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दुनिया में आठवें नंबर पर पहुँचा भारत का टूरिज्म: फ्रांस-जर्मनी को छोड़ा पीछे, मोदी और सरकार की कोशिशें ला रही रंग, 19+ लाख करोड़ रूपए हुई कमाई

                            लक्षदीप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: X/Narendramodi_in)
भारत ने विश्व पर्यटन की दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद (डब्ल्यूटीटीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में भारत दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था बन गया है। देश की पर्यटन से होने वाली कमाई 231.6 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 19.4 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँच गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल भारत 10वें स्थान पर था, लेकिन इस बार दो पायदान की छलांग लगाकर जापान और फ्रांस जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया। अमेरिका पहले स्थान पर है 2,360 अरब डॉलर के साथ, उसके बाद चीन, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और मैक्सिको हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों, मेहनत और लगातार प्रयासों का बड़ा हाथ है।

पिछले एक दशक से पहले भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। 2013 में डब्ल्यूटीटीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन की विकास दर 6-7 प्रतिशत के आसपास थी, लेकिन वैश्विक रैंकिंग में भारत 24वें स्थान या उससे नीचे था। विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 में लगभग 6.97 मिलियन थी, जो 2019 तक बढ़कर 10.93 मिलियन हो गई। जीडीपी में योगदान 5-6 प्रतिशत था।

इन सबके पीछे कई समस्याएँ भी थीं, जैसे – एयरपोर्ट कम थे (2014 में सिर्फ 74), सड़कें खराब, होटल की कमी और जटिल वीजा प्रक्रिया।

इन सबके बीच 2020 में कोविड-19 महामारी ने पर्यटन उद्योग को और बड़ा झटका दिया। विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर 2.74 मिलियन रह गई, और जीडीपी में योगदान 4 प्रतिशत तक गिर गया। होटल, टूर ऑपरेटर, गाइड्स, और छोटे-मोटे दुकानदार सब परेशान थे। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह भारत की मेहनत और जज्बे की मिसाल है।

कोविड के बाद तेज रिकवरी हुई। 2023 में विदेशी पर्यटक 9.52 मिलियन पहुँच गए, जो 2019 के 87 प्रतिशत के बराबर था। घरेलू पर्यटन भी बढ़ा – 2023 में 2.5 अरब से ज्यादा घरेलू यात्राएँ हुईं। यह सब सरकार की नीतियों से हुआ।

दरअसल, यह सफलता सालों की मेहनत का परिणाम है। 2014 से पर्यटन को प्राथमिकता दी गई। बजट आवंटन 2014 में 500 करोड़ रुपये था, जो अब 2,400 करोड़ से ज्यादा हो गया है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा साल 2002 में चलाए गए ‘अतुल्य भारत’ अभियान को और मजबूत किया गया। सोशल मीडिया, फिल्मों और व्लॉग्स के जरिए प्रमोशन बढ़ा। ट्रैवल कंटेंट ने भारत को वैश्विक स्तर पर चमकाया।

इसके अलावा स्वदेश दर्शन योजना 2014-15 में शुरू हुई, जिसमें थीम-आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए, जैसे बौद्ध सर्किट, रामायण सर्किट, वन्यजीव सर्किट। लेकिन शुरुआत में यह कई राज्यों में फैली हुई थी, इसलिए प्रभाव कम पड़ा। 2022 में स्वदेश दर्शन 2.0 लॉन्च हुई, जो एक-एक जगह पर केंद्रित है। इसमें सतत पर्यटन पर जोर – पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो। पायलट प्रोजेक्ट में ओरछा (मध्य प्रदेश), गाँडीकोटा (आंध्र प्रदेश), बोधगया (बिहार) जैसी सात जगहें शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण योजना है प्रसाद (तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान)। यह धार्मिक स्थलों को सुधारने के लिए है। जैसे – काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या का विकास, केदारनाथ का पुनर्निर्माण। इनसे धार्मिक पर्यटन बढ़ा और रोजगार मिला। 2024 तक प्रसाद के तहत 73 परियोजनाओं पर काम हुआ, जिसमें 1,400 करोड़ रुपये खर्च हुए। बुनियादी ढाँचे में बदलाव जबरदस्त है।

साल 2014 से 2025 तक राष्ट्रीय राजमार्ग 91,000 किलोमीटर से बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर हो गए। रेल विद्युतीकरण 98 प्रतिशत पहुँच गया। बंदरगाह क्षमता दोगुनी हुई। उड़ान योजना से 88 एयरपोर्ट चालू हुए, छोटे शहरों में उड़ानें बढ़ीं। वंदे भारत ट्रेनों से आरामदायक और तेज यात्रा संभव हुई। होटलों में निवेश बढ़ा – 2024 में 3,295 करोड़ रुपये के 40 प्रोजेक्ट मंजूर हुए, 23 राज्यों में प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्र बनाने के लिए।

वीजा नीति आसान हुई। ई-वीजा अब 167 देशों के लिए उपलब्ध है, ऑनलाइन आवेदन से विदेशी पर्यटक बढ़े। चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहन – भारत की सस्ती और गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएँ, जैसे आयुर्वेद और योग, ने लाखों विदेशी रोगियों को आकर्षित किया। 2024 में विदेशी पर्यटकों ने 3.10 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2019 से ज्यादा है। सौंदर्यीकरण प्रयास भी बड़े हैं। स्वच्छ भारत अभियान से जगहें साफ हुईं – ताजमहल के आसपास सफाई, गंगा घाटों का सुधार। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 43 हो गई, दुनिया में छठा स्थान। प्राकृतिक, सांस्कृतिक और एडवेंचर पर्यटन पर फोकस – हिमालय, समुद्र तट, वन्यजीव।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से कई जगहों को बढ़ावा दिया। उनका मानना है कि पर्यटन से रोजगार बढ़ता है और संस्कृति फैलती है। 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें-वीडियो साझा किए। कहा, “लक्षद्वीप की सुंदरता देखिए, यह मालदीव से कम नहीं।”

इसका प्रभाव? लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई – 2023 में एक लाख से कम, 2024 में दो लाख से ज्यादा। उड़ानें 88 प्रतिशत बढ़ीं। एक्स पर उनके पोस्ट ने लाखों को आकर्षित किया।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन भी मोदी ने किया। इसका प्रभाव ये हुआ कि वाराणसी में पर्यटक 2014 के पाँच करोड़ से बढ़कर 2022 में 7.2 करोड़ हो गए। कॉरिडोर में 10 करोड़ विजिटर्स आए, दैनिक 1.5-2 लाख भक्त। होटल बुकिंग दोगुनी हुई।

गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बताकर प्रमोट किया। अब वहाँ सालाना 50 लाख पर्यटक आते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

कश्मीर का प्रचार करते हुए पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद कहा, “कश्मीर स्वर्ग है, घूमिए।” इसके बाद फिल्मों की शूटिंग बढ़ी, पर्यटक बढ़े। 2024 में कश्मीर में दो करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए। मणिपुर, पूर्वोत्तर की जगहों को भी बढ़ावा दिया, जैसे लोकटक झील। अकेले पूर्वोत्तर में पर्यटन 30 प्रतिशत बढ़ गया।

पीएम मोदी और भारत सरकार ने विदेश यात्राओं में भी भारत को प्रमोट किया। जी20 शिखर सम्मेलन में दिल्ली और वाराणसी दिखाए। योग दिवस को वैश्विक बनाया, जो स्वास्थ्य पर्यटन बढ़ाता है। एक्स पर पोस्ट्स, जैसे क्रोएशिया, साइप्रस, कुवैत के दौरे भारत की जगहों से जोड़ते हैं।

चिकित्सा और सांस्कृतिक पर्यटन: भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ विदेशी पर्यटकों को खींच रही हैं। आयुर्वेद, योग, और मॉडर्न मेडिसिन ने भारत को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाया। 2024 में लाखों विदेशी मरीज भारत आए। इसके अलावा, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 43 हो गई, जो दुनिया में छठा स्थान है। प्राकृतिक सुंदरता (हिमालय, गोवा के समुद्र तट), सांस्कृतिक धरोहर (अजंता-एलोरा, ताजमहल), और एडवेंचर टूरिज्म (राफ्टिंग, ट्रेकिंग) ने भी पर्यटकों को आकर्षित किया।

कुल मिलाकर पीएम मोदी के प्रचार से घरेलू पर्यटन 95 प्रतिशत बढ़ा, जीडीपी में योगदान 6.6 प्रतिशत पहुँच गया, यानी 21 लाख करोड़ रुपये। 2024 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का खर्च रिकॉर्ड 3.1 ट्रिलियन रुपये (36.8 अरब डॉलर) रहा, 2019 से नौ प्रतिशत ज्यादा। घरेलू खर्च 15.5 लाख करोड़ रुपये, 2019 से 22 प्रतिशत अधिक। डब्ल्यूटीटीसी का अनुमान है कि 2025 में यह 3.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचेगा।

यह रिपोर्ट कोई आकस्मिक परिणाम नहीं है। 2014 से नीतिगत बदलाव – निजी निवेश को प्रोत्साहन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल। कोविड में टीकाकरण तेज किया, रिकवरी में मदद मिली। डब्ल्यूटीटीसी कहता है कि 2034 तक भारत दुनिया में चौथे नंबर पर पहुँच जाएगा। अर्थव्यवस्था में 42 लाख करोड़ रुपये का योगदान होगा और करीब 6.4 करोड़ नौकरियाँ सृजित होंगी।

भारत में पर्यटन के क्षेत्र में अब भी काफी चुनौतियाँ

डब्ल्यूटीटीसी की सीईओ जूलिया सिम्पसन कहती हैं, “भारत में सब कुछ है, लेकिन बेहतर प्रचार चाहिए।” ओवरटूरिज्म से बचना भी जरूरी है, जैसे गोवा में अक्सर ओवर-टूरिज्म की वजह से कई तरह की दिक्कतें सामने आने लगी हैं।
भविष्य में सरकार 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखती है। डिजिटल पर्यटन – ऐप्स, वर्चुअल टूर्स। ग्रामीण पर्यटन से गाँवों में रोजगार बढ़ेगा। इसके लिए सरकार ने अभी से तैयारियाँ शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने बजट 2025 में 20,000 करोड़ रुपये पर्यटन विकास के लिए आवंटित किया। वहीं, 23 राज्यों में 3,300 करोड़ की परियोजनाएँ चल रही हैं, जिसमें सड़कें, एयरपोर्ट, डिजिटल एकीकरण शामिल हैं।
भारत का टॉप 10 में पहुँचना कोई छोटी बात नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता, सरकार की नीतियों और स्थानीय लोगों की मेहनत का नतीजा है। पर्यटन सिर्फ पैसे की बात नहीं है; यह देश की संस्कृति, इतिहास, और विविधता को दुनिया तक ले जाने का जरिया है।
काशी के घाटों से लेकर लक्षद्वीप के समुद्र तटों तक भारत हर कोने में खूबसूरत है। अगर हम इसे सही तरीके से प्रमोट करें, पर्यावरण का ध्यान रखें और बुनियादी ढाँचे को और मजबूत करें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की टॉप 5 पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होगा। यह क्षण हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। आइए, अपने देश की इस खूबसूरती को और चमकाएँ और दुनिया को बुलाएँ – ‘आइए, भारत देखिए!’

अब इजरायल ने निकाली मालदीव की हेकड़ी कहा- भारत के लक्षद्वीप जैसे समुद्री तटों पर घूमने जाएँ

मालदीव और उसके राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु को अब इजरायल ने झटका दिया है। इजरायल ने अपने नागरिकों को कहा है कि वो भारत भ्रमण करें, साथ ही भारत के सुन्दर पर्यटन स्थलों की तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि इस्लामी मुल्क मालदीव ने इजरायल के पासपोर्ट धारकों को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया है, इसीलिए इजरायल ने उसे सबक सिखाया है। भारत स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और केरल की मनोरम तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।

साथ ही लिखा, “जैसा कि मालदीव ने अब इजरायलियों के आने पर बैन लगा दिया हैं, नीचे दिए यह कुछ खूबसूरत और अद्भुत भारतीय समुद्र तट हैं जहाँ इजरायली पर्यटकों का हार्दिक स्वागत होता है और बेहद आदर सत्कार दिया जाता हैं। हमारे डिप्लोमेट्स द्वारा यात्रा की गई जगहों के आधार पर ये हमारे कुछ सुझाव हैं।” नीचे कमेंट्स में भारतीयों ने भी दिल खोलते हुए कहा कि इजरायलियों का हमारे देश में स्वागत है, यहाँ उनका भरपूर स्वागत किया जाएगा।

 इजरायल पर गाजा पट्टी में बमबारी और गोलीबारी का आरोप लगाते हुए मालदीव ने वहाँ के पर्यटकों पर बैन लगा दिया है। मुल्क के गृहक्षेत्र सुरक्षा एवं तकनीकी मंत्री अली इहुसान ने कहा कि राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बैन के लिए कानूनी बदलाव शुरू करने पर मुहर लगी। इसके लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति भी बनाई गई है। मालदीव ने फिलिस्तीन की मदद के लिए एक विशेष राजदूत की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है।

साथ ही फिलिस्तीनियों के लिए फंड भी जुटाया जाएगा। फिलिस्तीन के समर्थन में एक राष्ट्रीय मार्च का भी आयोजन किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका ने भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1200 लोगों का नरसंहार किया था, जिसके बाद से ही इजरायल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि इजरायल ने सीजफायर का नया प्रस्ताव क़तर के माध्यम से हमास को भिजवाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया था और वहाँ से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद मालदीव भड़क गया था। लक्षद्वीप की सुंदरता देख वहाँ पर्यटन भी बढ़ा। मालदीव के 3 मंत्रियों को पद से हाथ धोना पड़ा, उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भारतीयों द्वारा बहिष्कार के बाद मालदीव के पर्यटन और राजस्व में भारी कमी आई। अब इजरायल का साथ भी भारत को मिल गया है।


मोदी से पंगा पड़ा भारी, दिवालिया हो गया मालदीव ; भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में अपने प्राकृतिक सौंदर्य के मशहूर लक्षद्वीप का दौरा किया था। यह दौरा मालदीव पर इतना बड़ा वज्रपात साबित होगा, इसके बारे में किसी को अंदाजा नहीं था। लेकिन पिछले दो दिनों में जो खबरें सामने आई हैं, उससे पता चलता है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी से पंगा लेना मालदीव पर भारी पड़ गया है। अब मालदीव दिवालिया हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भीख मांग रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील, भारतीय पर्यटकों की संख्या में आई कमी और चीन के कर्ज ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

मालदीव की आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की मांग

फ्रंटलफोर्स नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने 16 फरवरी, 2024 को एक पोस्ट शेयर कर बताया कि मालदीव ने खुद को आईएमएफ के सामने दिवालिया घोषित कर दिया है और बेलआउट पैकेज की मांग की है। दरअसल भारत से पंगा लेने के बाद मालदीव की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। मालदीव के ऊपर बाहरी कर्ज 4.038 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, इसमें एक बड़ा हिस्सा चीन के कर्ज का है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए राष्ट्रपति मुइज्जू आईएमएफ के साथ ही चीन, तुर्की और अरब देशों से कर्ज की भीख मांग रहे हैं। मालदीव को कर्ज के जाल में फंसा देखकर अब दोस्त चीन भी उसे और कर्ज देने से बच रहा है। ऐसे में मालदीव का आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

दुनिया भर के लोगों से मालदीव को दान देने की अपील

फ्रंटलफोर्स की इस खबर के बाद अब सोशल मीडिया में मालदीव के दिवालियापन की खूब चर्चा हो रही है। मालदीव के लोग भी खबरें शेयर कर खूब मजे ले रहे हैं। सोशल मीडिया ‘x’ पर हसन कुरुसी नाम के एक यूजर ने अपने हैंडल @HKurusee से मालदीव का मजाक उड़ाते हुए पोस्ट किया कि क्या किसी के पास सरकार का सार्वजनिक बैंक खाता नंबर है? मैं इसे यहां साझा करना चाहता हूं ताकि दुनिया भर से लोग मालदीव को दान भेज सकें। हसन कुरुसी ने एक और पोस्ट में मालदीव के लोगों की तरफ से भारत, चीन, पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से मदद करने की अपील की है।

भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

अब मालदीव के नागरिक ही भारतीयों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। हसन कुरुसी ने भारतीयों से अपील की है कि मालदीव के वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए 1.3 बिलियन डॉलर की जरूरत है। अगर एक भारतीय एक डॉलर का दान करें तो 1.3 बिलियन डॉलर आसानी से मिल सकता है। हसन ने मालदीव सरकार के पब्लिक बैंक अकाउंट 220301 शेयर करते हुए इसमें दान देने की अपील की है। हालांकि परफॉर्म इंडिया इस अकाउंट की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन सोशल मीडिया में जिस तरह मालदीव की अर्थव्यवस्था का माखौल उड़ रहा है, वह राष्ट्रपति मुइज्जू के लिए काफी शर्मनाक है।

भारतीयों ने पुराने पोस्ट की दिलाई याद 

अब भारत के लोग भी हसन कुरुसी के पुराने पोस्ट की याद दिलाते हुए खूब मजे ले रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय फिल्म अभिनेता शाहरुख खान से मदद की सलाह दे रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने अपने पोस्ट में सवाल किया, “क्या हुआ @HKurusee ? जोश कैसा है? हमसे भीख क्यों मांग रहे हैं? अपने मित्र देश पाकिस्तान और चीन से भीख क्यों न मांग रहे हैं? मालदीव को हमारी ज़रूरत नहीं है और हम भारतीयों को मालदीव की ज़रूरत नहीं है।”

आईएमएफ ने दी थी चीन के कर्ज के जाल में फंसने की चेतावनी

अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप यात्रा के डेढ़ महीने के भीतर ही ऐसा क्या हुआ कि मालदीव दिवालिया हो गया ? इस सवाल का जवाब आईएमएफ की चेतावनी से मिलता है। 7 फरवरी, 2024 को आईएमएफ ने मालदीव को चेतावनी दी थी। साथ ही बताया था कि मालदीव ने चीन से काफी ज्यादा कर्ज लिया है और अब भारत से भी अपने रिश्ते खराब कर चुका है। इस वजह से देश में ऋण संकट का खतरा बहुत ज्यादा हो गया है। आईएमएफ ने तत्काल पॉलिसी एडजस्टमेंट की बात कही थी। आईएमएमफ ने चेताया था कि अगर उसने चीन से कर्ज लेना बंद नहीं किया तो श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह हाल हो जाएगा। मालदीव के कर्ज का जोखिम उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। 

मोदी की एक अपील ने भीख मांगने पर कर दिया मजबूर 

प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप के दौरे से मालदीव को जबरदस्त झटका लगा है। इसे इत्तेफ़क कहे या सोची समझी रणनीति, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक दौरे से कई निशाने साध दिए। उन्होंने लक्षदीप को 1150 करोड़ रुपये की सौगात के साथ ही इसे टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की अपील की। देखते ही देखते उनके दौरे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लक्षद्वीप एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने इशारों-इशारों में मालदीव को भी संदेश दे दिया। इस दौरान मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। अब जो खबरें सामने आ रही है, उससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मकसद में कामयाब रहें।

मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे और उनकी अपील से मालदीव के पर्यटन मुसीबत में फंस गया है। मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां भारतीय मालदीव जाने में विश्व में तीसरे स्थान पर थे, अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं। गौरतलब है कि भारतीय पर्यटक मालदीव के लिए बेहद जरूरी हैं क्योंकि भारत से बड़ी संख्या में लोग हर साल मालदीव जाते हैं। साल 2023 में मालदीव के टूरिज्म मार्केट में भारतीयों का योगदान 11 प्रतिशत था। लेकिन हालिया विवाद के बाद मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

मालदीव के पर्यटन उद्योग को लगा बड़ा झटका

मालदीव पर्यटन मंत्रालय ने हाल ही में जो आंकड़े जारी किए थे, उनके मुताबिक 2023 में भारत मालदीव में पर्यटकों के आगमन के प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारत से पिछले साल करीब 209,198 पर्यटक मालदीव पहुंचे। वहीं, 2022 में 241,369 भारतीय यात्रियों ने मालदीव की यात्रा की थी। पर्यटन मालदीव का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक और जीडीपी का सबसे बड़ा सहयोगी भी है। मालदीव में पर्यटन का कुल जीडीपी में 30 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा अर्जक में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत से बढ़ते तनाव और प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद मालदीव के पर्यटन मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लक्षद्वीप को लेकर एक प्राइवेट सर्च प्लेटफॉर्म पर सर्च 3400 प्रतिशत बढ़ गया है। यहां तक की लोग अब मालदीव का टिकट कैंसिल करवाकर लक्षद्वीप का रूख कर रहे हैं।

लक्षद्वीप में सैनिक अनवर आलम ने 13 साल के बच्चे को दिया था लालच, केरल हाई कोर्ट ने बेल से किया साफ मना

                                                                                                                 साभार: Telegraph India
केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप के अनवर हुसैन नाम के एक सैनिक की जमानत याचिका ठुकरा दी है। अनवर पर आरोप है कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग बालक को सेक्स करने के लिए पैसे का लालच दिया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अनवर को बेल देने से मना किया।

जानकारी के अनुसार, लक्षद्वीप के अमीनी गाँव में रहने वाले अनवर हुसैन टी पर आरोप है कि उसने एक साथी के साथ मिलकर एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पैसों का लालच दिया कि वह उनके साथ सेक्स कर ले।

इस मामले में नाबालिग लड़के के परिजनों ने पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। हालाँकि, कोर्ट के सामने अनवर हुसैन ने कहा कि जिस नाबालिग लड़के के साथ सेक्स करने के लिए पैसे का लालच देने का आरोप उस पर लगाया गया है, उसके परिवार से उनका विवाद है।

अनवर ने कोर्ट के सामने दावा किया कि उसे पारिवारिक विवाद में फँसाने के लिए ऐसा किया गया है। अनवर के ऊपर POCSO के तहत मामला वर्ष 2023 में दर्ज किया गया था। इसीलिए उसने केरल हाई कोर्ट के सामने जमानत याचिका लगाई थी।

लक्षद्वीप का परिक्षेत्र केरल हाई कोर्ट के अंतर्गत आता है। हाई कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। केरल हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जज सोफी थॉमस ने कहा, “एक सैनिक होने के कारण आरोपित (अनवर) के खिलाफ लगाए गए आरोपों को और गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनसे यह आशा की जाती है कि वह देश के नागरिकों के सम्मान की रक्षा करेंगे।”

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अगर अनवर के ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं तो एक सैनिक होने के नाते यह बड़ी ही अभद्र और सैन्य अफसर के व्यवहार के विपरीत होगी। कोर्ट ने वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनवर को जमानत देने से मना कर दिया।

रोशन सिन्हा को जान से मारने की धमकी: क्यों एक ट्वीट से मालदीव ने टेके घुटने, 3 मंत्रियों की हुई छुट्टी

रौशन सिन्हा (बाएँ) और मरियम शिउना (फोटो साभार : X)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप की यात्रा की और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया। इन तस्वीरों को और पीएम मोदी की यात्रा को भारत में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम माना गया। इस बीच, एक एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने कुछ ऐसा लिख दिया कि सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। इस जंग में कूदे मालदीव के एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन-तीन मंत्रियों को छुट्टी हो गई। मालदीव सरकार को सफाई देनी पड़ी, इसके बावजूद भारतीयों ने मालदीव का बायकॉट कर दिया है और मालदीव की भारत विरोधी सरकार को लोग जमकर सुना रहे हैं। तो आखिर ये मिस्टर सिन्हा हैं कौन? जिनके ट्वीट पर इतना बड़ा बवाल हो गया।

दरअसल, मिस्टर सिन्हा का पूरा नाम रौशन सिन्हा है और वो एक राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी की एक वीडियो को साझा किया था। सिन्हा ने पीएम मोदी द्वारा लक्षद्वीप के पर्यटन को बढ़ाने देने की अपील को री-ट्वीट करते हुए मालदीव की सरकार को चीन की कठपुतली सरकार बता दिया। उन्होंने लिखा, “क्या बढ़िया कदम है! यह मालदीव की नई चीनी कठपुतली सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। साथ ही इससे लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”

इस पोस्ट ने मालदीव की युवा अधिकारिता, सूचना और कला उप मंत्री मरियम शिउना को परेशान कर दिया। सिन्हा की उस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मालदीव की नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विदूषक” और “इजरायल की कठपुतली” कह दिया। इस मामले में सोशल मीडिया पर जबरदस्त बखेड़ा खड़ा हो गया। जिसके बाद मालदीव में सत्ताधारी पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ शिउना को निलंबित कर दिया गया है।

इस पूरे मामले के बाद मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर एक पोस्ट किया और उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि ये मामला मालदीव तक पहुँच गया है और कई मालदीववासी इससे आहत हैं। मैं बस ये साफ करना चाहता हूँ कि हम मालदीव के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे चीनी कठपुतली सरकार के खिलाफ हैं, जो भारत विरोधी है।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि मालदीव में विपक्ष भारत समर्थक है जबकि मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ सरकार चीन समर्थक है। बता दें कि ये विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब 8 जनवरी को मुइज्जू चीन की यात्रा पर जाने वाले थे। सिन्हा ने भारतीयों की ताकत को रेखांकित करते हुए लिखा, “विदेश मंत्रालय ने ऐसे समय में मालदीव के दूत को बुलाया, जब मालदीव के राष्ट्रपति चीन में हैं। यह एक तरह से चीन के लिए भी बड़ा संदेश है।” सिन्हा ने कहा कि भारत विरोधी शक्तियों के खिलाफ अब भारतीय एकजुट हो गए हैं।

मिस्टर सिन्हा गुजरात में रहने वाले व्यवसाई हैं। वो मूलरूप से बिहार के हैं। सिन्हा भारत की राजनीति, वैश्विक राजनीति और विदेश नीति में रूचि रखते हैं। वो अपनी हिंदू पहचान पर गर्व भी करते हैं। अपनी राजनीतिक चेतना के बारे में बात करते हुए मिस्टर सिन्हा का कहना है कि साल 2014 के बाद से भारतीयों के आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि हुई है। मिस्टर सिन्हा पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। उनका एक अकाउंट भले ही सस्पेंड हो गया है, लेकिन उनके एक्स सोशल मीडिया पर 167k से ज्यादा फॉलोवर हैं।

सिन्हा ने ऑपइंडिया को बताया कि ये विवाद शुरू होने के बाद से उन्हें इनबॉक्स में कई लोगों ने जान से मारने की धमकी दी है, तो कई लोगों ने गालियाँ भी दी हैं। हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि भारतीयों द्वारा मालदीव के बहिष्कार को भारत सरकार का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मालदीव में सरकार का बदलना भारत के लिए अच्छा ही होगा। 7 जनवरी को सूत्रों के हवाले से मिस्टर सिन्हा ने एक्स पर दावा किया कि मालदीव का पर्टयन विभाग भारत विरोधी अभियान को हवा दे रहा है।

सिन्हा ने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “मालदीव में राष्ट्रपति मुइज्जू के करीबी लोग, उनके मंत्री और कुछ व्यापारिक घराने भारत विरोधी अभियान को हवा देने में जुटे हैं, क्योंकि वो चीन को खुश करना चाहते हैं। वो कुछ समय में चीन भी जाने वाले हैं।” हालाँकि अब मुइज्जू चीन पहुँच चुके हैं।

मालदीव के एक अखबार ने भारत विरोधी पोस्ट शेयर किया था, जिसमें मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों पर तुरंत रोक लगाने का आह्वान किया गया था। इस पोस्ट में यूरोपीय पर्यटकों और भारतीय पर्यटकों के बीच तुलना की गई थी और बताया गया था कि यूरोप के पर्यटक भारतीयों से बेहतर क्यों है। इसमें भारतीय पर्यटक के तौर पर मिस्टर सिन्हा की तस्वीर इस्तेमाल की गई थी।

ऐसे में जब सिन्हा ने लक्षद्वीप को लेकर पोस्ट किया और मालदीव को आईना दिखाया, तो मालदीव की भारत विरोधी ताकतें नाराज हो गईं और भारतीयों को नीचा दिखाने की कोशिश में जुट गए। इसी कड़ी में उन्होंने पीएम मोदी का भी अपमान करने की कोशिश की। इसके बाद जब भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, तो मालदीव की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने तीन मंत्रियों को पद से हटाना पड़ा। वहीं, इस बीच मालदीव में भारत समर्थक नेताओं ने भारत का जबरदस्त समर्थन किया। इस विवाद के बीच इस बात की जरूरत भी थी कि मालदीव के जिम्मेदार लोग या जो पहले जिम्मेदार पदों पर रहे हैं, वो भारत को लेकर अपना रुख साफ करें। कई पूर्व राष्ट्रपतियों और मंत्रियों ने ऐसा किया भी और भारत के साथ दोस्ती की कसमें खाईं।

अवलोकन करें:- 

मालदीव के मंत्रियों का क्या कसूर जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ही भारत विरोध में है - प्रधानमं

वैसे, इस पूरे मामले में एक बात तो साफ हो गई कि मालदीव का भारत विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इससे भी जरूरी बात ये हुई कि भारतीय लोग जाग गए और उन्होंने पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखा दी। अब इस मामले में भले ही तीन मंत्रियों को हटा दिया गया हो, लेकिन भारतीय लोग #VisitMaldives के विरोध में #Explore IndianIslands #BoycottMaldives #MaldivesOut #LakshadweepTourism जैसे हैशटैग लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और मालदीव को घुटने पर ला रहे हैं।