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कंडोम खरीदना हुआ पाकिस्तान की ‘औकात’ से बाहर, रेट सस्ते कराने IMF के पास पहुँचा तो मिली दुत्कार


दुनिया के 5वें सबसे अधिक आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान में बढ़ती आबादी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच आवाम के लिए गर्भनिरोधक साधन आज भी महँगे और पहुँच से दूर की चीज बने हुए हैं। पाई-पाई को मोहताज पाकिस्तान में हालात ऐसे हैं कि एक साधारण कंडोम का पैकेट भी बड़ी आबादी की पहुँच से बाहर है। इस संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान ने एक योजना बनाई कि गर्भनिरोधक उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत जनरल सेल्स टैक्स (GST) हटाकर उन्हें सस्ता किया जाए लेकिन अब यह योजना भी अधर में लटक गई है।

IMF ने कंडोम पर GST हटाने से किया मना

 दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान सरकार को बड़ा झटका देते हुए गर्भनिरोधक उत्पादों पर GST हटाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देश की तेजी से बढ़ती आबादी को लेकर खुले मंच से चिंता जता चुके हैं। पाकिस्तान की आबादी सालाना करीब 2.55 प्रतिशत की खतरनाक रफ्तार से बढ़ रही है और यह पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और भारी बोझ डाल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) ने IMF के सामने प्रस्ताव रखा था कि कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों से 18% GST हटाया जाए जिससे आने वाले बजट से पहले कीमतें कम की जा सकें। IMF ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि प्रधानमंत्री का अगस्त 2025 का निर्देश भी कागजों तक सीमित रह गया।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई महीने पहले ही FBR को निर्देश दिया था कि वह IMF के साथ इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों ने साफ कर दिया कि IMF अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

IMF के अधिकारियों ने बंद दरवाजों के पीछे हुई बातचीत में साफ शब्दों में पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को बता दिया कि गर्भनिरोधक उत्पादों पर किसी भी तरह की टैक्स राहत पर 2026-27 के बजट से पहले विचार ही नहीं किया जाएगा। यानी आम जनता को राहत देने की बात फिलहाल पूरी तरह टाल दी गई है।

पाकिस्तानी पक्ष ने बातचीत के दौरान सिर्फ कंडोम और गर्भनिरोधक साधनों पर ही नहीं बल्कि महिलाओं की जरूरत से जुड़े सैनिटरी पैड और शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले बेबी डायपर पर भी GST घटाने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि, IMF ने इन सभी सुझावों को सख्ती से खारिज कर दिया। IMF का तर्क था कि इन उत्पादों से सरकार को होने वाली टैक्स आय बहुत बड़ी है और इसे छोड़ना उनके हिसाब से ‘आर्थिक अनुशासन’ के खिलाफ होगा।

खास तौर पर बेबी डायपर को लेकर IMF ने कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों के मुताबिक, IMF ने यह दलील दी कि बेबी डायपर का टैक्स बेस करीब 100 अरब पाकिस्तानी रुपए के आसपास है और इसमें किसी भी तरह की छूट देने से सरकारी राजस्व को बड़ा झटका लग सकता है। यानी बच्चों की बुनियादी जरूरत भी पाकिस्तान में सिर्फ एक ‘रेवेन्यू आइटम’ बनकर रह गई है।

इस फैसले का सीधा असर आम पाकिस्तानी परिवारों पर पड़ रहा है। महँगाई पहले ही आसमान छू रही है, स्वास्थ्य सुविधाएँ बदहाल हैं और अब परिवार नियोजन के साधन भी महँगे बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भनिरोधक तक आसान पहुँच न होने से अनियोजित जन्म बढ़ेंगे, जिससे गरीबी, बेरोजगारी और कुपोषण जैसी समस्याएँ और गहराएँगी।

बढ़ती आबादी का ‘राष्ट्रीय आपातकाल’

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या फंड (UNPF) के आँकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा जनसंख्या 25.5 करोड़ के आस-पास है। इसमें 36.4% आबादी 0-14 वर्ष के बीच है जबकि 59.6% आबादी 15-64 साल के बीच की है। वहीं, देश की 4% आबादी की उम्र 65 वर्ष से अधिक है।

सतही तौर पर पाकिस्तान में बढ़ती आबादी का खतरा ना दिखे लेकिन पाकिस्तान के आर्थिक हालात आबादी के बोझ को सहने लायक नहीं बचे हैं। विश्व बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक, पाकिस्तान की आबादी में करीब 45% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने को मजबूर है।

खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आबादी के संकट को स्वीकार किया है। अगस्त 2025 में एक बैठक के दौरान उन्होंने देश में बढ़ती जनसंख्या दर को ‘चिंताजनक और खतरनाक रुझान’ बताया और कहा है कि इससे निपटने के लिए तुरंत राष्ट्रीय नीति की जरूरत है।

पाकिस्तान की आबादी के संकट को खुद सरकार ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ मान रही है। जुलाई 2025 में पाकिस्तान के योजना, विकास और विशेष पहल मंत्री एहसान इकबाल ने जनसंख्या प्रबंधन पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ शब्दों में कहा कि आबादी का मामला देश के लिए बेहद गंभीर और खतरनाक रूप ले चुका है। बैठक में बोलते हुए एहसान इकबाल ने माना कि जनसंख्या नियोजन का असर नागरिक के जीवन के हर पहलू पर पड़ता है अब चाहे वह स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो या रोजगार।

इकबाल ने कहा कि मौजूदा 2.55% की सालाना जनसंख्या वृद्धि दर के हिसाब से 2050 तक पाकिस्तान की आबादी 38.6 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। यह अनुमान साफ संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान पर जनसंख्या का दबाव कई गुना बढ़ने वाला है। वह भी ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।

पाकिस्तान में बढ़ती आबादी से और बढ़ता संकट

पाकिस्तान की आबादी अब उसका संकट बनती जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार से लेकर खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास पर इसका गंभीर असर दिखाई पड़ रहा है। जुलाई 2025 में पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने विश्व जनसंख्या दिवस 2025 पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान में आबादी बढ़ने की रफ्तार ‘खतरनाक स्तर’ तक पहुँच चुकी है।

इसी दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने जनसंख्या संकट के गंभीर नतीजों की ओर इशारा करते हुए चौंकाने वाले आँकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि देश में 2.5 करोड़ से अधिक बच्चे सिर्फ इसलिए स्कूल से बाहर हैं क्योंकि बढ़ती आबादी का दबाव शिक्षा व्यवस्था झेल नहीं पा रही। यह आँकड़ा अपने आप में पाकिस्तान के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जहाँ अगली पीढ़ी बिना शिक्षा के आगे बढ़ रही है।

सरकारी अस्पतालों की हालत पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि वहाँ मरीजों की भीड़ किसी सार्वजनिक रैली जैसी दिखाई देती है। यह बयान पाकिस्तान की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई बयान करता है, जहाँ अस्पताल इलाज के केंद्र कम और अव्यवस्था की तस्वीर ज्यादा बन चुके हैं। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने भी जनसंख्या वृद्धि के आर्थिक असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित आबादी देश के संसाधनों, सामाजिक ढाँचे और आर्थिक स्थिरता पर भारी दबाव डाल रही है।

पाकिस्तान में UNFPA के प्रतिनिधि Luay Shabaneh ने करीब एक हफ्ते पहले ‘डॉन’ में लिखा, “25 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में बेसिक रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विस तक पहुँच लोगों के लिए आज भी एक संघर्ष है। 16% शादीशुदा महिलाओं को आज भी फैमिली प्लानिंग की सुविधा नहीं मिलती है और गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की दर लगभग 32% पर अटकी हुई है।” उन्होंने लिखा, “पाकिस्तान में सालाना 3.5 मिलियन अनचाही प्रेग्नेंसी होती हैं और इनमें से 61% का नतीजा इंड्यूस्ड अबॉर्शन (गर्भपात) होता है, जो अक्सर असुरक्षित होता है।”

पाकिस्तान में ‘प्रजनन संकट’

IMF से पाकिस्तान को मिला झटका इसलिए भी मुश्किलें बढ़ाने वाला है क्योंकि पाकिस्तान अनचाही प्रेग्नेंसी से जूझ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल पाकिस्तान में करीब 1 करोड़ 27 लाख गर्भधारण होते हैं। इनमें से लगभग 60 लाख गर्भ ऐसे होते हैं, जिनकी योजना पहले से नहीं बनाई गई होती। यानी औसतन हर साल होने वाला हर दूसरा गर्भ अनचाहा होता है। यह स्थिति साफ दिखाती है कि देश में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ, गर्भनिरोधक साधनों तक पहुँच और परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता कितनी कमजोर है।

पाकिस्तान के फेडरल हेल्थ सेक्रेटरी हामिद याक़ूब शेख ने इसे राष्ट्रीय आपात स्थिति बताया है। उनके मुताबिक बिना योजना के होने वाले जन्म सिर्फ जनसंख्या का मसला नहीं हैं बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण व्यवस्था पर सीधा असर डालने वाली विकास की बड़ी समस्या है। आजादी के 77 साल में पाकिस्तान की आबादी 7 गुना बढ़ गई है जबकि अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक विकास की रफ्तार कछुए जैसी है।

पाकिस्तान में गर्भनिरोधकों की पहुँच को लेकर पहले से ही संकट है और IMF ने इसे और बढ़ा दिया है। ग्रामीण और गरीब इलाकों में रहने वाली लाखों महिलाओं तक आधुनिक गर्भनिरोधक साधन नहीं पहुँच सके हैं। पाकिस्तान में कम साक्षरता और स्वास्थ्य शिक्षा की कमी के चलते गर्भनिरोधक को लेकर कई गलत धारणाएँ फैली हुई हैं। बहुत-सी महिलाओं को लगता है कि परिवार नियोजन से हमेशा के लिए बाँझपन हो जाता है या फिर यह धर्म के खिलाफ है।

एक बड़ी समस्या महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर भी है। कब-कितने बच्चे पैदा हो महिलाओं को पाकिस्तान में इसका अधिकार ही नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वो अपने फैसले खुद नहीं ले पाती हैं।

ऐसी अनचाही प्रेगनेंसी का असर हर स्तर पर दिखता है। अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है, मातृ-मृत्यु दर बढ़ी हुई है और करीब 40% बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। बेरोजगारी-गरीबी भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में पहले से खस्ताहाल आर्थिक ढाँचे पर बोझ बढ़ता ही जा रहा है। अपने आर्थिक फैसलों के लिए IMF पर मजबूर पाकिस्तान की समस्याएँ दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं।

क्या पाकिस्तान की बढ़ती आबादी भारत के लिए चिंता की बात है?

1944 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के फिलाडेल्फिया घोषणा पत्र में संगठन के सिद्धांतों में कहा गया था कि ‘कहीं भी गरीबी, हर जगह समृद्धि के लिए एक खतरा है’। यह बात आज भी लागू होती है। यही समस्या भारत के लिए भी है। पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती आबादी भारत के लिए सबसे पहले सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करती है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 35 करोड़ तक जा सकती है। इतनी बड़ी आबादी को रोजगार, शिक्षा और संसाधन न मिलने की स्थिति में आंतरिक अस्थिरता बढ़ना तय है। पड़ोसी होने के नाते इसका असर सबसे अधिक भारत पर ही पड़ने की संभावना है।

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के साथ पानी, जमीन और रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। अधिकतर इलाकों में संसाधनों की कमी पहले से ही मुश्किलें पैदा कर रही है। आगे चलकर अगर परिस्थितियाँ बिगड़ती हैं तो में सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ, तस्करी और अपराध बढ़ने की आशंका रहती है। भारत-पाकिस्तान सीमा पहले ही संवेदनशील है और यदि पाकिस्तान में जनसंख्या दबाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

आतंकवाद समर्थक IMF से पाकिस्तान को मिली 8500 करोड़ रूपए की ‘भीख’, वोटिंग से किनारा करने पर राजदीप सरदेसाई और कांग्रेस भारत को बदनाम करने में जुटे

                           इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई (लेफ्ट), कांग्रेस नेता जयराम रमेश (राइट)
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने शुक्रवार (9 मई 2025) को पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए 8,500 करोड़ रूपए की मंजूरी दी है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश और इंडिया टूडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भारत सरकार पर हमला बोला है।
पाकिस्तान को कर्जा देने वाले किस मुंह से आतंकवाद का विरोध करते हैं? क्या इन देशों पर विश्वास किया जा सकता है? इन देशों की जनता को अपनी सरकारों से पूछना चाहिए। कौन कहता है कि पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर है? सत्ता मुक्त होते ही पाकिस्तान के नेता और फौजी विदेशों में रह रहे होते हैं, वह क्या वहां भीख मांगकर रहते हैं? अपनी जनता को पागल बनाकर विदेशों में अपनी तिजोरियां भरने वालों का देश क्या भुखमरी के कागार पर हो सकता है?       

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस ने पहले ही माँग की थी कि भारत आईएमएफ में पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध करे, लेकिन मोदी सरकार ‘डर’ गई और उसने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ‘नहीं’ में वोट करता तो यह एक मजबूत संदेश होता।

वहीं पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी भारत सरकार के बारे में गलत जानकारी को आगे बढ़ाया और सवाल किया कि भारत ने आईएमएफ मीटिंग में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया। सरदेसाई ने 9 मई 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भारत ने आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज के लिए वोटिंग से किनारा किया है। सवाल: हमने इस्लामाबाद के खिलाफ वोट क्यों नहीं किया, जबकि इसमें हमारे हित जुड़े हुए थे?”

सोशल मीडिया पर भी आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को कर्ज देने का विरोध किया जा रहा है। कुछ यूजर्स आईएमएफ को आतंकवाद की मदद करने वाली संस्था बता रहे है और इसी के साथ #IMFSupportsTerrorism, #IMFSupportsTerrorist, #ShameOnIMF जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

भारत ने शुक्रवार (9 मई 2025) को IMF की बैठक में पाकिस्तान को और ज्यादा पैसे देने का खुलकर विरोध किया था। भारत ने कहा कि पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और जो भी पैसा दिया जाएगा, उसका इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

आईएमएफ की बैठक में पाकिस्तान को 8,500 करोड़ रूपए का नया कर्ज देने के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया। भारत ने बताया कि पिछले 35 सालों में से 28 साल पाकिस्तान को IMF से मदद मिली है, लेकिन फिर भी वहाँ कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी फौज का देश के आर्थिक मामलों में बहुत ज्यादा दखल है, जिससे सुधार करना मुश्किल है। भारत ने ऐसे देश को पैसा देने पर आपत्ति जताई जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से आईएमएफ जैसे बड़े संस्थानों की बदनामी हो सकती है और दुनिया के नियमों का मजाक उड़ सकता है।

आईएमएफ के नियमों के तहत, सदस्य देश सीधे तौर पर किसी देश को कर्ज देने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं कर सकते हैं। वे या तो इसके पक्ष में वोट कर सकते हैं या वोटिंग से दूर रह सकते हैं। भारत ने इसी नियम के तहत वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अपनी असहमति दर्ज कराई।

ये कैसा गड़बड़झाला है : विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति “चीन” विकासशील देश है विकसित देश नहीं

सुभाष चन्द्र

फरवरी, 2024 में विश्व की पहली आर्थिक महाशक्ति IMF के अनुसार 27,974 बिलियन डॉलर की GDP के साथ अमेरिका है और 2nd largest आर्थिक महाशक्ति 18566 बिलियन डॉलर की GDP के साथ चीन है, जबकि जर्मनी, जापान और भारत की GDP क्रमशः 4730, 4291 और 4112 बिलियन डॉलर है। ब्रिटेन 6th, फ्रांस 7th और कनाडा 10th नंबर पर हैं

परंतु अमेरिका, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा को विकसित देशों की श्रेणी में रखा गया लेकिन 2nd largest economy होने के बावजूद चीन को विकासशील देशों (Developing Nation) की श्रेणी में रखा गया है जिसका कोई औचित्य समझ नहीं आता 

World Bank के अनुसार चीन के 85 करोड़ लोग (850 million) Extreme Poverty से बाहर लाए जा चुके है। चीन का Poverty Rate 1981 के 88% से गिर कर 2015 में मात्र 0.7 % रह गया था

चीन को विकासशील देश कहने का कोई कारण समझ नहीं आता। जो देश 18 राष्ट्रों को वर्षों से किसी न किसी तरह के सीमा विवाद में उलझा कर रख सकता है; जो अनेक देशों को कर्ज के  मकड़जाल में फंसा कर blackmail कर सकता है; जो देश Veto Power से UN Security council में हर विषय में रोड़े अटका सकता है; जो देश हर लोकतांत्रिक देश में पैसे के दम पर अस्थिरता पैदा कर सकता है; जो देश विश्व के किसी देश में एटोमिक ताकत के बल पर अशांति पैदा कर सकता और पाकिस्तान एवं उत्तरी कोरिया को विश्व के लिए खतरा बना सकता है; जो अमेरिका जैसे शक्तिशाली मुल्क को हर समय युद्ध के लिए ललकार सकता है और जो भारत की हजारों एकड़ भूमि पर कब्ज़ा किये बैठा है, वह देश किस मायने से Developing Nation कहलाया जा सकता है। 

लेखक 

यह विकासशील देश चीन, पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को कोरोना देकर चौपट करने की ताकत रखता है और अपनी capital market से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर कर सकता है, वह किसी तरह से भी विकासशील देश नहीं हो सकता बल्कि वह तो सम्पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र है

चीन के पास अमेरिका के 5244 और रूस के 5889 Nuclear Warheads के बाद सबसे अधिक 500 Nuclear Weapons हैं और आज यह देश नेहरू से वरदान में मिली Veto Power के बल पर भारत के Veto Power के अधिकार को रोके बैठा है

कोई ऐसा वैश्विक संगठन नहीं है जिसमे चीन अपनी दादागिरी न दिखाता हो। चीन ने 2016 में 48 सदस्यों के Nuclear Supplier Group में प्रवेश को रोक दिया था और भारत के इस प्रवेश को रोकने वाला NSG में वह अकेला देश था

WTO ने विकसित और विकासशील देशों की कोई परिभाषा तय नहीं की है लेकिन जो भी विकासशील देश माने जाते हैं उन्हें WTO में कुछ सुविधाएं मिलती है। लिहाजा चीन हर तरफ से मौज में रहना चाहता है, एक विकसित देश की तरह दुनिया पर रौब भी दिखाना चाहता है और विकासशील देश की तरह सुविधाएं भी लेना चाहता है

IMF और World Bank को इस पर पुनर्विचार जरूर करना चाहिए

मोदी से पंगा पड़ा भारी, दिवालिया हो गया मालदीव ; भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में अपने प्राकृतिक सौंदर्य के मशहूर लक्षद्वीप का दौरा किया था। यह दौरा मालदीव पर इतना बड़ा वज्रपात साबित होगा, इसके बारे में किसी को अंदाजा नहीं था। लेकिन पिछले दो दिनों में जो खबरें सामने आई हैं, उससे पता चलता है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी से पंगा लेना मालदीव पर भारी पड़ गया है। अब मालदीव दिवालिया हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भीख मांग रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील, भारतीय पर्यटकों की संख्या में आई कमी और चीन के कर्ज ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

मालदीव की आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की मांग

फ्रंटलफोर्स नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने 16 फरवरी, 2024 को एक पोस्ट शेयर कर बताया कि मालदीव ने खुद को आईएमएफ के सामने दिवालिया घोषित कर दिया है और बेलआउट पैकेज की मांग की है। दरअसल भारत से पंगा लेने के बाद मालदीव की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। मालदीव के ऊपर बाहरी कर्ज 4.038 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, इसमें एक बड़ा हिस्सा चीन के कर्ज का है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए राष्ट्रपति मुइज्जू आईएमएफ के साथ ही चीन, तुर्की और अरब देशों से कर्ज की भीख मांग रहे हैं। मालदीव को कर्ज के जाल में फंसा देखकर अब दोस्त चीन भी उसे और कर्ज देने से बच रहा है। ऐसे में मालदीव का आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

दुनिया भर के लोगों से मालदीव को दान देने की अपील

फ्रंटलफोर्स की इस खबर के बाद अब सोशल मीडिया में मालदीव के दिवालियापन की खूब चर्चा हो रही है। मालदीव के लोग भी खबरें शेयर कर खूब मजे ले रहे हैं। सोशल मीडिया ‘x’ पर हसन कुरुसी नाम के एक यूजर ने अपने हैंडल @HKurusee से मालदीव का मजाक उड़ाते हुए पोस्ट किया कि क्या किसी के पास सरकार का सार्वजनिक बैंक खाता नंबर है? मैं इसे यहां साझा करना चाहता हूं ताकि दुनिया भर से लोग मालदीव को दान भेज सकें। हसन कुरुसी ने एक और पोस्ट में मालदीव के लोगों की तरफ से भारत, चीन, पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से मदद करने की अपील की है।

भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

अब मालदीव के नागरिक ही भारतीयों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। हसन कुरुसी ने भारतीयों से अपील की है कि मालदीव के वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए 1.3 बिलियन डॉलर की जरूरत है। अगर एक भारतीय एक डॉलर का दान करें तो 1.3 बिलियन डॉलर आसानी से मिल सकता है। हसन ने मालदीव सरकार के पब्लिक बैंक अकाउंट 220301 शेयर करते हुए इसमें दान देने की अपील की है। हालांकि परफॉर्म इंडिया इस अकाउंट की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन सोशल मीडिया में जिस तरह मालदीव की अर्थव्यवस्था का माखौल उड़ रहा है, वह राष्ट्रपति मुइज्जू के लिए काफी शर्मनाक है।

भारतीयों ने पुराने पोस्ट की दिलाई याद 

अब भारत के लोग भी हसन कुरुसी के पुराने पोस्ट की याद दिलाते हुए खूब मजे ले रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय फिल्म अभिनेता शाहरुख खान से मदद की सलाह दे रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने अपने पोस्ट में सवाल किया, “क्या हुआ @HKurusee ? जोश कैसा है? हमसे भीख क्यों मांग रहे हैं? अपने मित्र देश पाकिस्तान और चीन से भीख क्यों न मांग रहे हैं? मालदीव को हमारी ज़रूरत नहीं है और हम भारतीयों को मालदीव की ज़रूरत नहीं है।”

आईएमएफ ने दी थी चीन के कर्ज के जाल में फंसने की चेतावनी

अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप यात्रा के डेढ़ महीने के भीतर ही ऐसा क्या हुआ कि मालदीव दिवालिया हो गया ? इस सवाल का जवाब आईएमएफ की चेतावनी से मिलता है। 7 फरवरी, 2024 को आईएमएफ ने मालदीव को चेतावनी दी थी। साथ ही बताया था कि मालदीव ने चीन से काफी ज्यादा कर्ज लिया है और अब भारत से भी अपने रिश्ते खराब कर चुका है। इस वजह से देश में ऋण संकट का खतरा बहुत ज्यादा हो गया है। आईएमएफ ने तत्काल पॉलिसी एडजस्टमेंट की बात कही थी। आईएमएमफ ने चेताया था कि अगर उसने चीन से कर्ज लेना बंद नहीं किया तो श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह हाल हो जाएगा। मालदीव के कर्ज का जोखिम उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। 

मोदी की एक अपील ने भीख मांगने पर कर दिया मजबूर 

प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप के दौरे से मालदीव को जबरदस्त झटका लगा है। इसे इत्तेफ़क कहे या सोची समझी रणनीति, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक दौरे से कई निशाने साध दिए। उन्होंने लक्षदीप को 1150 करोड़ रुपये की सौगात के साथ ही इसे टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की अपील की। देखते ही देखते उनके दौरे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लक्षद्वीप एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने इशारों-इशारों में मालदीव को भी संदेश दे दिया। इस दौरान मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। अब जो खबरें सामने आ रही है, उससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मकसद में कामयाब रहें।

मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे और उनकी अपील से मालदीव के पर्यटन मुसीबत में फंस गया है। मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां भारतीय मालदीव जाने में विश्व में तीसरे स्थान पर थे, अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं। गौरतलब है कि भारतीय पर्यटक मालदीव के लिए बेहद जरूरी हैं क्योंकि भारत से बड़ी संख्या में लोग हर साल मालदीव जाते हैं। साल 2023 में मालदीव के टूरिज्म मार्केट में भारतीयों का योगदान 11 प्रतिशत था। लेकिन हालिया विवाद के बाद मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

मालदीव के पर्यटन उद्योग को लगा बड़ा झटका

मालदीव पर्यटन मंत्रालय ने हाल ही में जो आंकड़े जारी किए थे, उनके मुताबिक 2023 में भारत मालदीव में पर्यटकों के आगमन के प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारत से पिछले साल करीब 209,198 पर्यटक मालदीव पहुंचे। वहीं, 2022 में 241,369 भारतीय यात्रियों ने मालदीव की यात्रा की थी। पर्यटन मालदीव का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक और जीडीपी का सबसे बड़ा सहयोगी भी है। मालदीव में पर्यटन का कुल जीडीपी में 30 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा अर्जक में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत से बढ़ते तनाव और प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद मालदीव के पर्यटन मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लक्षद्वीप को लेकर एक प्राइवेट सर्च प्लेटफॉर्म पर सर्च 3400 प्रतिशत बढ़ गया है। यहां तक की लोग अब मालदीव का टिकट कैंसिल करवाकर लक्षद्वीप का रूख कर रहे हैं।

'पाकिस्तान में मरा दाऊद इब्राहिम तो पड़ जाएंगे लेने के देने': आरजू काजिमी, पाकिस्तानी महिला पत्रकार ने खोली पोल

भारत का मोस्ट वांटेड डॉन 'दाऊद इब्राहिम जिंदा है या मर गया'? सोशल मीडिया पर बीते दो दिनों से ये सवाल चर्चा के केंद्र में है। दाउद इब्राहिम को पाकिस्तान में जहर दिए जाने की अटकलें लगाई जा रहीं है जिसके बाद एक बार फिर ये नाम सुर्खियों में आ गया है

हालांकि अब दाऊद को लेकर पाकिस्तानी महिला पत्रकार आरजू काजिमी ने कई सनसनीखेज दावे किए हैं

आज तक से बातचीत में पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजिमी ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया की नजर में अपनी छवि सुधारने के लिए ऐसा कर सकता है जिसमें दाऊद इब्राहिम को एलीमिनेट (मार देना) करना भी शामिल हो सकता है उन्होंने कहा कि चाहे आईएमएफ हो या फिर वर्ल्ड बैंक सभी का पाकिस्तान पर दबाव है

पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि बीते दिनों पाकिस्तान में कई टार्गेटेड किलिंग हुई है लेकिन अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसे आतंकी संगठनों को चलाने वाले उनके मुखिया कब मारे जाएंगे पत्रकार आरजू काजमी ने कहा कि दुनिया ही नहीं अब पाकिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त चीन भी कहने लगा है कि पाकिस्तान में ऐसे लोग नहीं होने चाहिए इसलिए ये संभव है कि पाकिस्तान खुद ही दाऊद इब्राहिम जैसे लोगों को अब रास्ते से हटाना चाहे

पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी का दावा है कि पाकिस्तान सरकार आज भी ये स्वीकार नहीं करती है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है क्योंकि वो अभी भी भारतीय नागरिक के तौर पर ही जाना जाता है और पाकिस्तान ऐसा कोई रिस्क नहीं ले सकता इसलिए चीजों को बाहर नहीं आने दिया जा रहा है लेकिन जब भी कुछ होता है तो पता लगता है कि वो पाकिस्तान में ही है

उन्होंने कहा कि अगर दाऊद इब्राहिम यहां मारा गया या किसी बीमारी की वजह से भी उसकी मौत हो गई तो पाकिस्तान ये कभी स्वीकार नहीं करेगा इससे पाकिस्तान को लेने के देने पड़ जाएंगे जिसे पाकिस्तान अफोर्ड नहीं कर सकता

कराची में दाऊद के चार ठिकाने

कराची के क्लिफटन इलाके में दाऊद इब्राहिम का ठिकाना है और दाऊद के ठिकाने से करीब 8 किलोमीटर दूर कराची के आगा खान हॉस्पिटल में उसके के भर्ती होने का दावा पाकिस्तानी मीडिया की तरफ से किया गया है

अवलोकन करें:-

बता दें कि दाउद ने खुद को भारत की सुरक्षा एजेंसियों से बचाने के लिए अपने 25 उपनाम रखे थे और 20 फर्जी पासपोर्ट बनवाए थे ताकि वो आराम से दुनिया के किसी भी हिस्से में जा सके पाकिस्तान में उसके इतने पते है जिससे ये पता लगाना मुश्किल होता है कि आखिर वो कहां रह रहा है हालांकि दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान में जहर दिए जाने की खबर अभी भी अफवाह ही कही जा सकती है