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कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने दिखाई हिंदू घृणा, कहा: महाकुंभ में बहुत गंदगी होती है, इससे बीमारियाँ फैलेंगी; लेकिन हज में मौतें कैसे हुई यह भी बता दो सनातन विरोधियों; एक्स मुस्लिम की संख्या क्यों बढ़ रही है? देखिए वीडियो


कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले को ‘गंदा’ बताया है। उन्होंने कहा कि 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला यह महाकुंभ बीमारियाँ बढ़ाता है।

हुसैन दलवई ने कहा, “महाकुंभ में बहुत से लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं। मेरे ख्याल से वहाँ बहुत गंदगी होती होगी। वहाँ जिस तरह से लोग रह रहे हैं ऐसे तो बीमारियाँ फैल जाएँगी।”

आगे वह बोले- “हज के लिए मैं दो बार गया था। जैसा वहाँ इंतजाम होता है वैसा यहाँ भी होना चाहिए। वहाँ पूरी दुनिया से लोग आते हैं। लाखों लोग आते हैं। जरा भी गड़बड़ी नहीं होती। कुंभ मेला करना है तो वैसे करो न।”

लेकिन यह बताना भूल गए कि पिछले साल हुए हज में कितने हाजियों की मौत हुई थी? किस वजह से हुई थी मौतें? सनातन पर कीजड़ उछालने से पहले अपने गिरहवाँ में झांकना सीखो। दूसरे, सनातन के खिलाफ जहर उगलने से पहले अनवर शेख की किताबें या अली सीना की Understand Mohammad And Muslims भी पढ़ लिया करो। 

अली सीना का दावा है कि इस किताब को पढ़ने के बाद मुस्लिम इस्लाम छोड़ रहे हैं। लेकिन लगता है लेखक अनवर शेख की बहुत ज्यादा प्रभावित होकर किताब लिखी है। अनवर शेख की किताबों का ही इस किताब में झलक मिलती है। रुश्दी के खिलाफ फतवा देने वाले खोमैनी के ही जीवन में अनवर शेख किताबें लिख रहे थे। सलमान रुश्दी और तस्लीमा के खिलाफ फतवा देने वाले अनवर शेख(स्व) और अली सीना पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्यों?   

दूसरे, इस वीडियो पर भी कुछ बोलोगे? 

       

वह कहते हैं, “मैं उमराह पर गया था, हज को गया था। वैसा इंतजाम करिए। यहाँ अलग-अलग बीमारी के लोग होते हैं, उनकी जाँच करिए। वो तंदरुस्त लोगों के साथ स्नान करते हैं तो उनको भी दिक्कत होगी न। इतने बड़े पैमाने पर लोग नहाएँगे तो कैसा चलेगा।”

‘शायद शिव जी का भी खतना…’ : महादेव का अपमान करने वाले DU प्रोफेसर को अदालत से झटका, FIR रद्द करने से किया साफ मना

शिवलिंग पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले DU प्रोफेसर की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में ख़ारिज हुई (साभार- organiser.org)
ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक प्रोफेसर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर रतन लाल पर दर्ज मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया है। यह मुकदमा हिन्दुओं की भावनाओं को ठुकराने के लिए दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि रतन लाल की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ा था। यह आदेश मंगलवार(17 दिसंबर, 2024) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रधारी सिंह की अदालत में हुई। रतन लाल की तरफ से पेश वकीलों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित तमाम दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस आधार पर रतन लाल के खिलाफ FIR को रद्द करने की माँग की। हालाँकि कोर्ट पर इन दलीलों का कोई असर नहीं पड़ा।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि रतन लाल द्वारा पेश की गई दलीलों में वो तथ्य नहीं थे जिसके आधार पर आरोपित के खिलाफ FIR को रद्द किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रोफेसर रतन लाल का इरादा एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का ही था। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर जैसे पद वाले व्यक्ति की यह टिप्पणियाँ अशोभनीय हैं।

पूरा मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी में रतन लाल इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मई 2022 में जब ज्ञानवापी के मुकदमे में हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने की बात कही तो तब रतन लाल ने सोशल मीडिया के अपने X और फेसबुक हैंडल पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। 14 मई, 2022 को डाली गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यदि यह शिवलिंग हैं तो लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था।” इसी पोस्ट में रतन लाल ने हंसी वाली इमोजी भी डाली थी।
प्रोफेसर रतन लाल के इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके खिलाफ एक्शन की माँग जोर पकड़ने लगी थी। 18 मई, 2022 को दिल्ली के उत्तरी मौरिस नगर साइबर थाने में रतन लाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में यह शिकायत शिवाल भल्ला नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 153- A और 295- A के तहत FIR दर्ज कर ली थी।
20 मई, 2022 को पुलिस ने रतन लाल को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन 21 मई को प्रोफेसर रतन लाल जमानत पा गए। अब रतन लाल इस केस को खत्म करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि यहाँ उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई है।