“राम द्रोही” क्या मंदिर उद्घाटन में जाकर राम नाम ही सत्य है' बोलेंगे?

सुभाष चन्द्र

हिंदुओं के पूजनीय आराध्य भगवान राम और अन्य देवी देवताओं का अपमान करने वालों के लिए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर बैठे लोगों का अपमान करना कोई बड़ी बात नहीं है, नरेंद्र मोदी तो यह अपमान पिछले 20 वर्षों से झेल रहे है। कांग्रेस का कोई नेता ऐसा होगा जिसने मोदी के लिए अपमानजनक शब्द न कहे हों चाहे वह प्रधानमंत्री पर रहे या उसके पहले मुख्यमंत्री रहते हुए। अपमान ही नहीं कांग्रेस के नेता मोदी जी की हत्या करने की भी वकालत करते रहे हैं और “फर्जी” गांधी चुप रहे हैं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए घृणित शब्दावली का प्रयोग किया विपक्ष और कांग्रेस ने और अब 72 वर्षीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ का मज़ाक उड़ाया 66 वर्ष के कल्याण बनर्जी ने और 53 साल का कांग्रेस का “युवा” नेता “मोहब्बत की दुकान” चलाने वाला राहुल “कालनेमि” उस कुकर्म में शामिल होता है लेकिन 77 वर्ष की सोनिया गांधी किसी को कुछ नहीं कहती। उसे तो सांसदों के निलंबन में लोकतंत्र की हत्या दिखाई दे रही हैं। लेकिन जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी से सदन में इंदिरा गाँधी की हत्या की जाँच करने वाले कमीशन द्वारा तैयार रपट को प्रस्तुत करने पर विपक्षी सांसदों को निलंबित करने में क्या लोकतंत्र नज़र आ रहा था? वर्तमान मोदी सरकार को उस रपट को भी सार्वजानिक करना चाहिए ताकि इंदिरा गाँधी की हत्या में शामिल लोगों के नाम सामने आएं। 

लेकिन आज खबर है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 22 जनवरी को होने वाले रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए देश के सभी राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों और पूर्व प्रधानमंत्रियों को आमंत्रित कर रहा है। सोनिया गांधी को 10 जनपथ पर निमंत्रण पत्र भेंट किया गया है। इसके अलावा खड़गे, अधीर रंजन चौधरी, मनमोहन सिंह और देवेगौड़ा को भी आमंत्रित किया गया है और केजरीवाल, मायावती एवं अखिलेश यादव आदि को भी बुलाया जायेगा 

लेकिन सवाल यह उठता है कि ये सभी विपक्षी दलों के नेता क्या निमंत्रण मिलने के बाद भी समारोह में शामिल होने जाएंगे क्योंकि उनकी राजनीति केवल मुस्लिम वोटों के इर्द गिर्द ही घूमती है। कर्नाटक और तेलंगाना चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस मान कर चल रही है कि 2024 के चुनाव में देश भर का मुसलमान उसके साथ रहेगा।  दूसरी तरफ अखिलेश यादव को भी मुस्लिम वोट की चिंता सता रही है और फिर मायावती कैसे उस वोट बैंक को भूल सकती है। ममता, केजरीवाल, शरद पवार और लालू यादव के लिए भी मुसलमानों के मुकाबले हिंदुओं की अहमियत कुछ भी नहीं है। उद्धव ठाकरे भी मुस्लिम वोटों का नया दीवाना बना है

इसलिए यदि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होते हैं तो उससे देश भर के मुसलमान उनसे नाराज हो सकते हैं और इसलिए अभी जाने के बारे में ये लोग कोई फैसला नहीं करेंगे। अभी पूरे एक महीने तक हिसाब किताब लगाया जाएगा कि रामलला के दर्शन करने से क्या मुस्लिम वोटर बिदक सकता है और यह भी हो सकता है उन्हें खुश करने के लिए अंत समय में ये सभी नेता ऐसा पैंतरा चलेंगे कि जिससे समारोह में न जाने का बहाना बन जाए और दोष भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर मढ़ कर रंग में भंग डालने की कोशिश की जाए

विपक्ष ऐसी पैंतरेबाजी से भारत की छवि उन 70 से ज्यादा देशों में धूमिल करने की कोशिश करेगा जिसके प्रतिनिधि समारोह में शामिल होने जा रहे हैं। विपक्ष की आज की जगदीप धनकड़ के खिलाफ चल रही राजनीति से उम्मीद की जा सकती है कि वह प्राण प्रतिष्ठा में भी विघ्न डालने के लिए कुछ भी कर सकते हैं

मुझे पूरी उम्मीद है विपक्ष प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार ही करेगा

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