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यूपीए सरकार में कृषि मंत्री शरद पवार ने मॉडल एपीएमसी एक्ट को लागू करने और स्टेट एपीएमसी एक्ट में संशोधन के लिए कई बार मुख्यमंत्रियों को लिखा था पत्र

नए कृषि सुधार कानूनों के तहत एपीएमसी एक्ट में संशोधन किया गया है। इस संशोधन के विरोध में आज कई किसान संगठन सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी उनका समर्थन कर रही है। लेकिन इस संशोधन की पहल यूपीए सरकार में ही हो गई थी। यूपीए सरकार में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि एपीएमसी (एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी) विधेयक में किसानों के हित में संशोधन किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने राज्यों को भी पत्र भी लिखा था।

तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने अगस्त 2010 और नवंबर 2011 के बीच सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर बार-बार मॉडल एपीएमसी एक्ट को लागू करने और स्टेट एपीएमसी एक्ट्स में संशोधन के लिए कहा था। उन्होंने मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया था, ताकि किसानों को प्रतिस्पर्धा के लिए वैकल्पिक माध्यम मिल सके। उन्होंने कहा था कि इससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकेगा।

मॉडल एपीएमसी एक्ट को जरूरी बताते हुए शरद पवार ने अगस्त 2010 में राज्यों को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंंने भारत के ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्रों के संपूर्ण विकास, रोजगार और आर्थिक प्रगति के लिए बेहतर मार्केट की जरूरत पर बल दिया था। उन्होंने कहा कि मॉडल एपीएमसी एक्ट से किसानों को अपनी उपज लाभकारी मूल्य पर बेचने के लिए बेहतर विकल्प और बाजार मिल सकते हैं। शरद पवार ने फिर नवंबर 2011 में राज्यों को पत्र लिखकर यही बात दोहराई। उन्होंने निजी तौर पर सभी मुख्यमंत्रियों से अपील की कि किसानों की बेहतरी के लिए बिना देरी करे राज्य सरकारें कदम उठाए।

मई 2012 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार का राज्यसभा में एक औपचारिक जवाब दर्ज है। इसमें उन्होंने खुलकर ऐग्रिकल्चर मार्केटिंग रिफॉर्म का समर्थन किया था। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि “कुछ सिफारिशें पहले ही स्वीकार की जा चुकी हैं, जैसे कृषि उपज की खरीद के उदारीकरण का प्रस्ताव… हमने सभी राज्यों के सहकारिता मंत्रियों से एपीएमसी एक्ट में संशोधन करने का अनुरोध किया है।”

एनडीटीवी से खास बातचीत में शरद पवार ने कहा था कि राज्यों को एपीएमसी में संशोधन के लिए प्रोत्सहित किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक साधन सुलभ हो सके और निजी व सहकारी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई जा सके।

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पवार ने कहा था कि किसान देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेच सकते हैं। वे मंडी में बेचने के लिएबाध्य नहीं होंगे। मंडी कराधान प्रणाली को भी हटा दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र को भी प्रेवश दिया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों के विपणन में मदद मिलेगी।

शरद पवार ने कहा था कि अधिक कृषि विकास पर एक बड़ी बाधा राज्यों का एपीएमसी अधिनियम है, जो मंडी प्रणाली के बाहर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाता है। एपीएमसी एक्ट में संशोधन से कृषि में निजी क्षेत्र के आने से कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण यूनिटों को बढ़ावा मिल सकता है।

2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने इसी किसान एक्ट में किस आधार पर बदलाव की वकालत थी?


एक समय था, जब देश में किसी भी सदन के चुनाव होने पर घर-घर हर पार्टी अपना घोषणा-पत्र वितरित किए जाते थे, लोग मतदान से पूर्व गंभीरता से उसका अध्ययन करते थे, मौहल्ले, मित्रों और ऑफिस में चर्चा करते थे, परन्तु कुछ समय से घोषणा-पत्र के वितरण पर शायद प्रतिबन्ध लग गया है, केवल कुछ प्रमुख बातें टीवी और अख़बारों पर उन्हें पढ़ने एवं सुनने को मिल जाता है। नगर निगम से लेकर लोक/राज्य सभा तक सदनों में चर्चा कर जनता के धन को खर्च कर जनता को ही मूर्ख बनाया जाता रहा है। 

परन्तु 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद कुछ बदलाव जरूर आए हैं। अगर हकीकत में देखा जाए, मोदी सरकार ने ऐसा कोई नया काम नहीं किया है, जिसके लिए पीठ थपथपाई जाए। फिर भी जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीठ थपथपा रहे हैं, क्यों? क्योंकि मोदी सरकार उन्ही बिलों को पास करवाकर प्रशंसा प्राप्त कर रही है, जिन्हें मोदी सरकार से पूर्व सरकारों ने बिल बना तो दिए, लेकिन उन्हें लागू करने का साहस नहीं जुटा पायीं। 

कांग्रेस और इसके समर्थक बताएं जीएसटी हो या नोट बंदी कितने वर्षों से लंबित पड़े थे? क्यों नहीं लागू किया? क्योंकि इनमे बिल बनाने की योग्यता थी, लेकिन लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं। ताजा उदाहरण किसान बिल का ही लें, 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने इसी बिल में संशोधन की वकालत की थी, और राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के शासन वाले 12 राज्य अपने यहां फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। परन्तु मोदी सरकार ने बिल में संशोधन कर उसे लागू कर दिया, फिर किस आधार पर विरोध किया अथवा करवाया जा रहा है?   

किसानों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह : मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा मुख्यमंत्री     
किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को कड़ी फटकार लगाई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अमरिंदर सिंह से कहा है कि वे किसानों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। मनोहर लाल खट्टर ने एक के बाद एक तीन ट्वीट करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा कि आपके झूठ, धोखे और प्रॉपगेंडा का वक्त खत्म हो गया है। वक्त आ गया है कि लोग अब अपका असली चेहरा देखें। कृपया कोरोना महामारी के दौरान लोगों के जीवन को खतरे में डालना बंद करें। मैं आपसे लोगों के जीवन के साथ नहीं खेलने का आग्रह करता हूं। कम से कम महामारी के समय सस्ती राजनीति से बचें।

एक अन्य ट्वीट में खट्टर ने कहा कि मैं पिछले 3 दिनों से आपसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि आप संपर्क में नहीं आ रहे हैं। क्या यह किसान के मुद्दों के लिए आपकी गंभीरता नहीं दिखाता? आप केवल ट्वीट कर रहे हैं और बातचीत से भाग रहे हैं, क्यों?

अपने आखिरी ट्वीट में सीएम खट्टर ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर जी, मैंने इसे पहले कहा है और मैं इसे फिर से कह रहा हूं कि अगर एमएसपी पर किसानों को कोई परेशानी होगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। इसलिए, कृपया निर्दोष किसानों को उकसाना बंद करें।

शरद पवार ने की थी एपीएमसी एक्ट में संशोधन और कृषि में निजी क्षेत्र के प्रवेश की वकालत

2013 में कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के शासन वाले 12 राज्य अपने यहां फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। अब कांग्रेस पार्टी ही एपीएमसी एक्ट में बदलाव का विरोध कर रही है। वहीं यूपीए सरकार में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण शरद पवार ने कहा था कि एपीएमसी (एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी) विधेयक में किसानों के हित में संशोधन किया जा सकता है। एनडीटीवी से खास बातचीत में शरद पवार ने कहा कि राज्यों को एपीएमसी में संशोधन के लिए प्रोत्सहित किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक साधन सुलभ हो सके और निजी व सहकारी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई जा सके।

पवार ने कहा था कि किसान देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेच सकते हैं। वे मंडी में बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे। मंडी कराधान प्रणाली को भी हटा दिया जाएगा। कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र को भी प्रेवश दिया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों के विपणन में मदद मिलेगी। 

उन्होंने कहा कि अधिक कृषि विकास पर एक बड़ी बाधा राज्यों का एपीएमसी अधिनियम है, जो मंडी प्रणाली के बाहर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाता है। एपीएमसी एक्ट में संशोधन से कृषि में निजी क्षेत्र के आने से कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण यूनिटों को बढ़ावा मिल सकता है।