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काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों को लगाना होगा नेम प्लेट: बिहार के बोधगया की दुकानों में खुद ही लगाया बोर्ड

आज कई राज्यों द्वारा योगी जैसा मुख्यमंत्री की मांग करने का कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी सख्त फैसले को लेने में हिचकाते नहीं। कितने सालों पहले कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जनहित में कानून बनाकर अलमारी में सजाकर रखा हुआ था। अगर यह कानून उसी समय लागु हो गया होता, आज ये चीखा-चिल्ली नहीं होती। सब कुछ सामान्य रहता, क्योकि चीखा-चिल्ली करने वाली सभी पार्टियां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यूपीए सरकार में शामिल थे। इस एपिसोड में एक बात खुलकर सामने आ गयी कि हिन्दुओं और हिन्दू देवी-देवताओं को अभद्र बोलने वाले उन्हीं के नाम से धंधा कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग में पड़ने वाले दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के योगी सरकार के निर्देश के बाद भले विपक्षी दल इस पर विवाद कर रहे हों, लेकिन यह नियम धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार के बाद यह मध्य प्रदेश के उज्जैन और बिहार के गया आदि जगहों पर नेम प्लेट लगने लगे हैं। इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने की माँग उठ रही है।

जब यूपीए ने अपने कार्यकाल में कानून बनाया है फिर इसे केवल मन्दिरों तक सीमित रखने की बजाए पूरे भारत में लागू करना चाहिए। योगी सरकार द्वारा विपक्ष द्वारा चील-कौओं की तरह मुस्लिम विरोधी बताकर चीखा-चिल्ली देख लगता है कि यूपीए सरकार ने शायद मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक इस कानून को लागु नहीं किया। यानि पिछली कांग्रेस समर्पित यूपीए भी असलियत जानती थी। आज I.N.D.I. गठबंधन में भी लगभग वही सभी पार्टियां है, जो यूपीए में शामिल थीं।  

उज्जैन में नेम प्लेट का आदेश

उज्जैन नगर निगम ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को दुकान मालिकों को अपनी दुकानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर की प्लेट लगाने का निर्देश दिया। उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा कि इस आदेश का पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए और दूसरी बार 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
ततवाल ने कहा कि उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने 26 सितंबर 2002 को दुकानदारों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर ने कहा कि यह कदम एमपी दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस में निहित है।
मेयर ने कहा, “उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है। लोग यहाँ धार्मिक आस्था के साथ आते हैं। उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे वे सामान खरीद रहे हैं। अगर कोई ग्राहक असंतुष्ट है या उसके साथ धोखा हुआ है तो दुकानदार के बारे में जानकारी होने से उसकी समस्या हल हो सकती है।”
वहीं, इंदौर से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुकानों के बाहर दुकानदार का नाम लिखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना नाम बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। उन्होंने इसे आस्था के साथ-साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के दुकानों पर भी नेम प्लेट

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम के आसपास स्थित दुकानदारों को भी अपने नाम का बोर्ड लगाना होगा। गोदौलिया में शनिवार (20 जुलाई 2024) को पुलिस ने दुकानदारों से बात की और उन्हें अपना नाम लिखने के लिए कहा। काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में लगभग 500 दुकानें हैं। इन दुकानों में लगभग 15 प्रतिशत दुकानें मुस्लिमों की हैं।
वहीं, राष्ट्रीय हिंदू दल के पदाधिकारियों ने भी दुकानों पर भगवा झंडा और आधार कार्ड रखने के लिए कहा है। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर के बाहर दुकानदारों को नाम लिखने की अपील की है। बता दें कि सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार लगभग 1 करोड़ लोगों के आने के अनुमान है।
प्रशासन के मुताबिक, इस आदेश के बाद अब मंदिर के बाहर स्थित दुकानदार श्रद्धालुओं को गुमराह करके पूजा सामग्री की बिक्री नहीं कर पाएँगे। दुकान मालिक का नाम लिखकर किराएदार दुकान संचालित नहीं कर सकेंगे। उन्हें बाहर अपना असली नाम-पता लिखना होगा। मंदिर के सामने देवी-देवताओं के नाम लिखकर गैर-धर्म के दुकानदार व्यवसाय करते मिले हैं। पुलिस ने उन्हें नोटिस थमाया है।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा, “यह आदेश सरकार के नहीं हैं। पुलिस विभाग ने दुकानदारों की पहचान के लिए सख्ती की है। सोशल मीडिया पर अक्सर ये दिखता है कि एक वर्ग के लोग मांस भी खा रहे हैं और शाकाहारी खाने का सामान भी बेच रहे हैं। ऐसे भी वीडियो देखने में आए हैं कि खाने पर पहले थूकते हैं, फिर बेच रहे हैं। ऐसे में एक वर्ग, जो सामान खरीद रहा है, उसकी आस्था को चोट पहुँचती है।”

बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के दुकानदारों ने लगाए नेम प्लेट

उत्तर प्रदेश में शुरू हुए इस नियम को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति करे, लेकिन श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने इसे सही बताया है। यही कारण है कि बिहार के गया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के बाहर स्थित दुकानदारों ने अपने मन से दुकानों पर नेम प्लेट लगा ली है। हिंदू और मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी स्वेच्छा से फल की दुकानों के आगे ये नेमप्लेट लगा रखा है।
अवलोकन करें:-
सावन के महीने में बोधगया के महाबोधि मंदिर में भी काँवड़िया पहुँचते हैं और गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाते है। इसको देखते हुए स्थानीय दुकानदारों ने आपसी सहमति से दुकान के आगे नेम प्लेट लगाने का फैसला लिया है। यहाँ पर कुछ फल दुकानदार तो बीते 20 सालों से अपने दुकान पर अपना नाम लिखे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार पर फर्क नहीं पड़ता।

कर्नाटक में कौन करेगा निवेश? कन्नड़ के नाम पर बेंगलुरु में हिंसा: दुकानों पर हमले, उखाड़ रहे बिलबोर्ड…

बेंगलुरु में उखाड़े गए अंग्रेजी बोर्ड (चित्र साभार: @nabilajamal_ & @harishupadhya/X)
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में क्षेत्रवाद और भाषाई अतिवाद तेज़ी से बढ़ता हुआ दिख रहा है। बुधवार (27 दिसम्बर, 2023) को इसकी हद हो गई जब कथित कन्नड़ ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में दुकानों पर हमला बोल कर कई जगह उनके बिलबोर्ड कन्नड़ में ना लिखे होने के कारण क्षतिग्रस्त कर दिए और खूब उत्पात मचाया।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका के आयुक्त तुषार गिरी नाथ के एक फैसले के कारण बवाल मचा हुआ है। तुषार गिरी नाथ का कहना है कि बेंगलुरु की सभी दुकानों, शॉपिंग मॉल और अन्य सभी प्रतिष्ठानों को अपने दुकान के नाम के बोर्ड 60% हिस्सा कन्नड़ भाषा में लिखना होगा। ऐसा ना करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसके लिए तुषार गिरी नाथ ने 15 दिनों का समय दिया है। हालाँकि, कन्नड़ भाषा के लिए संघर्ष करने का दावा करने वालों ने इसे लेकर आज ही कोहराम मचा दिया। कन्नड़ क्षेत्रवाद का दावा करने वाले एक समूह कर्नाटक रक्षणा वेदिके ने बेंगलुरु में जम कर उत्पात मचाया।

लाल और पीले साफे पहने इसके कथित कार्यकर्ताओं ने बेंगलुरु में तमाम प्रतिष्ठानों के बिलबोर्ड उखाड़ दिए। अंग्रेजी में लिखे दिखने वाले अधिकांश बिलबोर्ड को इन्होंने उखाड़ा और दुकानों में तोड़फोड़ की। इस दौरान राज्य की पुलिस देखती रही और इन्हें रोक नहीं पाई।

इस गुंडागर्दी के अब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में दिखता है कि मात्र छोटी दुकानों को ही नहीं बल्कि हर प्रकार के प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया। इसमें स्टारबक्स कॉफ़ी, थर्ड वेव कॉफ़ी और अन्य कई ब्रांड के स्टोर पर जाकर तोड़फोड़ की। ‘कर्नाटक रक्षणा वेदिके’ के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान प्रतिष्ठानों के मालिकों को धमकाया भी।

बेंगलुरु में हुई आज तोड़फोड़ को लेकर कई लोग सोशल मीडिया पर रोष प्रकट कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी हिंसा में कोई राज्य में निवेश करने क्यों आएगा? वहीं कर्नाटक पुलिस ने कुछ बेकाबू प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है।

कुछ दिन पहले भी इन कार्यकर्ताओं द्वारा कई दुकानदारों को परेशान करने के वीडियो सामने आए थे। इन्होंने गाड़ियों पर स्पीकर लगा कर दुकान पर कन्नड़ में बिलबोर्ड लगाने को कहा था। इसके बाद अब इन्होंने तोड़फोड़ की।

कर्नाटक चुनाव के समय भी कन्नड़ भाषा सीखने का मुद्दा काफी उठाया गया था। इस दौरान कई ऐसे वीडियो भी सामने आए थे जिनमें कन्नड़ ना बोलने वालों को सड़क पर रोक कर परेशान किया गया था। अब इस मामले ने दोबारा जोर पकड़ लिया है।

भूकंप के बाद तुर्की के लोगों में आक्रोश : ‘सीरिया वाले शरणार्थियों को बाहर निकालो, ये लूट रहे हमारी घरें-दुकानें’

                           तुर्कों ने सीरियाई लोगों पर भूकंप के बाद दुकानों को लूटने का आरोप लगाया
तुर्की (Turkey) और सीरिया (Syria) में हाल ही में आए भूकंप से हजारों लोगों की मौत हो गई है और मृतकों का आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर तुर्की में लाखों सीरियाई शरणार्थियों के प्रति तुर्कों के बीच नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। कुछ लोग सीरियाई शरणार्थियों पर अराजकता और तबाही के बीच लूटपाट का आरोप लगा रहे हैं।

यही वजह है कि एक मुस्लिम-बहुसंख्यक देश तुर्की में सीरियाई लोगों के खिलाफ घृणा के मामले बढ़ रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप प्रभावित कस्बों और शहरों में, कुछ तुर्कों ने सीरियाई लोगों पर क्षतिग्रस्त दुकानों और घरों से चोरी करने का आरोप लगाया है। ट्विटर पर सीरियाई विरोधी स्लोगन ट्रेंड कर रहा है। तुर्क लोग ‘हम सीरियाई नहीं चाहते हैं’, ‘अप्रवासियों को वापस भेजो’, ‘अब कोई स्वागत नहीं’ जैसे स्लोगन को ट्रेड करवा रहे हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक आपातकालीन शिविरों में शरण लिए हुए सीरियाई भूकंप पीड़ितों को कथित तौर पर आश्रय शिविरों से बाहर निकाल दिया गया है। एक सीरियाई व्यक्ति ने मेर्सिन शहर में अपने हमवतन लोगों के लिए विशेष रूप से आश्रय स्थापित किया था, उसे भी तुर्को द्वारा नस्लवादी टिप्पणी का सामना करना पड़ा। 

नाम न बताने की शर्त पर एक सीरियाई व्यक्ति ने अफसोस जताते हुए कहा कि अरबी बोले जाने पर लोग उनपर चिल्लाने लगते हैं। इसलिए, उन्होंने बचाव स्थलों पर जाना बंद कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि लोग कलह पैदा करने के लिए लगातार उन पर लूटपाट का आरोप लगाते हैं।

तुर्की और सीरिया में भूकंप के कारण मरने वालों की आधिकारिक संख्या 37,000 से अधिक हो गई है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशँका है। स्थानीय निवासियों और सहायता सहायता कर्मियों के अनुसार हजारों विस्थापितों को भोजन और आपातकालीन आश्रय प्रदान करने में कई क्षेत्रों में कई दिनों की देरी हुई है। इसके अलावा, लूटपाट की खबरें आई हैं। कुछ विदेशी सहायता टीमों ने बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण अस्थायी रूप से अपने काम को रोक दिया है।

तुर्की के न्याय मंत्री ने घोषणा कर कहा है कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने लूटपाट के आरोप में 48 लोगों को बिना पहचान के आधार पर गिरफ्तार किया है। राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) ने लुटेरों से सख्ती से निपटने का संकल्प लिया है।

2011 में सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद से तुर्की ने लगभग 40 लाख सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहाँ शरण दी और उन्हें घर उपलब्ध कराया है। इनमें से अधिकांश शरणार्थी देश के दक्षिण में सीरियाई सीमा के पास रहते हैं। गज़ियान्तेप (Gaziantep) शहर भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ है और यहाँ लगभग 500,000 सीरियाई लोग रहते हैं, जो आबादी का 25% है।

हालाँकि, सीरियाई लोगों के प्रति आक्रोश कोई नई घटना नहीं है, वो बात अलग है कि भूकंप ने मौजूदा तनाव को बढ़ा दिया है। ताजा मामले अरब दुनिया के देशों के बीच मौजूद मतभेदों को रेखांकित करते हैं, भले ही वे इस्लाम के बैनर तले एकता का दिखावा करते रहे हों।

यहाँ तक कि तुर्की गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, इसने सीरियाई शरणार्थियों पर पिछले एक दशक में 40 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया है। कुछ तुर्की लोग सीरियाई लोगों को सस्ते मजदूर मानते हैं जिन्होंने नौकरियों पर कब्जा कर लिया है और सेवाओं का इस्तेमाल किया है।

कर्नाटक : ‘मूर्तिपूजा का विरोध करने वाले न करें मंदिर परिसर में कारोबार’: मेले से हटाई गईं गैर-हिन्दुओं की दुकानें

          
                                       VHP की बहिष्कार मुहिम (फोटो साभार: टाइम्स नाउ)
कर्नाटक के दक्षिण-कन्नड़ जिले के पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले में मुस्लिमों की दुकानें हटाने का मामला सामना आया है। इसे लेकर मेला शुरू होने से पहले ही विश्व हिंदू परिषद ने बॉयकॉट की मुहिम चलाते हुए पोस्टर जारी किए थे। साथ ही इलाके के व्हाट्एप ग्रुपों पर भी गैर-हिंदू व्यापारियों के दुकान लगाने पर प्रतिबंध जैसे संदेश जमकर वायरल हो रहे थे। इन सब के बीच एक मुस्लिम शख्स ने मेले में अपनी दुकान लगाई थी जिसे खाली करवा लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 14 जनवरी से 22 जनवरी तक विट्टल कस्बे में पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले का आयोजन किया गया था। इसके पहले ही हिंदू संगठनों खास तौर पर विश्व हिंदू परिषद की तरफ से पोस्टर जारी कर मुस्लिम दुकानदारों को मेले के दौरान स्टॉल न लगाने के लिए कहा गया था। जारी पोस्टर में हिंदू पर्व त्योहारों और मेलों में मुस्लिमों से दुकान न लगाने की बात कही गई थी। पोस्टर में नवंबर 2022 में हुए कुकर ब्लास्ट का जिक्र करते हुए लिखा गया था कि हमलावरों का निशाना काद्री मंजूनाथ मंदिर था।

इसके अलावा पोस्टर में लिखा गया था कि मूर्ति पूजा का विरोध करने वाले लोग पूजा स्थल के पास मेले के दौरान कारोबार नहीं कर सकते। आगे लिखा था कि सिर्फ हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करने वाले व्यापारियों को ही व्यापार करने की अनुमति होगी। हालाँकि पुलिस ने इन पोस्टरों को हटा लिया था और मंदिर प्रशासन की तरफ से भी पोस्टर पर लिखी बातों को खारिज कर दिया गया था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मेले से पहले हिंदू संगठनों की तरफ से एक व्हाट्सएप्प मैसेज भी जारी किया गया था, जिसमें मुस्लिमों को मेले में दुकान न लगाने की बात कही जा रही थी। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के मैसेज वायरल होने के बाद मेले में दुकानों का टेंडर निकालने वाले गणेश शिनोय ने 2 मुस्लिम दुकानदारों के एडवांस लौटा दिए। खबरों की मानें तो एक मुस्लिम व्यक्ति ने विट्टल कस्बे लगे पंचलिंगेश्वर मंदिर मेले में अपनी दुकान लगाई थी, जिसे खाली करा लिया गया।

मेले में 1 किलोमीटर के दायरे में दुकान लगाए जाते हैं। हर साल यहाँ हिंदुओं के साथ साथ मुस्लिमों की भी दुकानें सजती रही हैं। कर्नाटक हिजाब विवाद और देश भर में घटित हो रही घटनाओं को देखते हुए हिंदू संगठनों ने बायकॉट मुहिम चलाई हुई है। जिसके तहत इस तरह की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं।

पिछले साल भी इसी तरह के पोस्टर लगाए गए थे। इसमें मुस्लिम व्यापारियों को कर्नाटक के कई हिस्सों में मंदिरों, त्योहारों और वार्षिक मेलों में स्टॉल लगाने से रोकने की बातें कही गई थी। पोस्टरों में कथित तौर पर लिखा गया था कि गोहत्या में शामिल लोगों को स्थानीय वार्षिक मेलों में व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पोस्टरों में मुस्लिम व्यापारियों को यह कहते हुए चेतावनी भी दी गई थी कि जो लोग देश के कानून का सम्मान नहीं करते हैं उन्हें व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।