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पश्चिम बंगाल : TMC गुंडों ने ‘साड़ी फाड़ी, अंडरवियर उतारा, नंगा घुमाया’ ; मोदी विरोधी खामोश क्यों?

              बंगाल में टीएमसी के गुंडों पर महिला उम्मीदवार के नग्न परेड का आरोप (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
मणिपुर घटना पर लोक और राज्य सभा सदनों पर हंगामा करने वाले गैर-भाजपाई सरकारों में हो रही अमाननीय घटनाओं पर क्यों चुप्पी साधे हुए है? दिल्ली मुख्यमंत्री तो दामिनी कांड के एक आरोपी को सिलाई मशीन और नकद राशि देने वाले किस मुंह से मणिपुर पर बोल रहे है? उन्हें तो कोई अधिकार ही नहीं। दिल्ली संभाली नहीं जाती, जनता को भ्रमित करने भाजपाई राज्यों में पहुँच जाते हैं, जबकि दिल्ली में ही घटती घटनाओं पर मुंह में दही जमाकर बैठ जाते हैं। 

मणिपुर में महिलाओं के नग्न परेड का वीडियो वायरल होने के बाद अब पश्चिम बंगाल से भी इस तरह की एक घटना सामने आई है। कथित तौर पर पंचायत चुनाव के दौरान एक महिला उम्मीदवार को नंगा कर सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गुंडों ने पूरे गाँव में घुमाया। ANI की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें पीटा गया, सरेआम छेड़छाड़ की गई। घटना 8 जुलाई 2023 की है। इसी दिन राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए वोट डाले गए थे।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत चुनाव की एक महिला उम्मीदवार ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर छेड़छाड़ और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। कहा है कि आठ जुलाई को उसे नंगा कर पूरे गाँव में घुमाया गया। घटना हावड़ा जिले के पांचला इलाके की है। पांचला थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई गई है। एफआईआर में टीएमसी कैंडिडेट हेमंत राय, नूर आलम, अल्फी एसके, रणबीर पांजा संजू, सुकमल पांजा समेत कई को नामजद किया गया है।

महिला ने बताया है कि टीएमसी के करीब 40 से 50 गुंडों ने उसके साथ मारपीट की। उसके सीने और सिर पर डंडे से हमला किया। उसे मतदान केंद्र के बाहर फेंक दिया। रिपब्लिक की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित महिला के अनुसार उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। उसे नग्न होने के लिए मजबूर किया गया। उसे गलत तरीके से छुआ गया और सरेआम छेड़छाड़ की गई। पीड़िता के अनुसार जब टीएमसी के कुछ कार्यकर्ता उसके साथ मारपीट कर रहे थे तो उनके एक नेता ने उन्हें उनके कपड़े फाड़ने के लिए उकसाया।

बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट कर दावा किया है इस मामले में एफआईआर भी तब दर्ज की गई, जब बीजेपी ने इसके लिए दबाव बनाया। उन्होंने कहा है, “क्या आपको जरा भी शर्म है ममता बनर्जी? आपके सचिवालय से कुछ ही दूर हावड़ा के पंचला में 8 जुलाई 2023 को पंचायत चुनाव के दिन ग्राम सभा की एक महिला उम्मीदवार को पीटा गया, नग्न कर घुमाया गया। आपकी पुलिस ने तब एफआईआर दर्ज की जब बीजेपी ने दबाव डाला।” उन्होंने ममता बनर्जी को असफलत मुख्यमंत्री बताते हुए बंगाल पर ध्यान देने की सलाह दी है।

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उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में 63229 ग्राम पंचायतों के लिए 8 जुलाई को वोट पड़े थे। 11 जुलाई को मतगणना हुई थी। यह चुनाव नतीजों से ज्यादा हिंसा के लिए चर्चा में रहा था। मतदान के दिन मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, मालदा, दक्षिणी 24 परगना, उत्तरी दिनाजपुर और नादिया सहित कई जिलों से बूथ पर कब्जे, बैलेट बॉक्स को नुकसान पहुँचाने, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और चुनावी अधिकारियों को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगे थे। इसी तरह मतगणना के दिन भी कर्मचारियों से लेकर नेताओं की पिटाई के कई मामले सामने आए थे। टीएमसी को 28985 और बीजेपी को 7764 सीटों पर जीत मिली थी।

असम : रजिस्ट्रेशन बिना मदरसों में नहीं आ पाएँगे बाहरी मुल्ला-मौलवी

हिन्दू या हिन्दुत्व की बात करने वालों को भाजपाई, संघी, बजरंग दल या फिर विश्व हिन्दू परिषद् का बता बदनाम किया जाता है, जनता में भ्रम फैलाया जाता है, लेकिन असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भाजपाई मुख्यमंत्री बनने से पहले कांग्रेस में ही थे, जो कांग्रेस में मुस्लिम तुष्टिकरण से दुखी होकर भाजपा में आये और राज्य में हिन्दुत्व और राष्ट्र की रक्षा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पीछे छोड़ते नज़र आते हैं। 
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि अब राज्य के मदरसों में बाहर से आने वाले इमामों और अन्य लोगों को पहले अपना पंजीकरण कराना होगा। असम में हाल ही में दो आतंकवादी गिरफ्तार किए गए हैं, जो दो अलग-अलग मस्जिद के इमाम के रूप में अलकायदा के लिए काम कर रहे थे। इसीलिए, राज्य की भाजपा सरकार ने इससे सबक लेते हुए मदरसों के लिए एक ‘स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ तय करने का निर्णय लिया है।

असम के मुख्यमंत्री ने सोमवार (22 अगस्त, 2022) को बताया कि इसके लिए एक पोर्टल होगा, जिस पर मदरसों में बाहर से आने वाले इमामों और अन्य लोगों को रजिस्टर करना पड़ेगा। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि राज्य के मुस्लिम नागरिकों से इसे लागू करने के लिए मदद ली जा रही है। हालाँकि, जो पहले से ही असम के नागरिक हैं, उन्हें इस SoP के तहत अपना नाम रजिस्टर कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ये राज्य के बाहर के लोगों के लिए है।

साथ ही उन्होंने गाँव वालों से भी कहा है कि अगर इलाके में कोई ऐसा इमाम आता है जिसे वो लोग नहीं जानते हैं, तो ग्रमीणों को तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने में देनी चाहिए। इसके बाद पुलिस अज्ञात इमाम की पुष्टि करेगी, तत्पश्चात ही उन्हें वहाँ रुकने की अनुमति दी जाएगी। सीएम सरमा ने कहा कि असम के मुस्लिम समुदाय से राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को लागू करने में मदद मिल रही है। कुछ ही महीनों पहले असम में 800 मदरसों को नियमित विद्यालयों में बदल दिया गया था।

अप्रैल में असम में अलकायदा के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 16 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं जुलाई में भी एक टेरर मॉड्यूल के खुलासे के बाद 12 आतंकी दबोचे गए थे। वहाँ मस्जिदों-मदरसों में आतंकवादी गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं। मोरीगाँव के एक मदरसे में आतंकी गतिविधि में शामिल 8 मौलवी धराए थे। हाल ही में दो ऐसे इमाम को गिरफ्तार किया गया, जो मस्जिद की आड़ में अलकायदा के लिए भर्ती कर रहे थे और आतंकी स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे थे।