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दिवंगत कमलेश तिवारी की के परिवार ने ऑपइंडिया को बताए वर्तमान हालात (फाइल फोटो) |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपराधियों पर सख्त होने का जो दावा करते हैं, उस दावे की पोल मुस्लिम कट्टरपंथी का शिकार हुए कमलेश तिवारी मृत्यु उपरांत खोल रहे हैं। अभी तक कमलेश तिवारी की जघनं हत्या का साज़िशकर्ता क्यों नहीं पकड़ा गया? दूसरे, कमलेश की हत्या के बाद परिवार को धमकी देने वाले कट्टरपंथियों को कब पकड़ा जाएगा? योगी जी 'आपकी अदालत' में कहा था कि 'मैं एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में भाला रखता हूँ' कहाँ है वह भाला? कमलेश के परिवार को धमकी देने वालों के घरों पर बुलडोज़र कब चलेगा? जेहादी स्लीपर सेलों पर कब पकड़ा जाएगा? कहाँ हैं संविधान की दुहाई, सेकुलरिज्म की माला जपने और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे भ्रमित नारे लगाने वाले?
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धमकी का पत्र |
कोई ऑफिस में रख कर चला गया था धमकी का लेटर
ऑपइंडिया ने दिवंगत कमलेश तिवारी के छोटे बेटे मृदुल तिवारी से बात की। उन्होंने कहा, “जो धमकी वाला लेटर है वो कब आया ये हमें पता ही नहीं चला। कमरे ऑफिस में कई पत्र रखे हुए थे। उन्हीं में एक ये भी पड़ा था। एक दिन हमारे कार्यालय प्रभारी ने पत्रों को खोल कर पढ़ना शुरू कर दिया तो कार्यालय की टेबल पर ये धमकी पड़ी मिली। ये उर्दू में लिखी चिट्ठी है जिसे हमने अनुवाद करवाया तो पता चला मम्मी (किरण तिवारी) के नाम धमकी है। पत्र में योगी जी के चेहरे पर भी क्रॉस का चिन्ह लगाया गया है।
धमकी के बाद घर की सुरक्षा बढ़ी, मम्मी की नहीं
अभी तक नहीं पकड़ा गया एक आरोपित
सरकार के तमाम वादे अभी तक अधूरे
पापा की ही राह पर मैं भी चलूँगा
मृदुल तिवारी ने हमें बताया, “मेरे अंदर मेरे पिता का खून दौड़ रहा है। मैं उनके ही अभियान को आगे बढ़ाऊँगा। हिन्दू धर्म की भलाई के लिए काम करूँगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने हत्यारोपितों की माँग पर केस लखनऊ से प्रयागराज किया ट्रांसफर
ऑपइंडिया से बात करते हए स्वर्गीय कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने हत्यारों की माँग पर केस को लखनऊ से प्रयागराज ट्रांसफर कर दिया जबकि पकड़े गए आरोपित अभी लखनऊ जेल में ही बंद हैं। हत्यारे लखनऊ में अपनी सुरक्षा का हवाला दे रहे थे। हैरानी की बात है कि जो गुजरात से लखनऊ कत्ल करने आ सकते हैं वो लखनऊ में मुकदमा लड़ने से डर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को मान भी लिया। अब मुझे अकेले ही अपने खर्चे पर हर तारीख पर लखनऊ से 200 किलोमीटर दूर प्रयागराज जाना पड़ता है। इस दौरान मेरे साथ एक ही गनर रहता है। मेरे पैसे खर्च होने के साथ सुरक्षा की भी दिन भर खतरे में रहती है।”
हमारे साथ 2-3 जबकि हत्यारों की तरफ से दर्जनों वकील जिसमें हिन्दू भी शामिल
किरण तिवारी ने आगे बताया, “सुप्रीम कोर्ट में जिस वकील ने हत्यारों का केस प्रयागराज में ट्रांसफर करवाया उसका नाम महमूद प्राचा था। बहुत बड़ा वकील माना जाता है वो। प्रयागराज की अदालत में हमारी तरफ से सुनवाई के दौरान 2 से 3 वकील ही होते हैं जबकि हत्यारों की तरफ से दर्जनों वकील खड़े रहते हैं। उनकी तरफ के दर्जनों वकीलों में कई हिन्दू भी होते हैं। दुःख यही है कि जयचंद हर राज में देखने को मिल जाएंगे। इन्ही जयचंदों के कारण भारत आक्रान्ताई मुग़लों का गुलाम हुआ था। ये देख कर हमें बहुत तकलीफ होती है। असल में उनकी तरफ पैसे अधिक हैं और हम आर्थिक रूप से कमजोर।”
लग रहा कि 50 साल तक लड़ना पड़ेगा मुक़दमा
भारी मन से किरण तिवारी ने कहा, “अगर वादे के मुताबिक केस फ़ास्ट ट्रैक में होता तो कब की हत्यारों को सजा मिल चुकी होती। लेकिन अभी तारीख पर तारीख़ ही मिल रही। ऐसा ही हाल रहा तो 50 साल तक हमें केस ही लड़ना पड़ेगा। अभी तक तो गवाही भी नहीं हुई। सरकार द्वारा दिए गए 15 लाख रुपए भी खत्म होने वाले हैं। वादे के मुताबिक किसी को नौकरी भी नहीं मिली है। नौकरी पाने के लिए हमने 1 माह पहले हाईकोर्ट से आदेश भी करवाया जिसमें 2 महीने के अंदर नौकरी देने का आदेश दिया गया है। लेकिन क्या होगा ये हमें नहीं मालूम।”
हमारे पोस्टरों पर थूक दिया जाता है
ऑपइंडिया ने कमलेश तिवारी के कार्यालय प्रभारी विशाल गुप्ता से बात की। विशाल ने बताया, “मैं 14 साल की उम्र से कमलेश तिवारी जी के कार्यालय पर आ रहा। मैं खुद लखनऊ के मुस्लिम बहुल क्षेत्र मौलवी गंज में रहता हूँ। वहाँ हम जो बैनर पोस्टर लगाते हैं उस में कुछ लोग थूक देते हैं। नूपुर शर्मा के मामले के हाईलाइट होने के बाद मेरे मोहल्ले के लोगों ने ही ‘सिर तन से जुदा’ के व्हाट्सएप स्टेटस लगाए थे। सरकार हम लोगों पर ध्यान दे। हम चाहते हैं कि हमारे इलाके में पुलिस गश्त ही बढ़ा दे तो बहुत राहत मिलेगी हमें।”