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किसी का फोकस ‘अंबेडकरवाद’ पर, किसी का ‘फ्री फिलिस्तीन’ पर: CJP प्रदर्शन से पनपे ‘इंफ्लुएंसर्स’ का अपना-अपना एजेंडा, जानिए कंटेंट की माइनिंग कर कैसे कमाए लाखों फॉलोअर्स

                                     CJP प्रदर्शन से जन्में इंफ्लुएंसर्स (फोटो साभार: Instagram)
जब से कॉकरोच पार्टी बनी तभी से सोशल मीडिया पर इनकी मंशा पर सवाल उठ रहे थे, राष्ट्रीय मीडिया ने भी उस समय गंभीरता से नहीं लिया। और न ही सरकार ने। असली वजह अमेरिकी लेखिका रेनी लिन ने भी बताया। क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी स्कूल की किताबों में मुगलों की इतनी तारीफ क्यों होती थी? अमेरिकी लेखिका रेनी लिन का एक बयान आजकल सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहा है! उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का खुलकर सपोर्ट किया है और एक बहुत बड़ा दावा किया है। 
रेनी का कहना है कि हमारी NCERT की पुरानी किताबें विदेशी आक्रमणकारियों के महिमामंडन से भरी पड़ी थीं।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर टिका कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन आखिरकार अपनी माँग पूरी होने के बाद खत्म हो गया। करीब डेढ़ महीने तक चले इस तथाकथित ‘छात्र आंदोलन’ ने सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई नए चेहरे खड़े कर दिए। इस दौरान कई पुराने इंफ्लुएंसर्स ने अपने लिए भरपूर कंटेन्ट तैयार किया, वहीं कई ऐसे लोग भी थे जिन्हें पहचान ही इस प्रदर्शन ने दिलाई।

किसी ने पीएम नरेंद्र मोदी को गाली देकर वायरल हुआ, किसी ने मीडिया को निशाना बनाकर फॉलोवर्स जुटाए, किसी ने प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने के वीडियो बनाए तो किसी ने पुलिस से बहस और टकराव को अपना कंटेन्ट बना लिया।

इनमें मोहम्मद जुनैद, हर्षित, उज्जवल, रिया अहिर और नीशू जैसे तथाकथित इंफ्लुएंसर्स शामिल हैं। जिनकी पोस्ट पर पहले दो-चार लाइन भी मुश्किल से आते थे, आज वही लाखों फॉलोअर्स के साथ मिलियन में रीच हासिल कर रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने में इंस्टाग्राम के बदले हुए एल्गोरिदम ने भी इनकी लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।

चिंता की बात यह है कि इन सभी का कंटेन्ट किसी न किसी एजेंडे के इर्द-गिर्द घूमता है। ऐसे में इन्हें फॉलो करने वाले लाखों युवा भी धीरे-धीरे उसी सोच और उसी नैरेटिव से प्रभावित हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से मिली लोकप्रियता ने इन लोगों को बड़ा मंच तो दे दिया है, लेकिन यह देखना भी जरूरी है किस उस मंच का इस्तेमाल किस मकसद और किस दिशा में किया जा रहा है।

नीशु आजाद

इस प्रदर्शन में ‘जय भीम’ के नारे तो जमकर लगे। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले दलित समाज से आने वाले अभिजीत दिपके ने भी खुद को ‘अंबेडकरवादी’ विचारधारा का प्रतिनिधि बताते हुए इसी सोच को आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनाया। लेकिन इसी प्रदर्शन से 15 साल की नीशू आजाद भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

नीशू का पहला वायरल वीडियो वही था, जिसमें वह एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा पर सवाल कर रही हैं, वहीं दूसरी वीडियो में वह CBSE और NEET की फुलफॉर्म तक नहीं बता पा रही थी। हैरानी की बात यह थी कि वह खुद 10वीं कक्षा की छात्रा है और उसी CJP प्रदर्शन का हिस्सा बनी हुई थी, जो NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा था।

ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नीशू को ट्रोल करना शुरू कर दिया। इसके बाद नीशू ने CJP प्रदर्शन के मंच पर जगह पाने के लिए अपने पिता पर हमले की खबर फैलाई। नीशू ने रोते हुए वीडियो बनाया कि उनके पिता को मारने वाले लोग ‘बीजेपी के अंधभक्त’ हैं, बिना उनकी नाम-पहचान जाने नीशू ने यह नैरेटिव गढ़ा और प्रदर्शन में शामिल लोगों को बीजेपी के खिलाफ भड़काया। यह देखा भी गया कि धीरे-धीरे यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था के नाम पर नहीं, बल्कि बीजेपी बनाम CJP हो गया, जिसमें विपक्षी दलों के अमूमन हर चेहरे ने भाग लिया।   

नीशू आजाद यहीं नहीं रुकी। और ज्यादा वायरल होने के लिए नीशू ने मीडियाकर्मियों को बयान देते हुए खुद को हिंदुओं के खिलाफ जहर तक उगला और एक दलित समाज से आते हुए भी नीशू खुद को ‘हिंदू’ मानने से इनकार कर दिया। और इतना ही नहीं, प्रदर्शन के अंत दिनों में नीशू का एक और वीडियो सामने आता है, जिसमें वह हाथ में समोसा दिखाते हुए लोगों को ‘मोदी की तेरहवीं’ का खाना खाने को कहती है।

वैसे तो इस लोकप्रियता के बाद अब नीशू के 383K फॉलोअर्स हैं, लेकिन यह जान लेते हैं कि प्रदर्शन से वायरल इंफ्लुएंसर बनी नीशू इस प्रदर्शन से पहले क्या कर रही थी? उसकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर नजर डालें तो प्रदर्शन से पहले भी नीशू का अधिकतर कंटेन्ट उन लोगों को रोस्ट करने पर केंद्रित था, जो हिंदू हितों की बात करते हैं। इस कंटेन्ट पर भी नीशू को ठीक-ठाक व्यूज आ जाते थे।

लेकिन इस तरह के कंटेन्ट पर शिफ्ट होने की वजह यह थी कि नीशू जब केवल ‘अंबेडकरवाद’ का बखान कर रही थी, तब उन्हें कोई नहीं पूछता था और तब वही किसी तरह की भी ‘इंफ्लुएंसर’ की कैटेगरी में उन्हें नहीं गिना जाता था।

मोहम्मद जुनैद

अभी अगर गूगल पर टाइप करें कि ‘कौन है जुनैद?’ तो गूगल का SEO आपको सबसे पहले जंतर-मंतर के CJP प्रदर्शन से वायरल हुए ‘जुनैद भाई’ के बारे में कंटेन्ट दिखेगा। ये जुनैद भाई वैसे तो एक मामूली वकील है, लेकिन प्रदर्शन में लोगों को मुफ्त खाना-पानी, मुफ्त दवाइयाँ देते जब इनकी वीडियो वायरल हुईं, तो कब ये सोशल मीडिया पर 1 मिलियन फॉलोअर के साथ इंफ्लुएंसर बन गए पता ही नहीं लगा।

मोहम्मद जुनैद की इंस्टाग्राम प्रोफाइल देखें, तो आज उनका हर वीडियो मिलियंस व्यूज पार कर रहा है। जुनैद के इंस्टाग्राम पर केवल CJP प्रदर्शन का ही कंटेन्ट दिखाई देता है, इससे पता लगता है कि वह भी CJP प्रदर्शन का एक मुख्य चेहरा रहे हैं। प्रदर्शन में CJP ने जुनैद को अपनी ‘सेकुलर’ विचारधारा पेश करने के लिए इस्तेमाल किया, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन में जय श्री राम के नारों पर बवाल के वीडियो भी खूब सामने आए।

प्रदर्शन के बाद इंफ्लुएंसर के रूप में उभरे मोहम्मद जुनैद का अब रोना सामने आ रहा है, जब पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की है। पूछताछ भी इसीलिए जिस पर लोगों ने शक जताया है, शक यह है कि एक मामूली वकील के तौर पर जुनैद ने हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों के लिए खाने की सुविधा कैसे जुटाई? पुलिस जब जुनैद को पूछताछ के लिए ले गई तो उन्होंने अपनी सोशल मीडिया रीच का इस्तेमाल कर इसे बवाल बनाकर पेश किया। मीडिया में रोते हुए खूब इंटरव्यू भी दिए। 

अब बात करें कि जुनैद प्रदर्शन से पहले क्या कर रहे थे, तो इनका पास्ट रिकॉर्ड ‘आंदोलनजीवी’ का ही रहा है। जुनैद की इंस्टाग्राम प्रोफाइल देखें तो वह पहले भी ‘फ्री फिलिस्तीन’ के प्रदशनों, बाबरी मस्जिद को दोबारा खड़ा करने, माँस की दुकानों को बंद करने का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे हैं। दूसरी तरफ जुनैद अपने सोशल मीडिया पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री जैसे हिंदू संतों का भी मजाक उड़ाते हैं। लेकिन CJP प्रदर्शन का चेहरा बनने से पहले उनका ये कंटेन्ट उतना वायरल नहीं था।

LGBTQ के उज्जवल और हर्षित

16 जून 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के पहले ही दिन LGBTQ समाज के दो चेहरे वायरल होते हैं। इनमें एक का नाम उज्जवल और दूसरे का नाम है हर्षित। छात्रों के इस प्रदर्शन में दोनों का एक वीडियो वायरल होता है, जिसमें उनकी पहचान को लेकर रिपोर्टर सवाल पूछता है तो दोनों बिफर जाते हैं। इस वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर कहीं न कहीं उन्हें एक वायरल कंटेन्ट के रूप में पहचान मिल जाती है और इसके जरिए दोनों ने खूब फॉलोवर्स भी इकट्ठा कर लिए।

CJP प्रदर्शन में भी यूट्यूब चैनलों और कई मीडिया संस्थानों ने उज्जवल और हर्षित के जमकर इंटरव्यू किए, जो उनकी लोकप्रियता बढ़ाने का जरिया बना। एक वीडियो में उज्जवल यह भी कहते नजर आए, “आपने मुझे मीठा बोल दिया… लेकिन एप्पल का फोन बनाने वाला टिम कुक भी गे है, ChatGPT का फाउंडर भी गे ही है, AI का फाउंडर भी गे ही है, इसीलिए हम लोग आपसे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं।” 

सोशल मीडिया फॉलोइंस की बात करें तो उज्जवल के अब इंस्टाग्राम पर 17.6K फॉलोअर्स और हर्षित के 134K फॉलोअर्स हैं। पहचान की बात करें तो हर्षित खुद को एक कलाकार और उज्जवल 19 वर्षीय एक छात्र बताता है। सोशल मीडिया गतिविधियों से पता लगता है कि दोनों ही ‘ट्रांसजेंडर बिल’ का विरोध भी कर चुके हैं। लेकिन CJP प्रदर्शन से मिली सोशल मीडिया पर लोकप्रियता अब उनकी एकमात्र पहचान बन चुकी है।

रिया अहिर

जंतर-मंतर की तर्ज पर ही मुंबई में हुए प्रदर्शनों से भी एक चेहरा सामने आया, जो अब खूब वायरल है। रिया अहीर, ये वो लड़की है जिनकी पुलिस वैन को एक हाथ से रोकते तस्वीर सामने आई थी। जो रोकने का प्रयास कम और फोटोशूट ज्यादा लग रहा था। दिलचस्प बात यह है कि रिया पेशे से मॉडल ही हैं। शायद यह बात उनको भी नहीं मालूम थी कि उनकी यह तस्वीर इतनी वायरल हो जाएगी कि मीडिया में इंटरव्यू देने पड़ेंगे। लोगों ने उनकी ये तस्वीर ‘महिला शक्ति’ के रूप में प्रस्तुत की। 

अब वे इस तस्वीर के पीछे संघर्ष की ‘मनगढ़ंत’ कहानी पूरे मीडिया में सुना रही हैं। रिया का कहना है कि जब उन्होंने देखा कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस वैन में भरकर ले जाया जा रहा है, तो वह पुलिस वैन के आगे आकर उसे रोकने लग गईं। और हैरानी की बात तो यह है कि तभी उनके कैमरामैन ने वो तस्वीर खींच ली, जिसे शेयर कर अब ‘महिला शक्ति’ का उदाहरण पेश कर रहे हैं।  

खैर रिया अहीर को प्रदर्शनों में मिली लोकप्रियता से उनके फॉलोअर्स की काउंटिंग अब 275K पहुँच गई है। उनका हालिया कंटेन्ट बेशक CJP प्रदर्शन की आवाज बनने और वायरल तस्वीर के फेम में दिए गए इंटरव्यू को लेकर हो, लेकिन बात करें उनके सोशल मीडिया के पास्ट रिकॉर्ड की तो उनका कंटेन्ट अधनग्न तस्वीरें अपलोड करना है। यहाँ तक कि ऐसी और तस्वीरें देखनी हैं तो उन्होंने ₹149 का इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन प्लान भी चालू किया है, जिसमें उनके 9250 सब्सक्राइबर्स भी हैं। कुल बात यह है कि ‘महिला शक्ति’ का उदाहरण बनने वाली रिया अहीर सोशल मीडिया पर ‘सॉफ्ट पॉर्न’ बेचती हैं।

कुल मिलाकर, CJP का यह प्रदर्शन सिर्फ सड़कों पर हुआ एक आंदलन नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया के लिए एक ऐसा मंच बन गया, जहाँ कई नए इंफ्लुएंसर्स पैदा हो गए। इन लोगों ने आंदोलन के हर पल को कंटेन्ट बनाया और देखते ही देखते लाखों लोगों तक अपनी पहुँच बना ली। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि ये लोग वायरल कैसे हुए, बल्कि इससे भी बड़ी सवाल यह है कि वायरल होने के बाद ये अपने उस प्रभाव का इस्तेमाल किस मकसद के लिए कर रहे हैं।

इनमें से कोई ‘अंबेडकरवाद’ के नाम पर अपनी बात रख रहा है, कोई ‘फ्री फिलिस्तीन’ जैसे मुद्दों को आगे बढ़ा रहा है, कोई हिंदुओं के खिलाफ बयान देकर लोकप्रियता कमा रहा है, तो कई LGBTQ की राजनीति को अपनी पहचान बना रहा है। हर किसी का अपना-अपना एजेंडा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन सबकी पहुँच अब लाखों युवाओं तक हो चुकी है। ऐसे में इनके हर वीडियो और हर बयान का असर भी उतनी ही तेजी से फैल रहा है।

यही वजह है कि इस पूरे प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर शायद सड़कों पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर देखने को मिलेगा। इस आंदोलन ने कुछ ऐसे इंफ्लुएंसर्स को जन्म दिया है, जिनकी सबसे बड़ी पहचान किसी उपलब्धि से नहीं, बल्कि विवाद, टकराव और एजेंडा आधारित कंटेन्ट से बनी है। आने वाले समय में ये चेहरे सिर्फ वायरल वीडियो नहीं बनाएँगे, बल्कि लाखों युवाओं की सोच और नैरेटिव को भी प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चिंता है।

25 सालों बाद हिन्दू आतंकवाद की सच्चाई सामने आई :‘कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद बोलने को कहा’: UPA सरकार में मंत्री रहे सुशील शिंदे ने खोल दी पार्टी की असलियत, पुराना वीडियो Viral

कांग्रेस आलाकमान सोनिया गाँधी के साथ पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे (फोटो साभार: IndiaToday)
केंद्र में कांग्रेस की सरकार में 2012 से 2014 तक गृह मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में शिंदे ‘भगवा आतंकवाद’ को लेकर बड़ा बयान दे रहे हैं। उन्होंने माना कि यह शब्द इस्तेमाल नहीं होना चाहिए था और इसके पीछे पार्टी का हाथ बताया। अब सच्चाई सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कांग्रेस को खूब लताड़ लगा रहे हैं।

वीडियो में सुशील कुमार शिंदे से जब पूछा गया कि ‘भगवा आतंकवाद' टर्म सही था या नहीं तब वह कहते हैं, “पार्टी (कांग्रेस) ने बताया था कि भगवा आतंकवाद बोलना है, मैंने वही किया। गलत तो था। मैं यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता था। ऐसा नहीं होना चाहिए था। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”

हालाँकि, सुशील शिंदे का यह बयान डेढ़ साल पुराना है। जब यूट्यूबर और पत्रकार शुभांकर मिश्रा ने सुशील कुमार शिंदे के साथ पॉडकास्ट किया था। अब इस वीडियो के एक अंश वायरल हो रहा है, जिसमें शिंदे ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे भद्दे प्रोपेगेंडा को गलत बताकर अपना कबूलनामा सौंप रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

अब डेढ़ साल बाद सोशल मीडिया पर शिंदे के इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया है। लोग इसे कांग्रेस की ‘झूठों’ से पर्दा उठाने और कांग्रेस की हिंदू-घृणा जैसी बातें कह रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का कबूलनामा बताया है। बीजेपी ने सवाल उठाया कि क्या यह सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कांग्रेस की एक सोची-समझी साजिश थी?

बीजेपी नेता डॉ. निखिल आनंद कहते हैं कि सुशील कुमार शिंदे का बयान कांग्रेस की वैचारिक सोच को उजागर करता है। उनके मुताबिक कांग्रेस और उससे जुड़ी विचारधारा ने हमेशा भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन आस्था को निशाना बनाया है तथा राजनीतिक हितों के लिए कट्टरपंथी ताकतों के साथ समझौता किया है। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों के प्रति सतर्क रहने और लोकतांत्रिक तरीके से उनका जवाब देने की बात कही।

कपिल बिश्नोई कहते हैं, “कांग्रेस पार्टी की हिंदुओं और भगवा रंग से नफरत किसी से ढकी छिपी नहीं है। रह रह कर ये नफरत किसी न किसी रूप में बाहर आ ही जाती है।”

एक्स हैंडल ‘जनार्दन मिश्रा’ ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “अब तो पूर्व कांग्रेसी भी सच बोलने लगे लेकिन चमचे फिर भी नहीं मानेगे…!!”

‘भगवा आतंकवाद’ पर शिंदे ने क्या कहा था?

भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने साल जनवरी 2013 में कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस बयान को लेकर उनकी खूब आलोचना हुई थी। हालाँकि, इन आलोचनाओं के बाद भी वे अपने बयान पर कायम थे।

तब गृहमंत्री शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है, कोई दूसरी बात नहीं कही है।” दरअसल, 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान शिंदे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरोप लगाया था।

अपने बयान के पीछे शिंदे ने एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं। समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”

सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।

भगवा आतंकवाद पर केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

US-इजरायली हमले के बाद भारतीयों ने खुलकर की ईरान की मदद, लेकिन ईरानी जला रहे तिरंगा झंडा: Video पर भड़के आम लोग, नमकहरामी का लगा रहे आरोप

                                                         साभार: एक्स @SouleFacts
ईरान के लिए छाती पीटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों और खुलकर मदद करने वालों अगर जरा भी शर्म बची है तो कहीं डूब मरो। जिन नमकहरामों के लिए तुमने मदद भेजी देखो तुम्हारे ही देश के झंडे को जलाया जा रहा है। क्या भारतीय झंडे के अपमान के लिए ईरान के लिए छाती पीट रहे हो और अपनी मेहनत की कमाई लुटा रहे हो? यहाँ तो बोलते हो हम गरीब हैं, मजलूम हैं और आतंकवाद को पालने वाले को मदद भेज रहे हो? क्या किसी ने ईरान उच्चायोग से विरोध जताया?      

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भारत में कई कट्टरपंथियों ईरान के समर्थन में आवाज उठाई थी। सोशल मीडिया पर ईरान के पक्ष में पोस्ट किए गए, मदद की अपील की गई और कुछ लोगों ने आर्थिक सहायता भेजने की भी बात कही। लेकिन अब X पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो भारतीय यूजर्स के बीच नाराजगी की वजह बन गए हैं।

वायरल वीडियो में कुछ लोग भारत का झंडा जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई यूजर्स का कहना है कि भारत ने कभी ईरान पर हमला नहीं किया और न ही अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान का हिस्सा बना, फिर भी भारत का झंडा जलाना समझ से परे है।

पहले वायरल पोस्ट में एक यूजर ने लिखा, “हिंदुओं और हिंदू धर्म से अब्राहमिक पंथों के लोग स्वाभाविक रूप से नफरत करते हैं।” ऐसे ही एक दूसरे पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जब भारत ने ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, तब आखिर भारतीय तिरंगे को क्यों जलाया जा रहा है।

यूजर ने कहा कि भारत कभी भी अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने वालों में शामिल नहीं रहा। एक अन्य पोस्ट में एक यूजर ने दावा किया कि ऐसे वीडियो साबित करते हैं कि भारत विरोधी मानसिकता रखने वाले लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पोस्ट में कहा गया कि भारत के प्रति नफरत कुछ लोगों की स्वाभाविक सोच बन चुकी है।

ऐसे ही एक यूजर ने लिखा कि भारतीयों ने ईरान की मदद के लिए धन और समर्थन दिया, लेकिन बदले में भारतीय झंडे का अपमान देखने को मिला।

यूजर ने इसे नमकहरामी बताते हुए उन लोगों की आलोचना की जो अभी भी ईरान के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं।

अगर दलित-जाट-तमिल कोई नहीं है हिंदू…नोमानी बताओ कि शिया, सुन्नी, वहाबी, अहमदी, पठान और पासमांदा मुस्लिम हैं? अगर मुस्लिम है तो एक ही मस्जिद में नमाज क्यों नहीं पढ़ सकते? मौलाना सज्जाद नोमानी खुले में कर रहा भारतीयों को तोड़ने का प्रयास: सनातनियों से करता है घृणा, तालिबानियों को भेजता है सलाम

                                                   सज्जाद नोमानी (फोटो साभार - यूट्यूब/)
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी का एक विवादित बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही है। वायरल हो रही एक वीडियो क्लिप में वह दावा करते हैं कि भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। किसी भी परिस्थिति में हिंदुओं को बहुसंख्यक नहीं माना जा सकता।

नोमानी जिस तरह हिन्दुओं को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है उसके जवाब में हिन्दुओं को भी इन कट्टरपंथियों से पूछना चाहिए कि जब शिया, सुन्नी, वहाबी, अहमदी, पासमांदा आदि दूसरे फिरके मुस्लिम हैं तो एक मस्जिद में नमाज क्यों नहीं पढ़ सकते? क्यों नहीं एक ही कब्रिस्तान में मुर्दे को दफ़न किया जा सकता? इस कट्टरपंथी को मालूम है कि हिन्दू को जाति बांटकर विभाजित किया जा सकता है, लेकिन इन कट्टरपंथियों अपनी मुस्लिम कौम से सभी फिरकों को एक ही मस्जिद में नमाज पढ़ने और सभी के मुर्दे एक ही कब्रिस्तान में दफ़न होने चाहिए।

 

इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कुछ कालनेमि हिन्दू भी प्रोग्राम में शामिल थे,  क्योकि उनकी पार्टियों को इनके वोट चाहिए। वीडियो में देखिए कितनी मुस्लिम महिलाएं हिजाब, नकाब या बुर्के हैं। दूसरे, क्या शिया, सुन्नी और वहाबी आदि पचासों फिरकों के लिए अलग मस्जिद और कब्रिस्तान के लिए जगह क्या land jihad नहीं?               

मौलाना नोमानी ने अपने इस दावे के पीछे तर्क देते हुए देश के कई बड़े सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को हिंदू धर्म के दायरे से बाहर आते हैं। उन्होंने कहा, सिख, ईसाई और बौद्ध ये तो हिंदू हैं ही नहीं। इनके अलावा अनुसूचित जाति (SC), जाट और जनजातीय लोग भी हिंदू नहीं हैं। न ही तमिलनाडु के लोग और लिंगायत खुद को हिंदू मानते हैं। 

भाषण में नोमानी की दिखी हिंदू घृणा

अपने भाषण में नोमानी ने केवल सामाजिक वर्गीकरण ही नहीं किया, बल्कि देश की राजनीति और मुस्लिम समुदाय के रुख पर भी गहरी निराशा और हताशा व्यक्त की। उन्होंने कहा “हमने हिंदुओं को ‘सेकुलर’ (धर्मनिरपेक्ष) और ‘फासिस्ट’ (फासीवादी) श्रेणियों में बाँट दिया। हम राजनीतिक समर्थन के लिए सेकुलर हिंदुओं पर निर्भर रहे, लेकिन इन समूहों ने आखिरकार देश की कमान उन लोगों के हाथों में सौंप दी जिन्हें हम फासिस्ट हिंदू कहते हैं। दोनों ने ही मिलकर हमारे मकसद को नुकसान पहुँचाया।”

 सज्जान नोमानी का यह भाषण 2 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘मिल्लत टाइम्स कॉन्क्लेव 2026’ के समापन सत्र के दौरान दिया गया था।

यह कार्यक्रम इस मीडिया हाउस की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रखा गया था। इस कार्यक्रम में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद, इमरान प्रतापगढ़ी, समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन चौधरी और भाजपा नेता यासिर जिलानी जैसे कई बड़े राजनेता और पत्रकार शामिल थे।

मौलाना नोमानी ने जोर देकर कहा कि उनका यह बयान हवा-हवाई नहीं है, बल्कि देश भर में धार्मिक, जातिगत और आदिवासी पहचानों पर किए गए उनके तीन दशकों के सफर और शोध पर आधारित है।

पहले भी उगल चुका है हिंदुओं के लिए जहर

 हिंदुओं को तोड़ने और हिंदुओं को बाँटने की बात करने वाला सज्जाद नोमानी का ये पहला विवादित बयान नहीं है। ये वही सज्जाद नोमानी है जिसे तालिबान के आने पर खुशी हुई थी और जो बच्चियों की शिक्षा का विरोधी रहा है।

साल 2023 में नोमानी की वीडियो सामने आई थी। अपनी वीडियो में वह कहता सुनाई पड़ रहे थे, “पाक रमजान की रात में उन लोगों पर लानत भेजता हूँ जो अपनी बच्चियों को अकेले कोचिंग सेंटर या कॉलेज भेजते हैं। अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा।”

इतना ही नहीं साल 2021 में तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब सज्जाद नोमानी ने भारत में इसका स्वागत किया था। मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान की तारीफों के पुल बाँधते हुए तालिबानियों को सलाम भेजा था।

सज्जाद नोमानी की हिंदू घृणा  और भारत को तोड़ने का प्रयास

अजीब बात है कि एक तरफ सज्जाद नोमानी खुलकर भारत के हिंदुओं के विरुद्ध अपनी घृणा जाहिर करता है, उन्हें बाँटने की बात करता है, उनके अस्तित्व पर सवाल उठाता है। दूसरी तरफ खुलकर तालिबान के लिए अपना समर्थन देता है, इस्लामी कट्टरपंथ की पैरवी करता है, बच्चियों की पढ़ाई को हराम बताता है, बड़े-बड़े नेता, लेखक, विचारक उसके भाषणों को सुनते हैं और स्वरा भास्कर जैसे लोग तो मुस्लिमों के बीच राजनीति करने के लिए अपना पहनावा तक बदलकर इनके आगे सरेंडर कर देते हैं। लेकिन फिर भी भारत के लिबरल उसे बुद्धिजीवी मानकर इतना बड़ा मंच देते हैं। उसे सुनने के लिए बड़ी तादाद में लोग आते हैं।

कहना गलत नहीं है कि जिन ‘सेकुलर हिंदुओं’ ने कभी अपनी उदारता दिखाने के लिए नोमानी को ‘महान स्कॉलर’ के रूप में स्थापित किया, आज वही स्कॉलर मंचों से खुलेआम हिंदुओं के अस्तित्व और उनकी जनसांख्यिकीको चुनौती दे रहे हैं। आज मंच से खुलेआम इवकी नफरत जगजाहिर हो रही है।

नोमानी का यह दावा कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं हैं और जो खुद को हिंदू मानते हैं वो असल में अलग-अलग पहचानों में बंटे हैं… कोई साधारण बयान नहीं है।

ये हिंदुओं के लिए ही सीखने का समय है कि जब हम खुद को राजनीति जाति और क्षेत्रो में खुद को बाँटते हैं, तभी नोमानी जैसे लोग इसी कमजोरी को पकड़कर हम पर चोट करते हैं। खुलकर हम भारतीयों को तोड़ने का प्रयास करते हैं और ये संदेश देते हैं कि देश में हिंदू आबादी बहुसंख्यक नहीं है और जो लोग खुद को हिंदू मानते हैं वो अलग हैं। इसका सीधा उद्देश्य बहुसंख्यक समाज के भीतर एक ऐसा हीनभावना और भ्रम पैदा करना है जिससे वे अपनी सामूहिक ताकत को भूल जाएँ और कट्टरपंथी ताकतों का गजवा-ए-हिंद का रास्ता आसान हो सके।