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एक और ‘भारी’ छलांग: श्रीहरिकोटा से इसरो का LVM3-M6 मिशन लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। दुनिया को एक बार फिर अपनी ताकत दिखाते हुए भारी लिफ्ट प्रक्षेपण यान LVM-3 M6 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर उसकी कक्षा में पहुंचा दिया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दिसंबर 24 की सुबह ठीक 8:54 बजे जब रॉकेट ने आसमान की ओर रुख किया, तो पूरा स्पेस सेंटर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं था, बल्कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक नया कीर्तिमान था। इस मिशन की सबसे बड़ी खास बात इसका वजन है। यह रॉकेट अपने साथ ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2) सैटेलाइट लेकर गया है, जिसका वजन 6.5 टन है। भारत की धरती से लो अर्थ ऑर्बिट में भेजा गया यह अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है।

यह लॉन्च एक कमर्शियल डील के तहत किया गया है, जो भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्पेस मार्केट में मजबूत मौजूदगी को दिखाता है। BlueBird Block-2 अगली पीढ़ी का कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुनिया भर में सीधे स्मार्टफोन को हाई-स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड सेवा दे सकेगा, खासकर उन इलाकों में जहां नेटवर्क कमजोर है।

BlueBird Block-2 सैटेलाइट 19 अक्टूबर को अमेरिका से भारत लाया गया था। इसके बाद श्रीहरिकोटा में इसकी तैयारियां पूरी की गईं और अब इसे सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया गया है। इस उपलब्धि ने इसरो की हैवी-लिफ्ट क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

इस साल यह इसरो और अमेरिका के बीच दूसरा बड़ा सहयोग है। इससे पहले जुलाई में निसार (NISAR) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। इस सफल लॉन्चिंग के बाद अब दुनिया के कमर्शियल स्पेस मार्केट में भारत का दबदबा और बढ़ गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर ISRO की टीम को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह लॉन्च भारत की स्पेस यात्रा में एक गर्व का पल है। उन्होंने लिखा कि ‘भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम… भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी उपग्रह, अमेरिका के ‘ब्लू बर्ड ब्लॉक-2’ को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने वाला LVM3-M6 का सफल प्रक्षेपण, भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गर्व का मील का पत्थर है। यह भारत की भारी वजन ले जाने वाली लॉन्च क्षमता को मजबूत करता है और वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में हमारी बढ़ती भूमिका को पुख्ता करता है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में हमारे प्रयासों का भी प्रतिबिंब है। हमारे मेहनती अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बहुत-बहुत बधाई। भारत अंतरिक्ष की दुनिया में नई ऊंचाइयां छूना जारी रखेगा!’

एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम युवाओं की ताकत से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘भारत की युवा शक्ति से संचालित हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम अब और अधिक उन्नत और प्रभावशाली होता जा रहा है। LVM3 रॉकेट द्वारा भारी वजन उठाने की अपनी विश्वसनीय क्षमता के प्रदर्शन के साथ, हम ‘गगनयान’ जैसे भविष्य के मिशनों की नींव मजबूत कर रहे हैं। साथ ही, हम अपनी वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं और वैश्विक साझेदारी को गहरा कर रहे हैं। यह बढ़ती क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला यह बढ़ावा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद शानदार है।’

इस मिशन की सफलता ने साबित कर दिया है कि इसरो अब न केवल कम खर्च में, बल्कि भारी से भारी सैटेलाइट को भी अंतरिक्ष में भेजने में पूरी तरह सक्षम है। भारत आज विश्व के अग्रणी अंतरिक्ष देशों में मजबूती से अपनी जगह बना चुका है। और यह कामयाबी वैश्विक लॉन्चिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाने वाला साबित होगा।

 

ISRO का एक और कीर्तिमान ; पहली बार उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के गाँव में किया रॉकेट लॉन्चिंग का परीक्षण, 1.1KM तक दर्ज हुई उड़ान: वीडियो

                                                                              साभार : नवभारत टाइम्स IndiaTimes 
उत्तर प्रदेश की मिट्टी से अब अंतरिक्ष में उड़ान भरने की तैयारी है। ISRO ने कुशीनगर जिले में अपना पहला रॉकेट लॉन्चिंग परीक्षण किया। जो कि पूरी तरीके से सफल भी रहा है। यह परीक्षण थ्रस्ट टेक इंडिया लिमिटेड ने ISRO के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में किया है।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुहीराज तहसील में एक खास घटना हुई। यहां एपी बांध के पास जंगलीपट्टी गांव में रॉकेट लॉन्चिंग का टेस्ट किया गया। ये टेस्ट इसरो के वैज्ञानिकों की मौजूदगी में थ्रस्ट टेक इंडिया लिमिटेड ने किया। सबसे अच्छी बात ये रही कि पहला ही टेस्ट सफल हो गया। रॉकेट शाम को 5 बजकर 14 मिनट और 33 सेकंड पर उड़ा। इसने जमीन से 1.1 किलोमीटर तक की दूरी तय की। इस लॉन्चिंग से पहले अभ्यास भी किया गया था।यूपी में इसरो का ये पहला टेस्ट था। इससे पहले ऐसे टेस्ट अहमदाबाद में किए गए थे, जो समुद्र के पास है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुशीनगर जिले के तमकुहीराज तहसी के जंगलीपट्टी गाँव में शनिवार(14 जून 2025) को रॉकेट लॉन्चिंग का परीक्षण किया गया। ISRO के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में थ्रस्ट टेक इंडिया लिमिटेड ने शाम 5 बजकर 14 मिनट और 33 सेकेंड पर रॉकेट को लॉन्च किया। रॉकेट 1.1 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँचा, जिसके बाद एक छोटी सैटेलाइट यानी पेलोड बाहर आया।

ISRO के वैज्ञानिक अभिषेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रॉकेट लॉन्च होने के बाद वो 5 मीटर नीचे गिरा। इसके बाद पैराशूट एक्टिवेट हो गया और सैटेलाइट 400 मीटर अंदर जमीन पर गिरा और 15 किलो का रॉकेट भी सुरक्षित नीचे आ गया। उन्होंने आगे कहा कि ISRO की टीम ने फरवरी 2025 में इस जिले का दौरा किया था। तभी उन्होंने इस जगह को चुना था।

इसरो के वैज्ञानिक अभिषेक सिंह ने बताया कि इस टेस्ट का मकसद था भारतीय प्रक्षेपण एजेंसी की ताकत को जानना। उन्होंने कहा कि तमकुही क्षेत्र के जंगली पट्टी में शाम को 5 बजकर 14 मिनट और 33 सेकंड पर पहला रॉकेट छोड़ा गया। ये रॉकेट 1.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया। इसके बाद रॉकेट से एक छोटा सा उपग्रह बाहर आया। जब ये उपग्रह 5 मीटर नीचे गिरा, तो उसका पैराशूट खुल गया।

पैराशूट की मदद से उपग्रह 400 मीटर के अंदर धरती पर आ गया। रॉकेट भी पैराशूट के सहारे धीरे-धीरे धरती पर वापस आ गया। इस रॉकेट का वजन 15 किलो था और इसमें 2.26 किलो ईंधन डाला गया था। लॉन्च के समय 2.6 सेकंड के लिए ईंधन जला और रॉकेट सैटेलाइट को ऊपर लेकर गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि इसरो की टीम ने फरवरी के महीने में इस जिले का दौरा किया था।तभी उन्होंने इस जगह को चुना था।अक्टूबर से नवंबर के बीच देश भर के लगभग 900 युवा वैज्ञानिकों ने मिलकर सैटेलाइट बनाए हैं।इन सैटेलाइट का टेस्ट इसरो की निगरानी में होगा।

इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री, कैनसैट इंडिया छात्र प्रतियोगिता 2024-25 का आयोजन एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई) कर रही है।इसमें भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस), इसरो और कुछ और संस्थाएं भी मदद कर रही हैं।इसका मकसद है कि छात्रों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान और टेक्नोलॉजी के बारे में जानने की इच्छा पैदा हो।

इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री, कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कॉम्पिटिशन 2024-25 में देश के अलग-अलग कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र हिस्सा लेंगे।वे मॉडल रॉकेट और कैन के आकार के उपग्रह को डिजाइन करेंगे, बनाएंगे और लॉन्च करेंगे। ये लॉन्च साइट से 1000 मीटर की ऊंचाई पर होगा।इसी को ध्यान में रखते हुए तमकुही राज तहसील के जंगली पट्टी में ये टेस्ट किया गया, जो सफल रहा।

कई सारे लॉन्चर विकल्पों को देखने के बाद, इन कैनसैट को लॉन्च करने के लिए थ्रस्ट टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को चुना गया।ये टेस्ट कंपनी के मोटर का भी था कि वो ठीक से काम कर रहा है या नहीं। निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि प्री लॉन्चिंग में 4 रॉकेट का इस्तेमाल दो दिनों में किया जाना है। उन्होंने ये भी कहा कि इसरो की टीम के फैसले के बाद लॉन्चिंग की जिम्मेदारी थ्रस्ट टेक इंडिया की टीम को दी गई है। इस आयोजन का मकसद है कि इस क्षेत्र और पूरे भारत के बच्चों की स्पेस टेक्नोलॉजी में रुचि बढ़े।

CBI ने किया खुलासा; रशीदा ने सेक्स करने से मना करने पर केरल के पुलिसवाले ने ISRO वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जासूसी के झूठे केस में फँसाया: कहा- जासूसी से नहीं था कोई लेना-देना

मरियम रशीदा से शारीरिक संबंध नहीं बना सकने पर पुलिस अधिकारी ने नम्बी नारायणन को फँसाया (साभार: OManorama/Instagram)
CBI ने 1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर लगे विदेशी जासूस होने के आरोप के मामले में अब तिरुवनंतपुरम स्थित चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष 27 मार्च, 2024 को अंतिम चार्जशीट दायर की, जो बताता है कि कैसे एक IPS अधिकारी ने अपनी हवस के कारण बदले की पूरी साजिश रची और एक देशभक्त वैज्ञानिक को फँसा दिया। केरल का उक्त स्पेशल ब्रांच सर्किल इंस्पेक्टर S विजयन फ़िलहाल बरख़ास्त है। उसने मालदीव की एक महिला मरियम रशीदा को 1994 में 2 बार गिरफ्तार किया था।

इसने लिए उसने गलत इरादों से फर्जी रिपोर्ट दायर की थी। 20 अक्टूबर, 1994 को उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। तब उस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रुकने का आरोप था। उसकी पुलिस हिरासत खत्म होने से 1 दिन पहले S विजयन ने उसके व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर उन्हें जासूस ठहरा दिया। इस तरह मरियम रशीदा 13 नवंबर को फिर गिरफ्तार की गई। विजयन ने अपनी पहली रिपोर्ट में बताया था कि 13 सितंबर से मरियम रशीदा तिरुवनंतपुरम के एक होटल में रह रही हैं।

 पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि विदेशी नागरिकों की रूटीन चेकिंग के दौरान उसे ये पता चला था। कुछ दिनों बाद वो मरियम रशीदा के उस घर में गया, जहाँ वो होटल से निकलने के बाद रह रही थीं, जहाँ उसने पाया कि उनका वीजा 17 अक्टूबर, 1994 को ही एक्सपायर हो चुका है। विजयन का कहना था कि मरियम रशीदा इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं कि भारत में रुकने के लिए उनके पास पैसे कहाँ से आ रहे हैं और वो फोन पर किन लोगों से क्या बात करती हैं।

इंस्पेक्टर ने इसे गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार माना। हालाँकि, CBI जाँच में सामने आया कि विजयन ने फर्जी कहानी रची थी। इस कहानी में केवल यही बात सत्य है कि मरियम रशीदा और एक अन्य मालदीवियन महिला फौजिया हसन तिरुवनंतपुरम के उक्त होटल में रुकी हुई थीं। असल में विजयन उनके पास नहीं गया था बल्कि मरियम रशीदा ही उसके सामने पहुँची थीं। 10 अक्टूबर को वो अपने वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुँची हुई थीं।

17 अक्टूबर, 1994 को उनकी श्रीलंका के लिए फ्लाइट थी। कमिश्नर के दफ्तर में ही उसे CI विजयन के केबिन में जाने के लिए कहा गया और विजयन ने उसका वीजा और विमान टिकट अपने पास रखते हुए बाद में आने के लिए कहा। 13 अक्टूबर को S विजयन उसके होटल और 20 अक्टूबर को उसके घर पहुँचा। उसने फौजिया हसन को बाहर जाने के लिए कहा और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहाँ उसने मरियम रशीदा के साथ जोर-जबरदस्ती की।

जब मरियम रशीदा ने विजयन के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया तो वो वहाँ से जल्दी-जल्दी में निकल कर चला गया। इसे अपना अपमान समझ कर उसने उनका वीजा और टिकट्स नहीं लौटाए। मज़बूरी में मरियम रशीदा को यहाँ रुकना पड़ा और इसी को आधार बना कर विजयन ने उसके खिलाफ मामला चला दिया। उसके बारे में खोद-खोद कर जानकारियाँ निकालने लगा, जिस क्रम में उसे पता चला कि वो ‘लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम्स सेंटर (LPSC)’ के वैज्ञानिक D शशिकुमारन से संपर्क में हैं।

उसने तत्कालीन सिटी पुलिस कमिश्नर VR राजीवन को इसकी रिपोर्ट सौंपी। IB को सूचित किया गया, लेकिन जाँच एजेंसी को कुछ गड़बड़ मिला ही नहीं। फिर पुलिस कमिश्नर ने ISRO के गुप्त राज़ चोरी होने की खबरें मीडिया में प्लांट करवाईं। मरियम रशीदा को दोबारा जिस रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, उसमें विजयन ने लिखा था कि दोनों महिलाएँ देश-विदेश में कई लोगों से मिल कर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम कर रही हैं, इससे भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ जो संबंध हैं उस पर असर पड़ सकता है।

CBI ने इस रिपोर्ट को भी गलत बताया। विजयन ने अपनी रिपोर्ट का स्रोत बताया ही नहीं। असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह पर उसने दूसरी गिरफ्तार की बात कही, लेकिन हबीब पिल्लई ने नकार दिया कि उन्होंने ऐसी कोई सलाह दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि मरियन रशीदा से बदला लेने के लिए फर्जी मामले बनाए गए थे। यहाँ तक कि कुछ IB अधिकारी भी इसमें लिप्त पाए गए। जाँच एजेंसी द्वारा पूछताछ वाली 4 रिपोर्ट CBI के समक्ष आई, किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं थे।

केरल पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जो लोगों के बयान थे, उसके भी सिर का पाँव की कोई थाह नहीं थी। यानी, केरल पुलिस की रिपोर्ट भी फर्जी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि मरियम और फौजिया ने कबूल किया है कि वो दोनों D शशिकुमारन के अलावा रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी Glavkosmos के बेंगलुरु में स्थित एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं और उन्होंने विदेश में कुछ ‘महत्वपूर्ण जानकारियाँ’ भेजीं, लेकिन, केस डायरी में ये नहीं लिखा था कि वो इन्फॉर्मेशन क्या था जिसे विदेश पहुँचाया गया।

खास बात ये है कि उस दिन दोनों महिलाओं से पूछताछ हुई ही नहीं थी। इन्हीं में से एक हस्ताक्षर-विहीन रिपोर्ट में नम्बी नारायणन का भी नाम था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसने CBI को बताया कि उसे इंटेररोगेशन रूम के आसपास भी फटकने नहीं दिया जाता था। SIT के मुखिया सीबी मैथ्यूज ने उन्हें बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी थी, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। केरल पुलिस को पता था कि सारे बयान और सबूत फर्जी हैं, फिर भी इस मामले में वो आगे बढ़ती रही।

वांचियूर पुलिस थाने में मरियम रशीदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। फौजिया हसन को भी गिरफ्तार किया गया था। D शशिकुमारन, K चंद्रशेखर और नम्बी नारायणन के अलावा बेंगलुरु स्थित लेबर कॉन्ट्रैक्टर सुधीर कुमार शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। अंततः 1994 में ही दिसंबर में CBI ने मामले को हाथ में लिया। अप्रैल 1996 में एर्नाकुलम के CJM के समक्ष दायर रिपोर्ट में ही CBI ने बता दिया था कि आरोपितों के खिलाफ जो आरोप हैं वो साबित नहीं हो रहे।

अप्रैल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा दोबारा जासूसी काण्ड की जाँच वाले निर्णय को रद्द कर दिया। जून 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी की सरकार ने CBI द्वारा दोषी पाए गए तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। सिरांबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए केरल सरकार को आदेश दिया। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI से केरल पुलिस के 7 और IB के 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

इस मामले में नम्बी नारायणन को 1996 में जाकर राहत मिली थी, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इसके बाद नम्बी नारायणन ने काफी लंबी लड़ाई लड़ी। उन्हें भारत सरकार ने मुआवजा भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार को भी उन्हें मुआवजा देना पड़ा। मोदी सरकार ने नम्बी नारायणन को 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वहीं, एक्टर-डायरेक्टर आर माधवन ने नम्बी नारायणन की जिंदगी पर नम्बी-द रॉकेट इफेक्ट नाम की फिल्म भी बनाई थी, जिसके राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

मंजिल तक पहुँच गया ‘आदित्य L1’, ISRO का पहला सूर्य मिशन सफल: PM मोदी बोले – ये हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम

पृथ्वी और सूर्य के बीच स्थित लैंग्रेज पॉइंट तक पहुँच गया इसरो का 'आदित्य L1' (फोटो साभार: इंडिया टुडे)
सूर्य के अध्ययन के लिए ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद) द्वारा लॉन्च किया गया पहला मिशन ‘आदित्य L1’ ने अंतरिक्ष में अपने अंतिम लक्ष्य तक का सफर तय कर लिया है। शनिवार (6 जनवरी, 2024) को ‘आदित्य L1’ सूर्य के लैंग्रेज पॉइंट 1 तक पहुँच गया। L1 पॉइंट ‘हेलो ऑर्बिट’ में स्थित है और ये भी पृथ्वी द्वारा सूर्य की लगातार की जा रही परिक्रमा के कारण चलायमान रहता है। इसरो द्वारा बेजा गया ‘आदित्य L1’ इसी लैंगरेज पॉइंट 1 के इर्दगिर्द चक्कर काटेगा।

यहीं से वो सूर्य का अध्ययन करेगा और महत्वपूर्ण डेटा धरती पर भेजेगा, जिसका ISRO के वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। L1 पॉइंट धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पृथ्वी व सूर्य के बीच की दूरी का 1% है। ‘आदित्य L1’ को सूर्य के कोरोना और (सूर्य के वातावरण का सबसे बाहरी हिस्सा जो सूर्य के सतह के प्रकाश के कारण छिपा रहता है) और इसकी अत्यधिक गर्मी के अध्ययन के लिए भेजा गया है। सौर ऊर्जा में सूर्य द्वारा बड़ी मात्रा में ऊर्जा छोड़ी जाती है।

इसरो ने अपने बयान में बताया है कि कैसे सूर्य पर जो विस्फोट होते रहते हैं अगर वो पृथ्वी की तरफ निर्देशित हो जाएँ तो हमारे वातावरण में बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ISRO की ताज़ा उपलब्धि की प्रशंसा की है और कहा कि भारत ने एक और मील के पत्थर को हासिल किया है, सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन ‘आदित्य L1’ अपने गंतव्य तक पहुँच गया है। पीएम मोदी ने कहा कि ये सफलता जटिल अंतरिक्ष अभियानों को सफल बनाने वाले हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि पूरे राष्ट्र के साथ वो वैज्ञानिकों की प्रशंसा में खुद को शामिल करते हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवता की भलाई के लिए भारत विज्ञान की नई सीमाओं को पार करना जारी रखेगा। ‘आदित्य L1’ स्पेसक्राफ्ट को PSLV-C57 लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल कर के 2 सितंबर, 2023 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। इसी साल भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश भी बना, जब ‘चंद्रयान 3’ ने ये सफलता प्राप्त की। उस बिंदु को ‘शिवशक्ति पॉइंट’ नाम दिया गया।


‘आदित्य L1’ ने शुरू किया सौर ऊर्जा से बिजली बनाना, एक्टिवेट होकर काम करने लगे सोलर प्लेट्स: उधर चाँद पर ‘प्रज्ञान’ ने लगाया ‘शतक’

'आदित्य L1' ने शुरू किया सौर ऊर्जा से बिजली बनाना, चाँद पर 100 मीटर चला 'प्रज्ञान'
ISRO ने ‘आदित्य L1’ के सफल लॉन्च के बाद एक और अच्छी खबर दी है। इसके सोलर पैनल को एक्टिवेट कर दिया गया है। सीधे शब्दों में कहें तो ‘आदित्य L1’ ने सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर के बिजली बनानी शुरू कर दी है। सौर ऊर्जा पैदा करने के लिए जो सोलर प्लेट्स लगाए गए हैं, वो ठीक तरह से काम कर रहे हैं। अब रविवार (3 सितंबर, 2023) को दोपहर के 11:45 बजे पहली अर्थबाउंड फायरिंग की जाएगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये जानकारी दी है।

PSLV-C57/Aditya-L1 का सफल लॉन्च शनिवार (2 सितंबर, 2023) को पूरा हुआ। बता दें कि इस मिशन को PSLV-C57 रॉकेट का इस्तेमाल कर के लॉन्च किया गया है। जिस ऑर्बिट में इसे स्थापित किया जाना था, रॉकेट ने ठीक उसी तय बिंदु पर इसे स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक L1 पॉइंट (पृथ्वी और सूर्य के बीच स्थित वो बिंदु, जहाँ सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल संतुलन में रहता है) के लिए निकल गया है।

उधर ‘चंद्रयान 3’ को लेकर भी बड़ी खबर आई है। ISRO ने जानकारी दी है कि चाँद पर ‘प्रज्ञान’ रोवर ने 100 मीटर की यात्रा कर ली है और ये अभी भी जारी है। जहाँ पर ‘विक्रम’ लैंडर स्थित है, उस जगह को ‘शिवशक्ति पॉइंट’ नाम दिया गया है। वहाँ से कुछ दूर आगे चलने के बाद ‘प्रज्ञान’ मुड़ गया और फिर दिशा बदल कर दूसरी तरफ बढ़ने लगा। ‘प्रज्ञान’ सबसे पहले पश्चिम की तरफ चला, फिर अब वो उत्तर दिशा में मुड़ कर आगे बढ़ रहा है। ISRO लगातार इस संबंध में ताज़ा सूचना दे रहा है।

ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने ‘आदित्य L1’ मिशन को ‘बहुत अनोखा’ करार दिया है। उन्होंने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब PSLV का ऊपरी हिस्सा प्राइमरी सैटेलाइट को इंजेक्ट करने के लिए 2 बार ‘बर्न सीक्वेंस’ से गुजर रहा है। ये कुल 127 दिन की यात्रा होने वाली है, जिसके बाद ‘आदित्य L1’ सूर्य का अध्ययन करना शुरू करेगा और धरती पर डेटा भेजेगा। ISRO प्रमुख ने ये भी बताया कि एक-दो दिनों में चाँद पर ‘विक्रम’ और ‘प्रज्ञान’ को सुला दिया जाएगा, क्योंकि इन्होंने ‘लूनर नाइट (चाँद की रात, 14 दिन)’ में अपना काम कर लिया है।


कोई देश जो नहीं कर पाया, वो करेगा आदित्य एल-1: लगातार भेजेगा सूर्य संबंधित डेटा, ISS के पूर्व कमांडर ने बताया ऐतिहासिक

                        आदित्य एल-1 और प्रोफेसर जगदेव सिंह (साभार: हिंदुस्तान टाइम्स/सोशल मीडिया )
सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत पहली अपना स्पेस मिशन आज शनिवार 2 सितंबर 2023 को लॉन्च कर रहा है। इसे श्रीहरिकोट्टा से 11:50 में लॉन्च किया जाएगा। दुनिया का कोई भी मिशन अभी तक सूर्य और उससे संबंधित डेटा अभी तक लगातार नहीं भेज पाया है, लेकिन आदित्य एल-1 ऐसा पहली बार करेगा। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के पूर्व कमांडर क्रिस हेडफील्ड ने भारतीय तकनीक कौशल की सराहना की।

भारतीय एस्ट्रोफिजिक्स संस्थान (IIA) के प्रोफेसर जगदेव सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत की और इसके बारे में जानकारी दी। प्रोफेसर जगदेव सिंह के शुरुआती प्रयास ही थे, जिसके परिणामस्वरूप विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) पेलोड का विकास हुआ। इस पेलोड को आदित्य एल-1 अंतरिक्ष यान पर ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक योजना के तहत आदित्य एल-1 को 800 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च करने की थी, लेकिन 2012 में इसरो के साथ चर्चा के बाद इसे बदल दिया गया। निर्णय लिया गया कि मिशन को L-11 (लैग्रेंज प्वाइंट-1) के चारों ओर की हेलो कक्षा में इसे प्रक्षेपित किया जाएगा। यह एल-1 बिंदु से पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है।

प्रोफेसर सिंह ने कहा, “16 फरवरी 1980 को भारत में पूर्ण सूर्य ग्रहण हुआ था और उस समय संस्थापक-निदेशक एमके वेनु बप्पू ने मुझे सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने के लिए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया था। मैंने 1980 और 2010 के बीच 10 ऐसे अभियान चलाए… मुझे एहसास हुआ कि ग्रहण के दौरान आपको अवलोकन के लिए केवल 5-7 मिनट मिलते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये अवलोकन दीर्घकालिक अध्ययन करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। मैंने निरंतर अवधि के लिए सूर्य के पहलुओं का अध्ययन करने में मदद करने के मिशन के लिए इसरो और अन्य एजेंसियों में कई लोगों से बात की। साल 2009 के आसपास ऐसे संभावित मिशन के बारे में बातचीत शुरू हुई और बाद में 2012 में एक ठोस योजना विकसित की गई।”

आदित्य मिशन की कार्य-प्रणाली को लेकर प्रोफेसर सिंह ने कहा, “अंतरिक्ष यान को वहाँ पहुँचने में 127 दिन लगेंगे। उम्मीद है कि अगले साल फरवरी या मार्च तक डेटा आना शुरू हो जाएगा। आम तौर पर एक उपग्रह को पाँच साल तक रहने की योजना बनाई जाती है, जो कि किसी न्यूनतम मिशन जीवन है। हालाँकि, आदित्य एल-1 हमें 10-15 साल तक डेटा प्रदान करना जारी रख सकता है।”

उन्होंने कहा, “चूँकि उपग्रह को एल-1 पर रखा जाएगा, जो एक स्थिर बिंदु है, वहाँ हमें बहुत अधिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए हम इसके अधिक जीवन होने की उम्मीद कर रहे हैं। यह पहली बार है, जब हम दृश्यमान उत्सर्जन रेखा पर डेटा प्राप्त करेंगे… सौर कोरोना में कैसे परिवर्तन हो रहे हैं और ये छोटे परिवर्तन प्लाज्मा के गर्म होने और क्रोमोस्फीयर से कोरोना तक ऊर्जा के हस्तांतरण में कैसे भूमिका निभाते हैं, आदि। अब तक कोई भी लगातार डेटा हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाया है, लेकिन हम ऐसा करने में सक्षम होंगे।”

प्रोफेसर सिंह ने कहा कि उनकी टीमों ने प्रयोगशाला में उपकरण का कई बार परीक्षण किया है। परीक्षणों से पता चला है कि व पूरी तरह काम कर रहे हैं। उपकरणों को हर चरण में शेकर्स, वाइब्रेटर और तापमान में उतार-चढ़ाव के माध्यम से वे स्थिर और अच्छी तरह से कैलिब्रेट किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ ठीक रहा है तो इसके बाद के मिशन पर विचार होगा।

भारत के तकनीकी कौशल की सराहना करते हुए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के पूर्व कमांडर क्रिस हेलफील्ड ने कहा, “चंद्रमा पर उतरने और सूर्य पर यान भेजने या कम से कम सूर्य की निगरानी करने और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में उड़ान भरने के लिए तैयार करने का यह उदाहरण वास्तव में भारत में हर किसी के लिए उदाहरण प्रदान करता है। वहीं, दुनिया भर के लोगों को भारतीय तकनीकी कौशल कहाँ पहुँचा है, ये उसका भी उदाहरण है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे पिछले कई वर्षों से देख रहे हैं। वह भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं… इसलिए इस समय इसे आगे बढ़ाना, भारत के नेतृत्व की ओर से यह वास्तव में एक स्मार्ट कदम है। इसे विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसके निजीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है ताकि व्यवसायों और इसलिए भारतीय लोगों को फायदा हो सके।”

शिवशक्ति प्वाइंट: चंद्रयान 3 के उतरने वाली जगह का नाम… चंद्रयान 2 ने भी जहाँ छोड़े निशान, वो कहलाएगा ‘तिरंगा’ – इसरो में मोदी का ऐतिहासिक भाषण

इसरो कमांड सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: ट्विटर/एएनआई)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ग्रीस यात्रा से लौटते ही सीधे बेंगलुरु पहुँचे और वहाँ से इसरो के कमांड सेंटर पहुँचे। यहाँ पीएम मोदी चंद्रयान 3 मिशन को सफल बनाने वाले वैज्ञानिकों से मिले और इसरो के कमांड सेंटर को देखा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला वैज्ञानिकों को प्रणाम भी किया। पीएम मोदी ने चंद्रयान 2 के क्रैश लैंडिंग को भी याद किया। उन्होंने चंद्रयान 2 और चंद्रयान 3 के लैंडिंग प्वॉइंट का नामकरण भी किया।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चंद्रमा के जिस स्थान पर चंद्रयान 2 ने अपने पदचिह्न छोड़े हैं, वो स्थान अब ‘तिरंगा’ कहलाएगा। उन्होंने चंद्रयान 3 के लैंडिंग प्वॉइंट को ‘शिवशक्ति प्वाइंट’ नाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तिरंगा प्वॉइंट हमें सीख देगा कि कोई भी विफलता आखिरी नहीं होती, अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसने चंद्रमा को छुआ है। पीएम मोदी ने भारत की लंबी अंतरिक्ष यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के पास पहले तकनीक नहीं थी। हमारी गिनती दुनिया के तीसरे पायदान पर खड़े देशों में होती थी। वहाँ से निकलकर आज भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।

आज ट्रेन से लेकर टेक्नोलॉजी तक भारत की गिनती पहली कतार के देशों में हो रही है। भारत की तीसरी कतार से पहली कतार तक पहुँचने की यात्रा में इसरो जैसे संस्थानों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। आपने आज मेक इन इंडिया को चाँद तक पहुँचा दिया है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के दक्षिणी हिस्से से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक की ये यात्रा आसान नहीं थी। हमारे वैज्ञानिकों ने इस काम को अंजाम देने के लिए इसरो की ही लैब में आर्टिफिशियल चाँद तक बना डाला। ढेर सारे प्रयोगों को अंजाम दिया। इसलिए चंद्रयान 3 को सफलता मिलनी ही मिलनी थी। पीएम मोदी ने कहा: “आज जब मैं देखता हूँ कि भारत की युवा पीढ़ी साइंस, स्पेस और इनोवेशन को लेकर इतनी उर्जा से भरी हुई है, तो उसके पीछे हमारे स्पेस मिशन की सफलता है। मंगलयान, चंद्रयान से लेकर गगनयान तक इसरो ने देश की युवा पीढ़ी को नया मिजाज दे दिया है।”

मोदी ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने सिर्फ चाँद पर ही तिरंगा नहीं लहराया है, बल्कि आप लोगों ने भारत की पूरी की पूरी पीढ़ी को ही जागृत किया है और उन्हें नई राह दिखाई है। आज से कोई भी बच्चा जब रात में चंद्रमा को देखेगा, तो उसे विश्वास होगा कि जिस हौसले से मेरा देश चाँद पर पहुँचा है। वही हौसला, वही जज्बा बच्चे के भीतर भी है, युवा के भीतर भी है। आज आपने भारत के बच्चों में आकांक्षाओं के जो बीज बोए हैं, वो आने वाले कल में वटवृक्ष बनेंगे और विकसित भारत की नींव बनेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं को प्रेरणा मिलती रहे, इसके लिए एक और निर्णय लिया गया है। भारत अब से चंद्रयान 3 के लैंडिंग दिवस यानी 23 अगस्त को ‘नेशनल स्पेस डे’ के तौर पर मनाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेस सेक्टर की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि मौसम का पूर्वानुमान लगाने की वजह से किसानों को मदद मिलती है। आज मछुवारों को नाविक सिस्टम की वजह से बारिश की जो जानकारी मिलती है, वो आपकी वजह से है। आज प्राकृतिक आपदा आती है, तो आपकी वजह से उसकी जानकारी पहले मिल जाती है। साइक्लोन की सूरत में जन और धन की हानि होती है। एक साइक्लोन इतना नुकसान कर जाता था, जो चंद्रयान 3 के मिशन पर खर्च हुए कुल पैसों से भी ज्यादा होता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो एक सुझाव भी देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि इसरो के रिटायर्ड लोग केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर नेशनल हैकेथॉन का आयोजन करें, जिसमें देश के अधिक से अधिक युवा जुड़ें। ये हैकेथॉन गवर्नेंस पर आधारित हो, जिससे देश के विकास में सहयोग मिलेगा। उन्होंने युवाओं को एक काम भी सौंपा।

भारत वो देश है, जिसने हजारों वर्षों पूर्व ही धरती के बाद अनंत आकाश में देखना शुरू कर दिया था। हमारे यहां सदियों पहले आर्यभट्ट, वाराहमिहिर, भास्कराचार्य जैसे ऋषि मुनि हुए। जब धरती के बारे में किसी को नहीं पता था, तो आर्यभट्ट ने धरती से जुड़ी गणनाएं भी लिख दी थी। धरती गोल है, इस बात की जानकारी भारत ने पहले ही दे दी थी। उन्होंने बाकायदा संस्कृत का श्लोक भी सुनाया और उसका मतलब भी समझाया। उन्होंने बताया कि इस श्लोक में धरती और आकाश के बारे में बताया गया है। हमारे पूर्वजों ने सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी के एक सीध में आने की घटना हमारे कई ग्रंथों में लिखी गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि पृथ्वी ही नहीं, अन्य ग्रहों और उपग्रहों की गति से लेकर आकार तक की जानकारी हमारे ग्रंथों में लिखे गए थे। आज हमारे यहां सैकड़ों वर्षों पहले और बाद के पंचांग तक बनाए जाते हैं।

मोदी ने युवाओं को चुनौती भी दी। भारत के ग्रंथों में खगोलीय विज्ञान के जो सूत्र लिखे गए हैं, आज के युवा उन्हें प्रतिस्थापित करने के लिए उनपर रिसर्च करें और उन्हें साबित करें। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा ज्ञान गुलामी की मानसिकता के नीचे दब गया था, उन्हें अब उभारना है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आज के आधुनिक विज्ञान को नए आयाम देने हैं। समंदर की गहराइयों से लेकर आसमान की ऊंचाई तक करने को बहुत कुछ है। आज डीप अर्थ को भी देखिए, डीप सी को भी देखिए। आप नेक्स्ट जेन कंप्यूटर भी बनाइए और जेनेटिक इंजीनियरिंग में भी सिक्का जमाइए। आपके पास करने को बहुत कुछ है।

उन्होंने कहा कि आज की 21वीं सदी में जो देश साइंस और टेक्नोलॉजी में बढ़त बना लेगा, वो देश सबसे आगे बढ़ जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में भारत की स्पेस इंडस्ट्री 8 बिलियन डॉलर से बढ़कर 16 बिलियन डॉलर हो जाएगी, ऐसा विशेषज्ञ बोलते हैं, तो सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। भारत में पिछले कुछ सालों में 4 से बढ़कर करीब 100 स्टार्टअप स्पेस सेक्टर में काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि 1 सितंबर से my.GOV ऐप चंद्रयान मिशन को लेकर बहुत बड़ा क्विज कॉम्पटीशन लॉन्च कर रहा है। मैं चाहता हूं कि सभी युवा, छात्र इससे जुड़े। उन्होंने कहा कि इसरो को इस मिशन को लीड करना चाहिए। इसरो सभी युवाओं के लिए रोल मॉडल है। आपकी वर्षों की तपस्या ने ये साबित किया है कि आप जो ठान लेते हैं, वो आप करके दिखाते हैं। देश के लोगों का विश्वास आप पर है और विश्वास कमाना छोटी बात नहीं होती है।


राजस्थान : चंद्रयान 3 के सभी यात्रियों को बधाई: यह व्यंग्य नहीं है… कांग्रेस के मंत्री अशोक चांदना ने खुद वीडियो में कही बात

चंद्रयान 3 के यात्रियों को बधाई देते मंत्री जी (फोटो साभार:'ट्विटर यूजर MeghUpdates)
राजस्थान के युवा खेल मंत्री अशोक चांदना ने चंद्रयान 3 अभियान के सफल होने की बधाई दे दी है। लगे हाथ उन्होंने चंद्रयान के साथ गए ‘यात्रियों’ को भी बधाई दे ही डाली। जी हाँ, राजस्थान के खेल मंत्री चंद्रयान 3 को बधाई देने के क्रम में इतने डूब गए कि जब निकले तो हमेशा के लिए वायरल होने वाला एक मीम मटेरियल दे दिया। उन्होंने कहा, “हम कामयाब हुए और सेफ लैंडिंग हुई। तो जो यात्री गए हैं हमारे, उनको सलाम करता हूँ। और हमारा देश एक कदम और साइंस में, स्पेस रिसर्च के अंदर आगे बढ़ा, उसकी सभी देशवासियों को बहुत बधाई देता हूँ।”

वैसे, पूरी दुनिया ये जानती है कि चंद्रमा की सतह पर उतरा चंद्रयान 3 मानवरहित मिशन है। इसमें कोई इंसान नहीं, बल्कि विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान चाँद पर भेजा गया है। अब विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग हो गई है, तो रोवर प्रज्ञान अपना काम शुरू करेगा। प्रज्ञान का काम चाँद की सतह का अध्ययन करना है। वैसे अशोक चाँदना जी भले ही खेल मंत्री हों, लेकिन वो इस बात से अंजान लगते हैं कि चंद्रयान 3 एक मानवरहित मिशन है।

मंत्री जी का बयान खुद ही सुन लीजिए:

अशोक चाँदना के इस वीडियो पर लोग जमकर मजे ले रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि मंत्री अशोक चांदना अपने नेता (राहुल गाँधी की फोटो लगाते हुए) की राह पर चल रहा है।

एक यूजर ने मंत्री अशोक चांदना के इस बयान को दिन भर की सबसे बड़ी बात कह गया।

जनता को पप्पू समझने वाले कांग्रेसी नेताओं के लिए एक यूजर ने लिखा कि पप्पू के पास बहुत सारे पप्पू हैं। भारतीय राजनीति में पप्पू शब्द एक खास नेता के लिए प्रयोग किया जाता है, संयोग से वो नेता कांग्रेस के ‘युवा’ नेता भी कहलाते हैं।

भारत का चंद्रयान 3 चाँद की सतह पर लैंड हो गया है। चंद्रयान 3 पर पूरी दुनिया की नजरें थी। रूसी लूना-25 के फेल होने के बाद इसरो पर भी इस अभियान को लेकर दबाव था, लेकिन चंद्रयान 3 ने सभी मुसीबतों को पीछे छोड़ते हुए चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है और भारत की कामयाबी का झंडा गाड़ दिया है।