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‘इस्लाम में अभय मुद्रा की कोई धारणा नहीं, हम मूर्ति पूजा में नहीं मानते’: राहुल गाँधी पर भड़के सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती, इस्लामी काउंसिल के अध्यक्ष

                 राहुल गाँधी ने अभय मुद्रा को इस्लाम से जोड़ा तो सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने किया विरोध
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सोमवार (1 जुलाई, 2024) को संसद में बतौर नेता प्रतिपक्ष पहला संबोधन देते हुए हिन्दुओं को हिंसक बता दिया और अग्निपथ योजना को लेकर झूठ फैला दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिन्दू देवी-देवता ‘अभय मुद्रा’ में आशीर्वाद देते हैं, ये हर मजहब में है। उन्होंने इसके लिए गुरु नानक और जीसस क्राइस्ट की तस्वीर दिखाई। साथ ही उन्होंने इस्लाम को भी ‘अभय मुद्रा’ से जोड़ दिया, जिसके बाद मुस्लिम समाज ही अब उनके खिलाफ उतर आया है।

अब चर्चा यह भी गर्म हो रही है कि फ़िरोज़ जहांगीर का पोता कब से हिन्दू हो गया? अगर अपने दादा की मज़ार पर जाकर सजदा कर उनसे ज्ञान लेने की कोशिश की होती पार्लियामेंट में एक प्रतिपक्ष की तरह गंभीरता से बोलते। राहुल सदन में ऐसे बोलते रहे जैसे किसी चुनावी सभा में बोल रहे हैं। पद की गरिमा तक नहीं रखी। प्रतिपक्ष नेता की गरिमा किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं होती। 

राहुल गाँधी के इस संबोधन पर ‘ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल’ के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “मेरी भी जानकारी में आया है और मैंने थोड़ा-बहुत देखा भी है कि राहुल गाँधी ने संसद में ‘अभय मुद्रा’ का जिक्र किया और मुस्लिमों द्वारा दुआ माँगे जाने से इसकी तुलना करते हुए कहा है कि ये इस्लाम में भी है। ‘अभय मुद्रा’ हिन्दू धर्म के अंदर विभिन्न मुद्राओं का जिक्र है और विभिन्न देवी-देवता हैं उसमें हो सकता है।”

इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में मूर्तिपूजा या पूजा-पाठ का कोई जिक्र नहीं है, न ही किसी किस्म के ‘अभय मुद्रा’ का जिक्र है। सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वो नहीं जानते हैं कि किस स्थिति में उन्होंने इसे इस्लाम से जोड़ा है और जस्टिफिकेशन देने की कोशिश की है कि कांग्रेस के चुनाव चिह्न से इस्लाम में दुआ माँगने के तौर-तरीके से जोड़ा है। ‘ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल’ के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में ऐसा कुछ भी नहीं है, वो इसका खंडन करते हैं।

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हिन्दू धर्म की गलत व्याख्या कर रहे राहुल गाँधी; राहुल ने नेता प्रतिपक्ष की गरिमा भी नहीं रखी ; मं

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हिन्दू धर्म की गलत व्याख्या कर रहे राहुल गाँधी; राहुल ने नेता प्रतिपक्ष की गरिमा भी नहीं रखी ; मं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद चल रहे पहले संसद सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल ...

संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गाँधी को करारा जवाब देते हुए कहा था कि वो इस्लामी विद्वानों से ‘अभय मुद्रा’ के बारे में पूछ लें, साथ ही ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी’ से भी गुरु नानक की तस्वीर दिखाने से पहले इस संबंध में सलाह ले लें। राहुल गाँधी ने संसद में कहा कि खुद को हिन्दू बताने वाले हिंसा करते हैं, नफरत फैलाते हैं और असत्य बोलते हैं। पीएम मोदी ने खुद इसका जवाब देते हुए कहा कि ये गंभीर विषय है, इस पर उन्हें माफ़ी माँगनी चाहिए।

देवी-देवताओं की नग्न तस्वीरें, भगवान की प्रतिमा को चप्पल मारने वाला जुलूस… पेरियार ने गैर मर्दों से सेक्स को भी बताया था जायज, सुपरस्टार रजनीकांत ने किया था प्रहार

सुपरस्टार रजनीकांत ने भी पेरियार द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान पर उठाए थे सवाल
जब से उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की है और इसे डेंगू-मलेरिया बताया है, तब से पेरियार का नाम चर्चा में है। इरोड वेंकटप्पा रामासामी नायकर को ‘पेरियार’ नाम से जाना गया और तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति के नेताओं ने लंबे समय तक सत्ता में रह कर उसे सामाजिक न्याय का मसीहा घोषित कर दिया। उदयनिधि स्टालिन का कहना है कि वो अपने बयान पर कायम है। इस दौरान उन्होंने खुद को पेरियार की विचारधारा का अनुसरण करने वाला भी बताया।

उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु में युवा एवं खेल मामलों के मंत्री हैं। उनके पिता, जो सत्ताधारी DMK के सुप्रीमो हैं, वो राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उदयनिधि स्टालिन के दादा करुणानिधि ने 1969-2011 के बीच 5 बार मुख्यमंत्री का पद सँभाला था। पेरियार की बनाई ‘द्रविड़ कझगम’ पार्टी ही बाद में DMK कहलाई और अभिनेता MGR ने इसे तोड़ कर AIADMK बनाया था। एमजीआर भी तमिलनाडु के सीएम रहे। डीएमके की पूरी की पूरी राजनीति ही हिन्दू विरोध और ब्राह्मण विरोध के इर्दगिर्द घूमती है।

अब जब पेरियार की चर्चा हो रही है, ये भी जानने लायक बात है कि कभी सुपरस्टार रजनीकांत ने भी उसके हिन्दू विरोध को लेकर उस पर निशाना साधा था। उनके खिलाफ तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन हुए थे, नेताओं ने बयानबाजी की थी, पुलिस में शिकायत तक दर्ज हुई थी – लेकिन, दक्षिण भारत के सबसे मशहूर अभिनेता ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था। उस समय रजनीकांत की राजनीतिक एंट्री की पटकथा भी लिखी जा रही थी, लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने नई पार्टी के गठन का इरादा छोड़ दिया था।

जब सुपरस्टार रजनीकांत ने पेरियार पर साधा निशान

14 जनवरी, जनवरी 2020 को सुपरस्टार रजनीकांत ने ‘तुगलक’ मैगजीन की 50वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं का कट्टर आलोचक था और उसने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। उन्होंने बताया था कि इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। केवल चो रामास्वामी (तुगलक मैग्जीन के संस्थापक) ने इस मामले को उजागर किया।
विरोध होने के बाद उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम में उन्होंने पेरियार को लेकर जो भी बोला वो उस समय मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। रजनीकांत ने स्पष्ट कर दिया था कि इसके सबूत उनके पास अब भी है, इसलिए वे माफी नहीं माँगेंगे। रजनीकांत ने इस दौरान ये जानकारी भी दी थी कि सत्‍तारूढ़ डीएमके को ये बात पसंद नहीं आई और मैगजीन के उस संस्‍करण को तमिलनाडु सरकार ने जब्‍त कर लिया। मगर, चो ने इसे दोबारा छापा। इसके बाद ये मैगजीन ब्‍लैक में बिकी।
सुपरस्टार रजनीकांत ने इसके बाद बताया था कि उस दौरान जो मैगजीन 10 रुपए की बिकती थी, उसकी बिक्री 50 और 60 रुपए में हुई। उन्होंने तंज कसा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने मैगजीन को मुफ्त की पब्लिसिटी दे दी। इसके लिए अगले संस्‍करण में चो ने उन्‍हें पब्लिसिटी मैनेजर के तौर पर काम करने के लिए धन्‍यवाद भी दिया। हालाँकि, इसके बाद मैग्जीन के संस्थापक चो को करुणानिधि का गुस्सा झेलना पड़ा। लेकिन, तब तक वे पूरे देश में लोकप्रिय हो गए थे।

 विरोध होने के बाद सुपरस्टार रजनीकांत ने स्पष्ट कहा था, “मैं अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। क्योंकि मैं इसे साबित कर सकता हूँ।” कोयम्बटूर में उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उनके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका भी दौर की गई थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था। ‘द्रविदार विधुतलाई कझगम (DVK)’ ने ये याचिका दायर की थी। तब रजनीकांत के धुर विरोधी रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने भी उन्हें इस प्रकार का कड़ा स्टैंड लेने पर बधाई दी थी और कहा था कि ज़रूरत पड़ी तो न्यायालय में वो उनका साथ देंगे।

तमिलनाडु के सेलम में 1971 में क्या हुआ था

सुपरस्टार रजनीकांत ने बताया था कि राम और सीता की नग्न तस्वीरों को चप्पल से मारा गया था। इस संबंध में 25 जनवरी, 1971 को ‘द हिन्दू’ ने स्थानीय संवाददाता के हवाले से छापा था कि ‘द्रविड़ कझगम’ नामक पार्टी ने अन्धविश्वास के खिलाफ इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान भगवान मुर्गा के जन्म से संबंधित एक अश्लील प्रदर्शनी दिखाई गई थी। ऋषियों को तपस्या करते हुए और अप्सराओं को भी दिखाया गया था। इसी दौरान भगवान राम की एक 10 फुट की प्रतिमा को एक गाड़ी पर रखा गया था और दर्जनों लोग इसे चप्पल से पीटते हुए चल रहे थे।
लकड़ी पर भगवान राम का कटआउट बनाया गया था। साथ ही सरकार से माँग की गई थी कि किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी को आकर्षित करना अपराध नहीं होना चाहिए। इस सभा में पेरियार ने ये भी कहा था कि किसी दूसरे की पत्नी के साथ प्यार करना, संबंध बनाने से उस महिला के पति को ऐतराज नहीं होना चाहिए। इस पर सवाल पूछे जाने पर तत्कालीन सीएम करुणानिधि ने कहा था कि कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई होंगी, वो इसे समझ सकते हैं। पेरियार ने इस दौरान विवाहेतर संबंधों की वकालत की थी।
इतना ही नहीं, रैली के अंत में भगवान राम की तस्वीर को जला भी डाला गया था। इस दौरान पेरियार एक ट्रैक्टर पर बैठा हुआ था और इस रैली में पीछे-पीछे चल रहा था। इस दौरान पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि किसी विवाहिता द्वारा किसी गैर-मर्द से संबंध बनाना ‘Tweedledum& Tweedledee’ (बच्चों वाली अंग्रेजी कविता) नहीं है, बल्कि ये ज़रूरी है।

नेहरू ने कहा था – पेरियार को पागलखाने में डालो

1957 में पेरियार ने एक जनसभा में अपने अनुयायियों को ब्राह्मणों के नरसंहार और उनका घर जला डालने के लिए उकसाया। जवाहरलाल नेहरू तब भारत के प्रधानमंत्री थे और के कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री। उस साल अक्टूबर में नेहरू ने सीएम को लिखा था कि ये हैरान करने वाला है, क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, हत्या भी हो सकती है। नवंबर में दूसरे पत्र में उन्होंने कहा कि EV रामासामी नायकर द्वारा लगातार ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाए जाने के कारण वो चिंता में हैं।
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पत्र में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था, “जो पेरियार ने कहा है, वो सिर्फ एक पागल या अपराधी द्वारा ही कहा जा सकता है। मैं उसे पर्याप्त रूप से नहीं जानता, ताकि मैं समझ सकूँ कि वो क्या है। लेकिन, एक बात को लेकर मैं स्पष्ट हूँ कि इस तरह की चीज देश पर बहुत ही निरुत्साही प्रभाव डालने वाली है। सभी समाज विरोधी आपराधिक तत्व यही सोचते हैं कि वो इस तरह की चीजें कर सकें। इसीलिए, मैं आपको सलाह देता हूँ कि इस मामले में कार्रवाई करने में देरी न करें। उसे किसी पागलखाने में डाल कर उसके विकृत दिमाग का इलाज करवाया जाए।”

अल्लाह और ओम : मौलाना मदनी ने फैलाया प्रपंच, अल्ला का संस्कृत कनेक्शन बता शंकराचार्य ने दी धोबी पछाड़

                                              अल्ला पर शंकराचार्य निश्चलानंद ने दिया ज्ञान (फोटो साभार दैनिक भास्कर)
दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन में मौलाना अरशद मदनी ने अल्लाह और ओम को एक बताकर जो विवाद कुछ दिन पहले खड़ा किया, वह अभी भी थमा नहीं है। 22 फरवरी, 2023 को वाराणसी में अल्लाह और ओम को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि अल्ला (Alla) संस्कृत भाषा का शब्द है। उन्होंने संदर्भ सहित इसकी व्याख्या की। इस विवाद से पहले भी स्वामी निश्चलानंद सरस्वती इस बारे में विस्तार से समझा चुके हैं। 

दिल्ली के रामलीला मैदान में मौलाना अरशद मदनी द्वारा अल्लाह और ओम में समानता बता क्या सच्चाई को उजागर करने की रौशनी को कट्टरपंथियों के भय से समझने और पहचानने की कोशिश नहीं की जा रही। मदनी ने कोई हैरान करने वाली बात नहीं बोली है, फेसबुक पर सोशल मीडिया पर प्रचलित चित्र जिसे मेरे एक मित्र ने प्रेषित किया। अब संलग्न इस चित्र में अंकित शब्दों की गूढ़ता को समझिये यानि महंत धीरेन्द्र शास्त्री के बढ़ते प्रभाव की बौखलाहट ने ही उस सत्य को बोलने को विवश कर दिया, जिसे कट्टरपंथी सामने नहीं आने दे रहे थे, यानि उन्हीं के श्रीमुख से कहलवा दिया। यही तो श्री बजरंगबली का चमत्कार है। यही कारण है कि छद्दम धर्म-निरपेक्षों ने संस्कृत को ज्यादा महत्व नहीं दिया। अक्सर अपने लेखों में अल्लाह और 786 का हिंदुत्व यानि सनातन से सम्बंधित होने का उल्लेख करता रहा हूँ। लेकिन मदनी को लेकर टीवी पर होती चर्चाओं ने मेरी जानकारी में नमाज और नमस्ते के बीच समानता होने का ज्ञानवर्धन कर दिया। मदनी ने जिस Pandora Box को खोला है, अक्ल से पैदल कट्टरपंथियों की समझ से शायद बाहर है।

खैर, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने शंकराचार्य से मौलाना मदनी के दावों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अल्ला शब्द संस्कृत का है। उनके अनुसार जो लोग संस्कृत व्याकरण के जानने वाले हैं, उन्हें यह ज्ञात होगा। उन्होंने लघुकौमुदी (लघुसिद्धान्तकौमुदी) नामक संस्कृत व्याकरण पुस्तक पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि अल्ला शब्द संस्कृत का है, शक्ति और मातृ शक्ति के लिए इसका प्रयोग होता रहा है।

नीचे जो वीडियो है, उसमें यह प्रश्न और उत्तर 3 मिनट 33 सेकेंड से सुना जा सकता है। इसमें आगे स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने जोर देते हुए कहा कि सभी के पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू ही थे। उन्होंने बृहदारण्यक उपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्यों की उत्पत्ति मनु-शतरूपा द्वारा हुई है।

अल्लाह (Allah) और अल्ला (Alla) शब्द का विवाद नया नहीं है। इस विवाद के पहले भी लोग शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से अल्ला शब्द और अल्लोपनिषद (अल्ला उपनिषद) को लेकर सवाल पूछ चुके हैं। उन्होंने तब भी उसका जवाब दिया था। नीचे के वीडियो में 40 वें सेकेंड से शंकराचार्य अमरकोष और लघुसिद्धान्तकौमुदी का जिक्र करते हुए कह रहे हैं कि व्याकरण के इन पुस्तकों में अल्ला शब्द शक्ति के पर्यायवाची के लिए उपयोग किया गया है।

वहीं 1 मिनट के आगे शंकराचार्य निश्चलानंद उपनिषदों पर बात करते हैं। यहाँ शंकराचार्य बताते हैं कि मुख्य उपनिषदों के अलावा चौखम्बा प्रकाशन ने उपनिषद संग्रह में अल्लोपनिषद नाम से एक उपनिषद का प्रकाशन किया है, जिसमें नमाज ज्यों का त्यों है। शंकराचार्य जब यह कह रहे होते हैं तो उनके मुख पर भाव परिवर्तित हो जाते हैं, चेहरे पर स्पष्ट तौर से हल्की मुस्कान देखी जा सकती है। अल्लोपनिषद और नमाज का जिक्र सुनते ही सभा में बैठी भीड़ की ओर से एक हल्की हँसी भी सुनी जा सकती है।

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मान्यता प्राप्त 108 उपनिषदों और 13 प्रमुख उपनिषदों में अल्लोपनिषद शामिल नहीं है। स्पष्ट है कि शंकराचार्य ने अल्लोपनिषद और उसमें नमाज का जिक्र करते समय व्यंग्यात्मक भाव में जवाब दिए थे। वीडियो में आगे उन्होंने अल्ला (Alla) शब्द की वही व्याख्या की, जो व्याख्या उन्होंने दो दिन पहले 22 फरवरी 2023 को की। जाहिर है शंकराचार्य झूठ और प्रपंच का जवाब उसी शैली में दिए। मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे अल्लाह (Allah) से जोड़ कर देखा, भ्रमित होकर प्रतिक्रिया भी दी।

घरों में कैद रहने के कारण अरब की औरतें मर्दों से ज्यादा दिखती हैं ‘थुलथुल’: द इकोनॉमिस्ट

द इकोनॉमिस्ट पर फूटा मुस्लिमों का गुस्सा
विदेश के जाने-माने समाचार पत्र ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने हाल में अरब औरतों पर लिखे एक लेख में ‘मोटी’ शब्द का प्रयोग किया। इस लेख की शुरुआत जेनब नाम की महिला से हुई जिसका वजन 120 किलो है।

इस लेख का शीर्षक जहाँ दिया गया, “आखिर अरब जगत में औरतें जो हैं वो मर्दों से मोटी क्यों होती हैं।” वहीं इस लेख का निष्कर्ष यह दिखाया गया कि अरब में औरतें ज्यादातर घर में रहती हैं इसलिए वह मोटी होती हैं। इसके अनुसार औरतों को ज्यादा बाहर खेलने-कूदने का मौका नहीं मिलता जिससे वह मोटी हो जाती हैं जबकि जो मर्द हैं वो खेलते हैं, मजदूरी करते हैं, काम करते हैं और बाहर जाते रहते हैं।

जेनब का वर्णन करते हुए द इकोनॉमिस्ट ने बताया कि 60 साल की उम्र में ‘जेनब’ बगदाद के रेस्टोरेंट में काम करती है और उसका बॉस उसे वहाँ आखिरी में बचा तला-भुना खाना देता है। लेख के मुताबिक ऐसा खाना खा-खाकर जेनब 120 किलो की हो गई और उसकी बेटियों का वजन भी कुछ न करने के कारण आगे बढ़ता जाएगा।

द इकोनॉमिस्ट से नाराज हुए मुस्लिम

इस लेख और इसके शीर्षक को पढ़ने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स गुस्से से आग बबूला हो गए हैं। कई यूजर्स ने इस लेख को घटिया बताते हुए इसे तथ्यों से परे बताया है।
वहीं अरब से जुड़े लोगों ने उनके पूछा है कि आखिर द इकोनॉमिस्ट को उनसे समस्या क्या है। क्यों एक के बाद एक घटिया लेख उनपे लिखे जाते हैं।
इस लेख में मोटी शब्द का प्रयोग देखने के बाद लोग उन स्टडीज का जिक्र कर रहे हैं जो बताती हैं कि इंग्लैंड और अमेरिका में मोटापे के चलते कितनी गंभीर बीमारियाँ हो रही हैं।
एक यूजर ने लिखा, “इस अखबार को अरब और इराक की महिलाओं से माफी माँगनी चाहिए। इन्होंने इस आर्टिकल से अरब महिलाओं की और उनके शरीर में होने वाले बदलावों की बेईज्जती की है जो बच्चे को जन्म देने के बाद होते हैं। ये बेहद शर्मनाक है।” यूजर ने कहा कि न केवल द इकोनॉमिस्ट को ये तस्वीर हटानी चाहिए बल्कि जिस महिला कलाकार की फोटो शेयर की है, उससे माफी भी माँगनी चाहिए।
इसी तरह भारत में दलितों के विरुद्ध झूठ फैलाने वाली इरेना अकबर भी इस लेख से आहत दिखीं। उन्होंने गुस्से में पूछा क्या ये घटिया अखबर ये भी बताएगा कि पश्चिम में औरतें, पुरुषों से मोटी क्यों हैं। उन्होंने इस अखबार को नारीविरोधी और इस्लामोबिक बताया।
बलसम मुस्तफा ने आर्टिकल में प्रयोग की गई महिला कलाकार की तस्वीर पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो महिला तस्वीर में दिख रही है वो बहुत छोटेपन से हर टैबू को तोड़ती आई है। उसे तो सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि उसे या किसी और अरब महिला को बॉडी शेम।
इसी तरह अन्य यूजर्स भी द इकोनॉमिस्ट पर गुस्सा उतारते हुए दिखे। कुछ ने इल्जाम लगाया कि ये विदेशी अखबर अरब वालों से चिढ़ता है क्योंकि वहाँ की औरतों के पास ज्यादा अधिकार हैं। अगर वहाँ उन्हें कोई परेशान करता है तो सीधे जेल में होगा।

‘आतंकियों को समर्थन देने वाली’ राणा अय्यूब को अब सऊदी अरब वालों ने भी धोया

इस्लामी प्रोपगेंडे के नाम पर देश के मुसलमानों को भड़काने वाली राणा अय्यूब को सऊदी से भी लताड़ लगनी शुरू हो गई है। राणा ने हर बार की तरह इस बार भी अपना एजेंडा फैलाने के लिए ट्वीट किया जिसमें उन्होंने सऊदी को ‘खून का प्यासा’ कहा। इस ट्वीट के बाद नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। इसी बीच सऊदी से राणा को कई संदेश आए और राणा पर तंज कसते हुए उन्हें आतंकियों का साथ देने वाली ‘रद्दी’ लड़की तक कहा गया। कमाल की बात ये है कि लोगों का गुस्सा देखते हुए अय्यूब ने कमेंट सेक्शन को बंद किया हुआ है मगर लोग इस ट्वीट को रीट्वीट कर-करके उन्हें झूठा कह रहे हैं।

सऊदी अरब और उनके गठबंधन की सेना द्वारा यमन के हूती विद्रोहियों पर हुई एयरस्ट्राइस से आहत राणा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “खून के प्यासे सऊदी को रोकने वाला कोई नहीं है। ये वो लोग हैं जो खुद को इस्लाम का रखवाला कहते हैं। एक मुसलमान होने के नाते मुझे शर्म आती है कि ये दरिंदे पवित्र मस्जिद के रखवाले हैं। इस नरसंहार पर दुनिया चुप नहीं रह सकती #YemenUnderAttack”

इस ट्वीट पर Gassan नाम के ब्लू टिक ट्विटर यूजर ने राणा के ट्वीट को ‘झूठी खबर’ कहा और मुस्लिम भाईचारे के नाम पर ऐसे झूठ फैलाने का मजाक उड़ाया। उन्होंने ये जानकारी भी दी कि सऊदी अरब ने 10  से अधिक देशों के गठबंधन के रूप में, यमन की वैध सरकार के सीधे अनुरोध के जवाब पर ये कार्रवाई की है। यूजर ने बताया कि वो वैध चीज को समर्थन दे रहे हैं लेकिन अय्यूब आतंकियों का साथ दे रही हैं।

एक अन्य यूजर ने उन्हें लिखा, “इस तरह %^& आप पर हमला करते हैं और फिर प्रतिक्रियाएँ बंद कर देते हैं।”

एक अन्य सऊदी ट्विटर यूजर ने राणा से पूछा कि क्या वाकई राणा को इसलिए शर्म आ रही है क्योंकि सऊदी वाले अपने आपको बचा रहे हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) ने 17 जनवरी 2022 को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबुधाबी पर ड्रोन अटैक किया था। इसमें 2 भारतीय समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से सऊदी अरब और उनके गठबंधन की सेना की कार्रवाई चालू है। कुछ दिन पहले हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) का कमांडर अब्दुल्ला कासिम अल जुनैद सऊदी की कार्रवाई में मारा गया था। कमांडर के साथ-साथ हूती विद्रोहियों के कई सीनियर रैंक अधिकारी भी मारे गए थे। इसके अलावा हाल की एयरस्ट्राइक में यमन में 70 लोगों के मरने की खबर है और बताया जा रहा है कि ये एयरस्ट्राइक ऐसी थी कि इससे पूरे देश का इंटरनेट ठप्प हो गया है।

‘आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक है ये, चंदा खा जाती है’: राना अयूब को सऊदी वाले लगातार दे रहे डोज पर डोज

तथाकथित पत्रकार राना अयूब यमन और सऊदी अरब को लेकर किए गए ट्वीट के बाद बुरी फँसी हैं। आतंकवादियों के समर्थन का आरोप लगा कर सऊदी अरब वाले निशाना साध रहे हैं, लेकिन इसके लिए भी वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही दोषी ठहरा रही हैं। राना अयूब ने लिखा था कि यमन को सऊदी अरब तबाह कर रहा है, जबकि सच्चाई ये है कि यमन सरकार के निवेदन पर सऊदी अरब वहाँ कार्रवाई कर रहा है। राना अयूब ने इस बात पर शर्म जताया था कि मक्का-मदीना का नियंत्रण सऊदी अरब के पास है।

अब सऊदी अरब और भारत के लोग मिल कर उन पर निशाना साध रहे हैं। मेजर (रिटायर्ड) माणिक एम जॉली ने लिखा, “राणा अयूब ने एक कूटनीतिक मुद्दे में टाँग अड़ाया, जिस समस्या की उन्हें समझ नहीं थी। ISI ने उनका इस्तेमाल ईरान-पाकिस्तान-तुर्की के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया, ताकि वो सऊदी अरब-अमेरिका और आंशिक रूप से इजरायल पर भी निशाना साध सकें। ये रोजमर्रा के घृणा फैलाने से कहीं अधिक बढ़ कर है। ये एक बड़ा लीग हैं।”

सऊदी अरब के दिखने वाले एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “गैर-अरबी मुस्लिम ये समझते हैं कि केवल मुस्लिम होने के कारण उन्हें काबा के नियंत्रण का अधिकार है। लेकिन, इसे हमारे महान पूर्वज इस्माइल ने बनवाया था। जबकि मदीना हमारे कबीलों की भूमि रही है। एक सऊदी के मुस्लिम होने के नाते मैं कह सकता हूँ कि आपके विचार की कोई अहमियत नहीं है।” एक अन्य हैंडल ने लिखा, “राना अयूब अब खुलेआम आतंकियों का समर्थन कर रही हैं। हूती विद्रोहियों ने दो भारतीय नागरिकों को मार दिया, लेकिन इस पर वो चुप हैं। हूती, अलकायदा या ISIS में कोई अंतर नहीं है।”

एक अन्य सऊदी अरब के व्यक्ति ने लिखा कि मुस्लिम होने के नाते वो ये देख कर परेशान है कि राना अयूब ईरान समर्थित उस गुट का समर्थन कर रही हैं, जिन्होंने इराक, सीरिया, लेबनान और यमन से लाखों मुस्लिमों को पलायन के लिए मजबूर किया। ‘TFI’ के संपादक त्रिभुवन ने लिखा कि राना अयूब ये भूल गई थीं कि सऊदी अरब में भारत की तरह सहिष्णुता नहीं है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें समझ में आ गया होगा कि ‘असहिष्णुता’ का मतलब क्या होता है।

कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ हसन सजवानी ने कहा कि राना अयूब जैसे लोग सबसे बड़े दोषी हैं। उन्होंने लिखा कि खुद को ‘मानवतावादी आवाज़’ बता कर ऐसे लोग हमेशा हूती, हमास, और ISIS से जुड़े समूहों का समर्थन करते हैं। उन्होंने भी याद दिलाया कि कैसे हूती आतंकियों ने अबूधाबी एयरपोर्ट पर दो निर्दोष सिखों की हत्या कर दी। सऊदी अरब के एक अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने राना अयूब पर सामाजिक कार्यों के नाम पर चंदा जुटा कर पचा जाने का आरोप लगाया।

राना अयूब ने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि वो 2022 में हज करने जाना चाहती हैं। अब जब एक सोशल मीडिया यूजर ने तंज कसा कि राना अयूब का हज कोटा रद्द कर दिया गया है, तो उन्होंने उन्हें ‘संघी’ बता दिया। वहीं हसन सजवानी ने ये भी लिखा कि राना अयूब सऊदी को ‘खून का प्यासा’ बता रही हैं, जबकि हूती आतंकियों के कुकृत्यों पर चुप रहती हैं। उन्होंने राना अयूब को आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक करार दिया। कइयों ने उन्हें ‘झूठी’ बताया। सऊदी वालों ने कहा कि हमारे पवित्र स्थलों को लेकर उन्हें ज्ञान नहीं चाहिए।

यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच युद्ध चल रहा है। यूनाइटेड अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी पर भी हूतियों ने कई बैलिस्टिक मिसाइल छोड़े हैं। सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों की सीमा यमन से मिलती है, जहाँ खासी अशांति है। UAE के एक F16 मिसाइल को भी तबाह कर दिया गया। इससे ‘रेड सी शिपिंग रूट’ को भी खतरा पैदा हो गया है। यमन में 2014 से ही गृह युद्ध चल रहा है, जब हुतियों ने सना नाम के इलाके पर कब्ज़ा कर के सऊदी अरब को इसमें हस्तक्षेप के लिए मजबूर किया।