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राजस्थान : भगवाधारी महंत प्रताप पुरी ने ‘सरहद का सुल्तान’ हिस्ट्रीशीटर गाजी फकीर का गढ़ ढहाया: कांग्रेस सरकारों में बोलती थी तूती; कब खुलेगी इसकी फाइल?

                                         महंत प्रताप पुरी (बाएँ) और गाजी फ़कीर (दाएँ)
राजस्थान विधानसभा चुनावों में इस बार कई जाने-माने चेहरे हार गए। राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोखरण सीट से भाजपा के महंत प्रताप पुरी ने कांग्रेस के उम्मीदवार सालेह मोहम्मद को हराया है। सालेह मोहम्मद अशोक गहलोत की सरकार में मंत्री भी थे। महंत प्रताप पुरी को इस सीट पर 1,12,925 वोट मिले और उन्होंने 35,427 वोटों के अंतर से सालेह को हराया। महंत से हारने वाले सालेह, जैसलमेर के गाजी फ़कीर के बेटे हैं। जैसलमेर के गाजी फ़कीर को यहाँ समानांतर सत्ता चलाने के लिए जाना जाता था, उसका निधन 2021 में हो गया था।

गाजी फ़कीर इस इलाके में सिन्धी मुस्लिमों का बड़ा मजहबी उलेमा था और उसका इतना रसूख था कि जो भी पुलिस अधिकारी उसके अपराधों की फाइल खोलता था उसका ट्रांसफर हो जाता था। गाजी फ़कीर पर ही हाथ डालने के कारण आईपीएस पंकज चौधरी का भी 2013 में ट्रांसफर कर दिया गया था।

गाजी फ़कीर अशोक गहलोत का करीबी था। जब भी राज्य में कांग्रेस की सरकार आई तब-तब उसके परिवार का रसूख बढ़ता चला गया और उसके परिवार के अनेकों लोग सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हो गए। उसके इस इलाके में प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसका बेटा सालेह मोहम्मद जैसलमेर से राज्य सरकार में मंत्री बनने वाला पहला विधायक था। सालेह को गाजी फ़कीर ने कम उम्र से ही राजनीति में एंट्री दिलवा दी थी। उसे 23 की उम्र में ही पंचायत समिति का प्रधान बनवा दिया गया था।

देशद्रोह सहित कई मामलों में आरोपित गाज़ी कई वर्षों से भारतीय एजेंसियों के पकड़ में नहीं आ पाया क्योंकि उसके ख़िलाफ़ सबूत ही नहीं होते थे। पुलिस हिस्ट्रीशीट में उसका नाम 1965 से ही आता रहा है लेकिन कांग्रेस में उसके वर्चस्व के कारण कोई उसका बाल भी बाँका नहीं कर सका।

पंकज चौधरी ने कहा था कि उनके पूर्ववर्तियों ने गाज़ी के बारे में फाइल्स में कई भयानक बातें लिख रखी थी। उन्होंने उसका अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया था लेकिन उनके इस बयान से स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। उसके ख़िलाफ़ जुलाई 1965 के एक तस्करी वाले मामले को फिर से खोला गया था।

स्थानीय प्रशासन में उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि ऊपर से आदेश के बावजूद उसको छुआ तक नहीं जा सका। उसके ख़िलाफ़ तैयार की गई फाइल 1984 में गायब हो गई। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।

1990 में एक एसपी सुधीर प्रताप सिंह आए जिन्होंने गाज़ी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। लेकिन, एसपी सुधीर प्रताप सिंह को राजस्थान सरकार ने चुपचाप ट्रांसफर कर दिया। 2011 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने फिर से उस हिस्ट्रीशीट को बंद करवा दिया। इसके बाद दृश्य में पंकज चौधरी की एंट्री हुई जिन्होंने गाज़ी पर नकेल कसी।

उनका कार्य भी अधूरा रह गया और इससे पहले कि वे किसी नतीजे पर पहुँच पाते, उनका भी ट्रांसफर करवा दिया गया। गाज़ी के बारे में सबसे बड़ी बात श्रीकांत घोष की पुस्तक ‘Pakistan’s ISI: Network of Terror in India‘ में कही गई थी। इस पुस्तक के पृष्ठ संख्या 55 पर गाज़ी फ़क़ीर का जिक्र किया गया है।

उन्होंने सीमा क्षेत्र में सक्रिय एक इस्लामी संस्था तबलीग-ए-जमात का जिक्र करते हुए लिखा है कि इलाक़े में सैयाद शाह मर्दान शाह-II यानी पीर पगारो का प्रभाव बढ़ रहा है। पीर पगारो पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ) का अध्यक्ष है। इसके आगे श्रीकांत घोष ने लिखा था कि जैसलमेर निवासी गाज़ी फ़क़ीर पाकिस्तान की सीमा पर की जा रही आतंकी गतिविधियों में उसकी मदद करता है। इसके अलावा वह पाकिस्तानी एजेंटों को भारतीय सीमा पर स्थित गाँवों में बसाने में मदद करता है।

जब अप्रैल 2021 में गाजी फ़कीर की मौत हुई थी तब भी उसका इस इलाके में प्रभाव दिखा था। उसकी मौत के वक्त कोरोना से सम्बंधित बंदिशें लागू थीं। उसकी मौत से चार दिन पहले ही उसका बेटा सालेह मोहम्मद कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। लेकिन इन सब बातों को नजरंदाज करते हुए उसके जनाजे में बड़ी भीड़ इकट्ठा की गई थी और कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं थी।

सालेह पहली बार 2008 में विधायक बने थे और 2013 में भाजपा के शैतान सिंह से हार गए थे। 2018 में पुनः विधायक बन कर वह मंत्री बने। लेकिन अब इन चुनावों में उन्हें महंत प्रताप पुरी ने एक बार फिर पटखनी दी है।

राजस्थान : ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे’: नरेंद्र मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान में कई विकास परियोजनाओं की का शुभारंभ किया और साथ ही राज्य की कांग्रेस सरकार पर भी बरसे। इस दौरान उन्होंने देश भर के करोड़ों किसानों को नमन करते हुए कहा कि खाटू श्याम जी की ये धरती देश भर के श्रद्धालुओं को भरोसा और उम्मीद देती है। उन्होंने वीरों की भूमि शेखावाटी से देश के लिए अनेक विकास परियोजनाओं की शुरुआत करने का अवसर मिलने को अपना सौभाग्य करार दिया।

मोदी ने कहा कि यहाँ से देश के करोड़ों किसानों को ‘PM किसान सम्मान निधि’ के लगभग 18,000 करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में सवा लाख ‘पीएम किसान समृद्धि केंद्रों’ की शुरुआत की गई है। गाँव और प्रखंड स्तर पर इन केंद्रों से करोड़ों किसानों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि 1500 से ज़्यादा FPO के लिए, किसानों के लिए ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)’ का लोकार्पण भी हुआ है।

शेखावाटी की धरती पर PM मोदी, किसानों को किया नमन

उन्होंने कहा कि इससे देश के किसी भी कोने में बैठे किसान के लिए अपनी उपज बाजार में पहुँचाना और आसान हो जाएगा। पीएम मोदी ने बताया कि आज भी देश के किसानों के लिए एक नया यूरिया गोल्ड शुरू किया गया है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों को नए मेडिकल कॉलेज और मॉडल स्कूल का उपहार भी मिला है। पीएम मोदी ने इसके लिए राजस्थान की जनता, देश की जनता और खासकर किसान भाई-बहनों को खास शुभकामनाएँ दी।
मोदी ने कहा, “आजादी के इतने दशक बाद आज देश में ऐसी सरकार आई है, जो किसान का दुख-दर्द समझती है, किसान की चिंता समझती है इसलिए पिछले 9 वर्षों में लगातार किसानों के हित में फैसले लिए गए हैं। किसान का सामर्थ्य, किसान का परिश्रम मिट्टी से भी सोना निकाल देता है। इसलिए हमारी सरकार देश के किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। पीएम-किसान की आज की 14वीं किश्त को जोड़ दें तो अब तक 2 लाख 60 हजार करोड़ से अधिक रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजे गए हैं। इन पैसों ने छोटे-छोटे अनेक खर्च निपटाने में किसानों की बहुत मदद की है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेखावाटी में आगे कहा कि उनकी सरकार कैसे अपने किसान भाइयों के पैसे बचा रही है, इसका एक उदाहरण यूरिया की कीमतें भी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आज भारत में यूरिया की जो बोरी हम किसानों को 266 रुपए में देते हैं उतनी ही यूरिया हमारे पड़ोस में पाकिस्तान के किसानों को 800 रुपए में मिलता है, बांग्लादेश के किसानों को 720 रुपए में मिलता है, चीन में 2100 रुपए में और अमेरिका में 3000 रुपए से अधिक में मिलता है।
मोदी ने ये भी कहा कि भारत का विकास तभी हो सकता है, जब भारत के गाँवों का विकास हो। भारत विकसित भी तभी बन सकता है, जब भारत के गाँव विकसित हों। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई को मातृभाषा में कराने का भी रास्ता बना दिया है। साथ ही कहा कि अब ये नहीं होगा कि अंग्रेजी न जानने के कारण किसी गरीब की बेटी और बेटा डॉक्टर न बन पाए और ये भी मोदी की गारंटी है।
बकौल पीएम मोदी, सफलता तब बड़ी होती है जब सपने बड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान तो भारत का वह राज्य है, जिसके वैभव ने सदियों तक दुनिया को हैरान किया है। उस विरासत को संरक्षित करने पर जोर देते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि राजस्थान को आधुनिक विकास की ऊँचाई तक भी पहुँचाना है। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की।

सीकर में पीएम मोदी ने विशाल जनसभा को किया संबोधित

सीकर में रैली के दौरान उपस्थित भीड़ को देख कर पीएम मोदी ने कहा कि ये जन सैलाब बता रहा है कि आने वाले चुनाव में ऊँट किस करवट बैठेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राजस्थान की करवट भी बदलेगी और राजस्थान की किस्मत भी बदलेगी। उन्होने कहा कि आज राजस्थान में एक ही गूँज है, एक ही नारा है… जीतेगा कमल, खिलेगा कमल। पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान में अच्छी सड़कों के लिए, अच्छे हाईवे के लिए, राज्य के विकास के लिए भाजपा सरकार लगातार पैसे भेज रही है।
उन्होंने बताया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब 10 वर्षों में राजस्थान में टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में एक लाख करोड़ रुपए ही दिए गए थे, जबकि बीते 9 वर्षों में भाजपा सरकार ने टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुँचाए हैं। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में शत-प्रतिशत नल से जल देने का काम पूरा हो गया है, लेकिन राजस्थान के लोगों को कांग्रेस की सरकार पानी के लिए भी तरसा कर रखना चाहती है। राजस्थान ‘हर घर जल’ योजना में बहुत पीछे चल रहा है।
मोदी ने कहा, “कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है और झूठ का बाजार चलाया है। झूठ की दुकान का सबसे ताजा प्रोजेक्ट है, राजस्थान की ‘लाल डायरी’। कहते हैं इस ‘लाल डायरी’ में कांग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि ‘लाल डायरी’ के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएँगे। कांग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस ‘लाल डायरी’ का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुँह पर ताला लगा लें, लेकिन ये ‘लाल डायरी’ इस चुनाव में कॉन्ग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है।”

महिलाओं के खिलाफ अपराध पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी दलित बेटी के साथ दुष्कर्म होता है और उस पर एसिड डाल दिया जाता है, किसी दलित बहन के साथ उसके पति के सामने गैंगरेप होता है, आरोपी उसका वीडियो बनाते हैं, पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखी जाती। उन्होंने कहा कि बेखौफ आरोपी वीडियो वायरल कर देते हैं, छोटी-छोटी बच्चियाँ और स्कूल की टीचर तक राजस्थान में सुरक्षित नहीं हैं। बता दें कि कांग्रेस के बर्खास्त मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने लाल डायरी में कई रहस्य होने का खुलासा किया था।

राजस्थान : पायलट द्वारा आर-पार की लड़ाई के लिए कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार

जैसे-जैसे चुनाव निकट आ रहे हैं, सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच लड़ाई उतनी ही तेज हो रही है और इस लड़ाई की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही है, क्योकि पिछले चुनाव में भाजपा को सत्ता को हटाने में जितनी मेहनत सचिन ने की थी, कांग्रेस ने नहीं। लेकिन मुख्यमंत्री सचिन की बजाए बना दिया अशोक गहलोत को,  क्यों? अगर सचिन को मुख्यमंत्री बना दिया होता, इस आने वाले चुनाव में भाजपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ती, लेकिन सचिन की बजाए अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाते ही 5 साल पहले ही कांग्रेस ने भाजपा की ओर सत्ता खिसका दी थी। 
राजस्थान में सचिन पायलट बनाम अशोक गहलोत का मामला ठंडा पड़ता नजर नहीं आ रहा है। इसी साल के आखिरी में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत अभी से तेज हो गई है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने गहलोत खेमे की बगावत पर अब तक कार्रवाई न होने को लेकर नाराजगी जताई है। पायलट ने विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने वाले सीएम अशोक गहलोत समर्थक विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा दी है। उन्होंने सीधे-सीधे आरोप जड़ा है कि हाईकमान दोषी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में अत्यधिक देरी कर रहा है। पार्टी को जल्द फैसला करना ही होगा। दूसरी ओर बीजेपी ने भी विधानसभा में सीएम गहलोत को घेरते हुए उन्हें घोषणाजीवी की संज्ञा दी है। बीजेपी ने कहा है कि गहलोत ने बजट में कभी पूरी न होने वाली घोषणाएं की हैं।

गहलोत वर्सेज पायलट की लड़ाई में अब सचिन खेमे के पास आखिरी मौका

दरअसल, गहलोत वर्सेज पायलट की लड़ाई में अब सचिन खेमे के पास आखिरी मौका ही बचा है। राहुल गांधी की यात्रा निकलने के बाद हाईकमान ने गहलोत के बजट पेश करने तक पायलट गुट को सब्र करने के संकेत दिए थे। गहलोत ने न सिर्फ 10 फरवरी को बजट पेश कर दिया है, बल्कि 16 फरवरी को विधानसभा में बजट भाषण पर जवाब भी दे चुके हैं। हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा 26 जनवरी से शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब विधानसभा चुनाव तक ऐसा कोई बड़ा कारण या मुद्दा नहीं है, जो हाईकमान को राजस्थान पर फैसला करने से रोके। यही वजह है कि पायलट गुट ने हाईकमान पर अपने पक्ष में फैसला लेने के लिए दबाव की राजनीति को तेज करने की रणनीति पर अमल कर रहा है। पहले गहलोत समर्थित नेता और विधायक ही बयानबाजी कर रहे थे, अब खुद सचिन पायलट ही मैदान में उतर आए हैं।

 सोनिया के आदेश की खुली अवहेलना करने के दोषी नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं

कांग्रेस हाईकमान को सीधा संदेश देने के लिए सचिन पायलट ने दिल्ली में ही मीडिया से राजस्थान के बारे में दो-टूक बातचीत की। पायलट ने साफ कहा कि गहलोत खेमे के उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में पार्टी कोताही बरत रही है, जिन्होंने 25 सितंबर को हाईकमान के खिलाफ खुली बगावत की थी। हाईकमान के जिन दो आब्जर्वर के खिलाफ अनुशासनहीनता की गई, उनमें से एक मल्लिकार्जुन खरगे थे, जो कि अब कांग्रेस अध्यक्ष हैं। ऐसे में दोषी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आने के बजाए देरी ही हो रही है। पायलट ने साफ कहा कि पार्टी को अब जल्द से जल्द फैसला करना होगा, वरना….!! पायलट ने कहा कि अनुशासन और पार्टी के रुख का अनुपालन सभी के लिए समान है, व्यक्ति बड़ा हो या छोटा। साथ ही उन्होंने कहा, अनुशासनात्मक समिति ही तत्कालीन पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के खिलाफ खुली अवहेलना के संबंध में निर्णय में विलंब का सबसे अच्छा जवाब दे सकती है। गौरतलब है कि इस मामले में सीएम गहलोत को दिल्ली जाकर सोनिया गांधी ने माफी मांगनी पड़ी थी।
विधायक दल की बैठक के समानांतर बैठक बुलाना गहलोत गुट की अनुशासनहीनता
सचिन पायलट ने कहा कि पिछले साल 25 सितंबर को जयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक बुलाई थी, वह बैठक नहीं हुई। केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे थे। बैठक में जो कुछ भी होता, वह एक अलग मुद्दा है। सहमति या असहमति, लेकिन बैठक नहीं होने दी गई। बल्कि इसके समानांतर बैठक कर ली गई और ज्यादातर विधायक न सिर्फ उसमें पहुंचे, बल्कि दबाव बनाने के लिए इस्तीफे भी विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को दे दिए। पायलट ने कहा, मुझे मीडिया के जरिए जानकारी मिली कि गहलोत के समर्थकों ने नोटिस पर जवाब दे दिया, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जांच कमेटी ने जिनको अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया, उन्हें बचाया जा रहा
विधायक दल की बैठक नहीं होने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने कई नेताओं को अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया था। हालांकि, इसको लेकर कोई एक्शन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक्शन क्यों नहीं हुआ, इसका सही जवाब अनुशासनात्मक कमेटी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही दे सकेंगे। दरअसल, बीते साल कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के समय राजस्थान कांग्रेस की कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई थी। अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत गरमा गई थी। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, जिसके लिए कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे को जयपुर भेजा था।
गहलोत समर्थक विधायक सचिन को नहीं बनाना चाहते थे मुख्यमंत्री
इसी बीच गहलोत समर्थक विधायकों ने बगावत कर दी थी। गहलोत समर्थक विधायक मुख्यमंत्री के तौर पर सचिन पायलट के नाम पर राजी नहीं थे। इस बगावत के बाद ये बैठक नहीं हो पाई थी। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को लेकर प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, मुख्य सचेतक एवं पीएचईडी मंत्री महेश जोशी और आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर को उस समय नोटिस जारी किए थे। इस घटनाक्रम के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच बयानबाजी भी हुई थी। अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को गद्दार करार देते हुए कहा था, उन्होंने पार्टी के साथ गद्दारी की थी। इसलिए उन्हें कभी मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता। इस पर सचिन पायलट ने भी पलटवार करते हुए अशोक गहलोत को इस तरह के बचकाने बयान न देने की नसीहत दी थी।
घोषणावादी मुख्यमंत्री के वादे धरातल पर कहीं दिखाई नहीं देते- बीजेपी
दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां समेत बीजेपी ने मुख्यमंत्री पर हमला बोला है। पूनियां ने कहा कि गैंगरेप और गैंगवार की लगातार घटनाएं प्रदेश पर कलंक हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिछली घोषणाएं और वादे को पूरा करने के बजाय बजट में सिर्फ घोषणाएं करने में ही व्यस्त हैं और अपनी कुर्सी बचाने के जुगाड़ में लगे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ‘घोषणाजीवी’ हैं। वह पिछले चार वर्षों से केवल घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा जनता भुगत रही है। अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और अपराधियों में कोई खौफ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान महिलाओं के खिलाफ अपराध में पहले स्थान पर पहुंच गया है।”

राजस्थान : 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए नहीं अलग टॉयलेट, क्यों?

कुछ मुद्दे अथवा समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन सभी पार्टियों को लेनी चाहिए, जिन्होंने राज्य में राज किया या कर रही है। आज राजस्थान में जिस तरह टॉयलेट समस्या को उछाला जा रहा है, ज्वलंत प्रश्न यह है, कांग्रेस के पुरुष मुख्यमंत्री से पूर्व राजस्थान में भाजपा की महिला मुख्यमंत्री थी, उनके रहते इस गंभीर समस्या को क्यों नहीं उठाया गया। पार्टी विरोध अलग विषय है, लेकिन मूल समस्या अलग। दूसरे, किसी भी शिक्षा मंत्री अथवा अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया? स्कूल नया हो, बात समझ में आती है, स्कूल पुराने हैं, क्यों नहीं प्रधानाचार्य ने शिक्षा विभाग से इसकी शिकायत की? इसका साफ मतलब लापरवाही प्रधानाचार्या से लेकर शिक्षा मंत्रालय की है। जवाबदेही सभी है। 
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था। लेकिन महिलाओं को सिर्फ चुनावी मोहरा बनाने का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा, क्योंकि महिलाओं ने कांग्रेस के इस नारे पर भरोसा नहीं किया। कांग्रेस ने इससे सबक नहीं लिया और राजस्थान में महिलाओं को अपने हाल पर छोड़ दिया है। अशोक गहलोत सरकार 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं बना पाई। इससे महिला शिक्षकों और छात्राओं को जो परेशानियां उठानी पड़ रही हैं, उसे सुनकर आप हैरान रह जाए्ंगे।

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार राज्य के 68 हजार स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहीं प्रदेश की 1.34 लाख से ज्यादा महिला शिक्षकों को अलग टॉयलेट तक नहीं दे पाई। उन्हें छात्राओं के टॉयलेट में जाना पड़ता है। 6803 स्कूलों में तो टॉयलट तक नहीं है। कई महिला टीचर्स ने लिखकर अपनी परेशानी बताई। एक प्राधानाचार्य ने तो प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा है। अखिल राजस्थान महिला शिक्षक संघ की प्रदेशाध्यक्ष कमला लांबा ने राज्य सरकार पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया है। 

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दैनिक भास्कर की एक खबर को शेयर करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” का नारा देने वाली कांग्रेस राजस्थान में 1.34 लाख महिला शिक्षकों के लिए 68,000 स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं बना पाई है। 6,803 स्कूलों में तो लड़कियों के लिए ही टॉयलेट नहीं हैं। इतनी अमानवीय स्थिति में भला कोई कैसे पढ़ या पढ़ा सकता है? गहलोत सरकार जवाब दे।

कई स्कूलों में टॉयलेट तो है, लेकिन गंदगी से अटे पड़े हैं। सफाई कर्मी तक नहीं है। राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सरस्वती कुंड जयपुर, राजकीय प्राथमिक स्कूल तीतरवाला की ढाणी जयपुर, राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल बरतानियों की ढ़ाणी ओसियां लूणी, राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल थोब कल्याणपुर जोधपुर में भी टॉयलेट टूटे फूटे हैं। न पानी की व्यवस्था है न कोई सफाईकर्मी।

एक महिला प्राधानाचार्य ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर गुहार लगाई है। इसमें उन्होंने लिखा, “सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए ही पर्याप्त अलग टॉयलेट नहीं हैं। महिला टीचर्स के लिए तो हैं ही नहीं। महिला टीचर्स कम पानी पीती हैं। पीरियड के दौरान छात्राएं तो स्कूल ही नहीं आतीं। महिला टीचर्स को आना पड़ता है, क्योंकि पढ़ाई बाधित होगी। आज ही कुछ करें।”

“पीरियड्स के दौरान मुंह में पानी भर कर ले जाती हूं”

  • जयपुर के नजदीक गांव की शिक्षक ने लिखा कि ज्यादा आयु के कारण बैठ नहीं पाती। स्कूल में न अलग टॉयलेट हैं और न कमोड। छात्राओं के टॉयलेट जाना शर्मिंदगी भरा है।
  • जोधपुर में मंडोर के स्कूल की शिक्षक ने कहा कि टॉयलेट से बचने को हम पानी कम पीते हैं। लगातार वर्षों तक ऐसा करने से कई महिला टीचर्स को तरह-तरह की बीमारियां हो गई हैं।
  • फलौदी के स्कूल की शिक्षक ने बताया कि पीरियड के दौरान वे छात्राओं के टॉयलेट में मुंह में पानी भरकर टॉयलेट जाती हैं, ताकि टॉयलेट में खून के धब्बे न रह जाएं। कुल्ला कर धो दें।

‘बोल देना नशे में था…’: राजस्थान पुलिस का Video वायरल; अजमेर दरगाह को बताया ‘बचाव का रास्ता’

सलमान चिश्ती को ले जा रही राजस्थान पुलिस का वीडियो वायरल

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद उस पर इस्लामी कट्टरवादियों से मिले होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें राजस्थान पुलिस सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर ले जा रही है। साथ ही ‘आ जाओ’ की आवाजें आ रही हैं। वीडियो में कोई कहता है, “हम साथ में ही हैं, चिंता मत कर।” इसमें पुलिस वाले ‘चलो-चलो, बेफिकर रह’ भी कह रहे हैं। साथ ही पूछते हैं, “कौन सा नशा कर रखा था वीडियो बनाते समय?”

इसके बाद पुलिस वाले सलमान चिश्ती को सलाह देते हैं कि बोल देना, नशे में था। राजस्थान पुलिस ने अपने बयान में भी कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देने वक्त नशे में था। वो हिस्ट्रीशीटर है और उस पर 13 मामले दर्ज हैं, इसके बावजूद उसके लिए राजस्थान पुलिस की सहानुभूति लोगों की समझ से बाहर है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था।

आखिर क्या कारण है कि पुलिस आरोपी को बचाने के लिए नसीयत दे रही है? कन्हैया के कातिलों को इसलिए पकड़ा गया कि अगर कातिल अपने वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया होता, शायद इतनी जल्दी नहीं पकडे गए होते। महाराष्ट्र में देखिए क्या हुआ, सबके सामने हैं। कांग्रेस समर्थित उद्धव सरकार के समय हुए उमेश कोल्हे के क़त्ल को चोरी का मामला बताकर दबा दिया, लेकिन सत्ता बदलते ही, सच्चाई सामने आ रही है।

वायरल वीडियो में सलमान चिश्ती ने कहा था, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।” इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताते हुए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की थी।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का हिन्दू विरोधी चेहरा का सबूत करार दिया। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि खादिम सलमान चिश्ती कह रहा है कि वो नशा नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद राजस्थान पुलिस उससे कहती है, “बोल देना नशे में था, ताकि बचाया जा सके।” एक महिला की गर्दन पर इनाम रखने वाले व्यक्ति के साथ राजस्थान पुलिस की इस मिलीभगत के बाद कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

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प्रियंकाजी, राजस्थान में भी लड़कियां हैं, पर बाहुबलियों के आगे लड़ नहीं पा रहीं

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार आए दिन नए विवादों में फंसती नजर आ रही है। नेता, विधायक और मंत्री अपनी ढपली अपना राग की तर्ज पर नाच रहे हैं। जनता के दुख-दर्द की, शोषितों-पीड़ितों-वंचितों की पीड़ा की किसी को फिक्र नहीं है। कांग्रेसियों को सिर्फ अपनी फिक्र है। अपने जेब की फिक्र है और अपराधों में फंसे अपनों को बचाने की चिंता है। पहले से ही रेपिस्तान बने राजस्थान में कांग्रेस विधायक के पुत्र ने एक और नगीना जड़ दिया है। दौसा में एक 15 साल की नाबालिग से गैंगरेप के मामले में विधायक के बेटे समेत 5 युवकों पर शर्मनाक मामला दर्ज हुआ है। भाजपा नेता व पूर्व संसदीय सचिव जितेंद्र गोठवाल ने प्रियंका गांधी वाड्रा को शताब्दी ट्रेन का टिकट बुक कराकर दिल्ली से राजस्थान बुलाया है, ताकि वे राजस्थान की लड़कियों के लिए भी लड़ सकें।

कांग्रेस विधायक सफिया खान के कहने पर एसडीएम ने मांगे 30 लाख
दौसा में दुष्कर्म की करतूत है तो इधर अलवर के रामगढ़ से कांग्रेस विधायक के खिलाफ ‘शोले’ निकल रहे हैं। रामगढ़ की सरपंच शकुंतला सैनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नगर पालिका का चेयरमैन बनाने के लिए रामगढ़ विधायक सफिया खान के कहने पर रामगढ़ एसडीएम कैलाश चंद शर्मा ने 30 लाख रुपये मांगे हैं। उन्होंने इसकी शिकायत एसीबी में भी की, लेकिन सरकार के दबाव में सुनवाई नहीं हुई। जस्टिस उमाशंकर व्यास की बेंच ने याचिका स्वीकार कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

कांग्रेस विधायक के बेटे ने नाबालिग से रेप कर बनाए अश्लील वीडियो
राजस्थान में कांग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा के बेटे दीपक मीणा पर नाबालिग से गैंगरेप व ब्लैकमेल करने के आरोप हैं। दौसा में एक 15 साल की नाबालिग से गैंगरेप के मामले में एमएलए के बेटे समेत 5 युवकों पर मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एमएलए के बेटे और उसके दोस्तों ने होटल में रेप कर अश्लील वीडियो बनाए। इन्हें वायरल करने की धमकी देकर साढ़े 15 लाख रुपए व जेवरात ले लिए। इसके साथ धमकाया भी कि कानून हमारा कुछ नहीं कर सकता। परिजनों ने बताया कि पीड़िता 10वीं क्लास में पढ़ती है।

नाबालिग ने डरकर मां के गहने व 15.40 लाख रुपये आरोपी को दिए
फेसबुक पर उसकी पहचान थूमड़ा (अलवर) निवासी विवेक शर्मा से हुई। उन्होंने बताया कि विवेक शर्मा, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से कांग्रेस विधायक जौहरीलाल मीणा के बेटे दीपक और नेतराम समेत दो अन्य युवकों ने नशे की गोली खिलाकर उसके साथ मंडावर थाना क्षेत्र के एक होटल में गैंगरेप किया। इस दौरान मुख्य आरोपी विवेक ने रेप का वीडियो बना लिया। इसके बाद विवेक ने नाबालिग को ब्लैकमेल कर उससे कई बार रेप किया। विवेक ने नाबालिग को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसों की भी डिमांड की। नाबालिग ने डरकर मां के गहने व 15 लाख 40 हजार रुपये आरोपी को दे दिए।

प्रियंकाजी आइये, राजस्थान में भी लड़कियां हैं, पर बाहुबलियों के आगे लड़ नहीं पा रहीं
कांग्रेस विधायक जौहरीलाल मीणा के बेटे पर गैंगरेप का केस दर्ज होने के बाद सियासत गरमा गई है। बीजेपी नेता जितेंद्र गोठवाल ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को ट्रेन का टिकट भेजा। उन्होंने विधायक पुत्र के रेप मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रियंका को राजस्थान बुलाया। गोठवाल ने ट्वीट को प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा- राजस्थान में कांग्रेस विधायक के बेटे ने एक नाबालिग से रेप किया है। लड़की आपके विधायक के बाहुबल के आगे लड़ नहीं पा रही। गोठवाल ने आगे लिखा- प्रियंका जी, आपके लिए रेल की टिकट भेज रहा हूं। तुरंत जयपुर आइए। क्योंकि राजस्थान में भी लड़कियां हैं, लड़ नहीं पा रही हैं।

देश में मासूमों से 49 फीसदी रेप अकेले राजस्थान में
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार नाबालिगों के साथ तो राजस्थान में और भी बुरा हाल हो रहा है। हवस के दरिंदे मासूमों को भी नहीं बख्श रहे हैं। उन्हें प्रदेश की पुलिस का कोई खौफ नहीं है। 18 वर्ष से कम उम्र की बलात्कार पीड़िताओं की संख्या देशभर में 2640 रही। अकेले राजस्थान में ही 49 फीसदी यानी 1279 नाबालिगों का बलात्कार हुआ।

हाथरस गैंगरेप पर हंगामा, राजस्थान पर मौन
आपको याद ही होगा कि पिछले साल सितंबर माह में यूपी के हाथरस में युवती के साथ बलात्कार के बाद पीड़िता की मौत का मामला कितना तूल पकड़ा था। हाथरस गैंगरेप की घटना के विरोध में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हाथरस कूच किया था। नेता द्वय ने इस घटना के लिए योगी सरकार को जिम्मेवार ठहराया। दिलचस्प तथ्य यह है कि उसी सितंबर माह में उनकी पार्टी द्वारा शासित राजस्थान में बलात्कार की एक नहीं, कई घटनाएं हुईं, लेकिन यहां राहुल-प्रियंका ने बलात्कारियों को सजा दिलवाने के लिए आवाज उठाना तो दूर पीड़िताओं और उनके परिजनों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा।

‘राजस्थान मर्दों का प्रदेश रहा है यार… रेप के मामले में हम नंबर वन पर…’ – शांति धारीवाल, गहलोत सरकार के मंत्री

                                   मंत्री धारीवाल ने असंवेदनशील बयान दिया। (साभार: एफपीजे)
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। अशोक गहलोत वहाँ के मुख्यमंत्री हैं। वो आए दिन महिला सुरक्षा और कानूनों की बातें तो करते हैं, लेकिन वास्तविकता पर नजर डाला जाए तो जमीनी हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है। रेप के मामले में राजस्थान देश में नंबर वन पर काबिज है।

रेप के मामले में राजस्थान के टॉप पर होने का आँकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NRCB) का है, मीडिया का नहीं। हाल के दिनों में प्रदेश में कई जगह बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों, मूक-बधिर के साथ रेप की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ये घटनाएँ प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं।

राजस्थान सरकार ने विधानसभा में ये स्वीकार किया है कि राजस्थान रेप के मामले में देश में नंबर वन पर है। विधानसभा के अंदर महिलाओं के साथ होने वाली ज्यादती पर हँसते हुए संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल कहते हैं:

“रेप के मामले में हम नंबर वन पर हैं, अब ये रेप के मामले क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है। वैसे भी राजस्थान मर्दों का प्रदेश रहा है यार, उसका क्या करें?”

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि इतना कहते ही धारीवाल हँसने लगते हैं और उनके साथ ही पूरी सदन हँसने लगती है। हद तो ये थी कि उस दौरान महिलाओं को लेकर इतने असंवेदनशील तरीके से भाषण देते वक्त किसी भी कांग्रेसी ने उन्हें टोका तक नहीं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2020 के आँकड़ों के मुताबिक, एक साल में राजस्थान में 5310 महिलाएँ दरिंदगी का शिकार हुई थीं। जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 2769 केस के साथ दूसरे और 2339 केस के साथ मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर था।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में 1,11,549 महिला अपराधों के ऐसे केस दर्ज किए गए थे, जिनमें महिला पर उनके पति या रिश्तेदारों ने ही अत्याचार किए थे। इसी दौरान अपहरण के 62,300 मामले रजिस्टर हुए थे। शील भंग के 85,392 मामले और रेप की कोशिश के 3,741 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 2020 के दौरान देश भर में एसिड हमले के 105 मामले दर्ज किए गए थे।

NCW ने दी कार्रवाई की चेतावनी

धारीवाल की संवेदहीन टिप्पणी पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार में ऐसे मंत्री हैं, इसलिए राज्य की महिलाएँ भीषण लैंगिक अपराधों को झेल रही हैं और पुलिस कुछ नहीं कर रही है। ऐसे मंत्री होंगे तो राज्य की महिलाएँ कैसे सुरक्षित महसूस करेंगी? एनसीडब्ल्यू धारीवाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।”

राजस्थान में महिलाओं/बच्चियों के खिलाफ अपराध का है इतिहास

राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का लंबा इतिहास रहा है। पिछले साल दिसंबर में ही अलवर में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल समेत 9 दरिंदों ने नाबालिग से गैंगरेप किया। इसी तरह से जनवरी 2022 में भी एक मूक-बधिर नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया। उसके शरीर पर नुकीली हथियार से वार किए गए थे। ऐसे ही एक अन्य मामले में भरतपुर के चिकसाना गाँव में 5 साल की बच्ची से दरिंदगी की गई। बाद में पीड़ित के परिवार पर राजीनामे के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्हें ही गाँव भी छोड़ना पड़ा।

राजस्थान : दो साल से खाने के 36 लाख रुपये नहीं देने पर कांग्रेस सेवादल के नेताओं पर भड़का अजमेर का हलवाई, आत्महत्या की दी चेतावनी

बॉलीवुड फिल्म का एक गाना ‘बड़े मियां तो बड़े मियां,छोटे मियां सुभान अल्लाह’ बड़ा मशहूर है। यह गाना कांग्रेस और उसके नेताओं पर सटीक बैठता है। जहां पार्टी के आलाकमान और बड़े नेता बड़ा घोटाला कर जनता के पैसे पर डाका डालते थे, वहीं उनके नक्शेकदम पर चलते हुए राज्य स्तर के नेता आम लोगों को लूट रहे हैं। ऐसा ही मामला राजस्थान में सामने आया है, जहां गुरुवार (14 अक्टूबर, 2021) को सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई के कार्यक्रम में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एक व्यक्ति ने लालजी देसाई से सेवादल के राष्ट्रीय अधिवेशन के बकाया 36 लाख रुपये मांगना शुरू कर दिया। इस अवसर उसने खाना खाकर पैसे नहीं देने का आरोप लगाया और खूब हंगामा किया। इसके बाद सेवादल के कार्यकर्ताओं ने धक्के मारकर उसे बाहर निकाल दिया।

दरअसल हंगामा करने वाले व्यक्ति का नाम मिलिंद खंडेलवाल है, जो खंडेलवाल केटरिंग का संचालक है। मिलिंद ने मीडिया को बताया कि 10 से 14 फरवरी, 2019 को सेवादल का राष्ट्रीय अधिवेशन कायड़ विश्राम स्थली में आयोजित हुआ था। इसमें देशभर के कार्यकर्ता शामिल हुए थे। अधिवेशन का उद्धाटन राहुल गांधी ने किया था। इस कार्यक्रम का खाने का ठेका उसे 71 लाख रुपये में दिया गया था। इसमें से कुल 35 लाख रुपये उसे दिए गए जबकि 36 लाख रुपये बकाया चल रहे हैं। इतनी बड़ी रकम नहीं मिलने से उसे आर्थिक संकट का समाना करना पड़ रहा है। मिलिंद ने कहा कि कांग्रेस के लोग प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हैं, लेकिन ये लोग खाना खाकर पैसे भी खा गए।

मिलिंद ने आरोप लगाया कि वह रकम ब्याज पर उधार लेकर 2.5 लाख कांग्रेस कार्यकर्ताओं को खाना खिलाया था। बार-बार मांगने पर भी उसे भुगतान नहीं किया जा रहा है। बकाया रुपयों को लेकर चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाई। लेकिन कोई भी उसका बकाया राशि देने को तैयार नहीं है। सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। जिससे वह आत्महत्या करने को मजबूर है। हलवाई ने इस अवसर पर रुपये नहीं मिलने पर आत्महत्या की चेतावनी भी दी। साथ ही कहा कि ऐसा होता है तो इसके जिम्मेदार डॉ. रघु शर्मा और अन्य नेता होंगे।

इस हंगामे के बाद सेवादल और राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं की खासी फजीहत हुई है। लेकिन कांग्रेस के नेता उल्टे केटरिंग के संचालक को ही सत्ता का धौंस दिखाने लगे हैं। सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष हेम सिंह ने कैटरिंग के मालिक मिलन खंडेलवान को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए कहा कि उसके खिलाफ अजमेर के पुलिस थानों में धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। मिलन को तय रकम का भुगतान कर दिया गया, लेकिन वह ब्लैकमेल कर ज्यादा पैसा लेना चाहता है। हेम सिंह ने कहा कि अब हम उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।