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प्रधानमंत्री मोदी बने दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
छद्दम समाजवादियों और धर्म-निरपेक्षों ने लगभग 1987/88 से भारत में हो रही चर्चित फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस द्वारा 1555 में की गयी भविष्यवाणी को तुष्टिकरण के पुजारी होने के नाते कभी गंभीरता से नहीं लिया। 2014 चुनाव में मनोनीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बहुत हलके में ले लिया। परन्तु 2019 का चुनाव आने तक होश में आने की बजाए केवल मोदी विरोध ही करते नज़र आये। जबकि प्रधानमंत्री मोदी आलोचनाओं को नज़रअंदाज़ कर, नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को चरितार्थ करते विश्व में भारत का मान बढ़ाने में तल्लीन रहे। विश्व भारत के प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के आगे झुकती नज़र आ रही थी, लेकिन यहाँ उनके विरोधी जनता को भ्रमित करते रहे। मोदी विरोधियों ने सीआईए की उस रपट को भी नज़रअंदाज़ कर दिया जो मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के लगभग दो ही वर्ष उपरान्त पेंटागन को दी थी।(नीचे इसी ब्लॉग पर प्रकाशित लेख का लिंक देखिए) अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक ही 5-वर्षीय सत्र समाप्त होकर दूसरा सत्र शुरू हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में देशहित में किए कार्य उजागर होने ही शुरू हुए हैं, आगे आगे देखिए होता है क्या। 
जिस पाकिस्तान के आगे नतमस्तक होते रहे, आतंकवादियों को संरक्षण देते, बेकसूर हिन्दू साधु/संत और साध्वियों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर झूठे आरोपों में जेलों में डाल हिन्दुओं को अपमानित करने के कारण कभी विश्व ने आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई। परन्तु आज वही भारत है, जिसके वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विश्व पटल पर उठाई आतंकवाद के मुद्दे को अतिगम्भीरता से लेने के ही कारण वही पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ गया। 
विश्व में बढ़ती लोकप्रियता 
दुनियाभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का रुतबा लगातार बढ़ रहा है। अब प्रधानमंत्री मोदी को ब्रिटिश हेराल्ड के एक पोल में दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स चुना गया है। इस पोल में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी पीछे छोड़ दिया है। इस पोल में प्रधानमंत्री मोदी को सबसे ज्यादा 30.9 प्रतिशत वोट मिले। रूस के राष्ट्रपति पुतिन को 29.9 प्रतिशत, अमेरिकी राष्ट्रपति को 21.9 प्रतिशत और चीन के राष्ट्रपति को 18.1 प्रतिशत वोट मिले। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर ब्रिटिश हेराल्ड मैगजीन के जुलाई संस्करण के कवर पेज पर भी प्रकाशित की जाएगी।
ब्रिटिश हेराल्ड के मुताबिक हाल के महीनों में नरेन्द्र मोदी को भारतीयों की ओर से बेहद ज्यादा अप्रूवल रेटिंग्स मिली हैं।
मोदी के लीडरशिप में भारत न केवल विश्व क्षितिज पर दमदार स्थिति में आया है बल्कि ग्लोबल ताकत बन गया है। आइये हम ऐसे ही कुछ उदाहरण देखते हैं-
अमेरिका और रूस से एक साथ दोस्ती 
अमेरिका और रुस की अदावत सभी जानते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की के कूटनीतिक कौशल के कारण आज दोनों ही देश भारत के साथ खड़े दिखते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में जिस तरह से रुस ने भारत का साथ देते हुए चीन की हेकड़ी गुम कर दी वह काबिले तारीफ है। ठीक इसी तरह पाकिस्तानपरस्त रहे अमेरिका को भारत की तरफ ले आना भी बड़ी बात है। आज अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने भारत से दोस्ती की खातिर आज पाकिस्तान को हर मंच पर अकेला छोड़ दिया है।

‘कट्टर तिकड़ी’ को एक साथ साध गए पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियां आंकी जाए तो इस बात से अंदाजा लग जाएगा कि किस तरह उन्होंने इजरायल और फिलीस्तीन जैसे आपस में दुश्मन देशों के बीच संतुलन स्थापित किया। विशेष यह कि प्रधानमंत्री ने बारी-बारी दोनों ही देशों का दौरा किया और भारत की विदेश नीति के अपने स्टैंड पर कायम रहे। दोनों ही देशों ने भारत के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। जब प्रधानमंत्री ने फिलीस्तीन का दौरा किया तो ऐसा अद्भुत नजारा दिखा जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। जॉर्डन के हेलिकॉप्टर पर सवार प्रधानमंत्री मोदी फिलीस्तीन के आसमान में उड़ रहे थे और उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रही थी इजरायल की वायुसेना। विश्व राजनीति के लिए ऐसा अनोखा काम कोई और नही हो सकता है।

Asean देशों को चीन के ‘चंगुल’ से छुड़ाया
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया है कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखा रहा है।

जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा
जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए भारत वैश्विक नेतृत्व को प्रेरित कर रहा है क्योंकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत का 40% हिस्सा 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। भारत ने ऊर्जा के लिए कोयले से सौर की तरफ रूख करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। सौर और पवन ऊर्जा में भारी निवेश से बिजली की कीमतें भी कम हुई हैं। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार यह साहस भी दिखाया है जब अमेरिका ने खुद को पेरिस समझौते से अलग किया तो दुनिया की नजर भारत पर ठहर गई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी ताकतवर उपस्थिति दर्ज करा दी है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर ही इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) का गठन हुआ जिसमें 121 देश शामिल हैं।

आतंकवाद पर दुनिया ने स्वीकारा पीएम मोदी का आह्वान
आतंकवाद अच्छा या बुरा नहीं होता, आतंकवाद तो बस आतंकवाद होता है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की यही बात पहले अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब भारत की बातों को दुनिया मानने लगी है और एक सुर में आतंक की निंदा कर रही है। आतंक के खिलाफ आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देश हमारे साथ खड़े हैं। पाकिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और नेपाल हमारे साथ हैं। जी-20 हो या हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन, एससीओ हो, ब्रिक्स हो या सार्क समिट सभी ने हमारे साथ आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एक होने का आह्वान किया है।

भारत ने जीता अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का चुनाव
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का दबदबा लगातर बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत को एक और कामयाबी मिली है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का चुनाव जीत लिया है। कुल 10 सदस्यों वाले इस संगठन का भारत 1959 से सदस्य है। फिलहाल जो चुनाव हुआ है वह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की एक काउंसिल के लिए हुआ है। यहां वह काउंसिल कैटेगरी बी की है जिसके लिए पहली बार चुनाव हुआ है। नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद लंदन जाकर IMO के वार्षिक समारोह में हिस्सा लिया था और भारत के लिए सपोर्ट भी मांगा था। IMO यूएन की ऐसी एजेंसी है जो नौवहन के बचाव और सुरक्षा पर नजर रखती हैं। यह एजेंसी जहाजों द्वारा फैलाए जाने वाले प्रदूषण पर भी नजर रखती है। भारत और जर्मनी के साथ ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा, स्पेन, ब्राजील, स्वीडन, नीदरलैंड और यूएई इसके सदस्य हैं।

ICJ में भारत का झंडा बुलंद
संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी जीत तब मिली जब दलवीर भंडारी लगातार दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज बन गए। दलवीर भंडारी का मुकाबला ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था, लेकिन आखिरी दौर में अपनी हार देखते हुए उन्हें नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। दरअसल शुरुआती ग्यारह राउंड में दलवीर भंडारी संयुक्त राष्ट्र महासभा की वोटिंग में ग्रीनवुड पर भारी बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन सुरक्षा परिषद में ग्रीनवुड आगे हो जाते थे। यूएन महासभा में दलवीर भंडारी को 183 वोट मिले, जबकि उन्हें सुरक्षा परिषद के सभी 15 वोट मिले। गौर करें तो यह जीत भंडारी की नहीं बल्कि भारत के उस बढ़े कद की है जो पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बढ़ा है। कभी दुनिया पर राज करने वाला ब्रिटेन आज भारत के सामने बौना साबित हो रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर बना ‘अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन’
दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए चिंता जता रही थी, लेकिन भारत ने बड़ी पहल की और वैश्विक स्तर पर अमेरिका और फ्रांस के साथ इसके लिए इनोवेशन की तरफ कदम बढ़ाया गया। 26 जनवरी, 2016 को गुरुग्राम में जब प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (आईएसए) के अंतरिम सचिवालय का उद्घाटन किया तो एक ‘नये अध्याय’ की शुरुआत हुई। दरअसल ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पहल का परिणाम है और इसकी घोषणा भारत और फ्रांस द्वारा 30 नवंबर 2015 को पेरिस में की गई थी। आईएसए के गठन का लक्ष्य सौर संसाधन समृद्ध देशों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और इसे बढ़ावा देना है। 

डोकलाम पर चीन ने देखी भारत की धमक
अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के डायरेक्टर माइकल पिल्स्बरी नो कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के समक्ष मोदी अकेले खड़े हैं। दरअसल ये टिप्पणी उन्होंने ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को ध्यान में रखते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ मुखर रही है। दरअसल अमेरिकी थिंक टैंक का मानना बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत ने चीन को डोकलाम विवाद में भी अपनी दृढ़ता का परिचय करा दिया है और चीन को अपनी सेना को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा। चीन ने भारत को युद्ध की भी धमकी दी लेकिन पीएम मोदी की नीतियों से चीन अकेला हो गया और पश्चिमी देशों ने उसे संयम बरतने की सलाह दी। अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के साथ खड़े रहे।

अंतरिक्ष कूटनीति से सार्क को दी नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी की उम्दा कूटनीति की मिसाल है दक्षिण एशिया संचार उपग्रह। इसकी पेशकश उन्होंने 2014 में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन में की थी। यह उपग्रह सार्क देशों को भारत का तोहफा है। सार्क के आठ सदस्य देशों में से सात यानी भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव इस परियोजना का हिस्सा बने जबकि पाकिस्तान ने अपने को इससे यह कहकर अलग कर लिया कि इसकी उसे जरूरत नहीं है वह अंतरिक्ष तकनीक में सक्षम है। 5 मई 2017 के सफल प्रक्षेपण के बाद इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह खुशी का इजहार करते हुए भारत का शुक्रिया अदा किया उससे उपग्रह से जुड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत मिल जाता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपने अलग-थलग पड़ने का दोष भारत पर यह कहते हुए मढ़ दिया कि भारत परियोजना को साझा तौर पर आगे बढ़ाने को राजी नहीं था।

प्रधानमंत्री मोदी की नीति से पस्त हुआ पाकिस्तान
मोदी सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी विदेशनीति के प्रभाव से पाकिस्तान विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में ऐसा घिरा है कि उसे विश्व पटल पर भारत के खिलाफ अपने साथ खड़ा होने वाला कोई एक सहयोगी देश नहीं मिल रहा। चीन तक भारत के खिलाफ उसका साथ देने को तैयार नहीं है। हाल में ही जब चीन ने पाकिस्तान की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर ओबीओआर को नुकसान पहुंचाने के लिए भारत की साजिश की बात कही थी। दूसरी ओर अमेरिका की अफगान नीति से उसे बाहर किया जा चुका है तथा वह पाकिस्तान से सहयोग में भी लगातार कटौती कर रहा है। पाक को आतंकवाद का गढ़ कहते हुए अफगानिस्तान और बांग्लादेश भी अब पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ चुके हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत को दुनिया का साथ
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैठ को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। इस के साथ ही पहली बड़ी सफलता 28 सितंबर को तब मिली जब पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा के तुरंत बाद तीन अन्य देशों (बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान) ने उसका समर्थन करते हुए सम्मेलन में ना जाने की बात कही। वहीं नेपाल ने सम्मेलन की जगह बदलने का प्रस्ताव दिया और पाकिस्तान के आंतकवाद के कारण सार्क सम्मेलन न हो सका। इसके अलावा चीन ने भी पाक के द्वारा कश्मीर में अंतराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग पर इसे द्विपक्षीय मामला कहकर कन्नी काट ली।

सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता को कई देशों का समर्थन
2014-15 में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों की यात्राएं कीं। कई लोगों ने इन यात्राओं पर तंज भी कसे और कुछ ने तो उन्हें ‘एनआरआई प्रधानमंत्री’ तक कह डाला, लेकिन इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी नुख्ताचीनी पर बिना ध्यान दिये अपनी यात्रा को व्यापक बना रहे थे। इन यात्राओं में वे तीन प्रमुख एजेंडों के साथ आगे बढ़ रहे थे। अलग-अलग देशों के साथ संबंधों में सुधार, निवेश आमंत्रित करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सीट के लिए समर्थन जीतना उनका प्रमुख उद्देश्य था। दरअसल भारतीय इतिहास में कोई और प्रधानमंत्री नहीं जिन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए इतनी मेहनत की है। अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस और जापान जैसे देशों के राजदूत और नेताओं को भारत के पक्ष में लाकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए लगभग सभी देशों का समर्थन हासिल कर लिया। यह समर्थन इस अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थिति के लिए भारत की पात्रता दिखाने के उनके प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम था।

पीएम मोदी के आह्वान से योग को दुनिया ने दिया समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर 21 जून, 2015 को विश्व के 192 देश जब ‘योगपथ’ पर चल पड़े तो सारे संसार में योग का डंका बजने लगा। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का मोदी मंत्र दुनिया के देशों को भी भाया और इसी कारण पीएम मोदी की पहल को 192 देशों का समर्थन मिला। 177 देश योग के सह प्रायोजक के तौर पर इस आयोजन से जुड़ भी गए। अब पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस होने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास से योग को आज पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है। यह अनायास नहीं है कि पूरी दुनिया में योग का डंका बज रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारत की नीति और भारतीय होने पर गौरव की अनुभूति से प्रभावित प्रधानमंत्री मोदी ने योग का पूरी दुनिया में प्रसार किया है।

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पेंटागन को सौंपी गयी इस ख़ुफ़िया सुचना का टाइटल ही है की, “अमरीका के बाद भारत दूसरा देश हो सकता है जिसने किसी पर परम.....

जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की एक ऐसी शक्ति बनकर उभरा है जिसे झुकाया नहीं जा सकता। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का अहम स्थान है, तो सामरिक क्षेत्र में भी भारत ने अपनी हनक का अहसास कराया है। सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में भारत ने जहां अपनी जिम्मेदारी निभाई है, वहीं पर्यावरण संतुलन जैसे मुद्दे पर भी भारत की पहल सराहनीय रही है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख ने जहां देश-दुनिया को सोचने को मजबूर किया है, वहीं विश्व शांति की ओर भारत के प्रयासों को दुनिया के देशों ने मान्यता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। विदेश नीति के तौर पर उनकी उपलब्धियां आंकी जाए तो पीएम मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का दबदबा लगातार बढ़ रहा है।

पुलवामा आतंकी हमला: रूस ने कहा, मसूद अजहर को बैन करो

पुतिन ने दिया साथ पाकिस्‍तान पर पुलवामा आतंकी हमले के बाद दबाव बढ़ता जा रहा है तो यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) पर भी अब जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। अब भारत के करीबी और पिछले कई दशकों से रणनीतिक साझेदार रहे, रूस ने यूएन से मांग की है कि अजहर को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित किया जाए। फरवरी 19 को फ्रांस, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की ओर से इसी तरह की बात कही गई थी। इन देशों ने कहा था कि वे, यूएन में अजहर को आतंकी घोषित करने वाला प्रस्‍ताव पेश करेंगे।
पुतिन ने दिया साथ 

रूस के मंत्री डेनिस मानटुरोव ने कहा है कि रूस, आतंकवाद की लड़ाई में हमेशा भारत के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा। डेनिस ने यह बात उस समय कही जब उनसे पूछा गया था कि क्‍या वह यूएनएससी में अजहर को ग्‍लोबल टेररिस्‍ट घोषित करने वाले प्रस्‍ताव पर भारत का समर्थन करेंगे। डेनिस ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमेशा भारत का समर्थन किया जाएगा। इससे पहले रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन ने भी पुलवामा हमले पर बड़ा बयान दिया था।पीएम मोदी को दिलाया भरोसा 
हमले के बाद पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजा था। पुतिन ने मोदी से कहा था, 'इस हमले पर हमारी संवेदनाएं स्‍वीकार करें जिसमें जम्‍मू कश्‍मीर में भारत की सेनाओं के जवानों ने अपनी जान गंवा दी है।' पुतिन ने कहा था कि रूस इस हमले की कड़ी निंदा करता है। इस हमले के साजिशकर्ताओं को निश्चित तौर पर सजा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्‍होंने दोहराया था कि भारत के साथ मिलकर काउंटर-टेररिज्‍म सहयोग को और मजबूत करने के लिए तैयार है।
अमेरिका ने फिर फटकारा 

पाक को फरवरी 20 को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से भी पुलवामा हमले पर बयान दिया गया है। ट्रंप ने इस हमले को डरावना बताया है। साथ ही कहा है कि वह इस हमले में एक विस्‍तृत बयान जारी करेंगे। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से कहा गया है कि पाकिस्‍तान हमले की जांच में सहयोग करे और साजिशकर्ताओं को सजा दे।
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बीकानेर के जिला कलेक्टर ने बीकानेर में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक....

न्‍यूजीलैंड और फ्रांस भी समर्थन में 
रूस से पहले न्‍यूजीलैंड और फ्रांस की ओर से भी हमले की निंदा की गई है। इन देशों ने भी पाकिस्‍तान से कहा है कि वह साजिशकर्ताओं पर एक्‍शन ले। 14 फरवरी को जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ कॉन्‍वॉय पर हुए इस सुसाइड अटैक को जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था।

आखिर किसके इशारे पर KGB भारत में दखल दे रही है?


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सेवानिर्वित होने उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते जनवरी 2013 के अंक में कश्मीर समस्या पर अपनी रपट में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी का कश्मीर विरोधी संगठन में पदाधिकारी होने को प्रकाशित किया था। आज जिसे देखो कश्मीर समस्या के लिए प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू को दोषी करार देते रहते हैं, लेकिन नेहरू की उस परिपाटी को आगे बढ़ाने वालों को क्यों नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है, समझ से दूर है। किसी कांग्रेस विरोधी तो क्या किसी मीडिया ने भी इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं की। 
और जहाँ तक सोनिया के रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी के साथ सम्बन्धों की बात है, यह कोई ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं। क्योंकि कांग्रेस और केजीबी का चोली दामन का साथ रहा है, जिसे कोई भी वरिष्ठ राजनेता झुठला नहीं सकता। भूतपूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, डॉ मुरली मनोहर जोशी, और इनके समकालीन किसी भी नेता से पूछिए कि "तत्कालीन भारतीय जनसंघ के वरिष्ठ निर्भीक एवं जुझारू नेता प्रो बलराज मधोक ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी से संसद में ऐसा कौन-सा प्रश्न किया था, जिसका सत्तारूढ़ कांग्रेस खेमे से किसी प्रतिक्रिया होने पूर्व वाजपेयी ने हाज़िर जवाब की भाँति तुरन्त खड़े होकर, तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष से उस ज्वलन्त प्रश्न को सदन की कार्यवाही से निकालने का अनुरोध करते ही प्रो मधोक को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा करने के साथ ही प्रो मधोक के लिए जनसंघ से अलग स्थान देने को कहा था।" उन दिनों चर्चा थी परन्तु वाजपेयी ने सारा खेल बिगाड़ा ही नहीं, बल्कि रहस्य को हमेशा के लिए दफ़न कर दिया। वाजपेयी अपने लच्छेदार बातों और कविताओं से मनोरंजन कर सकते थे, लेकिन ऐसे दबंग प्रश्न करने का साहस नहीं था, वह साहस था केवल प्रो बलराज मधोक में। और मधोक के पीछे विपक्ष के दूसरे नेताओं के अतिरिक्त कुछ कांग्रेस सांसदों का भी गुप्त रूप से सहयोग था, जो उस प्रश्न की चर्चा होने पर ही सामने आते। क्योंकि उन दिनों केवल वही समाजसेवी राजनीती में आते थे, जिन्हे अपनी तिजोरी की चिन्ता नहीं होती थी। उनके लिए देशहित सर्वोपरि होता था। वह केवल आपत्तिजनक प्रश्न नहीं था, बल्कि रूस और केजीबी से सम्बन्धित अनेको रहस्यों को उजागर करने का स्वर्णमयी अवसर था।     
रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी भारत में होने वाले चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक सोशल मीडिया एक्सपर्ट ने ये बड़ा खुलासा किया है। इंटरनेट स्टडीज के प्रोफेसर फिलिप एन हॉवर्ड ने अमेरिकी सीनेट की खुफिया मामलों की कमेटी के आगे यह बयान दिया है। हालांकि उन्होंने चुनावों को प्रभावित करने के तौर-तरीकों पर ज्यादा विस्तार से नहीं बताया है। इससे पहले रूसी खुफिया एजेंसियों पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के आरोप भी लग चुके हैं। भारत के अलावा ब्राजील के चुनावों में भी रूसी एजेंसियों की दिलचस्पी की बात सामने आई है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के साथ रिश्ते होने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में शक जताया जा रहा है कि केजीबी भारत में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री की मौत और उसके बाद इंदिरा गांधी की ताजपोशी के पीछे भी केजीबी का हाथ माना जाता है।

सोशल मीडिया के जरिए साजिश

हॉवर्ड ने अमेरिकी मीडिया को सलाह देते हुए कहा है कि भारतीय चुनावों से जुड़ी खबरों में वो अतिरिक्त सावधानी बरतें। न कि ट्विटर पर फैलाए जाने वाले प्रोपोगेंडा पर भरोसा कर लें। उनकी राय में भारत और ब्राजील जैसे लोकतांत्रिक देश अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगी हैं। रूस उन्हें अपने असर में लेना चाहता है और चाहता है कि वहां पर उसकी पसंद की सरकारें सत्ता में रहें। पहले भी यह खबर आती रही है कि रूसी प्रशासन नरेंद्र मोदी के भारत का प्रधानमंत्री बनने को लेकर सहज नहीं था। उसकी राय में कांग्रेस जब सत्ता में होती है तो भारत अमेरिका के बजाय रूस से रिश्तों को ज्यादा महत्व देता है। यही कारण है कि केजीबी मोदी को सत्ता से हटाकर सोनिया को लाने की कोशिश कर रहा है।

सोनिया और केजीबी के गुप्त रिश्ते

बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी हमेशा से दावा करते रहे हैं कि सोनिया गांधी के रूसी एजेंसी केजीबी से रिश्ते हैं। वो बिना नाम लिए यहां तक दावा करते हैं कि सोनिया दरअसल रूसी जासूस हैं जिन्हें केजीबी ने देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार में बहू के तौर पर प्लांट कराया है। स्वामी के मुताबिक इंदिरा और राजीव गांधी की हत्याओं के पीछे भी केजीबी का ही हाथ था। यहां यह जानकारी देना अहम है कि सोनिया गांधी के पिता एंटोनियो माइनो रूसी एजेंसी केजीबी के जासूस रहे हैं। कुछ समय पहले सोनिया गांधी रूस की सीक्रेट यात्रा पर भी गई थीं। कहा गया था कि वो वहां इंदिरा गांधी पर एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगी, लेकिन स्वामी के सूत्रों के मुताबिक मॉस्को में सोनिया ने कई संदिग्ध लोगों के साथ बैठकें की थीं। तभी यह सवाल उठा था कि आखिर रूस यात्रा में ऐसा क्या था कि सोनिया ने उसकी जानकारी छिपाने की कोशिश की।

रूस के हाथों की कठपुतली सोनिया!

आईबी के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे मलय कृष्ण धर और कांग्रेस के सीनियर नेता नटवर सिंह ने भी सोनिया गांधी के रूस से करीबी रिश्तों का जिक्र अपनी किताबों में किया है। मोदी सरकार बनने के बाद दिसंबर 2014 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन जब भारत आए थे, उस वक्त भी उनकी सोनिया गांधी के साथ विशेष मुलाकात हुई थी। इसी तरह राहुल गांधी और चीन के दूतावास के अधिकारियों की गुपचुप मुलाकातें भी अक्सर सुर्खियों में आती रही हैं। 20 जुलाई 2018 को अविश्वास प्रस्ताव के दिन संसद के अंदर जिस तरह से राहुल गांधी ने भारत-फ्रांस के बीच राफेल समझौते को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति के नाम पर झूठ बोला उससे अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के जरिए चीन और रूस की खुफिया एजेंसियां भारत के रक्षा सहयोगी देशों को टारगेट कर रही हैं।
आप सुब्रह्मण्यम स्वामी का ट्वीट देख सकते हैं। माना जाता है कि स्वामी सोनिया के लिए कोड नेम TDK इस्तेमाल करते हैं।
Desperate Congi leaders are planning to use TDK’s KGB connection to urge Putin’s Russia to influence our 2019 elections. We must be therefore on high alert

अब भारत में बनेंगी मिसाइलें, रूस की तकनीक से भारत होगा मजबूत--नरेन्द्र मोदी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले पुतिन, भारत-रूस के बीच हुए ये अहम समझौते
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। 
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अक्टूबर 4 की शाम को दिल्ली पहुंचे जिसके बाद प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। वहीं अब दोनों देशों के बीच खास वार्ता हुई जिसमे कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। तो वहीं इस वार्ता के बाद पीएम मोदी ने रूस के साथ दोस्ती की मिशाल भी पेश की है।
इस मिसाइल के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद से अब दुश्मनों की ख़ैर नहीं होगी। तो वहीं इस वार्ता के बाद पीएम मोदी ने रशिया के साथ दोस्ती की मिशाल भी पेश की है। वहीं इस वार्ता के बाद पीएम मोदी ने रूस के साथ आगे भी कई अहम मुद्दों पर करार करने की बात कही है। मोदी कहते हैं कि, वह रशिया के साथ मिलकर सबसे मजबूत न्यूकलर पावर बनेंगे। आगे वह कहते हैं कि, दोनों देशों के बीच केवल तकनीक का लेनदेन नहीं होगा बल्कि हम साथ मिलकर भारत में मिसाइलें बनाएंगे। मेक इन इंडिया के तहत इन मिसाइलों को तैयार किया जायेगा, उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में रूस हमेशा साथ रहा है, हमारा अगला लक्ष्य भारत के मिशन गगनयान को अंतरिक्ष में भेजना है इसमें रूस हमारी पूरी सहायता करेगा।View image on Twitter


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Our countries are like friends in the field of nuclear energy. Now we don't only buy & sell technology. We can also work together for the production of these products in India. In defense also, we can manufacture here under 'Make In India': PM Modi at India-Russia Business Summit
मोदी-पुतिन की शिखर वार्ता के बाद भारत-रूस के बीच हुए 8 अहम समझौतेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग, रेलवे समेत कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग के विषय शामिल हैं। 
प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 19वें भारत रूस वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की और अनेक द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। 
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच वार्ता के बाद भारत, रूस ने पांच अरब डॉलर के एस-400 वायु रक्षा प्रणाली समझौते पर हस्ताक्षर किए।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त संवाददाता संबोधन में कहा कि भारत- रूस मैत्री अपने आप में अनूठी है। इस विशिष्ट रिश्ते के लिए राष्ट्रपति पुतिन की प्रतिबद्धता से इन संबंधों को और भी ऊर्जा मिलेगी। 
उन्होंने कहा कि हमारे बीच प्रगाढ़ मैत्री और सुदृढ़ होगी और हमारी विशेष और विशिष्ट सामरिक गठजोड़ को नई बुलंदियां प्राप्त होंगी। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता ने भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है। 
वहीं, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा कि आतंकवाद एवं मादक पदार्थों की तस्करी के खतरे से निपटने के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। 
दूसरी ओर दोनों देशों के बीच हुए समझौते को संबंधों को नई दिशा प्रदान करने वाला करार देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मानव संसाधन विकास से लेकर प्राकृतिक संसाधनों तक, कारोबार से लेकर निवेश तक, नाभिकीय ऊर्जा के शान्तिपूर्ण सहयोग से लेकर सौर ऊर्जा तक, प्रौद्योगिकी से लेकर बाघ संरक्षण तक, सागर से लेकर अंतरिक्ष तक भारत और रूस के सम्बन्धों का और भी विशाल विस्तार होगा। 
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरूद्ध संघर्ष, अफगानिस्तान तथा हिंद प्रशांत के घटनाक्रम, जलवायु परिवर्तन, एससीओ, ब्रिक्स जैसे संगठनों एवं जी20 तथा आसियान जैसे संगठनों में सहयोग करने में हमारे दोनों देशों के साझा हित हैं। 
मोदी ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अपने लाभप्रद सहयोग को जारी रखने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने बदलते विश्व में बहु-ध्रुवीय और बहु-स्तरीय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर एकमत होरे पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष मिशन गगनयान में पूर्ण सहयोग देने का अश्वासन पर रूसी राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया।