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‘दिवालिया हो गया है पाकिस्तान’: रक्षा मंत्री का ऐलान, कहा – 1500 एकड़ का गोल्फ क्लब बेच कर चुका सकते हैं 25% कर्ज

पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट से जुझ रहा है। उस पर कंगाल होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कह दिया कि उनका मुल्क दिवालिया हो चुका है, वह एक दिवालिया देश के रहने वाले हैं। उन्होंने यह बयान शनिवार (18 फरवरी, 2023) को दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के सियालकोट में एक प्राइवेट कॉलेज के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, “आपने सुना होगा कि पाकिस्तान डिफ़ॉल्ट या दिवालिया होने वाला है। एक मेल्टडाउन होगा, लेकिन यह पहले ही दिवालिया हो चुका है। हम सब दिवालिया देश में रह रहे हैं।”

ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान की समस्याओं का हल देश में ही है। लेकिन पाकिस्तान आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की ओर देख रहा है। वह इसमें कोई मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा है कि देश 1500 एकड़ सरकारी जमीन पर गोल्फ क्लब बनाए गए। अब अगर पाकिस्तान अपने दो गोल्फ क्लब को भी बेच देता है तो एक चौथाई कर्ज उतर जाएगा।

इमरान खान सरकार पर आरोप मढ़ते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के संविधान को बार-बार नज़रअन्दाज़ किया गया है। डेढ़ साल पहले आतंकवादियों को देश में बसने दिया गया और खतरनाक खेल खेले गए। वहीं, आलोचकों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। 

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की स्थिति में है। लगातार गिरावट के बाद पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 300 करोड़ डॉलर ही बचा हुआ है। माना जा रहा है कि यदि स्थितियाँ ऐसी ही रहीं तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार आगामी 3 हफ़्तों में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान की आखिरी उम्मीद IMF (विश्व मुद्रा कोष) पर टिकी हुई है। यदि समय रहते IMF ने पाकिस्तान को सहायता नहीं दी तो पाकिस्तान दिवालिया हो सकता है।

3 बार दिवालिया हो चुका है पाकिस्तान

पाकिस्तान अब तक कुल 3 बार दिवालिया हो चुका है। पाकिस्तान पहली बार दिवालिया साल 1971 में हुआ था। तब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। इसके बाद पाकिस्तान को मजबूरन खुद को दिवालिया घोषित करना पड़ा था। यही नहीं, साल 1998 में, परमाणु परीक्षण करने के बाद पाकिस्तान फिर से दिवालिया हो गया था। उस समय पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगे थे। इससे उसे विदेशी सहायता मिलना बंद हो गई थी।
वहीं, साल 2002 में एक बार फिर पाकिस्तान अपने नेताओं की गलतियों यानी राजनीतिक और आर्थिक हालतों के चलते दिवालिया हुआ था।

आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी समस्या, मददगार देशों को ठहाराया जाए दोषी : BRICS सम्मेलन में नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 17, 2020 को ब्रिक्स
(BRICS) सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान आतंकवाद को दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए नाम लिए बिना पाकिस्तान पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादियों को समर्थन और सहायता देने वाले देशों को भी दोषी ठहराया जाए, और इस समस्या का संगठित तरीके से मुकाबला किया जाए।”

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर जोर देते हुए कहा है कि इन संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह है कि समय के साथ इनमें बदलाव नहीं आया। ये अभी भी 75 साल पुरानी सोच पर हैं। भारतीय सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। इसमें हमें ब्रिक्स साथियों के सहयोग की जरूरत है।

मोदी ने कहा, ”हमने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत एक व्यापक सुधार प्रक्रिया को शुरू किया है। यह कैंपेन इस विश्वास पर आधारित है कि आत्मनिर्भर भारत कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फोर्स मल्टीपल्यार हो सकता है और ग्लोबल वैल्यू चेन्स में मजबूत योगदान दे सकता है। इसका उदाहरण हमने COVID के दौरान भी देखा, जब भारतीय फार्मा उद्योग की क्षमता के कारण हम 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाइयाँ भेज पाए। हमारी वैक्सीन उत्पादन और डिलीवरी क्षमता भी इस तरह मानवता के हित में काम आएगी।”

12वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने एक तरफ जहाँ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जमकर तारीफ की तो दूसरी तरफ चीनी राष्ट्रपति का जिक्र भी नहीं किया। ब्रिक्स की भूमिका को अहम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स संगठन में शामिल देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के इंजन है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस वर्ष दूसरे विश्व युद्ध की 75वीं वर्षगाँठ पर हम वीरगति पाए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। भारत से भी 2.5 मिलियन से अधिक वीर इस युद्ध में यूरोप, अफ्रीका, और साउथ ईस्ट एशिया जैसे कई फ्रंट्स पर सक्रिय थे।” प्रधानमंत्री ने कहा, “2021 में  BRICS के 15 वर्ष पूरे हो जाएँगे। पिछले सालों में हमारे बीच लिए गए विभिन्न निर्णयों का मूल्यांकन करने के लिए एक रिपोर्ट बना सकते हैं। 2021 में अपनी अध्यक्षता के दौरान हम BRICS के तीनों स्तंभों में intra-BRICS सहयोग को मजबूत करने का प्रयत्न करेंगे।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व एक संकट से गुजर रहा है। ब्रिक्स में सुधार की जरुरत है। IMF, WTO, WHO में भी सुधार की जरुरत है।

मोदी ने आगे कहा, “इस कठिन कार्यकाल में, रूस के नेतृत्व में, लोगों से लोगों के कनेक्शन को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की गईं जैसे कि ब्रिक्स फिल्म समारोह, युवा वैज्ञानिकों की बैठकें आदि की गई। ब्रिक्स के अपने नेतृत्व के दौरान, भारत ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देगा।” 

ब्रिक्स सम्मेलन में विश्व युद्ध में वीरगति को प्राप्त भारतीयों को स्मरण करने पर एवं अन्य गंभीर समस्याओं को उजागर करने पर ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं :-

इमरान खान ने बढ़ाया टैक्स: सड़कों पर आए पाकिस्तानी व्यापारी

इमरान खानपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, आईएमएफ) के इशारे पर अपने देश में बिक्री कर (सेल्स टैक्स) बढ़ाया तो बिफरे हुए पाकिस्तानी व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में सारी व्यापार संबंधी गतिविधियाँ ठप पड़ गईं हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगें माने जाने तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे। वे सेल्स टैक्स में कमी के अलावा पाकिस्तान में सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों में छूट की माँग भी कर रहे हैं।
पकिस्तान के लिए ऐसी हड़ताल का इससे बुरा समय हो नहीं सकता। एक तरफ़ पाकिस्तान टेरर फाइनेंसिंग पर नज़र रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे सूची से डार्क ग्रे में डाले जाने के बाद ब्लैक लिस्ट किए जाने से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, दूसरी ओर तेज़ी से बढ़ती पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमतों के साथ वह 3.3% पर दम तोड़ती अर्थव्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
इस बीच हड़तालियों के नेताओं में से एक और ऑल कराची ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष अतिक मीर के मुताबिक यह नया टैक्स सिस्टम व्यापारियों को मार देगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इसी साल के मध्य में (जुलाई 2019) हुए प्रदर्शनों के बाद यह दूसरा विरोध प्रदर्शन है। इसमें पाकिस्तान के ज्यादातर दुकानें, मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बंद रहे।

जिन टैक्स नियमों के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है, वे पाकिस्तान को आईएमएफ से मिले 6 अरब डॉलर के कर्ज के बदले में लादे गए नियमों में से एक है। आईएमएफ ने जिन शर्तों पर पाकिस्तान को कर्ज दिया था, उनमें से एक थी कि इमरान खान सरकार अपना टैक्स राजस्व बढ़ाने के उपाय करे। इसी के चलते इमरान खान ने सेल्स टैक्स बढ़ाया था। गौरतलब है कि यह अंदेशा पहले से ही जताया जा रहा था कि आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस एजेंसी के नियमों और शर्तों के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर हो जाएगी।
इसके अलावा इमरान खान के सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों से भी वहाँ के व्यापारी परेशान हैं। नियमों के अनुसार 50 हजार पाकिस्तानी रुपए से ऊपर की किसी भी खरीददारी पर पहचान पत्र ज़रूरी होगा। व्यापारी इसे बढ़ाकर 1 लाख पाकिस्तानी रुपए किए जाने की माँग कर रहे हैं।

जब चीन माँगेगा $6.7 अरब, IMF $2.8 अरब: जून 2022 तक इतना पैसा आखिर कहाँ से जुटाएगा पाकिस्तान?

इमरान खान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
1947 में भारत से अलग होने के बाद से पाकिस्तान केवल कश्मीर को ही अपनी जमापूंजी समझ अपनी जनता और दूसरे देशों के अनुदान पर राज करता रहा। कभी पाकिस्तान की उन्नति और विकास की ओर लेशमात्र भी ध्यान नहीं दिया, जबकि कई वर्षों के बाद पाकिस्तान से अलग हुए बांग्लादेश पाकिस्तान से  बहुत आगे निकल गया। पाकिस्तान ने विदेशों से कर्जा लेते समय इस बारे में नहीं सोंचा कि कभी वापस भी करना पड़ेगा। मुफ्त में मिले अनुदान तो किसी गिनती में नहीं। 
पाकिस्तान पर विदेशी कर्जे की फेहरिस्त हैरान कर देने वाली है।3.3% की विकास दर पर कराह रहे पाकिस्तान को जून, 2022 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को $2.8 अरब और चीन को $6.7 अरब लौटाने हैं। यह राशि उन कर्जों को चुकता करने के लिए है, जो पाक ने अपने विदेशी मुद्रा कोष की बदहाली पर काबू पाने और आर्थिक हालात पर काबू पाने के लिए लिए थे। 
बेल्ट रोड बनता फांसी का फंदा 
हिंदुस्तान से कब्जाए पीओके में पाकिस्तान ने चीन को बेल्ट एन्ड रोड इनिशिएटिव के लिए दे दिया, जब कि उस भूभाग पर उसका हक़ ही नहीं था। इसी के बदले चीन ने उसे मुँहमाँगा कर्ज देना शुरू कर दिया, और उस कर्जे से पाकिस्तान इतना बौराया कि वह उसके बाद चीन से कर्ज पर कर्ज लेता गया। कराची स्थित Optimus Capital Management के प्रमुख शोधकर्ता हफ़ीज़ फैज़ान अहमद के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में दावा है कि इस चीनी कर्ज़ का सबसे बड़ा हिस्सा तब आया जब पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जा रहा था।
यही नहीं, Center for Global Development नामक एक थिंक टैंक ने पाकिस्तान को पिछले साल ही उन देशों की सूची में डाल दिया था जिन्हें इस बेल्ट-रोड योजना के चलते कर्ज़ में डूबना पड़ेगा। आज यह आकलन सच साबित हो रहा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान पूरी तरह फ़टेहाल है- उसके सारे संसाधनों पर सेना का कब्ज़ा हो गया है, जिसे देश के आर्थिक हालत से कोई फर्क नहीं पड़ता।
घाटा,टैक्स चोरी और मुँह फाड़ती सेना 
पाकिस्तानी सेना देश के बजट का 17-22% लेती है। बावजूद इसके कि वह खुद 100 अरब डॉलर के आर्थिक साम्राज्य की मालिक है, जो बैंकिंग, सीमेंट, रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में पसरा हुआ है। हाल ही में उसने सरकार से खनन, तेल और गैस का काम भी अपने हाथों में ले लिया है। इसके उलट पाकिस्तानी सरकारी कम्पनियाँ घाटे में गहरी डूबती जा रहीं हैं। केवल 1% के टैक्स देने वाले नागरिकों के दायरे के अलावा उसका टैक्स-जीडीपी अनुपात 11% दुनिया के न्यूनतम में से एक है।

IMF ने की मोदी के आर्थिक सुधारों की तारीफ

Modi, digital india
भारत में मोदी विरोधी मोदी को हटाने के लिए हर तरह के आरोप लगा रहें हैं, तो विदेश में उसी मोदी के नाम के डंके बज रहे। 
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक में जारी रिपोर्ट में मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों को देश के फायदेमंद करार दिया। आईएमएफ के मुताबिक भारत में कुछ ऐसे सुधार हुए हैं, जिसकी वजह से देश में डिजिटाइजेशन बढ़ा है। इसकी वजह से धोखाधड़ी और अन्य फ्रॉड में कमी आयी है। 

जीएसटी और अन्य आर्थिक सुधारों का दिखा देश पर असर

वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कर्ज घटाने की कोशिशों के तहत स्ट्रक्चरल और फाइनेंशियल सेक्टर में सुधार की वजह से भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि GST ने इसमें एक अहम रोल अदा किया है। हालांकि सब्सिडी को घटाने पर ग्रोथ रेट और बेहतर होने की उम्मीद जतााई है। इस रिपोर्ट में एनपीए की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की गई है। एनपीए समस्या के समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने बैंकरप्सी कानून लागू किया है। 

डिजिटलाइजेशन से बढ़ी पारदर्शिता

रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया में भारत और इंडोनेशिया दो ऐसे देश है, जिसमें जहां डिजिटलाइजेशन का असर दिख रहा है। उदाहरण के तौर पर बताया गया कि भारत में सामाजिक मदद के लिए डिजिटल प्लेटफार्म को चुना गया। इसका असर यह हुआ कि 17 फीसदी खर्च की बचत हो सकी। इसी तरह आंध्र प्रदेश में स्मार्ट आईडी कार्ड के जरिए लाभार्थियों तक सीधे मदद पहुंचाई गई।

भ्रष्टाचार में हुआ सुधार 

डिजिटलीकरण से चीजों के दाम और उसकी क्वॉलिटी में सुधार हुआ। साथ ही भ्रष्टाचार के इंडेक्स में भी सुधार की बात कही गयी है। इसके अलावा मिस मैनेजमेंट में भी सुधार दिखा है। रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार की ओर से फरवरी में पेश किए गए बजट में किसानों के लिए न्यूनतम सपोर्ट स्कीम की वजह से अर्थव्यवस्था पर असर पडने की बात कही। केंद्र के चालू घाटे को पूरा करने में देरी होने की संभावना जताई है। 

भारत बना रहेगा सबसे तेज अर्थव्यवस्था 

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने इससे पहले मंगलवार को भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बताया था। IMF ने साल 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिश से बढ़ने की उम्मीद जताई थी, जबकि साल 2020 में इसके 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना जाहिर की है। बता दें कि साल 2018 में भारत की ग्रोथ रेट 7.1 फीसदी थी जबकि चीन की ग्रोथ रेट महज 6.6 फीसदी थी। आईएमएफ ने चीन की ग्रोथ रेट 2019 में 6.3 फीसदी और 2020 में 6.1 फीसदी होने का अनुमान लगाया है।

सरकारी इमारतें और जमीन बेचने को मजबूर हुआ पाकिस्तान

Financial crisis in Pakistanपाकिस्तान लगातार कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान अब तक कर्ज उतारने के लिए सरकारी गाड़ियों को बेचने समेत कई तरकीबें खोज निकाली हैं। लेकिन उनका फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में अब इमरान सरकार ने देश की कंगाली दूर करने के लिए मंत्रालयों की उन संपत्ति को बेचने का निर्णय लिया है, जो संपत्ति प्रयोग में नहीं है। 

45 हजार प्रॉपर्टी की होगी बिक्री 

इमरान खान के नेतृत्व में मार्च 19 कैबिनेट की बैठक में कर्ज दूर करने और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए सरकारी मंत्रालयों और अन्य सरकारी विभागों की इमारत और जमीन बेचने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान पर करीब 27 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए का कर्ज है, जिसे दूर करने के लिए 45 हजार प्रॉपर्टी की बिक्री की जाएगी। 

इमरान खान ने प्रॉपर्टी की बिक्री के लिए बनाई कमेटी

पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने मार्च 20 को मीडिया को इस निर्णय के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नीलानी के लिए रखी जाने वाली संपत्तियों की पहचान करके एक लिस्ट तैयार की गई है, जिसे कैबिनेट को भेज दिया गया है। चौधरी के मुताबिक इन प्रॉपर्टी की कानूनी तौर पर बिक्री के लिए एक पॉलिसी बनाई जाएगी और बिक्री के लिए फास्ट ट्रैक प्रॉसेस अपनाया जाएगा। इसके लिए इमरान खान के निर्देश पर मिनिस्ट्री ऑफ प्राइवेटाइजेशन की ओर से एसेट्स मैनेजमेंट कमेटी बनाई गई है। 
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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पिछले वर्ष बीसीसीआई खिलाफ आईसीसी की विवाद समाधान समिति के समक्ष लगभग 7 करोड़ अमेरिकी ड....

IMF से पाकिस्तान को मदद की दरकार
चौधरी के मुताबिक अब तक 45000 प्रॉपर्टी के बारे में डिटेल इकट्ठा की गई है, जिन्हें बिक्री के लिए रखा जाएगा। इनमें से कुछ ऐसी ज्यादातर ऐसी संपत्तियां है, जिन पर विवाद है। इन प्रॉपर्टी को अलगे 6 माह में बेचा जाएगा। पाकिस्तान को सऊदी अरब और यूएई  और चीन के तरफ से संकट से निपटने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर कई बिलियन डॉलर की रकम देने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा इस्लामाबाद इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड से पैकेज की मांग कर रहा है। 

देश के विदेशी मुद्राभंडार में जबरदस्त इजाफा

देश के विदेशी मुद्राभंडार में जबरदस्त इजाफा, लंबे समय बाद 400 अरब डॉलर के पारदेश का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर बढ़कर 400 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. पिछले एक मार्च को समाप्त सप्ताह में यह 25.99 अरब डॉलर बढ़कर 400 अरब डॉलर के स्तर को लांघकर 401.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया. रिजर्व बैंक के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 94.47 करोड़ डॉलर बढ़कर 399.21 अरब डॉलर था. रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह में, विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 2.06 अरब डॉलर बढ़कर 374.060 अरब डॉलर पर पहुंच गई. विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर बताया जाता है लेकिन इसमें यूरो, पौंड ओर येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में आये उतार चढ़ाव को भी शामिल किया गया है.
देश का विदेशी मुद्रा भंडार इससे पहले 13 अप्रैल, 2018 को समाप्त सप्ताह में 426.028 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था. लेकिन इसके बाद से इसमें काफी गिरावट आई है. केन्द्रीय बैंक ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह अपरिवर्तित रहने के बाद समीक्षाधीन सप्ताह में देश का आरक्षित स्वर्ण भंडार 48.87 करोड़ डॉलर बढ़कर 23.25 अरब डॉलर हो गया.
सप्ताह के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास सुरक्षित विशेष निकासी अधिकार भी 30 लाख डॉलर बढ़कर 1.463 अरब डॉलर हो गया. केन्द्रीय बैंक ने कहा कि आईएमएफ में देश का आरक्षित भंडार भी 62 लाख डॉलर बढ़कर 2.999 अरब डॉलर हो गया.

दिवालिया होने के कगार पर पाकिस्तान


भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थकों को ठेस लगने वाली है कि कब उनकी आँख का तारा यानि पाकिस्तान दिवालिया घोषित कर दिया जाए और वहाँ जाकर मोदी विरोध करने का स्वप्न भी धराशाही न हो जाए। जितना धन पाकिस्तान को अमेरिका से मिल रहा था, यदि उस धन को आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में खर्च करने की बजाए देश के विकास पर खर्च किया होता, तो शायद देश की इतनी बुरी दुर्दशा न होती। 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत से पाकिस्तान का न सिर्फ तेल आयात बिल बिगड़ रहा है बल्कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार भी खाली हो रहा है। उधर डॉलर की मांग बढ़ने से उसकी आपूर्ति का संतुलन भी गड़बड़ा गया है।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के हवाले से पाक अखबार डॉन ने कहा है कि सरकार फंड के लिए आईएमएफ के पास जाकर रुपये को तबाह कर रही है जिससे देश पर बड़ा अर्थ संकट मंडराने लगा है। जबकि पाक का विदेशी मुद्रा भंडार भी खाली हो रहा है, ऐसे में देश पर दिवालिया होने का खतरा बढ़ चुका है।

ध्वस्त हो जाएगी पाक की अर्थव्यवस्था

पाक में विकट हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौजूदा सप्ताह की शुरूआत में ही पाक रुपया एक डॉलर के मुकाबले 10.24 फीसदी गिरावट के साथ 139 रुपये तक कमजोर हो गया। पाक की केंद्रीय बैंक ने यहां तक कहा है कि यह गिरावट देश के चालू खाता घाटा और डॉलर की मांग-आपूर्ति में बढ़ती खाई का खतरनाक नमूना है। 
एसबीपी ने कहा है कि देश का व्यापार घाटा बढ़ने के कारण मुद्रा बाजार भी असंतुलित हो चुका है। उधर आईएमएफ ने सलाह दी है कि पाक रुपये को एक डॉलर की तुलना में 150 रु. तक ले जाया जाए। ऐसे में पाक रुपये का अवमूल्यन तय है जो पहले से ही गिर रहा है।
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अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने कहा है कि पाकिस्तानी नेतृत्व आतंकवाद को अमेरिकी सरकार से अल.....

पाक में फॉरेक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक बोस्टन ने सरकार को देश के दिवालिया होने के खतरे से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाक रुपये का इसी तरह गिरना जारी रहा तो लोगों की खरीदारी की क्षमता पर डाका पड़ जाएगा और अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होकर दिवालिया हो जाएगी। 

कंगाली के बेहद निकट है पाकिस्तान

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाक पर विदेशी कर्ज 91.8 अरब डॉलर हो चुका है। यह कर्ज पांच साल पहले नवाज शरीफ के सत्ता संभालने के बाद से 50 फीसदी बढ़ गया है जो देश के लिए खतरनाक संकेत हैं। इसके बावजूद चीन का दो तिहाई कर्ज सात प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर पर पाक ने ले लिया है। 
इसे चुकाने के लिए पाक में आयकर वसूली भी हर साल घट रही है। ऐसे में पाक का कुल व्यापार घाटा 31 अरब डॉलर तक बढ़ गया है जबकि पिछले दो सालों में विदेशी मुद्रा भंडार में 10 अरब डॉलर की कमी आ गई है। यानी पाक आर्थिक रूप से कंगाली के बेहद निकट है।

चीन से अत्यधिक ऋण पर आईएमएफ ने पाक को चेताया

पाक को आर्थिक संकट से उबारने के मकसद से इमरान सरकार ने भले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शरण में जाकर बेलआउट पैकेज लेने का फैसला किया है लेकिन इस संस्था ने पाक को चेतावनी जारी की है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि पाक ने फिलहाल वित्तीय मदद के लिए औपचारिक संपर्क नहीं किया है लेकिन पाक अर्थव्यवस्था में चीन की भागीदारी बढ़ने से पाक को लाभ के साथ बड़े खतरे भी उठाने पड़ सकते हैं। 

बाली में आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक के दौरान आईएमएफ के आर्थिक सलाहकार मॉरिस ओब्स्टफेल्ड ने चीन से लगातार कर्ज बढ़ा रहे पाक को चेतावनी दी कि उसे वित्तीय घाटे का खतरनाक सामना करना पड़ रहा है, जो उसके लिए बेहद कठोर और खतरनाक साबित होगा। 
आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि चीनी बीआरआई परियोजना की पाक में भागीदारी देश में संभावित जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि इसे पाक के लिए चुका पाना लगभग असंभव होगा। ओब्स्टफेल्ड ने कहा कि यदि इस मसले पर पाक आईएमएफ से वार्ता करता है तो उसे ऐसे सुधार करने होंगे जो पाक को विशिष्ट विवरण प्रदान किए बड़ी क्षमता तक पहुंचने में मदद कर सकें।