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मुसलमानों को रमजान में जबरन खाने-पीने के लिए मजबूर कर रहा चीन


हर वर्ष जब भी रमजान शुरू होते हैं, चीन में मुसलमानों पर कोई न कोई पाबन्दी लग जाती है। मस्जिद के बाहर नमाज पर पाबन्दी, कुरान या नमाज से सम्बंधित कोई भी चीज घर में रखने पर पाबन्दी, और अब दो/तीन वर्षों से रोजा रखने पर सख्ती हो गयी है। यदि पुलिस को यह पता लग जाए कि ये गुजरने वाले/वाली ने रोजा रखा हुआ है, तुरन्त पुलिस मुँह में पानी से भरी बोतल डाल रोजा तुड़वा देती है। और यह मसला कई वर्षों से चल रहा है, जिसका हर वर्ष अपने इस ब्लॉग पर प्रकाशन भी करता रहता हूँ, लेकिन आज तक मुसलमानों के हमदर्द बन रहे किसी ने चीनी दूतावास जाकर विरोध दर्ज नहीं करवाया। 
चीन रमजान के महीने में मुसलमानों को जबरन खाने-पीने के लिए मजबूर कर रहा है, और मुस्लिम देशों ने इसपर चुप्पी साध रखी है ! वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के जिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों द्वारा चलाए जा रहे रेस्तरां को जबरन खुलवाया जा रहा है। और उइगर कामगारों को जबरन खाने और पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है !
इस रिपोर्ट में म्यूनिख आधारित वर्ल्ड उइगर कांग्रेस के प्रेसिडेंट डोलकुन इसा ने इसे मुस्लिमों के लिए चिंताजनक और समुदाय की गरिमा के खिलाफ बताया है। हमारे समुदाय के लोगों को रमजान के पाक महीने में दिन में खाना खाने पर मजबूर किया जा रहा है !
उन्होंने बताया है कि, चीन के जिनजियांग प्रांत में मुस्लिमोंद्वारा चलाए जा रहे रेस्तरां को जबरन खुलवाया जा रहा है। और उइगर कामगारों को जबरन खाने और पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है !
बीते दिनों ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि, चीन ने उइगर मुस्लमानों को डिटेंशन सेंटर में जबरन कैद कर रखा हुआ है। इनकी तादाद ३ मिलियन के आसपास है। हालांकि चीन ने कहा है कि, उन्हें कैद करके नहीं बल्कि वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में रखा गया है। जिसका मकसद आतंकवाद विरोध भावनाओं को खत्म करना है। रिपोर्ट के अनुसार इन सेंटर में मुस्लिमों के हिजाब और दाढ़ी रखने पर पाबंदी है।
हालांकि मुस्लिम देश इन डिटेंशन सेंटर को चीन की आतंकवाद से लड़ने की नीति के तौर पर देखते हैं ! चीन ने इस मामले पर अपनी नीति को कुछ इस तरह बनाया है जिससे मुस्लिम देश इसके पक्ष में खड़े नजर आते हैं !

तुर्की ने बुलंद की उइगर मुस्लिमों के समर्थन में आवाज़, चीन को दी चेतावनी

तुर्की ने बुलंद की उइगर मुस्लिमों के समर्थन में आवाज़, चीन को दी चेतावनीतुर्की ने उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे ख़राब बर्ताव को लेकर चीन पर निशाना साधा है। चीन की आलोचना करते हुए तुर्की ने उसके इस बर्ताव को मानवता को शर्मसार करने वाला क़रार दिया है।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन में अल्पसंख्यक उइगर समुदाय के एक प्रमुख संगीतकार की मौत की रिपोर्टों के बाद तुर्की ने चीन से उइगर मुसलमानों के लिए बनाए गए हिरासत कैंप बंद करने की मांग की है। तुर्की ने उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे ख़राब बर्ताव को लेकर चीन चीन को चेतावनी भी दी है। चीन के शिनजियांग क्षेत्र में तुर्की भाषा बोलने वाले उइगरों की बड़ी आबादी रहती है।
तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामी अकसॉय ने कहा, “21वीं सदी में फिर से कंसंट्रेशन कैंप बनाया जाना और उइगर तुर्क मुसलमानों के ख़िलाफ़ चीनी प्रशासन की नीतियां मानवता के लिए शर्म की बात हैं।” उन्होंने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, ‘उइगरों के प्रति चीनी अधिकारियों की सुनियोजित नीति मानवता को शर्मसार करने वाली है। तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “अब यह कोई राज़ नहीं रह गया है कि हिरासत में रखे गए दस लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनका राजनीतिक तौर पर ब्रेनवाश किया जा रहा है।” तुर्की ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी अपील की है कि वे शिनजियांग में व्याप्त इस मानव त्रासदी पर रोक लगाने के लिए प्रभावी क़दम उठाएं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में इस्लामिक प्रथाओं में तलाक और हलाला आदि पर पाबन्दी लगाने पर जिसको देखो विधवा ....

चीन ने अपने पश्चिमोत्तर क्षेत्र में हिंसा और तनाव बढ़ने के बाद उइगर अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ सख्त रवैया अपना रखा है। इन पर नज़र रखने के साथ ही कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की एक समिति के अनुसार, करीब दस लाख उइगरों और तुर्की बोलने वाले दूसरे अल्पसंख्यकों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि चीन अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का दमन कर रहा है। हालांकि चीन इन आरोपों से इन्कार करता रहा है। वह इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र बताता है।
कौन हैं उइगर मुसलमान?
उइगर मुसलमान अधिकतर चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं। इस प्रांत की लगभग 45 प्रतिशत आबादी उइगर मुसलमानों की है। यह लोग अपने आप को सांस्कृतिक और नस्लीय तौर पर तुर्की और अन्य मध्य एशियाई देशों के क़रीब देखते हैं और उनकी भाषा भी तुर्की से मिलती जुलती है।
हाल के दशकों में चीन के हान समुदाय के लोग ने शिनजियांग की ओर पलयान किया है जिसके कारण उइगरों को लगता है कि उनकी संस्कृति और कारोबार ख़तरे में हैं। शिनजियांग अधिकारिक तौर पर चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है, यह दक्षिणी चीन में तिब्बत जैसा ही है।

इस्लाम को बदलेगा चीन, नमाज-दाढ़ी-हिजाब पर लग सकती है पाबंदी

Islam
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में इस्लामिक प्रथाओं में तलाक और हलाला आदि पर पाबन्दी लगाने पर जिसको देखो विधवा विलाप करने लगता है। मजहब में दखलदराजी नज़र आने लगती है। मानवाधिकार के साथ-साथ #metoo, #award vapsi, #intolerence, #mob lynching, #not in my name आदि पता नहीं कौन-कौन से गिरोह बाहर निकल आते हैं। जबकि भारत में किसी मुसलमान को रोज़ा रखने, टोपी पहनने, बुर्का या हिजाब पहनने, दाढ़ी रखने या फिर किसी भी इस्लामिक त्यौहार पर पाबन्दी नहीं। लेकिन इतने वर्षों से चीन में इस्लाम पर कुठाराघात हो रहे हैं, किसी की आवाज़ नहीं निकल रही। इन गिरोह को मानो साँप सूंघ गया हो। 
ऐसा नहीं कि चीन में पहली बार हो रहा है, यह काम कई वर्षों से चल रहा है। पाकिस्तान को कश्मीर की चिंता है, लेकिन पाकिस्तान में किस तरह इस्लाम पर एक के बाद एक कुठाराघात हो रहे हैं, कभी यूएनओ तक में बोलने का साहस नहीं। भारतीय मुस्लिम ठेकेदारों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों की भी बस भारत सरकार के ही विरुद्ध ज़ुबान खुलती है, चीन के खिलाफ सबके सब भीगी बिल्ली बने बैठे हैं। इतना ही नहीं, एक मुस्लिम के किसी हादसे में मर जाने पर समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष, #award vapsi, #metoo, #mob lynching, #not in my name आदि षड्यंत्रकारी गैंग विधवा-विलाप करने लगते हैं, परन्तु चीन में इस्लाम पर हो कुठाराघातों पर सबको साँप सूंघ गया है। सभी सूरदास बने बैठे हैं। क्या चीन और शेष विश्व के इस्लाम में अन्तर है? किसी में चीनी उत्पादनों के विरुद्ध बहिष्कार करने या फतवा देने तक का साहस नहीं।        
चीन ने एक नया कानून पारित किया है, जो अगले 5 सालों में इस्लाम को समाजवाद के हिसाब से बदलने का प्रयास करेगा। देश में धर्म का पालन कैसे किया जाए, इसे फिर से लिखने के लिए चीन का यह नया कदम है। अलजजीरा के मुताबिक, चीन के प्रमुख अंग्रेजी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने जनवरी 5 को बताया कि आठ इस्लामिक संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद सरकारी अधिकारियों ने इस्लाम को समाजवाद के अनुकूल करने और धर्म के क्रिया-कलापों को चीन के हिसाब से करने के कदम को लागू करने के लिए सहमति व्यक्त की। 
चीन ने हाल के सालों में धार्मिक समूहों के साथ धर्म को चीन के संदर्भ में ढालने को लेकर आक्रामक अभियान चलाया है। चीन के कुछ हिस्सों में इस्लाम धर्म का पालन करने की मनाही है। मुस्लिम शख्स को नमाज अता करने पर, रोजा रखने पर, दाढ़ी बढ़ाने या महिला को हिजाब पहने पाए जाने पर गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। 
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भारत में धार्मिक सौहार्द जितना वोट के भूखे छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं ने ख़राब किया है, किसी मुसलमान ने नहीं। इन वो.....

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, चीन में 10 लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को गुप्त शिविरों में रखे जाने का अनुमान है, जहां वे धर्म की निंदा करने और आधिकारिक रूप से नास्तिक सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति निष्ठा रखने के लिए मजबूर हैं। अमेरिका सरकार का आकलन है कि अप्रैल, 2017 से चीनी अधिकारियों ने उइगुर, जातीय कजाक और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के कम से कम आठ लाख से बीस लाख सदस्यों को नजरबंदी शिविरों में अनिश्चितकाल के लिए बंद कर रखा है।
ह्यूमन राइट्स वाच की रिपोर्ट के अनुसार, इन शिविरों में बंद उइगर मुसलमानों को चीनी भाषा मैंडरिन सीखने पर मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, उन्‍हें चीन का प्रॉपगैंडा गीत गाने पर भी मजबूर किया जाता है। अगस्त में, वॉशिंगटन पोस्ट के संपादकीय में कहा गया था कि दुनिया मुसलमानों के खिलाफ अभियान को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
चीन ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने अल्पसंख्यकों के धर्म और संस्कृति की रक्षा करता है।
Representative Imageनजरबंदी शिविरों में बंद हैं आठ से बीस लाख धार्मिक अल्पसंख्यक: अमेरिका
ट्रंप प्रशासन ने संसदीय सुनवाई के दौरान अपने देश के सांसदों को बताया कि चीन के नजरबंदी शिविरों में करीब आठ से बीस लाख धार्मिक अल्पसंख्यक बंद हैं। संसदीय सुनवाई के दौरान ‘ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट डेमोक्रेसी एंड लेबर’ में उप सहायक विदेश मंत्री स्कॉट बुस्बी ने आरोप लगाया कि चीन दुनिया के अन्य तानाशाह शासनों के ऐसे दमनात्मक कदमों का समर्थन कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका सरकार का आकलन है कि अप्रैल, 2017 से चीनी अधिकारियों ने उइगुर, जातीय कजाक और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के कम से कम आठ लाख से बीस लाख सदस्यों को नजरबंदी शिविरों में अनिश्चितकाल के लिए बंद कर रखा है।’ सीनेट की विदेश मामलों की उपसमिति के समक्ष बुस्बी ने बताया कि सूचनाओं के अनुसार हिरासत में रखे गए ज्यादातर लोगों के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है और उनके परिजनों को उनके ठिकानों के बारे में बेहद कम या कोई जानकारी नहीं है।
पहले-पहल तो चीन ने ऐसे शिविरों के अस्तित्व से इंकार किया था लेकिन इस संबंध में सार्वजनिक रूप से खबरें आने के बाद चीनी अधिकारी अब बता रहे हैं कि ये केंद्र ‘व्यावसायिक शिक्षा केन्द्र’ हैं।  बुस्बी ने कहा, हालांकि यह तथ्य गलत प्रतीत होता है क्योंकि उन शिविरों में कई लोकप्रिय उइगुर बुद्धिजीवी और सेवानिवृत्त पेशेवर भी शामिल हैं।
इन केन्द्रों से सुरक्षित बाहर निकले कुछ लोगों ने वहां के बुरे हालात के बारे में बताया है। उदाहरण के लिए उन शिविरों में नमाज सहित अन्य धार्मिक रीतियों पर प्रतिबंध है। बुस्बी ने कहा कि शिविरों के बाहर भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं। परिवारों को मजबूर किया जा रहा है कि वे चीनी अधिकारियों को लंबे समय तक अपने घरों में रहने दें। सशस्त्र पुलिस आने-जाने के रास्तों पर नजर रख रही है। हजारों मस्जिद तोड़ दी गई हैं, जबकि कुछ अन्य कम्युनिस्ट पार्टी के दुष्प्रचार का केन्द्र बन गई हैं।
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चीन में उइगर मुसलमान ही नहीं ईसाई भी त्रस्‍त, प्रार्थना के लिए भी कोई जगह नहीं
चीन में उइगर मुसलमान ही नहीं, बल्कि ईसाई समुदाय के लोगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। यहां की वामपंथी सरकार सभी धर्मों के लोगों को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश कर रही है और उन पर एक खास तरह की विचारधारा थोप रही है। इसके लिए उन पर तरह-तरह के दबाव व पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों से ज्‍यादती के बाद अब हेनान प्रांत में ईसाइयों के साथ भी ऐसा ही किए जाने की बात सामने आ रही है। यहां कई चर्च को अवैध ठहराते हुए ढाह दिया गया है, जिसके कारण कैथोलिक समुदाय के लोगों के पास प्रार्थना के लिए भी जगह नहीं बची है। इतना ही नहीं, सरकारी साइन बोर्ड के जरिये साफ तौर पर बच्चों को प्रार्थना में शामिल नहीं किए जाने की चेतावनी दी गई है।
पादरियों पर अपने समुदाय से जुड़ीं निजी जानकारियां साझा करने का दबाव बनाया जा रहा है। कई चर्च के शीर्ष पर लगे क्रॉस के चिह्न को हटा लिया गया है और वहां राष्‍ट्रध्‍वज फहराने के निर्देश दिए गए हैं। मुद्रित धार्मिक सामग्रियों और धार्मिक दृष्टि से पवित्र माने जाने वाली चीजों को भी जब्‍त कर लिया गया है। साथ ही चर्च की ओर से चलाए जाने वाले कई स्‍कूलों को भी बंद कर दिया गया है।
चीन में कैथोलिक ईसाई समुदाय के लोगों की संख्‍या 1 करोड़ 20 लाख के आसपास है और बताया जा रहा है कि चीन सरकार इन्‍हें किसी भी तरह की धार्मिक स्‍वतंत्रता नहीं दे रही है। सरकार के दबाव के कारण यह समुदाय भी यहां दो खेमों में बंटा नजर आ रहा है, जिनमें से एक तो सरकार की ओर से मंजूर पादरियों को मानता है, जबकि दूसरा समूह रोम समर्थक चर्च के नियमों को मानने पर जोर देता है।
इससे पहले चीन में उइगर मुस्लिम समुदाय के साथ ज्‍यादती की खबरें सामने आ चुकी हैं। उनके धार्मिक विश्‍वासों पर हमला करने के साथ-साथ उन्‍हें भी एक खास विचारधारा में ढालने की बातें सामने आ रही हैं। इसके अतिरिक्‍त, इस समुदाय से जुड़े लोगों को बड़ी संख्‍या में डिटेंशन सेंटर भेजे जाने की रिपोर्ट भी पिछले दिनों सामने आई थी।
ह्यूमन राइट्स वाच ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि चीन उइगर मुसलमानों पर क्‍यूआर कोड के जरिये नजर रख रखा है। इसके लिए चीन ने उनके घरों पर स्‍मार्ट डोरप्‍लेट्स रखा रखे हैं और उन्‍हें मोबाइल ड‍िवाइस के साथ जोड़ा है।
संयुक्‍त राष्‍ट्र के मानवाधिकार पैनल ने अगस्‍त में चीन के विभिन्‍न डिटेंशन सेंटर्स में करीब 10 लाख उइगर मुसलमानों को नजरबंद रखे जाने की बात कही थी। बाद में इन बंदियों को तरह-तरह की यातनाएं देने की बात भी सामने आई।
ह्यूमन राइट्स वाच के मुताबिक, इन शिविरों में बंद उइगर मुसलमानों पर अलग राजनीतिक विचार थोपे जाते हैं और इन्‍हें नहीं मानने पर तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं। इन्‍हें चीनी भाषा मैंडरिन सीखने और चीन का प्रॉपगैंडा गीत गाने पर भी मजबूर किया जाता है।

चीन : मुसलमानों को क़ुरान के साथ सभी धार्मिक चीजें जमा करने का फरमान


भारत में धार्मिक सौहार्द जितना वोट के भूखे छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं ने ख़राब किया है, किसी मुसलमान ने नहीं। इन वोट के भूखे नेताओं ने मुसलमानों राष्ट्र मुख्यधारा से जोड़ने की बजाए सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक समझते रहते हैं। 
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खुले में नमाज पर पाबंदी पर ये सभी छद्दम साम्प्रदायिक रंग देने एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पिछले वर्ष अपने हैदराबाद प्रवास के दौरान रमजान माह में मौलाना उर्दू यूनिवर्सिटी मार्ग पर किसी मीट अथवा फल की दुकान नहीं लगने दी। ईद के दिन किसी मुसलमान ने मस्जिद से बाहर तक नमाज तक अदा नहीं की। उस ईद के दिन इत्तेफाक से वीरवार था, और उस दिन उस रोड पर साप्ताहिक सब्ज़ी बाजार लगता था, बालकनी में खड़ा नमाज़ ख़त्म होने का इंतज़ार कर रहा था। जब कारों को वहां से निकलते देख, सब्ज़ी के निकला, तो देखा नमाज़ शुरू नहीं हुई थी, मस्जिद के आगे हर वीरवार की भाँति बाजार लगा हुआ था, इतना ही नहीं, मस्जिद में जगह न होने के कारण लोग दूसरी मस्जिद की ओर भाग रहे थे। कहने का मतलब है, ईद के दिन भी किसी ने मस्जिद से बाहर बैठ नमाज नहीं पढ़ी। मस्जिद भी घर से ज्यादा दूर नहीं, लेकिन कभी अज़ान की आवाज़ भी नहीं सुनी। जबकि मस्जिद पर लाउड स्पीकर लगे हैं। 
अभी कुछ माह पूर्व चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर शिनजियांग के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मुसलमानों के खिलाफ अपना अभियान चलाया है। चीन सरकार ने अपने देश के मुसलमानों को अपने नमाज की चटाई और कुरान की प्रतियां सौंपने का आदेश दिया है। डेली मेल के मुताबिक, साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर बाद में चटाई और कुरान पाई गईं तो गंभीर सजा दी जाएगी। रेडियो फ्री एशिया के मुताबिक, पिछले सप्ताह कशगर, होतन अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की रिपोर्ट सामने आई हैं। निर्वासन विश्व उईगर कांग्रेस ग्रुप के प्रवक्ता दिलक्सत रक्षित ने कहा कि उन्हें एक नोटिफिकेशन मिला है, उईगर मुस्लिम जाति के सभी लोगों के धर्म से जुड़ी कोई सामग्री नहीं मिलनी चाहिए। कुरान और धर्म से जुड़ी सभी चीजें सरकारी ऑथरिटीज को देनी हैं। इसे लेकर चीन के सबसे प्रसिद्ध सोशल मीडिया ऐप से भी नोटिफिकेशन दिया गया है।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, शिनजियांग के अधिकारियों ने इस वर्ष के शुरूआती दिनों में पांच साल पहले प्रकाशित हुए सभी कुरानों को हटाना शुरू कर दिया था, जिनमें उग्रवादी सामग्री थी। कुरान को शिनजियांग में “तीन अवैध और एक आइटम” अभियान के तहत लाया गया। यह अभियान अवैध धार्मिक सामग्री को लेकर चलाया जा रहा है। जो ज्यादातर ‘मुस्लिम उईगर’ के स्वामित्व वाली ‘अवैध’ धार्मिक वस्तुओं के खिलाफ है।
कलकत्ता हाई कोर्ट भी लगा चुकी है कुरान पर बैन 
Chandmal Chopra stated in his writ petition: "The cited passages in the Quran... arouse in Muslims the worst sectarian passions and religious fanaticism, which has manifested itself in murders, massacres, plunder, arson, rape and destruction or desecration of sacred places both in historical and in the contemporary period, not only in India but in large parts of the world."

The petition created a lot of furore in Calcutta and abroad. Muslims created street riots. The government intervened and put heavy pressure on the judicial process. 
End of paste

.... Enough of appeasement. History has shown that appeseasement of muslims is suicidal. Europeans are learning the hard way.
( Book "Calcutta Quran Petition" can be read on faithfreedom.org)
चीन ने मुहर्रम से ठीक पहले मुस्लिमों के लिए एक और फ़रमान ज़ारी कर दिया है और इस फ़रमान के बाद ये माना जा रहा है कि चीन अब मुस्लिमों के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठा रहा है l चीनी अधिकारियों ने देश में रह रहे मुस्लिमों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। चीन के मुस्लिमों का कहना है कि उनसे नमाज पढ़ने की चटाई और कुरान पुलिस को सौंपने को कहा गया है और ऐसा न करने पर उन्हें सजा भुगतने को भी कहा गया है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि कुरान में चरमपंथ को बढ़ावा देने वाली सामग्री है।चीन के शिन्जियांग प्रांत के अधिकारियों ने उईगुर समुदाय को चेतावनी दी है कि उन्हें अपनी सभी धार्मिक चीजें देनी होंगी वरना कड़ी सजा के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक शिन्जियांग में कुरान जब्त करने वाली खबरें आधारहीन हैं। उईगुर कांग्रेस के एक निर्वासित नेता ने अमेरिकी सरकार द्वारा चलाए जा रहे रेडियो फ्री एशिया (RFA) को बताया कि ‘हमें एक नोटिफिकेशन मिला है जिसके मुताबिक उईगुर समुदाय के सभी लोगों को उनके घर में मौजूद इस्लाम धर्म से जुड़ी एक-एक चीज, जैसे कुरान, नमाज पढ़ने वाली चटाई वगैरह अधिकारियों को सौंपना है। उन्हें स्वेच्छा से सभी धार्मिक सामान वापस देना है, अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें इसके लिए कड़ी सजा दी जाएगी।’ यह निर्देश देश में रह रहे कजाखस्तान और किर्गिस्तान के मुस्लिमों को भी दिए गए हैं और इस आदेश की घोषणा कथित तौर पर सोशल नेटवर्किंग साइट वीचैट के जरिए की गई है। आपको याद ही होगा कि भारत में कुछ वक़्त पहले एक मुहिम सी छेड़ी गयी थी।  जिसमें वामपंथी पत्रकारों और लेखकों ने अवार्ड लौटाकर तो कुछ अभिनेताओं ने भारत को असहिष्णु देश घोषित कर दिया था और ऐसे दोगले लोग तब अपने बिलों में छुप जाते है। जब डीएसपी अय्यूब पंडित की मुस्लिम भीड़ मस्जिद के बाहर पीट-पीट कर बेरहमी से हत्या कर देती है l असली असहिष्णु देश देखने के लिए ऐसे लोगों को चीन को देखना चाहिए जिसने मुहर्रम से ठीक पहले मुसलमानों के ख़िलाफ़ बहुत बड़ा तुगलकी फरमान सुनाया है।  लेकिन अब कोई मुस्लिम संगठन की भावनाएं आहत नहीं होंगी और ना ही किसी वामंपथी पत्रकार या नेता के पेट में दर्द होगा और हाँ ऐसे मौके पर मानवाधिकार आयोग वालों को कैसे भूल सकते है।  उन्हें रोहिंग्या मुस्लिम पर आंसू बहाना याद रहता है। लेकिन मजाल है कि चीन पर ऊँगली उठा दे कोईl खबर के मुताबिक पाकिस्तान के अज़ीज़ दोस्त चीन की सरकार ने अपने देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ मुहर्रम से पहले बड़ा अभियान चलाया है और सभी मुसलमानो को अपने नमाज की चटाई और कुरान की प्रतियां जब्त कराने का आदेश दिया है l डेली मेल के मुताबिकयह सख्त चेतावनी भी दी गई है कि अगरबाद में किसी की भी चटाई और कुरान पाई गईं तो गंभीर सजा दी जाएगी l आपको बता दें कि चीन के शिनजियांग प्रांत में पिछले कई सालों से धार्मिक कट्टरपंथ का संघर्ष चल रहा है और अकेले शिन्जियान प्रांत में ही उइगर मुस्लिमों की जनसख्या एक करोड़ के पार पहुंच गयी है l इसी के चलते इस बार चीन ने मुहर्रम से पहले मुस्लिमों के धार्मिक अधिकार पर बड़ी पाबंदी लगायी है, लेकिन अभी तक ना तो टीवी मीडिया इस पर बहस कर रही है और दिन रात रोहिंग्या के अधिकार पर अपनी वोटबैंक की राजनीति चमकाने वाले नेताओं के मुँह से कुछ फूटा है l ख़बरों के मुताबिक़ निर्वासन विश्व उईगर कांग्रेस ग्रुप के प्रवक्ता दिलक्सत रक्षित ने कहा है कि उन्हें एक नोटिफिकेशन मिला है और इसमें लिखा है कि उईगर मुस्लिम जाति के सभी लोगों के धर्म से जुड़ी कोई सामग्री नहीं मिलनी चाहिए l कुरान और धर्म से जुड़ी सभीचीजें सरकारी अधिकारी को देनी हैं l शिनजियांग के अधिकारियों ने इस वर्ष के शुरूआती दिनों में पांच साल पहले प्रकाशित हुए सभी कुरानों को हटाना शुरू कर दिया था, जिनमें उग्रवादी सामग्री थी l कुरान को शिनजियांग में “तीन अवैध और एक आइटम” अभियान के तहत लाया गया अभियान अवैध धार्मिक सामग्री को लेकर चलाया जा रहा है, जो ज्यादातर ‘मुस्लिम उईगर’ के स्वामित्व वाली ‘अवैध’ धार्मिक वस्तुओं के ख़िलाफ़ है l आपको बता दें कि इससे पहले भी चीन ने कुछ ऐसी ही कानून पाबंदियां लगादी थीं, जिससे चीन के मुस्लिमों ने चीन को “खुली हवा वाला जेल” कहना शुरू कर दिया था l इन फ़ैसलों में सेकुछ सबसे बड़ी मस्जिद में इबादत करने जा रहे मुस्लिम अब मेटल डिटेक्टर से तलाशी देकर प्रवेश करेंगे l 24 घंटे मस्जिदों पर पुलिस का कड़ा सुरक्षा पहरा और CCTV से निगरानी रहती है और यही नहीं शिनजियांग प्रांत में मुस्लिम लोगों के रमजान महीने में रोज़ा रखने पर पाबन्दी लगाने का फरमान भी सुना दिया गया था l और तो और चीन में दाढ़ी रखने पर आंशिक प्रतिबंध लगा हुआ है साथ ही सभी सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने की भी मनाही है और किसी को भी सार्वजनिक तौर पर नमाज़ पढ़ने पर भी पाबंदी लगा दी गयी थी।  युवाओं को मस्जिदों से दूर रहने के लिए कहा जा रहा है और उन्हें बताया जा रहा है कि नमाज सेहत के लिए नुकसानदायक है।  चीन के अधिकारियों का मानना है कि उइगर मुसलमान अल कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे है। वैसे ऑस्ट्रिया में बुर्के पर लगी रोक, नियम न मानने पर देना होगा भारी जुर्माना।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 2016-2017 में जारी एक रिपोर्ट में कहा था कि बीजिंग सरकार अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार कर रही है। उनकी धार्मिक आजादी को छीना जा रहा है। चीन में उईगर मुसलमानों और हान चीनी समुदाय के बीच 2009 से संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी चीन ने शिनजियांग प्रांत में रहने वाले मुसलमानों को लंबी दाढ़ी रखने और बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। गौरतलब है कि उईगर मुसलमान आम तौर पर टर्की भाषा बोलते हैं। शिनजियांग प्रांत, वर्ष 1949 से पहले तुर्किस्तान का हिस्सा हुआ करता था।
चीन ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। पिछले कुछ वर्षों से लगभग हर रमजान के महीने में मुसलमानों पर कोई न कोई पाबन्दी लगती रहती है। मस्जिदों पर लाउडस्पीकर, अज़ान, सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर नमाज़, रोज़ा न रखना, बुर्का हो या टोपी आदि पर पाबन्दी लगती रहती है और विश्व के किसी भी मुस्लिम देश में चीन द्वारा लगाई जाने वाली पाबंदियों का विरोध करने का साहस नहीं दिखा।