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‘विकसित भारत की यात्रा में आपकी भूमिका बहुत बड़ी’: IIT दिल्ली में युवाओं को PM मोदी का संदेश, दीक्षांत समारोह में छात्रों को दी डिग्री; ‘परम प्रज्ञा’ का किया उद्घाटन

                   मोदी ने IIT दिल्ली में परम प्रज्ञा लॉन्च किया। (फोटो साभार - एक्स/ @narendramodi)
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली का 57वाँ दीक्षांत समारोह शनिवार (8 अगस्त 2026) को आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान की और मेधावी छात्रों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया।

मोदी ने IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में मौजूद AI आधारित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का उद्घाटन भी किया। इस मौके पर संस्थान ने अपनी पढ़ाई, रिसर्च, पेटेंट और स्टार्टअप से जुड़ी उपलब्धियों की भी जानकारी दी।

मोदी ने कहा आज से शुरू हो रही जीवन की नई यात्रा

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश के प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के जीवन का यादगार पल है और इस उत्साह, उमंग, सपनों और भावनाओं से भरे अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए भी खास अनुभव है।

मोदी ने छात्रों से कहा, “आज दुनिया का सामरिक समीकरण बहुत तेजी से बदल रहा है, वैश्विक शक्ति संतुलन भी बहुत तेजी से बदल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत है टेक्नोलॉजी की स्पीड। आज कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20-30 वर्षों की दुनिया कैसी होगी।”

उन्होंने कहा, “जीवन में चेतना बनाए रखिए, जो बातें बिना सोचे-समझिए स्वीकार कर ली जाती हैं, उन्हें परखिए, उन पर सवाल उठाइए। लेकिन सिर्फ सवाल पूछकर मत रुकिए, उनका समाधान खोजना का साहस भी रखिए। यही सोच आपकी अलग पहचान बनाएगी।”

उन्होंने कहा, “जब-जब बदलावों का दौर आता है, तब-तब चुनौतियाँ भी आती हैं और नए अवसर भी पैदा होते हैं। दुनिया भी बदलेगी, टेक्नोलॉजी भी बदलेगी, उद्योग भी बदलेगी, पेशे भी बदलेंगे। लेकिन इन सबके बीच जो सीखेगा, वो जीतेगा।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अलग चुनौतियाँ और दायित्व होते हैं। देश ने गुलामी का दौर देखा और उस समय की पीढ़ी के सामने आजादी हासिल करना सबसे बड़ा लक्ष्य था। इसके लिए लोगों ने लंबा संघर्ष किया और त्याग व बलिदान दिए।

PM ने कहा, “आज की पीढ़ी की चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ अलग हैं। अगले 30-35 साल में आप जो करेंगे, वह विकसित भारत की यात्रा को प्रभावित करेगा। आपके निर्णय का आधार ये भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा, कौन-सी जरूरत पूरी होगी।”

उन्होंने छात्रों से कहा, “विकसित भारत की यात्रा में आपकी भूमिका बहुत बड़ी है।” प्रधानमंत्री ने छात्रों को बदलती तकनीक के दौर के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने AI और आधुनिक तकनीक के बढ़ते महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि परम प्रज्ञा जैसी सुविधाएँ देश के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नई ताकत देंगी। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहने और नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया।

3036 छात्रों को डिग्री, 587 छात्रों को PhD

IIT दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी के मुताबिक, इस साल कुल 3036 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 587 PhD, 567 MTech और 1049 BTech छात्र शामिल हैं। यह संस्थान के लिए PhD डिग्री की रिकॉर्ड संख्या बताई गई है।

समारोह में मेधावी छात्रों को कई प्रतिष्ठित गोल्ड मेडल भी दिए गए। इनमें प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल, डॉ शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल शामिल हैं।

संस्थान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 600 करोड़ रुपए की प्रायोजित रिसर्च परियोजनाओं पर काम हुआ। पिछले एक साल में 196 नए पेटेंट दाखिल किए गए और 26 नए स्टार्टअप शुरू हुए। IIT दिल्ली ने देश के 18 NITs के साथ अकादमिक और रिसर्च सहयोग के लिए MoU भी किया है। इसके अलावा 30 देशों के साथ 88 सक्रिय अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं।

AI सुपरकंप्यूटर परम प्रज्ञा क्यों खास?

दीक्षांत समारोह में IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित AI आधारित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम परम प्रज्ञा का उद्घाटन किया गया। यह सुविधा नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के सहयोग से तैयार की गई है।

संस्थान के मुताबिक इसकी क्षमता 250 पेटाफ्लॉप्स बताई गई है। इसका इस्तेमाल AI, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, विज्ञान, इंजीनियरिंग और दूसरे क्षेत्रों में रिसर्च के लिए किया जाएगा। सुपरकंप्यूटर की करीब 60 प्रतिशत क्षमता IIT दिल्ली के शोधकर्ता इस्तेमाल करेंगे, जबकि करीब 40 प्रतिशत क्षमता दूसरे संस्थानों के शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।

इसका मतलब है कि बड़ी और जटिल गणनाओं के लिए वैज्ञानिकों को ज्यादा कंप्यूटिंग ताकत मिलेगी। AI मॉडल की ट्रेनिंग, बड़े डेटा का विश्लेषण और वैज्ञानिक सिमुलेशन जैसे काम तेजी से किए जा सकेंगे।

IIT दिल्ली ने इस दिशा में 18 NITs के साथ ALIGN (एकेडेमिक लिंकेज फॉर इनोवैशन एण्ड नैशनल ग्रोथ) पहल भी शुरू की है। इसके तहत छात्र और शिक्षक संयुक्त शोध, प्रोजेक्ट, थीसिस, अकादमिक आदान-प्रदान और साझा रिसर्च सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। संस्थान का कहना है कि यह पहल IIT दिल्ली को IIT Delhi 2.0 की दिशा में आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

सनातन विरोध में कितना नीचे गिरेगी कांग्रेस? सनातन विरोधी कांग्रेस-DMK नेताओं से क्यों नहीं हो रहा बर्दाश्त IIT मद्रास के डायरेक्टर द्वारा ‘गौमूत्र’ में औषधीय गुण बताया जाना? माफी मँगवाने पर अड़े, प्रदर्शन की भी धमकी

कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण करते कितना नीचे गिरेगी? एक सीमा होती है। 7 नवंबर 1966 को गौ हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों के खून की होली खेलने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी भी कालपात्रु जी महाराज के अभिशाप से बच नहीं पायी। जब से जो कांग्रेस का पतन शुरू हुआ आज तक नहीं रुक रहा। दूसरे, दिल्ली से गौ को निकालने वाली तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का क्या हुआ हाल? सबके सामने है कोई बताने की जरुरत नहीं। 
फिर जब स्कूल में पढ़ते थे तब माध्यमिक कक्षाओं में गाय का प्रस्ताव याद करवाया जाता था। परीक्षा में भी प्रस्ताव लिखने को आता था। प्रस्ताव में एक लाइन होती थी कि गौ मूत्र से दवाइयां बनती हैं। लेकिन सनातन विरोधियों को नहीं मालूम कि धरती पर एकमात्र गाय है जिसके मूत्र में बदबू नहीं होती, क्योकि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं में वास होता है। इतना ही नहीं पहले के समय घरों में फर्श की लिपाई गौ गोबर से होती थी, भैंस के गोबर से नहीं क्योकि इसके गोबर तक में बदबू नहीं होती। कोई कीड़ा तक नहीं होता था। यानी मूत्र तो क्या गोबर भी दवाई ही है। गौर करने की बात है कि गाय का बछड़ा हजार गऊओं के बीच अपनी अपनी माँ को पहचान जाता है, यह विशेषता किसी अन्य पशु या पक्षी में नहीं है। यही कारण है कि पहले के लोग भैंस के दूध की बजाए गौ दूध पीते और पिलाते थे। लेकिन जब से गौ दूध की बजाए भैंस के दूध का चलन हुआ परिवारों में दूरी बन गयी। मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आयुर्वेद को दरकिनार कर यूनानी पद्धति को बढ़ावा दिया गया। लेकिन आज सनातन विरोधी कांग्रेस-DMK नेताओं को IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी द्वारा ‘गौमूत्र’ में बताए औषधीय गुण बताए जाने पर मातम करना शुरू कर दिया। अपने आपको जनहितैषी बताने वाली कांग्रेस और DMK पार्टियां विरोध कर क्यों अपनी तिजोरी और कुर्सी की खातिर जनता को गुमराह कर रही है?   

प्रोफेसर कामकोटी ने देसी गायों के संरक्षण की बात कही (फोटो साभार: Freepik & IndiaAI)
 

IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र के औषधीय गुणों के की तारीफ़ की है। उन्होंने गौमूत्र से एक साधु का बुखार ठीक होने की घटना भी बताई है। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और DMK के नेता भड़क गए हैं। उनके इस बयान का तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है।

प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र की यह तारीफ़ चेन्नई में एक कार्यक्रम में की। यह कार्यक्रम पोंगल के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गौमूत्र में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और पाचक गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि गौमूत्र पेट की समस्याओं के लिए भी अच्छी दवा है। उन्होंने इसके बाकी औषधीय गुण भी बताए।

प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र की विशेषता बताए हुए कहा इससे बुखार कम होने की बात कही। उन्होंने इस बीच एक सन्यासी का नाम भी लिया। प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र के यह गुण आर्गेनिक फार्मिंग के फायदे बताते हुए गिनाए।

उन्होंने कहा, “अगर हम उर्वरकों का खाद का करेंगे तो हम भूमि माता को भूल जाएँगे। जितनी जल्दी हम जैविक, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।” उन्होंने गोवंश की देशी नस्लों की वकालत भी की और। उन्होंने इसके अर्थव्यवस्था और खेती में महत्व पर भी बात की।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के इस बयान पर DMK और कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे झूठा विज्ञान और गलत करार दिया। DMK के एक नेता ने इसे देश में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास बताया। तमिलनाडु के बाकी पेरियार समर्थक संगठनों ने इस बयान पर माफी की माँग की। उन्होंने प्रदर्शन की भी धमकी दी।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के बयान का तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है और इसके राजनीतिकरण ना किए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “IIT मद्रास के डायरेक्टर क्वांटम फिजिक्स के विशेषज्ञ हैं और वे शीर्ष सरकारी एजेंसियों के सदस्य भी रहे हैं। वह अपनी धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति सम्मान में दृढ़ हैं, जो कहीं से गलत नहीं है।”

अन्नामलाई ने आगे कहा, “उन्होंने किसी को गाय का मूत्र पीने के लिए मजबूर नहीं किया और केवल अपनी मान्यताओं को व्यक्त किया। हमें ऐसे बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। IIT-M के डायरेक्टर तमिलनाडु से हैं, जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मैं उन्हें जानता हूँ और मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता।”

‘हिन्दू काफिर और मुशरिक, बहुदेववादियों को मिलेगी सजा’: बिहार सरकार से फंडिंग पा रहे मदरसों में पढ़ाई जा रहीं पाकिस्तान में छपी किताबें; आखिर पाकिस्तानी किताबें कैसे आ रही हैं ?

बिहार सरकार से पैसे पा रहे कई मदरसों में पढ़ाया जा रहा है कि काफिर हिन्दुओं को मिलेगी सजा (चित्र - X/@KanoongoPriyank)
बिहार के कुछ मदरसों में मज़हबी कट्टरपंथ की शिक्षा दिए जाने का मामला सामने आया है। रविवार (18 अगस्त, 2024) को यह खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने किया है। उन्होंने बताया कि इन मदरसों में हिन्दुओं को काफिर बताया जाता है। यहाँ पढ़ाई जाने वाली कई पुस्तकें तो पाकिस्तान में छपी पाई गईं हैं। खास बात तो ये है कि इन मदरसों को राज्य सरकार पैसे भी दे रही है। प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड को भंग करने की भी माँग उठाई है।

प्रियांक कानूनगो ने रविवार को अपने ‘X’ हैंडल पर कई स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने कैप्शन के तौर पर लिखा, “बिहार राज्य में सरकारी फ़ंडिंग से चलने वाले मदरसों में तालिमुल इस्लाम व ऐसी ही अन्य किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। इस किताब में ग़ैर इस्लामिकों को काफ़िर बताया गया है। इन मदरसों में हिंदू बच्चों को भी दाख़िला दिए जाने की सूचना मिली है परंतु बिहार सरकार संख्या अनुपात की अधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है।”

प्रियांक कानूनगो ने बिहार मदरसा बोर्ड के हवाले से आगे बताया कि मदरसे का पाठ्यक्रम यूनिसेफ ने तैयार किया है। उन्होंने इसे यूनिसेफ और मदरसा बोर्ड द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण की पराकाष्ठा करार दिया है। बकौल प्रियांक बच्चों के संरक्षण के नाम पर दान और सरकारों से मिले अनुदान से कट्टरवादी पाठ्यक्रम बनाना यूनिसेफ़ का काम नहीं है। उन्होंने यह हरकत भारत के संविधान के खिलाफ बताते हुए मामले की जाँच और निगरानी संयुक्त राष्ट्र द्वारा कराए जाने की माँग उठाई है।”

प्रियांक कानूनगो के मुताबिक बिहार में मौजूद मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल अनेक किताबें पाकिस्तान में छपवाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि मदरसा किसी भी रूप में बच्चों की बुनियादी शिक्षा की जगह नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में कराए जाने की वकालत करते हुए उन्होंने कम से कम हिन्दू बच्चों को मदरसरों में न पढ़ाने की अपील की है। अंत में प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड भंग करने की माँग की है। अपने इस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ उनके कार्यालयों व संयुक्त राष्ट्र संघ को टैग किया है।

क्या छपा है किताबों में

प्रियांक कानूनगो ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं उसके ऊपर तालीम उल इस्लाम (इस्लाम की शिक्षा) हेडलाइन दी गई है। इसके पहले सवाल में ‘तुम्हें किसने बनाया है’ के जवाब में लिखा है ‘अल्लाह ने मुझे और दुनिया की हर चीज बनाई’। एक अन्य सवाल था कि अल्लाह ने दुनिया कैसे बनाई जिसके जवाब में लिखा गया है कि अपनी ताकत और हुक्म से। जो अल्लाह को नहीं मानते उन्हें इस किताब में ‘काफिर’ और किसी और को पूजने वाले लोगों को मुशरिक बताया गया है।
इसी किताब में एक और सवाल कर के पूछा गया है कि क्या बहुदेववादी (एक से ज्यादा देवताओं को मानने वाले) मोक्ष को प्राप्त होते हैं? इसके जवाब में लिखा गया है कि ‘कभी नहीं’। साथ ही कहा गया है कि बहुदेववादियों को सजा मिलती है। इसके अलावा किताबों के कई पन्नों पर इस्लामी प्रतीक छपे हुए हैं। इन प्रतीकों में सऊदी अरब की मस्जिद अल नवाबी भी शामिल है।

IIT बॉम्बे : मंच से भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाने वाले छात्र पर लगाया 1.2 लाख रुपए का जुर्माना, नाटक लिखने पर क्यों नहीं? जिन नेताओं ने सनातन का मजाक बनाया उन पर कब जुर्माना ?

हिंदू देवी-देवता का मजाक बनाने पर आईआईटी बॉम्बे ने छात्रों को दी सजा
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी/ ITT) बॉम्बे के छात्रों द्वारा इस साल मार्च में ‘राहोवन’ नाम का नाटक आयोजित करके भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाया गया था। अब इसी मामले में एक्शन लेते हुए आईआईटी बॉम्बे ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। कॉलेज प्रशासन ने नाटक में शामिल एक छात्र पर 1.2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

जिस छात्र ने भगवान राम और सीता माता का मजाक उड़ाया उस पर तो जुर्माना लगा दिया, लेकिन जिसने नाटक लिखा और जिस अध्यापक ने नाटक की इजाजत दी उन पर क्यों नहीं लगाया? दूसरे, जब नेताओं ने खुलेआम सनातन का अपमान किया, उन पर क्यों नहीं की कार्यवाही? वो नेता है तो सनातन पर कुछ भी बकवास कर सकता है? वैसे तो ऐसे नेताओं और उनकी पार्टी को वोट देने वाले मतदाता ही हिन्दू के नाम पर कलंक हैं।  

जानकारी के मुताबिक, छात्र को ‘जुर्माने’ का नोटिस 4 जून को जारी किया गया था। इससे पहले नाटक के बारे में जो शिकायतें प्रशासन को मिली थी उसे लेकर उन्होंने 8 मई को अनुशासन समिति की बैठक बुलाई थी। इस दौरान बैठक में छात्रों ने भी भाग लिया था और बातचीत के बाद सजा तय हुई थी।

भगवान का मजाक उड़ाने वाले छात्र को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि उसे 1.20 लाख रुपए का जुर्माना 20 जुलाई, 2024 को छात्र मामलों के डीन के कार्यालय में जमा किया जाना है।

इसके अलावा ये भी कहा गया कि अगर सजा का उल्लंघन किया तो आगे और भी सख्त प्रतिबंध लगाए जाएँगे। ये नोटिस फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल है। विवादित कार्यक्रम को देखने के बाद जिन लोगों ने आवाज उठाई थी कि छात्रों पर एक्शन लिया जाए, वही इस जानकारी को साझा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस मामले में 8 छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। इसमें जुलाई सेशन में स्नातक पूरा करने जा रहे छात्र भी शामिल हैं, उनके ऊपर इस तरह के नाटक में शामिल होने पर भारी जुर्माना लगाया गया है। वहीं कॉलेज में नियमित पढ़ाई कर रहे थे उन्हें छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है।

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित IIT बॉम्बे में 31 मार्च को कल्चरल फेस्ट का आयोजन किया गया था। इसी दौरान ये रामायण पर आधारित नाटक ‘राहोवन’ दिखाकर भगवान राम की आलोचना की गई थी। इसके अलावा ‘राहोवन’ नाम के इस नाटक में नारीवादी मुद्दों के नाम पर भगवान राम के किरदार से ही छेड़छाड़ की गई थी और पात्रों के नामों में हल्का बदलाव किया गया था। मंच पर लोग भगवान का मजाक बना रहे थे और नीचे सीटी मारी जा रही थी।

वीडियो में क्या है राम-सीता का संवाद

इसमें सीता कहती है, “स्वामी, ऐसी अवस्था में ये अकेली सुहागन अपना हृदय संवाद किसके साथ करे?” इस पर सामने से राम के पात्र में दिखाया लड़का कहता है, “खोल”। ‘क्या’ का वो जवाब देता है – ‘संकोच’। एक अन्य दृश्य में राम से कहलवाया गया है, “तू किसी दूसरे कबीले में जा किसी दूसरे मर्द के यहाँ रह आई, इसीलिए ये कबीला तेरा स्वीकार वापस नहीं करेगा।”
इस पर सीता कहती है, “दूसरा मर्द, अरे बंदी थी मैं वहाँ?” इस पर राम आरोप लगाते हैं कि सीता ने कबीले की सीमा लाँघी, रेखा का उल्लंघन किया। राम से कहलवाया गया है, “तू कुछ नहीं कहेगी, सिर्फ मेरी सुनेगी।” फिर सीता कहती हैं, “मर्द होने निकला था तू, इंसान बनना भूल गया।” इस पर राम कहते हैं, “अब एक औरत समझाएगी मुझे कि मर्द बनना क्या होता है?” एक दृश्य में सीता कहती है, “एक अलग दुनिया है वहाँ। और अच्छा हुआ, अघोरा (रावण) मुझे वहाँ लेकर गया।”
सीता आगे कहती हैं, “वहाँ की औरतों को अच्छी प्रतिष्ठा मिलती है। उसने मुझसे खुद बोला कि मेरी अनुमति के बिना मुझे छुएगा भी नहीं। उसमें मुझे ऐसा मर्द दिखा जो मुझे इस कबीले में नहीं दिखा। तुमलोग जश्न मना रहे थे न कि दानव को मार दिया। असली दानव तो आपने आज तक मरा ही नहीं है।”

अयोध्या : 500 वर्षो बाद भगवान भास्कर ने अपने कुलभूषण का किया तिलक, शंख का नाद, घड़ियाल की ध्वनि, मंत्रोच्चार का वातावरण, प्रज्जवलित आरती… रामनवमी पर अध्यात्म में एकाकार हुआ विज्ञान

रामनवमी के अवसर पर रामलला का 'सूर्य तिलक', वैज्ञानिकों का प्रयास सफल
रामनवमी के पुनीत अवसर पर बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का ‘सूर्य तिलक’ किया गया। भगवान भास्कर की किरणों ने रामलला के मस्तक तक पहुँच कर उनके मुख को सुशोभित किया। इसे ‘सूर्य अभिषेक’ भी कहा जाता है। ऑप्टिक्स और मेकेनिक्स के माध्यम से भारत के वैज्ञानिकों ने ये कमाल किया है। इसके तहत सूर्य की किरणों को पाइप और दर्पण के माध्यम से सीधे राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के मस्तक तक पहुँचाया गया।

मान्यता है कि श्रीराम के जन्म के समय एक महीने तक भास्कर(सूर्य) देवता निरन्तर चमकता रहा, लेकिन समस्त ब्रह्माण्ड सुचारु रूप से चलता रहे, श्रीराम ने आग्रह किया कि अपने नियमानुसार ही धरती पर अवतरित हुआ करो, अन्यथा सारी व्यवस्था चरमरा जाएगी। उसके बाद से भास्कर विष्णु के आदेशानुसार अपने निर्धारित समय पर ही धरती पर चमकते हैं। लेकिन अपनी प्रथम किरण विष्णु(श्रीराम) के माथे पर डालते थे, और आज उसी प्राचीनतम प्रथा को प्रदर्शित करने का सफल प्रयास किया गया।   

ये कोई नई चीज नहीं है, बल्कि प्राचीन काल में ही कई मंदिरों में इस तरह का आर्किटेक्चर होता था कि सूर्य की किरणें देवता का अभिषेक करती थीं। अबकी IIT रूड़की के शोधकर्ताओं को ये जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तिलक का आकार 58 mm का था और दोपहर 12 बजे ढाई मिनट तक अभिषेक चला। गर्भगृह की छत से सूर्य की किरणों को मंदिर में प्रवेश कराया गया, जिसके लिए IR फ़िल्टर से लैस अपर्चर का इस्तेमाल किया गया। दक्षिण दिशा से ये किरणें अंदर आईं।

इसके बाद 4 लेंस और 4 दर्पणों का एक नेटवर्क तैयार किया गया था, जिन्हें खास ऐंगल्स पर सेट किया गया ताकि रामलला के ललाट तक तिलक पहुँचे। पहले ही इसका ट्रायल कर लिया गया था। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले लेंस और दर्पणों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें उक्त उपकरण के गियरबॉक्स में लगाया गया था। पीतल और कांस्य की धातु का उपयोग किया गया था। इस गियरबॉक्स को सूर्य पंचांग के हिसाब से सेट किया गया है, ताकि हर साल रामनवमी पर सटीक तरीके से ‘सूर्य तिलक’ का कार्यक्रम संपन्न हो सके।

भगवान राम सूर्यवंशी थे, अर्थात उनका जन्म सूर्य के कुल में ही हुआ था। रामनवमी के अवसर पर राम मंदिर को सजाया गया था, गर्भगृह को फूलों से सजाया गया था। रामलला का दुग्ध एवं चन्दन से अभिषेक हुआ, उनका विशेष शृंगार किया गया। शंख की ध्वनि, घड़ियाल की नाद, मंत्रोच्चार और आरती के बीच जब पर्दा हटा तो रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक देख कर लोगों ने प्रणाम किया। आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप से भी ये एक महत्वपूर्ण दृश्य था, क्योंकि सन् 1527 के बाद पहली बार रामलला अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजे हैं।