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सुर्खियों में कर्नाटक के ‘शशि थरूर’: मंत्री राजन्ना ने Rahul Gandhi के वोट चोरी के दावों पर मारा झन्नाटेदार धप्पड़, अभी और भी आने है; जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है; विपक्ष जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की उडा रहा धज्जियां

कांग्रेस समेत सारा विपक्ष नरेंद्र मोदी का तब से विरोध करता रहा है जब मोदी संघ के सिर्फ एक प्रचारक थे। विपक्ष की आंख का कांटा मोदी बन गए गुजरात के मुख्यमंत्री। 2002 गुजरात दंगे करवा मोदी को लपेटने के साम, धाम, दंड और भेद सारे हतकंडे बुरी तरह से फेल होकर औंधे मुंह गिर गए। फिर इसी विपक्ष ने भारत का विदेशों में इतना बड़ा अपमान किया कि देशविद्रोहियों ने अमेरिका को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वीसा नहीं देने के लिए एक बार नहीं कई बार पत्र लिखे। लेकिन उसी अमेरिका ने मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सबसे पहले अमेरिका आने का निमंत्रण देकर इस देश विरोधी विपक्ष के जोरदार झन्नाटेदार धप्पड़ मारा। जिसका ना ही देश की बेशर्म जनता और ना ही विपक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन महामूर्ख बेशर्म जनता जनतंत्र, लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उडाने वाले विपक्ष को वोट दे देते हैं। 
जो ड्रामेबाज़ विपक्ष बिहार में SIR को लेकर हंगामा कर रहा है ये ही विपक्ष बंगाल में SIR होने पर आपस में लड़ते चुनाव आयोग को गुप्त समर्थन देंगे। आगे आगे देखिए होता है क्या?

अगर जनता अपनी बंद अक्ल को खोल SIR पर हो रहे हंगामे की असलियत को जानेगी तो राहुल गाँधी सारे विपक्ष की बर्बादी करने वाले साबित होंगे। कांग्रेस और अन्य पार्टियों में नेता ही वोट चोरी को बेनकाब करने लगे हैं। जो चुनाव आयोग और मोदी सरकार की सबसे जीत है। राहुल की hit and run चाल को विपक्ष भी समझ रहा है। लेकिन विपक्ष और राहुल के बीच सांप और छछूंदर की लड़ाई चल रही है। 

अब यह साफ हो गया है कि राहुल गांधी को दूसरे दलों में राजनीतिक विरोधियों की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनकी खुद की पार्टी में एक के बाद एक उनके और उनकी विचारधारा के धुर-विरोधी सामने आ रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी जिन बैसिर-पैर के मुद्दों को उठाते हैं, उनपर कई कांग्रेस नेताओं का ही मतैक्य नहीं होता। जो चापलूस और दब्बू स्वभाव के कांग्रेसी हैं, वे चुप्पी साध जाते हैं और कुछ सिर उठाकर राहुल गांधी की गलतियों और कांग्रेस की नाकामियों को गिनाकर राहुल को ही कठघरे में ले आते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर तो इस मामले में काफी सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन उन पर राहुल गांधी का अभी कोई बस नहीं चला है। थरूर के ही नक्शेकदम पर चलते हुए कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी को ही सच का सामना करा दिया। राजन्ना ने स्पष्ट शब्दों में राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ही चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए। क्योंकि यदि कुछ ऐसा है तो ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं हैं। कांग्रेस के युवराज राहुल को अपना ऐसा विरोध बहुत ही नागवार गुजरा। उन्होंने कर्नाटक के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करवा दिया!

हमारी थी जिम्मेदारी, उस समय हम चुप क्यों रहे- राजन्ना
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कहा, ‘कांग्रेस ने उस समय इस पर ध्यान नहीं दिया, इसलिए आगे फिर तैयार रहना होगा।’ चुनाव में गड़बड़ी को लेकर उन्होंने कहा कि महादेवपुरा में सचमुच धोखाधड़ी हुई थी। एक शख्स तीन अलग-अलग जगहों पर पंजीकृत था और उसने तीनों जगह वोट दिया। जब मतदाता सूची का मसौदा तैयार हो रहा हो तो हमें नजर रखनी चाहिए और आपत्तियां दर्ज करानी चाहिए थीं, जो हमारी जिम्मेदारी है। उस समय हम चुप क्यों रहे, लेकिन अब उसके बारे में बात कर रहे हैं। वहीं राजन्ना की इस टिप्पणी से कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता नाराज हैं। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राजन्ना पूरी तरह से दोषी हैं और पार्टी नेतृत्व उनकी टिप्पणी का जवाब देगा। राजन्ना का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। दिल्ली में विपक्ष के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च निकाला।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बहुत करीबी माने जाते हैं केएन राजन्ना
कर्नाटक कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने सोमवार (11 अगस्त) को सिद्धारमैया सरकार में सहकारिता मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। दावा किया जा रहा है कि केएन राजन्ना ने पार्टी आलाकमान की ओर से इस्तीफा देने की मांग के बाद पद छोड़ने का फैसला किया। राजन्ना का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया है। खास बात है कि राजन्ना को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है, लेकिन कहा जा रहा है कि वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस को ही घेरने के चलते उनके खिलाफ राहुल गांधी के कहने पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस या राज्य सरकार ने साफतौर पर कुछ नहीं कहा है।

अवलोकन करें:-

राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
राहुल जी नेहरू थे बूथ कैप्चरिंग(वोट चोरी) के मास्टरमाइंड; जिसे राहुल गाँधी बता रहे थे ‘एटम बम’, उ
 

राजन्ना ने राहुल के वोट चोरी के आरोपों की आलोचना भी की
एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चाहते थे कि राजन्ना को निकाल दिया जाए। खास बात है कि राहुल दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ वोट चोरी के मुद्दे पर ही प्रदर्शन कर रहे हैं। सूत्रों ने यह भी बताया है कि राजन्ना कई मौकों पर नेतृत्व परिवर्तन की बात कह चुके थे। इसके अलावा केएन राजन्ना ने राहुल गांधी की ओर से लगाए गए वोट चोरी के आरोपों की आलोचना की थी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित खामियों को दूर करने में विफल रही। इसके लिए तो पार्टी को शर्मिंदा होना चाहिए, क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची तब तैयार की गई थी, जब कांग्रेस सत्ता में थी। ऐसे में चुनाव आयोग या बीजेपी को घेरने का कोई औचित्य ही नहीं है।

कांग्रेस के सत्ता में रहते तैयार हुई थी मतदाता सूची
कांग्रेस नेता केएन राजन्ना ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘क्या उस समय हर कोई आंखें बंद करके चुपचाप बैठा था? पार्टी को शर्म आनी चाहिए।’ कर्नाटक मंत्री ने पीटीआई को बताया कि अगर हम ऐसी बातों पर यूं ही बात करने लगे तो अलग-अलग राय सामने आएगी। मतदाता सूची तब तैयार हुई थी, जब हमारी सरकार सत्ता में थी। उस समय क्या कांग्रेस अपनी आंखें बंद किए चुपचाप बैठी थी? उन्होंने आगे कहा कि ये अनियमितताएं हुई थी, यही सच है। इसमें कुछ भी झूठ नहीं है। हमारी जिम्मेदारी है और हमें शर्म आनी चाहिए। क्योंकि ये अनियमितताएं हमारी आंखों के सामने हुईं। ऐसे समय में जब पार्टी को आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी, वह चुप रही।

अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं तो आपत्ति नहीं की
राजन्ना ने अपनी ही पार्टी पर आरोप लगाते हुए तुमकुरु में पत्रकारों से कहा था, मतदाता सूची तब बनाई गई थी, जब कर्नाटक में पार्टी सत्ता में थी। तब उन्होंने इस पर आंखे क्यों मूंद लीं। अगर हमारी आंखों के सामने गड़बड़ियां हुईं और हमने तब आपत्ति नहीं जताई, तो आज शिकायत करने का क्या औचित्य है। तब कम आबादी वाले इलाकों में संदिग्ध नाम जोड़े गए। ये सब हमारी आंखों के सामने हुआ, लेकिन निगरानी नहीं की गई। ये पार्टी की नाकामी है।

राजन्ना बोले- ये मेरे खिलाफ साजिश, थोड़े दिन में खुलासा करूंगा
इस्तीफा देने के बाद राजन्ना ने कहा, ‘मैं अब आपसे पूर्व मंत्री के रूप में बात कर रहा हूं। मेरे हटाए जाने के पीछे एक बड़ी साजिश है, मुझे पता है इसके पीछे कौन है और क्या किया गया। पूर्व मंत्री कहलाने में मुझे खुशी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुझे मौका दिया, इसके लिए मैं उनका और सभी मंत्रियों का धन्यवाद करता हूं। आने वाले दिनों में मैं इस साजिश का पूरा खुलासा करूंगा।’ यह हाईकमान का फैसला है। मैं पार्टी के फैसले के प्रति वफादार हूं। मैं दिल्ली जाकर राहुल गांधी से बात करूंगा।

राहुल ने बेंगलुरु में 8 अगस्त को की थी ‘वोट अधिकार रैली’
इससे पहले 8 अगस्त को राहुल ने कर्नाटक के बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट अधिकार रैली’ की थी। इस दौरान उन्होंने अनर्गल आरोप लगाया कि तीसरी बार 25 सीट के मार्जिन से प्रधानमंत्री बने हैं। 25 सीट ऐसी हैं, जिन्हें भाजपा ने 35 हजार या कम वोट से जीतीं। अगर हमें इलेक्ट्रानिक डेटा मिल जाए तो हम साबित कर सकते हैं। राहुल ने कहा, ‘चुनाव आयोग को पिछले 10 साल की देश की सारी इलेक्ट्रॉनिक वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी देनी चाहिए। ये सब नहीं देंगे तो क्राइम है।

दिल्ली : मंत्री कैलाश गहलोत का AAP से इस्तीफा: कहा- ‘शीशमहल’ से पार्टी की छवि हुई खराब, जनता का काम करने की जगह राजनीतिक एजेंडे की चल रही लड़ाई; BJP किसी भी आप सदस्य को लेकर भयंकर भूल करेगी


दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को गहरा झटका लगा है। दिल्ली सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत ने पार्टी से त्याग-पत्र दे दिया है। कैलाश गहलोत के पास दिल्ली सरकार में गृह, प्रशासनिक सुधार, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी की बड़ी जिम्मेदारी रही है। कैलाश ने अरविंद केजरीवाल को लिखी चिट्ठी X पर भी शेयर की है।

इस चिट्ठी में कैलाश में आरोप लगाया है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता को किए गए अपने वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने यमुना की सफाई में नाकामी, अरविंद केजरीवाल के बंगले का निर्माण सहित कई मुद्दों को उठाया है और कहा कि इन सब अजीबो-गरीब मुद्दों के कारण AAP की जनता में छवि खराब हुई है और पार्टी बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है।

अपने पत्र में गहलोत ने लिखा है, “पार्टी आज गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। मूल्यों की भी चुनौतियाँ हैं, जो हम साथ लेकर चले थे। राजनीतिक महत्वाकांक्षी ने लोगों के प्रति प्रतिबद्धता को पीछे छोड़ दिया है और कई वादे अधूरे रह गए हैं। इसमें यमुना का उदाहरण है, जिसे हमने स्वच्छ नदी बनाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए। यमुना अब पहले से भी अधिक प्रदूषित हो गई है।”

अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, इन सबके अलावा शीशमहल जैसे अजीबो-गरीब और शर्मिंदा करने वाले विवाद सामने आए। इसके कारण अब हर कोई इस बात पर आशंका करने लगा है कि क्या हम आज भी ‘आम आदमी’ में विश्वास रखते हैं। अब लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हम लोग अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए लड़ रहे हैं।”

दिल्ली के लोगों को किए गए वादों को पूरा करने में नाकामी के साथ केंद्र से लड़ाई को लेकर गहलोत ने कहा, “इन सब कारणों ने दिल्ली के लोगों के लोगों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की हमारी क्षमता को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। अब यह निश्चित है कि दिल्ली का वास्तविक विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक वह अपना अधिकांश समय केंद्र के साथ लड़ाई में व्यतीत करती है।”

अपने राजनीतिक जीवन और अंत में इस्तीफे को लेकर लेकर जाट परिवार में जन्मे कैलाश गहलोत ने आगे लिखा, “मैंने अपना राजनीतिक जीवन दिल्ली के लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए शुरू किया था। मेरे पास आम आदमी पार्टी से अलग होने के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।”

पिछले कुछ महीने में दिल्ली सरकार के 2 मंत्रियों और 2 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। इससे पहले स्वाति मालीवाल ने भी बागी रुख अपना लिया है। माना जा रहा है कि दिल्ली के नजफगढ़ से भाजपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बने कैलाश गहलोत जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव फरवरी 2025 में प्रस्तावित है।

Anti Aurat Party=AAP : पंजाब के मंत्री बलकार सिंह का अश्लील वीडियो आया सामने; मालीवाल के बाद एक और महिला उत्पीड़न

दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोगों में महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है। ताजा मामला पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक सीनियर नेता का है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक मंत्री का अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पंजाब सरकार के मंत्री बलकार सिंह अश्लील हरकतें करते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि AAP नेता बलकार सिंह ने नौकरी मांगने आई एक 21 साल की लड़की को वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने को कहा। इतना ही नहीं आप सरकार का यह मंत्री वीडियो कॉल के दौरान ही उसके सामने हस्तमैथुन भी करने लगा। बीजेपी नेता तजिंदर बग्गा ने बलकार सिंह को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है।

आम आदमी पार्टी सिर्फ महिलाओं का सम्मान करने का दिखावा करती है, असल में महिलाओं से दुव्यवहार करना इस पार्टी के नेताओं की रग-रग में बसा है। इससे पहले भी खुद अरविंद केजरीवाल समेत उनकी पार्टी के कई विधायकों और नेताओं पर महिलाओं से बदसलूकी के संगीन आरोप लग चुके हैं। कई तो जेल की हवा भी खा चुके हैं।

 

आप भी देखिए केजरीवाल के नेताओं की करतूत-

स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट 

केजरीवाल और उनकी पार्टी में महिलाओं के प्रति कोई सम्मान का मामला सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट से भी समझ सकते हैं। दिल्ली में सीएम हाउस में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की गई। स्वाति ने केजरीवाल के पीए विभव कुमार पर मारपीट करने का आरोप लगाया। स्वाति मालीवाल पुलिस में शिकायत लिखवाने के बाद मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज करा चुकी है। लेकिन AAP का कहना है कि स्वाति मालीवाल के साथ हुई घटना के पीछे बीजेपी है। सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर भी केजरीवाल की पार्टी को फटकार लगा रहे हैं।

जबकि इसके पहले केजरीवाल के करीबी सांसद संजय सिंह ने स्वाति सिंह के साथ बदसलूकी की बात कबूल की थी। और उन्होंने कहा था कि सीएम केजरीवाल ने विभव के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

लेकिन कार्रवाई की बात तो दूर केजरीवाल लखनऊ में विभव कुमार के साथ घूमते दिखे। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब केजरवाल से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने चुप्पी साधते हुए माइक समाजपार्टी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर बढ़ा दिया।

केजरीवाल बोले समझौता कर लो
केजरीवाल के पहले कार्यकाल में नरेला से आप कार्यकर्ता सोनी ने मौत से पहले पार्टी के ही एक कार्यकर्ता रमेश भारद्वाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि रमेश भारद्वाज की शिकायत लेकर वह मुख्यमंत्री से भी मिली थी, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। उसने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने भारद्वाज से समझौता करने को कहा। 

शरद चौहान को जाना पड़ा जेल
सोनी मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक शरद चौहान को जेल भी जाना पड़ा क्योंकि सोनी ने उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। सोनी ने विधायक शरद चौहान पर रमेश भारद्वाज को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।

दिल्ली के कानून मंत्री ने दिखाया कानून को ठेंगा

दिल्ली सरकार में कानून मंत्री रहे सोमनाथ भारती अपने ही घर में कानून की धज्जियां उड़ाते रहे। खुद उनकी पत्नी लिपिका मित्रा उनसे खौफ खाती रही। पत्नी ने प्रेग्नेन्सी के दौरान अपने ऊपर कुत्ता छोड़ने और प्राइवेट पार्ट पर कुत्ते से कटवाने का आरोप भी अपने पति पर लगाया। सोमनाथ भारती ने 2014 में मालवीयनगर के खिड़की एक्सटेंशन इलाके में अफ्रीकी मूल की महिलाओं के घर भीड़ के साथ पहुंचकर छापा मारा, इस दौरान माहिलाओं के साथ भीड़ ने छेड़छाड़ किया। 

महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार का कारनामा

पहले कार्यकाल में दिल्ली सरकार में महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार की ऐसी सीडी सामने आयी जिसमें संदीप कुमार महिलाओं के साथ अंतरंग अवस्था में थे। जब हंगामा बरपा और सीडी के पीछे का सच परत दर परत सामने आने लगा तो लोग चकित रह गये।

कानून मंत्री दिनेश मोहनिया भी पहुंचे जेल
सोमनाथ भारती के बाद दिल्ली सरकार के कानून मंत्री दिनेश मोहनिया पर भी महिला से बदसलूकी का आरोप लगा। दिनेश मोहनियां पर न सिर्फ एक महिला ने बदसलूकी का आरोप लगाया था, बल्कि एक बुजुर्ग ने भी उनके खिलाफ थप्पड़ जड़ने का आरोप लगाया था। गैरजमानती धाराओं की वजह से दिनेश को तिहाड़ जाना पड़ा।

आप विधायक ने दी रेप और हत्या की धमकी

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानुल्लाह खान पर उनके ही इलाके में रहने वाली एक महिला ने बलात्कार और हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया। जामिया नगर थाने में दर्ज करायी गयी प्राथमिकी के अनुसार विधायक शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाल रहे थे। 

AAP नेता अब्दुल रहमान पर मुकदमा दर्ज
दिल्ली के जाफराबाद थाने में आम आदमी पार्टी के विधायक अब्दुल रहमान के खिलाफ 28 फरवरी 2021 को एफआईआर दर्ज की गई। सीलमपुर से आप विधायक रहमान के ऊपर एक महिला ने छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगाया। महिला ने आरोप लगाया कि विधायक अब्दुल रहमान ने उनके साथ छेड़छाड़ की और विरोध करने पर मारपीट भी की। आजतक की खबर के अनुसार अब्दुल रहमान रविवार को जाफराबाद इलाके में नगर निगम के उपचुनाव के दौरान मौजूद थे। तभी उनकी एक महिला के साथ कोई बहस हुई थी।

नौकरी का झांसा देकर बलात्कार का आरोप
आप नेता रमन स्वामी पर संगीन इल्जाम लगा कि उन्होंने शादीशुदा महिला के साथ बलात्कार किया। महिला ने नेताजी पर दोस्ती के बाद नौकरी दिलाने का झांसा देने और बलात्कार करने का आरोप लगाया जो मेडिकल परीक्षण में साबित भी हुआ। रमन स्वामी पर 2014 में बलात्कार का केस दर्ज हुआ।

कांग्रेस प्रत्याशी के घर घुसकर छेड़छाड़
दिल्ली के सीमापुरी से केजरीवाल के पहले कार्यकाल में आम आदमी पार्टी विधायक धर्मेन्द्र कोली पर पूर्व कांग्रेस विधायक के घर में घुसकर छेड़छाड़ और दंगा करने के आरोप लगे। कोली के खिलाफ ये आरोप कांग्रेस नेता वीर सिंह धींघन ने लगाए थे। उनका कहना था कि विजय जुलूस के दौरान विधायक ने उनकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ किया। 

मनोज कुमार पर घरेलू हिंसा के आरोप
केजरीवाल से कोंडली से विधायक मनोज कुमार के खिलाफ उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी थी। महिला का कहना था कि ससुरालवालों के अत्याचार से तंग आकर उसने घर छोड़ दिया था। दो साल से वह अपने मायके में रह रही है। 

राखी बिड़लान के पिता पर बलात्कार के आरोप
पहले कार्यकाल में मंगोलपुरी की विधायक राखी बिड़लान और उनके पिता एवं आप के सदस्य राम प्रताप गोयल पर 24 वर्षीया महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। उनपर आरोप लगा कि उन्होंने महिला को एमसीडी चुनाव में टिकट दिलवाने का लालच दिखाकर अपने झांसे में फंसा एक दिन उस महिला को अपने रोहिणी स्थित सुनसान मकान में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने नबबंर 2016 में उन्हें गिरफ्तार किया था।

राजेश ऋषि पर परेशान करने का आरोप
पहले कार्यकाय में ही आम आदमी पार्टी के जनकपुरी पश्चिम के विधायक राजेश ऋषि का नाम सुसाइड नोट में लिखकर एक महिला ने आत्महत्या करने का प्रयास किया। घटना 15 जुलाई 2016 की है। महिला ने पुलिस के पास दर्ज शिकायत में भी विधायक का नाम लिया। उसने विधायक राजेश ऋषि और उनके एक साथी पर परेशान करने का आरोप लगाया।

अब देखते हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी महिलाओं का कितना सम्मान करती है…

महिलाओं के सोने के स्थान पर लगावाए सीसीटीवी कैमरे

साल 2020 में दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा कि उन्होंने महिलाओं के सोने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगावाए है। उपर आरोप लगा कि मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रही महिला पार्षदों के बैठने और सोने के स्थान पर कैमरे लगवा दिए हैं। इस पर दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष योगिता सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से मुलाकात कर केजरीवाल के खिलाफ निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई करने का आग्रह किया। योगिता सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने निगम की महिला नेताओं पर नजर बनाए रखने लिए जिस हथकंडे का इस्तेमाल किया, वह सरासर अशोभनीय और अनैतिक है। अगर मुख्यमंत्री में थोड़ी-सी भी नैतिकता बाकी है, तो उन्हें निगम की महिला नेताओं से माफी मांगनी चाहिए। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मंगलवार, 15 दिसंबर,2020 को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से जवाब मांगा।

महिला कार्यकर्ता से बदसलूकी और मारपीट
दिल्ली के मटियाला वार्ड से ‘आप’ के पार्षद रमेश मटियाला के खिलाफ 31 मई, 2021 को पार्टी की महिला कार्यकर्ता के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। सोशल मीडिया पर पीड़ित महिला कार्यकर्ता का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें म​हिला ने खुद फेसबुक पर अपनी आपबीती सुनाई थी। वायरल वीडियो में पीड़िता का कहना है कि रमेश मटियाला ने अपनी उपस्थिति में दो महिला कार्यकार्ताओं को बुलवाया और मुझ पर हमला करवाया। रमेश ने उन्हें थप्पड़ मारने को भी कहा। इसके अलावा मेरे पोस्टर और बैनर जो मैंने टेस्ट कैंप के लिए लगवाया था, महिलाओं से उसे फाड़ने को कहा।


झारखंड : कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के बाद अब कांग्रेस मंत्री आलमगीर आलम के PS के नौकर जहाँगीर के घर से ED को मिले 200 करोड़ से अधिक रूपए ;वीडियो

राहुल गाँधी के साथ आलमगीर आलम (बाएँ) और उनके यहाँ से बरामद नकदी (साभार: Alamgir Alam/FB & India Today)
झारखंड सरकार में मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव के नौकर के घर में करोड़ों की नकदी बरामद हुई है। यह नकदी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे में बरामद की गई है। अभी रकम का अंतिम आँकड़ा सामने नहीं आया है। यह छापेमारी एक घोटाले के संबंध में की गई है।

झारखंड सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के नौकर के घर सोमवार (6 मई, 2024) को सुबह ED ने छापेमारी की। इस छापेमारी में ED को बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। जिस नौकर के यहाँ छापेमारी हुई है, उसका नाम जहाँगीर है।

ED यहाँ से बरामद नकदी में से 20 करोड़ रूपए की गिनती कर चुकी है। नोटों की गिनती अभी जारी है। इसके लिए नोट गिनने वाली मशीनें मँगाई गई हैं। बताया गया यह पैसा बड़े-बड़े बैग में भर कर रखा गया था। ED को यहाँ से नकदी के साथ ही सोने के आभूषण भी बरामद हुए हैं। नौकर के घर समेत ED ने 9 जगहों पर छापेमारी की है।

यह छापेमारी फरवरी 2023 ग्रामीण विकास विभाग में चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के यहाँ हुई छापेमारी के सिलसिले में हुई है। वीरेन्द्र राम के यहाँ छापेमारी में 100 करोड़ रूपए की सम्पत्ति का पता चला था और बड़े मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। यह मामला कुछ योजनाओं में अनियमितता से जुड़ा हुआ है।

आलमगीर आलम पाकुड़ विधानसभा से कांग्रेस के चार बार के विधायक हैं। वह चंपाई सोरेन की सरकार में संसदीय कार्य और ग्रामीण विकास मामलों के कैबिनेट मंत्री भी हैं। वह राज्य में कांग्रेस के बड़े नेता हैं। अब उनके निजी सचिव से जुड़े ठिकानों पर एजेंसी की जाँच चल रही है।

भाजपा ने कांग्रेस के मंत्री के नौकर के घर से हुई इस बरामदगी को लेकर हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस मामले पर कहा, “झारखंड सरकार की भ्रष्टाचार की अनंत गाथा खत्म नहीं हो रही है। कांग्रेस के एक सांसद के यहाँ से 350 करोड़ रूपए की बरामदगी हुई थी, खनन सचिव के यहाँ से 20 करोड़ रूपए की बरामदगी हुई थी। मुख्यमंत्री के करीबी पंकज मिश्रा के यहाँ 10 करोड़ रूपए की बरामदगी हुई थी और अब आलमगीर आलम के पीएस के यहाँ से बरामदगी हुई है। हम माँग करते हैं कि आलमगीर आलम को हिरासत में लिया जाए।”

भाजपा ने इस मामले में कहा है कि यह पैसा चुनाव के समय में बरामद हुआ है ऐसे में यह पता लगाया जाए कि इसका उपयोग कहीं चुनाव प्रभावित करने के लिए ना हो रहा हो। भाजपा ने इसी के साथ इस मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई किए जाने की माँग की है।

यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड के किसी कांग्रेस नेता के यहाँ बड़ी मात्रा में नकदी की बरामदगी हुई है। इससे पहले दिसम्बर, 2023 में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के यहाँ आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 351 करोड़ रूपए की नकदी, 2.80 करोड़ रूपए के जेवर और बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए थे। यह देश की सबसे बड़ी नकदी की जब्ती बताई गई थी। इस मामले में अभी आयकर विभाग की कार्रवाई चल रही है।

‘मैं मंत्री नहीं होता तो उसको (PM मोदी) टुकड़ों में फाड़ देता’: तमिलनाडु मंत्री ने भरी सभा में प्रधानमंत्री को दी धमकी, Video वायरल

टीएम अनबरसन (बाएँ) और पीएम मोदी (दाएँ)
तमिलनाडु की DMK सरकार में मंत्री टी एम अनबरसन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकाने वाला एक विवादित बयान दे रहे हैं। यह बयान एक भरी सभा में मंच दिया गया। DMK के मंत्री ने पीएम मोदी के टुकड़े करने की धमकी दी है।

प्रधानमंत्री को टुकड़ों में फाड़ने वाला अब तक जेल से बाहर क्यों घूम रहा है? अगर यही किसी अन्य जनमानस कही होती, तो सरकार से लेकर पुलिस तक अब तक उसको गिरफ्तार कर चुकी होती। लेकिन जब सफेदपोशी गुंडा बोले सब खामोश क्यों? क्या कानून जनमानस और सफेदपोशी गुंडों के लिए अलग-अलग है? अगर इसी का नाम कानून है, बंद कर दो सब अदालतें। मोदी से लाख दुश्मनायी हो सकती है, लेकिन वह आदमी देश का प्रधानमंत्री है। किसी भी सफेदपोशी गुंडों को प्रधानमंत्री के विरुद्ध ऐसी धमकी देने का अधिकार कब से हो गया? ऐसे गुंडों को वोट देने वाले मतदाताओं को डूब मरना चाहिए। जब ऐसे गुंडे सदन में होंगे, कानून एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं। समस्त विपक्ष खामोश क्यों? सनातन को गालियां देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री को टुकड़ों में फाड़ने की धमकी देना क्या विपक्ष का मुख्या उद्देश्य है? चुनाव आयोग और रात को आतंकवादियों के लिए खुलने वाली सुप्रीम कोर्ट कब ऐसी धमकियों का संज्ञान लेगी?  

वायरल हो रहे वीडियो में टीएम अनबरसन कहते हुए दिखते हैं, “मैंने अभी शांति रखी हुई है और मृदु बात कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। मैं मंत्री ना होता तो उसको टुकड़ों में फाड़ देता।” इस बयान के दौरान और भी लोग बैठे हुए हैं और ताली बजाते हैं।

टीएम अनबरसन तमिलनाडु की एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK-कांग्रेस गठबंधन सरकार में ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग और झुग्गी उन्मूलन बोर्ड के मंत्री हैं। अनबरसन का बयान पिछले सप्ताह का बताया जा रहा है। इससे एक सप्ताह पहले ही तिरूप्पुर में पीएम मोदी ने रोडशो किया था।

अनबरसन ने इसी बयान में कहा, “हमारे कई प्रधानमंत्री हुए, कोई ऐसे नहीं बोलता था। मोदी हमें मिटाने की बात करता है, लेकिन मैं एक बात याद दिला दूँ कि DMK कोई सामान्य संगठन नहीं है। यह कई बलिदानों और बहुत खून बहने के बाद बना है।”

इसके बाद उसने कहा, “जिन लोगों ने DMK को खत्म करने की बात की, उनका ही विनाश हो गया। यह संगठन बना रहेगा, ये बात दिमाग में रखना। मैंने उससे (पीएम मोदी) अलग तरीके से निपटता। अभी मैं चुप हूँ और मृदु तरीके से बोल रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। अगर मैं मंत्री ना होता, तो उसके साथ दूसरा ही तरीका अपनाता।”

भाजपा ने DMK पर किया हमला

अनबरसन के बयान के बाद भाजपा ने DMK की कड़ी आलोचना की। भाजपा ने INDI गठबंधन को निशाना बनाया है। DMK, INDI गठबंधन का हिस्सा है। अनबरसन के बयान को भाजपा नेताओं ने ट्विटर पर इस वीडियो को प्रसारित करते हुए खूब हमले किए हैं।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि INDI गठबंधन का एजेंडा इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकता। उनका लक्ष्य सनातन धर्म और इसको मानने वालों का विनाश करना है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार यादव ने कहा, “INDI गठबंधन का एक बार और छिछला स्तर। INDI गठबंधन लोकसभा परिणाम जानता है इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी को गालियाँ दे रहे हैं।”
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्विटर पर लिखा, “तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर बढ़ने से आई हताशा के कारण DMK के मंत्री हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी को धमकियाँ तक दे रहे हैं। अपनी विभाजन वाली राजनीति, भ्रष्ट आचरण, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के साथ कनेक्शन, गुंडागर्दी और कुशासन जैसे कारणों से राजनीतिक क्षेत्र से समाप्त हो जाएगी।”
टीएम अनबरसन का यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग DMK के रवैये की आलोचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले DMK मंत्री और CM स्टालिन के बेटे उदयानिधि सनातन को मिटाने की बात कर चुके हैं।

क्या जेल में बंद व्यक्ति मंत्री बना रह सकता है, सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ा सवाल

क्या आज सत्ता लोलुप्त नेता और उनकी पार्टियां एक भी वोट पाने के हक़दार हैं? संविधान की दुहाई देने वाले ही जब संविधान को तार-तार करते हो, वह नेता तो क्या किसी दुकान पर नौकर के भी योग्य नहीं, इस गंभीर मुद्दे पर कोई सत्ताधारी अथवा विपक्ष कोई कार्यवाही नहीं करेगा, बल्कि जनता को ही निर्णय करना होगा। ये लोग तुष्टिकरण तो करते ही हैं, कानून में भी भेदभाव करते हैं। जब किसी नौकर के जेल जाने पर कोई दुकानदार उसे नौकरी से निकाल देता है, लेकिन किसी मंत्री के जेल होने पर वह मंत्री बने रहता है। 
क्या गिरफ्तार हुआ, जेल में बंद व्यक्ति मंत्री बना रह सकता है? सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर ये सवाल पहुंचा है। इस बार मामला मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी द्वारा गिरफ्तार तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी का है। याचिकाकर्ता ने उन्हें मंत्री पद से हटाने की मांग की है। मद्रास हाई कोर्ट से सेंथिल बालाजी को मंत्री पद से हटाने का आदेश न मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर उन्हें हटाने की मांग की है और हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट अगर इस मामले में सुनवाई कर फैसला देता है तो भविष्य के लिए ऐसे मामलों में व्यवस्था तय हो जाएगी और गिरफ्तारी और जेल के बावजूद व्यक्ति को बिना पोर्टफोलियो के मंत्री बनाए रखने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सकेगी। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सत्येंद्र जैन जेल में रहते हुए नौ महीने तक मंत्री बने रहे और उन्होंने मंत्री पद की सैलरी भी उठाई। वहीं महाराष्ट्र में नबाब मलिक भी जेल जाने के बाद मंत्री पद पर काबिज रहे। 
पश्चिम बंगाल में ज्योति प्रिय मल्लिक गिरफ्तारी के बाद भी मंत्री बने हुए हैं। 

जेल में बंद सेंथिल बालाजी 5 महीने से मंत्री पद पर बरकरार
जेल में बंद तमिलनाडु सरकार के मंत्री सेंथिल बालाजी पांच महीने से मंत्री पद पर बरकरार हैं। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार में मंत्री सेंथिल बालाजी को ‘नौकरी के बदले नकदी’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 14 जून को गिरफ्तार किया गया था। वे अब भी तमिलनाडु सरकार में मंत्री हैं। हालांकि, उनके पास कोई विभाग नहीं है। इससे पहले उन्हें सुप्रीम कोर्ट से झटका लग चुका है। 7 अगस्त 2023 को शीर्ष अदालत ने बालाजी की गिरफ्तारी को चुनौती देने संबंधी याचिकाएं खारिज कर दी थी। सेंथिल और उनकी पत्नी मेगाला ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें हिरासत में लेने के ईडी के अधिकार को बरकरार रखा गया था।

बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं सेंथिल बालाजी
न्यायिक हिरासत में जेल में बंद तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को मंत्री पद से हटाने की मांग करने वाली याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल सेंथिल बालाजी के बिना पोर्टफोलियो के मंत्री बनाए रखने से सहमत नहीं थे। लेकिन राज्य सरकार ने बालाजी के मंत्रालय उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए दूसरे मंत्रियों को पुर्नआवंटित कर दिया और उन्हें बिना पोर्टफोलियो के मंत्री बना रहने दिया।

अनुच्छेद 154 व 163 तहत मंत्रियों को हटाने का प्रावधान
राज्यपाल की ओर से 29 जून को पत्र जारी कर सेंथिल बालाजी को तत्काल प्रभाव से मंत्री पद से हटा दिया। राज्यपाल ने ऐसा संविधान के अनुच्छेद 154 व 163 में मिली शक्तियों के तहत ऐसा किया। याचिका में कहा गया है कि उसी दिन देर रात राजभवन से एक और पत्र जारी हुआ जिसमें सेंथिल बालाजी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने के आदेश को फिलहाल टाल दिए जाने की बात कही गई और कहा गया कि गृहमंत्रालय को एडवोकेट जनरल से राय लेने की सलाह दी गई है। याचिका में कहा गया है कि ऐसा करना मनमाना, अवैधानिक और संविधान के खिलाफ है, राज्यपाल अपना आदेश वापस नहीं ले सकते क्योंकि यहां पर वह पदेन अधिकारी है।

राज्यपाल सीधे नहीं कर सकते किसी मंत्री को बर्खास्त
संविधान कहता है कि राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करेंगे और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे। किसी मंत्री की बर्खास्तगी के मामले में राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ही काम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट भी पूर्व फैसलों में कह चुका है कि ऐसे मामलों में राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करेंगे। ऐसे में राज्यपाल सीधे किसी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकते है। संभवतः इसी वजह से राज्यपाल ने सेंथिल बालाजी को पद से हटाने का फैसला टाल दिया।

सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व आदेश पर मद्रास हाई कोर्ट ने की चर्चा
मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका में मांगी गई राहत पर आदेश देने के बजाए मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि वह न्यायिक हिरासत में रह रहे सेंथिल बालाजी को बिना पोर्टफोलियो के मंत्री बनाए रखने पर निर्णय लें। दरअसल मद्रास हाई कोर्ट ने पांच सितंबर को रवि की याचिका व कुछ अन्य लोगों की याचिका पर एक साथ फैसला सुनाया था। उस फैसले में हाई कोर्ट ने मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था, सुशासन, सार्वजनिक नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता पर विस्तार से विचार किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व आदेश पर भी चर्चा की है।

जेल जाने के बाद भी कई मंत्री पदों पर रहे बरकरार
सेंथिल बालाजी से पहले महाराष्ट्र में नबाब मलिक और दिल्ली में सत्येन्द्र जैन जैसे कई मामलों में जेल जाने के बावजूद मंत्री पद काफी दिनों तक बरकरार रखा गया था। जबकि सरकारी कर्मचारियों के मामले में गिरफ्तारी के बाद स्वत: निलंबित होने का कानूनी प्रविधान है।

सत्येंद्र जैन जेल में रहते हुए नौ महीने तक मंत्री पद रहे
मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 30 मई 2022 को गिरफ्तार किए जाने के बाद सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल में रहते हुए भी वह नौ महीने तक मंत्री पद पर बने रहे। सत्येंद्र जैन से सीएम अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद इस्तीफा लिया था। जेल में रहते हुए उनका मसाज वाला वीडियो वायरल हुआ था। यह वीडियो की वजह से वह सुर्खियों में बने रहे। उनका यह वीडियो काफी विवादित रहा।

सत्येंद्र जैन ने जेल में रहते हुए नौ महीने मंत्री की सैलरी ली
सत्येंद्र जैन ने जेल में रहते हुए 9 महीने तक मंत्री पद की सैलरी ली। चंडीगढ़ के आरटीआई एक्टिविस्ट एचसी अरोड़ा ने आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी हासिल की। दिल्ली के एक मंत्री को प्रति माह 72,000 रुपये का वेतन मिलता है, जिसमें वेतन और तीन प्रकार के भत्ते शामिल हैं। एक मंत्री को किराया-मुक्त आवास, प्रति माह 3,000 यूनिट तक बिजली, एक चालक-चालित कार और प्रति माह 700 लीटर तक पेट्रोल और अन्य लाभ भी मिलते हैं। जुलाई 2022 में, दिल्ली विधानसभा ने मंत्रियों के वेतन और तीन भत्तों को 72,000 रुपये से बढ़ाकर 1.7 लाख रुपये करने के लिए एक विधेयक पारित किया था।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक जेल जाने के बाद भी मंत्री बने रहे
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों से जुड़े धन शोधन के एक मामले में 23 फरवरी 2022 को उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री नवाब मलिक को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दल भाजपा ने नवाब मलिक से इस्तीफे की मांग शुरू कर दिया। लेकिन, एनसीपी ने कहा कि मलिक मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा कि केवल आरोप मात्र से नवाब मलिक के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। और वे जेल में रहते हुए मंत्री पद पर बरकरार रहे। नवाब मलिक की गिरफ्तारी के चार महीने बाद उद्धव सरकार गिर गई थी और 30 जून 2022 को फ्लोर टेस्ट से पहले ही उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

नवाब मलिक पर पहले भी लग चुका भ्रष्टाचार का आरोप, देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
यह पहली बार नहीं था कि नवाब मलिक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इससे पहले साल 2005-2006 में प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने नवाब मलिक के खिलाफ माहिम स्थित जरीवाला चाल पुनर्विकास योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसको लेकर हजारे मुंबई के आजाद मैदान में धरने पर बैठे थे। उसके बाद मलिक को तत्कालीन विलासराव देशमुख की सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था। करीब 12 साल के बाद सुप्रीम कोर्ट से मलिक को राहत मिली थी।

पश्चिम बंगाल में ज्योति प्रिय मल्लिक गिरफ्तारी के बाद भी मंत्री
राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के राज्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक की 27 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद भी पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में किसी भी फेरबदल नहीं किया गया है। यानि वे अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। मल्लिक के पास वर्तमान में ममता बनर्जी सरकार में वन मामले और गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग हैं। उन्होंने 2011 से 2021 तक खाद्य आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया, इस अवधि के दौरान राशन वितरण में कथित अनियमितताएं हुईं।

मौजूदा कानून में दोषी, सजा होने पर ही सांसद-विधायक अयोग्य
मौजूदा कानून में तो दोषी ठहराए जाने और सजा होने पर ही सांसद या विधायक अयोग्य होता है और उसकी सदस्यता जाती है। कानून की नजर में सदस्य और मंत्री में अंतर नहीं है, अगर कोई सदस्य रह सकता है तो मंत्री भी रह सकता है। मंत्रियों की नियुक्ति की संवैधानिक व्यवस्था देखी जाए तो राज्यपाल ही नियुक्ति करता है और राज्यपाल ही बर्खास्त करता है। ऐसे में सवाल यह कि क्या राज्यपाल को जेल में बंद दागी मंत्री को पद से बर्खास्त करने का अधिकार है।

नियम कानूनों की शून्यता का उठा रहे फायदा
ऐसा क्या है कि सेंथिल बालाजी, सत्येंद्र जैन और नवाब मलिक जेल में होने के बावजूद मंत्री पद पर काबिज हैं और सत्ताधारी दल सीना ठोंक कर उनकी तरफदारी करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे नियम कानूनों की शून्यता है। जेल में बंद दागी मंत्री को पद से हटाने के बारे में कानून मौन है। इस बारे में ना तो कोई कानून है और ना ही कंडक्ट रूल में कुछ कहा गया है। यह ग्रे एरिया है जिसका लाभ भ्रष्टाचारी उठा रहे हैं।

सरकारी कर्मचारी के लिए कानून, सांसदों-विधायकों के लिए कानून नहीं
देखा जाए तो एक सरकारी कर्मचारी अगर दो चार दिन जेल में रहता है तो वह निलंबित हो जाता है, लेकिन एक मंत्री नौ महीने जेल में होने के बावजूद पद पर काबिज रहता है। इस अजीब संवैधानिक स्थिति पर लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीपी आचारी कहते हैं कि इस बारे में कोई कानून या नियम नहीं हैं। सरकारी कमर्चारी के बारे में कंडक्ट रूल में है कि जेल जाने पर वह निलंबित रहेगा लेकिन मंत्री के जेल जाने पर उसे पद से इस्तीफा देना होगा या वह पद से हटा दिया जाएगा कानून में ऐसी कोई बात नहीं कही गई है।

कानून बने या फिर अदालत व्यवस्था दे
इस संबंध में स्पष्टता आनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को यह मुद्दा तय करना चाहिए। देखा जाए तो इस स्थिति से निबटने के दो ही तरीके हैं या तो कानून बने या फिर अदालत व्यवस्था दे। कोर्ट किसी मुद्दे को तब तक परिभाषित नहीं करता या व्यवस्था नहीं देता है जब तक उसके सामने कोई मामला नहीं आता है। तो अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है और देखना है कि कोर्ट इस पर क्या फैसला करता है।