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जॉर्ज सोरोस से लिंक पर घिरीं सोनिया गाँधी, जिस फाउंडेशन की को-चेयरपर्सन वह ‘आजाद कश्मीर’ की पैरोकार: BJP ने पूछा- भारत विरोधियों से कांग्रेस का कैसा रिश्ता? अब तक डरपोक खोजी पत्रकार क्यों चुप रहे?

जॉर्ज सोरोस, सोनिया गाँधी (फोटो साभार: TV9/Punjab Kesari)
कहते हैं 'जब जागो तब सवेरा', 2013 में बीजेपी नेता तेजेन्द्र सिंह बग्गा ने सोनिया गाँधी का कश्मीर विरोधी संस्था की co-president होने का खुलासा करने पर समस्त तथाकथित खोजी पत्रकार कहाँ थे? सोनिया ही नहीं अनेक भारतीय पत्रकार भी इस भारत विरोधी संस्था के सदस्य हैं। उन दिनों एक हिंदी पाक्षिक को सम्पादित करते इस खुलासे को विस्तार से प्रकाशित किया था। (देखिए नीचे पृष्ठ) अगर बीजेपी ने 2013 में ही बग्गा को गंभीरता से लिया होता, आज कांग्रेस की क्षेत्रीय दलों से बदतर हालत होती। 

    

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर विदेशी ताकतों से जुड़ाव का गंभीर आरोप लगाया है। बीजेपी ने कहा है कि सोनिया गाँधी का संबंध ‘फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसिफिक’ (FDL-AP) से है, जिसे जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन द्वारा वित्तीय मदद मिलती है। बीजेपी का दावा है कि यह संगठन कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करता रहा है। इस मुद्दे को लेकर संसद में जबर्दस्त हंगामा हुआ और कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

सोनिया-सोरोस मुद्दे पर संसद में हंगामा

सोमवार(9 दिसंबर 2024) को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर गर्मागर्म बहस देखने को मिली। जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने इसे बेबुनियाद आरोप बताते हुए जोरदार हंगामा किया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष को शांत करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार, लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इसी तरह, राज्यसभा में भी भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

बीजेपी ने सोनिया गाँधी पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी, एफडीएल-एपी की सह-अध्यक्ष होने के नाते, उस संगठन से जुड़ी रही हैं जो कश्मीर को स्वतंत्र राष्ट्र मानने का समर्थन करता है। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सोनिया गाँधी और जॉर्ज सोरोस के बीच का यह संबंध भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप को दर्शाता है।” बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राजीव गाँधी फाउंडेशन और सोरोस फाउंडेशन के बीच साझेदारी हुई थी, जो इस विदेशी प्रभाव को और पुष्ट करती है।

बीजेपी ने सोनिया गाँधी पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी ने दावा किया है कि सोनिया गाँधी, एफडीएल-एपी की सह-अध्यक्ष होने के नाते, उस संगठन से जुड़ी रही हैं जो कश्मीर को स्वतंत्र राष्ट्र मानने का समर्थन करता है। पार्टी प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सोनिया गाँधी और जॉर्ज सोरोस के बीच का यह संबंध भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप को दर्शाता है।” बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राजीव गाँधी फाउंडेशन और सोरोस फाउंडेशन के बीच साझेदारी हुई थी, जो इस विदेशी प्रभाव को और पुष्ट करती है।
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने अडानी समूह के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओसीसीआरपी (ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) की रिपोर्ट का हवाला दिया था। ओसीसीआरपी को भी सोरोस फाउंडेशन से फंडिंग मिलती है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “राहुल गाँधी और ओसीसीआरपी के बीच यह संबंध दिखाता है कि विपक्ष किस तरह से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।”
निशिकांत दुबे ने संसद में अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाया और एक्स पर लिखा, “आज लोकसभा में मुझे बोलने का अवसर शून्य काल में था, लेकिन विपक्ष ख़ासकर कांग्रेस पार्टी ने सोरोस के सम्बन्ध में पोल खुलने के डर से मेरी आवाज़ को दबाया। संसद में नियम के अनुसार यदि आवाज़ उठाने पर हल्ला कर दबाया जाए तो लोकतंत्र ख़तरे में है। संविधान कैसे बचेगा?”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से की एकजुटता की अपील

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले को ‘भारत की संप्रभुता पर हमला बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई भारत-विरोधी ताकतों के साथ काम करता है, तो सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर उसका विरोध करना चाहिए। यह सिर्फ कांग्रेस का मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।” रिजिजू ने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि अगर उनकी पार्टी का कोई सदस्य देशविरोधी तत्वों से जुड़ा है, तो उसे सामने लाएँ।
वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इन आरोपों को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया। कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जब सरकार को कुछ छिपाना होता है, तो वह ऐसे मुद्दे उछालती है। अगर उनके पास कोई ठोस सबूत है, तो जाँच कराएँ।” वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने कहा, “सरकार को पहले अपने घर की सफाई करनी चाहिए। विपक्ष को डराने-धमकाने की यह कोशिश अब नहीं चलेगी।”

ओसीसीआरपी और सोरोस फाउंडेशन पर क्या हैं आरोप?

ओसीसीआरपी एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन है, जो अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करता है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि यह संगठन भारत की छवि खराब करने और मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिए विपक्ष के साथ मिलकर काम कर रहा है। हालाँकि, अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओसीसीआरपी जैसे संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और उनकी संपादकीय नीति पर किसी का नियंत्रण नहीं होता।
बीजेपी के आरोपों पर अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर कहा, “यह निराशाजनक है कि भारत की सत्ताधारी पार्टी इस तरह के आरोप लगा रही है। अमेरिकी सरकार पत्रकारों को पेशेवर प्रशिक्षण और विकास के लिए मदद करती है, लेकिन इसका संपादकीय स्वतंत्रता से कोई लेना-देना नहीं है।” बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस बयान को आधार बनाते हुए कहा, “अमेरिका ने खुद स्वीकार किया है कि ओसीसीआरपी और सोरोस फाउंडेशन को उनके फंड मिलते हैं। यह साफ दिखाता है कि विपक्ष और विदेशी ताकतें भारत के खिलाफ साजिश रच रही हैं।”

संसद में सोरोस चैप्टर कैसे शुरू हुआ

संसद में सोरोस का मुद्दा सबसे पहले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 6 दिसंबर को उठाया था। उन्होंने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सोरोस के करीबियों के साथ मुलाकात का जिक्र किया और इसे ‘भारत-विरोधी ताकतों’ से जोड़ा। उन्होंने संसद में कहा, “कांग्रेस का हाथ जार्ज सोरोस के साथ, राहुल गाँधी जी की भारत जोड़ो यात्रा का खर्च सोरोस ने दिया या नहीं, सोरोस ने 1000 भारतीय बच्चों को विदेश में पढ़ाई का खर्च दिया, उसमें कितने कांग्रेस नेताओं के बच्चे हैं? मेरा कांग्रेस पार्टी से प्रश्न पूछने का सिलसिला जारी रहेगा।” इसके बाद, यह मुद्दा संसद में हंगामे का कारण बन गया।
बीजेपी ने यह भी कहा है कि जॉर्ज सोरोस की फंडिंग से चलने वाले खोजी पत्रकारों ने ही अडानी पर हमले को लेकर राहुल गाँधी के भाषणों का प्रसारण किया। राहुल गाँधी भी इसे अपने सोर्स के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाए। बीजेपी ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी जॉर्ज सोरोस को अपना दोस्त बता चुके हैं।
बहरहाल, सोरोस और सोनिया गाँधी के बीच कथित संबंधों को लेकर संसद में उठा यह मुद्दा राजनीतिक संघर्ष का नया अध्याय बन गया है। जहाँ बीजेपी इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का सवाल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘ध्यान भटकाने की चाल’ करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद संसद के बाहर जनता के बीच कितना असर डालता है।

उत्तर प्रदेश : ‘मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए’: कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) में ‘महिला शक्ति’ का नारा लेकर उतरी कांग्रेस  की एक महिला प्रत्याशी ने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया कि संगठन में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। बदायूँ जिले के शेखूपुर विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस ने फराह नईम (Farah Naeem) को उम्मीदवार बनाया था। नईम ने 27 जनवरी 2022 को चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा करते हुए पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। 

मीडिया से बात करते हुए फराह नईम ने कहा, “पार्टी जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं मिलना चाहिए और मैं एक चरित्रहीन महिला हूँ। जिला इकाई में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “महिलाएँ बदायूँ कांग्रेस संगठन में सुरक्षित नहीं हैं। मैंने टिकट के लिए दावेदारी की, लड़ाई लड़ी। ओंकार सिंह (कांग्रेस के जिलाध्यक्ष) ने मुझे रोकने के लिए मेरे चरित्र पर कीचड़ उछाले, महिलाओं के चरित्र पर कीचड़ उछाले। उनका कहना है कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए, जबकि कांग्रेस को हर बिरादरी और जाति का वोट चाहिए। ओमकार सिंह ने मेरे लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। हर कोशिश की धमकाने की। उन्होंने टिकट रोकने की हर कोशिश की।” 

जिलाध्यक्ष ने लगाया चरित्रहीन का आरोप

नईम ने कहा, “ओंकार सिंह जैसे लोग इस संगठन में मौजूद हैं तो मैं चुनाव नहीं लड़ूँगी। मैं कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा देती हूँ। मेरे बारे में बताया गया है कि मेरे पास अपने खाने के लिए भी एक रुपया नहीं है। दूसरा आरोप है कि मैं चरित्रहीन हूँ। ऐसे बहुत सारे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें गिनते-गिनते मैं थक जाऊँगी। इन आरोपों ने मुझे बहुत आघात पहुँचाया है।”
वह आगे कहती हैं, “मैंने भी तय किया है कि मैं लड़ूँगी, मैं टूटूँगी नहीं। आगे भी सेवा करूँगी और हर उस किनारे पर आकर खड़ी होऊँगी, जहाँ महिलाओं को सुरक्षित नहीं बताया जाएगा और उसे अकेला समझा जाएगा। जब प्रभारी लोगों ने फोन पर मुझसे सवाल पूछे तो मैंने कानों पर हाथ रख लिया और कहा कि मुझे अफसोस है कि मैंने कांग्रेस पार्टी की सेवा की और ओंकार सिंह ने मेरे लिए इतने गंदे शब्द इस्तेमाल किए।” यह बोलते-बोलते फराह नईम पूरी तरह से टूट जाती हैं और रो पड़ती हैं।
फराह नईम के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी जगह पर बदायूँ के शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता देवी प्रजापति को मैदान में उतारा है। बता दें कि शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र बदायूँ जिले का हिस्सा है और आँवला (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 2008 में इस विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था। विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 2012 में हुआ था। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण की वोटिंग 10 फरवरी और अंतिम चरण का मतदान 7 मार्च को होगा।