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CBI ने किया खुलासा; रशीदा ने सेक्स करने से मना करने पर केरल के पुलिसवाले ने ISRO वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जासूसी के झूठे केस में फँसाया: कहा- जासूसी से नहीं था कोई लेना-देना

मरियम रशीदा से शारीरिक संबंध नहीं बना सकने पर पुलिस अधिकारी ने नम्बी नारायणन को फँसाया (साभार: OManorama/Instagram)
CBI ने 1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर लगे विदेशी जासूस होने के आरोप के मामले में अब तिरुवनंतपुरम स्थित चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष 27 मार्च, 2024 को अंतिम चार्जशीट दायर की, जो बताता है कि कैसे एक IPS अधिकारी ने अपनी हवस के कारण बदले की पूरी साजिश रची और एक देशभक्त वैज्ञानिक को फँसा दिया। केरल का उक्त स्पेशल ब्रांच सर्किल इंस्पेक्टर S विजयन फ़िलहाल बरख़ास्त है। उसने मालदीव की एक महिला मरियम रशीदा को 1994 में 2 बार गिरफ्तार किया था।

इसने लिए उसने गलत इरादों से फर्जी रिपोर्ट दायर की थी। 20 अक्टूबर, 1994 को उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। तब उस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रुकने का आरोप था। उसकी पुलिस हिरासत खत्म होने से 1 दिन पहले S विजयन ने उसके व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर उन्हें जासूस ठहरा दिया। इस तरह मरियम रशीदा 13 नवंबर को फिर गिरफ्तार की गई। विजयन ने अपनी पहली रिपोर्ट में बताया था कि 13 सितंबर से मरियम रशीदा तिरुवनंतपुरम के एक होटल में रह रही हैं।

 पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि विदेशी नागरिकों की रूटीन चेकिंग के दौरान उसे ये पता चला था। कुछ दिनों बाद वो मरियम रशीदा के उस घर में गया, जहाँ वो होटल से निकलने के बाद रह रही थीं, जहाँ उसने पाया कि उनका वीजा 17 अक्टूबर, 1994 को ही एक्सपायर हो चुका है। विजयन का कहना था कि मरियम रशीदा इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं कि भारत में रुकने के लिए उनके पास पैसे कहाँ से आ रहे हैं और वो फोन पर किन लोगों से क्या बात करती हैं।

इंस्पेक्टर ने इसे गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार माना। हालाँकि, CBI जाँच में सामने आया कि विजयन ने फर्जी कहानी रची थी। इस कहानी में केवल यही बात सत्य है कि मरियम रशीदा और एक अन्य मालदीवियन महिला फौजिया हसन तिरुवनंतपुरम के उक्त होटल में रुकी हुई थीं। असल में विजयन उनके पास नहीं गया था बल्कि मरियम रशीदा ही उसके सामने पहुँची थीं। 10 अक्टूबर को वो अपने वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुँची हुई थीं।

17 अक्टूबर, 1994 को उनकी श्रीलंका के लिए फ्लाइट थी। कमिश्नर के दफ्तर में ही उसे CI विजयन के केबिन में जाने के लिए कहा गया और विजयन ने उसका वीजा और विमान टिकट अपने पास रखते हुए बाद में आने के लिए कहा। 13 अक्टूबर को S विजयन उसके होटल और 20 अक्टूबर को उसके घर पहुँचा। उसने फौजिया हसन को बाहर जाने के लिए कहा और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहाँ उसने मरियम रशीदा के साथ जोर-जबरदस्ती की।

जब मरियम रशीदा ने विजयन के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया तो वो वहाँ से जल्दी-जल्दी में निकल कर चला गया। इसे अपना अपमान समझ कर उसने उनका वीजा और टिकट्स नहीं लौटाए। मज़बूरी में मरियम रशीदा को यहाँ रुकना पड़ा और इसी को आधार बना कर विजयन ने उसके खिलाफ मामला चला दिया। उसके बारे में खोद-खोद कर जानकारियाँ निकालने लगा, जिस क्रम में उसे पता चला कि वो ‘लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम्स सेंटर (LPSC)’ के वैज्ञानिक D शशिकुमारन से संपर्क में हैं।

उसने तत्कालीन सिटी पुलिस कमिश्नर VR राजीवन को इसकी रिपोर्ट सौंपी। IB को सूचित किया गया, लेकिन जाँच एजेंसी को कुछ गड़बड़ मिला ही नहीं। फिर पुलिस कमिश्नर ने ISRO के गुप्त राज़ चोरी होने की खबरें मीडिया में प्लांट करवाईं। मरियम रशीदा को दोबारा जिस रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, उसमें विजयन ने लिखा था कि दोनों महिलाएँ देश-विदेश में कई लोगों से मिल कर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम कर रही हैं, इससे भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ जो संबंध हैं उस पर असर पड़ सकता है।

CBI ने इस रिपोर्ट को भी गलत बताया। विजयन ने अपनी रिपोर्ट का स्रोत बताया ही नहीं। असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह पर उसने दूसरी गिरफ्तार की बात कही, लेकिन हबीब पिल्लई ने नकार दिया कि उन्होंने ऐसी कोई सलाह दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि मरियन रशीदा से बदला लेने के लिए फर्जी मामले बनाए गए थे। यहाँ तक कि कुछ IB अधिकारी भी इसमें लिप्त पाए गए। जाँच एजेंसी द्वारा पूछताछ वाली 4 रिपोर्ट CBI के समक्ष आई, किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं थे।

केरल पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जो लोगों के बयान थे, उसके भी सिर का पाँव की कोई थाह नहीं थी। यानी, केरल पुलिस की रिपोर्ट भी फर्जी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि मरियम और फौजिया ने कबूल किया है कि वो दोनों D शशिकुमारन के अलावा रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी Glavkosmos के बेंगलुरु में स्थित एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं और उन्होंने विदेश में कुछ ‘महत्वपूर्ण जानकारियाँ’ भेजीं, लेकिन, केस डायरी में ये नहीं लिखा था कि वो इन्फॉर्मेशन क्या था जिसे विदेश पहुँचाया गया।

खास बात ये है कि उस दिन दोनों महिलाओं से पूछताछ हुई ही नहीं थी। इन्हीं में से एक हस्ताक्षर-विहीन रिपोर्ट में नम्बी नारायणन का भी नाम था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसने CBI को बताया कि उसे इंटेररोगेशन रूम के आसपास भी फटकने नहीं दिया जाता था। SIT के मुखिया सीबी मैथ्यूज ने उन्हें बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी थी, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। केरल पुलिस को पता था कि सारे बयान और सबूत फर्जी हैं, फिर भी इस मामले में वो आगे बढ़ती रही।

वांचियूर पुलिस थाने में मरियम रशीदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। फौजिया हसन को भी गिरफ्तार किया गया था। D शशिकुमारन, K चंद्रशेखर और नम्बी नारायणन के अलावा बेंगलुरु स्थित लेबर कॉन्ट्रैक्टर सुधीर कुमार शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। अंततः 1994 में ही दिसंबर में CBI ने मामले को हाथ में लिया। अप्रैल 1996 में एर्नाकुलम के CJM के समक्ष दायर रिपोर्ट में ही CBI ने बता दिया था कि आरोपितों के खिलाफ जो आरोप हैं वो साबित नहीं हो रहे।

अप्रैल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा दोबारा जासूसी काण्ड की जाँच वाले निर्णय को रद्द कर दिया। जून 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी की सरकार ने CBI द्वारा दोषी पाए गए तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। सिरांबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए केरल सरकार को आदेश दिया। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI से केरल पुलिस के 7 और IB के 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

इस मामले में नम्बी नारायणन को 1996 में जाकर राहत मिली थी, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इसके बाद नम्बी नारायणन ने काफी लंबी लड़ाई लड़ी। उन्हें भारत सरकार ने मुआवजा भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार को भी उन्हें मुआवजा देना पड़ा। मोदी सरकार ने नम्बी नारायणन को 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वहीं, एक्टर-डायरेक्टर आर माधवन ने नम्बी नारायणन की जिंदगी पर नम्बी-द रॉकेट इफेक्ट नाम की फिल्म भी बनाई थी, जिसके राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

केरल : झकझोर कर रख देगी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’; लव जिहाद में फंसी 32 हजार हिंदू लड़कियां गायब, इस्लामिक आतंकवाद में झोंकी गई


लव जिहाद, जबरन धर्म परिवर्तन, आईएस के लिए आतंकी भेजने, अरब देशों से फंड जुटाने के मामलों को लेकर अब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लग चुका है और उसके देश विरोधी कारनामे पर लगाम लगाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। कभी SIMI (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया) के नाम से तो कभी PFI के नाम से मुस्लिम कट्टरपंथी अपने नापाक इरादे और गजवा-ए-हिंद के नाम पर देश में जिहाद कर दहशत पैदा करते रहे हैं। SIMI को बैन किया गया तो PFI खड़ा हो गया। अब PFI को भी बैन कर दिया गया है तो कुछ दिन बाद कोई दूसरा संगठन दिखाई देगा। ये संगठन जिहाद की आड़ में लव जिहाद, धर्मांतरण का खुला खेल देशभर में खेल रहे हैं। इसकी खबरें यदाकदा आती ही रहती हैं। लेकिन केरल में लव जिहाद और धर्मांतरण के जरिये 32 हजार हिंदू लड़कियां पिछले कुछ सालों में गायब हो गई हैं। यह अपने आप में दिल दहलाने वाला है। पहले लड़कियों को लव जिहाद में फंसाया गया फिर धर्मांतरण किया गया और उसके बाद उन्हें आतंकवादी संगठन ISIS को सुपुर्द कर दिया गया। यह काफी गंभीर मसला है। देश की बेटियों को लव जिहाद से सावधान रहने की जरूरत है। केरल में लव जिहाद पर फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ बनी है जो कि पांच मई को रिलीज होगी।

केरल में 10 साल में 32 हजार लड़कियों को इस्लाम में धकेला गया

वर्ष 2021 में सिट्टी मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा था कि केरल से 32,000 लड़कियों के गायब होने के ये आंकड़े उनके नहीं हैं। वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के साथ अपनी बातचीत के आधार पर केरल में हिंदू और ईसाई लड़कियों के 32,000 जबरन धर्मांतरण की संख्या तक पहुंचे। सेन के अनुसार, ओमन चांडी ने कहा था कि “हर साल लगभग 2,800 से 3,200 लड़कियां इस्लाम अपना रही हैं। इस तरह 10 साल में ये संख्या 32,000 तक पहुंच गई।

लव जिहाद में फंसकर केरल से 32 हजार हिंदू लड़कियां गायब

हाल की एक जांच के अनुसार, 2009 से केरल और मैंगलोर की लगभग 32,000 हिंदू और ईसाई समुदायों की लड़कियों को लव जिहाद में फंसाया गया और फिर इस्लाम में परिवर्तित किया गया। पहले इन्हें लव जिहाद के ट्रैप में फंसाया गया, उसके बाद धर्मांतरण कर मुसलमान बना दिया गया। ये लड़कियां नर्स बनकर अपना जीवन सुखमय बिताना चाहती थीं लेकिन अब वह आतंकवादी बन गई हैं। लव जिहादियों ने उन्हें अपने जाल में फंसाने और मुसलमान बनाने के बाद सीरिया, अफगानिस्तान के आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस और हक्कानी जैसे आतंकवादी संगठनों के हवाले कर दिया।

हिंदू लड़कियों को आतंकवाद की आग में झोंकने की मार्मिक कहानी

 बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का ट्रेलर 26 अप्रैल, 2023 को रिलीज किया गया। सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म का ट्रेलर 2 मिनट 45 सेकंड का है। इसमें केरल की महिलाओं की तस्करी और धर्मांतरण कराकर उन्हें आतंकवाद की आग में झोंकने की कहानी को मार्मिक तरीके से पेश किया गया है। यह फिल्म 5 मई 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

केरल से गायब हुईं लड़कियां कभी नहीं लौटीं घर

फिल्म के सिंपल लेकिन लोगों को हिला कर रख देने वाले इस टीज़र ने एक महिला की कहानी दिखाई है जो नर्स बनने का सपना देखती थी, लेकिन उसे उसके घर से अपहरण कर लिया गया था और अब अदा शर्मा द्वारा निभाई गई आईएसआईएस आतंकवादी के रूप में अफगानिस्तान में जेल में बंद है। यही कहानी 32 हजार गायब हुई हिंदू लड़कियों की हैं जो लव जिहाद में फंसकर आखिरकार आतंकवादी संगठनों के चंगुल में पहुंच चुकी हैं।

लड़कियों को इस्लाम अपनाने के लिए किया जाता है ब्रेनवॉश

द केरला स्टोरी की ट्रेलर शालिनी उन्नीकृष्णन नाम की एक हिंदू महिला की कहानी से शुरू होती है। शालिनी अपने चार अन्य दोस्तों के साथ रह रही है। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे अदा की एक दोस्त आईएसआईएस में भर्ती करती है और कैसे वह दूसरी लड़कियों को इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश करती है। ट्रेलर में और भी बहुत कुछ है जो लोगों का मन विचलित कर रहा है।

4 साल के व्यापक और गहन रीसर्च के बाद बनी फिल्म

ज्यादातर लोग इस तरह के सबजेक्ट से कतराते हैं लेकिन निर्माता विपुल अमृतलाल शाह इस भयानक कहानी को 4 साल के व्यापक और गहन रीसर्च के साथ बड़े पर्दे पर लाने के लिए दृढ़ थे। निर्देशक सुदीप्तो सेन ने स्टेट और यहां तक ​​कि अरब देशों की यात्रा की, स्थानीय लोगों और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की और निष्कर्षों से हैरान रह गए। अपने पहले के बयान में विपुल ने साझा किया था, “मैं पहली नरेशन मीटिंग में ही रो रहा था।”

अच्युतानंदन ने कहा- पॉपुलर फ्रंट केरल को इस्लामी राज्य बनाना चाहता

केरल राज्य की हजारों बेटियां दिन ढले गायब होती रही हैं और ये सिलसिला पिछले 12 साल से चला आ रहा है। फिल्म के टीजर की शुरुआत 2006 से लेकर 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे वी एस अचुतानंदन के एक कथित बयान से होती है जिसमें वह कहते दिख रहे हैं, ‘पॉपुलर फ्रंट केरल को एक इस्लामी राज्य बनाने के लिए प्रयत्नशील है। प्रतिबंधित संगठन एनडीएफ की तरह इनका ध्येय भी अगले 20 साल में केरल को मुस्लिम राज्य में परिवर्तित कर देना है।’ अमृता टीवी के सौजन्य से हासिल इस वीडियो क्लिप की तारीख 24 जुलाई 2010 की बताई गई है।

इस्लामिक युद्ध क्षेत्रों में हजारों लड़कियों की तस्करी हुई

फिल्म के टीजर में कहा गया है कि बीते 10 साल में आईएसआईएस और दूसरे इस्लामिक युद्ध क्षेत्रों में हजारों लड़कियों की तस्करी हुई है। इसी के बाद पहली बार परदे पर फिल्म का नाम ‘द केरला स्टोरी’ लिखकर आता है। फिल्म लिखने के लिए प्रयुक्त किए गए अक्षरों का आकार और प्रकार वैसा ही है जैसा फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का है। दावा किया गया है कि ये फिल्म उन 32 हजार लड़कियों की कहानी पर आधारित है जिनका बीते 10 साल से कोई पता नहीं चला है और ये संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

फिल्म में उठाया गया मुद्दा सच के बेहद करीब

इस फिल्म को लेकर तरह तरह की रिपोर्ट्स मौजूद हैं। आप भले ही लड़कियों के इतनी बड़ी संख्या में गायब होने की बात को तत्काल हजम ना कर पाएं लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं कर पाएंगे कि इस फिल्म में जो मुद्दा उठाया गया है वो सच के काफी करीब है। 5 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही ‘द केरला स्टोरी’ केरल में हिंदू और ईसाई लड़कियों की कहानी है, जिन्हें पहले लव जिहाद में फंसाया गया और बाद में ISIS आतंकवादी बनने के लिए इराक, सीरिया और अफगानिस्तान भेजा गया।

फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ के प्रमुख बिंदूः

  • इस फिल्म में भारत के केरल राज्य में 32 हजार लड़कियों के गायब होने की कहानी है जो एक बार जाने के बाद अपने घर वापस नहीं लौट सकी। यह आंकड़ा बीते 12 सालों का बताया जा रहा है।
  • फिल्म के टीजर में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अचुतानंदन कहते हैं कि केरल को एक मुस्लिम राज्य बनाने की साजिश की जा रही है और आने वाले 20 सालों में केरल मुस्लिम राज्य होगा।
  • केरल से जितनी भी लड़कियां गायब हुई वो आईएसआईएस को या युद्धग्रस्त इस्लामिक क्षेत्रों में तस्करी कर दी गई।
  • केरल में हिंदू और ईसाई समुदाय की लड़कियों को ही सोच समझकर निशाना बनाया जा रहा है।
  • जो भी लड़कियां गायब हुई है उनका जबरन धर्म परिवर्तन और आईएसआईएस के लड़ाकों से शादी का भी दावा किया जा रहा है और उनकी जबरन शादी करवाई जा रही है।
  • ये सब पता होने के बाद भी राज्य सरकार कोई सही प्रतिक्रिया में नजर नहीं आ रही है ना तो लड़कियों की तस्करी करने वालों के खिलाफ और ना ही लव जिहाद के खिलाफ।
  • यह सब केरल को एक इस्लामिक राज्य बनाने के लिए किया जा रहा है और वहां हिंदुओ पर जुल्म की कई घटनाएं सामने आती रहती है। इन सबमें एक इस्लामिक कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम सामने आया है।