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‘पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग’ के खिलाफ सिर्फ शेरदिल ऋषि सुनक ने उठाई थी आवाज; कीर स्टार्मर समेत ब्रिटेन के तमाम प्रधानमंत्री टेकते रहे इनके आगे घुटने

                       कीर स्टारमर और ऋषि सुनक (फोटो साभार-x@Keir Starmer, @Rishi Sunak)
ब्रिटेन में आठवाँ प्रधानमंत्री अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को 22 जून 2026 को अपने इस्तीफे की घोषणा करनी पड़ी। यह घोषणा लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव की वजह से की गई। दरअसल उनके प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने 18 जून को हुए मेकरफील्ड उपचुनाव में निर्णायक जीत हासिल की थी।

इस जीत के साथ ही बर्नहैम ने पार्टी नेतृत्वकर्ता के तौर पर खुद को स्थापित कर लिया और स्टार्मर के लिए चुनौती बन गए। ​​स्टार्मर की घटती लोकप्रियता के कई कारण हैं, लेकिन पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे को जानबूझकर कर नजरअंदाज करना, उनकी लोकप्रियता में कमी की अहम वजह है।

कीर स्टार्मर जनता और लेबर पार्टी के समर्थकों में लगातार अलोकप्रिय होने जा रहे थे। उनकी एक के बाद एक ली गई नीतिगत फैसलों की आलोचना हो रही है। उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने क्लीन चिट नहीं दी गई थी। स्टार्मर को पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि लेबर पार्टी को अंदेशा था कि अगले आम चुनाव में स्टार्मर के फैसलों की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पार्टी ने ही कीर स्टार्मर को पद छोड़ने और एंडी बर्नहैम के लिए रास्ता बनाने का आदेश दिया। दरअसल बर्नहैम की हालिया चुनावी जीत ने इस उम्मीद को जगाया है कि उनका नेतृत्व अगले चुनाव में लेबर पार्टी को करारी हार से बचा सकता है।

देखिए किस तरह ब्रिटिश भारत में हिन्दू-मुसलमानों को लड़वाने के चिंगारियां छोड़ कर गए थे, दिल्ली में कई जगह बीच सड़क पर मस्जिदें और कब्रें बनवा गए, अब उसी आग में खुद जल रहा:-   

22 जून को अपने भाषण में कीर स्टार्मर ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव के लिए उन्हें विश्वस्त चेहरा नहीं मानती, जिसके दम पर चुनाव जीता जा सकता है।

दरअसल कीर स्टार्मर लगातार राजनीतिक लाभ के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपना रहे हैं। इससे ब्रिटिश जनता में भारी गुस्सा है। यह याद रखना आवश्यक है कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जून 2025 में अपनी नीति में अचानक बदलाव किया और ऑडिट और सिफारिशों के बाद पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कारी ग्रुमिंग गैंग की जाँच कराने का वादा किया था।

हालाँकि जनवरी 2025 में स्टार्मर ने यौन शोषण करने वाले गिरोहों की जाँच की माँग करने वालों को धुर दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थन करने वाला बताया था। दरअसल उस वक्त अमेरिकी अरबपति एलोन मस्क ने ब्रिटेन सरकार पर जोरदार हमला किया था। उन्होंने मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे पर स्टार्मर सरकार द्वारा कदम नहीं उठाने की बात कही थी और वर्षों से पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग द्वारा गैर-मुस्लिम लड़कियों के शोषण करने की बात कही थी।

पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों की जाँच शुरू करने में भी कीर स्टार्मर ने तत्परता नहीं दिखाई। जब उनपर दबाव बढ़ा तो उन्होंने जाँच शुरू की। इससे दोनों पक्षों के बीच वे अलोकप्रिय हुए।

लेबर पार्टी की मुस्लिम-समर्थक नीतियों के खिलाफ कंजर्वेटिव पार्टी के कड़े विरोध के बावजूद, लेबर सरकार ने ब्रिटेन के रुख में बदलाव करते हुए फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन किया है और इजरायल को कुछ हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह बदलाव गाजा में मानवीय संकट को लेकर पार्टी नेतृत्व और कई क्षेत्रों में लेबर पार्टी के समर्थक मुसलमानों के दबाव के बीच हुआ है। इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर 2024 में मुस्लिम बहुल सीटों पर लेबर पार्टी का समर्थन कम होने के बाद यह नीतिगत बदलाव आया है।

स्टार्मर को दोहरी नीति अपनाने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है। इफ्तार कार्यक्रमों की मेजबानी करने से लेकर मुसलमानों को ‘आधुनिक ब्रिटेन का चेहरा’ कहने और ‘इस्लामोफोबिया’ से निपटने के लिए आत्मघाती रूप से सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने तक, स्टार्मर ने अपनी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखने के लिए हद से ज्यादा प्रयास किए।

दरअसल दिसंबर 2025 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार की प्रस्तावित ‘इस्लामोफोबिया’ (या ‘मुस्लिम विरोधी घृणा’) की परिभाषा पर ब्रिटिश हिंदू, सिख और मानवाधिकार समूहों ने गहरी आपत्ति जताई है | आलोचकों का मानना है कि इसमें मौजूद अस्पष्ट शब्दावली, जैसे- ‘नस्लीयकरण’ और ‘पूर्वाग्रही रूढ़िवादिता’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबा सकती है और एक तरह से पिछले दरवाजे से ‘ईशनिंदा कानून’ (ब्लास्पहमी लॉ) की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हिंदू और सिख समूहों ने चेतावनी दी है कि केवल मुस्लिम के लिए ऐसी अलग और अस्पष्ट परिभाषा बनाने से अन्य धर्मों के प्रति भेदभाव की भावना पैदा होगी।

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रमुख, लोक अभियोजन निदेशक (डीपीपी) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कीर स्टार्मर को कुप्रबंधन के आरोपों का भी सामना करना पड़ा।

पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग और कीर स्टार्मर की चुप्पी

1980 के दशक में टेलफोर्ड शहर में एक घटना ने पाकिस्तानी मुस्लिम रेपिस्ट गैंग की ओर लोगों का ध्यान खींचा। उस वक्त 11 साल की छोटी बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया, झूठी देखभाल का दिखावा किया गया और फिर नशीली दवाइयाँ देकर बलात्कार किया गया। उसे पीटा गया, बेचा गया और यहाँ तक ​​कि ग्रुमिंग गिरोहों ने उसकी हत्या भी कर दी। इस दौरान देखा गया कि गोरी बच्चियों का रेप कर उसे बलात्कारी दूसरे बलात्कारी के हवाले कर देता था।

ऐसे रेपिस्ट ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल के थे। तीन लड़कियों की हत्या कर दी गई थी और दो त्रासदियों की वजह से मारी गईं। 1,70,000 आबादी वाले शहर में लगभग 1000 लड़कियाँ पीड़ित हुईं। टेलफोर्ड में, ये पाकिस्तानी गिरोह ऐसा अड्डे चला रहे थे, जहाँ लड़कियों को प्रेमजाल में फँसा कर उन्हें गिफ्ट देकर अपने साथ लाते थे।

रोदरहम में भी इसी तरह का एक रैकेट चल रहा था। 2,26000 की आबादी वाले शहर में पाकिस्तानी मूल के पुरुषों ने करीब 1500 लड़कियों का रेप किया गया और उन्हें खरीदा-बेचा गया। कई पीड़ितों के साथ गैंगरेप किया गया और यह दुर्व्यवहार 1997 से 2013 तक बेरोकटोक जारी रहा। रोशडेल में यह सिलसिला 2002 में शुरू हुआ। कम से कम 47 युवतियों को दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया। प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों की प्रतिक्रिया इतनी निष्क्रिय रही है कि ये गिरोह “ग्रेट ब्रिटेन” की सड़कों पर आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

ब्रिटेन में हडर्सफ़ील्ड, रोदरहम, रोशडेल, ऑक्सफोर्ड, ब्रिस्टल, पीटरबरो और न्यूकैसल सहित कई स्थानों पर यौन शोषण के कारनामों का खुलासा हुआ। कई रिपोर्टों और जांचों के बावजूद, स्टोववुड और टूरवे जैसी जांच कार्रवाइयों के बावजूद, यौन शोषण करने वाले गिरोहों द्वारा किए गए यौन शोषण के वास्तविक पैमाने का पता नहीं लगाया जा सका।

ये ‘ग्रूमिंग’ अपराध यूनाइटेड किंगडम को लगातार परेशान कर रहे हैं, क्योंकि नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (एनएसपीसीसी) ने 2023 में बताया कि पिछले पांच वर्षों में युवाओं के खिलाफ ऑनलाइन ग्रूमिंग अपराधों में 82% की वृद्धि हुई है।

पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग ने गरीब श्वेत और गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ बलात्कार किया। यह मुद्दा सबसे पहले रोदरहम, रोशडेल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में सामने आया। रोदरहम पर 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1400 बच्चों का 16 वर्षों में यौन शोषण किया गया। इसके ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मूल के पुरुष थे। हालाँकि कंजर्वेटिव पार्टी भी पूरी तरह निर्दोष नहीं है, लेकिन लेबर सरकार और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज किया।

हाल ही में सांसद रूपक लो की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रेप गैंग इंक्वायरी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिटिश सरकार और सीपीएस ने जातीयता और धर्म से संबंधित डेटा को किस प्रकार दबाया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लेबर पार्टी ने मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए जाँच में देरी की या फिर उसे रोक दिया। इसमें आगे कहा गया है कि बलात्कार के जिहादियों को हल्की सजा दी गईं और उन्हें देश से बाहर नहीं निकाला गया। स्टार्मर के कार्यकाल में तो हद ही हो गया, सीपीएस ने हजारों बलात्कारी जिहादियों को केवल ‘चेतावनी’ देकर छोड़ दिया।

ओपइंडिया ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि कैसे ब्रिटेन के राजनेता, विशेषकर लेबर पार्टी, जिहाद के मामलों को कम करके आँकते हैं। लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन को 2017 में द सन में प्रकाशित एक लेख के लिए माफी माँगनी पड़ी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि ब्रिटेन की अहम समस्या ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों द्वारा श्वेत लड़कियों का बलात्कार और शोषण है”। चैंपियन को न केवल माफी माँगनी पड़ी, बल्कि अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा।

2012 में, लेबर पार्टी के नेता और गृह मामलों की चयन समिति के अध्यक्ष कीथ वाज ने ग्रूमिंग जिहाद अपराधों को कम करके आँका। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को ‘कलंकित’ नहीं किया जाना चाहिए।

दो दशकों से अधिक समय तक हजारों गैर-मुस्लिम नाबालिग और वयस्क लड़कियों को निशाना बनाने वाले मुस्लिम बलात्कार गिरोहों को पकड़ने में ब्रिटिश सरकारों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की सामूहिक विफलता का कारण ‘इस्लामोफोबिया’ से बचने की सोच है। लेबर पार्टी के नेताओं के साथ-साथ ब्रिटिश मीडिया भी इस मामले में पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग या पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग कहने से बचता रहा। इसके बजाय ‘दक्षिण एशियाई ग्रूमिंग गैंग’ का इस्तेमाल किया।

रूढ़िवादी राजनेताओं, ब्रिटिश देशभक्तों और एलोन मस्क ने स्टार्मर पर पाकिस्तानी बलात्कार गिरोह के अपराधों में मिलीभगत का आरोप लगाया। कई लोगों ने माँग की थी कि सीपीएस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए स्टार्मर पर मुकदमा चलाया जाए।

कुल मिलाकर कीर स्टार्मर ने पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग पर एक्शन लेने से परहेज किया, वहीं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव नेता ऋषि सुनक ने जोखिम उठाकर पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के खिलाफ आवाज उठाया और उन्हें जिहादी करार दिया।

ऋषि सुनक ने उठाए थे कदम

ऋषि सुनक ब्रिटेन के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे, जिन्होंने न केवल मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की निंदा की, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे राजनीतिक शुद्धता ने राजनेताओं को बलात्कार जिहाद के खिलाफ बोलने से रोका। साथ ही यह भी बताया कि वह ब्रिटेन में यौन शोषण गिरोहों की समस्या से कैसे निपटेंगे।

अक्टूबर 2025 में पदभार संभालने से कुछ महीने पहले दिए गए एक साक्षात्कार में, तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग या रेप जिहाद को ‘भयानक अपराध’ बताया था और प्रधानमंत्री बनने पर इस समस्या से प्राथमिकता के आधार पर निपटने का वादा किया था।

सुनक ने घोषणा की थी कि वे राष्ट्रीय अपराध एजेंसी में एक नया टास्क फोर्स बनाएँगे, जो यौन शोषण करने वाले गिरोहों की निगरानी करेगा। उन्होंने कहा था, “हम हर जगह पुलिस बलों के लिए इसे प्राथमिकता देना अनिवार्य करेंगे। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि सभी पुलिस बल इसमें शामिल लोगों की पहचान दर्ज करें, जो वर्तमान में नहीं किया जाता क्योंकि लोग ऐसा नहीं करना चाहते। मैं यौन शोषण में शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करना चाहता हूँ, जिसमें पैरोल के बहुत सीमित विकल्प होंगे। एक कंजर्वेटिव सरकार को लोगों की सुरक्षा के आड़े राजनीतिक स्वार्थ को नहीं आने देना चाहिए ।”

सुनक ने अपना वादा निभाया और अप्रैल 2023 में देश में मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की जाँच में पुलिस की सहायता के लिए एक नए ‘ग्रूमिंग गैंग्स टास्क फोर्स’ बनाया । इस टास्क फोर्स में सुनक ने जाँच में सहायता के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यौन शोषण गिरोहों के पीछे के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने यह भी वादा किया कि यौन शोषण गिरोह के सदस्यों और सरगनाओं को उनके अपराधों के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।

सुनक ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार ऐसा कानून लाएगी जिससे यौन शोषण करने वाले गिरोह के सरगना को सजा सुनाते समय एक वैधानिक कारक के रूप में शामिल किया जा सके, जो इन अपराधों के लिए सबसे कड़ी सजा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।

ऋषि सुनक के पास पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों को जड़ से खत्म करने का एक दूरदर्शी दृष्टिकोण और बड़ी योजनाएँ थीं। हालाँकि, आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार ने ब्रिटेन की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि देश में यौन शोषण गिरोहों का अंत होगा और हजारों पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

कंजर्वेटिव पार्टी का 14 साल का शासन अर्थव्यवस्था, महँगाई, आव्रजन और ब्रेक्जिट के बाद की चुनौतियों से निपटने के तरीके को लेकर जनता के असंतोष और पार्टी के आंतरिक मतभेदों के कारण चुनावी हार के साथ समाप्त हुआ। हालाँकि ऋषि सुनक जानते थे कि वे एक डूबते जहाज का नेतृत्व कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने राजनीतिक लाभ हासिल करने की होड़ और राजनीतिक शुद्धता को पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों से ब्रिटिश लड़कियों के लिए न्याय और सुरक्षा के अपने प्रयासों में बाधक न बनने देने का भरसक प्रयास किया।

कीर स्टार्मर को ऋषि सुनक की तुलना में कहीं अधिक समय तक सत्ता में रहने और राजनीतिक स्थिरता मिली, फिर भी स्टार्मर कई मोर्चों पर विफल रहे। पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में स्टार्मर के बार-बार बदलते रुख को प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी असफलताओं में से एक माना जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस(TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने फिर किया हिंदुओं का अपमान: SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय को बताया ‘चुनावी सनातनी’


तृणमूल कांग्रेस(TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदुओं को लेकर अपमानजनक बातें की हैं। उन्होंने जातियों को निशाना बनाया और हिंदू प्रतीकों तक का मजाक उड़ाने से भी वह नहीं चूकीं। वो भी जानती हैं कि हिंदू धर्म और इसको मानने वाले सहिष्णु हैं तो वो कुछ भी कहकर बचकर निकल जाएँगी।

महुआ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। गुरुवार(28 अगस्त 2025) के बताए जा रहे इस वीडियो को बीजेपी की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर शेयर किया है।

महुआ इस वीडियो में वह हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए बंगाली में कह रही है, “पूरे साल आप तृणमूली रहते हैं और चुनाव के दौरान सनातनी?” जाहिर है कि वह बताना चाहती हैं कि कोई एक साथ हिंदू (सनातनी) और TMC का समर्थक नहीं हो सकता है।

अपने बयान में आगे उन्होंने SC(अनुसूचित जाति), नामशूद्र, मतुआ समुदायों को भी अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया और वैष्णव समुदाय की पवित्र कंठी माला का मजाक उड़ाया है। उन्होंने उसे ‘लकड़ी की माला पहनने और खैरात लेने वालों की निशानी’ के रूप में पेश किया।

तृणमूल सांसद ने कहा कि SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय के लोग ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान वे बीजेपी के पक्ष में वोट देते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका वीडियो शेयर करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा इस भाषण की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मोइत्रा पर हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से हिंदू-विरोधी, जातिवादी नफरत भरा भाषण है। इस तरह के सांप्रदायिक जहर के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा, “भाजपा हमेशा नामशूद्र, SC और मतुआ समुदायों के साथ मजबूती से खड़ी रही है। अब समय आ गया है कि ये समुदाय महुआ मोइत्रा के तत्काल इस्तीफे की माँग करें और एक बड़ा आंदोलन शुरू करें। SC-ST और हिंदू समुदायों का अपमान करने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

इससे पहले गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह का सिर काट दिया जाना चाहिए और कटे हुए सिर को मेज पर रख कर लोगों को दिखाना चाहिए। महुआ ने ये बयान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बोलते हुए दिया था।

महुआ ने कहा था, “मैं पूछती हूँ कि क्या हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाला कोई नहीं है? और अन्य देशों के लाखों और करोड़ों की संख्या में लोग भारत में घुस रहे हैं, अगर वे हमारी माताओं और बहनों पर नजर रख रहे हैं, अगर वे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो सबसे पहले अमित शाह का सिर काटकर मेज पर रख देना चाहिए।”

ऑटो चालक के साथ पूर्व नियोजित कार्यक्रम का पर्दाफाश होने से नाराज केजरीवाल ने गुजरात AAP अध्यक्ष गोपाल इटालिया से मांगा इस्तीफा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जनता को मूर्ख बनाने के लिए ड्रामा करने से बाज नहीं आते हैं। लेकिन उनके ड्रामे की पोल भी जल्द खुल जाती है। गुजराज में भी उन्होंने ऑटो पॉलिटिक्स के जरिए लोगों को झांसा देने की कोशिश की। 12 सितंबर को जिस ऑटो ड्राइवर के घर खाना खाया था, उसी ने केजरीवाल को सार्वजनिक उपहास का पात्र बना दिया है। ऑटो ड्राइवर विक्रम ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत बड़ा फैन है और ऑटो यूनियन के कहने पर केजरीवाल को अपने घर पर खाने के लिए बुलाया था। इस खुलासे के बाद केजरीवाल गुजरात प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया से काफी नाराज बताये जा रहे हैं।

दरअसल सोशल मीडिया पर सूत्रों के हवाले से वायरल हो रहा है कि ऑटो-रिक्शा चालक के साथ केजरीवाल के पूर्व नियोजित कार्यक्रम का पर्दाफाश होने के बाद केजरीवाल AAP गुजरात अध्यक्ष गोपाल इटालिया से काफी नाराज हैं। केजरीवाल ने उनसे इस्तीफा देने को कहा है।

जिज्ञेश नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि सुनने मे आया है कि अहमदाबाद के ऑटो रिक्शा चालक के भाजपा समर्थक होने की बात को लेकर रेवड़ीवाल नाराज हो गए और उन्होंने आप के गुजरात के दोनों प्रभारी गोपाल इटालिया और इसुदान गढवी को आप से इस्तीफा देने की बात कर दी है l

सोशल मीडिया पर ऑटो ड्राइवर का वीडियो वायरल होने से आम आदमी पार्टी के गुजरात कार्यालय में हाई वोल्टेज ड्रामा चल रहा है। बताया जा रहा है कि इसुदान गढवी और गोपाल इटालिया में भी मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। इसुदान गढवी भी गोपाल इटालिया की योजना से काफी असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि गोपाल इटालिया ने ही ऑटो ड्राइवर के यहां केजरीवाल के भोजन की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी। इससे दोनों के बीच भारी खींचतान चल रही है।

ऑटो ड्राइवर विक्रम बीजेपी का समर्थक भी है। इतना ही नहीं 29 सितंबर को वो अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा में भाषण सुनने भी गया था। लोगों ने जब उससे दिल्ली के सीएम केजरीवाल को डिनर कराने के बारे में पूछा तो उसने साफ कहा कि अगर कोई घर आकर खाना खाने को बोलेगा, तो मना तो नहीं कर सकते। विक्रम ने साफ कहा कि वो बचपन से प्रधानमंत्री मोदी जी का प्रशंसक है। इंडिया टीवी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ऑटो यूनियन के कहने पर केजरीवाल को अपने घर पर खाने के लिए बुलाया था।

ऑटो ड्राइवर का यह भी कहना था कि ‘मैंने तो उन्हें आम नागरिक की तरह बुलाया था खाने पर, लेकिन मुझे नहीं पता था वो उसपे इतनी राजनीति करेंगे, खाना खाने के बाद से आप का कोई मेंबर नहीं दिखा। हम मोदी साहब के आशिक़ है और हमेशा उन्हें ही वोट जाता है।’

गुजरात से निकली ‘कांग्रेस तोड़ो यात्रा’… यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला का इस्तीफा


ऐसा लगता है कि भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों में लगे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आजकल सपने में भी इस्तीफे ही दिखाई दे रहे होंगे। एक के बाद एक इस्तीफा। छोटे से लेकर बड़े नेता तक का इस्तीफा। करीबी से लेकर दूर के नेता तक का इस्तीफा। पुरुष से लेकर महिलाओं तक का इस्तीफा। यकीन मानिए, राहुल गांधी जितनी शिद्दत के भारत जोड़ो में नहीं लगे हैं, उससे कहीं ज्यादा मजबूत, जोशो-जुनून के साथ कांग्रेसी ही कांग्रेस तोड़ो यात्रा बेहद तेजी से चला रहे हैं। अभी कांग्रेसी सियासत की फिजाओं में गुलाम नबी की ‘आजादी’ ही सुर्खियों में थी। कांग्रेसी एक के बाद एक मिल रहे सदमों से उबर भी नहीं पाए थे कि राहुल गांधी की गुजरात यात्रा से पहले एक ओर इस्तीफा उनकी झोली में आ गिरा। सिर्फ इस्तीफा ही नहीं, गांधी परिवार के लिए साथ में धारदार आरोप भी आए हैं।

राहुल के गुजरात विजिट से पहले गुजरात से ही आ गया इस्तीफा, गंभीर आरोप लगाए

यह वाकई दिलचस्प है कि एक ओर कांग्रेस पार्टी भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी करने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के नेता कांग्रस छोड़ रहे हैं। ऐसे में भारत जोड़ने से पहले कांग्रेस अपने ही नेताओं को जोड़े रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। राहुल गांधी की गुजरात यात्रा से पहले इस्तीफा भी गुजरात से ही आया है। गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस पद से इस्तीफा देने के बाद इसे कांग्रेस के लिए राज्य में एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
कांग्रेस विचारधारा से भटकी, पार्टी में गुटबाजी के चलते युवाओं का कोई भविष्य नहीं
गुजरात कांग्रेस में जारी उठा-पटक थमने का नाम ही नहीं ले रही है। कुछ ही माह पहले गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हर्दिक पटेल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। अब विश्वनाथ वाघेला ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा दिया है। वाघेला ने अपने इस्तीफे में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। वाघेला ने इस्तीफा देते हुए कहा कि कांग्रेस में सिर्फ और सिर्फ गांधी परिवार की पूजा होती है। हर ओर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीर लगी रहती है। कांग्रेस अपनी विचारधारा से भटक गई है। पार्टी में गुटबाजी हावी है और इसमें युवाओं का कोई भविष्य नहीं है।
इससे पहले भी हार्दिक पटेल समेत कई नेता छोड़ चुके हैं कांग्रेस का दामन
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आज (सोमवार) गुजरात का दौरा करने वाले हैं और वाघेला का इस्तीफा उनके दौरे से एक दिन पहले आया है। वाघेला ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर को पत्र लिखकर इस्तीफा दे दिया। हाल ही के महीनों में गुजरात कांग्रेस के कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़ा है। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हर्दिक पटेल ने कुछ ही माह पहले पार्टी को अलविदा कह दिया था। राजिंदर प्रसाद और कई हाई- प्रोफाइल नेताओं ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ अन्य पार्टियों में शामिल हो गए। कांग्रेस नेता राजिंदर प्रसाद ने दो सितंबर को पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। पेशे से वकील जयवीर शेरगिल ने भी 24 अगस्त को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देते हुए पार्टी पर कई आरोप लगाए थे। मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
आनंद शर्मा ने हिमाचल चुनाव संचालन समिति से दिया इस्तीफा
ताजा मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए गठित संचालन समिति से इस्तीफा दे दिया है। आनंद शर्मा ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। पत्र में आनंद शर्मा ने लिखा कि 26 अप्रैल को हिमाचल कांग्रेस के स्टीयरिंग कमिटी का प्रमुख बनाने के बावजूद आज तक उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने लिखा कि बीते दिनों दिल्ली और शिमला में हिमाचल चुनाव को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठकों में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। इसे ‘अपमान’ की बात कहत हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में अहम पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आनंद शर्मा को हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े नेताओं में माना जाता है।

कांग्रेस की डूबती नैया ‘अपमानित’ आनंद शर्मा ने भी छोड़ा साथ

कांग्रेस के अध्यक्ष पद की तुलना अगर कोल्हू के बैल से की जाये तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। कोल्हू का बैल दिन भर चलता है, लेकिन रहता अपने निर्धारित दायरे में ही है। ठीक वही स्थिति आज कांग्रेस की है, क्योकि 14 मार्च 1998 को सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटाकर सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने से आज 2022 तक गाँधी परिवार से बाहर कोई अध्यक्ष नहीं बना, क्यों? जिससे दुःखी होकर एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली नेता कांग्रेस से किनारा कर रहे हैं, जिसे देख लगता आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी केवल गाँधी परिवार और अंधभक्तों की पार्टी बनकर रहने वाली है। सोनिया के अध्यक्ष बनने के बाद से कांग्रेस ग्राफ निरंतर निचले स्तर की ओर जा रहा है और बची कसर पूरी कर रहे हैं राहुल और प्रियंका। अगर परिवार ने अध्यक्ष पद के मोह को नहीं त्यागा इसका राष्ट्रीय स्तर अस्तित्व भी खतरे में पड़ने वाला है। देश में भाजपा को टक्कर देने का जितना दम कांग्रेस में है,किसी अन्य पार्टी में नहीं, बशर्ते यह पार्टी में विराजमान प्रभावी व्यक्तियों को अध्यक्ष पद सौंपे। इसी में पार्टी की भलाई है और देश की भी। अन्यथा कांग्रेस आने वाले दिनों में सिर्फ कागजों में रहकर बिता हुआ कल बन जाएगी।   

पिछले 70 सालों से भ्रष्टाचार एवं घोटालों में लिप्त कांग्रेस जिस तेज गति से देश भर में जनाधार खोती जा रही है उससे लगता है भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा जल्द ही वास्तविकता बन जाएगी। अब कांग्रेस की दो राज्यों में ही सरकार सिमट कर रह गई है, जहां उसे बहुमत है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का जनाधार घटा और उसके बाद महाराष्ट्र, झारखंड, विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस मुख्य मुकाबले में नहीं आ पाई। महाराष्ट्र में कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी है। सत्ता के लालच में उसने वहां शिवसेना के साथ मिलाकर सरकार चलाने की कोशिश की लेकिन वह भी सफल नहीं रहा। इसी तरह झारखंड में भी कांग्रेस वोटों व सीटों के हिसाब से तीसरे नंबर की पार्टी है। वहां वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सरकार में शामिल है लेकिन आए दिन खटपट की खबरें भी आती रहती हैं। ताजा घटनाक्रम में वह बिहार में कहने को महागठबंधन सरकार की सहभागी है लेकिन वहां भी वह चौथे नंबर की पार्टी है। 

कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन न होने पार्टी के बड़े नेताओं का आम जनता से कट जाने के कारण कांग्रेस पार्टी दिन प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। पिछले कुछ समय में कई दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ दिया है। राजनीतिक हलके में कांग्रेस के बदतर हालात का जिम्मेवार पार्टी छोड़कर जानेवाले नेताओं को बताया जा रहा है। दरअसल 2019 के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है और यह प्रक्रिया अब तक जारी है। यदि समय रहते कांग्रेस अपने पार्टी संगठन में आमूलचूल परिवर्तन नहीं करती है तो आने वाले समय में उसके मतदाताओं की संख्या में और भी कमी देखने को मिले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

आनंद शर्मा का हिमाचल चुनाव संचालन समिति से इस्तीफा

ताजा मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए गठित संचालन समिति से इस्तीफा दे दिया है। आनंद शर्मा ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। पत्र में आनंद शर्मा ने लिखा कि 26 अप्रैल को हिमाचल कांग्रेस के स्टीयरिंग कमिटी का प्रमुख बनाने के बावजूद आज तक उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने लिखा कि बीते दिनों दिल्ली और शिमला में हिमाचल चुनाव को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठकों में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। इसे ‘अपमान’ की बात कहत हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में अहम पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। शर्मा पहाड़ी राज्य के सियासी हाल को लेकर भी कह रहे हैं कि केवल वह और उनके समर्थक ही भारतीय जनता पार्टी से लड़ सकते हैं। 

खास बात है कि भाजपा के शासन वाले राज्य में कांग्रेस ऐसे समय पर दोबारा तैयार होने की कोशिश कर रही है, जहां आम आदमी पार्टी भी अपनी सक्रियता बढ़ा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा को 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश में संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आनंद शर्मा को हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े नेताओं में माना जाता है।

शर्मा ने कहा- सोनिया गांधी ने पत्र का जवाब नहीं दिया

शर्मा से जब मीडिया ने पूछा कि क्या अब तक किसी ने संपर्क किया? तो इस पर वह बोले कि नहीं, मुझसे कौन बात करेगा। उन्होंने कहा कि मेरे जैसी वरिष्ठता वाले को अब तक कोई सम्मान नहीं दिया गया। खास बात है कि अब तक पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उनके पत्र का जवाब नहीं दिया है। शर्मा कहते हैं कि उनके पास मेरा लैटर है। मैं उनके जवाब का इंतजार कर रहा हूं। मुझे यकीन है कि यह उनकी सूची में शामिल होगा। उन्होंने पार्टी की स्थिति पर दुख जाहिर किया है। कांग्रेस नेता ने कहा लेकिन यह दुखद है कि उन्होंने यह स्थिति तैयार होने दी। मैं उनका सम्मान करता हूं। शर्मा ने कहा कि पार्टी को बर्बाद करने वाले इन लोगों को (हिमाचल) भेज दो। क्या ये वहां भाजपा से लड़ सकते हैं? केवल मैं और मेरे समर्थक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुटबाजियों के बाद भी पूरी पार्टी हिमाचल में मेरे साथ खड़ी है। हाल ही में कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस की कमान प्रतिभा चौहान को दी थी। पार्टी को उम्मीद थी कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके पति की विरासत पार्टी को जोड़कर रखेगी, लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी में आंतरिक कलह जारी है। शर्मा ने भी अपने पत्र में कई समितियां होने की परेशानियां गिनाई हैं। उन्होंने कहा है कि चुनाव की तैयारियों और रणनीति को लेकर हिमाचल कांग्रेस और वरिष्ठ नेताओं की बैठक दिल्ली और शिमला दोनों जगह हुईं, लेकिन उन्हें इसके बारे में नहीं बताया गया।

इसी साल के अंत में होने हैं हिमाचल चुनाव

आनंद शर्मा ने पहली बार 1982 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वे कई बार राज्यसभा के सदस्य और पार्टी में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं। आनंद शर्मा का इस्तीफा हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले आया है। हिमाचल में इसी साल के अंत में चुनाव होने हैं जिसे लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा- हमारे पास ‘साझा संभावनाएं’ हैं

इस बीच आनंद शर्मा के बीजेपी ज्वाइन करने की चर्चाएं जोरों पर है। इस पर बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट जे. पी. नड्डा का कहना है कि आनंद शर्मा और वो निजी जीवन में दोस्त हैं। उन्होंने कहा कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश चुनाव संचालन समिति से आनंद शर्मा का इस्तीफा, उनका निजी फैसला है। मेरा उनसे जुड़ाव हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र के तौर पर ही है। जे. पी. नड्डा ने कहा कि आनंद शर्मा ने उनसे पार्टी (BJP) ज्वॉइन करने के बारे में कोई बात नहीं की है। लेकिन निजी तौर पर हम एक-दूसरे को जानते हैं। हमारे पास ‘साझा संभावनाएं’ हैं।

कांग्रेस पार्टी छोड़ने वाले दिग्गज

गुलाम नबी आजाद ने भी दिया था इस्तीफा

आनंद शर्मा का इस्तीफा जी-23 समूह के एक अन्य वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा हाल ही में जम्मू-कश्मीर में अभियान समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद आया है। गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा दोनों जी-23 समूह के प्रमुख नेता हैं जो पार्टी नेतृत्व के फैसलों के आलोचक रहे हैं।

कपिल सिब्बल

इस साल की शुरुआत से लेकर इन पांच महीनों के भीतर कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले नेताओं में सबसे बड़ा नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का है। बीते काफी समय से उनके रिश्ते कांग्रेस आलाकमान के साथ अच्छे नहीं चल रहे थे। कपिल सिब्बल ने उदयपुर में कांग्रेस के चिंतिन शिवर में बैठक के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। सिब्बल कांग्रेस पार्टी में व्यापक सुधारों पर जोर देने वाले विद्रोही ग्रुप “जी -23” के एक प्रमुख सदस्य थे। सिब्बल काफी समय से ना केवल कांग्रेस, बल्कि राहुल गांधी पर भी निशाना साधते रहे हैं।

सुनील जाखड़

पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। सुनील जाखड़ को कांग्रेस नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जाखड़ ने एक तीखे संदेश में कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को दोस्तों और दुश्मनों की पहचान करने की आवश्यता है।

हार्दिक पटेल

गुजरात के नेता हार्दिक पटेल ने पार्टी में दरकिनार किए जाने से नाराज होकर कांग्रेस छोड़ दी थी। हार्दिक ने अपने त्यागपत्र में राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे उनसे मिले तो शीर्ष नेता मोबाइल फोन पर व्यस्त थे। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात कांग्रेस पार्टी के मुद्दों की तुलना में नेताओं के लिए “चिकन सैंडविच” की व्यवस्था करने में अधिक रुचि रखती है।

अश्वनी कुमार

पूर्व कानून मंत्री अश्वनी कुमार ने इस साल की शुरुआत में फरवरी में कांग्रेस से अपना चार दशक पुराना रिश्ता खत्म कर लिया। उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे अपने त्यागपत्र में कहा कि यह कदम,”मेरी गरिमा के अनुरूप है।” उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि वह निकट भविष्य में कांग्रेस को पतन की ओर जाते हुए देख रहे हैं।

आरपीएन सिंह

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा (BJP) में शामिल हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, वह 32 साल से कांग्रेस में थे लेकिन पार्टी अब वो नहीं रही जो पहले हुआ करती थी।

जयंती नटराजन

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंती नटराजन ने 30 जनवरी 2015 को कांग्रेस पार्टी का साथ छो़ड़ा था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ते वक्त राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया था। नटराजन का परिवार कांग्रेस के साथ 1960 के दशक से जुड़ा हुआ था। उनके नाना एम भक्तवत्सलम तमिलनाडु में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे।

जीके वासन

यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके जीके वासन ने नवंबर 2014 में पार्टी छोड़ी थी। उनके पिता जीके मुपनार बड़े कांग्रेसी नेता रहे। वासन ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी में तमिलनाडु इकाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता। पार्टी छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने देसिया तमिल मनीला कांग्रेस की स्थापना की।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में अब तक सबसे ज्यादा सुर्खियां ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय ही मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई टकराहट आखिरकार सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने पर जाकर खत्म हुई। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना। सिंधिया राहुल गांधी के बेहद करीबी थे और कांग्रेस के भविष्य के रूप में भी देखे जा रहे थे।

टॉम वडक्कन

तकरीबन 20 सालों तक सोनिया गांधी के खास रहने के बाद टॉम वडक्कन ने पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय में पार्टी के स्टैंड का विरोध किया था। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली।

रंजीत देशमुख

महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रंजीत देशमुख ने संगठन पर आरोप लगाकर कांग्रेस छोड़ दी थी। वो महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार में मंत्री भी रहे थे। हालांकि बाद में खराब स्वास्थ्य की वजह से रंजीत सक्रिय राजनीति से अलग हो गए।

चौधरी बीरेंदर सिंह

हरियाणा कांग्रेस के ताकतवर नेता रहे चौधरी बीरेंदर सिंह ने 2014 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। कहते हैं कि उन्होंने पार्टी राज्य के तत्कालीन सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा के विरोध में छोड़ी थी। फिर उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर हरियाणा से जीता और फिर केंद्रीय मंत्री बने।

हिमंता बिस्वा सरमा

हिमंता बिस्वा सरमा असम की तरुण गोगोई सरकार में मंत्री थे और गोगोई के ख़ास माने जाते थे। बाद में गोगोई से मतभेद होने पर 2015 में पार्टी छोड़ दी। राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था पर तब राहुल गांधी कथित रूप से कुत्ते को खिलाने में व्यस्त थे। इन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। अभी असम के मुख्यमंत्री हैं।

विजय और रीता बहुगुणा

2012 से 2014 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा की बहन उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रही थीं। इनके पिता हेमवतीनंदन बहुगुणा का परिवार दशकों से कांग्रेस में था। 2013 की बाढ़ आपदा में राहत कार्यों में अनियमितता को लेकर उनके नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री का पद चला गया और दो साल बाद दोनों भाई बहन कांग्रेस छोड़ 2016 में बीजेपी में शामिल हो गए। रीता बहुगुणा जोशी अभी इलाहाबाद से बीजेपी सांसद हैं और विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा बीजेपी विधायक हैं।

नारायण राणे

कभी शिवसेना के बड़े नेता रहे नारायण राणे ने 2005 में कांग्रेस ज्वाइन की थी। कांग्रेस की सरकारों में वे मंत्री भी रहे थे। पार्टी छोड़ते वक़्त नारायण राणे ने कहा था- कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था पर अपने वादे से मुकर गई। उन्होंने 2017 में कांग्रेस पार्टी छोड़ी। अभी मोदी सरकार में मंत्री हैं।

राधाकृष्ण विखे पाटिल

राधाकृष्ण विखे पाटिल 5 बार के विधायक और नेता प्रतिपक्ष रहे। पिता बालासाहब विखे पाटिल कद्दावर कांग्रेसी थे। राधाकृष्ण विखे पाटिल बेटे सुजय विखे पाटिल को अहमदनगर से लोकसभा का टिकट न मिलने से नाराज थे। सुजय विखे पाटिल ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया और अहमदनगर से बीजेपी सांसद है।

प्रियंका चतुर्वेदी

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी से मथुरा में कुछ नेताओं ने अभद्रता की थी। अभद्रता करने वालों को पहले पार्टी ने निकाला और फिर पार्टी में शामिल भी कर लिया। प्रियंका इससे नाराज थीं। जिसके बाद उन्होंने 2019 में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया.

जितिन प्रसाद

मनमोहन सरकार में मंत्री रहे जितिन प्रसाद अब योगी सरकार में मंत्री हैं। माना जाता है कि वह उत्तर प्रदेश के मामलों में सलाह न लिए जाने से नाराज थे। पिछले साल (2021 में) दिग्गज नेता जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे।

बिहार : क्या आपसी लड़ाई में समय से पूर्व ही नयी सरकार गिर जाएगी?

                            नीतीश कैबिनेट में लेसी सिंह को जगह मिलने से उखड़ी जेडीयू विधायक बीमा भारती
कहावत है शहर बसा नहीं, लुटेरे पहले ही आ गए. बिहार में नयी सरकार बनते ही जूतों में दाल बंटनी शुरू हो गयी, जो गठबंधन सरकार के लिए अच्छे संकेत नहीं है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब से अपनी नई कैबिनेट का गठन किया है, वह विवादों में है। मंत्रियों में से करीब 72 फीसदी दागी हैं। कानून मंत्री बनाए गए कार्तिकेय सिंह को लेकर दावा किया जा रहा है कि जिस दिन उन्होंने शपथ ली, उसी दिन उन्हें किडनैपिंग के एक केस में कोर्ट में हाजिर होना था। अब जेडीयू (JDU) की लेसी/लेशी सिंह (Leshi Singh) को कैबिनेट में शामिल किए जाने का विरोध हो रहा है। इसका विरोध जेडीयू की ही एक अन्य महिला विधायक बीमा भारती (Bima Bharti) ने किया है।

बीमा भारती ने लेसी सिंह को कैबिनेट से नहीं हटाए जाने पर पार्टी से इस्तीफे की धमकी दी है। उनका दावा है कि लेसी सिंह का जो भी विरोध करता है, वह उसकी हत्या करवा देती हैं। चुनावों के समय पार्टी विरोधी काम करती हैं। इसके बावजूद उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है। बीमा भारती ने कहा, “हत्यारोपित को सरकार में खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बनाया गया। अगर मुख्यमंत्री लेसी सिंह का इस्तीफा नहीं लेते हैं, तो मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूँगी।”

समाचार एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा, “लेसी सिंह को हमेशा कैबिनेट में क्यों चुना जाता है। सीएम उनमें ऐसा क्या देखते हैं? लेसी सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहती हैं। पार्टी को बदनाम करती हैं। हमारी बात क्यों नहीं सुनी जाती? क्या इसलिए कि हम पिछड़ी जाति से हैं?”

बीमा भारती पूर्णिया जिले के रुपौली से विधायक हैं। वह लगातार 5 बार इस क्षेत्र से विधायक बनी हैं। लेसी सिंह पूर्णिया के ही धमदाहा से विधायक हैं। बीमा भारती ने दैनिक भास्कर को बताया, “वह मेरे विरुद्ध लगातार षड्यंत्र रच रही हैं। जिला परिषद के चुनाव में मेरी बेटी को लेसी सिंह और उनके बेटे ने मिलकर 3 वोट से हरवा दिया। मुझे मंत्री नहीं बनाया, इसका दुख नहीं है। उसे मंत्री बनाया है इसका मुझे दुख है। पार्टी में और भी महिला विधायक हैं, जिन्हें मंत्री बनाना चाहिए।”

रुपौली विधायक के अनुसार, उन्होंने यह सारी बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को, राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को बता दी हैं। यदि जल्द से जल्द लेसी सिंह का इस्तीफा नहीं लिया गया, तो वह अपनी विधायकी से इस्तीफा दे देंगी।

 बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 अगस्त 2022 को मंत्रिमंडल विस्तार किया था। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के भाई तेज प्रताप समेत 31 नए मंत्रियों ने शपथ ली थी। भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार की जदयू ने राजद से गठबंधन कर नई सरकार बनाई है। नई कैबिनेट में कॉन्ग्रेस और जीतनराम माँझी की पार्टी को भी प्रतिनिधित्व मिला है। इस सरकार को समर्थन दे रहे वामदल कैबिनेट का हिस्सा नहीं बने हैं।

त्यागपत्र : जाकिर नाइक को शरण और भारत के खिलाफ जहर उगलना मलेशियाई PM को पड़ा महंगा

मलेशिया, महातिर मोहम्मदमलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आज अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 94 वर्षीय महातिर ने सोमवार(फरवरी 24, 2020) को अपना त्यागपत्र देश के राजा को सौंप दिया। देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुद इसकी सूचना दी। मलेशिया के पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से सरकार गिराने की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री ने अपना इस्तीफा किंग को सौंप दिया है।
विश्व के सबसे उम्रदराज नेता 94 वर्ष के महातिर ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा सरकार गिराने की कोशिशों के बाद यह फैसला लिया है। इस चौंकाने वाली खबर आने से 24 घंटे पहले तक मलेशिया की राजनीति में काफी नाटक देखने को मिला था, जिसमें ‘पैक्ट ऑफ होप’ गठबंधन के प्रतिद्वंद्वी और विपक्षी नेता नई सरकार बनाने का प्रयास करते नजर आए थे। इसके अलावा ये भी खबर थी कि गठबंधन महातिर के संभावित उत्तराधिकारी अनवर को बाहर करने की योजना बना रहा था और उनकी पार्टी के ज्यादातर सांसद किसी भी वक्त उनके प्रधानमंत्री बनने की राह में परेशानी खड़ी करने की फिराक में थे।
कुछ समय पहले तक अनवर और महातिर के बीच संबंध अच्छे नहीं थे, लेकिन 2018 के चुनावों से पहले उनमें मित्रता हो गई थी। महातिर ने उनके पूर्व दुश्मन को सत्ता सौंपने की बात कई बार दोहराई थी। मगर, सोमवार(फरवरी 24) की सुबह कोशिशें बेकार होती दिखीं जब उनके कार्यालय ने घोषणा की कि महातिर ने मलेशिया के प्रधानमंत्री के तौर पर दोपहर एक बजे राजा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। अब आगे क्या होगा इस बारे में फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

हिन्दुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले भगोड़े जाकिर नाइक को शरण देने वाले मलेशिया के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए महातिर पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहे थे। मुसलमानों का नया मसीहा बनने की कोशिश में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर पर गलतबयानी करते हुए भारत पर कई आरोप मढ़े थे। रोहिंग्या मुसलमानों पर कथित अत्याचार का रोना रोया था। लेकिन, चीनी बर्बरता झेलने को मजबूर उइगर मुसलमानों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया था।
महातिर ने अपने भाषण में कहा था कि जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर क़ब्ज़ा किया गया। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कानूनों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को शांतिपूर्ण तरीके से समस्या का समाधान करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना चाहिए। इतना ही नहीं, मलेशिया ने पिछले दिनों ही पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का भी फैसला किया था।