जो शायद मोदी विरोधियों के लिए बहुत ही शर्म की बात है। भारत में मोदी विरोधी आतंकवाद हमले में मरने वालों की लाशों पर बैठ मालपुए खाने का अवसर गँवाना नहीं चाहते, परन्तु जिनके बच्चे आतंकवाद की भेंट चढ़ते हैं, वह अपने बच्चों के जीवन की गुहार लगा रहे हैं। अब तक अधिकतर जितने भी आतंकवादी पकडे अथवा मारे गए हैं, उनमें लगभग 80 प्रतिशत कश्मीरी -- वह चाहे पीओके से हों अथवा भारत अधिकृत कश्मीर से -- ही हैं, पाकिस्तानी नहीं, लेकिन पाकिस्तान सेना की इस काली करतूतों की वजह से बदनाम पूरा पाकिस्तान हो रहा है। 
भारत द्वारा बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान में घबराहट का वातावरण है। वहाँ की मीडिया को बालाकोट में हुए हुए हमले के स्थान तक जाने नहीं दिया जा रहा, विपरीत इसके भारत में बेशर्म मोदी विरोधी सबूत माँग रहे हैं। पाकिस्तान अपने जख्मों को छुपाने का हर संभव प्रयास कर रहा है, पर भारत में सबकुछ मलियामेट किया जा रहा है।  
आतंकवाद को बढ़ावा देने को लेकर वैश्विक समुदाय का दबाव झेल रहे पाकिस्‍तान को अब पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) के नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी विरोध झेलना पड़ रहा है।जेनेवा में आयोजित संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 40वें सत्र के दौरान एक बैठक में पीओके के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पाकिस्‍तान के खिलाफ आवाज उठाईउन्‍होंने पाकिस्‍तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद की ओर से किए गए पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की
UN में PoK के एक्टिविस्‍ट बोले, 'पाकिस्‍तानी सेना कश्‍मीरियों को आत्‍मघाती हमले के लिए उकसाती है'
UNHRC में पाकिस्‍तान के खिलाफ एकजुट हुए पीओके के
 मानवाधिकार कार्यकर्ता. फोटो ANI
इस दौरान यूनाइटेड कश्‍मीर पीपुल्‍स नेशनल पार्टी के चेयरमैन एस अली कश्‍मीरी ने पाकिस्‍तान पर हमला करते हुए कहा कि पाकिस्‍तानी सेना के अफसर कश्‍मीरी लोगों से खुले तौर पर आत्‍मघाती हमला करने के लिए जाने को कहते हैं। वे उन्‍हें उकसाते हैं। यह एक बेहद चिंताजनक स्थिति है
वहीं पीओके के मानवाधिकार कार्यकर्ता एम हसन ने पाकिस्‍तान पर निशाना साधते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी आतंकी ठिकानों को तबाह किया जाए, फिर चाहे वो पाकिस्‍तान में हों या पीओके में पाकिस्‍तान सरकार को इसकी जिम्‍मेदारी लेनी चाहिए और इन आतंकियों से छुटकारा पाना चाहिए ये आतंकी स्‍थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय शांति को भी नष्‍ट कर रहे हैं
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पुलवामा में सीआरपीएफ पर फिदायीन हमले के बाद सुरक्षाबलों ने 21 दिन में कश्मीर घाटी के 18 आतंकियों को मार गिराया। त्रा.....