जिस तरह प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आम आदमी पार्टी द्वारा देश विरोधियों से चंदा वसूली का खुलासा कर रही है, उसने लोगों को स्वाति मालीवाल कांड को भी दूसरी नज़र से देखना शुरू कर दिया है। अपने वकील अभिषेक मनु सिंघवी को राज्य सभा पहुँचाने के लिए अरविन्द केजरीवाल द्वारा वर्षों से हमज़ुल्फ़ रही स्वाति मालीवाल द्वारा इस्तीफा देने का जोर देने पर संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि जबरदस्ती इस्तीफा मांगने पर मालीवाल ने घोटालों का राज खोलने की धमकी देने पर तो कही ये कांड तो नहीं हुआ? शायद इस बीच कुछ तीखी नोकचोक होने पर नौबत पिटाई तक पहुँच गयी हो। इस शंका में कितनी सच्चाई है यह तो गंभीर और गहन जाँच होने पर ही खुलासा हो सकता है।
इस दौरान यह भी नोट करना जरुरी है कि मालीवाल से अधिक आम आदमी पार्टी की तरफ से ही बयान आ रहे हैं। मालीवाल को बीजेपी एजेंट बताना और बीजेपी की साज़िश बताना इस बात की ओर स्पष्ट संकेत कर रही है। अगर दिल्ली पुलिस बिभव कुमार और मालीवाल दोनों से सख्ती से पूछे कि इतनी भयंकर मारपीट की नौबत क्यों आयी? केजरीवाल के राजदार दोनों ही हैं। जिस दिन घोटालों की कलाई खुल गयी, केजरीवाल तो क्या केजरीवाल परिवार और पार्टी के पता नहीं तथाकथित नेताओं को जेल जाना पड़ सकता है। केजरीवाल की गिरफ़्तारी से जितना विदेशों में बैठे भारत विरोधी बेचैन है, भारतीय नेता नहीं। लोक सभा चुनाव संपन्न होने पर कितने मोदी विरोधी पार्टियां केजरीवाल पार्टी से किनारा कर सकती हैं। कांग्रेस ने तो शुरू कर भी दिया है। रोष विशेषकर इस बात पर हो रहा है कि मालीवाल अपनी माहवारी होने पर नहीं मारने को बोल रही थी, उसके बावजूद पेट के नीचे लातें मारना। घोटालों का राज खोलने की धमकी के पार्टी के बर्बाद होने के डर ने मामले को भयंकर रंग देने को मजबूर कर दिया हो। शंका का समाधान तो गंभीर और गहन जाँच ही कर सकती है।
एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने विदेश से लिए गए करोड़ों के फंड के स्रोत की पहचान छुपाई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को कनाडा, अमेरिका, न्यूजीलैंड और मध्यपूर्व के देशों से यह पैसा मिला है। विदेशी फंडिंग को AAP तक पहुँचाने के लिए कई गड़बड़ियाँ की गईं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP को 2014 से 2022 के बीच ₹7.08 करोड़ की विदेशी फंडिंग मिली है। यह पैसा विदेशी फंडिंग कानून (FCRA) के नियमों का उल्लंघन करके ली गई है। ED ने इस फंडिंग को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है, इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया है। इसके कुछ हिस्से बाहर आए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि AAP को यह फंडिंग देने वाले अलग-अलग लोगों ने एक ही पासपोर्ट नम्बर, एक ही मोबाइल नम्बर और एक ही क्रेडिट कार्ड की जानकारियाँ देते हुए यह धनराशि दी। यह सारी फंडिंग कनाडा, न्यूजीलैंड, USA और मध्य पूर्व के देशों से आई है।
इस अवैध फंडिंग के एक उदाहरण को भी रिपोर्ट में बताया गया है। विदेशों में रहने वाले 155 लोगों ने 55 पासपोर्ट का इस्तेमाल करके 1.04 करोड़ की धनराशि AAP को दी। ऐसा 404 मौकों पर किया गया। इस रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि AAP नेता दुर्गेश पाठक ने कनाडा में 2016 में AAP के लिए इकट्ठा किए गए फंड को अपने इस्तेमाल में लिया।
ED ने इस पूरी गड़बड़ी के सबूत में AAP पदाधिकारियों के बीच ईमेल में हुई बातचीत का भी ब्यौरा दिया है। यह बातचीत कुमार विश्वास, कपिल भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और अनिकेत सक्सेना के बीच हुई। यह सभी तब AAP में महत्वपूर्ण पदों पर थे। इसके अलावा भी फंडिंग को लेकर कई खुलासे ED की इस रिपोर्ट में किए गए हैं।

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