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मध्य प्रदेश : चुनाव हारे दिग्विजय, सिर मुंडवाना पड़ा पूर्व सरपंच को ; मोदी के PM बनने पर सिर मुंडवाने वाले AAP नेता सोमनाथ भारती ने ले लिया U-turn

पूर्व सरपंच ने दिग्विजय सिंह को लेकर लगाया था शर्त, कराना पड़ा मुंडन
लोकसभा चुनाव 2024 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की दुर्गति हुई है। भाजपा ने यहाँ क्लीन स्वीप किया और 29 में से 29 सीटें अपने नाम की। यहाँ तक कि जो छिंदवाड़ा पिछले 5 दशक से कमलनाथ का गढ़ बना हुआ था, वहाँ भी कांग्रेस को हार मिली। वहीं राजगढ़ से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार दिग्विजय सिंह भी हार गए। दिग्विजय सिंह 10 वर्षों तक राज्य के CM रहे हैं। रोचक खबर ये है कि दिग्विजय सिंह की हार के कारण एक सरपंच को मुंडन कराना पड़ा।

ध्यान हो, आम आदमी पार्टी के सोम नाथ भारती ने नरेंद्र मोदी के बनने पर सिर मुंडवाने की बात कही थी, लेकिन अपने आका अरविन्द केजरीवाल की तरह U-Turn ले लिया। मर्दों की बात मध्य प्रदेश के पूर्व सरपंच ने की है, जो कहा वह किया। 

राजगढ़ से दिग्विजय सिंह को 6.12 लाख वोट मिले, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रोडमल नागर को 7.58 लाख मत प्राप्त हुए। इस तरह से दिग्विजय सिंह को 1.46 लाख वोटों के अंतर से हार मिली। रोडमल नागर लगातार तीसरी बार सांसद बने हैं, उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई है। दिग्विजय सिंह को लेकर उनके समर्थक एकदम आश्वस्त नज़र आ रहे थे कि उनकी जीत होनी है। बैलास पंचायत के पूर्व सरपंच करण सिंह पँवार ने तो शर्त तक लगा ली थी।

पँवार ने शर्त लगाई थी कि दिग्विजय सिंह सिंह अगर चुनाव है गए तो वो अपने सिर का मुंडन करा लेंगे। वहीं जिससे उन्होंने शर्त लगाई थी, उस ग्रामीण ने कहा था कि अगर रोडमल नागर की हार हो जाती है तो वो हमेशा के लिए गाँव छोड़ कर चला जाएगा। सब पूर्व सरपंच को हार के बाद पूरे गाँव के सामने अपना सिर मुँड़वाना पड़ा। माता मंदिर पर उनके मुंडन करने का वीडियो सोशल मीडिया में भी मजाकिया चर्चा का विषय बन रहा है।

जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश में भाजपा 62 से सीधे 33 पर आ गई, वहीं मध्य प्रदेश ने उसकी लाज रखते हुए पूरी सीटें भगवा पार्टी की झोली में डाल दी। वहीं मध्य प्रदेश में एकमात्र सीट छिंदवाड़ा 2019 के लोकसभा सीट में कांग्रेस के खाते में गई थी, अबकी उनका गढ़ भी ढह गया। ग्वालियर से ज्योतिरादित्य सिंधिया और विदिशा से शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री भी बनने जा रहे हैं। वहीं इंदौर से शंकर लालवानी ने ने 10 लाख से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की।

मध्य प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर में चले लात-जूते, दिग्विजय सिंह को गाली: कमलनाथ और दिग्गी राजा के समर्थकों में मारपीट, वीडियो वायरल

                                                                                             साभार : X_narendrasaluja
कांग्रेस युवराज राहुल गाँधी जो सियासत की आड़ में मौहब्बत की दुकान खोलकर न्याय यात्रा पर भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की उनकी अपनी ही पार्टी में नफरत और अन्याय की भरमार है। एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के अस्तित्व को बचाने गठबंधन करते फिर रहे हैं, परन्तु अब गठबंधन में सम्मिलित पार्टियां भी अलग होनी शुरू होनी हो चुकी हैं। वास्तव यह गठबंधन मोदी को हराने नहीं बल्कि कांग्रेस अपने वजूद को बनाये रखने के लिए सारी कवायत कर रही है, क्योकि कांग्रेस का भविष्य अति अंधकारमय होने जा रहा है, उसका मूल कारण कोई और नहीं बल्कि परिवार और परिवार भक्ति है। 

मध्य प्रदेश के भोपाल में कांग्रेस कार्यालय में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। एक गुट दिग्विजय सिंह का समर्थन करता है, जबकि दूसरा गुट कमलनाथ का समर्थन करता है। दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। झड़प के दौरान दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे को धक्का-मुक्की की और गालियाँ दीं। कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ भी फेंक दीं। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

घटना के अनुसार, राज्य कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के नेता एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने लगे। झगड़े के दौरान एक नेता ने दूसरे नेता पर कुर्सियाँ फेंकी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार (29 जनवरी, 2024) को हुई। भोपाल के कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान और अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के बीच झड़प हो गई। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गलियाँ बकी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

इस दौरान मौके पर मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों नेताओं को अलग किया। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसूचित जाति विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को कमलनाथ समर्थक बताया जाता है वहीं कांग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान को दिग्विजय समर्थक माना जाता है। दोनों के बीच दिग्विजय सिंह को गाली देने को लेकर हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुँच गया।

बीजेपी नेता नरेंद्र सलूजा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कमलनाथ समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर PCC में जमकर चले लात-ठूँसे कुर्सियाँ चली, जमकर एक दूसरे को गालियाँ बकी गईं। बीच-बचाव करने आए कमलनाथ समर्थक एक नेता को भी लात-घूसे पड़े।”

ये घटना मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इस घटना के बाद कांग्रेस को अपने नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अगर कांग्रेस इस घटना को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इससे पार्टी को चुनावों में नुकसान हो सकता है।

‘राहुल गाँधी बड़े नेता नहीं’, मीडिया उन्हें इतना भाव क्यों दे : दिग्विजय सिंह के भाई ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की बताई ‘औकात’,

कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह और राहुल गाँधी (फोटो साभार: नई दुनिया/हिंदुस्तान)
कांग्रेस के नेता हैं लक्ष्मण सिंह। उनके भाई दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी। राहुल गाँधी के वो सबसे नजदीकी सलाहकारों में से हैं। राहुल गाँधी ही नहीं, पूरी गाँधी फैमिली उन्हें खूब भाव देती है। लेकिन दिग्विजय सिंह के विधायक रह चुके भाई लक्ष्मण सिंह राहुल गाँधी को कोई भाव देने के मूड में नहीं दिखते। उनका कहना है- “राहुल गाँधी कांग्रेस के एक सामान्य कार्यकर्ता हैं, उन्हें इतना भाव मीडिया क्यों दे? मैं तो उन्हें बड़ा नेता मानता ही नहीं, आप भी मत मानिए।”

लक्ष्मण सिंह अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं, हालाँकि अपने बयानों की वजह से वो विवादों में भी रहे हैं। इस बार उन्होंने मीडिया से बातचीत में राहुल गाँधी के लिए ऐसी बात कह दी, जो शायद ही किसी कांग्रेसी को पसंद आए। लक्ष्मण सिंह ने कहा, “राहुल गाँधी न तो पार्टी के अध्यक्ष हैं और न ही कोई बड़े नेता। वो सामान्य सांसद हैं, जैसे पार्टी के दूसरे और भी सांसद हैं।”

लक्ष्मण सिंह पहले विधायक थे लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में चचौरी में इस बार उन्हें भाजपा प्रत्याशी प्रियंका से हारना पड़ा। इसके बाद वह अब चर्चा में आए। उन्होंने रविवार (31 दिसंबर 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मीडिया ने राहुल गाँधी की उन चिंताओं (जिसमें राहुल संसद में बोलते समय कैमरा घुमा दिए जाने का आरोप लगाते हैं) पर सवाल पूछा था, साथ ही जन्म के आधार पर प्रिविलेज्ड होने के मामले पर भी सवाल पूछा था। इस सवाल के जवाब में लक्ष्मण सिंह ने अपने दिल की बात कही।

लक्ष्मण सिंह बोले, “राहुल गाँधी एक सांसद हैं। वो अध्यक्ष नहीं हैं। और एक कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा राहुल गाँधी कुछ नहीं हैं। राहुल गाँधी को इतना हाईलाइट आप लोग भी इतना मत करिए, न हम करें। राहुल गाँधी एक सांसद हैं, जैसे अन्य सांसद होते हैं। कोई जन्म से नहीं हो जाता, अपने कर्म से होता है। राहुल गाँधी को आप इतना बड़ा नेता मत मानिए, मैं तो नहीं मानता हूँ। साधारण सांसद हैं, उनको हाईलाइट करें या न करें, मुझे कोई समस्या नहीं है।”

दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह अक्सर अपनी अलग राय के लिए जाने जाते हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की बहुत याद आती है। अगर वो पार्टी में होते, तो पार्टी की ये हालत नहीं होती। इसके अलावा इससे पहले वो ये भी कह चुके हैं कि किसानों की कर्जमाफी संभव नहीं है, राहुल गाँधी को वादा ही नहीं करना चाहिए था।

मध्य प्रदेश : कमल नाथ और दिग्विजय सिंह का कांग्रेसियों ने ही फूँका पुतला; पूर्व मुख्यमंत्री के बँगले के सामने ही कार्यकर्ताओं ने कराया मुंडन

                                                                                                            साभार- दैनिक जागरण और NBT
कांग्रेस में टिकट वितरण से दुखी कई नेताओं ने शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को भोपाल में प्रदेश 
कांग्रेस कार्यालय और कमल नाथ के बंगले के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के बंगले के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं बोंडगाँव में कमलनाथ का पुतला दहन भी किया गया।

दरअसल, जब से कांग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची में 88 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है, उसके बाद से ही कांग्रेसी भड़के हुए हैं। उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में बैरसिया से उम्मीदवार बनाई गईं जयश्री हरिकरण के विरोध में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के बंगले के सामने मुंडन कराकर विरोध जताया। साथ ही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का पुतला भी फूँका।

मध्य प्रदेश में उम्मीदवारों की सूचि से कांग्रेस नेता ही खुश नजर नहीं आ रहे। विधानसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची आने के बाद भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय के बाहर भड़का विरोध अब कमल नाथ के बंगले तक पहुँच गया है। बैरसिया से आए कार्यकर्ताओं ने बंगले के गेट पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बैरसिया के प्रत्याशी का टिकट बदलने की माँग की। वहीं पीसीसी के सामने दिग्विजय सिंह का पुतला भी जलाया गया।

मौके पर विरोध प्रदर्शन को इकट्ठे कांग्रेस कार्यकर्ता बंगले में घुसना चाह रहे थे, लेकिन वहाँ मौजूद गार्डों ने उन्हें रोक दिया। हालाँकि, प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह के समर्थक बताए जा रहे हैं। और यह आरोप लगाया जा रहा है कि टिकट वितरण में कमल नाथ ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवा दिया। इसी बात से कार्यकर्ता नाराज हैं। वहीं, दतिया जिले की सेवड़ा विधानसभा से आए नेताओं ने भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का पुतला फूँका। 

वहीं विधानसभा क्षेत्र हरदा-खिरकिया क्रमांक 135 में कांग्रेस द्वारा डॅा. रामकिशोर दोगने को प्रत्याशी घोषित करने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। इस मामले में कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने शुक्रवार(20 अक्टूबर, 2023) को अपने गृह ग्राम बोंडगाँव में कमल नाथ और हरदा प्रत्याशी डॅा. दोगने का पुतला दहन किया।

कांग्रेस नेता मंजीत सिंह ने राजपूत समाज की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हरदा विधानसभा क्षेत्र का घोषित प्रत्याशी बदलने की माँग की है। बता दें कि कांग्रेस नेता मंजीत सिंह बघेल ने हरदा विधानसभा क्षेत्र से राजपूत समाज के व्यक्ति को टिकट देने की माँग की थी।

इस पूरे मामले में राजपूत समाज के कई नेताओं ने कहा कि राजपूत समाज के नेता को टिकट देने की माँग वाली फेसबुक पोस्ट मंजीत सिंह की व्यक्तिगत सोच है, समाज का उस पोस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ तक कि राजपूत समाज का राजनीतिक पार्टियों से कोई लेना-देना नहीं है।

मेरे लोगों को टिकट नहीं दिया, कांग्रेस छोड़ रहा हूँ: दिग्विजय सिंह का ‘इस्तीफा’ वायरल

दिग्विजय सिंह का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा?
मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नवरात्र के पहले दिन कांग्रेस ने उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इसमें 144 प्रत्‍याशियों के नाम है। हालाँकि, इस लिस्‍ट के आने के कुछ ही देर बाद तब हंगामा मच गया जब पूर्व मुख्‍यमंत्री व राज्‍यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का इस्‍तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जिसके बाद सोशल पर यह प्रश्न किया जाने लगा कि क्या मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया? ऐसा इसलिए पूछा जा रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें इस्तीफे की बात थी, हालाँकि, दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफे की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

सोशल मीडिया एक्स पर कांग्रेस प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे से जुड़ा हुआ दिग्विजय सिंह का एक पत्र वायरल हुआ।

वायरल हुए लेटर में लिखा हुआ है, “अपने पाँच दशक के राजनीतिक सफर में कई अनुभव मुझे कांग्रेस में रहते हुए मिले। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी में रहते हुए तय किया। पार्टी ने मुझे राष्‍ट्रीय महासचिव से लेकर राज्‍यसभा सदस्य जैसे महत्‍वपूर्ण पद तक पहुँचाने का काम किया, जिसके लिए मैं आजीवन आभारी रहूँगा, लेकिन गत कुछ महीनों से शीर्ष नेतृत्‍व में उदासीनता देखकर मैं आहत हूँ। मध्‍य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ता केंद्र‍ित दल न होकर अब विशेष नेता केंद्रित हो गई है। जिसकी वजह से खुद को असहज पा रहा हूँ।

                                                       दिग्विजय सिंह का वायरल हुआ पत्र

मध्‍य प्रदेश चुनाव को लेकर प्रत्‍याशियों के चयन में मेरे द्वारा दिए गए नामों पर विचार नहीं किया गया है। निष्‍ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं दिए जाने से मेरे स्‍वाभिमान को ठेस पहुँची है। मैं अब ऐसे पड़ाव पर पहुँच गया हूँ जहाँ मुझे लगता है कि मैं अब ऐसे अन्यायपूर्ण माहौल में नही रह सकता।

मैं उन सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूँ जिन्‍होंने वर्षों से मेरी विभिन्‍न पार्टी भूमिकाओं में मेरा समर्थन किया है। भारी मन से मैं पार्टी के साथ अपना जुड़ाव खत्‍म करने के अपने फैसले की घोषणा करता हूँ। कांग्रेस की प्राथमिक सदस्‍यता समेत सभी पद से इस्‍तीफा देता हूँ। इसे स्‍वीकार करें।”

हालाँकि, इस पत्र के वायरल होने के कुछ ही देर बाद उन्होंने इस पत्र के फेक होने का दावा करते हुए कांग्रेस से इस्तीफे की बात को झूठ करार दिया।

इस्‍तीफे को लेकर क्‍या बोले दिग्विजय सिंह

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने इस्तीफे की बात को ख़ारिज करते हुए कहा कि भाजपा झूठ बोलने में माहिर है। मैंने 1971 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। पद के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा से प्रभावित हो कर जुड़ा था और जीवन की आखिरी साँस तक कांग्रेस में रहूँगा। इस झूठ की मैं पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहा हूँ।
कांग्रेस नेता ने इस मामले में डीजीपी मध्य प्रदेश को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने को कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी शिकायत पोस्ट करते हुए लिखा,”महोदय क्या आप इन झूठे लोगों पर FIR दर्ज़ करेंगे?”

"हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" की शिकार प्रज्ञा ठाकुर चुनावी मैदान में

Sadhvi Pragya to contest from bhopalमालेगांव बम धमाके में आरोपी रही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार होंगी। इससे पहले साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल में बीजेपी कार्यालय पहुंचीं और पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान, प्रभात झा और रामलाल से बंद कमरे में मुलाकात की। इसके बाद पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वो भाजपा की प्राथमिक सदस्यता अप्रैल 16 को ही ले चुकी हैं। अब इस भाजपा की तरफ से उनकी उम्मीदवारी का औपचारिक ऐलान होना बाकी है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर संघ ने भी भाजपा पर दबाव बनाया है। वो एबीवीपी और दुर्गावाहिनी जैसे भाजपा के अनुषांगिक संगठनों से जुड़ी रह चुकी हैं और मालेगांव धमाके में नाम आने के बाद कई सालों तक जेल में बंद रहीं थी।


Madhya Pradesh: Sadhvi Pragya Singh Thakur has arrived at the BJP office in Bhopal and is currently meeting senior BJP leaders Shivraj Singh Chouhan, Ramlal, and Prabhat Jha.
साध्वी प्रज्ञा के बीजेपी के जुड़ने और भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें काफी समय से लगाई जा रही थीं, जिस पर अप्रैल 17 को अंतत: मुहर लग गई। साध्‍वी प्रज्ञा मालेगांव विस्‍फोट मामले में आरोपी रही हैं, जिस मामले में वह नौ साल तक जेल में भी रहीं। हालांकि कोर्ट ने बाद में उन्‍हें बरी कर दिया। भोपाल से दिग्विजय सिंह को मैदान में उतारने के कांग्रेस के ऐलान के बाद से ही साध्‍वी प्रज्ञा कई मौकों पर 'दिग्‍गी राजा' को चुनौती देने की इच्‍छा जता चुकी थीं। इस बारे में पूछे जाने पर उन्‍होंने यह भी कहा था कि वह 'धर्म-युद्ध' के लिए तैयार हैं।
इस बीच साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अप्रैल 17 को चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर साफ कहा था कि अगर भाजपा उन्हें भोपाल से टिकट देगी तो वो चुनाव लड़ने को तैयार हैं। वहीं दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा था कि दिग्विजय सिंह न तो मेरे लिए और न ही भाजपा के लिए चुनौती हैं। धर्म पर चलने वाले लोग, राष्ट्र के लिए जीने-मरने वाले लोग जहां खड़े होते हैं। वहां अधर्म का कोई अस्तित्व नहीं है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने दिग्विजय सिंह पर उन्हें मालेगांव धमाके में फंसाने का आरोप भी लगाया। 
प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए कहा कि आज मुझे भारतीय जनता पार्टी के द्वारा माननीय शिवराज सिंह चौहान जी, प्रदेश अध्यक्ष जी, प्रभात जी और यहां के सभी पार्टी पदाधिकारियों ने मुझे जिम्मेदारी दी है कि मैं लोकसभा की प्रत्याशी बनूं। लेकिन आप भी जानते हैं मेरा प्रत्यक्ष तौर पर राजनीति में अनुभव नहीं है लेकिन एक बहुत बड़ी शक्ति है हमारे पास, वह है माननीय शिवराज जी 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप यहां रहे। उन्होंने जो प्रदेश के लिए किया है। उससे वह जनता के ध्यान में पुन: आ जाएगा। जनता ये समझ जाएगी जो कुछ भी अभी दूसरे लोगों का छलावा है। किन्तु यहां जो किया गया है वही बोला जाएगा।
इससे पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने कहा, मित्रों इंतजार की घड़ी समाप्त हुई। काफी दिनों से आप लोगों के बीच उत्सुकता थी भोपाल से बीजेपी के उम्मीदवार कौन होंगे? उसके बाद उन्होंने कहा कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जी भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार होंगी। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह का जन्म देश की सेवा के लिए हुआ है। देश की सुरक्षा के लिए हुआ है और जनता की सेवा के लिए हुआ है। अब इस सेवा में वह राजनीति के माध्यम से भी अपने जीवन को लगाएंगी।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के भोपाल से लोकसभा उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं साध्वी प्रज्ञा सिंह का भोपाल में स्वागत करता हूं। भोपाल में आपको शांत शिक्षित और सभ्य वातावरण पसंद आएगा। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल संसदीय सीट से लड़ने के लिए बीजेपी ने कट्टर हिन्दुत्वादी नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम औपचारिक घोषणा बुधवार को की गई।