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अस्वस्थ आडवाणी और बलिदानी कारसेवकों का अपमान, बाबरी सोच के सबसे बड़े पैरोकार बन गए हैं राहुल गाँधी, ये कैसा घमंड? आखिर कब तक हिन्दू कांग्रेस को गले पाले रखेंगे? शर्म करो!

जिस तरह राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं का मजाक बनाया जा रहा, उसे देख शर्म आती है उन हिन्दुओं पर जो कांग्रेस को वोट देते हैं। कांग्रेस और इसको समर्थन देने वालों को मालूम होना चाहिए कि सनातन धर्म 4+ अरब वर्षों प्राचीन है, जिसे समाप्त करने आए असंख्य राक्षसों का वध करने अनेक देवी-देवताओं ने भिन्न-भिन्न रूपों में अवतार लिया और सनातन की रक्षा की।  
राहुल के इस अराजक अभियान में गूगल भी शायद अपना समर्थन दे रहा है। कल(जुलाई 6) शीर्षक 

"8 कैमरामैन और डायरेक्टर लेकर स्टेशन पहुँचे राहुल गाँधी, 'नकली' लोको पायलट वाले वीडियो के लिए पहले से तय थी स्क्रिप्ट: रेलवे अधिकारी ने बताया – नहीं था कोई ‘असली’ कर्मचारी; राहुल के खिलाफ एक्शन की तैयारी" को मेरे फेसबुक और groups से भी हटा दिया। क्यों? सिर्फ इसलिए कि राहुल की अराजकता के विरुद्ध है। https://nigamrajendra.blogspot.com/2024/07/8.html  

Jul 6, 2024
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Rajendra Nigam
Jul 6, 2024
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राहुल गाँधी की हिन्दू-घृणा थमने का नाम नहीं ले रही है, वो लगातार जगह-जगह जाकर इसका प्रदर्शन कर रहे हैं। अब राहुल गाँधी ने गुजरात के अहमदाबाद पहुँच कर गलतबयानी की है। उन्होंने कहा कि जो आंदोलन लालकृष्ण आडवाणी ने चालू की थी, जिसका केंद्र अयोध्या था, उसे I.N.D.I. गठबंधन ने अयोध्या में हरा दिया है। हिन्दुओं को इस समझना होगा कि बीजेपी फैज़ाबाद सीट हारी है, अयोध्या नहीं। बल्कि अयोध्या क्षेत्र से बीजेपी जीती है। राहुल गाँधी ने झूठा दावा किया कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में अयोध्या का एक भी व्यक्ति नहीं था। 

उन्होंने इस दौरान झूठ बोला कि अयोध्या के लोगों को जमीन के बदले मुआवजा नहीं मिला। जनता में इस कदर झूठ परोसा जा रहा है, जिसे देख लगता है कि कुर्सी के भूखे नेताओं का कोई चरित्र ही नहीं। कुछ ही दिन News18 के लाइव शो 'भईया जी कहिन' में एक युवती ने इसी मुद्दे पर बोलने पर एंकर ने उस महिला से नाम, पता, मकान लिखकर दीजिए, ताकि बीजेपी वालों को बोलकर मुआफजा दिलवाया जा सके। देखिए वो बेशर्म महिला आधा-अधूरा पता देकर गायब हो गयी, यानि सनातन विरोधियों द्वारा किस तरह झूठ परोसा जा रहा है।     

राहुल गाँधी सोच-समझ कर राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाली बात कही, क्योंकि उन्होंने खुद कहा कि वो ‘बड़ी बात’ कह रहे हैं। अयोध्या में समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद की जीत में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के योगदान की बात करते हुए इन कार्यकर्ताओं को ‘बब्बर शेर’ कहा। उन्होंने इस दौरान एक रहस्यमयी भाषा सांसद के हवाले से ये भी दावा कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी की जगह अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन 3 बार सर्वे से पता चला कि वो यहाँ से लड़ेंगे तो उनका राजनीतिक करियर हार के बाद चौपट हो जाएगा।

ये पहला मौका नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह की बातें की हों। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने ‘शक्ति के विनाश’ की बात कहीं थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई शक्ति से है। जबकि भारत में शक्ति पूजा की परंपरा रही है, माँ दुर्गा को शक्ति कहा जाता है। असम में कामाख्या हों, कश्मीर में शारदा, तमिलनाडु में मिनाक्षी हों या फिर गुजरात में अम्बा और समलेश्वरी, माँ शक्ति की विभिन्न रूपों में भारत के कोने-कोने में उपासना की जाती है।

543 में 99 सीटें मिलने से उत्साहित राहुल गाँधी ने तीसरी मोदी सरकार के पहले संसद सत्र में बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले भाषण में भी उत्साहित होकर हिन्दुओं को हिंसक बता दिया। उन्होंने इस दौरान भगवान शिव को लेकर भी अनर्गल बयान दिया कि वो अपने त्रिशूल को जमीन में एक तरफ गाड़ देते हैं। उन्होंने शिव के अभय मुद्रा को कांग्रेस के चुनाव चिह्न से जोड़ दिया। सदन में टोके जाने के बावजूद वो बार-बार भगवान शिव की तस्वीर दिखाते रहे।

राहुल गाँधी ने एक तरह से हिन्दू घृणा का लहू चख लिया है, जैसे कोई जंगली जानवर किसी आदमी का खून चख लेता है तो वो मनुष्यों को मार कर खाने के लिए ही खोजता रहता है। कई बार ऐसे जानवरों को या तो पकड़ कर हमेशा के लिए कैद करना पड़ता है, या फिर उसका काम तमाम करना पड़ता है। राहुल गाँधी ने अब राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने की बात कही है। राम मंदिर के निर्माण के साथ ही जो आंदोलन सफल हो गया, अब उसे कौन हरा सकता है?

शायद राहुल गाँधी को पता नहीं है, राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाले कितने आए और कोशिश कर के धूल में मिल गए। मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई, लालू यादव ने लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करवाया और मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा कि भगवान श्रीराम काल्पनिक थे। जब ये तीनों नहीं कर पाए, राहुल गाँधी को लगता है कि उनसे हो पाएगा? अब तो रोज लाखों की संख्या में लोग राम मंदिर में दर्शन भी कर रहे हैं।

असल में ये सारा घमंड कांग्रेस के 99 या सपा के 37 सीटें जीतने का नहीं, बल्कि अयोध्या जीतने का है। फैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र, जिसके अंतर्गत अयोध्या आता है, वहाँ से समाजवादी पार्टी ने जातीय गणित बिठा कर मिल्कीपुर से 9 बार विधायक रहे अवधेश प्रसाद को खड़ा किया, जिन्होंने भाजपा के 2 बार के सांसद लल्लू सिंह को हैट्रिक लगाने से रोक दिया। इस तरह 54,567 वोटों से ये सीट I.N.D.I. गठबंधन के खाते में चला गया।

इसके बाद से ही संसद में बार-बार भाजपा को अवधेश प्रसाद का चेहरा दिखा कर चिढ़ाया जाने लगा। कभी राहुल गाँधी उन्हें अपने बगल में बिठाते हैं तो कभी अखिलेश यादव। अवधेश प्रसाद एक तरह से इन दोनों नेताओं के लिए एक मेडल हो गए हैं जिन्हें वो हमेशा गले में पहन कर रखना चाहते हैं, या यूँ कहें कि एक ट्रॉफी हो गए हैं कि जब चाहो दोनों हाथों में लेकर ऊपर उठा दो वाहवाही लूटने के लिए। भाजपा को नीचा दिखाने के लिए उन्हें एक कड़ी मिल गई है।

चूँकि अयोध्या भाजपा की राजनीति का एक केंद्र रहा है, इसीलिए वहाँ से पार्टी की हार को लेकर उसे बार-बार चिढ़ाया और हतोत्साहित किया जा रहा है। राहुल गाँधी ने ये बयान ऐसे समय में दिया है जब 96 वर्षीय पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। 7 दशक से भी अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे एक नेता और उसके योगदानों का अपमान करने के लिए राहुल गाँधी ने ये समय चुना है।

छद्म धर्मनिरपेक्ष नीतियों के खिलाफ लालकृष्ण आडवाणी सितंबर 1990 में राम रथ यात्रा निकाली थी, जिसे अयोध्या पहुँचना था लेकिन रास्ते में बिहार के समस्तीपुर में लालू यादव की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लालकृष्ण आडवाणी ने ये रथयात्रा सिर्फ राम मंदिर के लिए नहीं निकाली थी, बल्कि इसका उद्देश्य था देश की सांस्कृतिक पहचान को पुनः पुष्ट करना। उनका स्पष्ट मानना था कि बाबरी मस्जिद के पक्ष में अभियान चलाने वाले श्रीराम के सामने बाबर को खड़ा कर रहे हैं।

सन् 1527 में बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने अयोध्या में राम मंदिर को ध्वस्त कर वहाँ बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसे दिसंबर 1992 में हिन्दुओं ने कारसेवा कर के ध्वस्त कर दिया और नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहाँ मंदिर निर्माण शुरू हुआ। हिन्दुओं ने इस मंदिर के लिए प्राचीन काल से लेकर अब तक कई युद्ध लड़े, कभी हथियारों से, कभी राजनीतिक, तो कभी न्यायिक। अब जब मंदिर का निर्माण पूरा होने वाला है, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है, अनेक बलिदानों का उद्देश्य पूरा हुआ, आंदोलन सफल हुआ।

लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को केवल राम मंदिर को पुनर्स्थापित करने के लिए नहीं खड़ा किया था, बल्कि उन उद्देश्य इससे भी बड़ा था। वो मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांत को हमेशा के लिए जमींदोज करना चाहते थे। वो चाहते थे कि देश के हिन्दू-मुस्लिम सभी स्वीकार करें कि उनकी पहचान राम से है, विदेशी आक्रांता बाबर से नहीं। आज घमंड देखिए कि फैज़ाबाद से जीतने वाले सांसद को ‘अयोध्या का राजा’ कह दिया जाता है, जबकि ये वो राज्य है जहाँ भरत ने भी अपने बड़े भाई श्रीराम की पादुका को सिंहासन पर रख कर उनकी अनुपस्थिति में शासन किया।

न तो अवधेश प्रसाद ‘अयोध्या के राजा’ हैं, और न ही राम जन्मभूमि आंदोलन असफल हुआ है। गुजरात के गोधरा में महिलाओं-बच्चों समेत 59 रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जला दिया गया था। मुलायम पुलिस की गोलीबारी में दर्जनों कारसेवक मारे गए। आज राहुल गाँधी ने ‘राम जन्मभूमि आंदोलन की हार’ की बात कर के उन सबका अपमान किया है, ये सिर्फ हिन्दू धर्म का ही अपमान नहीं है। राहुल गाँधी ने शायद गुजरात के 10% मुस्लिमों के वोट के लिए ये किया है।

कांग्रेस को छोड़ NOTA से भी पिछड़ गईं I.N.D.I. गठबंधन की पार्टियाँ

मोदी-योगी को हटाने जो विपक्ष ने I.N.D.I.alliance का गठन कर एकजुट होने का प्रयास हुआ, उतनी ही तेजी से इसके निष्फल  होने की अटकलें चल रही है, जो अभी संपन्न हुए 5 राज्यों में हुए चुनावों में नज़र आ गया है। विपक्ष(गैर-कांग्रेस) इस बात से शायद से अज्ञान या अज्ञान होने का ड्रामा कर रहे हैं कि कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को वापस अपनी झोली में रखने में व्यस्त है। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस का यह प्रयोग सफल रहा, जो गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों के लिए बहुत नुकसानदायक सिद्ध होने वाला है, क्योकि सभी तुष्टिकरण अपनाते हुए मुस्लिमों को रिझाने में दिन-रात लगी रहती हैं, लेकिन उसी वोटबैंक को कांग्रेस अपने पाले में रख इन सबके नीचे से चादर खींच रही है।   
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं को एक तरफ अदालत से जमानत नहीं मिल रही है। वहीं जनता की अदालत में भी उसकी जमानत जब्त हो रही है। घोटालों और भ्रष्टाचार में AAP नेता सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल में बंद हैं और उन्हें अदालत से जमानत नहीं मिल रही है। वहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में AAP ने 200 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और जनता की अदालत में भी उसके नेताओं की जमानत जब्त हो गई। यहां तक कि NOTA से भी कम वोट मिले हैं। राष्ट्रीय पार्टी होने का दंभ भरने वाली आम आदमी पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमाया, लेकिन वह एक भी सीट जीत नहीं पाई बल्कि उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इससे पहले 2022 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उसने 67 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी की जमानत जब्त हो गई थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कई रैलियां और रोड शो किए और चुनाव प्रचार में मुफ्त बिजली, शिक्षा देने जैसे कई प्रलोभन दिए। लेकिन इन रेवड़ी के झांसे को जनता ने नकार दिया। 

केजरीवाल की रैलियां और रोड शो काम नहीं आई, मुंह की खानी पड़ी
इसी साल राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने वाली आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पूरे दमखम से चुनाव लड़ा। पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ में कई रैलियां और रोड शो किए थे। बावजूद इसके आप को इन चुनावों में मुंह की खानी पड़ी है।

चुनावों में केजरीवाल की रेवड़ी काम नहीं आई
केजरीवाल ने दिल्ली-पंजाब की तरह इन राज्यों में भी मुफ्त बिजली-पानी और शिक्षा का वादा किया था। लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं मिला। एक तरह से जनता ने रेवड़ी कल्चर को नकार दिया। तीनों राज्यों में चुनावी दांव खेलते हुए पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने रैलियों में फ्री बिजली देने की बात कही थी। राजस्थान में एक रैली में उन्होंने कहा था कि एक मौका दें 300 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे। सभी कच्चे टीचर्स को पक्का करेंगे। पूरा इलाज फ्री करने की व्यवस्था करेंगे। शहीद सम्मान राशि एक करोड़ की जाएगी। सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा। सभी बच्चों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन केजरीवाल की ये रेवड़ियां काम नहीं आई।

मुफ्त बिजली, शिक्षा समेत अन्य प्रलोभन का फायदा नहीं मिला
आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में जमकर चुनाव प्रचार किया था। पार्टी संरक्षक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार में मुफ्त बिजली, शिक्षा देने समेत कई प्रलोभन दिए। इन प्रलोभन का लाभ जैसे उसको पंजाब, गोवा में मिला, उसके उलट राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में खाता तक नहीं खुला। पिछले साल हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी आप को सिर्फ 1.1 प्रतिशत वोट मिला था।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में वोट शेयर 1 प्रतिशत से कम रहा
केजरीवाल गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में भी पार्टी की वोट शेयर बढ़ाने पर काम कर रहे थे, लेकिन इस बार AAP की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 2022 में हुए गुजरात चुनाव में जहां AAP का वोट शेयर करीब 13 प्रतिशत रहा था वहीं 2023 में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनावों में उसे 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिला है। मध्य प्रदेश में उसे 0.44 प्रतिशत,राजस्थान में 0.37 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 0.93 प्रतिशत वोट मिला। इससे साफ जाहिर है कि आम आदमी पार्टी से जनता का मोहभंग हो चुका है और अब लोग रेवड़ी के लालच में फंसने वाले नहीं हैं।

मध्य प्रदेश में AAP के सभी 70 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
मध्य प्रदेश की 70 सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने वाली आम आदमी पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। यहां पार्टी की जमानत जब्त हो गई है। मध्य प्रदेश की दमोह सीट से आम आदमी पार्टी ने चाहत पांडेय को चुनावी मैदान में उतारा था। चाहत पांडेय एक टीवी एक्ट्रेस हैं और एमपी के दमोह की ही रहने वाली हैं। इन्होंने इसी साल जून में आम आदमी पार्टी ज्वॉइन की थी। चाहत पांडेय का जादू भी नहीं चल पाया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वह 2292 वोट पाकर पांचवे नंबर पर रही। दमोह से बीजेपी प्रत्याशी जयंत मलैया ने जीत हासिल की है।

राजस्थान में 88 सीटों पर जमानत जब्त
राजस्थान में आम आदमी पार्टी पहली बार 88 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। सभी सीटों पर उसका बुरा हाल रहा है। सीकर में केजरीवाल ने चुनाव से ठीक पहले रोड शो किया था और AAP ने दावा किया था कि 50,000 लोग इकट्ठा हुए थे, AAP को वहां कुल 2.25 लाख वोटों में से केवल 555 वोट मिले। सीकर में नोटा को 695 वोट मिला। सीकर में आम आदमी पार्टी नोटा से भी कम रही। आम आदमी पार्टी ने राजस्थान की उन सभी 88 सीटों पर जमानत खो दी, जहां उन्होंने चुनाव लड़ा था।

अवलोकन करें:-

AAP ने उतारे 215 उम्मीदवार, मिली 0 सीट, 1% वोट भी नहीं मिला

छत्तीसगढ़ में 57 सीटों पर जमानत जब्त
छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी ने 57 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन यहां भी जमानत नहीं बचा सके। छत्तीसगढ़ में AAP को 0.93 प्रतिशत वोट मिला।