आफताब (दाएँ) अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है ( फोटो साभार: BHaskar & Prabhat Khabar) बिहार के पूर्णिया में हिन्दू लड़कियों को देह व्यापार में धकेलने वाला एक गैंग पकड़ा गया है। इस सेक्स रैकेट का सरगना आफताब नाम का एक युवक बताया जा रहा है। आफताब अंकित तिवारी बन कर हिन्दू लड़कियों को फंसा रहा था। उसके साथ मौसम और शाकिब समेत कई लोग शामिल थे। इनके ऊपर भी फर्जी रूप से हिन्दू नाम रखने का आरोप है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (29 जनवरी, 2025) को पूर्णिया के कटिहार मोड़ इलाके में चालू हुई छापेमारी से 11 नाबालिग रेक्स्यू की गईं। इन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेला गया था। पुलिस छापेमारी में 32 लोग पकड़े गए हैं। इनमें 6 पुरुष हैं जबकि 26 महिलाएँ हैं।
पूर्णिया के इस रेड लाईट इलाके से रेस्क्यू की गई एक लड़की ने पूरे गैंग की सच्चाई दैनिक भास्कर को बताई है। दैनिक भास्कर को पीड़िता ने बताया है कि इस गैंग का सरगना आफताब खान है। उसने अपना नाम बदल कर अंकित तिवारी कर लिया था। उसने एक थार गाड़ी खरीदी थी और इस पर ‘जय बजरंग बली’ भी लिखवा रखा था।
आफ़ताब बदले हुए नाम के सहारे खुद को कट्टर हिन्दू बताता था। इसके बाद वह हिन्दू लड़कियों को फंसाने लगा। उन्हें शादी का झांसा देता था और फिर उनको धमका कर देह व्यापार करवाने लगता था। रिपोर्ट के अनुसार, उसके धंधे में तीन और लोग शामिल थे। इन्होने भी मुस्लिम नाम बदल कर हिन्दू नाम अपना लिया था।
इनमें एक का नाम मोहम्मद शाकिब है, उसने अपना नाम बदल कर राजीव साह कर लिया था। शाकिब अलग-अलग इलाके से लड़कियाँ लाकर उन्हें देह व्यापार में लगाता था। उसके साथ ही मौसम खान ने अपना नाम ऋषभ साह कर लिया था। वह रॉंग नम्बर के सहारे लड़कियों से दोस्ती करता था। फिर उन्हें देह व्यापार में धकेलता था।
मौसम पर एक लड़की की हत्या का भी मामला दर्ज है। इसी तरह गुड्डू खान नाम का एक युवक भी इस पूरे मामले में संलिप्त है। इस पूरे गैंग में एक महिला जुबैदा भी शामिल है। उसने अपना नाम कैटरीना रखा हुआ है। इन चारों ने आसपास की हिन्दू आबादी में घुलने मिलने को हिन्दू नाम अपनाया हुआ था।
यह लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाने के एक रात के ₹10 हजार तक लेते थे। यह लड़कियों को दूसरे राज्य में बेचते भी थे। लड़कियों को उनकी सुन्दरता के हिसाब से ₹5 लाख तक में बेचा जाता था। यह कुछ दलालों से लडकियाँ खरीदते भी थे।
पुलिस ने इस मामले में रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियों को बाल सुधार गृह भेज दिया है। बाकी सभी को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई चालू कर दी है। हालाँकि, आफताब अभी फरार है। उसके लिए छापेमारी चल रही है।
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।
मानवाधिकार से लेकर यूएनओ तक सब खामोश क्यों? क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं का इसी तरह शोषण होता रहेगा? क्या महिलाओं का कोई आत्म-सम्मान नहीं? आखिर कब तक महिलाएं इन जेहादियों का शिकार होती रहेंगी? इस गंभीर समस्या पर विश्व को एकजुट होकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।
हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।
पीड़ितों की आपबीती
आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।
रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।
इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।
The grooming gangs specifically targeted girls who were white and non-muslim.
"White girls are trash, they're whores"
It was racism, but not the right kind of racism for the mainstream media to care. pic.twitter.com/o0X05aGFlp
अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।
So many people at all levels of power in the UK need to be in prison for this. https://t.co/PtM39RGrFi
एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
The father of a grooming gang victim.
He tried to rescue his daughter from the apartment she was being held in and the Police arrested HIM.
इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।
Just a reminder for the civic nationalists discussing the UK's pedo grooming gangs today that the men responsible were the sons of LEGAL immigrants. pic.twitter.com/G9oy2KqMyo
यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है।
पॉर्नहब की मूल कंपनी के ऊपर से हट जाएंगे सारे आरोप (फोटो साभार : आजतक) पोर्नहब (PornHub) की मूल कंपनी आइलो (Aylo) सेक्स ट्रैफिकिंग से मुनाफा कमाने के आरोपों का सामना कर रही है। इसे सुलझाने के लिए कंपनी अमेरिकी सरकार को 1.8 मिलियन डॉलर यानी 15 करोड़ रुपए का भुगतान करने पर सहमत हो गई है। इसके अलावा, यौन तस्करी की शिकार पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति देगी। इसके बदले उसे तीन साल निगरानी में रहना होगा और फिर उसके खिलाफ चल रहा ये मामला वापस ले लिया जाएगा।
आइलो पर आरोप है कि पॉर्नहब के मालिकों ने एक ऐसी प्रोडक्शन कंपनी से पैसे लिए, जो उसके शूट किए गए वीडियो को सेक्स ट्रैफिकिंग का हथियार बना रहा था। गर्ल्स डू पोर्न (जीडीपी) नाम की प्रोडक्शन कंपनी ने उन महिलाओं के भी वीडियो बनाए थे, जिन्हें सेक्स ऐक्ट के लिए मजबूर किया गया था। आइलो ने इन आरोपों को स्वीकार कर लिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि आयलो ने उन रिपोर्टों पर आँखें मूंद लीं, जिनमें कहा गया था कि साइट पर दिखाई देने वाले वीडियो में महिलाओं को धोखा देकर और जबरदस्ती कर वीडियो बनाए गए थे। यह आरोप पॉर्नहब पर पॉर्न वीडियो की होस्टिंग करने और प्रोडक्शन कंपनी से पैसे लेने से जुड़ा है। आयलो ने कहा कि उसे इस सामग्री को होस्ट करने का ‘गहरा अफसोस’ है।
सीएनएन ने बताया कि प्रोडक्शन कंपनी ने साल 2017 से साल 2019 तक खुद के द्वारा शूट किए गए पॉर्न वीडियो को स्ट्रीम करने के लिए वेबसाइट को भुगतान किया, जिसके बारे में आयलो को पता था कि इसमें उन महिलाओं के वीडियो भी शामिल थे, जिन्होंने इसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर होस्ट करने की अपनी सहमति नहीं दी थी।
इस मामले में आयलो से शिकायत की गई तो कंपनी ने वीडियो हटाना शुरू कर दिया। हालाँकि, ये वीडियो फिर से पॉर्नहब पर पोस्ट कर दिए गए और पूरी दुनिया में उपलब्ध रहे। अब आयलो ने कहा कि ऐसा कभी न हो, इसके लिए वो जरूरी सावधानियाँ बरेगी। हालाँकि, अभी कनाडाई कंपनी आयलो को 1.8 मिलियन डॉलर का जुर्माना देना होगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी ब्रॉन पीस ने कहा कि इस समझौते के मुताबिक, अब आयलो को हर हाल में पीड़ितों को भी मुआवजा देना होगा। समझौते के मुताबिक, आयलो को तीन साल तक निगरानी का भी सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कंपनी समझौते का पूरी तरह से पालन करती है तो उसके खिलाफ आरोप हटा दिए जाएँगे।
आयलो कंपनी को निजी इक्विटी फर्म एथिकल कैपिटल पार्टनर्स चलाते हैं, जिन्होंने पॉर्नहब की मूल कंपनी माइंडगीक को ही खरीद लिया था। इस कंपनी के खिलाफ कुछ साल पहले 40 पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि पॉर्नहब की पैरेंट कंपनी माइंडगीक को 2009 से ही ‘गर्ल्स डू पॉर्न’ की गैरकानूनी कामों की जानकारी थी।
साल 2016 आते-आते कई पीड़िताओं ने आगे आकर गलत तरीकों से सहमति हासिल करने या धोखे से अश्लील वीडियो शूट करने के आरोप लगाए थे। अब इन सभी मामलों का निपटारा हो गया है। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने आयलो पर किसी भी तरह के यौन तस्करी कानून का उल्लंघन करने का आरोप नहीं लगाया, लेकिन कहा कि कंपनी को पता होना चाहिए था कि वह एक ऐसे समूह के साथ व्यापार कर रही थी, जो यौन तस्करी में शामिल था।
3,50000 रूपए में खरीदा, कुवैत ले जाकर ISIS को बेचने की धमकी: केरल में मानव तस्करी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कड़े कानूनों के बावजूद खाड़ी देशों में मानव तस्करी में कमी नहीं आ रही है। हाल ही में कुवैत में कुछ सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बाद केरल की तीन महिलाओं को मानव तस्करी नेटवर्क के चंगुल से बचाया गया, लेकिन अभी भी वहाँ सैकड़ों महिलाओं के फँसे होने की खबर है। इसी बीच कुवैत में कई महीनों तक फँसी रही केरल की दो महिलाओं का दिल दहला देने वाला एक ऑडियो क्लिप सामने आया है। अपने वतन वापस लौट चुकी इन महिलाओं ने अपनी आप बीती बताई है कि कैसे मानव तस्करी रैकेट ने उन्हें नौकरी का झाँसा दिया और बाद में उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कुवैत ले जाकर बेच दिया गया।
मानव तस्करी रैकेट ने केरल की दो महिलाओं की कीमत 3,50,000 रुपए लगाई थी। उन्हें कोच्चि स्थित एक ‘भर्ती’ एजेंसी द्वारा कुवैत में घरेलू नौकरानी के लिए बेचा गया था। खाड़ी देश में उन्हें दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा। महीनों बाद यहाँ से बच निकलने में कामयाब रहीं रेखा और उषा (बदले हुए नाम) के पास कई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ हैं। इन दोनों को परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश में नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बेहद गरीब परिवार से होने के कारण उनके पास कम दिनों में ज्यादा पैसे कमाने का और कोई विकल्प नहीं था। लेकिन उनकी गरीबी का फायदा उठाया गया और उन्हें अपने घरों से बहुत दूर एक अंजान देश में प्रताड़ित किया गया। नौकरी की चाह में झूठे दावों की शिकार हुई महिलाओं ने किसी तरह व्हाट्सएप पर एक ऑडियो क्लिप शेयर किया, उसमें उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे बताया और उन्हें रैकेट के चंगुल से बचाने की माँग की। इस ऑडियो क्लिप में ये महिलाएँ रो रही हैं और मलयाली भाषा में अपनी दर्दनाक कहानी बता रही हैं कि किस तरह उन्हें कुवैत में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
द न्यूज मिनट के मुताबिक, ऑडियो में उन्होंने बताया, “हमें यहाँ लाकर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, भूखा रखा गया, हमारे साथ मारपीट और गाली गलौच की गई। जबरन श्रम के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा धमकी दी गई कि अगर हमने उनकी बात मानने से इनकार किया तो उन्हें आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) को बेच दिया जाएगा।”
रेखा बताती हैं, “जब मैंने जनवरी 2022 में कुवैत में बेबी सिटर्स और होम नर्स की नौकरी के लिए एक विज्ञापन देखा, तब मैंने उस पर लिखे फोन नंबर पर संपर्क किया। नंबर आनंद नाम के एक व्यक्ति का था, उसने मुझे चलिक्कवट्टम में अपने ऑफिस आने को कहा।”
वह कहती हैं, “गोल्डन वाया नाम की एजेंसी के कर्मचारियों ने उसे एक अच्छा सैलरी पैकेज ऑफर किया। उसे बताया गया कि अगर वह एक ‘दाई’ (नैनी) के रूप में काम करती है, तो उसे 60,000 रुपए मासिक वेतन और रहने के लिए घर दिया जाएगा। उसे यह भी बताया गया कि उसका एकमात्र काम बच्चों की देखभाल करना होगा, क्योंकि उन घरों में अन्य कामों के लिए नौकर हैं। इसके साथ ही उसे फ्लाइट का टिकट और वीजा भी एजेंसी की तरफ से दिया जाएगा।” रेखा ने बताया कि एजेंसी में दो महिलाएँ भी थीं, जिससे उन्हें एजेंट की बात पर पूरा विश्वास हो गया।
वहीं, उषा मानती हैं कि अगर उन्होंने एजेंसी के वादों को ठुकरा दिया होता तो बहुत अच्छा था। वह कहती हैं, “जब मैंने उनसे पूछा कि वीजा और टिकट मुफ्त क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाओं की भर्ती मोदी सरकार की योजना के तहत हो रही है। हमें बताया गया कि जाने से पहले हमें केवल अपने मेडिकल चेक-अप और आरटी-पीसीआर परीक्षणों के लिए भुगतान करना होगा। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि मुझे एक अच्छी प्रतिष्ठित फर्म में भेजा जा रहा है।”
वह बताती हैं कि उसे समीर नाम के एक व्यक्ति से अपना टिकट, वीजा और पासपोर्ट लेने के लिए कहा गया था। इस पर उषा पूछती हैं कि वह उस पर कैसे विश्वास कर सकती हैं? उससे कहा गया कि समीर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में कार्यरत है। वह केरल के नेदुंबसेरी में स्थित होटल रॉयल विंग्स में उनका इंतजार कर रहा है।
रेखा का कहना है कि जब उन्होंने अपने वीजा पर ‘हाउसमेड’ लिखा हुआ देखा तो वह शुरुआत में घबरा गई थीं। बाद में रेखा उनसे इसके बारे में पूछती हैं, तो उन्होंने कहा कि वह यह सब अडजस्ट कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस वीजा के लिए पैसे देने हैं। वह कहती हैं, “उन्होंने मुझसे वादा किया था कि उनका एजेंट मुझे केवल बच्चों की देखभाल के काम के लिए भेज रहा था, इसलिए मैंने खुद को समझाया।” इसके बाद रेखा 6 और उषा 15 फरवरी को कुवैत पहुँची। हवाई अड्डे पर जैद जहर अल-दवसारी मैनपावर रिक्रूटमेंट एजेंसी के एमके गसाली नाम के एक व्यक्ति ने उनका स्वागत किया, जिसे मजीद के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद सब कुछ शीशे की तरह साफ होता गया।
रेखा कहती हैं, “जब मैंने गसाली से उस बच्चे के बारे में पूछा, जिसकी देखभाल के लिए मुझे यहाँ लाया गया था। उसे बताया कि तुम्हें यहाँ बच्चा सम्भालने के लिए नहीं लाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा कोई वीजा नहीं है, जो कुवैत में श्रमिकों को सिर्फ बच्चों की देखभाल करने के लिए यहाँ आने की अनुमति देता हो।” वह आगे बताती हैं, “उसने मुझसे कहा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ, इसके प्रति मेरी कोई जवाबदेही नहीं है। तुम्हे यह सब उस व्यक्ति से पूछना चाहिए, जिसने यहाँ भेजा है। रेखा कहती हैं, “कुवैत में उनका बाकी समय धमकियों और अमानवीय व्यवहार के साथ बीता। गसाली ने यह भी बताया था कि उन्होंने उसे 3.5 लाख रुपए में खरीदा है। इसलिए कुवैत में घरेलू काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”
रेखा ने बताया कि उसे ऐसे परिवार में नौकर बनाकर भेजा गया, जहाँ आठ लोग रहते थे। वह रोते हुए याद करती हैं, “मुझे वहाँ सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक काम करना पड़ता था, बिना खाना खाए और आराम किए। कभी-कभी, वे मुझे एक या दो चपाती और काली चाय देते थे। उनके लिए यह मेरे जिंदा रहने के लिए पर्याप्त था। एक दिन, जब मैं थकान के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी, तभी उस घर की मालकिन ने आकर मुझे लात मारी, चप्पल से मारा और बहुत पीटा। मेरे सिर पर पानी डाल दिया और मुझे तेज धूप में खड़ा कर दिया। कह रही थी अभी तक तेरा काम नहीं हुआ। मैं इससे बहुत डर गई थी कि मैंने किसी तरह काम फिर से शुरू कर दिया।”
केरल की महिला ने बताया, “इस घटना के पाँच दिन बाद मेरी तबीयत बहुत खराब हो गई। नाक से खून बहने लगा था। मैंने अपनी स्थिति के बारे में एजेंसी को लगातार अपडेट किया। मैंने वीडियो पर गसाली को फोन किया और उसे मेरी नाक से खून बहने की तस्वीरें भेजीं, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया।” वह कहती हैं, “मुझे बाद में एक क्लिनिक ले जाया गया, लेकिन क्लिनिक में कहा गया कि गम्भीर स्थिति है, मुझे अस्पताल ले जाना होगा। इसके बजाय अरब लोग मुझे एजेंसी के पास ले गए, क्योंकि वे मेरी देखभाल नहीं करना चाहते थे।”
उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए बताया, “यह आतंक अभी खत्म नहीं हुआ था। अगले दिन मुझे अस्पताल ले जाने की बजाय एजेंसी के लोगों ने मुझे अपने कार्यालय में ले गए और मुझे वहाँ बंद कर दिया। एजेंसी के लोगों ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया और बेल्ट से मारा। उन्होंने कहा कि हम अरब लोगों ने तेरी कीमत दी है। इसलिए मुझे वापस जाकर वहाँ काम करना होगा। उन्होंने ऐसा नहीं करने पर मुझे ISIS (आतंकवादियों) के पास भेजने की धमकी दी, मुझे याद दिलाया कि मेरा पासपोर्ट अभी भी उनके पास है। उसी रात वे मुझे वापस उस घर में ले गए जहाँ मुझे पीटा गया था।”
रेखा की तरह उषा को भी कुवैत में कई बार प्रताड़ना दी गई। चप्पलों, बेल्ट से पीटा गया, भूखा रखा गया। शराफुद्दीन, हबीब और रफीक ये वे लोग थे, जिन्होंने रेखा और उषा की घर वापस आने में मदद की। दोनों महिलाओं का कहना है कि अगर एसोसिएशन ने मदद नहीं की होती, तो हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। रेखा कहती हैं, “हो सकता है कि उन्होंने मेरे खराब स्वास्थ्य के कारण मुझे जाने दिया हो। लेकिन दूसरी महिलाएँ एसोसिएशन की मदद से यहाँ से निकलने में कामयाब रहीं। रेखा ने सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई है। उसने कहा कि अभी वहाँ और भी लोग फँसे हुए हैं, जो नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
रैकेट के चंगुल से भागी दोनों महिलाओं के कुवैत पहुँचने पर पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे। बीते दिनों एक ने मीडिया में बताया था, “वहाँ पहुँचने के बाद हमें पता चला कि वे हमें अरब परिवारों के घर की नौकरानी बनाने के लिए यहाँ पर लेकर आए थे। जब हमने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने हमें फर्जी मामलों में फँसाकर जेल में डालने की धमकी दी। हम इससे काफी डर गए थे। यह भी नहीं जानते थे कि किसी अनजान जगह पर क्या करें।”
यक्रेन के शरणार्थियों पर मानव तस्करी का खतरा मंडराया (फोटो साभार: दडेली मेल/ द इंडिपेंडेंट) रूस के साथ युद्धग्रस्त यूक्रेन में एक अलग ही मानव त्रासदी का खतरा उत्पन्न हो रहा है। अपनी जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिक पलायन कर दूसरे देशों में अपने लिए सुरक्षित आसरे की तलाश कर रहे हैं। लेकिन मानव तस्करी करने वाले आपराधिक गिरोह यूक्रेन की महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ या यौन कार्यों के लिए गुलाम बना रहे हैं।
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 10 लाख से भी अधिक यूक्रेनी नागरिक अपना देश छोड़ चुके हैं। इनमें अधिकतर महिलाएँ हैं। यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र को इस बात का डर है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन से करीब 70 लाख लोग पोलैंड, मोल्दोवा, रोमानिया, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे पड़ोसी देशों में जा सकते हैं, जिससे मानव तस्करी की भयावह घटनाएँ सामने आएँगी।
इस बात की प्रबल आशंका जताई जताई जा रही है कि जान बचाकर भागने वालों में कुछ सेक्स वर्कर बन जाएँगे, अपराधों में शामिल होंगे और कुछ से बंधुआ मजदूरी कराई जा सकती है।
युद्ध का समय मानव तस्करों के लिए गोल्डेन पीरियड होता है। ऐसे तत्व इन परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए पीड़ितों को मुफ्त यात्रा, रहन-सहन और नौकरियों का लालच देते हैं। इसी तरह की एक पीड़ित 27 साल की यूक्रेनी महिला ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने एक दोस्त से सुना जो पोलैंड गया था मुझे बताया कि वह एक लड़के के साथ गई थी, जिसने कहा था कि वह उसे मुफ्त में वारसॉ ले जाएगा, लेकिन जब वे वहाँ पहुँचे तो उसने पैसे माँगे।”
महिला ने बताया कि वो हमलावर हो गया था, लेकिन सिर्फ यह कहकर वो लड़की के साथ फिजिकल नहीं हुआ कि उसके पास उसके पैसे हैं और उसके लिए काम करके उसे चुकाना होगा। आखिरकार किसी तरह से वो उसके चंगुल से बचकर भागने में सफल रही।
हालात होंगे बदतर
एक चैरिटी में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पॉलिसी की एक्सपर्ट लॉरेन एग्न्यू ने कहा कि युक्रेन युद्ध मानव तस्करी के हालातों को और बदतर कर देगा। विशेषज्ञ ने यूक्रेनियों की मानव तस्करी को रोकने के लिए समूचे यूरोप के देशों को और अधिक अलर्ट होने की जरूरत है। उनका कहना है कि यूक्रेनी शरणार्थी जिन देशों में भागकर जा रहे हैं वो देश आपराधिक गिरोहों के लिए हॉट स्पॉट की तरह हैं शरणार्थी उनके लिए विकास का स्रोत होंगे।
दिल्ली पुलिस ने एक 16 साल की लड़की को 3 दिनों के अंदर बरामद कर अपहरणकर्ता को भी धर-दबोचा है। समयपुर बादली पुलिस ने एक सफल छापेमारी के बाद अपहरणकर्ता को गिरफ्तार किया। लड़की का अपहरण दिसंबर 19, 2020 को हुआ था। आउटर नॉर्थ दिल्ली जिले की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया 45 वर्षीय मौलाना नौशाद आदतन अपराधी है और उत्तर प्रदेश के हरदोई में लड़कियों के अपहरण और शोषण के उस पर 10 से अधिक मामले दर्ज हैं।
आरोपित अपहृत की गई लड़की को सीलमपुर क्षेत्र में बेचने की फिराक में लगा हुआ था। डिप्टी कमिश्नर गौरव शर्मा ने बताया कि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए और लोगों की सुरक्षा के लिए हमेशा सतर्क है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सिंघु सीमा पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के कारण पुलिस फोर्स का एक बड़ा हिस्सा वहाँ मौजूद है, जिससे इलाके में अपराधियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
लड़की की माँ ने पुलिस को सूचित किया था कि दोपहर 2 बजे से ही उनकी बेटी गायब है और उसी इलाके में रहने वाला एक अन्य व्यक्ति भी उसी समय से गायब है, जिस पर उन्हें शक है। इसके बाद तुरंत FIR दर्ज की गई और लड़की की बरामदगी के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया। चूँकि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, इसीलिए डेडिकेटेड अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है।
पुलिस ने जब मौलाना नौशाद के घर पर छापेमारी की तो वो गायब निकला और उसके परिवार वालों को भी उसके बारे में कोई सूचना नहीं थी। हरदोई के मदिया जिले का रहने वाला मौलाना नौशाद अपनी बीवी के साथ यहाँ रह रहा था। इसके बाद आरोपित और उसकी बीवी के मोबाइल नंबरों को तुरंत सर्विलांस पर रखा गया। इलाके के CCTV कैमरों के फुटेज की जाँच के बावजूद उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा था।
इसके बाद हिमाचल प्रदेश के बद्दी में आरोपित के मोबाइल नंबर का लोकेशन मिला। जब पुलिस की टीम बद्दी के लिए निकली तो रास्ते में पता चला कि आरोपित भी दिल्ली के ही रूट में है। इसके बाद दिल्ली तक उसका पीछा करते हुए तकनीकी सर्विलांस अपनाया गया और सीलमपुर से उसे गिरफ्तार किया गया। नौशाद ने अपने साथी के साथ वहाँ से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे धर लिया।
नौशाद मानव तस्करी और अपहरण के 10 से ज्यादा मामलों में नामजद है। वो एक मदरसा में बतौर शिक्षक काम करता है। वो पहले अल्पसंख्यक व गरीब लड़कियों से परिचय बढ़ाता था, फिर उन्हें लालच देकर अपने साथ ले जाता था। इसके बाद वो लड़की का यौन शोषण करता था और फिर उसे बेच देता था। इस बार भी उसने पीड़िता को लालच देकर निकाह का झाँसा दिया था। 2018 में भी उसने एक लड़की को लालच देकर उससे निकाह कर लिया था और उसके साथ रहने लगा था।
पुलिस नौशाद की पत्नी की भूमिका पर भी जाँच कर रही है क्योंकि फोन पर उसने अपने शौहर के साथ बात की थी और काम ख़त्म कर उसे भागने की भी सलाह दी थी। हिमाचल प्रदेश में लड़की का सौदा नहीं हो पाया था, इसलिए वो वापस दिल्ली लौट रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता के साथ नौशाद ने यौन शोषण भी किया है। उसकी मेडिकल जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को अपने ही दोस्त की बच्ची से भीख मँगवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपित दीन मोहम्मद ने अपने मित्र की बेटी का न सिर्फ अपहरण किया, बल्कि प्रताड़ित कर उससे भीख भी मँगवाई। पुलिस ने लगभग एक महीने बाद बच्ची को सकुशल बरामद करते हुए मुरादनगर थाना क्षेत्र स्थित नेकपुर के निवासी दीन मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है।