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‘कोरोना सीजनल बीमारी, सिर्फ खाँसी-जुकाम है’: महिला प्रोफेसर के दावों से उठे WHO पर सवाल

WHO द्वारा कोरोना को एक मौसमी बीमारी बताने से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि चीन का WHO पर कितना अधिक प्रभाव है, जो यह मानने को तैयार नहीं कि यह चीन द्वारा छोड़ा गया वायरस है। जैसाकि पूर्व में शंका व्यक्त की जा रही थी कि चीन ने WHO पर अपना अधिकार किया हुआ है, यदि WHO की ही बात को सच माना जाए तो WHO विश्व को बताए कि किस आधार पर इसे महामारी बताया था? विश्व के समस्त देशों को इस मुद्दे पर लामबंद होकर WHO की विश्वसनीयता पर प्रश्न करना चाहिए। 

कोरोना संक्रमण के खतरनाक प्रकोप को झेलने के बावजूद सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि ये एक मौसमी बीमारी है और इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इन दावों को सही साबित करने के लिए डोलोरेस काहिल नाम की महिला प्रोफेसर का वीडियो शेयर हो रहा है।

बिना दावों की सच्चाई जानें फेक न्यूज फैलाने वालों का कहना है कि कोरोना संक्रमण पर दी जानकारी पर WHO ने अपनी गलती मान कर इसे एक सीजनल वायरस बताया है जिसमें मौसमी बदलाव के कारण खाँसी-जुकाम और गला दर्द रहता है।

वायरल होते संदेशों के मुताबिक WHO के हवाले से ये भी कहा जा रहा है कि कोरोना रोगी को न तो अलग रहने की है और न ही जनता को सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत है। यह एक मरीज से दूसरे व्यक्ति में भी नहीं फैलता। इस संदेश के साथ WHO पर गुस्सा दिखाते हुए इस वीडियो को देखने को कहा जा रहा है। संदेश में लिखा है, “सबके 2 साल खराब करने के बाद इन्होंने तो पल्ला झाड़ लिया अब कर लो क्या करना है, इनका देखिए WHO की प्रेस कॉन्फ्रेंस।”

वीडियो और संदेश की सच्चाई क्या है। इसे पीआईबी फैक्ट चेक के जरिए पहले ही बताया जा चुका है कि संदेश में किए गए दावे फर्जी हैं। कोरोना कोई सीजनल बीमारी नहीं है। इसमें शारीरिक दूरी और आइसोलेशन जरूरी है। यह एक संक्रामक रोग है जिसमें कोविड के अनुकूल व्यवहार अपनाना जरूरी है।

इसके अलावा बात करें वीडियो में नजर आने वाली महिला प्रोफेसर डोलोरेस काहिल की तो गूगल सर्च से पता चलता है कि महिला डबलिन में स्कूल ऑफ मेडिसिन की एक प्रोफेसर हैं। उनका यह वीडियो 19 अक्टूबर 2020 को बर्लिन में हुए वर्ल्ड डॉक्टर अलायंस का है। जहाँ कोरोना संक्रमण पर भ्रामक दावा करने के कारण इस पर फॉल्स इन्फॉर्मेशन का टैग लगा दिया गया है।

अवलोकन करें:-

वुहान लैब : 730395 अरब रुपए पूरी दुनिया को दे चीन: डोनाल्ड ट्रंप

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वुहान लैब : 730395 अरब रुपए पूरी दुनिया को दे चीन: डोनाल्ड ट्रंप

इसके अलावा ये बात भी गौर करने वाली है कि डोलोरेस WHO की कोई अधिकारी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महामारी को 11 मार्च 2020 को महामारी घोषित किया था। इसके कारण अब तक 37 लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसलिए सिर्फ एक वीडियो पर ये मानना कि कोरोना कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, समझदारी का काम नहीं है।

वैज्ञानिकों ने ही वुहान लैब में तैयार किया कोरोना वायरस, सैंपल पर मिले फिंगरप्रिंट से सनसनीखेज खुलासा

                              चीन के वैज्ञानिकों ने ही वुहान लैब में तैयार किया कोरोना वायरस
दुनियाभर में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है। भारत समेत हर देश अपने नागरिकों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जीतोड़ कोशिशें कर रहा है। इसी बीच एक बार फिर पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के वुहान लैब से लीक होने की खबर सुर्खियों में है। इसको लेकर डेली मेल ने 29 मई 2021 को सनसनीखेज खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के वैज्ञानिकों ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) में कोविड-19 वायरस को तैयार किया है। वैज्ञानिकों को कोविड-19 सैंपल पर फिंगरप्रिंट मिले हैं। इसके अलावा दावा किया गया है कि चीनी वैज्ञानिकों (Chinese Scientist) ने कोरोना वायरस को तैयार करने के बाद इसे रिवर्स-इंजीनियरिंग वर्जन से बदलने की कोशिश की, ताकि ऐसा लगे कि ये वायरस चमगादड़ से विकसित हुआ है। वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन डब्ल्यूएचओ (WHO) पर इस मामले की जाँच के लिए दबाव बना रहे हैं।

बीबीसी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुता​बिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस मामले की तुरंत जाँच का ऐलान किया है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि आखिर यह वायरस कहाँ से आया है। क्या यह चीन की वुहान प्रयोगशाला से लीक हुआ है या कहीं और से आया है? उन्होंने 90 दिनों के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

डेली मेल के अनुसार, इस स्टडी को ब्रिटिश प्रोफेसर एंगस डल्गलिश (Angus Dalgleish) और नॉवे के वैज्ञानिक डॉ. बिर्गर सोरेनसेन (Dr. Birger Sørensen) ने किया है। उन्हें इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा लिखे गए 22-पृष्ठ की रिपोर्ट मिली है, जिसे बायोफिजिक्स डिस्कवरी की तिमाही समीक्षा में प्रकाशित किया जाना है।

इस स्टडी में उन्होंने लिखा है कि उनके पास एक साल से भी अधिक समय से चीन में वायरस पर रेट्रो-इंजीनियरिंग के सबूत हैं, लेकिन शिक्षाविदों और प्रमुख मैगजीन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। प्रोफेसर डल्गलिश लंदन में सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी में कैंसर विज्ञान के प्रोफेसर हैं। इन्हें ‘एचआईवी वैक्सीन’ बनाने के लिए भी जाना जाता है। वहीं, डॉ सोरेनसेन एक वायरोलॉजिस्ट और Immunor नामक कंपनी के अध्यक्ष हैं, जो कोरोना की वैक्सीन तैयार कर रही है।

वुहान लैब में जानबूझकर सारा डाटा नष्ट किया गया

स्टडी में खुलासा किया गया है कि वुहान लैब में जानबूझकर सारा डाटा नष्ट किया गया। जिन वैज्ञानिकों ने इसे लेकर अपनी आवाज उठाई, उन्हें चीन द्वारा या तो चुप करा दिया या फिर गायब कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जब डल्गलिश और सोरेनसेन वैक्सीन बनाने के लिए कोरोना के सैंपल्स का अध्ययन कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने वायरस में एक ‘खास फिंगरप्रिंट’ को खोजा। इसको लेकर उनका कहना है कि ऐसा लैब में वायरस के साथ छेड़छाड़ करने के बाद ही संभव है। दोनों वैज्ञानिकों का कहना है कि जब उन्होंने इस रिजल्ट को जर्नल में प्रकाशित करना चाहा तो कई साइंटिफिक जर्नल ने इसे खारिज कर दिया।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिटायर्ड साइंस एडिटर ने लगाई थी पत्रकारों को लताड़

बीते दिनों (25 मई 2021) अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिटायर्ड साइंस एडिटर निकोलस वेड ने उन पत्रकारों को लताड़ लगाई थी, जिन्होंने कोरोना वायरस के चीन के वुहान स्थित लैब से लीक होने की संभावनाओं को एकदम से नकार दिया या नजरंदाज कर दिया था। निकोलस वेड का मानना है कि मीडिया के लोग चीन के प्रोपेगेंडा के चक्कर में आ गए और उन्होंने खुद का रिसर्च करने की बजाए चीन की बात मानने में ही भलाई समझी।

उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के एक इंटरव्यू में कहा था कि कोरोना वायरस का मूल स्रोत क्या है, इस संबंध में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है, क्योंकि चीन पर शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे दबा दिया है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा इस सम्बन्ध में एक बृहद प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने मीडिया के अंधेपन को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसने वैज्ञानिक चीजों में भी राजनीति घुसाई।

कोरोना केस सामने आने से पहले ही ‘वुहान लैब के शोधकर्ता पड़ गए थे बीमार’

हाल ही में (24 मई, 2021) एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि चीन में कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि से हफ्तों पहले ही ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ के कई शोधकर्ता बीमार पड़ गए थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चीन ने कहा था कि वुहान में कोरोना का पहला मामला 8 दिसंबर 2020 को सामने आया था, लेकिन इस अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक वुहान लैब के तीन शोधकर्ता उससे पहले ही नवंबर 2019 में बीमार पड़ गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

उत्तर प्रदेश : WHO ने भी माना योगी आदित्यनाथ का लोहा

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को योगी आदित्यनाथ से सीखना चाहिए। हर वक़्त किसी न किसी बात को लेकर केंद्र से झगड़ा करने की बजाए कुछ काम करना चाहिए। दिल्ली के मुकाबले इतना बड़ा राज्य होने पर भी इस महामारी से अपनी जनता को बचाने सड़क आकर काम कर रहे हैं, जबकि केजरीवाल सिर्फ विज्ञापन और केंद्र से झगडे को लेकर चर्चा में रहते हैं। इस महामारी में केजरीवाल के बनाए मोहल्ला क्लिनिक भी किसी काम नहीं आ रहे। योगी के कार्यकलापों को देख जब WHO भी प्रशंसा करे, तो लगता है योगी में दम है।  
भारत में कोरोना संक्रमण के फैलते प्रकोप के बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने योगी सरकार के डोर-टू-डोर कैम्पेन की तारीफ अपनी वेबसाइट पर की है। 7 मई को प्रकाशित एक लेख में WHO ने बताया है कि कैसे योगी सरकार ने महामारी के समय में आवश्यक कदम उठाते हुए उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया।

लेख में कहा गया कि योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में COVID-19 के मद्देनजर हाउस टू हाउस एक्टिव केस फाइंडिंग शुरू की है। इस प्रक्रिया में उन्हें आइसोलेट किया गया जिनमें कोविड के लक्षण थे।

                                              उत्तर प्रदेश मॉडल पर WHO ने प्रकाशित किया लेख
WHO ने कहा कि योगी सरकार ने 1,41,610 टीमों को इस काम में लगाया है। इन टीमों में राज्य स्वास्थ्य विभाग से 21,242 सुपरवाइजर हैं, जिनका काम ये सुनिश्चित करना है कि अभियान में कोई ग्रामीण इलाका न छूटे।

5 मई से इस अभियान की शुरुआत ग्रामीण इलाकों में हुई। ग्रामीणों के रैपिड टेस्ट किए गए और पॉजिटिव पाए जाने पर मेडिसिन किट देकर सलाह दी गई कि वह कैसे कोरोना से लड़ सकते हैं। इसके अलावा जो लोग पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए, सबका टेस्ट किया गया। 

WHO ने बताया है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार को ट्रेनिंग और माइक्रो प्लॉनिंग में मदद कर रहा है। इसके अतिरिक्त उनके फील्ड ऑफिसर भी ग्राउंड पर रहकर स्थिति मॉनिटर कर रहे है। साथ ही सरकार को रियल टाइम फीडबैक भी दे रहे हैं ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

WHO ने रिपोर्ट में बताया कि इस काम के पहले दिन फील्ड अधिकारियों ने 2,000 से अधिक सरकारी टीमों की निगरानी की और कम से कम 10,000 घरों का दौरा किया।

हाउस टू हाउस मुहिम 

5 मई से शुरू हुए इस अभियान में टीमें 75 जिलों के 97,941 गाँव जाएँगी। हर टीम में दो सदस्य हैं जो सुदूर ग्रामों तक पहुँचकर सुनिश्चित करेंगे कि सभी कोरोना लक्षण वाले लोगों का टेस्ट हो और जो कोई भी पॉजिटिव निकले, उसे फौरन सही सलाह देकर आइसोलेट करने के इंतजाम हो। इसके अलावा उन सबका भी टेस्ट किया जाएगा जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए।

योगी सरकार ने मॉनीटरिंग टीमों को मेडिकल किट डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही ICCC को उन लोगों के नाम देने को कहा जिन्हें इस अभियान के दौरान किट दी गई, ताकि सूची संशोधित हो सके। इसके अलावा यह लिस्ट जिलाधिकारी के माध्यम से क्षेत्र के सांसद या विधायक को मुहैया कराने को कहा गया ताकि वह मेडिकल किट मँगा पाएँ और लोगों से संपर्क कर पाएँ। इस पूरी प्रक्रिया से लगातार सत्यापन भी होता रहेगा। सरकार ने जिले के हर ब्लॉक में दो वैन लगाने को कहा है ताकि लोगों में लक्षण चेक किए जा सकें।

बच्चों की योगी को चिंता 

योगी सरकार हर जिले में बच्चों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम कर रही है। इस क्रम में योगी सरकार ने विशेष तौर पर टीम-09 बनाई, ताकि वह उत्तर प्रदेश में कोरोना प्रबंधन के चलते कम से कम 10-15 बेड वाला पीडयाट्रिक ICU हर जिला अस्पताल में तैयार करें और मेडिकल कॉलेज में ऐसा ही आईसीयू 25-30 बेड वाला हो। इसके अलावा डिविजनल हेडक्वार्टर में 100 बेड का पीडयाट्रिक आईसीयू खोलने और हर जरूरी मेडिकल उपकरण, दवाइयाँ रखने के निर्देश सरकार द्वारा दिए गए हैं।

वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का प्रबंध 

सरकार ने वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कन्संट्रेटर हर जिले में पहुँचाने के भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। सीएम योगी ने एसीएस स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के प्रधान सचिव को ये सुनिश्चित करने को कहा कि ये उपकरण हर जगह चालू हों। उन्होंने अधिकारियों से संबंधित जिलों से संपर्क करने और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए कहा। सीएम ने ये भी कहा कि अगर किसी जिले में वेंटिलेटर या फिर ऑक्सीजन कन्संट्रेटर न चलने की खबर आई तो इसके परिणाम जिलाधिकारी या फिर सीएमओ को भुगतने पड़ेंगे।

रेमडेसिवीर इंजेक्शन की उपलब्धता

राज्य सरकार ने अधिकारियों से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। साथ ही ये भी बताया कि ये इंजेक्शन कोविड अस्पतालों में बिलकुल फ्री दिए जा रहे हैं, जबकि प्राइवेट अस्पातालों को जिलाधिकारी या सीएमओ के द्वारा जरूरत के हिसाब से मिल रहे हैं। राज्य सरकार के निर्देश हैं कि जब भी मरीज को जीवनरक्षक इंजेक्शन दिया जाए तो नर्सिंग स्टाफ के साथ डॉक्टर भी हो। सरकार ने ऐसी जरूरी दवाइयों की माँग, सप्लाई और खपत सभी विस्तृत जानकारी रखने को कहा है।

वेक्सीनेशन काम जोरों पर 

योगी सरकार ने कोरोना से लड़ने की मुहिम में वैक्सीनेशन प्रक्रिया को भी तेज किया। राज्य को अब तक 1,39,08,152 डोज दी गई है। 18 जिलों में 18-44 उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। अब तक इस वर्ग के 1.66 लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। 

सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त मेडिकल स्टॉफ को तैयार रखने के लिए कहा है। इस क्रम में मेडिकल फील्ड के फाइनल ईयर छात्र, इंटर्न, प्रशिक्षित, अनुभवी रिटायर्ड लोगों की अपॉइंटमेंट को लेकर प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल शिक्षा मंत्री को इस भर्ती प्रक्रिया पर निगरानी रखने को कहा गया है।

सरकारी मुहिम का प्रभाव

प्रदेश में राज्य प्रशासन लगातार टेस्टिंग बढ़ाकर महामारी कंट्रोल करने का काम कर रही है। हाल में वहाँ 2,33,705 सैंपल टेस्ट हुए। इनमें 1,10,000 टेस्ट सिर्फ RTPCR के जरिए हुए। अब तक राज्य में 4,34,04,184 टेस्ट हो गए हैं। राज्य में टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट अभियान पर जोरो-शोरों से काम हो रहा है।

24 घंटे में वहाँ से 20, 463 हजार नए मामले आए, जबकि 29,358 हजार ठीक भी हुए। आँकड़ों को देख सरकार ने कहा कि राज्य में कोरोना स्थिति सुधर रही हैं ,क्योंकि नए केस भी कम हो रहे हैं और रिकवरी रेट भी बढ़ रहा है।

सरकार का मानना है कि उसकी ये पॉलिसी सकारात्मक परिणाम दे रही है। अप्रैल 30 तक राज्य में जहाँ 3,10,783 मामले थे, वो अब 95 हजार से ज्यादा कम हुए हैं। वर्तमान में वहाँ 2,16,057 एक्टिव केस हैं, जबकि अब तक कुल 13.3 लाख लोग कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं।

क्रायोजेनिक टैंक के लिए ग्लोबर टेंडर

राज्य में ऑक्सीजन किल्लत पर जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि क्रायोजेनिक टैंकर की उपलब्धता के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए गए हैं। इनके अलावा केंद्र सरकार और रिलायंस इंडस्ट्री की मदद से टैंकर के नंबर तेजी से बढ़े हैं जिससे यहाँ ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर हुई।

सरकार ने बताया कि हाल में 1,011 मीट्रिक टन ऑक्सीजन राज्य को दी गई। इनमें 632 टन रिफिलर्स को मिली और 301 टन मेडिकल कॉलेजों को। राज्य सरकार ने कहा कि ऑक्सीजन की उपलब्धता सुधर रही हैं। वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर में इसे बड़े पैमाने पर दिया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि कम संक्रमित जिलों में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत हैं। उन्होंने अधिकारियों को अलग से एक्शन प्लान बनाकर ऑक्सीजन सप्लाई के वितरण पर ध्यान देने को कहा हैं।

घर पहुँचकर खुद लोगों की हिम्मत बढ़ा रहे योगी आदित्यनाथ

सारे इंतजामों के अतिरिक्त योगी सरकार अपने राज्य के लोगों की हिम्मत बढ़ाने के लिए स्वयं भी तत्पर हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि योगी आदित्यनाथ ने खुद मुरादाबाद जाकर 8 मई को एक परिवार से मिल उनका हाल-चाल जाना।

उन्होंने बरेली का दौरा किया और प्रशासन को तीसरी लहर के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने बताया कि कैसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर इस कोरोना से लड़ने में लगी हुई हैं। पिछले दिनों भी योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि राज्य में 8 दिनों में 65 हजार कोरोना केसों में कमी आई है।

आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी समस्या, मददगार देशों को ठहाराया जाए दोषी : BRICS सम्मेलन में नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 17, 2020 को ब्रिक्स
(BRICS) सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान आतंकवाद को दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए नाम लिए बिना पाकिस्तान पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, ”आतंकवाद आज विश्व के सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादियों को समर्थन और सहायता देने वाले देशों को भी दोषी ठहराया जाए, और इस समस्या का संगठित तरीके से मुकाबला किया जाए।”

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर जोर देते हुए कहा है कि इन संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह है कि समय के साथ इनमें बदलाव नहीं आया। ये अभी भी 75 साल पुरानी सोच पर हैं। भारतीय सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। इसमें हमें ब्रिक्स साथियों के सहयोग की जरूरत है।

मोदी ने कहा, ”हमने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत एक व्यापक सुधार प्रक्रिया को शुरू किया है। यह कैंपेन इस विश्वास पर आधारित है कि आत्मनिर्भर भारत कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फोर्स मल्टीपल्यार हो सकता है और ग्लोबल वैल्यू चेन्स में मजबूत योगदान दे सकता है। इसका उदाहरण हमने COVID के दौरान भी देखा, जब भारतीय फार्मा उद्योग की क्षमता के कारण हम 150 से अधिक देशों को आवश्यक दवाइयाँ भेज पाए। हमारी वैक्सीन उत्पादन और डिलीवरी क्षमता भी इस तरह मानवता के हित में काम आएगी।”

12वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने एक तरफ जहाँ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जमकर तारीफ की तो दूसरी तरफ चीनी राष्ट्रपति का जिक्र भी नहीं किया। ब्रिक्स की भूमिका को अहम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स संगठन में शामिल देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के इंजन है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “इस वर्ष दूसरे विश्व युद्ध की 75वीं वर्षगाँठ पर हम वीरगति पाए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं। भारत से भी 2.5 मिलियन से अधिक वीर इस युद्ध में यूरोप, अफ्रीका, और साउथ ईस्ट एशिया जैसे कई फ्रंट्स पर सक्रिय थे।” प्रधानमंत्री ने कहा, “2021 में  BRICS के 15 वर्ष पूरे हो जाएँगे। पिछले सालों में हमारे बीच लिए गए विभिन्न निर्णयों का मूल्यांकन करने के लिए एक रिपोर्ट बना सकते हैं। 2021 में अपनी अध्यक्षता के दौरान हम BRICS के तीनों स्तंभों में intra-BRICS सहयोग को मजबूत करने का प्रयत्न करेंगे।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व एक संकट से गुजर रहा है। ब्रिक्स में सुधार की जरुरत है। IMF, WTO, WHO में भी सुधार की जरुरत है।

मोदी ने आगे कहा, “इस कठिन कार्यकाल में, रूस के नेतृत्व में, लोगों से लोगों के कनेक्शन को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की गईं जैसे कि ब्रिक्स फिल्म समारोह, युवा वैज्ञानिकों की बैठकें आदि की गई। ब्रिक्स के अपने नेतृत्व के दौरान, भारत ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देगा।” 

ब्रिक्स सम्मेलन में विश्व युद्ध में वीरगति को प्राप्त भारतीयों को स्मरण करने पर एवं अन्य गंभीर समस्याओं को उजागर करने पर ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं :-

पश्चिमी देशों की दवा कंपनियों के दवाब में WHO, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल बंद करने की साजिश

आज कोरोना संकट के इस दौर में दुनिया के कई देश विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कोरोना वायरस के भयावह स्वरूप से बचने के लिए सम्पूर्ण विश्व को भारत एक आशा की किरण के रुप में दिखाई दे रहा है। भारत में बनी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की मांग काफी बढ़ गई है। लेकिन पश्चिमी देशों की दावा कंपनियां इससे काफी परेशान है। वे विश्व स्वास्थ्य संगठन पर दबाव बनाकर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल को रोकने की साजिश कर रही है। इसको देखते हुए भारत ने भी WHO के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पश्चिमी देशों की दवा कंपनियों की साजिश
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि दरअसल ज्यादातर पश्चिमी देशों के वैज्ञानिक और दवा कंपनियां भारत के बेहद सस्ती दवाओं के उपचार को लेकर हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश में रहती हैं। कोरोना वायरस का इलाज मलेरिया से बचाव के लिए बनी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से संभव है। अगर कोरोना वायरस से बचाव के लिए इस सस्ती दवा का उपयोग बढ़ जाए तो पश्चिमी देशों की दवा कंपनियों को करोड़ो रुपयों के नुकसान है। यही कारण है कि इनकी लॉबी साजिश के तहत WHO पर दबाव बनाकर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के सभी ट्रायल बंद करना चाहती हैं। इसका भारत ने विरोध कर दिया है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने WHO के दावे को किया खारिज 
हाल ही में पश्चिमी देशों की दवा कंपनियों के दबाव में WHO ने सदस्य देशों को निर्देश जारी किया था कि कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन खतरनाक साबित हो सकती है। इसीलिए इसके ट्रायल बंद कर दें। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने न सिर्फ इस दवा पर शोध किया बल्कि देश के डाक्टरों से कहा है कि कोरोना वायरस इलाज में इस दवा से बचाव हो सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने अपने ताजा शोध  में कहा है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की दवा लेने पर कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे में कमी देखी गई है।

कोरोना से अकेले लड़ेगा भारत
भारत ने अपने नए निर्देश और शोध से WHO को संकेत दिया है कि कोरोना के खिलाफ जंग में अब देश अकेले ही चलेगा। देशहित में जो शोध और इलाज जरूरी होगा, उसे खुद करेगा। उसे WHO के सुझाव को कोई जरूरत नहीं है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने WHO के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है। ऐसे में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दावा के खिलाफ चल रही अंतर्राष्ट्रीय साजिश से निपटने में भारत को काफी मदद मिल सकती है।

ट्रंप ने उठाया WHO की भूमिका पर सवाल
कोरोना वायरस संक्रमण को फैलाने में WHO पर आरोप लगते रहे हैं। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी WHO की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अमेरिका ने WHO को चीन की कठपुतली बताते हुए उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि चीन हर साल सिर्फ चार करोड़ डॉलर WHO को देता है। जबकि अमेरिका हर साल 45 करोड़ डॉलर डब्‍ल्‍यूएचओ को देता है। इसके बावजूद डब्‍ल्‍यूएचओ में चीन का नियंत्रण है और उसकी मनमर्ज़ी चलती है। 

WHO के खिलाफ नाराजगी
हालांकि ये बात जगजाहिर भी रही है कि WHO में कई दवा निर्माता कंपनियां भी अलग अलग तरीके से दबाव बनाने की कोशिशें करती रही हैं। यही कारण है कि इन दिनों WHO के ज्यादातर सोशल मीडिया पोस्ट पर लोगों का गुस्सा नजर आने लगा है।

55 से अधिक देशों में की जा रही है दवा की आपूर्ति
आपको बता दें कि कोरोना को मात देने में सक्षम समझी जाने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) की आपूर्ति को लेकर भारत अभी दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन गया है। अभी 55 से अधिक देशों ने भारत से इस दवा को खरीदने का आग्रह किया है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भारत से इस दवा को खरीद रहे हैं, लेकिन गुआना, डोमिनिक रिपब्लिक, बुर्कीनो फासो जैसे गरीब देश भी हैं, जिन्हें भारत अनुदान के तौर पर इन दवाओं की आपूर्ति करने जा रहा है। भारत डोमिनिकन रिपब्लिक, जांबिया, युगांडा, बुर्कीना फासो, मेडागास्कर, नाइजर, मिस्र, माली कॉन्गो, अर्मेनिया, कजाखिस्तान, जमैका, इक्वाडोर, यूक्रेन, सीरिया, चाड, फ्रांस, जिंबाब्वे, जॉर्डन, केन्या, नाइजीरिया, नीदरलैंड्स, पेरू और ओमान को दवाएं भेज रहा है। साथ ही, फिलिपींस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, स्लोवानिया, उज्बेकिस्तान, कोलंबिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), उरुग्वे, बहामास, अल्जीरिया और यूनाइटेड किंगडम (यूके) को भी मलेरिया रोधी गोलियां भेजी जा चुकी हैं।

ट्रंप के ताबड़तोड़ फैसले : चीन के पर कतरने के साथ WHO से रिश्ते तोड़े, हांगकांग का विशेष दर्जा छीना जाएगा

डोनाल्ड ट्रंपअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई सख्त फैसले लिए हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सारे संबंध खत्म करने का ऐलान किया है। चीन पर कई पाबंदियॉं लगाई गई है। हांगकांग का विशेष दर्जा भी वापस लिया जाएगा।
ट्रंप ने मई 29, 2020 को WHO की फंडिंग वापस लेने के साथ ही सभी सम्बन्ध तोड़ने की घोषणा की। हांगकांग का विशेष व्यापार स्टेट्स समाप्त करने और ऐसे चीनी स्नातक छात्रों के वीजा को निलंबित करने का भी ऐलान किया है, जो उनकी सरकार की नजर में संदेहास्पद शोध में शामिल हैं।
कोरोना वायरस को फैलाने को लेकर चीन का संरक्षण करने को लेकर अमेरिका निरंतर WHO की निंदा कर रहा है। इसके पहले ट्रंप ने WHO की फंडिंग रोकने की भी धमकी दी थी।
ट्रंप ने पिछले साल के अंत में चीन के वुहान प्रांत से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस को लेकर WHO की अपर्याप्त प्रतिक्रिया पर रोष व्यक्त किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ अमेरिका के संबंधों को समाप्त करने की घोषणा करते हुए WHO पर कोरोना वायरस संकट के प्रबंधन में चीन समर्थक और पूर्वाग्रही होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके पहले WHO से सुधर को लेकर सिफारिशें की गईं, लेकिन संगठन ने इस पर ध्यान नहीं दिया और सुधार के लिए किसी भी सुझाव को नहीं माना।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हृवाइट हाउस में कहा कि चीनी अधिकारियों ने डब्ल्यूएचओ के लिए अपने रिपोर्टिंग दायित्वों को ‘नजरअंदाज’ किया और संगठन पर दबाव बनाया कि वह इस महामारी के बारे में जनता को गुमराह करे जिसने अब 1 लाख से अधिक अमेरिकियों को मार दिया है।
उन्होंने कहा कि चीन WHO को साल भर में 40 मिलियन डॉलर का अनुदान देकर अपने नियंत्रण में रखता है, तो वहीं अमेरिका हर साल स्वास्थ्य संगठन को करीब 450 मिलियन डॉलर का अनुदान देता है।
ट्रम्प ने पहले भी कई बार नाराजगी जताते हुए WHO को दी जाने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगा दी थी। इसके साथ उन्होंने संस्था के डायरेक्टर को पत्र लिखकर 30 दिन के अंदर बड़े बदलाव करने के सुझाव दिए थे। ऐसा न किए जाने पर फंडिंग रोकने की धमकी भी दी थी।
इसके साथ ही चीन और हांगकांग को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कल ही अहम बयान में बताया कि अमेरिका ने बुधवार (मई 27, 2020) को अमेरिकी कानून के तहत हांगकांग के विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया।
अमेरिका ने चीन पर हांगकांग की स्वायत्तता का हनन करने का आरोप लगाया और कहा कि अब इसे चीन से स्वायत्त नहीं कहा जा सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने अमेरिकी संसद में कहा कि हांगकांग अब अमेरिकी कानून के तहत अपनी विशेष स्थिति के लिए योग्य नहीं है।
उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया कि अमेरिका के विशेष दर्जे से हांगकांग को लाभ मिलता है और अब अमेरिका को लगता है कि वास्तव में चीन इसका फायदा उठा रहा है। दरअसल चीन की संसद में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस ने हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मँजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को चीन के वरिष्ठ नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। इस नए कानून के लागू हो जाने से हांगकांग अपनी स्वायतत्ता खो सकता है और हांगकांग का विशेष दर्जा खत्म हो जाएगा।
साल 1997 में ब्रिटेन ने जब हांगकांग चीन को सौंपा था, उस समय कुछ कथित कानून बनाए गए जिनके तहत हांगकांग में कुछ खास तरह की आजादी थी जो आम चीनी लोगों को हासिल नहीं है। चीन का यह प्रस्ताव इतना विवादित है कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद दुनियाभर में कई देश चीन के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। इस नए कानून के खिलाफ हांगकांग में काफी पहले से विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। इससे पहले बुधवार को सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुई।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर यह कानून लागू हो जाएगा तो अमेरिका और हांगकांग के बीच होने वाले विशेष व्यापार का अंत हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन होंगे स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन

कोरोना महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन होंगे स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, 22 मई को संभालेंगे पद
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना महामारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन को कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन पद को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी है. डब्लूएचओ के 34 सदस्यों वाले बोर्ड में जापान के डॉक्टर हिरोकी नाकातानी की जगह अब डॉक्टर हर्ष वर्धन लेंगे. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डॉक्टर हर्ष वर्धन 22 मई को बोर्ड के चेयरमैन पद संभालेंगे. जिसके बाद डॉ. हर्ष वर्धन के पास भारत के साथ- साथ दूसरे देशों की जिम्मेदारी होगी. हालांकि, यह पूर्णकालिक जिम्मेदारी नहीं होगी लेकिन स्वास्थ्य मंत्री को WHO की कुछ बैठकों में जरूर शामिल होना होगा.
वैश्विक मंच पर भारत के प्रतिनिधित्व के प्रस्ताव पर 194 देशों ने हस्ताक्षर किए. हालांकि, संगठन की ओर से यह फैसला पिछली साल कर लिया गया था कि अगर चेयरमैन भारत की ओर से होगा. अधिकारियों के अनुसार, हर साल यह पद बदलता है और ऐसे में पिछले साल तय हुआ था कि अगला प्रतिनिधित्व भारत करेगा.

बोर्ड की साल में दो बार बैठक होती है जिसमें मुख्य बैठक आमतौर पर जनवरी और दूसरी बैठक मई में होती है. संगठन में कार्यकारी बोर्ड का मुख्य कार्य असेंबली के निर्णयों व पॉलिसी तैयार करने के लिए सलाह देना होता है. तकनीकी रूप से देखें तो स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर 34 देशों को ही कार्यकारी बोर्ड का सदस्य बनाया जाता है. हालांकि, इस बार कुछ पिछड़े देशों को शामिल किया गया है जिसमें बोट्सवाना, कोलंबिया, घाना, गिनी-बिसाऊ, मेडागास्कर समेत कई देश शामिल हैं.

CIA का दावा : चीन ने कोरोना संक्रमण की जानकारी विश्व से छिपाने के लिए बनाया था WHO पर दबाव

चीन WHO कोरोना
चीन राष्ट्रपति जिनपिंग और WHO के डायरेक्टर जनरल टेडरॉस के बीच
 28 जनवरी को हुई मुलाकात
इस बात का खुलासा न्यूजवीक की रिपोर्ट के जरिए हुआ है। इस रिपोर्ट का नाम ‘UN-China: WHO Mindful But Not Beholden to China’ है। खबर के अनुसार, नाम न बताने कि शर्त पर दो CIA ऑफिशियल ने इस रिपोर्ट को कन्फर्म किया है।पूरे विश्व में इस समय भारी तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर पहले ही चीन संदेह के घेरे में है। ऐसे में अब अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने दावा कर दिया है कि उसी के कारण WHO ने समय रहते कोरोना के प्रति दुनिया को सचेत नहीं किया।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी (US) खुफिया एजेंसी CIA के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि चीन के दबाव की वजह से ही वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने वक़्त रहते दुनिया के देशों के लिए कोरोना वायरस की चेतावनी जारी नहीं की। 
CIA के मुताबिक चीन ने WHO को धमकी दी थी कि अगर उसने जल्दबाजी में कोई अलर्ट जारी किया तो वो उसे कोरोना संक्रमण की जाँच में शामिल नहीं करेगा।
WHO को दी इस धमकी के पीछे का उद्देश्य PPE, मास्क और अन्य मेडिकल सामनों की जमाखोरी करना बताया जा रहा है। डेली मेल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जब तक WHO ने चेतावनी जारी नहीं की तब तक चीन दुनिया भर के देशों से महामारी के नाम पर PPE, मास्क, दस्ताने और अन्य ज़रूरी सामान मँगाकर इकठ्ठा करता रहा। मगर जैसे ही ये संक्रमण दुनिया में फैला उसने इन उपकरणों को उच्च दामों में बेचना शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, चीन द्वारा WHO पर ये दबाव जनवरी में बनाया गया। इस समय तक वहाँ पर करीब 80,000 केस कोरोना के सामने आ चुके थे और इटली व स्पेन में कोरोना की संख्या बढ़नी तेजी से शुरू हो गई थी। लेकिन, ऐसे हालातों को जानते हुए WHO ने कोरोना की जाँच में बने रहने के लिए इससे जुड़े खतरों को दुनिया को बताने में देर की।
सिर्फ CIA ही नहीं, बल्कि जर्मन इंटेलीजेंस एजेंसी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद WHO चीफ टेडरॉस एडनॉम से बातचीत की और उन्हें कोरोना संबंधी जानकारी न देने के लिए प्रभावित किया। जबकि, WHO ने इस दावे को खारिज किया है और कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई।
जर्मन ख़ुफ़िया एजेंसी BND के मुताबिक, जिनपिंग के कहने पर ही कोरोना के इंसानों से इंसानों में फैलने की बात को 15 दिन तक छिपाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद WHO चीफ टेडरॉस एडनॉम से इस बारे में बातचीत की और उन्हें सभी जानकारी देने से रोका।
ताइवान की लैब ने 10 जनवरी को ही WHO को बता दिया था कि वायरस इंसानों से इंसानों में फ़ैल रहा है। लेकिन फिर भी टेडरॉस ने 21 जनवरी को जिनपिंग से मुलाकात की और उनके कोरोना रोकने में उनके प्रयासों को सराहा। 28 जनवरी को टेडरॉस और जिनपिंग की मुलाकात के बाद 30 जनवरी को WHO ने कोरोना को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया।
रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि चीन के दवाब में WHO ने जो जानकारी देने में देरी दिखाई, उसी की वजह से यूरोप और एशिया के देशों को ट्रैवल बैन, लॉकडाउन औप अन्य सुरक्षा के कदम उठाने में करीब 6 हफ्ते की देरी हुई।
इससे पहले अमेरिका ने WHO पर चीन के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को मिलने वाले फंड पर रोक लगा दी थी और कहा था कि कोरोना वायरस के चीन में उभरने के बाद इसके प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

WHO के नक़्शे में लद्दाख को बताया चीन का हिस्सा: J&K को शेष भारत से अलग

भारत नक्शा, लद्दाख, WHO, चीन
भारत का ग़लत नक्शा (बाएँ) और WHO के मुखिया की चीनपरस्ती
के कारण वायरल तस्वीर (दाएँ )
‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ ने भारत के नक़्शे के साथ छेड़छाड़ करते हुए लद्दाख को चीन का भाग दिखाया है। WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरे अक्साई चीन को ही चीन का हिस्सा बता दिया गया। जबकि जम्मू कश्मीर और लदाख पूर्णतः भारत का हिस्सा है और ये दोनों अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के कुछ भूभाग पर पाकिस्तान और चीन का भी अवैध कब्जा रहा है।
आखिर ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ किसके इशारे पर घिनौना काम कर रहा है? इससे पहले ‘यूनाइटेड नेशंस’ के कई नक्शों में जम्मू कश्मीर को ‘विवादित प्रदेश’ के तौर पर भी रखा जाता रहा है। लेकिन, ये पहली बार है जब नक़्शे में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग रंग का दिखाया गया है, और शेष भारत के नक़्शे को अलग रंग का। भारत, पाकिस्तान और भूटान में भारतीय राजदूत रह चुके गौतम बम्बावाले ने बताया कि WHO ने जो भारत का नक्शा दिखाया है, वो UN के ‘स्टैण्डर्ड नक़्शे’ से काफ़ी अलग है।
Times of India में WHO द्वारा भारत के गलत नक़्शे पर प्रकाशित रपट 
यहाँ तक कि दोनों प्रदेशों के जिन हिस्सों पर अवैध कब्ज़ा नहीं है, उन्हें भी भारत का भाग नहीं दिखाया गया है। उन्होंने इसे विचित्र, गलत और चौंका देने वाला करार दिया। इससे पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा बता दिया था। वो इसे साउथ तिब्बत का एक भाग मानता है। उसने ‘स्काई मैप’ को अपडेट कर के ऐसा किया था। WHO की चीनपरस्ती के कारण उसका पहले से ही विरोध हो रहा है।
WHO की फंडिंग पर रोक 
अमेरिका ने भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को मिलने वाले फंड पर रोक लगा दी है। इसका ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने अपने प्रशासन को WHO की फंडिंग को रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ट्रंप ने कहा था कि कोरोना वायरस के चीन में उभरने के बाद इसके प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।
कुछ ऐसी ही हरकत ‘इंडिया टुडे’ ने भी की थी। एक वायरल वीडियो में राजदीप सरदेसाई ‘इंडिया टुडे’ पर अपने प्राइम टाइम शो की मेजबानी करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया गया। वीडियो में एक ग्राफिकल प्रस्तुति में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाया गया। इतना ही नहीं पाकिस्तान के नक्शे में कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को शामिल करके दिखाया गया।

वुहान ने रातों-रात 50% बढ़ाई कोरोना से हुई मौतों की संख्या

China Wants to Dominate World, but Will U.S. Values Survive?
-19 वायरस से हुई मौत के आँकड़ों को छिपाने को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच चीन ने वुहान प्रान्त में हुई मौत के नए आँकड़े जारी किए हैं। नए आँकड़ों में चीन में वुहान में हुई कुल मौतों में 50% की बढ़ोत्तरी करते हुए 1,290 नए नाम और जोड़े हैं। अब वुहान में मृतकों का आँकड़ा बढ़कर 4,632 हो गया है।
दुनियाभर में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे पहले चीन के वुहान शहर से ही शुरू हुआ था। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के अनुसार कोरोना वायरस से वुहान में अब तक 3,869 लोगों की मौत हुई है। चीन ने यह भी बताया कि वुहान प्रान्त में मौतों का प्रतिशत 7.7% रहा, जो कि पहले घोषित किए गए 5.8% के आँकड़े से ज्‍यादा है।
WHO के दबाव की आशंका
चीन के वुहान प्रान्त में हुई मौत के नए आँकड़ों पर चीनी सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि कई मामलों में मौत का कारण जानने में उनसे गलती हुई या कई मामलों का उन्हें पता नहीं चल पाया। ज्ञात हो कि वुहान प्रशासन की ओर से केवल मृतकों के आँकड़ों में ही बढ़ोतरी नहीं की गई है, बल्कि उसने कुल संक्रमितों की संख्या में भी इजाफा किया है। वुहान प्रशासन की ओर से संक्रमितों की संख्या में 325 की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही अब वुहान में संक्रमितों की कुल संख्या 50,333 हो गई है।

विश्व में हो रही चीन की आलोचना 
चीन में हुई मौतों को लेकर कई प्रकार के अटकल पहले से ही लगाए जा रहे थे। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बृहस्पतिवार को कहा था कि कई देश कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या छिपा रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि क्या आपको लगता है कि दुनिया भर के कई देश अपने यहाँ होने वाली मौतों की जानकारी ईमानदारी से साझा कर रहे हैं? ट्रम्प ने सपष्ट शब्दों में चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस मामले में ईमानदार नहीं है।
यह भी कयास लगे जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा WHO पर उसके पक्षपाती रवैये को लेकर की गई फंडिंग बंद करने की घोषणा के बाद ही चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दबाव में आकर यह आँकड़े जारी किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने WHO पर चीन का पक्ष लेने और कोरोना पर सही समय पर दुनिया को जानकारी न देने का आरोप लगाते उसकी फंडिंग रोक दी थी।
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि WHO ने चीन में फैले कोरोना वायरस की गंभीरता को छिपाया और यदि संगठन ने बुनियादी स्तर पर काम किया होता तो यह महामारी पूरी दुनिया नहीं फैलती और मरने वालों की संख्या काफी कम होती।
अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सबसे ज़्यादा फ़ंड देता है। अमरीका ने पिछली बार भी विश्व स्वास्थ्य संगठन को क़रीब 40 करोड़ डॉलर का फ़ंड दिया था जो सबसे ज़्यादा है। वर्तमान में अमरीका दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है।
चीन के रहस्यमयी रवैये को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को बताया था कि यह सोचना गलत होगा कि चीन ने महामारी का अच्छी तरह से मुकाबला किया था। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप वहाँ कई ऐसी चीजें हुईं हैं, जिनका दुनिया को पता ही नहीं है।
कोरोना वायरस को लेकर चीन के नजरिए पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमनिक राब ने भी कहा कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी, चीन से कोरोना वायरस प्रसार के बारे में कठोर प्रश्न पूछेंगे। उन्होंने कहा, ”इस संकट के बाद हमारे बीच कामकाज पहले जैसा नहीं रहेगा।” डाउनिंग स्ट्रीट में प्रेस वार्ता के दौरान चीन के साथ भावी संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में राब कहा, ”हमें यह कठोर प्रश्न पूछना ही होगा कि यह कैसे आया और इसे पहले क्यों नहीं रोका जा सका?”
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देश में मजहबी उन्माद फैलाने वाले कट्टरपंथियों और तथाकथित सेकुलरों के कारण बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत की बहन रंगो...
चीन के वुहान प्रान्त से ही कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी और अब यह दुनिया के बड़े हिस्से में फैल चुका है। चीन शुरुआत से ही कोरोना वायरस पर हो रहे शोध से लेकर इसके संक्रमण और मौतों पर पूरी दुनिया को गुमराह करता आया है। अब नए आँकड़ों ने एक बार फिर पूरे विश्व ने चीन को शंका की दृष्टि से देखना शुरू कर दिया है।

कोरोना की जांच में WHO को शामिल नहीं करने पर क्‍या छुपा रहा है चीन?

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
वर्ष 2020 की शुरुआत एक ऐसी त्रासदी से हुई है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। चीन के वुहान से निकले नोवल कोरोना वायरस(corona virus) ने आज पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया है। चीन की मीडिया की माने तो उसने वुहान समेत अपने कई शहरों में तेजी से फैले कोरोना वायरस को काफी हद तक नियंत्रित कर लेने का दावा किया है, लेकिन दुनिया के कई देश इस बीमारी से निजात पाने के लिए युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं
अकेले इटली जैसे देश में सोमवार(मार्च 23) तक कुल 5,477 लोगों की इस वायरस से मौत हो चुकी है. अमेरिका में कुल 582 और भारत में 10 लोगों की मौत के मामले सामने आये हैं। जहां दुनिया के देश इस महामारी को रोकने की जी-तोड़ कोशिश में लगे हैं। इस वायरस को लेकर चीन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस वायरस को नियंत्रित करने के लिए ये जानना जरूरी है कि ये वायरस आया कहां से?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अधिकारी गौडेन गेलिया ने एक बयान में कहा है कि चीन की सरकार वुहान में कोरोना वायरस के फैलाव की वास्तविक कारणों की जांच में लगी हुई है और डब्लूएचओ (WHO) को इस जांच में शामिल नहीं किया गया है। इसकी जांच में हम चीन सरकार की मदद करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। चीन की सरकार वुहान में कोरोना वायरस के फैलाव की तहकीकात कर रही है लेकिन दुनिया के कई देश चीन की इस जांच को शक की निगाह से देख रहे हैं
चर्चा यह भी सुनने को मिल रही है कि चीन ने अपनी बढ़ती जनसँख्या को कम करने के इस वायरस को बनाया है। यदि यह मात्र एक अफवाह है, फिर किस कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन को जाँच में शामिल कर रहा? जो इस चर्चा/अफवाह/शक को बल दे रहा है। चीन को यह भी मालूम होना चाहिए कि हो सकता है उसकी जाँच विश्व के लिए सार्थक सिद्ध हो। यह भी संभव हो सकता है कि चीन को WHO को शामिल करने पर अपनी कमियों के जगजाहिर होने का डर हो।     
जेएनयू के प्रोफेसर अश्विन महापात्रा ने चीन सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया है जिसमें चीन का कहना है कि उसकी जांच में इस वायरस को ह्यूमन टू ह्यूमन (यानी एक इंसान से दूसरे इंसान) से फैलने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रोफेसर अश्विन महापात्रा ने कहा है कि हमें चीन के ऐसे किसी भी दावे पर यकीन नहीं करना चाहिए
कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने ट्विटर पर चीन की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा है, ''चीन ने WHO को कोरोना वायरस की जांच से क्यों बाहर रखा है, चीन ऐसा क्या छुपा रहा है.'' मनीष तिवारी के मुताबिक, 'जीन म्यूटेशन की सामान्‍य प्रक्रिया में इस वायरस को फैलने में सालों लग जाते हैं जबकि लैब में...?'
चीन के मीडिया का तर्क है कि कोरोना वायरस जानवर के जरिये इंसान में फैला है, चीन के वैज्ञानिक वुहान में इस वायरस के फैलाव के पीछे बैट या पैंगोलिन जैसे जानवर को जिम्‍मेदार मानते हैं लेकिन WHO इस तर्क से पूरी तरह सहमत नहीं है
गौडेन गेलिया के मुताबिक किसी भी जानवर से इंसान तक वायरस का फैलाव होने में कई-कई साल लग जाते हैं। सार्स जैसी खतरनाक बीमारी के वायरस को फैलने में दस साल से ज्यादा समय लगा।'
इस विषय से जुड़े कुछ जानकारों का मानना है कि इस वायरस को चीन के लैब में बनाया गया है और चीन स्वतंत्र तरीके से जांच न करा कर कुछ न कुछ छुपा रहा है। को-फाउंडर आफ जूडिशियल वाच एंड फ्रीडम वाच के लैरी क्लेमैन ने आरोप लगाया है कि COVID-19 चीन के वुहान में बना एक जैविक हथियार है
लैरी क्लमैन ने वुहान में स्थित वुहान इंस्टीट्यूट आफ वीरोलोजी के खिलाफ 20 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया है। लैरी क्लेमैन ने इस वायरस के लिए चीन की पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना है और वुहान में स्थित लैब को जिम्मेदार ठहराया है
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चीन में हंता वायरस का यह मामला ऐसे समय पर आया है जब पूरी दुनिया वुहान से निकले कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है.....
एक रिपोर्ट के मुताबिक वुहान स्थित इंस्टीट्यूट आफ वीरोलोजी के डायरेक्टर सी जेंनगली और चीनी सेना के अधिकारी मेजर जनरल (वीरोलोजिस्ट) चेन वीई लैब की गतिविधियों पर नज़र रखते हैं