जब कोई नेता अपनी अक्ल की बजाए विदेशों में बैठे अपने आकाओं के कठपुतली बन बोलता हो, क्या ऐसे नेता से किसी हित की कल्पना की जा सकती है? वास्तव में नेता प्रतिपक्ष को इतना संवेदनशील, दूरगामी और परिपक़्व होना चाहिए कि जब वह बोले सत्तापक्ष ध्यान से सुने और विपक्ष नेता के मुंह बात पर चिंता करे। लेकिन देश को ऐसा विपक्षी नेता मिला है जो खुद मजाक बन रहा है। कोई गंभीरता नाम की चीज ही नहीं, उपद्रवी भाषा। अगर राहुल विदेश में बैठे अपने आकाओं के चक्कर काटने की बजाए अपने दादा फिरोज जहांगीर की कब्र पर जाकर दुआ मांगते शायद दादा फिरोज अल्लाह मियां को बोलकर कुछ अक्ल दिलवा देते। कांग्रेस पार्टी को सिर्फ show piece बना दिया।
तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच राजनीतिक अलगाव के बाद एक-दूसरे पर तीखे वाण छोड़े जा रहे हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ और पार्टी की आईटी विंग ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोला है और उन्हें ‘पीठ में छुरा घोंपने वाला’ और ‘राजनीतिक रूप से अपरिपक्व’ के साथ-साथ ‘एक बड़ा मजाक’ करार दिया है।
डीएमके ने अपने मुखपत्र के संपादकीय में आरोप लगाया कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में इंडी गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ काम किया और उन्हें कमजोर किया। पार्टी का कहना है कि राहुल गाँधी इंडी गठबंधन की बैठकों में विपक्षी एकजुटता की बात करते हैं, लेकिन उन्होंने ही अलग-अलग राज्यों में विपक्ष की एकजुटता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है।
दरअसल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे की ‘दोस्ती की मिसाल’ देने वाली ये दोनों पार्टियाँ चुनाव बाद के नतीजों के बाद एक-दूसरे की दुश्मन बन गई हैं। डीएमके का कहना है कि कांग्रेस ने राज्य में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और गठबंधन में होने के बावजूद, सरकार बनाने के लिए अभिनेता विजय की पार्टी यानी टीवीके को समर्थन दे दिया। डीएमके ने दावा किया है कि कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी, तब उन्होंने कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन नया विकल्प मिलते ही उन्होंने डीएमके को धोखा दे दिया।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदान के आरोप में करीब 25 विदेशी नागरिक अरेस्ट (फोटो साभार: न्यूज 18) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान फर्जी दस्तावेजों के जरिए वोट डालने का मामला उजागर हुआ है। पुलिस ने इस संबंध में अब तक करीब 25 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है।
पुलिस और इमिग्रेशन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में चेन्नई, मदुरै और अन्य हवाई अड्डों पर इन लोगों को उस समय पकड़ा गया, जब वे भारत छोड़कर विदेश जाने की तैयारी में थे। इन विदेशी नागरिकों की उँगलियों पर वोटिंग के बाद लगाई जाने वाली पक्की स्याही (Indelible ink) के निशान पाए गए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
जाँच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकांश श्रीलंकाई नागरिक हैं, जबकि कुछ ब्रिटेन और कनाडा के पासपोर्ट धारक भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, कई संदिग्ध चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद तमिलनाडु पहुँचे थे और मतदान के बाद कुछ दिनों तक राज्य में रुके रहे ताकि उनकी उँगलियों पर लगी स्याही मिट जाए।
अधिकारियों ने बताया कि कई विदेशी नागरिक अभी भी भारत में मौजूद हो सकते हैं और जाँच एजेंसियाँ उन सभी लोगों का डेटा खंगाल रही हैं, जो मतदान से पहले भारत आए और अब तक वापस नहीं लौटे। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट
पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों की जाँच पहले भी सामने आ चुकी है। वर्ष 2025 में इमिग्रेशन अधिकारियों ने चुनाव आयोग से लगभग 100 विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध किया था।
जाँच के दौरान पाया गया था कि विदेशी नागरिकों के पास मतदाता पहचान पत्र (EPIC) मौजूद थे और उन्होंने गलत पते के आधार पर मतदान अधिकार हासिल कर लिए थे। इस वर्ष भी करीब 60 विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार केवल वही ‘ओवरसीज इलेक्टर’ मतदान कर सकता है, जिसने किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण न की हो। NRI मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए भारतीय नागरिकता बनाए रखना और मतदान के समय मूल भारतीय पासपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
राज्यपाल के भेजे विधेयक पर फैसला करने के लिए समय सीमा तय करते समय राष्ट्रपति की राय नहीं ली गई और ना ही उनका पक्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा जाना गया। यह बात देश के अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी) आर वेंकटरमणी ने कही है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति का पक्ष जानना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कभी यह सोंचा कि निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कितने सालों से लंबित पड़े मुकदमों से कितनी जनता परेशान हो रही है? क्या सुप्रीम कोर्ट इस तरह के विवादित फैसले देकर संवैधानिक समस्या खड़ा करना चाहती है? आधी रात को अदालतें खुल जाती है, कोई नहीं पूछने वाला, क्यों?
इंडियन एक्सप्रेस से देश के सबसे बड़े सरकारी वकील ने यह बातें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कही हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति की बात नहीं सुनी गई। कोर्ट को संविधान के तहत उनकी शक्तियों पर कोई फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति का पक्ष जानना था।”
अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा है कि तमिलनाडु और राज्यपाल के बीच विधेयक रोकने वाले विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राष्ट्रपति का कोई रोल नहीं था। हालाँकि, उन्होंने अभी इस फैसले पर पुनर्विचार को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर करने पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल, 2025 को तमिलनाडु डीएमके सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की। डीएमके सरकार ने यह याचिका राज्य के राज्यपाल RN रवि के विधेयकों को रोकने के खिलाफ लगाया था। तमिलनाडु की सरकार ने कहा कि उसके द्वारा पास किए गए विधेयकों को राज्यपाल मंजूरी नहीं दे रहे हैं।
तमिलनाडु की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राज्यपाल RN रवि ने विधानसभा द्वारा पारित किए गए 10 विधेयकों को लटका रखा है। तमिलनाडु ने बताया था कि विधानसभा में 2 बार पारित किए जाने के बावजूद राज्यपाल ने इन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रोक रखा है।
इस मामले राज्यपाल पर ‘जेबी वीटो’ का इस्तेमाल करने की बात तमिलनाडु ने कही थी। तमिलनाडु ने बताया था कि यदि ऐसा होता रहा तो कानून लटक जाएँगे और शासन चलाना मुश्किल हो जाएगा। तमिलनाडु ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से माँग की थी कि वह इन विधेयकों को पारित करने सम्बन्धी कोई स्पष्ट नियम दे।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले अंतिम सुनवाई 8 अप्रैल, 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलीलों को मानते हुए राज्यपाल द्वारा रोक रखे गए विधेयकों को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ राज्यपालों को भेजे गए विधेयकों को लेकर समय सीमा भी तय कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों के संबंध में की गई सभी कार्रवाइयों को रद्द किया जाता है। राज्यपाल के समक्ष पुनः प्रस्तुत किए जाने की तिथि से ही 10 विधेयकों को मंजूरी दे दी गई मानी जाएगी।” कोर्ट ने इसी के साथ कहा कि राज्यपाल को विधानमंडल द्वारा भेजे गए विधेयक पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल को भेजे जाने के एक महीने के भीतर उसे राष्ट्रपति के पास भेजना होगा। इसके अलावा अगर वह विधेयक वापस लौटाना चाहता है, तो यह काम तीन महीने के भीतर करना होगा और दोबारा भेजे गए विधेयक को एक माह के भीतर मंजूरी देनी होगी।
राष्ट्रपति पर क्या कह दिया?
तमिलनाडु मामले में फैसला सुनाते हुए जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल की शक्तियों पर कैंची चलाई ही, उसने राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी टिप्पणियाँ की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति को भेजे जाने के तीन महीने के भीतर उस पर एक्शन लेना होगा। कोर्ट ने कहा कि इसके बाद भी विधेयक रोके जाने पर कारण बताने होगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर उस तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना आवश्यक है, जिस दिन उसे यह भेजे जाएँगे। इस समय से अधिक किसी भी देरी के मामले में उचित कारणों को दर्ज किया जाना होगा और इस मामले में सम्बन्धित राज्य को भी जानकारी देनी होगी।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के किसी विधेयक को मंजूरी ना देने की स्थिति में राज्य अदालत का रुख कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी कानूनी आधार पर विधेयक को रोकते हैं, तो इस संबंध में भी विधेयक की संवैधानिकता का फैसला वह स्वयं करेगा, ना कि राष्ट्रपति।
राष्ट्रपति के किसी विधेयक पर दिए गए फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट सुन सकता है, यह भी निर्णय में कहा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जैसे राज्यपाल के पास किसी विधेयक को लम्बे समय तक लटका कर रखने के लिए शक्ति नहीं है, यही बात राष्ट्रपति पर भी लागू होती है। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति, दोनों के पास ‘जेबी वीटो’ की शक्तियाँ नहीं है।
क्यों हो रहा बवाल?
सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति को लेकर आदेश देने और समयसीमा तय करने पर संवैधानिक प्रश्न खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 361 में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए किसी फैसले के प्रति देश के किसी भी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं होंगे।
राष्ट्रपति के साथ ही राज्यपालों को भी यही शक्ति संविधान ने दी है। उन्हें किसी भी मामले में पक्ष भी नहीं बनाया जाता। यदि उनसे जुड़े कोई मामले होते भी हैं तो कोर्ट उनके सचिव के नाम से यह मामले चलाते हैं। हालाँकि, तमिलनाडु के मुकदमे में स्पष्ट तौर पर कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए समयसीमा तय कर दी है।
कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण करते कितना नीचे गिरेगी? एक सीमा होती है। 7 नवंबर 1966 को गौ हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों के खून की होली खेलने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी भी कालपात्रु जी महाराज के अभिशाप से बच नहीं पायी। जब से जो कांग्रेस का पतन शुरू हुआ आज तक नहीं रुक रहा। दूसरे, दिल्ली से गौ को निकालने वाली तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का क्या हुआ हाल? सबके सामने है कोई बताने की जरुरत नहीं।
फिर जब स्कूल में पढ़ते थे तब माध्यमिक कक्षाओं में गाय का प्रस्ताव याद करवाया जाता था। परीक्षा में भी प्रस्ताव लिखने को आता था। प्रस्ताव में एक लाइन होती थी कि गौ मूत्र से दवाइयां बनती हैं। लेकिन सनातन विरोधियों को नहीं मालूम कि धरती पर एकमात्र गाय है जिसके मूत्र में बदबू नहीं होती, क्योकि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं में वास होता है। इतना ही नहीं पहले के समय घरों में फर्श की लिपाई गौ गोबर से होती थी, भैंस के गोबर से नहीं क्योकि इसके गोबर तक में बदबू नहीं होती। कोई कीड़ा तक नहीं होता था। यानी मूत्र तो क्या गोबर भी दवाई ही है। गौर करने की बात है कि गाय का बछड़ा हजार गऊओं के बीच अपनी अपनी माँ को पहचान जाता है, यह विशेषता किसी अन्य पशु या पक्षी में नहीं है। यही कारण है कि पहले के लोग भैंस के दूध की बजाए गौ दूध पीते और पिलाते थे। लेकिन जब से गौ दूध की बजाए भैंस के दूध का चलन हुआ परिवारों में दूरी बन गयी। मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आयुर्वेद को दरकिनार कर यूनानी पद्धति को बढ़ावा दिया गया। लेकिन आज सनातन विरोधी कांग्रेस-DMK नेताओं को IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी द्वारा ‘गौमूत्र’ में बताए औषधीय गुण बताए जाने पर मातम करना शुरू कर दिया। अपने आपको जनहितैषी बताने वाली कांग्रेस और DMK पार्टियां विरोध कर क्यों अपनी तिजोरी और कुर्सी की खातिर जनता को गुमराह कर रही है?
प्रोफेसर कामकोटी ने देसी गायों के संरक्षण की बात कही (फोटो साभार: Freepik & IndiaAI)
IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र के औषधीय गुणों के की तारीफ़ की है। उन्होंने गौमूत्र से एक साधु का बुखार ठीक होने की घटना भी बताई है। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और DMK के नेता भड़क गए हैं। उनके इस बयान का तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है।
प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र की यह तारीफ़ चेन्नई में एक कार्यक्रम में की। यह कार्यक्रम पोंगल के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गौमूत्र में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और पाचक गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि गौमूत्र पेट की समस्याओं के लिए भी अच्छी दवा है। उन्होंने इसके बाकी औषधीय गुण भी बताए।
Madras #IIT Director V Kamakoti speaking in a Pongal festival in Chennai said diseases can be cured quickly by drinking cow urine. Kamakoti addedthat when his father had a fever, drank cow urine on the advice of a sanyasi and the fever subsided after fifteen minutes. he said… pic.twitter.com/JA40Qsicnv
प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र की विशेषता बताए हुए कहा इससे बुखार कम होने की बात कही। उन्होंने इस बीच एक सन्यासी का नाम भी लिया। प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र के यह गुण आर्गेनिक फार्मिंग के फायदे बताते हुए गिनाए।
उन्होंने कहा, “अगर हम उर्वरकों का खाद का करेंगे तो हम भूमि माता को भूल जाएँगे। जितनी जल्दी हम जैविक, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।” उन्होंने गोवंश की देशी नस्लों की वकालत भी की और। उन्होंने इसके अर्थव्यवस्था और खेती में महत्व पर भी बात की।
प्रोफ़ेसर कामकोटी के इस बयान पर DMK और कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे झूठा विज्ञान और गलत करार दिया। DMK के एक नेता ने इसे देश में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास बताया। तमिलनाडु के बाकी पेरियार समर्थक संगठनों ने इस बयान पर माफी की माँग की। उन्होंने प्रदर्शन की भी धमकी दी।
प्रोफ़ेसर कामकोटी के बयान का तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है और इसके राजनीतिकरण ना किए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “IIT मद्रास के डायरेक्टर क्वांटम फिजिक्स के विशेषज्ञ हैं और वे शीर्ष सरकारी एजेंसियों के सदस्य भी रहे हैं। वह अपनी धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति सम्मान में दृढ़ हैं, जो कहीं से गलत नहीं है।”
अन्नामलाई ने आगे कहा, “उन्होंने किसी को गाय का मूत्र पीने के लिए मजबूर नहीं किया और केवल अपनी मान्यताओं को व्यक्त किया। हमें ऐसे बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। IIT-M के डायरेक्टर तमिलनाडु से हैं, जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मैं उन्हें जानता हूँ और मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता।”
जबरन कॉपर टी लगाना हिन्दुओं की आबादी घटाने की साजिश बताने वाला हिंदूवादी नेता तमिलनाडु में गिरफ्तार (चित्र साभार- X/@EvaRomonov) तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में पुलिस ने रविवार (5 जनवरी 2025) को हिन्दू मुन्नानी संगठन के प्रदेश सचिव के कुट्रालनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर फैलाने का आरोप लगाया गया है। के कुट्रालनाथन ने तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एक हिन्दू महिला की मर्जी के खिलाफ कॉपर टी लगा दी। कुट्रालनाथन ने इसे हिन्दुओं की आबादी कम करने की साजिश करार दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल रूप से मदुरै की रहने वाली 31 वर्षीया एक महिला नवंबर 2024 में तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल (टीवीएमसीएच) में भर्ती हुई थी। 25 नवंबर को उसने एक बच्चे को जन्म दिया। बाद में महिला के पिता एस मारुथुपंडियन ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मर्जी के बिना कॉपर टी लगा दिया गया। महिला के पिता का यह भी दावा था कि कॉपर टी लगाने के दौरान उनकी बेटी को ब्लीडिंग हुई जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ा।
महिला के पिता ने मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर हिन्दू महिलाओं से भेदभाव के आरोप लगाया था। उनका दावा था कि अस्पताल में किसी गैर हिन्दू महिला को कॉपर टी नहीं लगाई गई। इस बाबत उन्होंने एक शिकायती पत्र भी दिया। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को इतना खून निकला कि उसी के साथ कॉपर टी भी बाहर निकल आई। महिला के पिता की इसी शिकायत को हिन्दू मुन्नानी के प्रदेश सचिव कुट्रालनाथन ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था।
के कुट्रालनाथन ने तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की इस हरकत को हिन्दुओं की आबादी कम करने की साजिश करार दे डाला। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के खिलाफ जाँच और पीड़िता को मुआवजा देने की माँग उठाई। माँगों के पूरा न होने पर के कुट्रालनाथन ने TVMCH के आगे प्रदर्शन का भी ऐलान किया था। हिन्दू मुन्नानी के पदाधिकारी के इन आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने बेबुनियाद बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी।
अस्पताल प्रशासन की इस शिकायत पर पुलिस ने के कुट्रालनाथन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भ्रामक सूचना देने और अशाँति फैलाने की धाराओं 192, 196(1) और 352 के तहत कार्रवाई की गई है। रविवार को के कुट्रालनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद हिंदू मुन्नानी और भाजपा के सदस्यों ने टीवीएमसीएच पुलिस स्टेशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। बाद में के कुट्रालनाथन को जमानत मिल गई।
TIRUNELVELI: Tirunelveli city police arrested Hindu Munnani state secretary K Kutralanathan here on Sunday for allegedly spreading false information on social media claiming that doctors at Tirunelveli Medical College Hospital (TvMCH) intentionally inserted a copper-T… https://t.co/ot9dOIKdidpic.twitter.com/CERNl6XDbO
इस बीच पीड़िता महिला ने भी टीवीएमसीएच के डीन और डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उन्हें बिना उनकी मर्जी के कॉपर टी लगाई गई है। इसी दौरान अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने पीड़िता से एक खाली फॉर्म पर दस्तखत भी करवा लिए थे। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।
मार डाली गई नाबालिग नौकरानी की खबर में मीडिया घुसेड़ रही दीपावली का एंगल (प्रतीकात्मक चित्र- AI/LightX) चेन्नई पुलिस ने 3 नवंबर 2024 को मोहम्मद निशाद और उसकी पत्नी नासिया को उनकी 15 साल की दलित नौकरानी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। कथित तौर पर मियाँ-बीवी नाबालिग नौकरानी को प्रताड़ित करते थे। गर्म तवा और सिगरेट से दाग देते थे। बुरी तरह पिटाई करते थे।
प्रताड़ना से जब नाबालिग दलित की मौत हो गई तो मुस्लिम दंपती घर छोड़कर भाग गया। पुलिस ने नाबालिग की लाश उनके घर के बाथरूम से बरामद की। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) और हिंदुस्तान टाइम्स (HT) जैसे मीडिया संस्थान इस घटना में भी ‘दीपावली’ को घसीटकर लाने में पीछे नहीं रहे। नाबालिग की लाश 31 अक्टूबर को बरामद की गई थी और इसी दिन दीपावली भी थी।
मीडिया ने हत्या को दीपावली से जोड़ा
TOI ने इस घटना के बारे में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘दीवाली’ शब्द को प्रमुखता से छापा है। इस पोस्ट में कहीं भी आरोपितों का नाम नहीं लिखा गया। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा, “दीवाली के दिन 15 वर्षीया घरेलू सहायिका की उसके मालिकों द्वारा बेरहमी से पिटाई किए जाने के बाद मौत हो गई है। दंपती ने उसे सिगरेट से दागने सहित कई गंभीर चोटें पहुँचाई और मरने के लिए शौचालय में बंद कर दिया।”
साभार- X/TOI
इसी रिपोर्ट में TOI ने आरोपितों के नाम दूसरे और तीसरे पैराग्राफ में बताए हैं।
साभार- TOI
कमोबेश ऐसी ही हरकत हिंदुस्तान टाइम्स ने भी की है। HT मीडिया ने अपनी रिपोर्ट के शुरुआती पैराग्राफ में आरोपितों के नाम का कहीं भी जिक्र नहीं किया है। लेकिन इसी रिपोर्ट की शुरुआत में ही जोर-शोर से दीपावली का जिक्र किया गया है। बाद में इस रिपोर्ट में एक अलग सेक्शन बना कर आरोपितों के नाम खोले गए हैं।
साभार- Hindustan Times
क्या है घटनाक्रम
यह घटना तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के अमिनजीकराई थानाक्षेत्र की है। यहाँ मेहता नगर में 35 वर्षीय मोहम्मद निशाद और उनकी 30 साल की पत्नी नासिया ने 15 साल की नाबालिग लड़की को नौकरानी बना कर रखा था। निशाद और नासिया आए दिन लड़की को मारते-पीटते थे। कई बार उसे ये दोनों सिगरेट और गर्म तवे से जला चुके थे। मृतका के गले पर एक निशान भी मिला है, जिससे लगता है कि उसका गला घोंटा गया था।
नाबालिग लड़की मूलतः तंजावुर की रहने वाली है। उसके पिता की मौत हो चुकी है। वह अपनी विधवा माँ की मदद घरों में काम कर के कर रही थी। 31 अक्टूबर को भी नसिया और मोहम्मद निशाद ने नाबालिग को पीटा था। पिटाई से लड़की की मौत हो गई। दोनों ने लड़की के शव को बाथरूम में बंद कर दिया और फिर एक दोस्त के घर भाग गए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका को प्रताड़ित किए जाने का खुलासा हुआ है। नासिया और मोहम्मद निशाद की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने 4 अन्य लोगों को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की है। इन चारों में एक भाई-बहन हैं, जिन्होंने पीड़िता को मोहम्मद निशाद के घर पर काम करने के लिए रखवाया था। इसके अलावा 2 अन्य वो पति-पत्नी हैं जिनके घर मोहम्मद निशाद और नासिया भागकर गए थे। आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई की गई है।
वकील पर 10000 रूपए का जुर्माना लगाया (चित्र प्रतीकात्मक , साभार: Livelaw & Leonardo AI) मद्रास हाई कोर्ट में एक वकील ने अपने वेश्यालय के विरुद्ध कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर कर दी। वकील ने दावा किया कि वह लोगों को स्वेच्छा से सेक्स के लिए मिलाने का काम करता है। हाई कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए वकील की डिग्री जाँचने के आदेश दे दिए।
मद्रास हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करते समय बिफर गया। हाई कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कोई वकील वेश्यालय जैसी चीज को बचाने के लिए याचिका लेकर आया है। हाई कोर्ट ने इसे बड़े दुख की बात बताया और कहा कि यह वकील भी कन्याकुमारी से है जो 100% साक्षर है।
कोर्ट इस याचिका से उखड़ गया और वेश्यालय चलाने वाले वकील से उसकी डिग्री और उसका बार काउंसिल सर्टिफिकेट दिखाने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने बार काउंसिल से कहा कि अच्छे कॉलेज से पढ़े वकीलों को ही पंजीकृत करे और इधर उधर से डिग्री लेने वालों को मान्यता ना दे। कोर्ट ने बार काउंसिल को उसके कागज जाँचने के आदेश भी दे दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि वकालत एक इज्जतदार पेशा है और वकील सामाजिक बदलाव के इंजीनियर हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक गरीब लड़की की गरीबी का फायदा उठा कर उसको वेश्यावृत्ति में झोंका है। कोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया और उस पर 10,000 रूपए का जुर्माना भी लगाया।
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच में एक वकील मुरुगन ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में माँग की गई थी कि उसके ऊपर नागरकोइल शहर में वेश्यालय चलाने के कारण दर्ज की गई FIR को रद्द कर दिया जाए और उन पुलिस वालों पर कार्रवाई की जाए जो इस धंधे में खलल डाल रहे थे।
मुरुगन ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर कहा था कि देश में सहमति से किया गया सेक्स मान्य है और वह ऐसे ही लोगों को मिलवाता है। मुरुगन ने अपन वेश्यालय पर कार्रवाई के पीछे रिश्तेदारों की साजिश की भी बात कही थी। उसने हाई कोर्ट से उसके खिलाफ सभी मामले रद्द करने की माँग की थी।
इस मामले में फरवरी, 2024 में नागरकोइल के इस वेश्यालय पर मारे गए छापे में एक 17 वर्ष की लड़की को भी बचाया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया था कि उसका यहाँ शोषण हो रहा था। इस कार्रवाई के बाद मुरुगन के विरुद्ध POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
लोकसभा 2024 चुनाव के परिणाम सामने हैं। भाजपा 240 सीट के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। इन चुनावों में अधिकांश चर्चा भाजपा की उत्तर भारत के कुछ राज्यों में सीटें घटने को लेकर है। दूसरी तरफ पार्टी ने दक्षिण में अपने पैर पसारे हैं, उसने कई राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ाया है और केरल जैसे राज्य में खाता भी खोला है।
इसके साथ-साथ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बीजेपी की दयनीय स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की। हिन्दू-मुसलमान और सेकुलरिज्म का रोने वाला बहुत खुश है। जितना काम मुस्लिम महिलाओं के लिए किया है अगर उन्होंने ही बीजेपी को वोट दिया होता, बीजेपी 350+ पर होती और NDA 400+ होता। राममंदिर बनने के बाद से मुस्लिम बीजेपी को हराने वाले का साथ देने वाले को वोट देने की मन बना चुके थे।
भारतीय जनसंघ से लेकर वर्तमान भारतीय जनता पार्टी तक मुसलमान पार्टी से जुड़ तो सकता है, लेकिन वोट नहीं देगा। जिसका विस्तार से उल्लेख दिल्ली में हुए चुनाव में कर चूका हूँ। मंडल का अध्यक्ष मुस्लिम और उसके अपने ही पोलिंग बूथ पर बीजेपी को एक भी वोट नहीं मिली, जिस मंडल अध्यक्ष के पोलिंग बूथ पर एक भी वोट नहीं मिलने का मतलब है मंडल अध्यक्ष ने भी अपनी ही पार्टी को वोट नहीं दिया। क्या कोई कार्यवाही की भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने? बीजेपी में ही नहीं, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच में महत्वपूर्ण पद पर है। मूर्ख और लालची हिन्दू झूठ, जात-पात और अफवाहों में आकर बीजेपी को वोट नहीं दिया। सोशल मीडिया पर देखिए हिन्दुओं को अपमानित किया जा रहा है। दूसरे, भाजपा मंडल से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक पार्टी पुराने और कमर्ठ कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करते रहते हैं। देखिए दोनों वीडियो और समझो मुस्लिम रणनीति को:
तमिलनाडु में उसने अपना वोट प्रतिशत तीन गुना कर लिया है। आंध्र प्रदेश में उसके वोट प्रतिशत में 10 गुने की बढ़ोतरी हुई है। कर्नाटक में भी वह अपना किला बचाने में सफल रही है। तेलंगाना में उसने अपना वोट प्रतिशत और सीट दोनों ही लगभग दोगुने कर लिए हैं। इन राज्यों में भाजपा का यह विस्तार उसे आगे चुनावों में और बढ़त देगा। राज्यवार समीक्षा की जाए तो दिखाई देता है कि 2019 के मुकाबले दक्षिण में भाजपा कहीं अधिक प्रभावशाली ढंग से उभरी है।
तमिलनाडु: 10% के पार पहुँचा वोट प्रतिशत
दक्षिण के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु में भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनावों में 10% से अधिक वोट हासिल किए हैं। उसे 2024 लोकसभा चुनावों में 11.24% वोट मिले हैं। यह उसका तमिलनाडु में सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इससे पहले 2019 चुनावों में उसे 3.62% वोट मिले थे। तमिलनाडु में भाजपा तीसरे सबसे अधिक वोट हासिल करने वाली पार्टी बनी है। उसे सत्ताधारी DMK और विपक्षी AIADMK के बाद राज्य में सबसे अधिक वोट हासिल हुए हैं। कॉन्ग्रेस इस मामले में तमिलनाडु में भाजपा से पीछे रही है।
तमिलनाडु में भाजपा की यह उपलब्धि उसे विधानसभा चुनावों में बड़ी बढ़त दे सकती है। हालाँकि, 11% से अधिक वोट पाने के बाद भी भाजपा तमिलनाडु में सीटें नहीं जीत सकी। लेकिन वह 11 सीटों पर राज्य में दूसरे स्थान पर रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु की जनता DMK-AIADMK के अलावा अन्य विकल्प भी तलाश रही है।
केरल: खाता खुला, वोट बढ़े
दक्षिण भारत में केरल अभी तक ऐसा राज्य रहा है जहाँ भाजपा को कभी भी सफलता नहीं मिली थी। 2024 लोकसभा चुनाव में केरल में भाजपा का सीट का सूखा समाप्त हो गया। भाजपा ने यहाँ त्रिशुर सीट जीत ली है। भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी यहाँ सफलता हासिल करके विजयी हो गए हैं। इसी के साथ वामपंथी राजनीति के आखिरी गढ़ में भाजपा ने सेंधमारी कर दी है। राज्य में भाजपा का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है, 2019 चुनाव में राज्य में भाजपा का वोट प्रतिशत 12.99% था।
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 16.68% वोट मिले हैं। उसकी चुनावी सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राज्य वामदलों को भी 1 ही सीट हासिल हुई है। वह आँकड़े में भाजपा के बराबर आ गए हैं। केरल में भाजपा तिरुवनंतपुरम सीट भी मात्र 16,077 वोट से हारी है। केरल में भी भाजपा के बढ़ते आधार के चलते उसे आगे फायदा होने की उम्मीद है।
तेलंगाना: वोट, सीट सब दोगुने
दक्षिण भारत के एक और महत्वपूर्ण राज्य तेलंगाना में भाजपा का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा है। राज्य भाजपा 17 में से 8 सीट जीतने में सफल रही है। राज्य में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस भी 8 ही सीट जीत सकी है। 2019 में यहाँ भाजपा ने 4 सीट जीती थी। ऐसे में भाजपा का आँकड़ा यहाँ दोगुना हो गया है। तेलंगाना में भाजपा अपना वोट प्रतिशत भी बढाने में सफल रही है। उसे 2019 में राज्य में 19.65% वोट मिला था जो कि 2024 में बढ़ कर 35.08% हो गया है।
तेलंगाना में भाजपा ने क्षेत्रीय पार्टी भारत राष्ट्र समिति का भी सफाया कर दिया है। वह हारी हुई 7 सीटों में दूसरे स्थान पर रही है, यानी मुकाबला भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच हुआ है। भारत राष्ट्र समिति यहाँ एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है। राज्य में भाजपा अब दूसरे नम्बर की पार्टी बन रही है।
आंध्र प्रदेश: धमाकेदार जीत, 10 गुना वोट बढ़े
आंध्र प्रदेश में 2024 लोकसभा चुनावों में NDA गठबंधन की जोरदार जीत हुई है। उसकी सहयोगी TDP ने राज्य में सरकार बनाई है। BJP ने खुद भी राज्य में 3 सीट जीत ली हैं। भाजपा 2019 में यहाँ से एक भी सीट जीतने में विफल रही थी। भाजपा को आंध्र प्रदेश में 11.28% वोट मिले हैं। उसे 2019 में 1% वोट भी नहीं मिले रहे। उसके वोट प्रतिशत में 2019 के मुकाबले 10 गुने से अधिक उछाल देखी गई है। आंध्र प्रदेश में भाजपा TDP के साथ मिलकर राज्य में सरकार में भी आ गई है।
कर्नाटक में 2024 के चुनाव भाजपा के लिए नुकसान वाले रहे है। भाजपा को इन चुनावों में सीटों का नुकसान सहना पड़ा है। कर्नाटक में भाजपा और JDS ने 28 में से 19 सीट जीती हैं। उसकी 2019 चुनाव में 26 सीट थीं। उसका वोट प्रतिशत हालाँकि बचा हुआ है। उसने 46.06% वोट हासिल किए हैं, उसके सहयोगी JDS ने 5.6% वोट हासिल किए हैं। NDA गठबंधन राज्य में 51.6% हासिल करने में सफल रहा है, 2019 में भी भाजपा ने राज्य में 51.7% वोट ही हासिल किए थे। कर्नाटक में भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बेंगलुरु में सभी सीट जीत ली हैं।
कोयंबटूर में इनकम टैक्स के छापे में निकले 32 करोड़ रुपए
लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर से करोड़ों रुपए बरामद हुए हैं। मामला पोल्लाची हैचरी का है। वहाँ चुनाव से कुछ दिन पूर्व आयकर विभाग ने रेड मारकर 32 करोड़ रुपए जब्त किए हैं।
सूत्रों के आई खबर में बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग ने एक पोल्ट्री फार्म में छापा मारकर ये रकम जब्त की है। पैसे ज्यादा होने के कारण उन्हें तीन बक्सों में भरकर इसे लाना पड़ा। अब इस मामले में आगे की जाँच जारी है।
Amid election fervor, a poultry farm in #Pollachi becomes the scene of a record-breaking cash haul, with Rs 32 crores seized sparking intrigue over its purpose.https://t.co/rRbcK3DdZX
— The New Indian Express (@NewIndianXpress) April 9, 2024
खबरों के अनुसार आईटी अधिकारी ने सोमवार सुबह (8 अप्रैल 2024) पोल्लाची में वेंकटेशा कॉलोनी में छापा मारा। रेड करीबन 15 घंटे चली और रकम 32 करोड़ जब्त हुई। छापेमारी के बाद बैंक स्टाफ को भी उस जगह पर बुलाया गया।
अनुमान है कि शायद ये पैसा इसलिए इकट्ठा किया गया हुआ था ताकि उसे वोटर्स में बाँटा जा सके। अब आईटी विभाग के साथ निर्वाचन आयोग के अधिकारी भी इसकी जाँच कर रहे हैं। अभी तक यही सामने आया है कि इस फर्म को अरुण मुरुगन और श्रवण मुरुगन द्वारा पोल्लाची में चलाया जा रहा है। इसकी कई अन्य ब्रांच राज्य भर में फैली हुई हैं।
इससे पहले तमिलनाडु में ही मतदाताओं को रिश्वत देने की शिकायत पर आयकर विभाग ने कार्रवाई करते हुए 4 करोड़ रुपए की नकदी को बरामद किया था। चुनाव आयोग को बताया गया था कि मतदाताओं को बाँटने के लिए कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में नकदी जुटाई गई है।
इस टिप पर कोंडीतोप और ओटेरी समेत पाँच जगहों पर 30 से अधिक आईटी अधिकारियों ने छापा मारा। इस दौरान चार करोड़ की नकदी मिली। इनमें 2.60 करोड़ चेन्नई से, सेनम से 70 लाख रुपए, तिरुचि से 55 लाख रुपए और वाहन जाँच से करीब 40 लाख रुपए पकड़े गए थे।
शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती पिछड़ों के कल्याण के लिए कार्य कर रहे थे, इसीलिए हुई गिरफ़्तारी? दिवाली प्रकाश का पर्व है, इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और हिन्दू आतिशबाजी कर के और दीपक जला कर ख़ुशी मनाते हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए इसके बाद नया साल शुरू हो जाता है। बाजारों में चहल-पहल होती है, अरबों रुपए का कारोबार होता है। हाँ, कुछ सेलेब्रिटीज ज़रूर ‘ज्ञान’ देने आ जाते हैं और हिन्दू त्योहार को बदनाम करते हैं। लेकिन अन्य मजहबों पर ज्ञान देने की हिम्मत नहीं। इन सबके बीच हमें ये भी याद रखना चाहिए कि वो दिवाली का ही मौका था जब शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था।
चलिए, फिर से उस प्रकरण को याद करते हैं क्योंकि 2014 के पहले भारत में हिन्दुओं की जो दुर्दशा थी उसके जिम्मेदार लोगों को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता। हर पीढ़ी को उनके बारे में बताने की ज़रूरत है। जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 मठों में से एक है तमिलनाडु का कांची कामकोटि पीठ। जयेन्द्र सरस्वती वहाँ के मुख्य महंत हुआ करते थे। दिवाली की आधी रात को एक अनुष्ठान के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ऐसा लग रहा था जैसे भारत में मुग़ल शासन चल रहा हो।
स्मरण हो, जगद्गुरु शंकराचार्य को दीपावली पूजन में उठाने पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और बाद में महामहिम पर आसीन हुए प्रणव मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी की वर्किंग कमेटी में जो प्रश्न "क्या ईद के दिन किसी मौलवी को गिरफ्तार किया जा सकता है?", जिसका उत्तर, उनके जीवन काल में, किसी नेता में देने का साहस नहीं किया। इसका उल्लेख उन्होंने अपनी पुस्तक में भी किया है।
ये वही भारत है जहाँ कश्मीर को अपनी बपौती मानने वाले शेख अब्दुल्ला को नज़रबंद भी किया जाता था तो आलीशान कोठियों में। जब अंग्रेजों का शासन था तो महात्मा गाँधी के लिए भव्य आगा खाँ पैलेस को ही जेल बना दिया गया। उसी देश में एक हिन्दू संत को बीच पूजा से गिरफ्तार करवा लिया जाता है, चोर-उचक्कों की तरह पुलिस की गाड़ी से ले जाया जाता है और रात भर न्यायालय में खुले में बिठा कर रखा जाता है – ये हिन्दुओं से घृणा करने वाले सत्ताधीशों के घमंड नहीं तो और क्या सूचित करता है।
दिवाली पर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की गिरफ़्तारी
तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) स्थित महबूबनगर से जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामला कुछ यूँ था कि 2004 में चेन्नई के पास स्थित कांचीपुरम के वरदराजस्वामी मंदिर में 3 सितंबर को वहाँ के मैनेजर ए शंकररमण की हत्या कर दी गई थी। तमिलनाडु पुलिस ने शंकराचार्य को ही इसका मुख्य आरोपित बना दिया। ये हत्याकांड मंदिर परिसर में ही हुआ था। उस समय तमिलनाडु में AIADMK की सरकार थी। खुद मुख्यमंत्री जयललिता ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी का आदेश दिया था।
उन्हें गिरफ्तार करने की AIADMK सरकार को इतनी जल्दी थी कि राज्य के तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर-जनरल ऑफ पुलिस KVS मूर्ति को हेलीकॉप्टर से आंध्र प्रदेश भेजा गया। इसके अलावा एक अन्य सरकारी एयरक्राफ्ट भी वहाँ उतरा। तत्कालीन आंध्र प्रदेश की पुलिस को इस संबंध में बताया गया और हैदराबाद से 90 किलोमीटर दूर स्थित महबूबनगर वो सभी गाड़ी से पहुँचे। रात के 11:25 बजे इस गिरफ़्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
एक्स टेक्सटाइल मिल के गेस्ट हाउस में घुस कर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को हिरासत में लिया गया था। उन्हें गाड़ी से हैदराबाद लाया गया और वहाँ से हवाई मार्ग से चेन्नई ले जाया गया। 12 नवंबर, 2004 को सुबह 6 बजे कांचीपुरम के जुडिशल मजिस्ट्रेट उत्तमराजन ने उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजना का फैसला सुनाया। फिर उन्हें वेल्लोर स्थित केंद्रीय कारगर में ले जाकर बंद कर दिया गया। भारत के इतिहास में किसी दुर्दांत आतंकी के लिए इतनी जल्दबाजी से ऐसी कार्रवाई शायद ही कभी देखने को मिली हो।
14 नवंबर को कांची मठ के वकीलों त्यागराजन और चेलप्पा को जेल में महंत से मिलने की अनुमति दी गई। शंकराचार्य ने बताया कि उन्हें इस मामले में फँसाया गया है और उनके बचाव के लिए सारे कानूनी कदम उठाए जाएँ। उनके खिलाफ IPC की धारा-302 (हत्या), 201 (अपराध की जानकारी छिपाना, सबूत मिटाना), 205 (मुकदमे की कार्यवाही में झूठी पहचान दिखाना), 213 (रिश्वत लेकर आरोपितों को छिपाना), 34 (समान मंशा से कई लोगों द्वारा किसी अपराध को अंजाम देना) और 120B (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
मद्रास हाईकोर्ट में दायर की गई जमानत याचिका में शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती ने खुद को निर्दोष बताया। पुलिस ने मठ द्वारा हत्यारों को रुपए दिए जाने का दावा कोर्ट में किया। कहा गया कि शंकररमण ने शंकराचार्य के खिलाफ कई आरोप लगाए थे, इसीलिए उनकी हत्या करा दी गई। जयेन्द्र सरस्वती द्वारा हत्यारों को फोन कॉल किए जाने का दावा भी किया गया। पुलिस मामला साबित होने से पहले ही उन्हें अपराधी बताने लगी। शंकराचार्य की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राम जेठमलानी ने पुलिस के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।
दूसरे, शायद ही कोई मीडिया(इसमें आज मोदी मीडिया भी शामिल है) ऐसा होगा, जो अपनी TRP बढ़ाने के चक्कर में श्रद्धेय शंकराचार्य को आरोपित करने का मौका नहीं छोड़ रहे थे। इतना ही नहीं, कुछ बेशर्म औरतें भी टीवी पर आकर अपनी बेशर्मी का प्रमाण दे रही थीं।
मद्रास हाईकोर्ट को उन्होंने बताया कि इस मामले में गिरफ़्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों तक का पालन नहीं किया गया। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, जो डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें रात के समय गिरफ्तार किया गया। 14 नवंबर तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इनमें वो 5 लोग भी शामिल थे जिन्होंने हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण किया था, लेकिन पुलिस ने कहा कि उनकी कोई संलिप्तता है ही नहीं।
बड़ी बात ये है कि एक बुजुर्ग हिन्दू संत को इस तरह से गिरफ्तार किए जाने का तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। वामपंथी दल तो एकदम प्रफुल्लित थे। सिर्फ एक भाजपा ही थी जो इस बर्बरता के विरोध में खड़ी थी। DMK नेता करूणानिधि, जो उस समय विपक्ष में थे, उन्होंने इसे एक ईमानदार कार्रवाई बताते हुए इसकी प्रशंसा की। नागालैंड के वर्तमान राज्यपाल, जो उस समय तमिलनाडु में भाजपा के नेता थे, उन्होंने सवाल उठाया कि जब जयेन्द्र सरस्वती के कहीं भागने की कोई आशंका थी ही नहीं, फिर जल्दबाजी में राजनीतिक दबाव में ये गिरफ़्तारी क्यों अंजाम दी गई?
भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील केंद्र की UPA सरकार से की और उन्हें पूजा के लिए सामग्रियाँ व व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराने की वकालत की। सोचिए, कांचीपुरम का मठ बंद हो गया था, जिस कमरे में आचार्य दर्शन देते थे वो बंद हो गया, कामकोटि अम्मा मंदिर पर काला झंडा लहरा रहा था और मठ के सभी कर्मचारी उस दिन काली पट्टी पहन कर काम करने आए, उस समय DMK क्या कर रही थी?
द्रविड़ पार्टियों ने एक हिन्दू संत की प्रताड़ना का मनाया था जश्न
आज उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बातें करते हैं, वो यूँ ही नहीं है। उनकी पार्टी ने हिन्दू विरोधी राजनीति कर के और ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा का माहौल बना कर अपने लिए एक ऐसे वोट बैंक को तैयार किया है जो हिन्दुओं की पीड़ा को देख कर ताली बजाता है। उस समय भी यही हुआ था। DMK के कार्यकर्ता पटाखे उड़ा रहे थे, जश्न मना रहे थे, गाने बजा कर नाच-गान में लगे हुए थे। आज ये विपक्षी दल प्रेस की स्वतंत्रता की बातें करते हैं, लेकिन शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के समय तमिलनाडु पुलिस ने मीडियाकर्मियों से भी धक्का-मुक्की की थी।
शंकराचार्य ने अपने साथ हो रहे इस व्यवहार से क्षुब्ध होकर पुलिस से पूछा था, “क्या मैं वीरप्पन हूँ?” वीरप्पन उस समय का कुछकिता चंदन तस्कर था जिसका खौफ दक्षिण भारत के कई राज्यों में था और जिसे उस साल 19 अक्टूबर को ही एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। खास बात ये है कि सहिष्णु, बेनवॉश्ड और कायर बना दिए गए हिन्दुओं ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के बाद हिन्दुओं ने उस तरह का कोई आंदोलन भी खड़ा नहीं किया।
जबकि ये वो समय था जब दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुरान की प्रति जलाए जाने के अफवाह मात्र से कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में इस्लामी भीड़ ने सड़क पर उतर कर हिंसा की थी। ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए इसके बेंगलुरु स्थित दफ्तर पर हमला कर दिया गया था और संपादक को माफ़ी माँगने के लिए मजबूर कर दिया था। जबकि भारत के मीडिया संस्थानों ने कोर्ट के फैसले से पहले ही शंकराचार्य को अपराधी बता कर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ा।
पिछड़ों के कल्याण के लिए प्रयासरत थे शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती
जबकि जयेन्द्र सरस्वती के बारे में माना जाता है कि वो एक समाजसेवी भी थे जिन्होंने कांची मठ को कर्मकांड के अलावा जन-कल्याण से भी जोड़ा। कई शिक्षा संस्थान स्थापित किए, अस्पताल बनवाए, वेद दर्शन के प्रचार के लिए भारत भ्रमण किया और उत्तर-पूर्वी में गुवाहाटी में जनसेवा संस्थान स्थापित कर भारत की आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता को पुष्ट किया। क्या उनकी गिरफ़्तारी इसीलिए की गई क्योंकि आध्यात्मिक चेतना के संचार का काम कर रहे जयेन्द्र सरस्वती से वामपंथी ताकतों, मिशनरियों और इस्लामी कट्टरपंथियों को खतरा था?
शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को पूरे एक दशक तक प्रताड़ित किया गया। अंततः 2013 में पुडुचेरी की अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। मीडिया ट्रायल और भारत में हिन्दू विरोधियों की सत्ता होने के कारण उन्हें काफी कुछ भुगतना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट को अंदाज़ा था कि इस मामले में ‘खेला’ किया गया है, तभी इस मामले को पुडुचेरी ट्रांसफर किया गया था। 27 फरवरी, 2018 को उनका निधन हो गया। हिन्दू धर्म के प्रसार और सामाजिक कार्यों के कारण उनकी तुलना रामानुजन से भी हुई।
दलितों के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएँ स्थापित करने के लिए उन्होंने जीवन पर्यन्त प्रयास किया। जातिगत भेदभाव के लिए उनके मन या मठ में कोई जगह नहीं थी। वो एक ऐसे संत थे जिन्होंने धारावी की गरीब बस्तियों में भी घुस कर जन-कल्याण के कार्य किए थे। देश की कई दलित बस्तियों में वो घूमे। कई हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। 18 जुलाई, 1935 को जन्मे जयेन्द्र सरस्वती को 1994 में उनके गुरु चंद्रशेखर सरस्वती स्वमिगल के निधन के बाद मठ का दायित्व सौंपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की MK स्टालिन सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आगमिक मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति में सरकारी ज़बरदस्ती पर रोक लगाते हुए ‘स्टे ऑर्डर’ दिया है और कहा है कि सरकार किसी भी परंपरा में जबरन घुसने की कोशिश न करे। सुप्रीम कोर्ट ने आगमिक मंदिरों में सरकारी गाइडलाइन्स के हिसाब से नियुक्तियों पर रोक लगाई है, और मद्रास हाई कोर्ट की एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखने को कहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि आगमिक मंदिरों पर सरकार की गाइडलाइन्स लागू नहीं होंगी।
तमिलनाडु के मंदिर सरकार के हाथों में कैद!
तमिलनाडु में करीब 42,500 मंदिर हैं, जिनमें पुजारियों की नियुक्ति सरकार करती है। इन मंदिरों में करीब 10 प्रतिशत मंदिर आगमिक परंपरा के हिसाब से हैं। ये मंदिर बहुत पुराने हैं और अपनी अलग विशेष परंपरा और समुदाय की नीतियों का पालन करते हैं। चूँकि तमिलनाडु की सरकार ने नियम बनाया है कि मंदिरों में तैनाती के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘पुजारी डिप्लोमा’ हासिल करने वाले व्यक्ति ही पात्र होंगे। इस नीति के हिसाब से मंदिरों में भले ही कोई दशकों से पूजा कर रहा हो, लेकिन उसके पास तमिलनाडु सरकार का डिप्लोमा नहीं है, तो वो पुजारी के पद पर काम करने के लिए पात्र ही नहीं होगा।
तमिलनाडु के मंदिरों में चढ़ने वाले चढ़ाने, दान इत्यादि की सरकार ही बंदोबस्ती करती है। वही इन पैसों की मालिक होती है। इसके बदले में वो मंदिरों की व्यवस्था देखती है, पुजारियों व अन्य कर्मचारियों की वैतनिक नियुक्ति करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात
इस मामले में ‘अखिल भारतीय आदि शैव शिवाचार्यर्गल सेवा एसोसिएशन’ ने रिट याचिका दायर की थी, जिस पर जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए आगमिक मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।
‘अखिल भारतीय आदि शैव शिवाचार्यर्गल सेवा एसोसिएशन’ की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद राज्य सरकार मनमानी कर रही है और संप्रदाय के बाहर के लोगों की नियुक्तियाँ कर रही है। सरकार कह रही है कि लोग इसके लिए ट्रेनिंग कर चुके हैं और वो पूजा-पाठ कराने में सक्षम हैं, जबकि हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि आगमिक मंदिरों के अपने रीति-रिवाज और उनकी अपनी परंपराएँ हैं। ऐस में उस परंपरा को मानने वाले लोगों की ही नियुक्ति हो सकती है।
पूरा मामला
तमिलनाडु सरकार ने साल 2020 में एक कानून बनाया था, जिसे तमिलनाडु हिंदू धार्मिक संस्थान कर्मचारी (सेवा की शर्तें) नियम, 2020 नाम दिया गया है। इसी नियम के तहत तमिलनाडु सरकार मंदिरों में पुजारियों (अर्चकों) की नियुक्ति करती है। लेकिन, अगस्त 2022 में मद्रास हाई कोर्ट की एकल खंडपीठ ने आगमिक मंदिरों को इस नियम के भाग 7 और 9 की व्याख्या करते हुए छूट दी थी और कहा था कि आगमिक मंदिरों पर सरकार का ये आदेश लागू नहीं होगा, क्योंकि वो मंदिर खास परंपरा के हिसाब से चलते हैं, उसमें सरकारी दखल की जरूरत नहीं है।
इसके बावजूद तमिलनाडु सरकार उस परंपरा के बाहर के पुजारियों की नियुक्ति आगमिक मंदिरों में करना चाहती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
क्या होते हैं आगमिक मंदिर?
तमिलनाडु में 8000 से अधिक आगमिक मंदिर हैं। इनके निर्माण की शैली से लेकर पूजा पाठ का तरीका भिन्न होता है। ये मंदिर शैव, वैष्णव या तांत्रिक परपंरा के पालक हो सकते हैं या फिर द्रविड़ परंपरा के भी। ये मंदिर आम मंदिरों से भिन्न होते हैं। इनकी माँग है कि सरकार इनकी परंपराओं के पालन में अड़ंगा न लगाए। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि तांत्रिक परंपरा के मंदिर में वैष्णव पुजारी की नियुक्ति कैसे हो सकती है? जबकि उस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कभी तांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं न लिया हो।
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ
तमिलनाडु के मंदिरों पर सरकार के कब्जे के खिलाफ कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इन पर सुनवाई हो रही है। ऐसी ही एक याचिका सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दायर की है, जिसमें उन्होंने मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त कराने की माँग की है। साल 2022 में स्वामी की याचिका पर सुनवाई भी हो चुकी है, जिसमें उन्होंने द्रमुक सरकार द्वारा नास्तिकों को पुजारियों के तौर पर नियुक्ति का विरोध किया था। इसके अलावा भी कई अहम याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
चेन्नई पुलिस ने गणेश चतुर्थी के पांडालों पर कई नियम-कानून लाद दिए हैं (चित्र साभार: चेन्नई लाइव) कुछ दिन पूर्व तमिलनाडु में कारीगरों द्वारा बनाई गई गणेश प्रतिमाओं को सील किए जाने का मामला सामने आया था। वहीं अब अब ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने एक फरमान जारी करके कहा है कि हिन्दुओं को विनायागार (गणेश) पांडाल लगाने के लिए बिजली विभाग, पुलिस, अग्निशमन विभाग, हाईवे विभाग और स्थानीय निकाय से पहले इस बात की इजाजत लें कि क्या वह पांडाल लगा सकते हैं।
इन सब शर्तों के अलावा DMK शासित राज्य की पुलिस ने कई अन्य शर्तें भी गणेश चतुर्थी त्योहार को लेकर लगाई हैं जिसमें मूर्ति की ऊँचाई, धार्मिक नारे न लगाने, पटाखे ना फोड़ने और गणेश मूर्तियों को प्रवाहित करने से सम्बंधित भी नियम लागू कर दिए हैं। यहाँ तक कि ऐसे स्थानों पर पांडाल लगाने से भी मना कर दिया गया है जहाँ कोई स्कूल या अस्पताल हैं।
ग्रेटर चेन्नई पुलिस द्वारा हिन्दुओं को जारी की गई इन गाइडलाइन्स को एक बार देखिए:-
1. जिन लोगों को जमीन पर गणेश प्रतिमा स्थापित की जानी है वो स्थानीय निकाय, हाइवे विभाग और अन्य सरकारी विभागों से अनुमति लें।
2. अग्निशमन विभाग, बिजली विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लें।
3. सारे नियमों को मानते हुए एक फ़ार्म भरके स्थानीय पुलिस थाने से अनुमति लें।
4. गणेश प्रतिमा की ऊँचाई 10 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
5. मूर्तियों को धार्मिक स्थलों, अस्पतालों और स्कूलों के आसपास नहीं बनाया जा सकता।
6. ऐसे नारे ना लगाए जाएँ कि दूसरे धर्म के लोग आहत हो जाएँ।
7. दो व्यक्तियों को 24 घंटे मूर्तियों के पास तैनात किया जाए।
8. पूजा पांडालों पर किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन वाले बैनर पोस्टर नहीं लगाए जा सकते।
9. आग से बचाने वाले नियम माने जाएँ, हर समय इस बात की निगरानी की जाए।
10. पुलिस द्वारा निर्धारित दिनों पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाए, प्रतिमाओं को चौपहिया वाहनों में रखा जाए और उन्हीं रूट से ले जाया जाए जो पुलिस बताए।
11. कहीं पर भी पटाखे ना फोड़े जाएँ, ना ही पांडालों में ना विसर्जन यात्रा के दौरान।
चेन्नई पुलिस ने यह सारे नियम ट्विटर पर एक नोटिस डालकर जारी किए हैं। लोगों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने चेन्नई पुलिस से प्रश्न पूछा है कि क्या वह अन्य मजहबों के त्यौहार पर क्या वह ऐसी ही एडवायजरी देते हैं और अगर ऐसा नहीं है तो फिर केवल हिन्दुओं के लिए ही ऐसे नियम क्यों हैं।
गणेश चतुर्थी के लिए चेन्नई पुलिस द्वारा लगाए गए नियम एवं शर्तें
Greater Chennai Police
On the occasion of Vinayagar Chaturthi, instructions for the installation and worship of Vinayagar idols:
1. Land owners where Vinayagar idols are going to be installed must have obtained permission from local bodies concerned, Highway Department or… pic.twitter.com/hYsV5O2PMU
लोगों ने यह भी प्रश्न पूछा है कि हाल ही में चेन्नई में ही हुए एआर रहमान के कॉन्सर्ट के लिए क्या एडवायजरी दी गई थी? गौरतलब है कि इस कॉन्सर्ट में कई महिलाओं के साथ छेड़खानी हुई थी और इसके गड़बड़ प्रबन्धन को लेकर चेन्नई के प्रशासन की खूब आलोचना हुई थी।
चेन्नई पुलिस ने यह सब नियम जारी करते हुए यह भी लिखा है कि नारों से किसी अन्य धर्म को समस्या ना हो। ऐसे में सवाल उठ सकता है कि क्या चेन्नई पुलिस ने पहले ही मान लिया है कि हिन्दुओं द्वारा लगाए जाने वाले नारों से अन्य धर्म के लोग भड़केंगे? हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब गणेश चतुर्थी में खलल डालने का प्रयास ना किया गया हो।
इससे पहले हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाने वाले कारीगरों के कारखानों को भी DMK सरकार ने सील करवा दिया था। यह कारीगर इस समय भगवान गणेश की मूर्तियाँ बना रहे थे जो कि इनकी आय का एकमात्र स्रोत हैं। अधिकारियों ने निर्दयता से इनके कारखानों को प्रदूषण के नाम पर सील कर दिया था।
हिन्दू कारीगरों पर हुए इस अत्याचार को मद्रास हाईकोर्ट ने सुनते हुए रविवार (17 सितंबर, 2023) को इनकी मूर्तियों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। कारीगरों पर आरोप था कि उन्होंने प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियाँ बनाई है जबकि उनका कहना था कि मूर्तियाँ ऐसी सामग्री से बनी हैं जो कि पानी में पूरी तरह से घुल जाती हैं। गणेश चतुर्थी पर नियम कानून बनाने वाली डीएमके के ही नेता उदयनिधि स्टालिन ने बीते दिनों सनातन को डेगू और मलेरिया जैसा बताकर खत्म करने की बात कही थी जिसका पूरे देश में विरोध हुआ था।
तमिलनाडु सरकार में मंत्री हैं MK स्टालिन के बेटे उदयनिधि
इतिहास साक्षी है कि जिस किसी ने भी सनातन को नष्ट करने का दुस्साहस किया, इतिहास से उसका ही नाम मिट गया। जिस दिन भारत में कट्टरपंथी और तुष्टिकरण करने वाले नेता और पार्टियां आतताई मुगलों का गुणगान बंद कर देंगे समस्त विश्व में कोई इनका नामलेवा नहीं मिलेगा, इन्ही कट्टरपंथी मुस्लिमों और तुष्टिकरण करने वालों की वजह से सिर्फ भारत में इन आतताइयों का नाम है अन्यथा समस्त विश्व में कहीं नहीं। मुग़ल आतताई भक्त ऐसे उनका गुणगान करते हैं, मानों वह इनके वंशज हो। दूसरे, भाजपा विरोधियों की नाजुक हालत को देखा जा सकता है। समय बहुत तेजी से बदल रहा है, सनातन विरोधियों का विनाश भी अधिक दूर नहीं। धैर्य की भी एक सीमा होती है, जिसे सनातन विरोधी नितरोज तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। सनातन विरोधियों सनातन के धैर्य की अग्नि-परीक्षा मत लो।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए। वह सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।
उदयनिधि ने सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”
Bring it on. I am ready to face any legal challenge. We will not be cowed down by such usual saffron threats. We, the followers of Periyar, Anna, and Kalaignar, would fight forever to uphold social justice and establish an egalitarian society under the able guidance of our… https://t.co/nSkevWgCdW
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”
Raul Vinchi @RahulGandhi ? Son of Catholic foreigner Antonio Maino and brother of Bianca Vadra? @INCIndia why are you letting Coloniser-evangelist-races foreigners lead your party?
उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”
उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन क्या है? सनातन नाम संस्कृत से आया है। सनातन समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन का यही अर्थ है।”
सोशल मीडिया साइट पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की लगातार माँग उठ रही है। इसी बीच ‘लीगल राइट्स ऑजरवेटरी- LRO’ नाम के एक एक्स हैंडल ने उदयनिधि पर कानूनी कार्रवाई की बात कही। LRO हैंडल ने लिखा, “हम चर्च के आदेश पर सनातन धर्म को बदनाम करने वाले गंदे मच्छरों को खत्म करने के लिए विभिन्न कानूनी उपाय तलाशेंगे! आप सज़ा से बचेंगे नहीं उदय स्टालिन।”
LRO के इस पोस्ट पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जवाब दिया और कहा कि वे अपनी बात पर कायम हैं। उदयनिधि ने कहा कि वो धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने खुद को परियार-कलैग्नार का अनुयायी बताते हुए कहा कि जो है, उसे उन्होंने सामने रखा है। इससे उनकी सनातन धर्म को रोकने की भावना बिल्कुल कम नहीं होगी।
उदयनिधि ने LRO के जवाब में कहा, “मैं किसी भी कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूँ। हम ऐसी भगवा धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हम पेरियार, अन्ना और कलैग्नार के अनुयायी हैं। हम माननीय मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के कुशल मार्गदर्शन में सामाजिक न्याय को बनाए रखने और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। मैं आज, कल और सदैव यही कहूँगा- द्रविड़ भूमि से सनातन धर्म को रोकने का हमारा संकल्प रत्ती भर भी कम नहीं होगा।”
करुणानिधि के पोते और फिल्मी सितारे हैं उदयनिधि
उदयनिधि स्टालिन डीएमके के मुखिया एमके स्टालिन के बेटे हैं। वो तमिल सिनेमा के एक्टर भी हैं, प्रोड्यूसर भी हैं और वितरक भी। आने वाले समय में वो कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ को भी प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस समय वो युवा और खेल विकास मामलों के मंत्री हैं। उनकी पार्टी डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. में भी शामिल है, तो राज्य में वो कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ती, सरकार बनाती रही है। उनके दादा का नाम एम करुणानिधि था, जो तमिलनाडु के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
डीएमके नेता के इस आपत्तिजनक बयान को लेकर तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने उदयनिधि पर निशाना साधा है। अन्नामलाई ने उदयनिधि के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। उन्होंने इसे ईसाई मिशनरियों का विचार बताया और कहा कि उदयनिधि जैसे मंत्री इस तरह के कार्यक्रम में आकर दुर्भावना को बढ़ा रहे हैं।
के. अन्नामलाई ने कहा, “गोपालपुरम परिवार का एकमात्र संकल्प राज्य सकल घरेलू उत्पाद से अधिक संपत्ति जमा करना है। थिरु उदयनिधि स्टालिन आप, आपके पिता या उनके विचारक के पास ईसाई मिशनरियों से खरीदा हुआ विचार है और उन मिशनरियों का विचार आप जैसे मूर्खों को अपनी दुर्भावनापूर्ण विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए तैयार करना था। तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। सबसे अच्छा काम जो आप कर सकते हैं, वह है इस तरह के कार्यक्रम में माइक पकड़ना और अपनी निराशा व्यक्त करना!”
The only resolve that the Gopalapuram Family has is to accumulate wealth beyond the State GDP.
Thiru @Udhaystalin, you, your father, or his or your idealogue have a bought-out idea from Christian missionaries & the idea of those missionaries was to cultivate dimwits like you to… https://t.co/sWVs3v1viM
भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट में लिखा, “तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को मलेरिया और डेंगू से जोड़ा है। उनका मानना है कि इसका सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। संक्षेप में वह सनातन धर्म का पालन करने वाली भारत की 80 प्रतिशत आबादी के नरसंहार के लिए आह्वान कर रहे हैं। द्रमुक विपक्षी गुट का एक प्रमुख सदस्य और कॉन्ग्रेस का लंबे समय से सहयोगी है। क्या मुंबई बैठक में इसी पर सहमति बनी थी?”
उदयनिधि स्टालिन ने पिछले साल क्रिसमस के कार्यक्रम में शामिल होने पर कहा था, “मुझे अपने आप को ईसाई कहने पर गर्व है। आज सभी संघी जल रहे होंगे, क्योंकि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री शेखरबाबू ‘हेलेलुजाह’ कह रहे हैं, उदयनिधि कह रहे हैं ‘मैं एक ईसाई हूँ’।”