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‘हिंदुओं को खत्म कर… मुस्लिमों के लिए अलग देश बनाना है’: उमर खालिद के खिलाफ सरकारी वकील ने पेश किए और सबूत

                                                      साभार: बार एंड बेंच
देश की राजधानी दिल्ली में साल 2020 में हुए हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riots) के आरोपित और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद समेत 6 अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर गुरुवार (3 फरवरी 2022) को भी दिल्ली की अदालत ने सुनवाई की। इस दौरान पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अमित प्रसाद ने अदालत में मुस्लिमों का साजिश के बारे में बताया कि गवाहों ने गवाही दी है कि आरोपित मुस्लिमों के लिए एक अलग देश बनाना चाहते थे। इसी के चलते इन्होंने हिंसा भड़काने की साजिश रची थी।

अमित प्रसाद ने 3 फरवरी को जारी जमानत की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत की पीठ को बताया कि उनके पास गवाहों के रिकॉर्ड हैं, जिसमें एक आरोपितों ने कहा था कि ‘मुस्लिमों के लिए अलग देश’ बनाना है। उनके पास रिकॉर्ड पर गवाह हैं कि आरोपित ने एक बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि ‘मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र बनाना है’। एसएसपी ने कहा कि इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने डॉ अपूर्वानंद नाम के एक प्रोफेसर का एक और बयान पेश किया, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि दिल्ली दंगों के आरोपितों ने कथित तौर पर कहा था कि ‘सरकार को झुकाना और, हिंदू-मुसलमान करना है।’

इसके साथ ही प्रसाद ने विक्टर नाम के एक और गवाह के बयान को पेश किया। जिसमें लिखा था, “चाँद बाग में हिंदुओं को खत्म करना है के नारे लग रहे थे।” पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने इस ओर संकेत दिया कि अब आरोपितों के खिलाफ UAPA एक्ट और देशद्रोह के तहत कार्रवाई करने के पर्याप्त सबूत हैं।

एसपीपी अमित प्रसाद ने कहा, “सभी आरोपितों की साजिश के हर हिस्से में रोल प्ले करने की जरूरत नहीं होती। जब लोगों के बीच समझौता होता है तो वे एक-दूसरे के एजेंट बन जाते हैं।” उन्होंने अदालत में कहा कि कई लोग दंगे वाली जगहों से उमर खालिद को रिपोर्ट कर रहे थे।

इसके साथ ही अभियोजन पक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन इन्ही आरोपितों में से एक है। उस पर दिल्ली कि हिंदू विरोधी दंगे भड़काने के लिए व्हाइट मनी को ब्लैक करने के भी आरोप है।

इससे पहले बुधवार को पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अमित प्रसाद ने कहा था कि एक गवाह ने बताया, “विरोध प्रदर्शन के लिए डंडे, पत्थर, लाल मिर्च और तेजाब इकट्ठे किए गए।” अमित प्रसाद ने सवाल किया, आखिरकार लाठी, डंडे और लाल मिर्च के साथ किया गया विरोध प्रदर्शन किस प्रकार से शांतिपूर्ण हो सकता है?

हिंदू-विरोधी दंगों के लिए हुई थी टेरर फंडिंग

अमित प्रसाद ने कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया, “आतंकवादी संगठनों से फंडिंग की गई थी। ताहिर हुसैन के पैसे को व्हाइट से ब्लैक करने के भी सबूत हैं। यह बहुत ही असामान्य सी बात है कि हमारे पास सबूतों की एक पूरी चेन है। पैसे को ब्लैक करने की क्यों जरूरत पड़ी? यह पैसा साइटों पर गया।”

इसके साथ ही उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने इस बात की पुष्टि की, “विरोध के लिए कुछ पैसे जामिया से आता था, कुछ आतंकवादी देते थे।” प्रसाद ने ये भी बताया कि दिल्ली दंगों की आरोपितों में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट मीरान हैदर को एनजीओ ‘नई शिक्षा कल्याण संगठन’ से फंडिंग हुई थी। बहरहाल कोर्ट ने फैसला किया है कि वो इस मामले में अगले सप्ताह भी सुनवाई करेगा।

इसके साथ ही पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कई अन्य सबूत भी पेश किए। पिछले साल उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया था कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ‘मैंने ही लोगों से कहा- पत्थर, तेजाब, पेट्रोल व हथियारों को इकट्ठा करें’: उमर खालिद

कट्टरपंथी मुस्लिम और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद ने कथित तौर पर पुलिस के सामने कबूल किया है कि वह मुस्लिम समूहों को संगठित करने, उन्हें उकसाने और बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रचने में शामिल था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की शुरुआत में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ बुधवार(दिसंबर 30) को चार्जशीट दाखिल की थी। 100 पन्नों की चार्जशीट में उमर खालिद पर दिल्ली की सड़कों पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने, देश विरोधी भाषण देने और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

खबरों के अनुसार, उमर खालिद ने खुद अपने आरोपों को स्वीकार किया है कि उसने मुस्लिम संगठनों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उमर खालिद ने दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मुस्लिमों को नए कानून के खिलाफ भड़का कर हिंसा की साजिश रचने और महिलाओं व बच्‍चों का इस्‍तेमाल कर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने से संबंधी कई खुलासे किए हैं।

क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दंगों के मास्टमाइंड को लेकर कहा है कि 8 जनवरी को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी और ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की प्लानिंग के लिए एक मीटिंग की थी। दंगों को पूरे देश में भड़काने के लिए उमर खालिद ने कई राज्‍यों का दौरा किया भी किया था। इस दौरान उसने भड़काऊ भाषण देकर नागरिकता कानून के खिलाफ लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।

पुलिस को दिए बयान में उमर ने कबूला, “2019 में जिस तरह से संसद में भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन बिल पेश किया। उसके बाद मैंने अपने साथी जो यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य थे, हम सब ने मिलकर एक मीटिंग की कि एंटी सीएए (CAA) बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इसके लिए हमें आवाज उठानी चाहिए। मेरी बात पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य सहमत हो गए। तब हमने योजना बनाई की JNU और जामिया (Jamia) के मुस्लिम छात्र मिलकर इस बिल के खिलाफ आवाज उठाते है क्योंकि भारत सरकार बिना दबाव बनाए इस बिल को वापस नही लेगी। जिसके बाद हमने यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, जेएनयू और जामिया के मुस्लिम छात्रों को इकट्ठा करने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें देखते ही देखते काफी लोग इकट्ठा हो गए।”

उमर ने आगे कहा, “फिर हमने जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन किए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जिसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मीटिंग की और आंदोलन को अगले पड़ाव पर ले जाने की प्लानिंग बनाई। जिसके लिए हमने बच्चों और औरतों को आगे रखकर पूरी दिल्ली में चक्का जाम करने की योजना बनाई। इसके लिए बाकायदा एक और नया व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया ‘हम भारत के लोग’ नाम से। उधर तब तक एंटी CAA बिल लोकसभा में पास कर दिया गया था और यह एक कानून बन गया।”

उसने आगे बताया, “इसके बाद हमने योजना बनाई कि हमें और सख्त तरीक़े से चक्का जाम करने की जरूरत है। हमने 16 और 17 फरवरी की शाम एक मीटिंग में तय किया कि दंगा ही एक मात्र तरीका है जिससे भारत सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। फिर मैंने ही लोगों से कहा कि वो अपने पास पत्थर, तेजाब, पेट्रोल और हथियारों को इकट्ठा करके रखें और जब जरूरत पड़ेगी इसका इस्तेमाल करें।”

खालिद ने खुलासा किया कि, वह दिल्ली में करीब 23-24 जगह चल रहे एंटी CAA प्रदर्शनो में शामिल हुआ था। “मैं अमरावती और महाराष्ट्र भी प्रदर्शन में शामिल होने गया था। जहाँ मैंने कहा की हम सब डोनॉल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान 24 फरवरी को सड़कों पर आकर भारत सरकार पर दबाव बनाएँगें और हमारे लोगों ने अपनी योजना के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ही 24 तारीख को दिल्ली के अलग-अलग इलाको में चक्का जाम दंगे करवाना शुरू कर दिए। देखते ही देखते उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाको में दंगे फैल गए।”

खालिद को पुलिस ने 14 सितंबर को भयावह पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जाँच के लिए उसे समन जारी किया था जिसके बाद वह गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाल ही में दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मंजूरी दे दी थी, जिसमें हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता कट्टरपंथी उमर खालिद, शरजील इमाम, AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन और अन्य कई लोगों को देशद्रोह के आरोप में शामिल किया गया था।

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मामले में नताशा नरवाल, देवांगना कालिता, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ और 15 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें साल 2020 की शुरूआत में हुए इस दंगे में लगभग 50 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

केजरीवाल द्वारा उमर खालिद UAPA के तहत मुक़दमे पर भड़की आइशी घोष ने कहा- ‘ये विश्वासघात नहीं भुलाया जाएगा’

आइशी घोष ने लगाया केजरीवाल पर विश्वासघात का आरोप
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की इजाजत देने पर पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी प्रक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं, जिन्हें सुनने एवं पढ़ने पर हंसी आना स्वाभाविक है, क्योंकि केजरीवाल को समझना बहुत टेडी खीर है। ये कब गिरगिट की तरह रंग बदल ले, कहना कठिन है। ये कोरोना के प्रकोप ने साइन करने को मजबूर किया है। वरना संविधान की शपथ लेने वाला, क्यों देश तोड़ने और साम्प्रदायिक दंगे करवाने वालों की फाइल पर अब तक क्यों साइन न करने पर बहाने तलाश रहा था। इस सच्चाई को सोंचने और समझने की जरुरत है।  
जो केजरीवाल इतने वर्ष कन्हैया कुमार की फाइल दबाए रखे थे, आखिर किस कारण से साइन की, और अब उमर खालिद और शरजील इमाम की फाइल? अपनी नाकामियों को छुपाने दिल्लीवासियों को मुफ्त की रेवड़ियां बांट सत्ता हथियाने का हत्कण्डा अपनाया। खैर, कोरोना से बेहाल होती दिल्ली को बचाने के लिए केन्द्र में मोदी सरकार को कोसने वाले को जब उसी सरकार की मदद की जरुरत लेने की मजबूरी ने कन्हैया कुमार की फाइल पर साइन किए। और पुनः कोरोना से बेकाबू हो रही दिल्ली को बचाने की मजबूरी ने ही उमर और शरजील की फाइल साइन करने को मबजूर किया। यदि उस समय दिल्ली को बचाने के लिए कन्हैया की फाइल साइन नहीं की होती, दिल्ली आज तक बहुत ख़राब स्थिति होती। अगर दिल्ली को केजरीवाल सरकार ने काबू में रखा होता, न कन्हैया की फाइल साइन होती और न ही अब उमर और शरजील की।   
दिल्ली दंगों के आरोपित व जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के लिए केजरीवाल सरकार ने यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब यही बात JNU छात्र नेता अध्यक्ष आइशी घोष को आहत कर गई। आइशी घोष ने अपने ट्वीट में सीएम का नाम लिख कर स्पष्ट कहा कि ये धोखेबाजी/ विश्वासघात वो कभी नहीं भूलेंगी।

आइशी ने लाइव लॉ के ट्वीट पर अपना रिप्लाई दिया, जिसमें जानकारी दी गई थी कि केजरीवाल सरकार ने उमर के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। इसी ट्वीट पर आइशी ने लिखा, “श्रीमान अरविंद केजरीवाल प्रत्येक विश्वासघात को कभी भुलाया नहीं जाएगा।”

एक यूजर ने आइशी के इस ट्वीट को पढ़कर अरविंद केजरीवाल के पक्ष में अपनी दलील रखी। श्याम नाम के यूजर ने लिखा, “एलजी को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करके केंद्र सरकार ने प्रॉजिक्यूटर्स नियुक्त किए। आप सरकार ने निर्णय का विरोध भी किया और पैनल को खारिज भी किया लेकिन एलजी ने आप सरकार को ओवर रूल कर लिया। आइशी तुम छात्र राजनीति में कभी कन्हैया की जगह नहीं ले पाओगी। अपने फैक्ट्स को सुधारो।”

आइशी के इस ट्वीट पर कई लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने मुख्यमंत्री को सही ठहराया। वहीं कुछ ने पूछा कि केजरीवाल ने कौन सा विश्वासघात कर दिया? इस पर एक यूजर ने लिखा कि पहले चंदा लिया, वोट लिया और फिर मुकदमा चलाने की भी इजाजत दे दी, आखिर ये धोखा नहीं तो क्या है? इसी तरह कई यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेटिजन्स बोले कि पहले इन्हें मैक्रों ने धोखा दिया अब केजरीवाल ने।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की तरफ से दर्ज किए गए हर केस में प्रॉसिक्यूशन की मंजूरी दे दी है। अब यह कोर्ट को देखना है कि आरोपित कौन हैं। लेकिन ट्विटर पर हर कोई केजरीवाल के इस निर्णय से दगाबाज़ कहने से भी नहीं चूक रहे। अपने आप को ढका सा महसूस कर रहे हैं।

परन्तु कुछ लोग केजरीवाल पर भी व्यंग करने से नहीं चूक रहे।

इस साल के फरवरी माह में हुए दंगों में उमर खालिद को 13 सितंबर को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।  

गृह मंत्रालय ने दिया ग्रीन सिग्नल : उमर खालिद और शरजील इमाम पर चलेगा UAPA के तहत मुकदमा

                            शरजील इमाम और उमर खालिद पर चलेगा यूएपीए अधिनियम के तहत मुकदमा
उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों और हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। ऐलान के मुताबिक़ जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरलीज इमाम पर गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने को हरी झंडी दिखा दी गई है। यानी उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। 

कुछ महीनों पहले ही उमर खालिद पर फरवरी के दौरान राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में दंगों का षड्यंत्र रचने, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था। इन आरोपों की जाँच होने के बाद उमर खालिद को यूएपीए अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। 

क़ानूनी प्रक्रिया को मद्देनज़र रखते हुए किसी भी व्यक्ति पर यूएपीए के तहत मामला चलाने के लिए गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गृह मंत्रालय ने लगभग एक हफ्ते पहले इस पर स्वीकृति जारी की थी। बहुत जल्द दिल्ली पुलिस उमर खालिद और शरजील इमाम के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दायर करने जा रही है। 

इसके अलावा कड़कड़डूमा अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 30 दिन तक बढ़ाने के लिए अर्जी लगाई थी। उमर खालिद के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि वह पुलिस को जाँच के दौरान पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस की तरफ से इस तरह का आरोप लगाना कि उमर पुलिस की जाँच प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा है, यह आरोप निराधार है। उमर की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई अर्जी सरासर गलत है। 

वहीं दिल्ली पुलिस ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष रखा था। दिल्ली पुलिस का कड़कड़डूमा अदालत के समक्ष कहना था कि मामले की जाँच हो रही है इस बात को मद्देनज़र रखते हुए उमर खालिद को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने उमर खालिद की न्यायिक हिरासत 20 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है। फ़िलहाल उमर खालिद न्यायिक हिरासत में ही है और पुलिस इस मामले से जुड़े अहम पहलुओं की जाँच कर रही है। 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने रविवार (13 सितंबर 2020) को गिरफ्तार किया था। फरवरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोध के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में दंगे हुए थे और उमर खालिद पर उन दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। 

वहीं शरजील इमाम ने पिछले साल सीएए विरोधी प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ बयान देकर असम को भारत से अलग करने की बात की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शरजील ने कई दिनों तक पुलिस से बचने का प्रयास किया। मगर बाद में उसकी गिरफ्तारी बिहार के जहानाबाद से हुई थी। पूछताछ में पता चला था कि शरजील भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। अपने इस काम के लिए उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे।

अपने घृणित विवादित बयान शरजील इमाम ने कहा था, “हमारे पास संगठित लोग हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो एक-दो महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से कट कर ही सकते हैं। रेलवे ट्रैक पर इतना मलबा डालो कि उनको एक महीना हटाने में लगेगा… जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है।”

पूर्व जजों की लताड़ : ‘यही लोग संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का मौका नहीं छोड़ते’

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद लगातार एक लॉबी दिल्ली पुलिस पर, सरकार की मंशा पर तरह-तरह के सवाल उठा रही है। ऐसे में कुछ दिन पहले 15 पूर्व जजों ने अपना साझा बयान जारी करके इस लॉबी को करारा जवाब दिया।

अपने बयान में इन पूर्व न्यायाधीशों ने सिविल सोसायटी की नुमाइंदगी का दावा करने वाले कुछ लोग को लताड़ा और उमर खालिद मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया में अड़ंगे लगाने के लिए खरी-खरी सुनाई। बयान में पूर्व जजों ने लिखा, “ये वही लोग हैं जो संसद, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसे संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।”

पूर्व न्यायाधीशों ने बयान में कहा कि ऐसे लोग खुद संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित है, मगर फिर भी विभाजनकारी एजेंडे को समर्थन दे रहे हैं। ऐसे लोग इस खयाल में जीते हैं कि देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनके हिसाब से काम करना चाहिए।

इस बयान में पूर्व न्यायाधीशों ने यह भी कहा है कि दिल्ली दंगों के संबंध में एक के बाद देश विरोधी गतिविधियों का खुलासा हो रहा है। लेकिन इसी बीच बार-बार जाँच प्रक्रिया और ट्रायल पर सवाल खड़े कर अड़ंगे लगाने की कोशिश की जा रही है। उमर खालिद के संदर्भ में ये समझा जाना चाहिए कि बेल के लिए न्याय व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया दी हुई है। न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी को दोषी सिर्फ सबूतों के आधार पर ही सिद्ध किया जा सकता है।

 फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का मतलब ये नहीं कि इससे किसी भी अपराध को करने या उसे बढ़ावा देनी की छूट मिल जाती है। राष्ट्रीय एकता को कुछ लोगों की विशेष सोच की कीमत पर बलिदान नहीं किया जा सकता है। कानून को अपना रास्ता अपनाना चाहिए। उमर खालिद भारत में नियम कानून के लिए अपवाद नहीं है।

उमर खालिद के समर्थन में उतरे लोगों को जवाब देने के लिए पूर्व न्यायधीशों द्वारा जारी किए गए बयान में जम्मू-कश्मीर व दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसी पटेल, मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के आर व्यास, राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अनिल दियो सिंह, सिक्किम हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस प्रमोद कोहली का नाम भी शामिल है। इनके अलावा 11 अन्य पूर्व न्यायाधीश ने भी इस बयान पर हस्ताक्षर किया है। इनके नाम नीचे सूची में लिखे हैं:

इससे पहले दिल्ली दंगों में पुलिस की जाँच पर सवाल उठाने वाले लोगों पर पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों ने भी खत लिख कर नाराजगी जाहिर की थी। अधिकारियों का मत था कि बाहरी दबाव बनाकर जाँच की प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली पुलिस ने 13 सितंबर 2020 को दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर दंगों का षड्यंत्र रचने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैरक़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। 

पुलिस ने उमर खालिद से लगभग 11 घंटे तक पूछताछ करने के बाद उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद ही सोशल मीडिया पर खालिद को रिहाई दिलवाने के लिए बकायादा अभियान चला दिया गया, जिसमें मीडिया गिरोह के लोगों से लेकर कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवि भी शामिल रहे।

उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद लिबरल गैंग ने शुरू किया प्रलाप

दिल्ली दंगे की साजिश में शामिल होने के आरोप में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को पुलिस ने रविवार यानि 13 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया। जैसे ही गिरफ्तारी की ख़बर सामने आई, वैसे ही लिबरल गैंग के तमाम लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रलाप शुरू कर दिया।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उमर खालिद पर गैर क़ानूनी गतिविधि (नियंत्रण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया था। वामपंथी बताने वाली स्वरा भास्कर ने यूएपीए को ही खारिज कर दिया। स्वरा के मुताबिक़ इस क़ानून को ख़त्म कर देना चाहिए, क्योंकि इसके तहत उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई है।


अभिनेता मोहम्मद ज़ीशान अयूब ने अपने ट्वीट में लिखा कि इस देश में अल्पसंख्यक होना किसी अपराध से कम न है। अगर कोई अहिंसा या संविधान की बात करता है तो उसे सूली पर चढ़ा दिया जाता है।


प्रशांत भूषण को भी खालिद की गिरफ्तारी से मिर्ची लगी है। उन्होंने कहा कि सीताराम येचुरी, योगेन्द्र यादव, जयंती घोष और अपूर्वानंद पर हुई कार्रवाई से एक बात साफ़ है कि दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच दुर्भावनापूर्ण तरीके से की जा रही है।


सामाजिक कार्यकर्ता और चुनावी विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने कहा कि उन्हें उमर खालिद की गिरफ्तारी की वजह से हैरानी है। इसके बाद योगेन्द्र यादव ने उमर खालिद को युवा, आदर्शवादी और हिंसा विरोधी भी बताया।


पत्रकार तवलीन सिंह ने ट्वीट कर संकेत दिए कि उमर की गिरफ्तारी इसलिए हुई है, क्योंकि वह मुस्लिम है। उन्होंने कहा कि कोई ऐसे हिन्दू के बारे में जानता है जिसे दिल्ली दंगे भड़काने के लिए गिरफ्तार किया गया हो।

 
Alt News के संस्थापक प्रतीक सिन्हा उमर खालिद की गिरफ्तारी से इतने निराश हुए कि यहाँ तक कह दिया कि भारत में लोकतंत्र जैसा महसूस ही नहीं होता है। उनके मुताबिक़ दिल्ली दंगों के मामले में जिस तरह की कार्रवाई हुई है उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे देश में लोकतंत्र ही ख़त्म हो गया है।


विवादित पत्रकार राणा अयूब जो हाल ही में कोरोना से ठीक हुई हैं उन्होंने भी उमर खालिद के समर्थन में एक ट्वीट किया।


वामपंथी मीडिया समूह द वायर के सह संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक़ अमित शाह ने लोकसभा में उमर खालिद को दिल्ली दंगे भड़काने का आरोपित बताया था। इसी वजह से उसकी गिरफ्तारी हुई।


जहां लिबरल गैंग उमर खालिद की गिरफ्तारी को गलत बताकर प्रलाप कर रहा है, वहीं दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने अपने बयान में कहा था कि उसे उमर खालिद ने ही खालिद सैफी से मिलवाया था। इसके बाद सभी ने मिल कर दंगों की योजना तैयार की थी।

दिल्ली दंगा : उमर खालिद और ताहिर हुसैन की मीटिंग करवाने वाला खालिद सैफी गिरफ्तार

Police Arrest Jamia Student In Connection With Delhi Riots
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एसआईटी (SIT) ने आज (जून 9, 2020) खालिद सैफी को गिरफ्तार किया है। खालिद सैफी को चांद बाग में हुई हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में अरेस्ट किया गया है। इससे पहले AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर हो चुकी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि खालिद सैफी ने ही दिल्ली दंगों से पहले उमर खालिद और ताहिर हुसैन की मीटिंग करवाई थी। ये मीटिंग 8 जनवरी को शाहीन बाग में हुई थी। इसमें उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।

मीटिंग में उमर खालिद ने कहा था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में होंगे तो कुछ बड़ा करना है। वित्तीय सहायता पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के लोग देंगे। बता दें कि खालिद सैफी यूनाइटेड अगेंस्ट हेट नाम का संगठन चलाता है। इसका जिक्र गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में भी किया हुआ है।
सैफी को इससे पहले 26 फरवरी को खुरेजी खास से गिरफ्तार किया गया था। मगर, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने खालिद सैफी को अपनी हिरासत में लिया है। साथ ही टाइम्स नाउ के अनुसार, पुलिस ने यह भी बताया है कि सैफी का नाम पहले से चार्जशीट में है।
चार्जशीट में सैफी पर आरोप है कि उसने प्रदर्शन में सबको इकट्ठा करने का काम किया था। इसके अलावा उमर खालिद और ताहिर हुसैन दोनों से अच्छे संबंध होने के कारण उसने दोनों की मीटिंग भी करवाई थी।
क्राइम ब्रांच द्वारा में खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसकी बहुत सी तस्वीरे घूम रही हैं। एक तस्वीर में वह मनीष सिसोदिया के साथ नजर आ रहा है। एक में रवीश कुमार के साथ और एक में कन्हैया कुमार के साथ। इसके अलावा कुछ अन्य तस्वीरें भी हैं, जिसमें वह अभिसार शर्मा, राजदीप सरदेसाई, आरफा खानुम जैसे मीडिया गिरोह के लोगों के साथ भी सेल्फी ले रहा है।
बीते 2 जून को इससे पहल दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में ताहिर को मुख्य आरोपित बनाया गया था। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था।

दिल्ली : हिन्दू विरोधी दंगा: कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI सहित कई अन्य संस्थाओं और ‘स्टूडेंट एक्टिविस्ट’ का हाथ

दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा , PFIइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों जैसे पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI), जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (JCC) पिंजरा तोड़ और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी ‘स्टूडेंट एक्टिविस्ट्स’ की भूमिका के लिए जाँच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा इस मामले के संबंध में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के व्हाट्सएप चैट, भाषणों और कथित तौर पर पीएफआई और विदेशों से प्राप्त धन की जाँच कर रही है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, 9 आरोपितों ने स्थानीय नेताओं से महिलाओं और बच्चों को जुटाने के लिए और “विरोध प्रदर्शन की व्यवस्था” पर भी चर्चा की थी। एक सूत्र पुलिस अधिकारी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “इन सभी को जोड़ने वाला एक सामान्य सूत्र है।”
सोमवार को एक ट्वीट में, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों से संबंधित मामलों की जाँच करते हुए अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता पर जोर दिया है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया है कि 9 लोगों की गिरफ्तारी सोच-विचार कर, तकनीकी और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर की गई थी। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया कि “निहित स्वार्थों” से प्रेरित दुर्भावनापूर्ण अभियान के बावजूद, निर्दोष पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

इससे पहले भी जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी के दो अन्य नेताओं, मीरान हैदर और सफ़ुरा ज़रगर के खिलाफ एक ही अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए जाने के बाद दोनों अब न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने एफ.आई.आर में यह दावा किया गया है कि सांप्रदायिक हिंसा में खालिद और अन्य लोगों द्वारा एक “पूर्व नियोजित साजिश” थी।
इन सभी ‘एक्टिविस्ट्स’ पर देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगा करने के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया है। एफ.आई.आर में कहा गया है कि उमर खालिद ने दो अलग-अलग स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिया था और भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झूठा प्रचार प्रसार करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने और सड़कों को जाम करने के लिए नागरिकों से अपील की थी। एफ.आई.आर में यह भी दावा किया गया है कि इस साजिश में कई घरों में आग्नेयास्त्र (firearms), पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें और पत्थर जमा किए गए थे।

दिल्ली दंगों की साजिश 17 फरवरी को अमरावती में रची गई थी

अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा
के भाषणों से पूर्व हिन्दू विरोधी नारे
कौन और क्यों लगाए जा रहे थे?
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज जिस लिबरल और मुसलमान को देखो दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के लिए कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा के भाषणों को बताकर, मुल्ला, मौलानाओं और शाहीन बाग़ में गूंज रहे "fuck hindutv", "हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी", "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" और "योगी तेरी कब्र खुदेगी" आदि के अलावा गलियों में छोटे-छोटे बच्चे चीखते नज़र आते थे "मै मोदी को मारूंगा" आदि पर ढक्कन डाल रहे हैं। अनुराग और परवेश के भाषणों के बाद से "fuck hindutv", "हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी", "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" और "योगी तेरी कब्र खुदेगी" आदि के अलावा गलियों में छोटे-छोटे बच्चे चीखते नज़र आते थे "मै मोदी को मारूंगा" पर ही लगाम लगनी शुरू हो गयी थी। वैसे तो जिस दिन शाहीन बाग़ में जमावड़ा शुरू हुआ था, दंगे की नींव तो उसी दिन रख दी गयी थी। 
तभी से देश को इन नागरिकता संशोधक कानून के विरोधियों से सतर्क रहने का प्रयत्न किया जा रहा था। लेकिन जनता विरोध को समर्थन देने वाली पार्टियों के हिन्दुओं का गलत इस्तेमाल होने से शेष हिन्दू भ्रमित होता रहा।    
उमर खालिद
उमर खालिद जैसे कई अन्य लोगों के भड़काऊ भाषण बताते हैं
कि दंगों की पूरी प्लानिंग पहले से चल रही थी
क्या सीएए विरोधियों ने दिल्ली हिंसा की साजिश पहले ही रच ली थी? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में देश में बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई थी? बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद का एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया है कि हिंसा से पहले लोगों को भड़काने का काम किया गया। दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता बग्गा ने ट्वीट किया है कि जिहादी ताकतों द्वारा ये साजिश पहले ही रच दी गई थी कि जिस दिन डोनाल्ड ट्रंप भारत मे आएंगे उस दिन टुकड़े-टुकड़े गैंग सड़को पर उतरेगा और देश को बदनाम करने की कोशिश करेगा । 17 फरबरी का उमर खालिद का ये भाषण उसी का सबूत है।
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों का सबसे भीषण रूप 24-25 फरवरी को देखने को मिला। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का कहर बरपा। कई हिन्दुओं की दुकानें फूँक दी गईं, कईयों के घर जला डाले गए और कई मारे भी गए। हिंसा भड़कने के बाद वामपंथियों के गिरोह विशेष ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर आरोप लगाने शुरू कर दिए, जिन्होंने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर बैठे उपद्रवियों को हटाने की माँग की थी अथवा विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। कपिल शर्मा की आड़ में वारिस पठन, शरजील इमाम, मोहम्मद शाहरुख़, ताहिर हुसैन और हाजी युनुस जैसों की करतूतों को ढका गया।
इन दंगों को भड़काने के लिए पहले से साजिश रची जा रही थी। जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद के एक भाषण का विडियो आया हैं, जो दंगों से पहले का है। ये विडियो यूट्यूब पर 17 फरवरी को अपलोड हुआ था। उस समय देश की जनता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे को लेकर उत्साहित थी। उमर खालिद द्वारा महाराष्ट्र के अमरावती में भाषण दिया गया था। अगर आप इसे सुनेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के समय ही दंगे कराने की योजना थी ताकि इंटरनेशनल मीडिया का अटेंशन लिया जाए और प्रशासन को परेशान किया जाए।


इस भाषण में उमर खालिद कहता दिख रहा है कि गुजरात में झुग्गी-झोपड़ियों को छिपाया जा रहा है ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति ये सब देख न लें। इस विडियो में लोगों को भड़काते हुए जेएनयू का छात्र नेता उमर खालिद कहता है:
“हम वादा करते हैं। 24 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रम्प भारत आएँगे तो हम उनको बताएँगे कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री और यहाँ की सरकार देश को बाँटने का काम कर रही है और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के उसूलों की धज्जियाँ उड़ा रही है। हम उन्हें बताएँगे कि हिंदुस्तान की जनता यहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही है। ये लड़ाई लम्बी है, कभी मायूस मत होइएगा। 50 दिनों में हमने जज्बा पाया है। पिछले 7 साल से हिंदुस्तान के मुसलमानों के ऊपर काफ़ी जुल्म किए गए हैं। मॉब-लिंचिंग की घटनाएँ आम हो गई हैं। तब हमें डर लगता था, हम सड़कों पर निकल कर नहीं आते थे। अयोध्या जजमेंट और अनुच्छेद 370 हटाने का भी विरोध नहीं हुआ तो ये अहंकारी बन गए।”
अवलोकन करें:-




इस पूरे भाषण में उमर खालिद ने लोगों से आह्वान किया कि वो कुछ ऐसा करेंगें, जिससे डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ये लगे कि देश की जनता यहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ ‘लड़ रही है।’ ये उमर खालिद का अकेला विडियो नहीं है, जिससे ये चीजें साफ़ हुई हैं। ऐसे कई इस्लामी नेताओं और वामपंथियों के जहरीले भाषणों से पता चलता है कि वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करना चाहते थे, जिसके परिणामस्वरूप कई जानें गईं।