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ब्रिटेन के ‘ग्रूमिंग गैंग’ जैसा है भारत में ‘लव-जिहाद’ और धर्मांतरण का खेल: कहीं 'ग्रूमिंग गैंग' आतंकवादियों के sleeper cells तो नहीं? उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश की हिंदू लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर

कुछ साल पहले जाति आधारित हिन्दू लड़कियों की रेट लिस्ट बहुत चर्चित थी। शायद एक-दो चैनल ने इस मुद्दे पर चर्चा भी की थी। लव जिहाद हो या हिन्दू नाम रख हिन्दू लड़कियों को फंसाना, गैंग रेप और अब ग्रूमिंग गैंग। अगर यही काम हिन्दुओं द्वारा किया जा रहा होता अब तक सरकार द्वारा कानून बनाकर इनके बैंक खाते तक जब्त कर लिए होते लेकिन अब शांतिदूत कर रहे सरकार बहुत ही संभलकर कदम उठा रही है। ऐसे जितने भी मामले हैं सरकार को इनके victim card जाल में फंसने की बजाए इनके, इनके परिवार के बैंक खाते फ्रीज़ करने के साथ-साथ इनके आतंकवादियों के sleeper cell होने की भी जाँच करनी चाहिए। 

जिसे देखो रोना रोता रहता है कि भारत में मुसलमान डरा हुआ है, जो डरी हुई कौम इतना उपद्रव कर सकती है अगर डरी हुई नहीं होती, अंजाम समझ सकते हैं। किसी मुस्लिम के साथ कोई दुर्घटना होने पर हामिद अंसारी से लेकर आमिर खान और बॉलीवुड को भारत में रहने पर डर सताने लगता था, लेकिन अब सबको सांप सूंघ गया है। शायद अब ऐसी घटनाओं से उनके लिए भारत सुरक्षित हो गया है? मजे की बात यह है कि संविधान हाथ में लेकर डोलने वाले, संविधान की दुहाई देने वाले सब पता नहीं किस काल कोठरी में छिपे बैठे हैं? मीडिया भी अपनी TRP बढ़ाने के लिए ऐसे लोगो को खूब प्रचार करता है। 

उन सभी नेताओं और उनकी पार्टियों से दूरी बनानी होगी। योगी की बात याद रखनी होगी कि "हिन्दुओं बटोगे तो कटोगे"। जो हिन्दुओं को जातियों में बाँटने की बात करते हैं उनसे पूछने का समय आ गया है कि "क्या दूसरे मजहब की जातियों में हो रहे भेदभाव के बारे में बोलने की हिम्मत है।" हिन्दुओं से कहीं ज्यादा उत्पीड़न ईसाई और मुस्लिमों में है जिसे कोई इंकार नहीं कर सकता। एक जाति दूसरी जाति की मस्जिद या चर्च में नहीं जा सकता। दूसरे के कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न नहीं कर सकते। किसी भी जाति का हिन्दू एक ही मन्दिर में जाकर पूजा कर सकता/सकती है, मरने पर एक ही शमशान में अंतिम संस्कार होता है। अब हिन्दुओं सोंचों उत्पीड़न कहाँ है।    

इनके पक्ष में खड़े होने वाले वकीलों पर भी नकेल कसनी होगी। क्योकि इन केसों की पैरवी के इन्हे मोटे पैसे मिलते हैं। Advocate Bar Associations को भी इस गंभीर मसले पर चिंतन करने की जरुरत है। क्योकि जब तक चौतरफा हमला नहीं होगा सरकार और पुलिस भी किसी निर्णय पर पहुँचने में नाकाम होंगे, लेकिन इस काम में अदालतों को भी साथ देना होगा। लेकिन हिन्दू लड़कियों को भी ऐसे किसी प्रेमजाल से दूर रहने की जरुरत है।

         

ब्रिटेन में दशकों से चले ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल की परतें अब एक-एक कर उठ रही हैं। रोजाना नए खुलासे और पीड़ितों की झकझोर देने वाली गवाहियाँ, कोर्ट की कार्यवाही और यहाँ तक कि ब्रिटेन की संसद में इस स्कैंडल को लेकर होने वाली बहस भी लोगों के लिए एक कौतूहल और सच्चाई जानने का आईना बनती जा रही है। ये कहानियाँ बिलकुल वैसी हैं जो आपको सीधा भारत के लव जिहाद के खेल और ‘मुस्लिम गैंग’ के कुकर्मों से मेल खाती मिलेगी।

पीड़ितों की गवाहियों में उनके साथ होने वाले रेप की भयावह दास्तान जहाँ रोंगटे खड़े दे रही है वहीं पुलिस अधिकारियों का भी पीड़ितों के साथ दुष्कर्म करने और नस्लीय आधार पर ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाने के तरीकों के बारे में खुलकर बात की जा रही है।

ब्रिटेन के ग्रेट यारमाउथ से सांसद रूपर्ट लोव ने भरी संसद में कई लड़कियों की गवाहियाँ पढ़ीं। उन्होंने बताया कि किस तरह से लाखों लड़कियों ने कई वर्षों तक अत्याचार झेला और बार-बार पुलिस और प्रशासन के दरवाजे खटखटाए। इसके बावजूद उनकी शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। इसकी वजह से ग्रूमिंग गैंग का मामला इतने बड़े स्तर पर फल-फूल कर हजारों लड़कियों की जिंदगियाँ तबाह करता रहा।

ब्रिटिश नेशनलिटी एक्ट – 1948 के बाद बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन शुरू हुआ और इसके लगभग साथ ही ऐसे मामले सामने आने लगे। पहला दर्ज मामला 1955 का है, जब ब्रैडफोर्ड में चार पाकिस्तानी पुरुषों पर एक 15 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा।

इंडिपेंडेंट इंक्वायरी इनटू चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज यानी IICSA की रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक तक यह प्रवृत्ति एक सोची-समझी साजिश का रूप ले चुकी थी। 1997 के बाद इमिग्रेशन की नई लहर ने इस नेटवर्क को और विस्तार दिया और इसके साथ ही शोषण के मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। अपराधियों में ज्यादातर पाकिस्तान से आए मुस्लिम पुरुष थे।

जाँच में यह भी सामने आया कि 87% अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम पुरुष थे जो टैक्सी चालक, रेस्तराँ मालिक, केयर होम कर्मचारी या अन्य ऐसी भूमिकाओं में थे जहाँ कमजोर लड़कियों तक उनकी आसान पहुँच थी।

उन्होंने टैक्सी, होटल, घरों और कुछ अन्य जगहों पर लड़कियों को ले जाकर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। उन्हें सिगरेट से जलाया, उनके प्राइवेट पार्ट में बोतल फोड़ी, ब्लैकमेल किया, एक शहर से दूसरे शहर में तस्करी की और पीड़िताओं का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया।

ग्रूमिंग गैंग

ग्रूमिंग गैंग उस संगठित आपराधिक नेटवर्क को कहा जा सकता है, जिसमें नाबालिग या कमजोर स्थिति की लड़कियों को पहले अपने झाँसे में फँसाया जाता है। फिर उन्हें उपहार, झूठे प्रेम, नशे, धमकी या सामाजिक दबाव में लाया जाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण किया जाता है।

यह एक ऐसी प्रणाली थी जो वर्षों की आजमाइश के बाद ईजाद की गई थी। सबसे दुखद यह है कि जब-जब संकेत मिले जिनमें लड़कियों का गायब होना, संदिग्ध पुरुषों का स्कूलों के बाहर मंडराना, कम उम्र की लड़कियों का बड़े पुरुषों के साथ दिखना जैसी बातें शामिल रहीं, तब-तब पुलिस और प्रशासन ने इसे ‘सांस्कृतिक संवेदनशीलता’ के नाम पर दरकिनार कर दिया। दशकों तक यही होता रहा।

ब्रिटेन के रॉदरहैम मामले में आधिकारिक जाँच ने 1997 से 2013 के बीच कम-से-कम 1,400 बच्चों के शोषण का अनुमान दर्ज किया था और इसमें प्रशासनिक विफलता भी सामने आई।

लाखों पीड़िताएँ और ग्रूमिंग गैंग का नेटवर्क

इस पूरे मामले में कम से कम 2,50,000 युवा लड़कियाँ ग्रूमिंग गैंग का शिकार बनीं। 87% अपराधियों में पाकिस्तानी मुस्लिम शामिल थे। ब्रिटेन के 149 जिलों में ग्रूमिंग गैंग ने लड़कियों को निशाना बनाया। इनमें रॉदरहैम में 1400+, टेल्फोर्ड में 1000+ पीड़ित समेत कई अन्य जिलों से लड़कियाँ शामिल थीं।

ब्रिटेन में जब इस तरह के मामले सामने आए तो शुरुआत में सरकार ने भी इन मामलों को नजरअंदाज कर दिया। कई संस्थाओं ने इस सामुदायिक सद्भाव का नाम देकर पूरी सच्चाई छुप दी और इसी की वजह से हजारों जिंदगियां खराब हुई, कई परिवार टूटे और लोगों का पुलिस और प्रशासन से भरोसा खत्म हो गया।

रूपर्ट लोव के अनुसार, जिन लड़कियों के साथ ज्यादतियाँ हुई है, उनमें एक ऐसी पीड़िता भी थी जिसके अब्बा इमाम थे। उस पीड़िता ने बताया कि उसके साथ 600 से 700 पुरुषों ने बार-बार रेप किया।

उसके अलावा एक अन्य पीड़िता जब 12 साल की थी, तब उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल डालकर फोड़ दी गई और नस्लीय टिप्पणियों के ताने दिए गए। उन टिप्पणियों में यह बात शामिल थी कि ‘गोरी लड़कियों के संस्कार मुस्लिम लड़कियों से कम होते हैं।’

भारत में ग्रूमिंग गैंग से कम नहीं लव जिहाद के मामले

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग के जैसे मामले भारत में भी कई वर्षों से सामने आते रहे हैं।भारत में हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए अलग-अलग पैटर्न अपनाए जा रहे हैं। इसमें 1992 का अजमेर का सेक्स स्कैंडल मामला था। इसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में स्कूली छात्राओं को निशाना बनाया गया। उन्हें भरोसे में लिया गया, उनके साथ सम्बन्ध बनाए गए। फिर उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर ब्लैकमेल कर उनका शोषण किया गया। इस मामले में 32 साल बाद, 2024 में जयपुर की पोक्सो अदालत में 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अजमेर ही एकलौता ऐसा मामला नहीं है, बल्कि भारत में बीते वर्षों में मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और उत्तर प्रदेश के भी कई शहरों से ऐसे नेटवर्क सामने आ चुके हैं जिनमें मुस्लिम आरोपितों ने कॉलेज की छात्राओं को अपने प्रेम जाल में फँसाया, उन्हें ड्रग्स दिए और उनके अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया।

उत्तर प्रदेश के कुछ मामलों में तो आरोपियों ने झूठी हिंदू पहचान अपनाकर लड़कियों का विश्वास जीता। ‘राम’, ‘सुनील’ या ‘विक्की’ जैसे हिंदू नाम रखे, नौकरी और शादी के सपने दिखाए और जब लड़की पूरी तरह उनके जाल में आ गई, तब असली चेहरा सामने आया। दुष्कर्म, ब्लैकमेल और मतांतरण का वही पुराना तंत्र देखने को मिला।

कहाँ क्या मामले देखने को मिले

शुरूआत अगर मध्यप्रदेश के भोपाल वाले मामले से करें तो इस केस का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ। एक ड्रग गैंग चलाने वाले यासीन मछली और शाहवर मछली की गिरफ्तारी हुई। छानबीन में पता चला कि इनका मकसद सिर्फ ड्रग्स की तस्करी करना नहीं था बल्कि इनके निशाने पर हिंदू लड़कियाँ थीं। ये लोग हिंदू युवतियों को एमडी (MD) ड्रग देकर शारीरिक शोषण करते थे और उनसे ड्रग भी बिकवाते थे। इनका मकसद लड़कियों को बर्बाद करते हुए धर्मांतरण करवाना था ताकि उनके पास और कोई विकल्प न बचे।

भोपाल और इंदौर से ऐसी ही एक मुस्लिम गैंग का खुलासा हुआ था। गैंग का मास्टरमाइंड फरहान था। इस गैंग ने निजी कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को निशाने पर लिया हुआ था। पीड़िताएँ इस मामले में लंबे समय तक चुप थीं, लेकिन बाद में जब एक मामला सामने आया तो एक-एक करके कई लड़कियाँ सामने आईं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें नशा देकर उनसे बलात्कार होता था और इसके बाद उनपर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था।

इसी तरह का मामला नैनीताल से भी जुलाई में ही सामने आया था। यहाँ 11 वीं क्लास की हिंदू युवती को 30 साल के मुस्लिम युवक ने प्रेम जाल में फँसा रखा था। लड़की का परिवार इतना बेबस था कि उन्हें मदद के लिए हिंदू संगठनों का सहारा लेना पड़ा। परिवार ने गिड़गिड़ा कर बताया कि उनकी बेटी को नशा दिया जाता है, उसे लत लगवा दी गई है। घरवाले इसलिए मजबूर हो गए हैं क्योंकि बेटी परिवार के विरोध पर उतर आई है।

इंदौर के मूसाखेड़ी में भी जीशान खान ने ‘अभिषेक ठाकुर’ बनकर हिंदू युवती को फँसाया हुआ था। उसने लड़की को अपने जाल में उलझाए रखने के लिए उसको ड्रग्स की लत लगाई, फिर उसका यौन शोषण किया और उसे ब्लैकमेल करके उसपर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा।

एक अन्य मामला इंदौर से ही सामने आया। यहाँ सुल्तान रोशन नागोरी ने कोचिंग सेंटर में जाने वाली हिंदू युवतियों को टारगेट करता था। पोल तब खुली जब एक ब्राह्मण लड़की पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँची। युवती ने बताया कि सुल्तान ने उसके साथ शारीरिक शोषण तो किया ही था। साथ में उसे अश्लील फोटो-वीडियो वायरल की धमकी देकर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बना रहा था।

इस मामले में पीड़िता ने कॉल सेंटर्स में एक्टिव धर्मांतरण सेल का भी खुलासा किया था। उसका दावा था कि इस सेल में हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम लड़कों को रखा जाता था। उनका ब्रेनवॉश ये कहकर होता था कि अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है। बाद में उन लड़कियों को नशे का आदी बनाया जाता था और उनका शारीरिक शोषण होता था।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक दिन एक 17 साल की लड़की अपने घर से अचानक गायब हो गई। घरवालों ने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दी। छानबीन हुई तो पता चला कि वो इंस्टाग्राम पर एक मुस्लिम लड़के से बात करती थी। लड़के का नाम अब्दुल्ला था। उसी ने उसे अगवा किया है। पुलिस जहा इसके बाद अब्दुल्ला और लड़की की तलाश में जुटी। वहीं परिवार केवल ये सोचता रहा कि उनकी बेटी के साथ ये सब कैसे हुआ।

बिहार में अंडा बेचने वाले सलमान ने एक मध्य प्रदेश में रहने वाली हिंदू युवती को पबजी खेलने के दौरान हिंदू नाम से प्रेम जाल में फँसाया। लड़की प्रेम में इतना पागल हुई कि वो अपना घर-बार छोड़कर मधुबनी आ गई। यहाँ उसे सलमान ने अपनी असली पहचान बताई। फिर उसे जबरन कलमा पढ़वाकर उसे निकाह किया। लड़की के साथ हुए इस धोखे का खुलासा उस समय हुआ जब लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने उसका इंस्टा जाँचा और सामने आया कि वो किसी सलमान के चक्कर में पड़ी हुई थी।

इसी साल मार्च में सामने आए महाराष्ट्र के नासिक में TCS के दफ्तर में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश का मामले में आरोपितों में दानिश शेख, तौफिक अत्तार के साथ निदा खान नाम की ख्वातीन भी शामिल थी। वह लड़कियों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर धर्म से जुड़ी बातें बताती थी। निदा लड़कियों को मुस्लिम मजहब के रीति-रिवाज अपनाने के लिए प्रेरित करती थी और उन्हें नमाज पढ़ने से लेकर बुर्का पहनने तक की जानकारी और ट्रेनिंग देती थी। मामले की जाँच में हिंदू पीड़िता के फोन से इस्लाम से जुड़े 37 ऑडियो क्लिप और 4 मजहबी ऐप्स भी मिले।

एक व्यक्ति नहीं, पूरा नेटवर्क करता है काम

ब्रिटेन हो या भारत- इन मामलों को समझने के लिए इनके तंत्र को समझना जरूरी है। सतह पर एक आरोपी दिखता है, लेकिन असल में एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा होता है। कोई लड़की की पहचान करता है। कौन सी लड़की घर में अकेली है, किसके माता-पिता का झगड़ा है, कौन भावनात्मक रूप से कमजोर है।

इसी तरह कोई अन्य उससे दोस्ती या प्रेम संबंध बनाता है, इसके बाद कोई आर्थिक मदद या सुरक्षा का भ्रम पैदा करता है, कोई वीडियो या फोटो बनाकर ब्लैकमेल करता है और फिर कोई दूसरा व्यक्ति आगे शोषण या दबाव की कड़ी संभालता है ।

अजमेर कांड की रिपोर्टिंग में भी यह सामने आया कि एक पीड़िता को अगली पीड़िता तक पहुँचने के माध्यम की तरह इस्तेमाल किया गया। ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग्स में भी लड़कियों को शराब, नशा, उपहार, वाहन, ठिकाने और भावनात्मक नियंत्रण के जरिए गैंग के भीतर घुमाया जाता था। यही कारण है कि ऐसे मामलों को केवल ‘लड़का-लड़की का निजी मामला’ कहकर टाल देना कई बार गंभीर भूल साबित हो सकता है ।

मध्य प्रदेश में लव जिहाद को लेकर कुछ रिपोर्टों में 283 मामलों का उल्लेख किया गया, जबकि विभिन्न राज्यों में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी चर्चा में रही।

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग्स का मामला भारत के लिए एक कठोर चेतावनी है। यह चेतावनी किसी एक समुदाय के खिलाफ नारेबाजी की नहीं, बल्कि संगठित शोषण, यौन अपराध, ब्लैकमेल और मजबूरन धर्मांतरण जैसे आरोपों की गंभीर, निष्पक्ष और नेटवर्क-आधारित जाँच की है ।

‘पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग’ के खिलाफ सिर्फ शेरदिल ऋषि सुनक ने उठाई थी आवाज; कीर स्टार्मर समेत ब्रिटेन के तमाम प्रधानमंत्री टेकते रहे इनके आगे घुटने

                       कीर स्टारमर और ऋषि सुनक (फोटो साभार-x@Keir Starmer, @Rishi Sunak)
ब्रिटेन में आठवाँ प्रधानमंत्री अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को 22 जून 2026 को अपने इस्तीफे की घोषणा करनी पड़ी। यह घोषणा लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव की वजह से की गई। दरअसल उनके प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने 18 जून को हुए मेकरफील्ड उपचुनाव में निर्णायक जीत हासिल की थी।

इस जीत के साथ ही बर्नहैम ने पार्टी नेतृत्वकर्ता के तौर पर खुद को स्थापित कर लिया और स्टार्मर के लिए चुनौती बन गए। ​​स्टार्मर की घटती लोकप्रियता के कई कारण हैं, लेकिन पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे को जानबूझकर कर नजरअंदाज करना, उनकी लोकप्रियता में कमी की अहम वजह है।

कीर स्टार्मर जनता और लेबर पार्टी के समर्थकों में लगातार अलोकप्रिय होने जा रहे थे। उनकी एक के बाद एक ली गई नीतिगत फैसलों की आलोचना हो रही है। उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने क्लीन चिट नहीं दी गई थी। स्टार्मर को पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि लेबर पार्टी को अंदेशा था कि अगले आम चुनाव में स्टार्मर के फैसलों की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पार्टी ने ही कीर स्टार्मर को पद छोड़ने और एंडी बर्नहैम के लिए रास्ता बनाने का आदेश दिया। दरअसल बर्नहैम की हालिया चुनावी जीत ने इस उम्मीद को जगाया है कि उनका नेतृत्व अगले चुनाव में लेबर पार्टी को करारी हार से बचा सकता है।

देखिए किस तरह ब्रिटिश भारत में हिन्दू-मुसलमानों को लड़वाने के चिंगारियां छोड़ कर गए थे, दिल्ली में कई जगह बीच सड़क पर मस्जिदें और कब्रें बनवा गए, अब उसी आग में खुद जल रहा:-   

22 जून को अपने भाषण में कीर स्टार्मर ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव के लिए उन्हें विश्वस्त चेहरा नहीं मानती, जिसके दम पर चुनाव जीता जा सकता है।

दरअसल कीर स्टार्मर लगातार राजनीतिक लाभ के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपना रहे हैं। इससे ब्रिटिश जनता में भारी गुस्सा है। यह याद रखना आवश्यक है कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जून 2025 में अपनी नीति में अचानक बदलाव किया और ऑडिट और सिफारिशों के बाद पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कारी ग्रुमिंग गैंग की जाँच कराने का वादा किया था।

हालाँकि जनवरी 2025 में स्टार्मर ने यौन शोषण करने वाले गिरोहों की जाँच की माँग करने वालों को धुर दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थन करने वाला बताया था। दरअसल उस वक्त अमेरिकी अरबपति एलोन मस्क ने ब्रिटेन सरकार पर जोरदार हमला किया था। उन्होंने मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे पर स्टार्मर सरकार द्वारा कदम नहीं उठाने की बात कही थी और वर्षों से पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग द्वारा गैर-मुस्लिम लड़कियों के शोषण करने की बात कही थी।

पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों की जाँच शुरू करने में भी कीर स्टार्मर ने तत्परता नहीं दिखाई। जब उनपर दबाव बढ़ा तो उन्होंने जाँच शुरू की। इससे दोनों पक्षों के बीच वे अलोकप्रिय हुए।

लेबर पार्टी की मुस्लिम-समर्थक नीतियों के खिलाफ कंजर्वेटिव पार्टी के कड़े विरोध के बावजूद, लेबर सरकार ने ब्रिटेन के रुख में बदलाव करते हुए फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन किया है और इजरायल को कुछ हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह बदलाव गाजा में मानवीय संकट को लेकर पार्टी नेतृत्व और कई क्षेत्रों में लेबर पार्टी के समर्थक मुसलमानों के दबाव के बीच हुआ है। इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर 2024 में मुस्लिम बहुल सीटों पर लेबर पार्टी का समर्थन कम होने के बाद यह नीतिगत बदलाव आया है।

स्टार्मर को दोहरी नीति अपनाने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है। इफ्तार कार्यक्रमों की मेजबानी करने से लेकर मुसलमानों को ‘आधुनिक ब्रिटेन का चेहरा’ कहने और ‘इस्लामोफोबिया’ से निपटने के लिए आत्मघाती रूप से सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने तक, स्टार्मर ने अपनी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखने के लिए हद से ज्यादा प्रयास किए।

दरअसल दिसंबर 2025 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार की प्रस्तावित ‘इस्लामोफोबिया’ (या ‘मुस्लिम विरोधी घृणा’) की परिभाषा पर ब्रिटिश हिंदू, सिख और मानवाधिकार समूहों ने गहरी आपत्ति जताई है | आलोचकों का मानना है कि इसमें मौजूद अस्पष्ट शब्दावली, जैसे- ‘नस्लीयकरण’ और ‘पूर्वाग्रही रूढ़िवादिता’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबा सकती है और एक तरह से पिछले दरवाजे से ‘ईशनिंदा कानून’ (ब्लास्पहमी लॉ) की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हिंदू और सिख समूहों ने चेतावनी दी है कि केवल मुस्लिम के लिए ऐसी अलग और अस्पष्ट परिभाषा बनाने से अन्य धर्मों के प्रति भेदभाव की भावना पैदा होगी।

क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रमुख, लोक अभियोजन निदेशक (डीपीपी) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कीर स्टार्मर को कुप्रबंधन के आरोपों का भी सामना करना पड़ा।

पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग और कीर स्टार्मर की चुप्पी

1980 के दशक में टेलफोर्ड शहर में एक घटना ने पाकिस्तानी मुस्लिम रेपिस्ट गैंग की ओर लोगों का ध्यान खींचा। उस वक्त 11 साल की छोटी बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया, झूठी देखभाल का दिखावा किया गया और फिर नशीली दवाइयाँ देकर बलात्कार किया गया। उसे पीटा गया, बेचा गया और यहाँ तक ​​कि ग्रुमिंग गिरोहों ने उसकी हत्या भी कर दी। इस दौरान देखा गया कि गोरी बच्चियों का रेप कर उसे बलात्कारी दूसरे बलात्कारी के हवाले कर देता था।

ऐसे रेपिस्ट ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल के थे। तीन लड़कियों की हत्या कर दी गई थी और दो त्रासदियों की वजह से मारी गईं। 1,70,000 आबादी वाले शहर में लगभग 1000 लड़कियाँ पीड़ित हुईं। टेलफोर्ड में, ये पाकिस्तानी गिरोह ऐसा अड्डे चला रहे थे, जहाँ लड़कियों को प्रेमजाल में फँसा कर उन्हें गिफ्ट देकर अपने साथ लाते थे।

रोदरहम में भी इसी तरह का एक रैकेट चल रहा था। 2,26000 की आबादी वाले शहर में पाकिस्तानी मूल के पुरुषों ने करीब 1500 लड़कियों का रेप किया गया और उन्हें खरीदा-बेचा गया। कई पीड़ितों के साथ गैंगरेप किया गया और यह दुर्व्यवहार 1997 से 2013 तक बेरोकटोक जारी रहा। रोशडेल में यह सिलसिला 2002 में शुरू हुआ। कम से कम 47 युवतियों को दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया। प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों की प्रतिक्रिया इतनी निष्क्रिय रही है कि ये गिरोह “ग्रेट ब्रिटेन” की सड़कों पर आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

ब्रिटेन में हडर्सफ़ील्ड, रोदरहम, रोशडेल, ऑक्सफोर्ड, ब्रिस्टल, पीटरबरो और न्यूकैसल सहित कई स्थानों पर यौन शोषण के कारनामों का खुलासा हुआ। कई रिपोर्टों और जांचों के बावजूद, स्टोववुड और टूरवे जैसी जांच कार्रवाइयों के बावजूद, यौन शोषण करने वाले गिरोहों द्वारा किए गए यौन शोषण के वास्तविक पैमाने का पता नहीं लगाया जा सका।

ये ‘ग्रूमिंग’ अपराध यूनाइटेड किंगडम को लगातार परेशान कर रहे हैं, क्योंकि नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (एनएसपीसीसी) ने 2023 में बताया कि पिछले पांच वर्षों में युवाओं के खिलाफ ऑनलाइन ग्रूमिंग अपराधों में 82% की वृद्धि हुई है।

पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग ने गरीब श्वेत और गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ बलात्कार किया। यह मुद्दा सबसे पहले रोदरहम, रोशडेल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में सामने आया। रोदरहम पर 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1400 बच्चों का 16 वर्षों में यौन शोषण किया गया। इसके ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मूल के पुरुष थे। हालाँकि कंजर्वेटिव पार्टी भी पूरी तरह निर्दोष नहीं है, लेकिन लेबर सरकार और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज किया।

हाल ही में सांसद रूपक लो की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रेप गैंग इंक्वायरी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिटिश सरकार और सीपीएस ने जातीयता और धर्म से संबंधित डेटा को किस प्रकार दबाया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लेबर पार्टी ने मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए जाँच में देरी की या फिर उसे रोक दिया। इसमें आगे कहा गया है कि बलात्कार के जिहादियों को हल्की सजा दी गईं और उन्हें देश से बाहर नहीं निकाला गया। स्टार्मर के कार्यकाल में तो हद ही हो गया, सीपीएस ने हजारों बलात्कारी जिहादियों को केवल ‘चेतावनी’ देकर छोड़ दिया।

ओपइंडिया ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि कैसे ब्रिटेन के राजनेता, विशेषकर लेबर पार्टी, जिहाद के मामलों को कम करके आँकते हैं। लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन को 2017 में द सन में प्रकाशित एक लेख के लिए माफी माँगनी पड़ी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि ब्रिटेन की अहम समस्या ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों द्वारा श्वेत लड़कियों का बलात्कार और शोषण है”। चैंपियन को न केवल माफी माँगनी पड़ी, बल्कि अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा।

2012 में, लेबर पार्टी के नेता और गृह मामलों की चयन समिति के अध्यक्ष कीथ वाज ने ग्रूमिंग जिहाद अपराधों को कम करके आँका। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को ‘कलंकित’ नहीं किया जाना चाहिए।

दो दशकों से अधिक समय तक हजारों गैर-मुस्लिम नाबालिग और वयस्क लड़कियों को निशाना बनाने वाले मुस्लिम बलात्कार गिरोहों को पकड़ने में ब्रिटिश सरकारों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की सामूहिक विफलता का कारण ‘इस्लामोफोबिया’ से बचने की सोच है। लेबर पार्टी के नेताओं के साथ-साथ ब्रिटिश मीडिया भी इस मामले में पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग या पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग कहने से बचता रहा। इसके बजाय ‘दक्षिण एशियाई ग्रूमिंग गैंग’ का इस्तेमाल किया।

रूढ़िवादी राजनेताओं, ब्रिटिश देशभक्तों और एलोन मस्क ने स्टार्मर पर पाकिस्तानी बलात्कार गिरोह के अपराधों में मिलीभगत का आरोप लगाया। कई लोगों ने माँग की थी कि सीपीएस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए स्टार्मर पर मुकदमा चलाया जाए।

कुल मिलाकर कीर स्टार्मर ने पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग पर एक्शन लेने से परहेज किया, वहीं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव नेता ऋषि सुनक ने जोखिम उठाकर पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के खिलाफ आवाज उठाया और उन्हें जिहादी करार दिया।

ऋषि सुनक ने उठाए थे कदम

ऋषि सुनक ब्रिटेन के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे, जिन्होंने न केवल मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की निंदा की, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे राजनीतिक शुद्धता ने राजनेताओं को बलात्कार जिहाद के खिलाफ बोलने से रोका। साथ ही यह भी बताया कि वह ब्रिटेन में यौन शोषण गिरोहों की समस्या से कैसे निपटेंगे।

अक्टूबर 2025 में पदभार संभालने से कुछ महीने पहले दिए गए एक साक्षात्कार में, तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग या रेप जिहाद को ‘भयानक अपराध’ बताया था और प्रधानमंत्री बनने पर इस समस्या से प्राथमिकता के आधार पर निपटने का वादा किया था।

सुनक ने घोषणा की थी कि वे राष्ट्रीय अपराध एजेंसी में एक नया टास्क फोर्स बनाएँगे, जो यौन शोषण करने वाले गिरोहों की निगरानी करेगा। उन्होंने कहा था, “हम हर जगह पुलिस बलों के लिए इसे प्राथमिकता देना अनिवार्य करेंगे। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि सभी पुलिस बल इसमें शामिल लोगों की पहचान दर्ज करें, जो वर्तमान में नहीं किया जाता क्योंकि लोग ऐसा नहीं करना चाहते। मैं यौन शोषण में शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करना चाहता हूँ, जिसमें पैरोल के बहुत सीमित विकल्प होंगे। एक कंजर्वेटिव सरकार को लोगों की सुरक्षा के आड़े राजनीतिक स्वार्थ को नहीं आने देना चाहिए ।”

सुनक ने अपना वादा निभाया और अप्रैल 2023 में देश में मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की जाँच में पुलिस की सहायता के लिए एक नए ‘ग्रूमिंग गैंग्स टास्क फोर्स’ बनाया । इस टास्क फोर्स में सुनक ने जाँच में सहायता के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यौन शोषण गिरोहों के पीछे के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने यह भी वादा किया कि यौन शोषण गिरोह के सदस्यों और सरगनाओं को उनके अपराधों के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।

सुनक ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार ऐसा कानून लाएगी जिससे यौन शोषण करने वाले गिरोह के सरगना को सजा सुनाते समय एक वैधानिक कारक के रूप में शामिल किया जा सके, जो इन अपराधों के लिए सबसे कड़ी सजा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।

ऋषि सुनक के पास पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों को जड़ से खत्म करने का एक दूरदर्शी दृष्टिकोण और बड़ी योजनाएँ थीं। हालाँकि, आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार ने ब्रिटेन की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि देश में यौन शोषण गिरोहों का अंत होगा और हजारों पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

कंजर्वेटिव पार्टी का 14 साल का शासन अर्थव्यवस्था, महँगाई, आव्रजन और ब्रेक्जिट के बाद की चुनौतियों से निपटने के तरीके को लेकर जनता के असंतोष और पार्टी के आंतरिक मतभेदों के कारण चुनावी हार के साथ समाप्त हुआ। हालाँकि ऋषि सुनक जानते थे कि वे एक डूबते जहाज का नेतृत्व कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने राजनीतिक लाभ हासिल करने की होड़ और राजनीतिक शुद्धता को पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों से ब्रिटिश लड़कियों के लिए न्याय और सुरक्षा के अपने प्रयासों में बाधक न बनने देने का भरसक प्रयास किया।

कीर स्टार्मर को ऋषि सुनक की तुलना में कहीं अधिक समय तक सत्ता में रहने और राजनीतिक स्थिरता मिली, फिर भी स्टार्मर कई मोर्चों पर विफल रहे। पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में स्टार्मर के बार-बार बदलते रुख को प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी असफलताओं में से एक माना जाएगा।

UK में ग्रूमिंग जिहाद की शिकार बच्चियों का पुलिसवाले भी करते थे रेप, 11 साल की लड़की तक का दुष्कर्म किया… रेपिस्ट कॉन्स्टेबल हसन अली बिना सजा पाए मरा

                     य़ूके ग्रूमिंग जिहाद (फोटो साभार: BBC/South Yorkshire Police/Facebook)
ब्रिटेन के रोथरहम में एक भयावह सच सामने आया है। पाँच पीड़ित महिलाओं ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी मुस्लिम पुरुषों की गैंग ने न सिर्फ उनके बचपन को तबाह किया, बल्कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस (SYP) के कुछ पुलिस वालों ने भी उनकी जिंदगी नर्क बना दी।

एक पीड़िता ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि दो पुलिस वालों ने उसका यौन शोषण किया, जिसमें से एक का नाम पीसी हसन अली था। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों पुलिस वालों ने न सिर्फ उसका शोषण किया, बल्कि उसे नशे की दवाइयाँ भी दीं। हसन अली की जनवरी 2015 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। उस वक्त वह शोषण के मामले में जाँच के दायरे में था और उसे प्रतिबंधित ड्यूटी पर रखा गया था, लेकिन उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। 

पुलिस की सफाई और छिपी सच्चाई

साउथ यॉर्कशायर पुलिस ने दावा किया कि हसन अली के खिलाफ शिकायतें थीं, लेकिन ये सिर्फ ‘एक पीड़िता को बार-बार डेट के लिए पूछने, गोपनीय जानकारी साझा करने और पीड़ितों की सुरक्षा में नाकामी’ से जुड़ी थीं। पुलिस ने नशे की सप्लाई के आरोपों को खारिज किया। लेकिन ‘ऑपरेशन लिंडन’ में दो साल तक काम करने वाले गैरी हार्पर ने इस दावे को झूठा करार दिया।
गैरी हार्पर ने दो साल तक इंडिपेंडेंट ऑफिस फॉर पुलिस कंडक्ट (आईओपीसी) के लिए जाँच जीस जिसमें एसवाईपी द्वारा 1997 से 2013 तक रॉदरहैम में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज की रिपोर्ट्स को कैसे हैंडल किया गया, ये पता लगाना था।
अपनी जाँच के बाद हार्पर ने बताया कि हसन अली पर नशा सप्लाई करने और पीड़िताओं के यौन शोषण के कई गंभीर आरोप थे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि दूसरा पुलिस वाला भी इन घिनौनी हरकतों में शामिल था, लेकिन उसे रिटायर होने की इजाजत दे दी गई। हार्पर ने इसे पुलिस की बदनामी छिपाने की कोशिश बताया और कहा, “ये सबसे अच्छे हाल में उनकी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश थी। और सबसे बुरे हाल में, ये खुला भ्रष्टाचार था।”

पुलिस की क्रूरता और पीड़िताओं का दर्द

पीड़िताओं ने बताया कि 1990 के दशक के मध्य से 2000 के शुरुआती सालों तक, पुलिस वालों ने पाकिस्तानी गैंग के साथ मिलकर उनका शारीरिक और यौन शोषण किया। ज्यादातर पीड़िताएँ उस वक्त किशोर थीं, लेकिन कुछ तो महज 11 साल की थीं।
एक पीड़िता ने बताया कि गैंग ने उसका बार-बार बलात्कार किया और उसे गैरकानूनी गर्भपात के लिए मजबूर किया। जब एक यूथ वर्कर ने सोशल सर्विस और पुलिस को इसकी सूचना दी, तो उसी पुलिस वाले ने उसका बयान लिया, जो उसका शोषण कर रहा था। कुछ दिन बाद, उस पुलिस वाले ने पीड़िता के सामने उसका बयान फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया। इस घटना के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

12 साल की बच्ची को पुलिस की गाड़ी में बनाया शिकार

एक अन्य पीड़िता ने बताया कि जब वह 12 साल की थी, तब एक पुलिस वाले ने उसे एक पुलिस गाड़ी में यौन शोषण का शिकार बनाया। उसने धमकी दी कि अगर उसने उसका विरोध किया, तो वह उसे वापस उन बलात्कारियों के पास भेज देगा। एक महिला जो 1990 के दशक में फोस्टर केयर में थी और बच्चों के आश्रय गृह से बार-बार भागती थी, उसने बताया कि एक पुलिस वाला उसे ढूँढकर एक खाली मकान में ले जाता और बलात्कार करता।
पीड़िता ने कहा, “वह जानता था कि हमारी कोई सुनवाई नहीं होगी। हम अनाथ थे, कमजोर थे, और वह हमारा डर जानता था। वह जानता था कि हम कुछ नहीं बोल पाएँगे।”

पुलिस और कानूनी व्यवस्था पर भरोसा टूटा

30 पीड़िताओं में से सिर्फ 17 ने अपनी सहमति दी कि उनके बयान पुलिस जाँच में इस्तेमाल किए जाएँ। कई पीड़िताओं ने अब इस जाँच से खुद को अलग कर लिया है, क्योंकि उनका पुलिस और कानूनी व्यवस्था पर से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
गैरी हार्पर ने साउथ यॉर्कशायर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने हर संभव तरीके से जवाबदेही से बचने की कोशिश की। उन्होंने आठ साल की जाँच को ‘शुरू से अंत तक पूरी तरह नाकाम’ करार दिया।

कुछ कार्रवाई, लेकिन सजा का नामोनिशान नहीं

वॉचडॉग ने 43 पुलिस वालों के खिलाफ शिकायतों को सही पाया, जिनमें से आठ पर छोटे-मोटे गलत व्यवहार और छह पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप थे। इसके बावजूद, किसी भी पुलिस वाले को न तो कोई सजा हुई और न ही उनकी नौकरी गई।
दिसंबर 2024 से अब तक तीन पूर्व पुलिस वालों को बलात्कार की कोशिश, यौन उत्पीड़न और अपने पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। ये अपराध 1995 से 2004 के बीच हुए, जब ये पुलिस वाले ड्यूटी पर थे। लेकिन अभी तक इनमें से किसी को भी सजा नहीं हुई है।

नई जाँच की शुरुआत

साउथ यॉर्कशायर पुलिस की मेजर क्राइम यूनिट अब पुलिस वालों की इस घिनौनी साजिश की नई जाँच शुरू कर रही है। यह जाँच पुलिस वॉचडॉग की निगरानी में होगी। स्वतंत्र पुलिस आचरण कार्यालय (IOPC) ने 91 जाँचें कीं, जिनका निष्कर्ष 2022 में आया।
IOPC के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमने पाया कि उस दौरान साउथ यॉर्कशायर पुलिस कमजोर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा में पूरी तरह नाकाम रही।”

रोथरहम में 1400 बच्चियों का शोषण

2014 में प्रोफेसर एलेक्सिस जे की जाँच से खुलासा हुआ कि 1997 से 2013 के बीच रोथरहम में कम से कम 1,400 बच्चियों का यौन शोषण हुआ। जे ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमने जो सबूत देखे और सुने, उनके आधार पर ज्यादातर पीड़ितों ने अपने शोषकों को पाकिस्तानी मूल का बताया।”

पाकिस्तानी गैंग और पुलिस की मिलीभगत का काला सच

ब्रिटेन में कई दशकों से पाकिस्तानी गैंग ग्रूमिंग जिहाद करते हुए नाबालिग ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाते रहे हैं। इन गैंग्स ने बलात्कार, शारीरिक शोषण और यातना जैसे जघन्य अपराध किए। सरकार, पुलिस और मीडिया पर भी गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने इन अपराधों की गंभीरता को दबाने की कोशिश की, ताकि नस्लवाद का ठप्पा न लगे।
यह घिनौना सच अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है, लेकिन पीड़िताओं को अभी तक इंसाफ का इंतजार है। उनकी आवाजें दबाई गईं, उनके बयान फाड़े गए और उनकी जिंदगियाँ तबाह कर दी गईं। अब सवाल यह है कि क्या इस नई जाँच से इन पीड़िताओं को इंसाफ मिल पाएगा या यह भी एक और नाकाम कोशिश साबित होगी?

ब्रिटेन के एक शहर मे 4% मुस्लिम, लेकिन 64% रेप-यौन शोषण यही कर रहे…नई रिपोर्ट में फिर बेपर्दा हुआ ‘ग्रूमिंग गैंग’ : ‘पाकिस्तानी’ लिखने में होठ सिले, ‘एशियन’ बता सिर रेत में धँसाया

                                         ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग बना रहा लड़कियों को शिकार
ब्रिटेन में पाकिस्तानी मूल के गिरोहों द्वारा यौन शोषण के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार अकेले ब्रिटेन के रॉदरहैम बाल यौन शोषण के 64% मामलों के लिए 4% पाकिस्तानी जिम्मेदार हैं। फिर भी इसमें ‘पाकिस्तानी मुसलमानों’ का नाम नहीं है। बल्कि आरोपितों को ‘एशियाई’ कहा जा रहा है।

‘बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार’ पर राष्ट्रीय लेखा परीक्षक ने ब्रिटेन के ‘ग्रूमिंग गिरोह’ को लेकर कई खुलासे किए हैं। ब्रिटेन की गृह सचिव एयवेटे कूपर ने संसद को बैरोनेस लुईस की रिपोर्ट की जानकारी दी। 197 पेज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘अज्ञानता और पूर्वाग्रह की संस्कृति’ की वजह से ग्रूमिंग गिरोहों द्वारा नाबालिगों के यौन शोषण के मामलों की जाँच ठीक से नहीं हो पाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन ग्रूमिंग गिरोहों में से अधिकांश पाकिस्तानी और ‘एशियाई’ पुरुष थे।

 गौरतलब है कि ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों के नेतृत्व वाले ग्रूमिंग गिरोहों के हाथों बाल यौन शोषण का मुद्दा वर्षों से ब्रिटेन की एक ‘गंभीर समस्या’ रही है। 90 के दशक में करीब 11 साल की बच्चियों को ग्रूमिंग गिरोहों द्वारा उठाया गया। उसका चालीस सालों तक रेप किया गया। बच्चियों को पीटा गया, बेचा गया और यहाँ तक कि मार भी दिया गया। अकेले रॉदरहैम में ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों ने पिछले 16 वर्षों में 1,400 मासूमों को अपने हवस का शिकार बनाया।

रिपोर्ट की प्रस्तावना में ही लेडी केसी ने ‘समूह-आधारित बाल यौन शोषण’ शब्दों का इस्तेमाल कई बार कई पुरुषों द्वारा बच्चों के खिलाफ किए गए यौन शोषण से जुड़े अपराध के लिए किया है। इसमें बच्चियों के साथ किए गए बदसलूकी, जबरन गर्भपात, यौन संक्रमित बीमारियाँ और बच्चे के पैदा होने पर उन्हें माँ से अलग कर देने का जिक्र है।

अपराध और सोशल मीडिया का बाल यौन शोषण में इस्तेमाल

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि हर साल 500,000 से ज़्यादा बच्चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं। पुलिस ने 2024 में लगभग 100,000 अपराध दर्ज किए हैं। इनमें से करीब 17,100 बाल यौन शोषण से जुड़े थे। हालाँकि पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग का द्वारा अपराध का आँकड़ा मात्र 700 बताया गया है। लेडी केसी ने कहा कि यह ‘बेहद असंभव’ है।

यू.के. में ग्रूमिंग गैंग के अपराधों की प्रकृति के बारे में रिपोर्ट कहती है, “ऐसे मामलों में अक्सर बदमाश एक कमजोर बच्ची को अपना निशाना बनाता है। गरीब, नौकर या शारीरिक रूप से अक्षम बच्चियाँ। इन बच्चों को ये बताया जाता है कि ये उनके ‘बॉयफ्रेंड’ हैं। उन्हें प्यार और उपहार दिए जाते हैं। घूमाने के लिए बाहर ले जाते हैं। इसके बाद उन्हें सेक्स के लिए दूसरे पुरुषों को देते हैं। बच्चे को नियंत्रित करने के लिए ड्रग्स और अल्कोहल दिया जाता है और उनके साथ हिंसा और जबरदस्ती भी किया जाता है।”

रिपोर्ट में कहा गया है, “समय के साथ इस मॉडल में कोई खास बदलाव नहीं आया है, हालाँकि अब ग्रूमिंग गैंग ऑनलाइन भी काम कर रहे हैं, और हॉटस्पॉट्स भी बदल रहे हैं।” ‘समूह-आधारित बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार’ पर राष्ट्रीय ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ग्रूमिंग गिरोह अक्सर सामाजिक संबंधों के आधार पर आपस में जुड़े होते हैं और इसलिए अक्सर उम्र, जातीय पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में मोटे तौर पर एक जैसे होते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “समूह में काम करने से अपराधियों पर इस खौफनाक करतूतों का कोई असर नहीं पड़ता है। महिलाओं के प्रति घृणा और असम्मान की स्थिति की वजह से ये पीड़िताओं की अनदेखी करते है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन यौन शोषण अपराध की वृद्धि से सामान्य रूप से बाल यौन शोषण की प्रकृति बदल गई है, जो अब सभी यौन शोषण अपराधों का 40% है।

खौफनाक आँकड़े

यू.के. के राष्ट्रीय पुलिस डेटा से पता चलता है कि 2023 में 78% बाल यौन शोषण की शिकार लड़कियाँ थी, जिनकी आयु 10 से 15 वर्ष के बीच थी। रिपोर्ट में लिखा गया है, “डेटा से पता चलता है कि अपराधियों की आयु अलग-अलग है, 2023 में 39% संदिग्ध 10 से 15 वर्ष की आयु के थे और 18% 18 से 29 वर्ष की आयु के थे। संदिग्धों की कम आयु बाल अपराध की रिपोर्टिंग में वृद्धि और ऑनलाइन गिरोह के काम करने की वजह से है। समूह-आधारित बाल यौन शोषण के पीड़ितों और अपराधियों के लिए एकत्र किया गया जातीय डेटा राष्ट्रीय स्तर पर कोई निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है,”

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुर्व्यवहार के पैटर्न में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया की वजह से बच्चियों से संपर्क करने के तरीकों में थोड़ा बदलाव आया है। जहाँ पहले पीड़िता के साथ शुरुआती संपर्क शॉपिंग सेंटर, पार्क में शुरू होता था, वहीं आज संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हो रहा है। रिपोर्ट कहती है कि ग्रूमिंग और शोषण के लिए स्थान भले ही बदल गए हों, लेकिन मॉडल समान है। बार-बार लापता होना, शोषण के लिए बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, उन्हें ‘आज्ञाकारी’ बनाने के लिए ड्रग्स और शराब का इस्तेमाल, होटलों में गुमनाम चेक इन और चेक आउट करना और बच्चों को आकर्षित करने वाले हॉट स्पॉट जैसे कि वेप शॉप ले जाना शामिल है।

अपराधी यौन शोषण के लिए पीड़िताओं की अश्लील तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं। ग्रूमिंग गिरोह नाबालिग लड़कियों को अपनी तस्वीरें साझा करने के लिए लुभाते हैं और फिर उन तस्वीरों का इस्तेमाल करके उन्हें ब्लैकमेल करते हैं और उन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की धमकी देते हैं। इस तरीके से पीड़िताओं को और अधिक यौन शोषण सहने के लिए मजबूर किया जाता है और यह कई सालों तक चलता रहता है।

रिपोर्ट में बच्चियों की अश्लील तस्वीरें लेने के अपराधों (IIOC) में वृद्धि का भी जिक्र किया गया है। दिसंबर 2014 में ऐसे मामले 4,261 थे जो दिसंबर 2024 में 41,033 हो गए यानी पिछले 10 सालों में ऐसे अपराधों में 863% की वृद्धि हुई है। यह पाया गया कि इनमें से ज़्यादातर अपराध सोशल मीडिया पर होते हैं।

ग्रूमिंग गिरोहों की और जानकारी देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, ” कई मामलों में उन्होंने जाँच की, जिसमें अपराधी और पीड़िता अलग-अलग समुदायों से आए थे। अपराधियों द्वारा ऐसी बच्चियों के प्रति क्रूरता ज्यादा दिखी।”

हालाँकि 2020 के गृह मंत्रालय के रिपोर्ट में समुदाय के नामों का उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन इससे साफ होता है कि मुस्लिम बलात्कार गिरोह यानी ग्रूमिंग गैंग, जिनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के हैं, गैर-मुसलमानों के प्रति घृणा रखते हैं और गैर-मुस्लिम महिलाओं का यौन शोषण करके धार्मिक प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश करते हैं। यह विकृत मानसिकता इन अपराधों के पीछे अहम वजह है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि “ऑपरेशन स्टोववुड का मानना ​​है कि रॉदरहैम में लगभग दो-तिहाई अपराधी पाकिस्तानी पृष्ठभूमि से थे, और अधिकांश लड़कियाँ श्वेत थीं।” रॉदरहैम में बाल यौन शोषण के 64 प्रतिशत मामलों के लिए पाकिस्तानी पुरुष जिम्मेदार हैं।

इसके अलावा, ऑपरेशन स्टोववुड के तहत बाल यौन शोषण अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए कुल 42 अपराधियों में से 62 प्रतिशत पाकिस्तानी पुरुष थे।

ब्रिटेन के अधिकारी जिहादियों का धर्म बताने से कतराते हैं। ऑडिट में पाया गया कि अधिकारियों ने जानबूझकर अपराधियों की धर्म- जाति दर्ज करने से परहेज किया। रिपोर्ट में कहा गया है, “हमने पाया कि अपराधियों की धर्म और जाति बताने से कतराया जाता है और दो तिहाई अपराधियों की जाति अभी भी दर्ज नहीं की गई है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर एकत्र किए गए डेटा से कोई सटीक आकलन देने में हम असमर्थ हैं।” रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सीमित डेटा के बावजूद यह पाया गया कि अधिकांश अपराधी एशियाई जातीय पृष्ठभूमि के थे।

रिपोर्ट में पाया गया कि यू.के. के अधिकारी बाल यौन शोषण के मामलों में सटीक डेटा बेस तैयार करने और गंभीर केस की समीक्षा करने में विफल रहे हैं, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर की बात है।

इसमें कहा गया है कि अभियोजन पर आपराधिक न्याय डेटा में वृद्धि देखी गई, लेकिन इसने बाल यौन शोषण के विभिन्न रूपों या समूहों में काम करने वाले अपराधियों के बीच अंतर नहीं किया गया। केसी रिपोर्ट ने इसे “सामूहिक विफलता” करार दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशियाई या पाकिस्तानी पुरुषों द्वारा श्वेत लड़कियों को तैयार करने और उनका यौन शोषण करने के बारे में कई रिपोर्ट, समीक्षा सामने आई है। फिर भी सिस्टम “लगातार इसे पूरी तरह से स्वीकार करने या सटीक डेटा एकत्र करने में विफल रहा है ताकि इसकी प्रभावी रूप से जाँच की जा सके।” रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘एशियाई ग्रूमिंग गिरोहों’ के बारे में दावों को खारिज करने के लिए बार-बार त्रुटिपूर्ण डेटा का इस्तेमाल किया जाता है। ये पीड़िताओं के लिए नुकसानदेह है, साथ ही यूके में कानून का पालन करने वाले एशियाई समुदायों के लिए भी नुकसानदेह है।

हालाँकि यूनाइटेड किंगडम ने आखिरकार ग्रूमिंग गिरोह के सदस्यों के पाकिस्तानी मूल के होने की बात कबूल कर ली है। अपराधियों की जाति के बारे में जाँच कर रहा है, लेकिन देश अभी भी खतरे को भाँप नहीं पाया है। यह जाति की समस्या नहीं है, यह धार्मिक रूप से प्रेरित विकृति मानसिकता की समस्या है। इस विकृति को बढ़ावा देने में न केवल पुलिस ने मदद की है, बल्कि राजनेताओं ने भी हर संभव कोशिश की कि इन पाकिस्तानियों ‘बलात्कारी जिहादी’ न बोला जाए। उनकी धार्मिक कट्टरता की कभी निंदा न की जाए। ये लोग मुस्लिम ग्रूमिंग गिरोहों के खिलाफ़ कार्रवाई करके ‘नस्लवादी’ कहलाने से बचना चाहते हैं।

यह याद रखना चाहिए कि 2019 में यूके की सत्ताधारी लेबर पार्टी ने इस्लामोफोबिया की ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन ब्रिटिश मुस्लिम्स (APPG) परिभाषा को अपनाया था। इसके मुताबिक पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गिरोहों/बलात्कार गिरोहों की आलोचना करना मुसलमानों के खिलाफ़ ‘नस्लवादी’ है।

ब्रिटिश समाज की नजर में पीड़िता ही दोषी- ठहराने की शर्मनाक प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “नस्लीय मुद्दों से बचने के अलावा, हम समाज में टीनएज लड़कियों के प्रति एक अस्पष्ट रवैया भी बनाए रखते हैं। हम अक्सर उन्हें वयस्कों (तथाकथित ‘वयस्कीकरण’) के रूप में आँकते हैं। खासकर असहाय लड़कियों को, जिन्हें अक्सर समय से पहले ‘बड़ा होने’ के लिए मजबूर किया जाता है। वे अपने खुद के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के लिए दोषी करार दिए जाते हैं।”

इसमें आगे कहा गया है, ” अज्ञानता, पूर्वाग्रह और गलत इरादे अपराधियों को सजा दिलाने, उन पर मुकदमा चलाने और बच्चों को नुकसान से बचाने में मददगार साबित होते हैं।” रिपोर्ट में आगे पाया गया कि बाल यौन शोषण के कई मामलों को बलात्कार से हटा दिया गया और कम अपराध वाले श्रेणी में बदल दिया गया। यहाँ तक कि 13 से 15 साल की उम्र के बच्चे को अपराधी के साथ ‘प्रेम में’ या ‘सहमति’ के साथ सेक्स के रूप में लिया गया। केसी रिपोर्ट ने सहमति की उम्र और बाल यौन शोषण के मामलों से निपटने के लिए पुलिस के दृष्टिकोण के बारे में कई सिफारिशें कीं। केसी की रिपोर्ट ने ग्रूमिंग गिरोहों की राष्ट्रीय जाँच को प्रेरित किया है। हालाँकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने इस साल की शुरुआत में बाल यौन शोषण को लेकर राष्ट्रीय जाँच की मांगों को खारिज कर दिया था।

केसी ने 1990 के दशक के पुलिस डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 10 से 18 साल की उम्र के 4,000 से ज़्यादा बच्चों को वेश्यावृत्ति से जुड़े अपराध में शामिल थे। 2015 में गंभीर अपराध अधिनियम में संशोधन के बाद “बाल वेश्यावृत्ति” शब्द को हटाया गया और उसकी जगह “बाल यौन शोषण” शब्द को लाया गया।

ग्रूमिंग गिरोहों को हमेशा बचाने की कोशिश की गई

जाहिर है, इस्लामोफोबिक और नस्लीय रूप से असंवेदनशील दिखने के डर ने ब्रिटेन के अधिकारियों को वर्षों तक पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमर्स/बलात्कारियों के खिलाफ प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने से रोका है। यूनाइटेड किंगडम के मुस्लिम-तुष्टीकरण करने वाले राजनीतिक दलों ने यह भी सुनिश्चित किया कि मुस्लिम समुदाय की आलोचना न की जाए। हालाँकि इस समुदाय के सदस्य विशेष रूप से पाकिस्तानी मूल के लोग, श्वेत और अन्य गैर-मुस्लिम लड़कियों का यौन शोषण करते रहे।

हमें याद रखना चाहिए कि लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन को 2017 में द सन में प्रकाशित एक लेख के लिए माफी माँगनी पड़ी थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि “ब्रिटेन को ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों द्वारा श्वेत लड़कियों का बलात्कार और शोषण करने की समस्या है”। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में रिपोर्ट किए जा रहे बाल यौन शोषण में “मुख्य रूप से पाकिस्तानी पुरुष” शामिल हैं, उन्होंने कहा कि ‘नस्लवादी’ लेबल से बचने की प्रवृति अधिकारियों को जाँच करने से रोकती है।

2012 में, लेबर पार्टी के नेता और गृह मामलों की चयन समिति के अध्यक्ष कीथ वाज़ ने ग्रूमिंग जिहाद अपराधों को कम करके आँका और कहा कि वे नस्लीय रूप से प्रेरित नहीं हैं। उन्होने इस बात पर जोर दिया कि पूरे समुदाय को ‘कलंकित’ नहीं किया जाना चाहिए। ग्रूमिंग गिरोह के सदस्यों की पहचान उजागर न करने पर लेबर पार्टी का शुरू से जोर रहा है। ये मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति को दर्शाता है। 2011 में, पूर्व गृह सचिव जैक स्ट्रॉ ने पाकिस्तानी पुरुषों की सांस्कृतिक प्रथाओं को श्वेत लड़कियों के खिलाफ़ उनके अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी पुरुष श्वेत लड़कियों को “आसान शिकार” के रूप में देखते हैं। नॉटिंघम क्राउन कोर्ट के न्यायाधीश ने दो पाकिस्तानी व्यक्तियों को कई नाबालिग श्वेत लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ बलात्कार करने का दोषी ठहराया। हालाँकि अपराधियों की पहचान को कम आंका गया।

गलत सहानुभूति, नस्लीय भेदभाव, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और नैतिकता के नाम पर यूनाइटेड किंगडम के नेता और पुलिस पाकिस्तानी पुरुषों को देश में लगभग चार दशकों तक कमज़ोर लड़कियों का बलात्कार करने और उनका शोषण करने से नहीं रोका और जवाबदेही से बचते रहे।

उपहार, ध्यान, प्यार का भ्रम, ड्रग्स, यौन शोषण और हिंसा: बलात्कार जिहादियों ने अपने गैर-मुस्लिम लक्ष्यों को कैसे ‘तैयार’ किया

बलात्कार जिहादी यानी ग्रूमिंग गैंग पहले लड़कियों पर पूरा नियंत्रण करते हैं। “इसकी शुरुआत किसी लड़की को बहुत से गिफ्ट देने, बॉयफ्रेंड बनने का झाँसा देकर उनके साथ अच्छा व्यवहार करना, उन पर ध्यान देना, उनके साथ रहस्य साझा करना हो सकता है। इस तरह वे बच्चों को दोस्तों और परिवार से अलग कर देते हैं। इससे बच्चियों को अपने दुर्व्यवहार करने वाले पर अधिक निर्भर हो जाते हैं, जिसे वे अपना ‘बॉयफ्रेंड’ मान सकते हैं। निर्भरता बढ़ाने और एक या अधिक पुरुषों के साथ सेक्स के बदले में ड्रग्स और शराब की पेशकश की जा सकती है। पीड़ितों के विरोध करने पर हिंसा और जबरदस्ती किया जाता है।

रिपोर्ट में 2010 में डर्बीशायर में 10 ब्रिटिश पाकिस्तानी और 1 श्वेत ब्रिटिश व्यक्ति को 26 लड़कियों को ‘इसी तरह तैयार करने’ और उनका यौन शोषण करने पर दोषी ठहराया गया। रॉदरहैम में 5 ‘एशियाई’ पुरुषों को दोषी ठहराया गया जो ग्रूमिंग गिरोह से जुड़े थे और पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम थे। इसी तरह रोशडेल में 2012 में नौ ‘एशियाई’ पुरुषों को सजा दी गई।

केसी रिपोर्ट ने अपराधियों की पाकिस्तानी मूल के होने का उल्लेख बहुत कम है, ऑपइंडिया ने विस्तार से बताया है कि कैसे ये ग्रूमिंग गिरोह मूल रूप से पाकिस्तानी मुसलमानों के समूह थे जो विशेष रूप से श्वेत और अन्य गैर-मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाते थे।

रिपोर्ट में ऑक्सफोर्डशायर और नॉर्थम्ब्रिया के 2013 के मामलों का भी उल्लेख है। इनमें अपराधी ज्यादातर पाकिस्तानी, अल्बानियाई, कुर्द, बांग्लादेशी, तुर्की, ईरानी, ​​इराकी, पूर्वी यूरोपीय थे। इनकी आयु 27 से 44 वर्ष के बीच थी, जबकि पीड़ितों की आयु 13 से 25 वर्ष के बीच थी।

2015 में बर्मिंघम मेल में एक खबर वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के हवाले से की गई। इसमें रॉदरहैम में उन लोगों के साथ सड़क पर और ऑनलाइन ग्रूमिंग गिरोहों की कार्यप्रणाली में समानताओं का विवरण दिया गया था।

2015 की रिपोर्ट में पाया गया कि पहचाने गए 75 ग्रूमिंग संदिग्धों में से एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तानी जातीय पृष्ठभूमि (62%) से है, 12% श्वेत हैं और 5% अफ्रीकी कैरिबियन हैं।

केसी रिपोर्ट ने ये बात भी कही गई है कि स्थानीय पुलिस को कई वर्षों से ठीक-ठीक पता था कि क्या हो रहा है? लेकिन पुलिस को पाकिस्तानी पुरुषों से संबंधों के कारण समुदाय में तनाव की चिंता थी। केसी रिपोर्ट में ऑपरेशन टेंडरसी, ऑपरेशन लेंटेन, ऑपरेशन सैंक्चुअरी, ऑपरेशन शेल्टर, ब्रैडफोर्ड और कीघली के मामलों का उल्लेख है, जिसमें अधिकांश अपराधी पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, तुर्की और अल्बानियाई मूल के पाए गए, जो मूल रूप से मुस्लिम थे। हालाँकि कुछ मामलों में अपराधी श्वेत पृष्ठभूमि के भी थे।

पुलिस की मिलीभगत और पीड़ित परिवारों पर ही कार्रवाई

1980 के दशक में टेलफ़ोर्ड शहर में 11 साल की कम उम्र की कमज़ोर लड़कियों को ग्रूमिंग गिरोहों या बलात्कार गिरोहों द्वारा पूरे चालीस साल तक उठाया गया, बलात्कार किया गया, पीटा गया, बेचा गया और यहाँ तक कि मार भी दिया गया। इनमें ज्यादातर श्वेत लड़कियाँ थी। इन्हें एक बलात्कारी से दूसरे बलात्कारी के पास भेजा जाता था। ये लोग ज़्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल के थे। इस दौरान तीन लड़कियों की हत्या कर दी गई और दो की मौत हो गई। 170,000 की आबादी वाले शहर में 1,000 से ज़्यादा लड़कियों को पीड़ित होना पड़ा। टेलफ़ोर्ड शहर में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गिरोह सचमुच एक ‘रेप सेंटर’ चला रहे थे। हालाँकि पीड़ितों को शराब, सिगरेट खरीदकर, उनके मोबाइल टॉप-अप करके, उपहार खरीदकर उन्हें यह विश्वास दिलाते थे कि वे प्यार में हैं।

रॉदरहैम में भी इसी तरह का एक रैकेट चल रहा था, जिसमें 260,000 की आबादी वाले शहर में पाकिस्तानी मूल के पुरुषों द्वारा लगभग 1,500 लड़कियों का बलात्कार किया गया। उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें बेचा गया और खरीदा गया। कई पीड़ितों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और 1997 से 2013 तक यह दुर्व्यवहार बेरोकटोक चलता रहा। रोशडेल में ये मामला 2002 में सामने आया। यहाँ कम से कम 47 युवा लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद ये प्रतिक्रिया आ रही है कि ग्रूमिंग गिरोह “ग्रेट ब्रिटेन” की सड़कों पर खुलेआम घूमते रहते हैं।

हडर्सफ़ील्ड, रॉदरहैम, रोशडेल, ऑक्सफ़ोर्ड, ब्रिस्टल, पीटरबोरो और न्यूकैसल सहित यू.के. में कई स्थानों पर यौन शोषण के घोटाले व्यापक रूप से उजागर हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इंग्लैंड में लगभग 19,000 बच्चियों का यौन शोषण किया गया।

ये ‘ग्रूमिंग’ अपराध यूनाइटेड किंगडम को परेशान करना जारी रखते हैं क्योंकि नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ़ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (NSPCC) ने 2023 में रिपोर्ट की थी कि पिछले पाँच वर्षों में युवाओं के खिलाफ़ ऑनलाइन ग्रूमिंग अपराधों में 82% की वृद्धि हुई है।

पाकिस्तानी मूल के पुरुषों द्वारा संचालित ग्रूमिंग गिरोहों द्वारा कमजोर श्वेत और अन्य गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ बलात्कार करने का मुद्दा सबसे पहले रॉदरहैम, रोशडेल और टेलफ़ोर्ड जैसे शहरों में सामने आया। रॉदरहैम पर 2014 की जे रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1,400 बच्चों का 16 वर्षों में यौन शोषण किया गया। शोषण करने वाले अधिकांश पाकिस्तानी मूल के पुरुष थे।

कई मामलों में, बलात्कारियों को गिरफ्तार करने के बजाय, पुलिस ने पीड़ितों और उनके परिवारों को ही गिरफ्तार कर लिया। यह आमतौर पर स्थिति को ‘गलत तरीके से समझने’, ग्रूमिंग वाले हिस्से की जाँच करने में विफलता और ज़्यादातर मामलों में जानबूझकर मामले को छिपाने के कारण होता है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को अपराधी माना जाता है।

कई सालों तक, यू.के. में ग्रूमिंग गिरोहों को मीडिया और इस्लाम समर्थक राजनेताओं द्वारा “एशियाई” या “दक्षिण एशियाई ग्रूमिंग गिरोह” बताकर बचाया जाता रहा। हालाँकि लुईस केसी की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रूमिंग गिरोहों में ज्यादातर पाकिस्तानी मुसलमान शामिल हैं।(साभार) 

ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच नहीं चाहते ब्रिटिश सांसद, सदन में 364 ने विरोध में दिया वोट: एलन मस्क बोले- PM स्टार्मर को करो बर्खास्त

                                              ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ नहीं होगी जाँच
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच शुरू हो ये ब्रिटेन की सत्ताधारी पार्टी को मंजूर नहीं है। यही वजह है कि ब्रिटिश संसद में जब विधेयक में संशोधन को लेकर ये माँग उठाई गई कि कि ग्रूमिंग गैंग के विरुद्ध राष्ट्रीय जाँच शुरू हो तो ब्रिटेन के सांसदों ने इसके विरुद्ध वोटिंग की।

 सामने आई जानकारी के अनुसार केवल 111 सांसदों ने माँग के पक्ष में वोट किया जबकि 364 ने खिलाफ में मतदान किया। इसी के साथ लेबर पार्टी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वो बच्चों की सुरक्षा और कल्याण विधेयक को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।

लेबर पार्टी का कहना है कि यह संशोधन बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों को कमजोर करेगा। सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संशोधन पारित होता है, तो इससे बच्चों की शिक्षा और उनके विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ग्रूमिंग गैंग का मुद्दा पिछले एक हफ्ते से सुर्खियों में खुद दुनिया के सबसे अमीर आदमी इस गैंग का पक्ष लेने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं व ब्रिटेन की पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस मुद्दे पर बात रखते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मस्क का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग झूठ और गलत सूचनाओं को फैला रहे हैं, उन्हें पीड़ितों में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें सिर्फ खुद में दिलचस्पी है।

उन्होंने ये भी कहा कि वे 2008 से 2013 के बीच प्रॉसिक्यूशन सर्विस के डायरेक्टर थे तभी ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया गया था। स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जिस भी मामले को हाथ में लिया, वह अदालत तक पहुंचा और उसमें पर्याप्त कार्रवाई हुई।

अवलोकन करें:-

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क : मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 सा
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वहीं मस्क का कहना है कि स्टार्मर जाँच कर रही समिति के अध्यक्ष थे लेकिन फिर भी उन्होंने आरोपितों के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नहीं दी और अब प्रधानमंत्री के रूप में भी स्टार्मर इस घटना पर पर्दा डाल रहे हैं। मस्क ने इस पूरे मामले में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स से हस्तक्षेप कर स्टार्मर को बर्खास्त करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए उन्हें जेल भेजने की माँग की।

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग का काला सच : गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या, इनका कैसे भी यूज करो…, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: एलन मस्क ने कहा- सरकार के लोगों को भी जेल में डालो

फिर से चर्चा में आया ग्रूमिंग गैंग
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

मानवाधिकार से लेकर यूएनओ तक सब खामोश क्यों? क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं का इसी तरह शोषण होता रहेगा? क्या महिलाओं का कोई आत्म-सम्मान नहीं? आखिर कब तक महिलाएं इन जेहादियों का शिकार होती रहेंगी? इस गंभीर समस्या पर विश्व को एकजुट होकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।     

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।

पीड़ितों की आपबीती

आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।
रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।
इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।
अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।
एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ग्रूमिंग गैंग पर बोले एलन मस्क और जेके रॉलिंग

इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है।