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कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने दिखाई हिंदू घृणा, कहा: महाकुंभ में बहुत गंदगी होती है, इससे बीमारियाँ फैलेंगी; लेकिन हज में मौतें कैसे हुई यह भी बता दो सनातन विरोधियों; एक्स मुस्लिम की संख्या क्यों बढ़ रही है? देखिए वीडियो


कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले को ‘गंदा’ बताया है। उन्होंने कहा कि 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला यह महाकुंभ बीमारियाँ बढ़ाता है।

हुसैन दलवई ने कहा, “महाकुंभ में बहुत से लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं। मेरे ख्याल से वहाँ बहुत गंदगी होती होगी। वहाँ जिस तरह से लोग रह रहे हैं ऐसे तो बीमारियाँ फैल जाएँगी।”

आगे वह बोले- “हज के लिए मैं दो बार गया था। जैसा वहाँ इंतजाम होता है वैसा यहाँ भी होना चाहिए। वहाँ पूरी दुनिया से लोग आते हैं। लाखों लोग आते हैं। जरा भी गड़बड़ी नहीं होती। कुंभ मेला करना है तो वैसे करो न।”

लेकिन यह बताना भूल गए कि पिछले साल हुए हज में कितने हाजियों की मौत हुई थी? किस वजह से हुई थी मौतें? सनातन पर कीजड़ उछालने से पहले अपने गिरहवाँ में झांकना सीखो। दूसरे, सनातन के खिलाफ जहर उगलने से पहले अनवर शेख की किताबें या अली सीना की Understand Mohammad And Muslims भी पढ़ लिया करो। 

अली सीना का दावा है कि इस किताब को पढ़ने के बाद मुस्लिम इस्लाम छोड़ रहे हैं। लेकिन लगता है लेखक अनवर शेख की बहुत ज्यादा प्रभावित होकर किताब लिखी है। अनवर शेख की किताबों का ही इस किताब में झलक मिलती है। रुश्दी के खिलाफ फतवा देने वाले खोमैनी के ही जीवन में अनवर शेख किताबें लिख रहे थे। सलमान रुश्दी और तस्लीमा के खिलाफ फतवा देने वाले अनवर शेख(स्व) और अली सीना पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्यों?   

दूसरे, इस वीडियो पर भी कुछ बोलोगे? 

       

वह कहते हैं, “मैं उमराह पर गया था, हज को गया था। वैसा इंतजाम करिए। यहाँ अलग-अलग बीमारी के लोग होते हैं, उनकी जाँच करिए। वो तंदरुस्त लोगों के साथ स्नान करते हैं तो उनको भी दिक्कत होगी न। इतने बड़े पैमाने पर लोग नहाएँगे तो कैसा चलेगा।”

केरल कांग्रेस अध्यक्ष सुधाकरन द्वारा हिन्दू धर्म का अपमान : ‘राम को समुद्र में धकेल कर सीता के साथ जाना चाहते थे लक्ष्मण’

सुधाकरन ने किया भगवान राम, माँ सीता और लक्ष्मण का अपमान (फोटो साभार - डेक्कन हेराल्ड)
कोट पर जनेऊ पहनकर चुनावी हिन्दू बनकर जनता को भ्रमित करने वाली कांग्रेस का अनेकों बार हिन्दू विरोधी चेहरा उजागर हो चूका है, लेकिन फिर भी शिक्षित हिन्दू भी अशिक्षितों की तरह कांग्रेस का दामन पकडे हुए हैं। यूपीए के कार्यकाल में कांग्रेस ने श्रीराम को काल्पनिक बता दिया था, राम के जन्म के सबूत मांग रहे थे, अयोध्या में हुई खुदाई में मिले मंदिर के सबूतों को कोर्ट से छुपा लेने वाली कांग्रेस के नेता हिंदू देवी देवताओं का उपहास उड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। इसी कड़ी में एक नया नाम के सुधाकरन का जुड़ गया है। वैसे तो केरल प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुधाकरन अक्‍सर अपने अजीबोगरीब बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस बार तो उन्होंने भगवान श्रीराम का अपमान किया है। उन्होंने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में न सिर्फ भगवान राम, माँ सीता और लक्ष्‍मण का अपमान किया, बल्कि रामायण में वर्णित तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

दरअसल, उन्‍होंने ‘द न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस’ अखबार को एक साक्षात्कार (16 अक्टूबर, 2022) को दिया था। एक सवाल में उनसे पूछा गया था कि दक्षिण केरल और मालाबार के नेता कैसे अलग हैं।

उन्‍होंने कहा, “हाँ ऐतिहासिक रूप से अंतर है। मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ। भगवान राम रावण का वध करने के बाद अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्‍मण के साथ पुष्‍पक विमान से आ रहे थे। जब विमान केरल के दक्षिणी क्षेत्र से गुजर रहा था, लक्ष्मण के मन में राम को समुद्र में धकेलने और सीता के साथ जाने का विचार आया। लेकिन जैसे ही वह थिरुसुर पहुँचे, उनका विचार बदल गया। इस पर भगवान राम ने उनके कंधे पर थपथपाते हुए कहा था कि उन्होंने लक्ष्मण के मन को पढ़ लिया था और यह उनकी (लक्ष्मण) नहीं, बल्कि उस भूमि (दक्षिणी केरल) की गलती थी।”

उनके बयान की व्‍यापक रूप से आलोचना हुई और अंत में उन्हें अपना बयान वापस लेना पड़ा। ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुधाकरन ने बयान वापस लेते हुए कहा कि यह मालाबार क्षेत्र में एक प्रचलित कहानी है, जिसे सुनकर वह बड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैंने जो कहानी सुनी थी, उसी को सुनाया था। मेरा मकसद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं था।”

वहीं भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने आज (18 अक्‍टूबर, 2022) कांग्रेस के हिंदू विरोधी मानसिकता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “एक राज्य (केरल) जहाँ से कांग्रेस  के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सांसद है और अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के लिए अधिकतम समय (18 दिन) बिताया है, वहाँ के प्रदेश अध्यक्ष ने भगवान राम, माँ सीता और लक्ष्‍मण का अपमान किया है। ये किस तरह के हिन्दुओं से नफरत करने वाले लोग कॉन्‍ग्रेस के शीर्ष पदों पर बैठे हैं, या यही उनकी योग्यता है।”

अपने इसी इंटरव्‍यू में सुधाकरण ने कांग्रेस अध्‍यक्ष पद के कैंडिडेट शशि थरूर को एक ट्रेनी बताया था और कहा था कि वह कांग्रेस की अगुवाई नहीं कर सकते।

महिला विरोधी कांग्रेस : सांसद अधीर रंजन चौधरी ने आदिवासी महिला राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ बताकर किया अपमान


कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सत्याग्रह के नाम पर जिस तरह सड़कों पर ड्रामा कर रहे हैं, वो किसी भी सभ्य लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के सामने हर कोई बराबर है। लेकिन कांग्रेस सोनिया गांधी और उनके बच्चों को संविधान और देश से ऊपर समझते हैं। कांग्रेसियों की माने तो वे किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। ईडी की पूछताछ को आलाकमान की शान में गुस्ताखी मान रहे हैं। इसलिए कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। कांग्रेस नेता अजय कुमार के बाद अब कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अपमान किया है। दरअसल, मोदी-योगी विरोध में कांग्रेसी अपना मानसिक संतुलन ही खोते जा रहे हैं।  

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के लिए राष्ट्रपति नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द इस्तेमाल करते सुना जा सकता है। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हिन्दुस्तान की राष्ट्रपति जी सबके लिए हैं। राष्ट्रपति जी नहीं राष्ट्रपत्नी जी, हिन्दुस्तान की राष्ट्रपत्नी जी सबके लिए हैं। हमारे लिए क्यों नहीं।” जिस तरह ‘राष्ट्रपत्नी’ शब्द पर जोर दिया है, उससे लगता है कि कांग्रेस एक गरीब आदिवासी महिला को राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सोनिया गांधी राजमाता हैं, जो राष्ट्रपति से भी ऊपर हैं।

अधीर रंजन चौधरी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्विटर यूजर्स का कहना है कि राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ बोलना राष्ट्र और संवैधानिक पद का अपमान है। कई यूजर्स अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक ईडी की मार से कांग्रेस नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं, इसलिए बदजुबानी कर रहे हैं।

दिखाते हैं कांग्रेस का महिला विरोधी चेहरा। कांग्रेस की नजर में महिलाओं की क्या हैसियत है और वे किस तरह महिलाओं का अपमान करते हैं…

अजय कुमार का द्रौपदी मुर्मु को लेकर विवादित बयान
महिला विरोधी मानसिकता वाली कांग्रेस में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है, यह कई बार साबित हो चुका है। कांग्रेस के नेता अपने बयानों से सारी मर्यादाओं को तार-तार कर दे रहे हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मु को लेकर कांग्रेस नेता अजय कुमार ने विवादित बयान दिया था। अजय कुमार ने कहा था कि द्रौपदी मुर्मु आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि देश की एक बुरी विचारधारा (इविल फिलॉसफी) का प्रतिनिधित्व करती हैं। हमें द्रौपदी मुर्मु को आदिवासी प्रतीक नहीं बनाना चाहिए। अनुसूचित जाति की स्थिति बदतर हो गई है।

अजय सिंह ने पारुल साहू को कहा- टिकाऊ माल
मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता अजय सिंह ने अपनी पार्टी की उम्मीदवार पारुल साहु को टिकाऊ माल कहा।

यूथ कांग्रेस की महिला नेता का यौन शोषण
हाल ही में केरल में यूथ कांग्रेस की महिला नेता ने विंग के राष्ट्रीय सचिव को पत्र लिखकर एक कार्यकारी सदस्य पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। पलक्कड़ में एक से तीन जुलाई तक यूथ कांग्रेस के तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर का आयोजना किया गया था। महिला नेता ने अपने पत्र में बताया था कि इस चिंतन शिविर में शराब के नशे में राज्य के कार्यकारी सदस्य विवेक नायर ने उसका यौन शोषण करने की कोशिश की। महिला नेता के पत्र के बाद विवेक नायर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि निलंबन का जो कारण बताया गया है, उसमें यौन शोषण के आरोप को खारिज कर दिया गया था।

कांग्रेस के मंत्री-पुत्र ने किया रस्सियों से बांधकर रेप
राजस्थान सरकार में जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे रोहित के खिलाफ जयपुर की 23 साल की युवती ने दिल्ली में रेप का केस दर्ज कराया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि रोहित जोशी ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर कई बार रेप किया। मांग में सिंदूर भरकर शादी का झांसा दिया। शादी तो नहीं की, लेकिन उसे जबरन हनीमून पर ले गया। पीड़िता प्रेग्नेंट हुई तो अबॉर्शन करा दिया। परेशान होकर पीड़िता ने खुदकुशी की कोशिश की। इससे बची तो रोहित मारपीट पर उतारू हो गया। आखिरकार पीड़िता ने नॉर्थ दिल्ली के सदर थाने में मामला दर्ज करवाया। 

कांग्रेस विधायक के बेटे ने नाबालिग से रेप कर बनाए अश्लील वीडियो
राजस्थान में कांग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा के बेटे दीपक मीणा पर नाबालिग से गैंगरेप व ब्लैकमेल करने का आरोप लगा। दौसा में एक 15 साल की नाबालिग से गैंगरेप के मामले में एमएलए के बेटे समेत 5 युवकों पर मामला दर्ज किया गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि एमएलए के बेटे और उसके दोस्तों ने होटल में रेप कर अश्लील वीडियो बनाए। इन्हें वायरल करने की धमकी देकर साढ़े 15 लाख रुपए व जेवरात ले लिए। इसके साथ धमकाया भी कि कानून हमारा कुछ नहीं कर सकता। परिजनों ने बताया कि पीड़िता 10वीं क्लास में पढ़ती है।

कांग्रेस के मंत्री धारीवाल ने कहा था, रेप में नंबर-1, क्योंकि राजस्थान मर्दों का प्रदेश है
पिछले दिनों विधानसभा में ही वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल ने स्वीकारा था कि राजस्थान रेप के मामले में देशभर में नंबर वन है। इसके साथ ही धारीवाल ने शर्मनाक वक्तव्य भी जोड़ा कि क्या करें…राजस्थान मर्दों का प्रदेश है। गोठवाल ने कहा कि राजस्थान दुष्कर्म के मामलों में देश में पहले नंबर पर है। यहां आए दिन दुष्कर्म होते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार दुष्कर्म की घटनाओं पर काबू पाने में बिल्कुल विफल साबित रही है। 

कमलनाथ के करीबी सज्जन ने लड़कियों पर दिया बेतुका बयान
कांग्रेस के नेता अपने बयानों से सारी मर्यादाओं को तार-तार करते रहते हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता सज्जन सिंह वर्मा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल किए जाने की बात पर उन्होंने कहा कि जब लड़कियां 15 साल में प्रजनन लायक हो जाती हैं तो शादी की उम्र 21 साल करने की क्या जरूरत है। 13 जनवरी, 2021 को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लड़कियों की बच्चे पैदा करने लायक उम्र 15 साल है। शादी की उम्र 18 साल है तो कौन सा बड़ा वैज्ञानिक या डॉक्टर हो गया शिवराज की शादी की उम्र 21 करेगा।

इमरती देवी अब जलेबी बन गई हैं- सज्जन सिंह वर्मा
इसके पहले मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी नेता सज्जन सिंह ने एक विवादित बयान दिया। सज्जन सिंह ने पूर्व मंत्री इमरती देवी पर निशाना साधते हुए कहा कि इमरती देवी अब ‘जलेबी’ बन गई हैं। दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (1998-2003) में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह के इस बयान से पार्टी की काफी फजीहत हुई।

कमलनाथ ने इमरती देवी को कहा आइटम
इसके पहले राहुल गांधी के करीबी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी की महिला नेता इमरती के लिए जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया है वह पार्टी की महिलाओं के प्रति सोच को उजागर करती है। मध्य प्रदेश के डबरा में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राजे के लिए प्रचार करने पहुंचे कमलनाथ ने कहा, ‘सुरेश राजे जी हमारे उम्मीदवार हैं, सरल स्वभाव के सीधे साधे हैं। यह उसके जैसे नहीं है, क्या है उसका नाम? मैं क्या उसका नाम लूं आप तो उसको मुझसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं, आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ‘यह क्या आइटम है’।

कमलनाथ ने महिलाओं को कहा सजावट का सामान
कमलनाथ ने इसके पहले विधानसभा चुनाव के दौरान भी महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया था। कमलनाथ महिलाओं को सजावट का सामान कहा था। दरअसल, पत्रकारों ने जब उनसे विधानसभा चुनाव में कम महिला प्रत्याशी उताने के बारे में सवाल पूछा तो, कमलनाथ ने कह दिया कि उन्होंने महिलाओं को सजावट और कोटे के आधार पर टिकट नहीं दिए गए हैं।  

‘333 करोड़ खुदा, जानवरों वाले गॉड्स, हनुमान, गणेश…’: अब अजमेर दरगाह के खादिम के बेटे आदिल चिश्ती ने हिंदू देवताओं पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

                                आदिल चिश्ती ने हिंदू देवी-देवताओं पर की आपत्तिजनक टिप्पणी
नूपुर शर्मा ने इस्लामिक किताबों में लिखी बात को गैर-मुस्लिमों तक पहुंचाकर कट्टरपंथियों की दुखती नब्ज पर हाथ रख कर बिलों में छुपे हिन्दू विरोधियों को बाहर निकाल, उन हिन्दुओं की आंखें भी खोलने का प्रयास किया है, जो अपने ही हिन्दू देवी-देवताओं को छोड़ कब्रों को पूजते हैं और अब उन्ही के चढ़ावे पर ऐश करने वाले ही उनके देवी-देवताओं को अपमानित कर रहे हैं।  

अजमेर दरगाह के चिश्तियों और खादिमों ने पिछले कुछ दिनों में नूपुर शर्मा की टिप्पणियों और उनके समर्थन में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बार-बार नफरत भड़काई है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती के बेटे आदिल चिश्ती ने हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया है। आदिल चिश्ती ने टाइम्स नाउ के साथ इंटरव्यू के दौरान हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की।

इस वीडियो में आदिल चिश्ती ने कहा, “अगर नुपुर शर्मा हिंदू हैं, तो मेरे पास उनसे कुछ सवाल हैं। 333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है। विभिन्न धर्मों के लोगों की अलग-अलग व्याख्याएँ हो सकती हैं। लेकिन, 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

इन हिन्दू विरोधियों को इतना भी ज्ञान नहीं, कि हिन्दुओं के वास्तव में कितने देवी-देवता हैं, चले हैं, हिन्दुत्व का विरोध करने। इन अक्ल से पैदल हिन्दुओं की कमाई पर पलने वालों को इतना भी नहीं मालूम कि हिन्दुओं के 333 नहीं 33 करोड़ देवी-देवता हैं। 

आदिल चिश्ती ने आगे कहा, “दूसरी बात, मैं नुपुर शर्मा से यह भी पूछना चाहूँगा कि हिंदू पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि भगवान विष्णु के 10 अवतार हैं। इनमें से कुछ अवतार इंसानों वाले हैं, कुछ जानवरों वाले हैं, और कुछ इंसान और जानवर से मिलकर बने हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या ये 10 अवतार संभव हैं या विश्वसनीय हैं कि तुम कहते हो कि वह एक ईश्वर है और फिर वह दस अलग-अलग अवतारों में प्रकट होता है। कुछ इंसानों के रूप में, कुछ जानवरों के रूप में और फिर कुछ फ्यूज़न के रूप में।”

आदिल चिश्ती ने कहा, “तीसरा, हनुमान जी… उसका अस्तित्व, उनका वजूद कैसे साबित करेंगी आप? गणेश जी का वजूद कैसे साबित करेंगी आप? वजूद से मेरा क्या मतलब है वो आप समझ जाएँ, वो पूरी तरह से इंसान नहीं थे ना। आप खुद मानते हैं कि वह आपके भगवान हैं। गणेश हो या हनुमान… क्या ये बातें तार्किक लगती हैं? नहीं।” आदिल चिश्ती ने 23 जून 2022 को ये बातें कहीं थी।

आदिल चिश्ती ने अपने बयान में एक बड़ी तथ्यात्मक गलती करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में 333 करोड़ देवी-देवता हैं। लोगों में यह एक आम भ्रांति है कि हिंदुओं में 33 करोड़ देवता है। पौराणिक वेदों के अनुसार हिंदू में 33 करोड़ नहीं बल्कि 33 ‘कोटि’ के देवी-देवता हैं। 33 कोटि का मतलब 33 करोड़ नहीं, बल्कि 33 प्रकार के देवी-देवता हैं।

हिंदू ग्रंथों में जिन 33 कोटि देवी-देवताओं का जिक्र है, उसमें 12 आदित्य, 11 रुद्र, 8 वसु और 2 अश्विनी कुमार हैं। 12 आदित्यों में अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, ववस्वान और विष्णु हैं। 8 वसु में अहष, ध्रुव, सोम, धरा, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष हैं। 11 रुद्र में शम्भु, पिनाकी, गिरीश, स्थाणु, भर्ग, भव, सदाशिव, शिव, हर, शर्व और कपाली हैं। जबकि दो अश्विनी कुमारों में नासत्य और दस्त्र आते हैं। इन 33 देवताओं को सामूहिक रूप से 33 कोटि देवता कहा जाता है। मगर आदिल चिश्ती ने इन्हें 333 करोड़ देवी-देवता कहा।

अजमेर दरगाह के चिश्तियों ने हाल के दिनों में इस तरह के कई घृणित बयान दिए हैं। आदिल चिश्ती के पिता सरवर चिश्ती ने कहा था कि भारत में एक ऐसा आंदोलन होगा, जिससे पूरा हिंदुस्तान हिल जाएगा। सरवर चिश्ती ने हिंदुओं के आर्थिक बहिष्कार का भी आह्वान किया था। पिछले दिनों उन्हें अजमेर के सद्भावना रैली में देखा गया था। सरवर चिश्ती के भतीजे गौहर चिश्ती ने भी नूपुर शर्मा और कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने वालों का सिर कलम करने की माँग करते हुए ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाया था। गौहर चिश्ती ने कन्हैया लाल के हत्यारों से भी मुलाकात की थी। बता दें कि कन्हैया लाल की उदयपुर में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के कारण गर्दन काटकर हत्या कर दी गई थी।

NDTV के पूर्व पत्रकार ने शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पर की अपमानजनक टिप्पणी, चैनल की भी उधेड़ी बखिया

                                                     नदीम अहमद काज़मी के ट्विटर बायो का स्क्रीनशॉट
महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच पत्रकार नदीम अहमद काजमी ने ट्विटर पर शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे का अपमान किया और उनका मजाक उड़ाया। हालाँकि, जब यह बताया गया कि वह NDTV के लिए काम नहीं करता है, तो पत्रकार अपने पूर्व चैनल की ही बखिया उधेड़ने लगा। दरअसल, काजमी इस वक्त एनडीटीवी में काम नहीं करते हैं। चैनल ने उन्हें (काजमी) वर्ष 2017 में ही निकाल दिया था, लेकिन उनके ट्विटर बायो में अभी भी वर्किंग विद एनडीटीवी लिखा हुआ है, जिससे किसी को भी भ्रम हो सकता है कि वह इस विवादास्पद चैनल के लिए काम कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में मचे घमासान से सेक्युलरिस्ट्स में बैचेनी होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की पटकथा तो भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाने वाले दिन ही लिख दी गयी थी। जिस तरह से महाराष्ट्र में हिन्दू विरोधी हरकतें होनी शुरू हुई थी, वह इस पटकथा को और अधिक शक्ति दे रही थी। सेक्युलरिस्ट्स यह भूल गए कि एकतरफा सेकुलरिज्म चलने के दिन लद चुके हैं।  

खैर, नदीम अहमद काजमी ने 22 जून 2022 को शिंदे के खिलाफ एक अपमानजनक ट्वीट किया था, जो इस वक्त अपने सभी विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। पत्रकार ने ट्वीट किया, “शालीनता मायने रखती है… शिंदे फिर से एक ऑटो चालक बनेंगे… बस मेरे शब्दों पर गौर करें।”

एनडीटीवी के तथाकथित पूर्व पत्रकार ने शिंदे को नीचा दिखाने के लिए उनके अतीत का सहारा लिया। एकनाथ शिंदे कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में एक ऑटो-रिक्शा चालक थे। 1980 में, वह शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे से प्रभावित हुए थे। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का कई बार आभार जता चुके हैं। शिंदे ने एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। वह अपने संगठनात्मक कौशल और जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। चार बार विधायक रह चुके शिंदे, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभागों को संभालते हैं। 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में महाराष्ट्र के ठाणे-पालघर में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

एक यूजर वरुण शर्मा (@LogicalHindu_) ने अपने ट्विटर हैंडल पर काजमी के ट्विटर बायो के स्क्रीनशॉट के साथ उसका अपमानजनक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इस बायो में वह खुद को अभी भी एनडीटीवी का पत्रकार बताता है। वरुण शर्मा ने चैनल की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह, कंसल्टिंग एडिटर निधि राजदान और न्यूज एंकर गार्गी रावत अंसारी को टैग करते हुए लिखा, “नदीम काजमी NDTV के पत्रकार हैं। अपने साथियों को शालीनता, शिष्टाचार और नैतिकता सिखाने वाली सोनिया सिंह, निधि राजदान और गार्गी रावत आप पर गर्व है।”

ट्विटर यूजर वरुण शर्मा ने अपने दूसरे ट्वीट में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे अपने महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करते हैं।

NDTV की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह ने वरुण शर्मा के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “नदीम अहमद काज़मी 2017 से एनडीटीवी के साथ नहीं हैं।”

सोनिया सिंह के जवाब से काजमी का चैनल को लेकर पुराना जख्म फिर से ताजा हो गया और उन्होंने एनडीटीवी के लिए बेहद निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग किया। काजमी ने लिखा, “मामला विचाराधीन है। अदालत में पेश नहीं होने पर एनडीटीवी पर 10 हजार जुर्माना लगाया गया है कृपया अपने वकीलों से पता करें। धन्यवाद।” एक अन्य ट्विटर यूजर ने उनसे पूछा कि उनके और एनडीटीवी के बीच ऐसा क्या गलत हुआ है? इस पर काजमी ने दावा किया कि 2017 में चैनल ने ​उन्हें निकाल दिया था, जबकि उन्होंने दो दशक तक चैनल में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।

वह यही नहीं रुके उन्होंने अपने दर्द बयाँ करते हुए आगे कहा, “मैं संस्थान के साथ पूरी ईमानदारी के साथ 2 दशक तक मजबूती से खड़ा रहा। अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटा। लेकिन आप जानते हैं.. उस वक्त मुझे बहुत कष्ट हुआ जब मुझे दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 58 साल की उम्र में जीवन के अंतिम पड़ाव पर मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है।”                                              

काजमी ने खुद शिकायत की थी कि चैनल ने उन्हें गलत तरीके से निकाल दिया था। ऐसे में यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि वह फिर भी खुद को एनडीटीवी का पत्रकार बताते हैं। उनके ट्विटर बायो में 2017 के बाद से यानी 5 सालों से एनडीटीवी लिखा हुआ है। यही नहीं उनके लिंक्डइन प्रोफाइल में भी लिखा है कि वह ‘एनडीटीवी में असाइनमेंट‘ पर हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।