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UNSC : आतंकवाद-रोधी समिति सहित तीन समितियों की अध्यक्षता करेगा भारत, पाकिस्तान पर और कसेगा शिकंजा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को तीन अहम जिम्मेदारियां मिलने जा रही हैं। भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन के तीन प्रमुख सहायक निकायों की अध्यक्षता करेगा। इसमें तालिबान प्रतिबंध समिति, आतंकवाद-रोधी समिति (2022 के लिए) और लीबिया प्रतिबंध समिति शामिल है। इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने दी है।

टीएस तिरुमूर्ति ने शुक्रवार (8 जनवरी) को कहा कि भारत 2022 में यूएनएससी की आतंकवाद-रोधी समिति की अध्यक्षता करेगा। इस समिति की अध्यक्षता भारत के लिए खास मायने रखती है। भारत आतंकवाद से लड़ने में सबसे आगे है, विशेष रूप से सीमा पार से आतंकवाद, बल्कि इसके सबसे बड़े पीड़ितों में से एक है। ऐसे में आतंकवाद की रोकथाम के मामले में भारत की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। पाकिस्तान जैसे आतंकवाद परस्त देशों और आतंकी संगठनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने के प्रयास तेज हो सकते हैं।

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि तालिबान प्रतिबंध समिति हमेशा से भारत के लिए प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि तालिबान प्रतिबंध समिति हमेशा से अफगानिस्तान के शांति, सुरक्षा, विकास और प्रगति के लिए हमारे मजबूत हित और प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते भारत के लिए पहली प्राथमिकता है।

तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि जब लीबिया और शांति प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित होगा, तो भारत एक एक महत्वपूर्ण मोड़ पर लीबिया प्रतिबंध समिति की कुर्सी को संभालेगा। लीबिया प्रतिबंध समिति को 1970 की प्रतिबंध समिति भी कहा जाता है, जो परिषद की एक बहुत महत्वपूर्ण सहायक निकाय है। यह समिति पेट्रोलियम उत्पादों के अवैध निर्यात को रोकने के लिए दो प्रतिबंधों को लागू करती है, जिसमें परिसंपत्तियों को जब्त करना और यात्रा प्रतिबंध शामिल है।

इन समितियों के अलावा भारत अगस्त 2021 में और फिर 2022 में यूएनएससी (UNSC) की अध्यक्षता करेगा। UNSC की अध्यक्षता हर सदस्य द्वारा एक महीने के लिए की जाती है। भारत के अलावा केन्या, मैक्सिको, आयरलैंड, और नॉर्वे गैर-स्थायी सदस्य के रूप में यूएनएससी में शामिल हुए हैं।

भारत ने हाल ही में UNSC में एक अस्थायी सदस्य के रूप में अपने दो साल के कार्यकाल का शुभारंभ किया। भारत का तिरंगा न्यूयॉर्क सिटी के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 4 जनवरी से फहराने लगा है। झंडा फहराने के बाद टीएस तिरुमूर्ति ने कहा था कि यह मेरे देश के लिए और मेरे प्रतिनिधिमंडल के लिए गर्व का क्षण है।

आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी समस्या, मददगार देशों को ठहाराया जाए दोषी : BRICS सम्मेलन में नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 17, 2020 को ब्रिक्स
(BRICS) सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान आतंकवाद को दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए नाम लिए बिना पाकिस्तान पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादियों को समर्थन और सहायता देने वाले देशों को भी दोषी ठहराया जाए, और इस समस्या का संगठित तरीके से मुकाबला किया जाए।”

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर जोर देते हुए कहा है कि इन संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह है कि समय के साथ इनमें बदलाव नहीं आया। ये अभी भी 75 साल पुरानी सोच पर हैं। भारतीय सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। इसमें हमें ब्रिक्स साथियों के सहयोग की जरूरत है।

मोदी ने कहा, ”हमने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत एक व्यापक सुधार प्रक्रिया को शुरू किया है। यह कैंपेन इस विश्वास पर आधारित है कि आत्मनिर्भर भारत कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फोर्स मल्टीपल्यार हो सकता है और ग्लोबल वैल्यू चेन्स में मजबूत योगदान दे सकता है। इसका उदाहरण हमने COVID के दौरान भी देखा, जब भारतीय फार्मा उद्योग की क्षमता के कारण हम 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाइयाँ भेज पाए। हमारी वैक्सीन उत्पादन और डिलीवरी क्षमता भी इस तरह मानवता के हित में काम आएगी।”

12वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने एक तरफ जहाँ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जमकर तारीफ की तो दूसरी तरफ चीनी राष्ट्रपति का जिक्र भी नहीं किया। ब्रिक्स की भूमिका को अहम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स संगठन में शामिल देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के इंजन है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस वर्ष दूसरे विश्व युद्ध की 75वीं वर्षगाँठ पर हम वीरगति पाए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। भारत से भी 2.5 मिलियन से अधिक वीर इस युद्ध में यूरोप, अफ्रीका, और साउथ ईस्ट एशिया जैसे कई फ्रंट्स पर सक्रिय थे।” प्रधानमंत्री ने कहा, “2021 में  BRICS के 15 वर्ष पूरे हो जाएँगे। पिछले सालों में हमारे बीच लिए गए विभिन्न निर्णयों का मूल्यांकन करने के लिए एक रिपोर्ट बना सकते हैं। 2021 में अपनी अध्यक्षता के दौरान हम BRICS के तीनों स्तंभों में intra-BRICS सहयोग को मजबूत करने का प्रयत्न करेंगे।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व एक संकट से गुजर रहा है। ब्रिक्स में सुधार की जरुरत है। IMF, WTO, WHO में भी सुधार की जरुरत है।

मोदी ने आगे कहा, “इस कठिन कार्यकाल में, रूस के नेतृत्व में, लोगों से लोगों के कनेक्शन को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की गईं जैसे कि ब्रिक्स फिल्म समारोह, युवा वैज्ञानिकों की बैठकें आदि की गई। ब्रिक्स के अपने नेतृत्व के दौरान, भारत ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देगा।” 

ब्रिक्स सम्मेलन में विश्व युद्ध में वीरगति को प्राप्त भारतीयों को स्मरण करने पर एवं अन्य गंभीर समस्याओं को उजागर करने पर ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं :-

UNSC में कश्‍मीर पर चीन-पाक हारे, भारत ने कहा: वार्ता के लिए आतंकवाद रोके पाकिस्तान

UNSC में कश्‍मीर पर चीन-पाक हारे, भारत ने कहा: वार्ता के लिए आतंकवाद रोके पाकिस्तानसंयुक्त राष्ट्र: जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के मामले पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुई बैठक के बाद भारत ने पाकिस्तान से शुक्रवार को कहा कि उसे वार्ता आरंभ करने के लिए आतंकवाद रोकना होगा. चीन और पाकिस्तान के अनुरोध पर अनौपचारिक बैठक पूरी होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने मीडिया से कहा कि भारत का रुख यही था और है कि संविधान के अनुच्छेद 370 संबंधी मामला पूर्णतय: भारत का आतंरिक मामला है और इसका कोई बाह्य असर नहीं है.
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग कश्मीर में स्थिति को ‘भयावह नजरिए’ से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वास्तविकता से बहुत दूर है. उन्होंने कहा कि वार्ता शुरू करने के लिए आतंकवाद रोकिए. अकबरूद्दीन ने कहा कि एक विशेष चिंता यह है कि एक देश और उसके नेतागण भारत में हिंसा को प्रोत्साहित कर रहे हैं और जिहाद की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं. हिंसा हमारे समक्ष मौजूदा समस्याओं का हल नहीं है. बैठक के बाद चीनी और पाकिस्तानी दूतों के मीडिया को संबोधित करने के बारे में अकबरूद्दीन ने कहा कि सुरक्षा परिषद बैठक समाप्त होने के बाद हमने पहली बार देखा कि दोनों देश (चीन और पाकिस्तान) अपने देश की राय को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर में धीरे-धीरे सभी प्रतिबंध हटाने के लिए प्रतिबद्ध है. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने बैठक के बाद कहा कि बैठक में ‘कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी’ गई. लोधी ने कहा कि यह बैठक होना इस बात का सबूत है कि इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना गया है. बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने भारत और पाकिस्तान से अपने मतभेद शांतिपूर्वक सुलझाने और ‘एक दूसरे को नुकसान पहुंचा कर फायदा उठाने की सोच त्यागने’ की अपील की.

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मामले पर चीन का रुख बताते हुए कहा कि भारत के एकतरफा कदम ने उस कश्मीर में यथास्थिति बदल दी है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विवाद समझा जाता है. कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने और लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम ने चीन के संप्रभु हितों को भी चुनौती दी है और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाने को लेकर द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है. चीन काफी चिंतित है.

रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलिंस्की ने बैठक कक्ष में जाने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का मानना है कि यह भारत एवं पाकिस्तान का ‘द्विपक्षीय मामला’ है. उन्होंने कहा कि बैठक यह समझने के लिए की गई है कि क्या हो रहा है. उल्लेखनीय है कि बंद कमरे में बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं होता और इसमें बयानों का शब्दश: रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. विचार-विमर्श सुरक्षा परिषद के सदस्यों की अनौपचारिक बैठकें होती हैं. 
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान से चल रहे तनाव के बीच भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पोख.....

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, आखिरी बार सुरक्षा परिषद ने 1965 में ‘भारत-पाकिस्तान प्रश्न’ के एजेंडा के तहत जम्मू कश्मीर के क्षेत्र को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद पर चर्चा की थी. हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि उनके देश ने, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की औपचारिक मांग की थी.

अनुच्छेद 370 : पाकिस्तान भारत की इन हस्तियों को मानता है अपना पैरोकार

पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। पाकिस्तान सरकार की ओर से भारत को हमले तक की धमकी दी गई। वैश्विक मंच पर भारत के इस आंतरिक मसले में दखलअंदाजी करते हुए पाकिस्तान ने इसे गलत साबित करने की कोशिश की, लेकिन उसकी ये कोशिश उस पर ही भारी पड़ती नजर आई। धारा 370 खत्म करने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कवायद में जुटा, परन्तु सब तरफ से केवल निराशा ही हाथ लगी। लेकिन अब उसने भी मान लिया है कि उसे कहीं से कोई उम्मीद मिलती नहीं दिख रही है। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से माना कि संयुक्त राष्ट्र में कोई हार लेकर नहीं खड़ा है । इस मसले पर उन्हें खासा संघर्ष करना होगा।
पाकिस्तान ने मानी हार 
पाकिस्तानी मंत्री ने लोगों को अकसाने वाला बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है। हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। आपको संघर्ष करना होगा। अभी कुछ दिन पूर्व, शाह महमूद कुरैशी ने विपक्षी दलों से कश्मीर पर एक साथ आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूरा पाकिस्तानी राष्ट्र और राजनीतिक नेतृत्व कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट है और कश्मीरियों के समर्थन में 14 अगस्त को एक आवाज सुनाई देगी।
दुनियाभर के किसी भी देश से समर्थन नहीं मिलने से बौखलाए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस मसले पर जज्बात उभारना बहुत आसान है, मुझे दो मिनट लगेंगे। उन्होंने कहा कि 35-36 साल से सियासत कर रहा हूं,ऐसा करना मेरे लिए बाएं हाथ का काम है। इस मसले पर जज्बात उभारना आसान है और ऐतराज जताना उससे भी आसान है।


पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माकूल समर्थन नहीं मिल पा रहा है। इसलिए, अब उसे कुछ भारतीयों में ही उम्मीद की किरण दिखाई पड़ रही है। पाकिस्तान ने भारत में पल रहे उसके समर्थकों या दूसरे अर्थों में कहा जाये जयचन्द ही भीतरघात लगाकर हमारे मकसद को पूरा करवा सकते हैं। कुछ तो  मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान आकर मिन्नतें करते थे, क्यों न अब "घर का भेदी लंका ढहाहे" नीति अपनाई जाए। पाकिस्तान के लोगों को लगने लगा है कि भारत की कुछ बड़ी हस्तियां, राजनेता और राजनीतिक पार्टियां उनसे सहानुभूति रखते हैं। ऐसे में वहां यह मांग होने लगी है कि पाकिस्तान को भारत को घेरने के लिए अन्य विकल्पों के अलावा उसके इन भारतीय पैरोकारों का भी समर्थन हासिल करने के लिए पूरजोर कोशिश करनी चाहिए। पाकिस्तान को पक्का यकीन है कि जम्मू-कश्मीर जैसे राष्ट्रीय मसलों पर भी भारत में अपनी ही सरकार और प्रधानमंत्री की टांग खींचने वाले हस्तियों की फेहरिस्त लंबी है।
पाकिस्तान को इनसे है बड़ी उम्मीद 
पाकिस्तान कुछ भारतीयों से उम्मीद लगाए बैठा है तो वह बेवजह भी नहीं है। ये सारे के सारे लोग और सारी की सारी पार्टियां पहले दिन से ही ऐसा बयान दे रहे हैं, जिससे पाकिस्तान को ही फायदा मिल रहा है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति तो ये हो चुकी है कि इस मुद्दे पर वह लगभग विभाजन के मुहाने पर खड़ी है। लेकिन, फिर भी उसके कुछ नेता कश्मीर के मुद्दे पर ऐसी लाइन ले रहे हैं, जिससे भारत को ही नुकसान हो सकता है। संसद में भी इस मुद्दे पर कांग्रेस, सीपीआई-सीपीएम और टीएमसी जैसी पार्टियां अपना विरोध जता चुकी हैं। सीपीएम महासचिव ने तो जमीनी हालात का जायजा लेने के नाम पर कश्मीर पहुंचने की भी कोशिश की थी। जबकि, उन्हें पूरा इल्म है कि अभी वहां हालात को सामान्य करने में कुछ वक्त लग सकता है। अरुंधति रॉय और सागरिका घोष जैसे पत्रकार तो विवादास्पद मुद्दों पर अलग राय रखने के लिए हमेशा ही सुर्खियों में रही हैं। शायद यही वजह है कि पाकिस्तानियों को भले ही अपनी सरकार के राजनयिक सूझबूझ और अपनी आर्मी की ताकत पर भरोसा नहीं है, लेकिन मुट्ठी भर भारतीयों से ज्यादा उम्मीद है।
जबकि जम्मू-कश्मीर पर भारत के कदम से बौखलाये पाकिस्तान ने अब भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी संस्था ने भारतीय कलाकारों को दिखाने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक अधिकरण ने 14 अगस्त को एक पत्र जारी करते हुए प्रतिबंध की घोषणा की है। नियामक ने कहा कि डिटॉल सॉप, सर्फ एक्सल पाउडर, पेंटिन शैम्पू, हेड एंड शॉल्डर शैम्पू, लाइफबॉय शैम्पू, फॉग बॉडी स्प्रे, सनसिल्क शैम्पू, नॉर नुडल्स, फेयर एंड लवली फेश वॉश जैसे उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे पूर्व राजनायिक सम्बन्ध, व्यापारिक सम्बन्ध और भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा चुका है, उसके बावजूद भी पाकिस्तान समर्थक भारतीयों को पाकिस्तान का समर्थन करने में शर्म नहीं आती। 
दूसरे यह कि कल तक आतंकवाद से जो पाकिस्तान भारत को डरा कर रखे हुए था, आज मोदी सरकार की आतंकवाद पर कार्यवाही से वही पाकिस्तान डर के साये में रहने को मजबूर हो गया है। जिस देश से सहायता माँग रहा है, वही देश भारत के आंतरिक मामले में हाथ डालने से पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे, और भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थक पाकिस्तान को समर्थन देकर, अपने ही राष्ट्र से खिलवाड़ कर रहे हैं, आखिर ऐसी छिछोरी राजनीती क्या देश का भला करेगी? 
लाल किले के प्राचीर से स्वतन्त्रता दिवस पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सम्बोधन में अनुच्छेद 370 के समर्थकों से पूछा कि "यदि अनुच्छेद 370 और 35A हितकारी था, फिर किस आधार पर इसे अस्थायी रखे हुए थे, क्यों नहीं इसे स्थायी किया गया?"   
सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ- मुशाहिद हुसैन 

पाकिस्तान के लोग जिन भारतीयों के आसरे बैठे हुए हैं, ये खुलासा वहां हुए एक टीवी डिबेट से हुआ है। इसमें पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ, पत्रकार और जियो स्ट्रैटजिस्ट मुशाहिद हुसैन ने ये दावा किया कि भारतीय लेखकर अरुंधति रॉय, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममत बनर्जी, सोनिया गांधी की कांग्रेस पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ सहानुभूति रखते हैं। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो टीवी पर हुए बहस के दौरान एंकर ने मुशाहिद से पूछा के कश्मीर के लोगों का कथित 'दुर्भाग्य' कैसे खत्म होगा? इसके जवाब में हुसैन बोले, भारत बहुत बड़ा देश है और हर कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक नहीं है। उन्होंने कहा, "इंडिया बहुत बड़ा मुल्क है। कई हिंदुस्तान के लोग आपके साथ सहानुभूति रखने वाले भी हैं, अरुंधति रॉय है, ममता बनर्जी है, कांग्रेस पार्टी है, कम्यूनिस्ट पार्टी है....लेफ्ट पार्टियां हैं...दलित पार्टियां हैं.....हिंदुस्तान....सारे लोग तो नहीं हैं मोदी के साथ ....."
14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' मनाएगा पाकिस्तान 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अपने स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को 'कश्मीर एकता दिवस' और 15 अगस्त को 'काला दिवस' मनाने का ऐलान किया है। दरअसल, जब से जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म किया गया है और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों का दर्जा दिया गया है, पाकिस्तान आपे से बाहर हो चुका है। वह अपनी अंदरूनी आर्थिक तंगी से जनता का ध्यान हटाने के लिए कश्मीर के नाम पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश में लगा हुआ है। वह अपनी सेना को भी तैयार कर रहा है और आतंकियों की फौज को भी भारत में घुसपैठ कराने की ताक में लगा हुआ है। पाकिस्तान को लग रहा है अगर भारत के कदम से कश्मीर में शांति कायम हो गई तो उसके नेताओं का वह दानापानी ही उठ जाएगा, जिसके नाम पर उनकी रोजी-रोटी टिकी हुई है।
सोच ले पाकिस्तान- सेनासोच ले पाकिस्तान- सेना 

इस बीच इंडियन आर्मी चीफ जनरन बिपिन रावत ने पाकिस्‍तान को चेतावनी दी है। जनरल रावत ने कहा है कि अगर पाकिस्‍तान युद्ध भड़काना चाहता है तो फिर उसे हमारी प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना होगा। आर्मी चीफ जनरल रावत ने कहा है, 'अगर एलओसी को दुश्‍मन फिर से सक्रिय करना चाहता है तो यह उसकी मर्जी है। हर कोई सावधानी और सुरक्षा के लिए सेना तैनात करता है और ऐसे में हमें इस बात से चिंतित नहीं होना चाहिए। सेना हमेशा जवाब देने के लिए तैयार है।' सेना प्रमुख जनरल रावत की मानें तो सेना और कश्‍मीरी नागरिको के बीच होने वाला संवाद बिल्‍कुल सामान्‍य है। सेना पहले भी उनसे बिना बंदूक के मिलती थी और उम्‍मीद है कि आगे भी ऐसा होता रहेगा। सेना प्रमुख के शब्दों में, '70 और 80 के दशक में सेना और कश्‍मीर के लोगों के बीच जैसा भाई-चारा रहता था, सेना फिर से उसी तरह का रिश्‍ता कश्‍मीर के लोगों के साथ बनाना चाहती है।' इससे पहले चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्‍लन ने भी पाक को चेतावनी दी है। उन्‍होंने आगाह किया है कि अगर घाटी में कोई भी शांति भंग करने के लिए आएगा तो हम उसे खत्‍म कर देंगे। इस बीच पाकिस्तान के नापाक मंशा को नाकाम करने के लिए इंडियन नेवी की तरफ से वॉरशिप्‍स को भी हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। पाकिस्‍तान से सटे 754 किलोमीटर की तटीय सीमा पर संभावित हमले के मद्देनजर नेवी चौकन्‍नी है।
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एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक स्कॉलर ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। इराकी मूल के ऑस्ट्.....

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आर.बी.एल.निगम अनुच्छेद 370 का विरोध करना, कांग्रेस के लिए मौत का कुआँ बनने जा रहा है। ठीक उसी भांति जिस तरह सर्जिकल और ए...

पाकिस्‍तान का आतंकी चेहरा फिर बेनकाब, जैश चीफ मसूद अजहर समेत 6 टॉप कमांडरों को छिपाया

पाकिस्‍तान का आतंकी चेहरा फिर बेनकाब, जैश चीफ मसूद अजहर समेत 6 टॉप कमांडरों को छिपायापाकिस्‍तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक पाकिस्‍तानी सेना ने आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्‍मद के हेडक्‍वार्टर को कंट्रोल में लेने से पहले बड़ी साजिश को अंजाम दिया है पाकिस्‍तानी सेना ने पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर समेत 6 टॉप कमांडरों को सुरक्षित स्‍थान पर छिपा लिया है खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्‍मद के चीफ मसूद अजहर को पाकिस्‍तानी सेना ने आईएसआई के सेफ हाउस में छिपाया है 
भारत की कार्रवाई से डरे पाकिस्तान ने जैश मुख्यालय को नियंत्रण में ले लिया है। जैश का मुख्यालय पाकिस्तान के बहावलपुर में है। पंजाब सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के मुख्‍यालय को अपने नियंत्रण में लिया है। जैश ने ही पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। पाकिस्तान को इस कार्रवाई को नया ड्रामा माना जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान आतंकी मसूद अजहर को बचाने की कोशिश में है। बहावलपुर में ही पाकिस्तान सेना का 31 कोर का मुख्यालय है 
पाकिस्तान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने एक बयान में कहा, "पंजाब सरकार ने जैश के मुख्यालय को अपने कब्जे में ले लिया है और अपना प्रशासक वहां पर तैनात कर दिया है।" प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई फरवरी 21 को प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई एनएससी की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद की गई। प्रवक्ता के मुताबिक, फिलहाल 600 छात्र इस मुख्यालय में पढ़ते हैं और 70 शिक्षक तैनात हैं। पंजाब पुलिस कैंपस को सुरक्षा प्रदान कर रही है 
पाकिस्तान ने की 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाली हरकत, UN से कहा- 'मुझे भारत से बचाइए'
मुझे भारत से बचाइए : यूएन में पाकिस्तान 
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है, जिसमें भारत पर क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया है पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (एफओ) ने शुक्रवार (22 फरवरी) को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी 
यह कदम ऐसे में उठाया गया है जब एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र की शक्तिशाली संस्था ने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का नाम लेकर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी संगठन द्वारा किए गए ‘‘जघन्य’’ हमले की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत बिना किसी सबूत के पुलवामा हमले के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगा रहा है 
पुलवामा हमले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में जैश-ए-मोहम्मद का नाम और हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लाने की अपील समेत वह विशेष भाषा प्रयोग की गई है, जो भारत ने अपने सहयोगी देशों के माध्यम से प्रस्तावित की है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार (22 फरवरी) को इसकी जानकारी दी 
चीन समेत 15 स्थायी और अस्थायी सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद ने भारत के प्रति एकजुटता एवं समर्थन जताने के लिए पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ‘‘जघन्य एवं कायराना’’ आतंकवादी हमले की ‘‘कड़े शब्दों में’’  निंदा की 
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जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के मु.....

यूएनएससी ने प्रस्ताव में इस बात को भी दोहराया कि हर प्रकार का आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के समक्ष सबसे गंभीर खतरों में से एक है। परिषद ने आतंकवाद की इन निंदनीय करतूतों को अंजाम देने वाले, इनके आयोजकों, वित्त पोषकों और प्रायोजकों को जिम्मेदार ठहराए जाने और न्याय के दायरे में लाए जाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। सुरक्षा परिषद ने सभी देशों से अपील की कि वे पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून एवं प्रासंगिक सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुसार भारत और अन्य सभी प्रासंगिक प्राधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग करें