परन्तु 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद कुछ बदलाव जरूर आए हैं। अगर हकीकत में देखा जाए, मोदी सरकार ने ऐसा कोई नया काम नहीं किया है, जिसके लिए पीठ थपथपाई जाए। फिर भी जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीठ थपथपा रहे हैं, क्यों? क्योंकि मोदी सरकार उन्ही बिलों को पास करवाकर प्रशंसा प्राप्त कर रही है, जिन्हें मोदी सरकार से पूर्व सरकारों ने बिल बना तो दिए, लेकिन उन्हें लागू करने का साहस नहीं जुटा पायीं।
कांग्रेस और इसके समर्थक बताएं जीएसटी हो या नोट बंदी कितने वर्षों से लंबित पड़े थे? क्यों नहीं लागू किया? क्योंकि इनमे बिल बनाने की योग्यता थी, लेकिन लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं। ताजा उदाहरण किसान बिल का ही लें, 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने इसी बिल में संशोधन की वकालत की थी, और राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के शासन वाले 12 राज्य अपने यहां फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। परन्तु मोदी सरकार ने बिल में संशोधन कर उसे लागू कर दिया, फिर किस आधार पर विरोध किया अथवा करवाया जा रहा है?
किसानों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह : मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा मुख्यमंत्री
किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को कड़ी फटकार लगाई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अमरिंदर सिंह से कहा है कि वे किसानों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। मनोहर लाल खट्टर ने एक के बाद एक तीन ट्वीट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा कि आपके झूठ, धोखे और प्रॉपगेंडा का वक्त खत्म हो गया है। वक्त आ गया है कि लोग अब अपका असली चेहरा देखें। कृपया कोरोना महामारी के दौरान लोगों के जीवन को खतरे में डालना बंद करें। मैं आपसे लोगों के जीवन के साथ नहीं खेलने का आग्रह करता हूं। कम से कम महामारी के समय सस्ती राजनीति से बचें।
I've been trying to reach out to you for the last 3 days but sadly you decided to stay unreachable - is this how serious you are for farmer's issues? You're only tweeting and running away from talks, Why?
— Manohar Lal (@mlkhattar) November 26, 2020
एक अन्य ट्वीट में खट्टर ने कहा कि मैं पिछले 3 दिनों से आपसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि आप संपर्क में नहीं आ रहे हैं। क्या यह किसान के मुद्दों के लिए आपकी गंभीरता नहीं दिखाता? आप केवल ट्वीट कर रहे हैं और बातचीत से भाग रहे हैं, क्यों?
Time for your Lies, Deception and Propaganda is over - let the people see your real face. Please stop putting the lives of people in danger during the Corona pandemic. I urge you to not play with the lives of the people - atleast avoid cheap politics during the time of pandemic.
— Manohar Lal (@mlkhattar) November 26, 2020
अपने आखिरी ट्वीट में सीएम खट्टर ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर जी, मैंने इसे पहले कहा है और मैं इसे फिर से कह रहा हूं कि अगर एमएसपी पर किसानों को कोई परेशानी होगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। इसलिए, कृपया निर्दोष किसानों को उकसाना बंद करें।
किसान आंदोलन को देशव्यापी बताने वाले...दरअसल इसे देशव्यापी बनाने की कोशिश में नाकाम रहे हैं. साफ़ हो चुका है पंजाब के अलावा किसी और प्रदेश का किसान इसमें बड़े स्तर पर शामिल नहीं है #FarmerProtest
— Manak Gupta (@manakgupta) November 26, 2020
कांग्रेस कभी भी राष्ट्र हित में नहीं सोच सकती#जवान_किसान_विरोधी_कांग्रेस
— Yogi Balaknath (@MahantBalaknath) November 26, 2020
Can anyone tell me how much paddy crop remained un purchased this season & lying with the farmers in Punjab?
— Surinder Vaid (@SurinderVaid1) November 26, 2020
काग्रेस पार्टी इतनी धूर्त हैं जो कृषि कानून मोदी सरकार ने लागू किया है उसे लाने का काग्रेस 2009 से वादा कर रही थी जब मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को लागू कर दिया तो काग्रेस अपने दलालों इकट्ठा करके पंजाब और देश का माहौल खराब कर रही हैं
— Deepak Dwivedi (@dwivedideepak32) November 26, 2020
शरद पवार ने की थी एपीएमसी एक्ट में संशोधन और कृषि में निजी क्षेत्र के प्रवेश की वकालत
2013 में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के शासन वाले 12 राज्य अपने यहां फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। अब कांग्रेस पार्टी ही एपीएमसी एक्ट में बदलाव का विरोध कर रही है। वहीं यूपीए सरकार में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण शरद पवार ने कहा था कि एपीएमसी (एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी) विधेयक में किसानों के हित में संशोधन किया जा सकता है। एनडीटीवी से खास बातचीत में शरद पवार ने कहा कि राज्यों को एपीएमसी में संशोधन के लिए प्रोत्सहित किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक साधन सुलभ हो सके और निजी व सहकारी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई जा सके।
पवार ने कहा था कि किसान देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेच सकते हैं। वे मंडी में बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे। मंडी कराधान प्रणाली को भी हटा दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र को भी प्रेवश दिया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों के विपणन में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अधिक कृषि विकास पर एक बड़ी बाधा राज्यों का एपीएमसी अधिनियम है, जो मंडी प्रणाली के बाहर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाता है। एपीएमसी एक्ट में संशोधन से कृषि में निजी क्षेत्र के आने से कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण यूनिटों को बढ़ावा मिल सकता है।
No comments:
Post a Comment