Showing posts with label south korea. Show all posts
Showing posts with label south korea. Show all posts

दक्षिण कोरिया : एक रहस्यमयी चर्च, एक ‘अमर’ पादरी और कोरोना के 7500 मामले

शिनचेओंजी चर्च, ली मैन ही, कोरोना वायरस
कोरोना वायरस के प्रसार में चर्च का रोल सामने आने के बाद प्रार्थना करते चर्च के 88 वर्षीय संस्थापक ली मैन ही
दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के ख़तरे के लिए एक चर्च को दोष दिया जा रहा है। एक ‘कल्ट’ चर्च, जो दक्षिण कोरियाई लोगों के गुस्से का शिकार बना है। अब तक दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के लगभग 7500 मामले सामने आ चुके हैं और यहाँ के लोगों में भगदड़ मची हुई है। अधिकांश मरीजों का किसी न किसी रूप में ‘शिनचेओंजी चर्च ऑफ जीसस’ से कनेक्शन निकल कर सामने आ रहा है। दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी शहर दाएगू में 25 लाख लोग रहते हैं। आशंका जताई गई है कि शिनचेओंजी चर्च के पादरी समूह के एक 61 वर्षीय व्यक्ति ने प्रेयर के दौरान बाकी लोगों को भी संक्रमित कर दिया। उसे ‘पैशेंट नंबर- 31’ का नाम दिया गया है।
कोरिया के स्वास्थ्य विभाग ने इस बात की पुष्टि की है कि अब तक देश में आए कोरोना वायरस के कुल मामलों का 63.5% शिनचेओंजी से जुड़ा हुआ है। यहाँ 15 अप्रैल को संसदीय चुनाव भी होने वाले हैं और राष्ट्रपति मून जे इन ने कोरोना वायरस के खतरों को हलके में लेते हुए बयान दिया था कि ये जल्द ही गायब हो जाएगा। दक्षिण कोरिया में लोगों का गुस्स्सा स्वाभाविक है क्योंकि चीन के बाद कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मरीज इसी देश में हैं। शिनचेओंजी की कुछ रीतियाँ भी इन सबके लिए जिम्मेदार बताई जा रही हैं।
ये चर्च ‘सीक्रेसी’ के नियमों का पालन करता है। इसने फेस मास्क पर बैन लगा दिया था जबकि मास्क लगाने की सलाह डॉक्टरों ने दी है ताकि कोरोना वायरस के बचाव के लिए सावधानी अपनाई जा सके। इसके अलावा इस चर्च में एक जगह सबके साथ रह कर प्रेयर करने का रिवाज रहा है, जिसके लिए लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। कोरोना वायरस के फ़ैलाने के आलोक में दुनिया भर के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ‘सोशल डिस्टन्सिंग’ का पालन किया जाए और लोग किसी भी गैदरिंग का हिस्सा न बनें।
चर्च के संस्थापक ली मैन ही को लोग दक्षिण कोरिया के एक महान राजा का वंशज मानते हैं, जिसने सैकड़ों वर्ष पहले राज किया था। बाइबल के सीक्रेट कोड्स को वही समझ और समझा सकते हैं, ऐसा लोगों का मानना है। 88 वर्षीय ली पर आरोप है कि वो और चर्च के सैकड़ों लोग स्वास्थ्य विभाग की जद से भागते रहे, जिस कारण कोरोना वायरस काफ़ी तेज़ी से फैला। आरोप है कि चर्च के अधिकतर संक्रमित लोग छिप गए और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया। ली पर हत्या का मुकदमा चल सकता है क्योंकि आरोप है कि सबकुछ जानबूझ कर किया गया।

चर्च ने अपने सदस्यों की सूची भी सरकार द्वारा माँगने पर नहीं सौंपी। ली ने मास्क पहन कर एक सभा को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने बताया कि चर्च से इतने सारे मरीजों के जुड़े होने की ख़बर सुन कर वो दुःखी हैं। पहले उन्होंने दावा किया था कि कोरोना वायरस उस दुष्ट शक्तियों द्वारा लाया गया है, जो शिनचेओंजी के तेज़ी से होते विकास से जलन में डूबा हुआ था। अब उन्होंने माफी माँगी है लेकिन जानबूझ कर सरकार का सहयोग न करने वाले आरोपों से इनकार किया है। वो कहते रहे हैं कि उनका चर्च कोई त्रादितुईवाल चर्च नहीं है और बाकी चर्चों के दबाव के बावजूद ‘शिनचेओंजी समूह’ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
चर्च ने भी अब आलोचना से बचने और जवाब देने के लिए ‘COVID-19 फैक्ट चेकर‘ नाम से पेज बनाया है, जहाँ दावा किया गया है कि चर्च इस वायरस को लेकर गंभीर है और 5 मार्च को उसने इससे लड़ने के लिए 1 करोड़ डॉलर की सहायता भी की है। चर्च ने बताया कि ये रुपए जमा नहीं किए गए बल्कि चर्च के कोष की तरफ़ से दिए गए। उसने आरोप लगाया है कि चर्च के कुछ सदस्यों को उनके कंपनियों ने निकाल दिया, कुछ को उनकी पत्नियों ने गालियाँ दी।
इन्हीं कारणों से ‘पेशेंट संख्या- 31’ को कोरोना वायरस का ‘सुपरस्प्रेडर’ कहा जा रहा है। मिस्टर ली बाइबिल को अपनी भाषा में समझाते हैं और चर्च के अनुयायियों से कहा गया था कि उन्हें किसी भी बीमारी से डरने की ज़रूरत नहीं है और इसीलिए मास्क वगैरह जैसे विशेषज्ञों की अन्य सलाहों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कुछ लोग तो ये भी मानते हैं कि कहीं चर्च ने इस वायरस को जानबूझ कर तो नहीं फैलाया, ताकि ‘क़यामत’ सम्बन्धी बातों को सच साबित किया जा सके।
2019 में इस चर्च के अनुयायियों की संख्या काफ़ी तेज़ी से बढ़ी थी। कई अन्य देशों में भी इस चर्च ने अपनी शाखाएँ खोल रखी हैं। उनका वुहान में भी एक ब्रांच है, जहाँ से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला। कहा जा रहा है कि इस चर्च के लोग दो बार पहले भी ऐसी बीमारियाँ फैलाने का प्रयास कर चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में इसके लोग काफ़ी यात्राएँ कर रहे थे। कुछ लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि इस चर्च का ईसाइयत से कोई लेना-देना है ही नहीं और जीसस क्राइस्ट के नाम पर ली मैन ही अपने विचारों को फैला रहे हैं और थोप रहे हैं। उनका तो यहाँ तक दावा है कि वो अमर हैं।

ली मैन ही बताते हैं कि उन्हें सीधा जीसस द्वारा भेजा गया है और बाइबिल को सही से वही समझा सकते हैं। हालाँकि, ईसाईयों का अन्य समूह उनकी इस बात को पूरी तरह नकार देता है। दक्षिण कोरिया में हॉस्पिटलों में जगह नहीं बची है और कई मरीजों को ही वापस भेज दिया गया, जिससे घर में ही उनकी मौत हो गई। ऐसे में एक चर्च की उलटी-सीधी हरकतों और अजीबोगरीब विचारों के कारण जो खतरा और बढ़ गया है, उससे लोग गुस्से में हैं। इस चर्च के लाखों सदस्य हैं और कई तो सार्वजनिक रूप से ऐसा जाहिर ही नहीं करते लेकिन प्राइवेट में चर्च के अनुयायी के रूप में काम करते हैं। इसे ही शायद इनलोगों ने ‘सेक्रेसी’ कहा है।
लोग विरोध कर रहे हैं। वो कह रहे हैं कि शिनचेओंजी चर्च को बंद किया जाए और इसके सभी सदस्यों की जाँच की जाए। चर्च के संस्थापक ने अपने सभी अनुयायियों को एक पत्र लिख कर कहा है कि उनका विश्वास नहीं डिगना चाहिए, वो सभी ठीक हो जाएँगे। फ़िलहाल इस अन्धविश्वास से खतरा दक्षिण कोरिया में कई गुना बढ़ गया है, जिसे अगर ये चर्च चाहता तो रोक सकता था लेकिन उसने सरकार का सहयोग नहीं किया।
सबसे खतरनाक बात तो ये है कि ली मैन ही एक नई दुनिया बनाने की बात करते हैं, एक नए स्वर्ग की बात करते हैं। उस ‘नई पृथ्वी’ और ‘नए स्वर्ग’ में केवल उनके अनुयायी ही जाएँगे, ऐसा उनका वादा है। ऐसे में ये सवाल भी जायज है कि क्या ये चर्च सचमुच जीसस के नाम पर जनता के बीच डर फैलाने के लिए बीमारियों का सहारा ले रहा है, ताकि ‘क़यामत’ का डर दिखा कर लोगों को अपना अनुयाई बना सके। सवाल तो ये भी है कि कहीं ‘दूसरी दुनिया’ में जाकर जान बचाने की लालच को बढ़ावा देने के लिए तो कहीं ऐसा नहीं किया जा रहा?

दक्षिण कोरिया में भारत और मोदी विरोधी नारे, जाकर भिड़ गईं शाजिया इल्मी

Shazia Ilmiसियोल: दक्षिण कोरिया के सियोल में शुक्रवार(अगस्त 16) को भारत विरोधी नारे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक भाषा का उपयोग करने वाले लोगों के एक समूह को शाजिया इल्मी सहित भाजपा और आरएसएस नेताओं के एक समूह का आमना-सामना करन पड़ा। ANI के एक वीडियो में पाकिस्तान के झंडे लिए लोगों का एक समूह भारत विरोधी और मोदी विरोधी नारे लगाते हुए दिखता है।
3 मिनट 25 सेकंड के वीडियो में शाजिया इल्मी के साथ कुछ अन्य लोगों को एक टैक्सी से निकलते हुए और समूह की ओर बढ़ते हुए देखा जा सकता है। इस समूह के सदस्य 'हक है हमारी आजादी' और 'हम ले के रहेंगे आजादी' जैसे नारे लगा रहे हैं। बीजेपी नेता इल्मी उनसे प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का उपयोग नहीं करने का अनुरोध करती हैं।
 
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने भारत को 'आतंकवादी' कहना शुरू कर दिया, जिस पर भाजपा नेता और उसके साथ मौजूद अन्य लोग भारत जिंदाबाद ने नारे लगाने लगे। स्थानीय पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उस जगह से शाजिया और उनके सहयोगियों को निकाला। भारत और मोदी के खिलाफ ये प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को लेकर है।
 
इस वाक्ये पर शाजिया ने कहा, 'ग्लोबल सिटीजन फोरम के प्रतिनिधिमंडल के रूप में यूनाइटेड पीस फेडरेशन सम्मेलन के लिए मैं और 2 अन्य सियोल में थे। सम्मेलन के बाद हम अपने राजदूत से मिलने के लिए भारतीय दूतावास गए। रास्ते में हमने एक अनियंत्रित भीड़ द्वारा पाकिस्तानी झंडे लिए, भारत और हमारे पीएम के खिलाफ एक आक्रामक विरोध देखा। वे मोदी को आतंकवादी, भारत को आतंकवादी कहते रहे। हमें लगा कि हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें कहें कि हमारे देश या हमारे पीएम को गाली न दें।'

इसके लिए शाजिया इल्मी की जमकर तारीफ भी हो रही है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, '3 बनाम 300। कल 16 अगस्त तीन हिंदुस्तानी नागरिकों ने 300 पाकिस्तानी भीड़ को  कोरिया की राजधानी सियोल में चैलेंज किया। एक उग्र पाकिस्तानी भीड़ काले झंडे और शर्मनाक पोस्टर लिए हुए धारा 370 हटाने के विपक्ष में एक अभद्रता पूर्ण प्रदर्शन कर रहे।'

UAE के बाद अब रूस ने मोदी को दिया देश का सर्वोच्च सम्मान

UAE के बाद अब रूस ने पीएम मोदी को दिया देश का सर्वोच्च सम्मान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में विरोधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर नितरोज कोई न कोई आरोप लगा रहे हैं, वही दूसरी ओर विश्व उसी मोदी को एक के बाद एक पुरस्कारों से अलंकृत कर रहे हैं। यह उन सभी विरोधियों के लिए शर्म की बात है, जो अमेरिका को पत्र लिखते थे कि "गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को वीजा मत दो।"
मेरे अल्प ज्ञान के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शायद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें इतने कम समय में इतने विदेशी पुरस्कारों से सुशोभित किया गया हो। यह उनकी कूटनीति, विदेश नीति और कठोर परिश्रम का परिणाम है। 
फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की 1555 की भविष्यवाणी चरितार्थ होती प्रतीत हो रही हैं कि "2014 में तीन समुद्रों(भारत) से घिरे देश को ऐसा अधेड़ उम्र का कठोर नेता मिलेगा, जो विदेशों में देश का नाम चमकाएगा...।" तथास्तु !!! 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान मिला है। उन्हें ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रू द एपोस्टल अवॉर्ड दिया गया है। इसे रूस का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है और यह दो देशों के बीच सामाजिक और रणनीतिक साझेदारी को अद्वितीय बढ़ावा देने के लिए दिया जाता है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान जायद मेडल देने की घोषणा की है। अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में यूएई के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद ने ट्वीट में लिखा था- भारत के साथ यूएई के घनिष्ट संबंध हैं। इसमें मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अहम भूमिका रही है। इसके लिए यूएई के राष्ट्रपति उन्हें जायद मेडल प्रदान करते हैं।
यह यूएई का सबसे बड़ा सम्मान है, जो राजाओं, राष्ट्रपतियों और राष्ट्राध्यक्षों को ही दिया जाता है। मोदी पहले भारतीय, जिनको यह सम्मान मिला है। इससे पहले यह सम्मान एलिजाबेथ, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, व्लादिमीर पुतिन, निकोलस सरकोजी, शी चिनफिंग और एंजेला मार्केल को दिया है।
साउथ कोरिया और यूएन से भी मिला है सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश में कद किस तरह बढ़ा है, इसकी तस्दीक संयुक्त राष्ट्र और दक्षिण कोरिया से मिले सम्मान जाहिर करते हैं। प्रधानंमत्री मोदी को अक्टूबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार 'चैंपियंस ऑफ अर्थ द अवॉर्ड’' से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटारेस ने पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड से सम्मानित किया।
इससे बाद फरवरी में दक्षिण कोरिया ने पीएम मोदी को 2018 का सियोल शांति सम्मान दिया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी के योगदान को मान्यता देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। दक्षिण कोरिया मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत और स्टार्ट अप इंडिया का महत्वपूर्ण साझीदार है।(एजेंसीज इनपुट्स)