Showing posts with label #Delhi anti-Hindu riots. Show all posts
Showing posts with label #Delhi anti-Hindu riots. Show all posts

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर हुसैन की सजा पर बिलबिलाई AAP-कांग्रेस, बेनकाब हुए ‘चुनावी हिंदू’ केजरीवाल


राष्ट्रवादी ताकतों और कानून की एक बड़ी जीत के तहत वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अफसर अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दंगाइयों को दोषी करार दिया।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिंह ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत के इस न्यायपूर्ण फैसले पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने खुलकर दंगाइयों के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाते हुए दुख जाहिर किया है। वहीं पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल वोटबैंक की खातिर सुंदरकांड कार्यक्रम के जरिये हिंदुओं को भ्रमित करने में जुटे हैं।

ये आम आदमी पार्टी का असली चेहरा है—दिल्ली में दंगे करवाकर हिंदुओं का कत्लेआम करने वाले को अगर कानून सजा दे रहा है, तो इन्हें दुख हो रहा है। वहीं केजरीवाल जो आजकल चुनावी लाभ के लिए हिंदू हृदय सम्राट बने घूम रहे हैं, वो असल में तुष्टीकरण की राजनीति के तहत देशविरोधी तत्वों को संरक्षण देते रहे हैं।

मर्डर केस में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दोषी

दिल्ली की अदालत ने आईबी कर्मी अंकित शर्मा हत्याकांड में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच कट्टरपंथियों को दोषी करार दिया है। दोषी ठहराए गए आरोपितों में ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस शामिल हैं। इन देशद्रोहियों और दंगाइयों की सजा पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी।

ताहिर हुसैन पर कौन से लगे आरोप

अदालत ने ताहिर हुसैन को सरकारी आदेश की अवहेलना, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने, दंगा करने, घातक हथियार के साथ दंगा करने, अपहरण, हत्या तथा गैरकानूनी जमाव के साझा उद्देश्य से अपराध करने के गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया। यह साबित करता है कि ताहिर हुसैन दिल्ली को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने का मुख्य सूत्रधार था।

अंकित शर्मा की हत्या कर शव नाले में फेंका

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी कर्मी अंकित शर्मा की निर्दयी और बर्बर हत्या से जुड़ा है। कर्तव्यनिष्ठ अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में पुख्ता सबूतों के साथ साबित किया कि हिंसक भीड़ ने उनकी हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया था।
AAP विधायक अमानतुल्लाह खान दोषी के साथ
एक तरफ अदालत ने AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को मर्डर केस में दोषी ठहराया, वहीं AAP विधायक अमानतुल्लाह खान खुलेआम इस खूंखार दोषी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया: “आज अदालत के जरिए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों में दोषी क़रार दिए जाने पर बहुत दुखी हूँ, अल्लाह उसके घर वालों को सब्र अता करे…” अमानतुल्लाह खान का यह बयान साफ दिखाता है कि आम आदमी पार्टी के लिए देश की सुरक्षा और न्याय से बढ़कर उनका खास वोटबैंक है।
अमानतुल्लाह खान को यह भी देश को बताना होगा कि ताहिर के मुसलमान होने के नाते किसी भी अपराध को करने की छूट है? आखिर कब तक अमानतुल्लाह खान जैसे कट्टरपंथी victim card खेल लोगों को गुमराह करते रहेंगे। कोर्ट को ऐसे लोगों पर भी सख्ती से पेश आना होगा।   
राम, हनुमान के साथ केजरीवाल के लगे पोस्टर
दिल्ली में आयोजित सुंदरकांड कार्यक्रम में लगे पोस्टरों ने एक नये विवाद और आक्रोश को जन्म दे दिया है। भगवान राम और संकटमोचन हनुमान के साथ अरविंद केजरीवाल की तस्वीरों वाले ये पोस्टर सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि हिंदुओं को भ्रमित करने और आम आदमी पार्टी के दंगों में संलिप्त चेहरे पर परदा डालने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। एक तरफ पार्टी का पूर्व पार्षद सांप्रदायिक दंगे फैलाता है, मर्डर केस में दोषी करार दिया जाता है, वहीं पार्टी का विधायक अमानतुल्लाह खान दोषी के बचाव में छाती पीटता है। दूसरी तरफ केजरीवाल दिखावे के लिए सुंदरकांड कार्यक्रम करके बहुसंख्यक समाज की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे हैं।
ताहिर के बचाव में उतरे इमरान मसूद
ताहिर हुसैन को दोषी करार दिए जाने पर प्रियंका वाड्रा के करीबी कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विक्टिम कार्ड खेलते हुए बेहद शर्मनाक बयान दिया है। उनका कहना है कि ताहिर को सजा इसलिए मिली क्योंकि उसका नाम ताहिर है, उसका नाम कपिल नहीं है। न्यायालय पर सवाल उठाने वाले इस बयान से आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का चरित्र क्या है। ये लोग सांप्रदायिक दंगा और मर्डर के दोषी के बचाव में उतर गए हैं। जबकि अदालत ने छह साल चले मुकदमे में ठोस सबूतों के आधार पर ही ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। यह साफ है कि राष्ट्रवादी भाजपा जहां पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं पूरा विपक्ष देश के दुश्मनों और दंगाइयों की ढाल बनकर खड़ा हो गया है।
अंकित शर्मा की हत्या और ताहिर हुसैन का खूनी सच
24 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर उग्र मुस्लिम भीड़ ने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की निर्मम हत्या कर दी थी। हिंसा का यह तांडव यहीं नहीं रुका; इसके अगले दो दिनों तक, यानी 25 और 26 फरवरी को, ताहिर हुसैन की इमारत का इस्तेमाल एक रणनीतिक ठिकाने के रूप में किया गया। इस पांच मंजिला इमारत की छत से पूरे दिन आस-पास की हिंदू बस्तियों पर योजनाबद्ध तरीके से भारी पत्थर, ईंटें, तेजाब की बोतलें और पेट्रोल बम बरसाए गए, जिससे पूरा इलाका जल उठा।
ताहिर की इमारत बनी ‘डेथ ट्रैप’
25 फरवरी की शाम, ताहिर हुसैन की इमारत के नीचे जुटी हिंसक और उन्मादी भीड़ ने आईबी अफसर अंकित शर्मा को निशाना बनाया। कर्तव्यनिष्ठ अंकित शर्मा को भीड़ ने जबरन घसीटकर उस इमारत के अंदर खींच लिया, जहां उनके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं। भीड़ ने उनकी बेरहमी से लिंचिंग (हत्या) कर दी और सबूत मिटाने के उद्देश्य से उनके शव को पास के एक गंदे नाले में फेंक दिया। कोर्ट में यह साबित हुआ है कि आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन ने न केवल इस पूरी खूनी साजिश को अंजाम देने के लिए अपनी इमारत मुहैया कराई, बल्कि उसने अपने समुदाय के लोगों को हिंदुओं के नरसंहार के लिए खुलेआम उकसाया और भड़काया।
ताहिर को केजरीवाल का संरक्षण
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के दोहरे चरित्र पर सीधा और तीखा हमला बोला है। गौरव भाटिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दंगे और मर्डर के दोषी ताहिर हुसैन के तार आज भी अरविंद केजरीवाल से जुड़े हुए हैं और उसे आज भी केजरीवाल का पूरा संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के अदालती फैसले पर दिए गए बयान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश के न्यायालय ने पुख्ता साक्ष्यों, प्रमाणों और गवाहों की गवाही के आधार पर जो सजा सुनाई है, उसेअमानतुल्लाह खान द्वारा ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताना बेहद शर्मनाक है। गौरव भाटिया ने तीखे सवाल दागते हुए पूछा कि क्या यह सीधे तौर पर देश विरोधी तत्वों को बढ़ावा देने वाली घटिया ‘वोटबैंक की राजनीति’ नहीं है? उन्होंने केजरीवाल को घेरते हुए पूछा कि क्या अरविंद केजरीवाल अब स्वयं को इस देश के कानून और न्यायालय से भी ऊपर मानने लगे हैं?
वामपंथी ‘लिबरल इकोसिस्टम’ का असली चेहरा बेनकाब
आईबी अफसर अंकित शर्मा के हत्यारे ताहिर हुसैन को सजा मिलने के बाद देश के तथाकथित ‘लिबरल इकोसिस्टम’ का घिनौना चरित्र पूरी तरह से बेनकाब हो गया है। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान जब अंकित शर्मा की निर्मम हत्या कर उनके शव को नाले में फेंक दिया गया था, तब इस इकोसिस्टम ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने के बजाय, मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन को ‘पीड़ित’ साबित करने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। राणा अय्यूब जैसे चेहरों ने खुलेआम विक्टिम कार्ड खेलते हुए दावा किया था कि ताहिर को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया गया “क्योंकि उसका सरनेम हुसैन है।” इस पूरे वामपंथी गैंग ने ताहिर को एक बेगुनाह मुस्लिम के रूप में पेश किया, जिसे एक तथाकथित ‘हिंदू बहुसंख्यकवादी राज्य’ द्वारा फंसाया जा रहा था। उन्होंने न्याय की हर मांग को सांप्रदायिक करार दिया और हर कड़वे सच को प्रोपेगैंडा कहकर खारिज कर दिया। 
अवलोकन करें:-
अंकित शर्मा के लिए न्याय ताहिर हुसैन सहित 5 को फांसी से पूरा होगा; साबित हो गया दिल्ली दंगे केजरी
nigamrajendra.blogspot.com
अंकित शर्मा के लिए न्याय ताहिर हुसैन सहित 5 को फांसी से पूरा होगा; साबित हो गया दिल्ली दंगे केजरी
सुभाष चन्द्र आईबी अफसर अंकित शर्मा को 25 फरवरी, 2020 को राक्षसों की तरह मार कर ताहिर हुसैन और उसके गिरोह ने इंसानियत की ..... 
लेकिन आज दिल्ली की एक अदालत ने ताहिर हुसैन को दोषी करार देकर इस इकोसिस्टम के चेहरे से मुखौटा नोच दिया है। इस तथाकथित लिबरल इकोसिस्टम ने न केवल गलत रिपोर्टिंग की, बल्कि पीड़ित और अपराधी की भूमिकाओं को ही पलट दिया। इन्होंने एक खूंखार हत्यारे को प्रताड़ित प्रतीक बनाने की कोशिश की। देश न तो इस खौफनाक अपराध को भूलेगा, और न ही अपराधियों की ढाल बनने वाले इन चेहरों को माफ करेगा।

क्लेम कमीशन की सिफारिश के अनुसार पीड़ितों को जारी करो मुआवजा: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में AAP सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश, नई योजना बनाने से किया था इनकार; मुआवजा देगा कौन आतिशी, सुनीता या कोई और?

        दिल्ली दंगों के पीड़ितों को राहत देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट निर्देश (फोटो साभार: आजतक और दैनिक भास्कर)
आतिशी सरकार पर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से बड़ी दुविधा में पड़ गयी है। देखना यह है कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन आतिशी करेंगी या संभावित मुख्यमंत्री सुनीता केजरीवाल या फिर सत्ता परिवर्तन के बाद बनने वाले मुख्यमंत्री द्वारा? क्योकि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आ भी जाती है तो अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, सियासत के बाजार में चर्चा चल रही है कि अगर पार्टी सत्ता में आ जाती है तो अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री आतिशी तो क्या किसी और को भी मुख्यमंत्री बनाने को तैयार नहीं। आतिशी को तो पहले ही अस्थायी मुख्यमंत्री कह चुके है। ऐसे में एक ही विकल्प होगा वह है सुनीता केजरीवाल। 

दिल्ली सरकार के सामने सिर्फ पीड़ितों को मुआवजा देने तक नहीं है, सबसे बड़ी गले की फांस है लंबित CAG रिपोर्ट। ये वो बारूद है जिसके टेबल होते ही आम आदमी पार्टी ताश के पत्तों की हवा होकर एक इतिहास बन जाएगी। 

दिल्ली दंगों के पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि ‘क्लेम कमीशन’ की सिफारिश के मुताबिक दिल्ली सरकार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीड़ितों को सहायता राशि जारी करे।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, 20 याचिकाओं के समूह का यह मामला जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ के समक्ष सुना गया। इसमें याचिकाकर्ताओं ने ‘दंगा पीड़ितो की सहायता के लिए सहायता योजना’ के अनुसार मुआवजा माँगा गया था। कुछ याचिकाकर्ता इसमें बढ़ाकर मुआवजा देने की माँग भी कर रहे थे।

15 जनवरी को इन याचिकाओं के बाबत कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर-पूर्वी दंगा दिल्ली आयोग ने बैच में से 14 याचिकाओं के संबंध में दावों के संबंध में सिफारिशें की हैं। अदालत को ये भी बताया गया कि उत्तर-पूर्वी दंगा दिल्ली आयोग द्वारा निर्धारित और अनुशंसित राशि याचिकाकर्ताओं के हक की राशि का एक अंश थी। फिर भी जल्द से जल्द अनुशंसित राशि जारी करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

कोर्ट में जब दिल्ली सरकार के वकील द्वारा इस माँग का विरोध नहीं किया गया तो अदालत ने इस संबंध में आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी नंबर 2 यानी दिल्ली सरकार को वर्तमान मामलों के समूह में याचिकाकर्ताओं के लिए उत्तर पूर्व दंगा दिल्ली आयोग द्वारा अनुशंसित राशि जारी करने का निर्देश दिया जाता है।” यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि मुआवजे की राशि याचिकाकर्ताओं के अधिकारों और तर्कों को ध्यान में रखते हुए दी जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी। इससे पहले, अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह कोई नई योजना नहीं बनाएगी, बल्कि केवल यह देखेगी कि क्या दिल्ली सरकार ने पहले से बनाई गई योजना के अनुसार काम किया है या नहीं।

गौरतलब है कि दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में साल 2020 में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। इस दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि ये दंगा पूर्व नियोजित था। दंगों को लेकर करीबन 750 एफआईआर दर्ज हुई थी और कई आरोपित गिरफ्तार हुए थे। ताहिर हुसैन उन्हीं आरोपितों में से एक है।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ‘मैंने ही लोगों से कहा- पत्थर, तेजाब, पेट्रोल व हथियारों को इकट्ठा करें’: उमर खालिद

कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार(दिसंबर 30) को चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

खबरों के अनुसार, उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उमर खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्‍चों का इस्‍तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी कई खुलासे किए हैं।

क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्‍यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।

पुलिस को दिए बयान में उमर ने कबूला, “2019 में जिस तरह से संसद में भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। उसके बाद मैंने अपने साथी जो यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य थे, हम सब ने मिलकर एक मीटिंग की कि एंटी सीएए (CAA) बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इसके लिए हमें आवाज उठानी चाहिए। मेरी बात पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य सहमत हो गए। तब हमने योजना बनाई की JNU और जामिया (Jamia) के मुस्लिम छात्र मिलकर इस बिल के खिलाफ आवाज उठाते है क्योंकि भारत सरकार बिना दबाव बनाए इस बिल को वापस नही लेगी। जिसके बाद हमने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, जेएनयू और जामिया के मुस्लिम छात्रों को इकट्ठा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें देखते ही देखते काफी लोग इकट्ठा हो गए।”

उमर ने आगे कहा, “फिर हमने जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जिसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मीटिंग की और आंदोलन को अगले पड़ाव पर ले जाने की प्लानिंग बनाई। जिसके लिए हमने बच्चों और औरतों को आगे रखकर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने की योजना बनाई। इसके लिए बाकायदा एक और नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया ‘हम भारत के लोग’ नाम से। उधर तब तक एंटी CAA बिल लोकसभा में पास कर दिया गया था और यह एक कानून बन गया।”

उसने आगे बताया, “इसके बाद हमने योजना बनाई कि हमें और सख्त तरीक़े से चक्का जाम करने की जरूरत है। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एक मात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वो अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़ेगी इसका इस्तेमाल करें।”

खालिद ने खुलासा किया कि, वह दिल्ली में करीब 23-24 जगह चल रहे एंटी CAA प्रदर्शनो में शामिल हुआ था। “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा की हम सब डोनॉल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगें और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”

खालिद को पुलिस ने 14 सितंबर को भयावह पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जाँच के लिए उसे समन जारी किया था जिसके बाद वह गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाल ही में दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मंजूरी दे दी थी, जिसमें हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता कट्टरपंथी उमर खालिद, शरजील इमाम, AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन और अन्य कई लोगों को देशद्रोह के आरोप में शामिल किया गया था।

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में नताशा नरवाल, देवांगना कालिता, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और 15 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें साल 2020 की शुरूआत में हुए इस दंगे में लगभग 50 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।