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जहाँ "खुदा" वहीं मूर्तियां निकली; पश्चिम बंगाल में मिली भगवान विष्णु की 12 हाथ वाली प्रतिमा, द्वारकेश्वर नदी में खनन के दौरान निकली: हिन्दुओं ने चालू की पूजा, पुरातत्वविद बोले- इस्लामी आक्रान्ताओं से बचाने को दबाई होगी

कहीं भी खुदाई की मांग होने पर मुग़ल आक्रांताओं के वंशज मुस्लिम कट्टरपंथी क्यों बिलबिलाते हैं? इसका कारण है। क्योकि जहाँ भी खुदाई होती मंदिर के अवशेष या खंडित मूर्तियां निकलती हैं। दबे हुए भगवान चीख-चीखकर कह रहे हैं यहाँ खोदो। वास्तव में जहाँ "खुदा" वहीँ मूर्तियां, मंदिरों के अवशेष या खंडित मूर्तियां निकल रही है। अयोध्या विवाद के समय कोर्ट के आदेश पर सच्चाई जानने खुदाई के लिए राममंदिर विरोधी गैंग तैयार तो हो गया लेकिन खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को देख मातम छा गया था। कोर्ट में झूठ बोल दिया कि "बस एक खम्बा मिला" कोर्ट ने भी सच मान लिया। लेकिन पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के के मोहम्मद, जिनकी मौजूदगी में खुदाई हुई थी, ने सेवानिर्वित होने पर अपनी पुस्तक में सच्चाई सामने रखने से जितने भी मंदिर विरोधी थे सब में मातम पसर गया। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि "मन्दिर कभी का बन गया होता अगर वामपंथियों और कांग्रेस ने खुदाई में मिले राममन्दिर के अनगिनत सबूतों को कोर्ट से नहीं छुपाया होता।" किसी भी कोर्ट ने सच्चाई छुपाने के आरोप में मंदिर विरोधियों को दण्डित नहीं किया, क्यों? क्या मजबूरी थी अदालत की?        
पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा में भगवान विष्णु की एक मूर्ति मिली है। यह मूर्ति यहाँ द्वारकेश्वर नदी से शनिवार (7 जून, 2025) को बरामद हुई है। भगवान विष्णु की यह मूर्ति करीब 3 फीट की है। इस मूर्ति में भगवान विष्णु का 12 भुजाओं वाला रूप है। पुरातत्वविदों ने कहा है कि यह भगवान विष्णु का लोकेश्वर रूप है।

यहाँ कई बार जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ भी मिल चुकी हैं। बाँकुड़ा की द्वारकेश्वर और कांगसावाती नदी की सभ्यता काफी प्राचीन बताई जाती है। वहीं इस बार नदी से रेत निकालते समय भगवान विष्णु की यह मूर्ति प्राप्त हुई है। यह मूर्ति एकदम सही अवस्था में है, इसमें कोई भी टूट-फूट नहीं हुई है।

लोगों ने कहा है कि इस इस्लामी आक्रान्ताओं से बचाने के लिए नदी में रखा गया होगा। पुरातत्वविद सुकुमार बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह मूर्ति असाधारण होने के साथ-साथ शिल्पकला का बेहतरीन उदाहरण भी है।

उनका कहना है कि अखंड अवस्था में मिली यह प्रतिमा ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक मूल्यवान भी है। बताया गया है कि स्थानीय हिंदुओं ने भगवान विष्णु की मूर्ति को मंदिर में स्थापित भी कर दिया है।