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अजमेर : मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हर दिन मंदिर में काटी गाय-गिराए मंदिर

अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए भड़काया

उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल और महाराष्ट्र में उमेश कोल्हे की हत्या का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा का कत्ल करने की खुलेआम धमकी देने पर FIR दर्ज कर लिया गया है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर शहर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है जिस पर जाँच जारी है। इसके अलावा इस मामले में एएसपी विकास सांगवान ने बताया कि सलमान चिश्ती के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है और उसकी तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सलमान चिश्ती दरगाह पुलिस थाने का एक हिस्ट्रीशीटर भी है, और उसके खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास के कई मामले दर्ज हैं। जो नूपुर शर्मा का सिर कलम करने वालों को अपना मकान देने की बात कहता नजर आता है। यह वीडियो वैसा ही है, जैसा वीडियो उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल के हत्यारे मोहम्मद रियाज अट्टारी और गौस मोहम्मद ने कन्हैयालाल की हत्या से पहले तैयार किया था। करीब दो मिनट पचास सेकंड के इस वायरल विडियो में सलमान चिश्ती खुलेआम नूपुर शर्मा का गर्दन काटने के लिए उकसा रहा है।

पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया जो जानकारी सामने आई है ये उसके हुजरे का ही वीडियो है। उसके खिलाफ हत्या के लिए उकसाने, धमकी देने और उसे धार्मिक रूप देने के साथ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो के बारे में तथ्यपूर्ण जानकारी तभी सामने आएगी जब आरोपित गिरफ्तार होगा। रात से ही उसकी तलाश जारी है।

कन्हैया लाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद द्वारा गला काटने के बाद अजमेर की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा था कि भारतीय मुस्लिम तालिबानी मानसिकता कबूल नहीं करेंगे। लेकिन अब दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह, नूपुर शर्मा की गर्दन लाने वाले को अपना मकान देने की बात कह रहा है।

यह दरगाह ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का है, जिन्हें हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी जाना जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन उन्हें राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था। संयोगवश ‘सूफी संत’ मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में इतिहास में दर्ज तथ्य बॉलीवुड की फिल्मों, गानों, सूफी संगीत और वामपंथी इतिहास से एकदम अलग हैं।

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संत जब इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों की बात करते थे, तो वे वास्तव में रूढ़िवादी और असहिष्णु विचार रखते थे, जो कि मुख्यधारा के जनमत के विपरीत था।

उदाहरण के लिए, सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती और औलिया इस्लाम के कुछ पहलुओं जैसे- नाच (रक़) और संगीत (सामा) को लेकर उदार थे, जो कि उन्होंने रूढ़िवादी उलेमा के धर्मगुरु से अपनाया, लेकिन एक बार भी उन्होंने कभी हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। औलिया ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।

इस पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया है गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।

यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।

मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।

इस अना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

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मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया। चिश्ती ने खुशी से ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया।