Showing posts with label sleeper cells. Show all posts
Showing posts with label sleeper cells. Show all posts

देश को खतरा: आंतरिक या बाहरी

 

दिव्य प्रभात में मुंबई की लेखिका सुश्री दीप्ति डांगे ने शीर्षक "देश को खतरा: आंतरिक या बाहरी" देश की ऑंखें खोलने वाली श्रृंगला का श्रीगणेश किया है। जिसे हर देशप्रेमी को गंभीरता से पढ़ना चाहिए। क्योकि भारत को खतरा किसी दुश्मन यानि पाकिस्तान या चीन से नहीं, बल्कि उनके चांदी के टुकड़ों पर पलने वाले नेता, उनकी पार्टियां एवं उनके समर्थक हैं। स्मरण करो, 1962 में हुई इंडो-चीन लड़ाई, इस युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा था कि भारतीय सैनिकों के लिए पार्टी रक्तदान नहीं करेगी। दूसरे, 1965 में हुआ इंडो-पाक युद्ध, इस युद्ध में कितने ही स्लिपर सेल पकडे गए थे। शायद आज की पीढ़ी को इसका आभास भी नहीं होगा, प्रमाण के तौर पर कांग्रेस द्वारा चीन से गुप्त समझौता(MoU) करना, पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर एवं सर्जिकल स्ट्राइक करने पर विपक्ष का सरकार के साथ खड़ा करने होने की बजाए सबूत मांगना। नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में बने शाहीन बागों में हिन्दुत्व विरोधी नारे, इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर बदनाम हिन्दुओं को करने बेकसूर साधु, संत और साध्वियों को जेलों में बंद करना आदि आदि। 

दूसरे, किसान आंदोलन के नाम पर हुए जमावड़े में दिल्ली दंगों में आरोपितों को जेलों से रिहा करने के प्ले-कार्ड, हाय हाय मोदी तू मर जा, खालिस्तान के झंडे आदि का किसान आंदोलन से क्या मतलब? इतना ही नहीं, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान अनेक गैर-फ़िल्मी गीत जैसे 'कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से...' आदि आज भी सार्थक सिद्ध हो रहे हैं। प्रस्तुत है लेख:- 

किसी भी राष्ट्र की उत्पत्ति के साथ ही उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सर्वोपरि होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा से तात्पर्य राष्ट्र की एकता अखंडता,संप्रभुता एवं नागरिकों के जीवन एवं उनकी संपत्ति की रक्षा करने से है। जिसको सशस्त्र सेनाओं, कानून एवं देश की सरकार के द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इसलिये चाणक्य ने देश पर चार प्रकार के खतरों के बारे में बताया है- आंतरिक,वाह्य,वाह्य रूप से सहायता प्राप्त आंतरिक,आंतरिक रूप से सहायता प्राप्त बाहरी।
जब राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा बाहर से होता है तो वो पूर्ण रूप से राष्ट्रीय रक्षा के क्षेत्र में आता है।आंतरिक खतरा मतलब एक देश की अपनी सीमाओं के भीतर की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों से है।
क्योंकि इसमें बाह्य रूप से सहायता प्राप्त बाहरी खतरा भी शामिल हो जाता है।
ये एक बहुत पुरानी शब्दावली है लेकिन समय के साथ ही इसके मायने बदलते रहे हैं। स्वतंत्रता से पूर्व जहाँ आंतरिक सुरक्षा के केंद्र में धरना-प्रदर्शन, रैलियाँ, सांप्रदायिक दंगे, धार्मिक उन्माद थे तो वहीँ स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं तकनीक विकसित होती प्रणालियों ने आंतरिक सुरक्षा को अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।जो अब पारंपरिक न होकर छदम हो गयी है।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसमे विभिन्न संस्कृतियों, जाति,धर्म, और भाषाओं को बोलने वाले लोग निवास करते हैं। जो जहां भारत को गौरवान्वित करते है वही दूसरी तरफ भारत की भू-राजनैतिक स्थिति, इसके पड़ोसी देश, विस्तृत एवं जोखिम भरी स्थलीय, वायु और समुद्री सीमा के साथ इस देश के ऐतिहासिक अनुभव और गलतियां इसे सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील बनाते हैं। जो देश के लिये एक चुनौती बनती जा रही है
लोकतंत्र जो देश का गहना है धीरे धीरे उसकी चमक खोने लगी है।लोकतंत्र के चारो स्तम्भो को दीमक लग रहा है और वो अपनी मरम्मत का इंतज़ार कर रहे है।जिनको सेवक होना था वो ही स्वयंभू मालिक बन कर सत्ता के अभिमान मे चूर होकर देश का भक्षण करने लगे।
लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर संसद अब एक अखाड़ा बन गया सांसद अपनी मर्यादाएं भूल कर गुंडों की तरह हाथापाई कर संसद को चलने नही दे रहे। और संसद के बाहर कुर्सी के लोभ मे देश को धर्म जाति में बांटकर, घोटाले कर देश देश का धन अपनी तिजोरियों मे भर रहे है।
1947 में देश भले ही आजाद हो गया हो किन्तु गोरे अंग्रेजों के हाथ से निकल कर सत्ता काले अंग्रेजों के हाथ में आ गयी और मनमाने तरीके से सत्ता का संचालन करने लगे। संविधान के नाम पर शपथ लेने वाले संविधान के विरुद्ध कार्ये कर रहे है। देश का कानून आम और खास लोगो के लिये अलग अलग हो गया है,पारदर्शिता का अभाव है,न्यायालयों में नियुक्ति, स्थानांतरण में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे है।कानून आज नेतायों और रसूखदारों की बपौती बन चुका है।।लाइसेंस-कोटा परमिट राज, अक्षम नौकरशाही,आरक्षण और बेलगाम भ्रष्टाचार ने सरकारी व्यवस्था के विरुद्ध माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का दुरूपयोग
‘सबसे ज्यादा’ भारत मे हुआ है। मीडिया आज बिकाऊ हो चुकी है जिनको  अब कई नामो से भी पुकारा जाता है जैसे दरबारी पत्रकारिता, pressitute मीडिया, गोदी मीडिया इत्यादि जो देश में समाधान कम, समस्या ज्यादा पैदा कर रही है जिनके कारण कई स्थानों पर समाज घातक स्थितियां भी निर्मित हो रही हैं। दंगे भी हुए हैं और देश के विरोध में वातावरण बनता हुआ भी दिखाई दिया है।
आरक्षण देश के लिए वो आंतरिक खतरा है जो देश को विकास की ओर नही बल्कि पतन की ओर ले जा रहा है।आरक्षण जो पिछड़ी जातियों, जनजातियों को  देश की मुख्यधारा मे जोड़ने के लिये दिया गया था आज वो एक अधिकार बन गया है।देश के हर वर्ग के लोग आरक्षण की मांग करने लगे है और ये नेतायों की दुकान में सजा सबसे आकर्षक मुद्दा बन गया है।आज हालात ये हो चुके है कि कोई भी नेता अगर इसका विरोध करता है तो इसे राजनीतिक आत्महत्या की तरह देखा जाता है।वोटबैंक के चलते किसी भी सरकार की हिम्मत नही की जातिगत आरक्षण को खत्म कर सके।जिसकी वजह से आरक्षण के चलते योग्य उम्मीदवार का चयन न होकर अयोग्य उम्मीदवार का चयन हो जाता है।

भ्रष्टाचार जो आज हमारे देश के डीएनए मे आ चुका है।जिससे कोई भी अछूता नही है। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार देश की उन्नति में बहुत घातक है।जिससे न केवल देश को आंतरिक बल्कि बाहरी खतरा भी बढ़ जाता है। देश में बेरोजगारी, घूसखोरी, अपराध की मात्रा में दिन-प्रतिदन वृद्धि होती जा रही है।इंसान के लोभी स्वभाव, और कानून के लचीलेपन के कारण देश को ये खोखला करता जा रहा है जिसके कारण दुश्मन देश की सहायता पाकर देश के कुछ लालची और सत्ता को पाने के मोह मे देश को खोखला और अस्थिर कर रहे।जो देश के हित मे बिल्कुल नही है।

आंतकवाद हमारे देश के लिये ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक विकराल समस्या बन चुकी है। देश कई दशकों से आतंकवाद को झेल रहा है।आतंकवादी अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लोगों की निर्मम हत्या करके देश को अस्थिर करना चाहते हैं।आज विश्व इस्लामी आतंकवाद से ग्रस्थ है भारत भी इससे अछूता नही है कई दशकों से देश इस खतरे का सामना कर रहा है।जो पाकिस्तान द्वारा पोषित है।कई आतंकवादी संगंठन जैसे आई एस आई एस (ISIS), अलकायदा,लश्कर-ए-तैयबा,तालिबानी जिनका कार्य धर्म के नाम पर, जाति संप्रदाय के नाम पर देश के लोगो आपस लड़ाना है, उनके बीच मत भेद पैदा करना, अपने धर्म को दुसरे पर थोपना, देश मे अराजकता फैलाना, देश मे आतंकी हमले कर जनता और देश मे डर और भय का माहौल बनाकर देश को अंदर से अस्थिर करना और उनका साथ हमारे देश में कुछ बुद्धिजीवी,पत्रकार,नेता, उद्योगपति, धार्मिक गुरु, संस्थानों के लोग इन आतंकवादियों को आर्थिक और मानव श्रम की मदद करके जिस थाली मे खाते है उसी मे छेद करते है। पाकिस्तान जो आंतकवाद की फैक्ट्री अपने देश और हमारे देश के मुस्लिम युवाओं को हसीन सपनों का लालच देकर उन बच्चों के मानस पटल पर कट्टरपंथी सोच का जाल बुन कर और मानवता को गलत तरीके से पेश करके इनको समाज, समुदाय और राष्ट्र के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। सच्चाई ये है कि आतंकवाद केवल कुछ लोगो या देश की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मानवता और दूसरे देशो के विरुद्ध किया गया विद्रोह है।जो आम जनमानस में और सरकार में दहशत पैदा कर उनपर दवाब बनाकर अपने लक्ष्य या उद्देश्य को पूरा करने के लिए होता है।
नक्सलवाद और उग्रवाद देश की अंदरूनी सुरक्षा के लिए आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक हो चुका है। इनकी विचारधारा तालिबानियों की तरह है।ये लोग चीन के चेयरमैन कामरेड माओत्सेतुंग की माओवादी विचाधारा के अनुयायी होते है।इनको चीन और कई इस्लामिक राष्ट्रों और सामाजिक संस्थायों से सहायता मिलती है। ये लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ होते है।और एक ऐसी तानाशाही व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं जिसमें किसी को उफ़ तक करने की आज़ादी न हो।इनके लिए स्कूलों, विद्युत् उत्पादन केन्द्रों,अस्पतालों, पुलों, सडकों को बम से उड़ा देना,गरीबों और मासूमों की हत्या तालिबानी शैली में करना आम बात है।दुकानदारों, मिल मालिकों, पूंजीपतियों से हफ्ता वसूल करते हैं।ये देश के अल्प विकसित क्षेत्रों में विकासात्मक कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं और लोगों को सरकार के प्रति भड़काने की कोशिश कर उनके हमदर्द बनने का दम भरते हैं।दूसरी तरफ सिविल सोसाइटी, मीडिया, राजनीति, छात्र, सोशल एक्टिविस्ट और अदालतों में इनसे सहानुभूति रखने वाले समर्थक मौजूद हैं जो मानवाधिकार कार्यकर्ता के छद्मवेश में कार्य करते हैं।इन्हें नक्सलवादियों के शिकार लोगों के मानवाधिकारों की चिंता नहीं होती है।इनका काम है नक्सलवादी हत्यारों के मानवाधिकारों की चिंता करना, सिविल सोसाइटी में इनके लिए सहानुभूति और समर्थन जुटाना।
भारत की शिक्षा प्रणाली प्राचीन काल मे इतनी व्यवहारिक,रचनात्मक और आध्यात्मिक थी की, विदेशी लोग भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए यहां आते थे। इसी शिक्षा ने दुनिया को बदलने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।मुस्लिम शासकों के आक्रमणों तथा उनके वर्चस्वस्थापित होने के फलस्वरूप पूरे देश में प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का हास होने लगा एवं मुस्लिम शिक्षा का बोल बाला हो गया।मुगलों के पतन के बाद भारत में ब्रिटिश शासकों ने अपना प्रभुत्व स्थापित किया और इसी के साथ यहाँ आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत हुई।मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो भारत कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से भारतीय लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे,मैकाले की 179 साल पहले की गयी उसकी भविष्यवाणी वर्तमान में सही साबित हो रही है।
जब भारत आजाद हुआ, तब हमारे स्वतंत्रता सेनानी का ध्यान सबसे पहले अंग्रेज़ो की आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर गया।क्योकि अंग्रेज़ो की आधुनिक शिक्षा प्रणाली हमारे देश के लिए अनुकूल नहीं थी। सुधारों के दृष्टिकोण से समय – समय पर कई शिक्षा आयोगों बने एवं उनके सुझावों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में सुधार एवं परिवर्तन किये गये।
लेकिन मूल ढांचे में विशेष परिवर्तन नहीं हो पाया और शिक्षा का सही उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया।आज भी हमारी शिक्षा उन्हें विविध विषयों का सैद्धान्तिक ज्ञान तो देती है, जिससे हम नौकरी करने तक ही सीमित हो गए है।ये शिक्षा किसी प्रकार से स्वावलम्बी नहीं बना पाती है। जिसके कारण हम आज भी मानसिक तौर पर गुलाम ही बने हुए है जो हमारे युवायों को राष्ट्रभक्त नही बना सकती।इसीलिए तो पुर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम जी ने कहा था की, भारतीय शिक्षा प्रणाली को पूर्ण रूप से सुधार करने की आवश्यकता है । लेकिन हम ने आज तक इसमे कोई बदलाव नहीं किया। जबकि विश्व के कई विकसित देश अपने स्कूल मे पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम को हर 2 साल मे बदल देते हे । परंतु भारत मे बदलाव ना करने की वजह से हमारा पाठ्यक्रम बहुत पुराना हो चुका।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है लेकिन वामपंथी या साम्यवादी जो देश के अंदर सिर्फ चीन और रूस के एजेंट की तरह कार्य कर देश की जड़ों को कमजोर करते है।इन्होंने भी अंग्रेजो की नीति अपनाकर देश की शिक्षा व्यवस्था पर अपना अधिकार किया और भारतीय इतिहास लेखन में गलत तथ्य पेश कर भारत के स्वर्णिम इतिहास को खत्म कर मुस्लिम लुटेरों और अंग्रेजो का गुणगान किया। जिसका मूल उद्देश्य लोगों को गलत इतिहास पढ़ा कर देशवासियो में हीन भावना भर देश की मानसिकता को कमजोर करना ताकि चीन और रूस जैसे देश भारत पर अप्रत्यक्ष रूप से शासन कर सकें, यह कभी भी देश के उत्थान की बात नहीं कर सकते है, नक्सलवाद का जनक ही वामपंथ विचारधारा से हैं।जबतक भारत में वामपंथ खत्म नहीं होगा तब तक नक्सलवाद और आतंकवाद से हम निजात नहीं पा सकते है। (साभार: दिव्य प्रभात)

NIA की गिरफ्त में तानिया परवीन: हाफिज सईद को करती थी रिपोर्ट

तानिया परवीन, NIA
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब कभी इंडो-पाक युद्ध या पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कार्यवाही, भारत में पल रहे पाकिस्तान के स्लीपर सैल्स हरकत में आ जाते हैं। और ये स्लीपर सामान्य जनजीवन से लेकर सियासत तक में फन फैलाए बैठे हैं। "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले यही स्लीपर सैल्स हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो किस धर्म अथवा जाति से हैं। 
ज्ञात हो, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान भारत सरकार को दो स्तर यानि सीमा और देश के अंदर लड़ाई लड़नी पड़ी थी। घरों से ट्रांसमीटर पकडे गए थे, लेकिन ताशकंत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन ने उन सभी देशद्रोही को आज़ाद कर दिया। परन्तु वर्तमान सरकार पाकिस्तान से कोई युद्ध करने से पूर्व ही देशद्रोहियों पर नकेल डाल रही है। सरकार को उस समय की फाइल भी खोलनी होगी, ताकि उन पर भी नकेल डाली जा सके। 
तानिया परवीन को शुक्रवार (जून 12, 2020) को केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अपनी हिरासत में ले लिया। वह दमदम सेंट्रल जेल में बंद थी। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया से लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
NIA की पूछताछ में तानिया से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकती है, जिसका खुलासा उसने अब तक नहीं किया है। उसने बंगाल समेत किन-किन राज्यों में कितने स्लीपर सेल तैयार किए हैं इसका भी पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही NIA उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसने सेना के कितने कर्मचारियों को हनीट्रैप में फँसाया था एवं उसके इस अभियान में और कौन-कौन शामिल हैं।
तानिया परवीन को 20 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जाता है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत में आई थी। वह लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जाती है। 
तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी।

वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।
पश्चिम बंगाल की सोशल टास्क फोर्स द्वारा पूछताछ में पता चला था कि आतंकी तानिया परवीन के व्हाट्सप्प ग्रुप में हाफ़िज़ सईद के दो करीबियों के नंबर मिले थे। इन्हीं दोनों के माध्यम से मुंबई हमले का मास्टरमंड तानिया को सन्देश भेजा करता था। तानिया को हवाला का जरिए रुपए भी भेजे गए थे। गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा था।
तानिया का मुख्य लक्ष्य इस्लामिक राज्य की स्थापना करना था। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी।
तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।
3 साल से लश्कर से जुडी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी। तानिया अक्सर मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।
उसका उद्देश्य युवाओं, ख़ासकर छात्र-छात्राओं को कट्टरपंथी बना कर उन्हें आतंकी संगठनों से जोड़ना था। तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। 

कर्नाटक: कलबुर्गी में दीवार पर लिखे ‘पाकिस्‍तान जिंदाबाद’ के नारे और मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी

कलबुर्गी में घर की दीवार पर लिखे गए पाक समर्थित नारे (फोटो साभार: The Hindu)
कर्नाटक के कलबुर्गी में रविवार (मार्च 1, 2020) की सुबह पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे और दीवार पर मोदी विरोधी टिप्पणी करने की एक और घटना सामने आई है। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसके पीछे जिम्मेदार अपराधियों को पकड़ने के लिए जाँच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक कलबुर्गी के हफ्त गुम्बज इलाके के एक स्थानीय निवासी किशन राव हगरगुंडगी के घर की दीवार पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का विवादास्पद नारा लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा अज्ञात बदमाशों ने दीवार पर चारकोल से पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हुई थी। मकान में रहने वाले किराएदार मनोज चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 153B, 124A, और 505 (2) के तहत चौक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस से तुरंत कारर्वाई की माँग करने के साथ ही पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों। पुलिस ने स्थानीय लोगों को इसका आश्वासन दिया और फिर दीवार पर लिखे हुए शब्दों को मिटा दिया। 
इस घटना के सामने आने के बाद बीजेपी नेता दिव्या हगारगी ने चौक पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया। उन्होंने और भाजपा की अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की माँग की। दिव्या ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि 15 फरवरी को कलबुर्गी में आपत्तिजनक भाषण दिया था तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हेने के बाद ही मामला दर्ज किया गया था।
कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के हुबली ग्रामीण तालुक के बुदरसिंगी गाँव में एक स्कूल की दीवारों पर पाकिस्तान समर्थक नारे लिखे गए थे। बताया जा रहा है कि शिक्षकों और छात्रों ने स्कूल की दीवारों पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘टीपू सुल्तान शाले’ लिखा था।
वहीं पिछले दिनों वामपंथी कार्यकर्ता अमूल्या लियोना ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बेंगलुरु में आयोजित AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की रैली में मंच से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे। फिलहाल वो देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद है। अमूल्या के गिरफ्तारी के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अमूल्या ने हाल ही में खुलासा किया है कि वो एक पेड प्रोटेस्टर है। उसने पुलिस को बताया कि पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू होने के बाद से सीएए के विरोध में रैली आयोजित करने वाले आयोजक उसका खर्च उठा रहे हैं।