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अजमेर : मोइनुद्दीन चिश्ती और उसके शागिर्दों का काला सच : हर दिन काटी गाय, मंदिर में फैलाया खून… मंदिर में ही खाते थे गोमांस

   इतिहास में जो दर्ज... उससे मोइनुद्दीन चिश्ती ‘सूफी संत’ कैसे? (फोटो साभार: veenaworld & MA Khan Book)
भारत के हर शांतिप्रिय हिन्दू एवं मुस्लिम, विशेषकर मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार पर जाकर माथा टेकने वालों को कांग्रेस और वामपंथियों से पूछना चाहिए कि भारत के गौरवमयी इतिहास को कालकोठरी में डाल क्यों हमें गलत एवं मिथ्या इतिहास पढ़ाया गया? इन्हे शायद नहीं मालूम कि जो देश अथवा नेता अपने वास्तविक भुला देता है, उसका लुप्त होना निश्चित है। समय लगा, लेकिन आज यही बात सार्थक हो रही है। वामपंथी तो लग गए ठिकाने, कांग्रेस भी ज्यादा पीछे नहीं। साथ ही वर्तमान मोदी सरकार के हर नेता से भी पूछे कि "गलत इतिहास लिखने वालों को अब तक ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया? उनको दी जाने हर सरकारी सुविधा क्यों नहीं वापस ली गयी?" क्योकि इसी गलत इतिहास के कारण बेगुनाह हिन्दू-मुसलमानों के खून की होली खेली जाती है और कट्टरपंथी एवं छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता उन बेगुनाहों की लाशों पर बैठ मालपुए खाते हैं। 

अजमेर अभी चर्चा में है। कट्टर इस्लामी लोग मोइनुद्दीन चिश्ती (Moinuddin Chishti) को लेकर कही गई एक बात से नाराज हैं। ये लोग कभी इसे ‘सूफी संत’ बोलते हैं, कभी हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से पुकारते हैं। पैगंबर मोहम्मद पर लिखे-पढ़े-बोले गए बातों से ‘सर तन से जुदा’ करने वाली भीड़ अब ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती या हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के लिए भी लोगों की गर्दन काटने पर आमादा हैं। आखिर कौन था यह शख्स? कहाँ से आया था? क्या करता था?

जिस शख्स के नाम पर किसी का गला काट दिया जाए, ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी जाए, उस ख्वाजा गरीब नवाज़ (Khwaja Garib Nawaz) या मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा इतिहास हिंदू-विरोधी है, मंदिर/मूर्ति-भंजक है, गौहत्या के पाप से सना हुआ है। ये सिर्फ आरोप नहीं हैं, ऐतिहासिक तथ्य हैं, वो भी सबूतों के साथ। इतिहासकार एमए खान की पुस्तक से लेकर मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में लिखी गई बातों में इसकी कट्टरता का उल्लेख है। शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार ( Akhbar-Ul-Akhyar) से भी सचित्र उदाहरण लिया गया है।

‘सूफी संत’ का लिबास ओढ़ कर जो भारत आए, उन मकसद क्लियर था। इतिहास ने आपसे उनके मकसद को छिपाया, इसलिए वो ‘सूफी संत’ कहे जाते हैं, आप जाने-अनजाने जाकर चादर चढ़ा आते हैं। हकीकत में अधिकांश सूफी संत या तो इस्लामिक आक्रांताओं की आक्रमणकारी सेनाओं के साथ भारत आए थे, या इस्लाम के सैनिकों द्वारा की गई कुछ व्यापक विजय के बाद। लेकिन इन सबके भारत आने के पीछे सिर्फ एक ही लक्ष्य था और वह था इस्लाम का प्रचार। इसके लिए उलेमाओं के क्रूरतम आदेशों के साथ गाने-बजाने की आड़ में हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने वाले ‘संतों’ से बेहतर और क्या हो सकता था?

‘शांतिपूर्ण सूफीवाद’ का मिथक, कई सदियों तक इस्लामिक ‘विचारकों’ और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा खूब फैलाया गया है। वास्तविकता इन दावों से कहीं अलग और विपरीत है। वास्तविकता यह है कि इन सूफी संतों को भारत में इस्लामिक जिहाद को बढ़ावा देने, ‘काफिरों’ के धर्मांतरण और इस्लाम को स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया था।

इसी में एक सबसे प्रसिद्ध नाम आता है ‘सूफी संत’ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का, जिसे हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी पुकारा जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन वो राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था।

                                                              एमए खान की पुस्तक का अंश

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है। उदाहरण के लिए औलिया इस्लाम ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।

पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।

गौरी के साथ भारत आकर अजमेर में लगाया था डेरा

यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।
                                                एमए खान की पुस्तक का अंश

प्रतिदिन गाय का वध और मंदिरों को अपवित्र करते थे चिश्ती के शागिर्द

मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।
आना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।

पृथ्वीराज चौहान की जासूसी और उन्हें पकड़वाने में चिश्ती की भूमिका

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

हिन्दू राजा की बेटी का अपहरण और निकाह

मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया।
साभार: शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार, अनुवाद – AMU में अब्दोलरेजा अधामी की PhD थीसिस, पेज 19
‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती ने खुशी-खुशी ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया। मोइनुद्दीन चिश्ती की सोच थी पैगंबर मोहम्मद की राह पर चलना। ऊपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए जमा की गई थीसिस में भी यह बात लिखी गई है। इसके अलावा खुद अजमेर दरगाह की वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी पहले उपलब्ध थी। इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।
                                अजमेर दरगाह की वेबसाइट पर पहले दी गई जानकारी
अजमेर दरगाह की वेबसाइट का आर्काइव लिंक यहाँ देखा जा सकता है।
                            सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’
सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’ अगर आप पढ़ें तो उसमें भी यह जानकारी दी गई है। इस किताब के खंड-1 के 124 पेज नंबर पर आप इसे पढ़ सकते हैं।

केरल हाईकोर्ट का वकील मोहम्मद मुबारक देता था गला काटने की ट्रेनिंग: अलग-अलग राज्यों में बना रहा था PFI का ‘हिट स्क्वॉयड’

                                                       केरल हाईकोर्ट के वकील मोहम्मद मुबारक
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े एक और सदस्य को गिरफ्तार किया है। इसका नाम मोहम्मद मुबारक है और यह केरल हाईकोर्ट में एडवोकेट है। आरोपित मुबारक केरल के एर्नाकुलम का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी 29 दिसंबर 2022 को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद मुबारक PFI के गुर्गों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देता था। वह प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों को यह भी सिखाता था कि टारगेट को कैसे खत्म करना है। मुबारक के घर से एक बैग में छुपा कर रखे गए कुल्हाड़ी और तलवार सहित कुछ अन्य हथियार भी बरामद किए गए हैं। ये हथियार बैडमिंटन के एक बैग में रखे थे।

NIA ने अपने बयान में बताया है कि पकड़ा गया वकील मोहम्मद मुबारक विभिन्न राज्यों में हिट स्क्वॉयड संचालित कर रहा था। NIA ने 20 घंटे की मैराथन पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया है। फिलहाल उससे आगे की पूछताछ चल रही है। उसकी बीवी भी वकील है। गौरतलब है कि 29 दिसंबर को NIA ने केरल में एक साथ 56 स्थानों पर छापेमारी की थी।

यह छापेमारी 19 सितम्बर 2022 को NIA द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई FIR संख्या RC-02/2022/NIA/KOC के मामले में हुई थी। इस FIR में PFI से जुड़े सदस्यों पर देश विरोधी गतिविधियों को चलाने के आरोप हैं। इससे पहले भी NIA ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।

PFI से जुड़े 11 आरोपितों पर चार्जशीट

वहीं, एक अन्य मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) से जुड़े 11 आरोपितों पर हैदराबाद के स्पेशल NIA कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए हैं। यह मामला तेलंगाना के निज़ामाबाद का है, जिसमें सभी आरोपितों पर आतंकी ट्रेनिंग कैम्प चलाने और वहाँ देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करने का आरोप है।
इस केस में आरोपितों पर योग एवं कराटे क्लास के बहाने मुस्लिम युवाओं को हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग देने का आरोप है। इस दौरान मुस्लिम युवाओं को यह भी सिखाया जाता था कि किसी की फ़ौरन जान लेने के लिए शरीर के किस अंग को कैसे काटना चाहिए। इसमें गला काटने की भी ट्रेनिंग दी जाती थी।
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हैदराबाद : कराटे के नाम पर PFI के कैंपों में गला काटने और बॉडी पार्ट अलग करने की ट्रेनिंग
हैदराबाद : कराटे के नाम पर PFI के कैंपों में गला काटने और बॉडी पार्ट अलग करने की ट्रेनिंग
 

मामले में गिरफ्तार आरोपितों के नाम अब्दुल कादिर, अब्दुल अहद, शेख इलियास, अब्दुल सलीम, शेख सहदुल्लाह, फ़िरोज़ खान, मुहमम्द उस्मान, सैयद याहिया समीर, शेख इमरान, मोहम्मद अब्दुल मुबीन और मोहम्मद इरफ़ान आरोपित किए गए हैं।

जिहाद पर गीता ज्ञान देने वाले शिवराज पाटिल कब तक सनातन धर्म को बदनाम करते रहेंगे?

शिवराज पाटिल को भगवत गीता का यह भी ज्ञान होना चाहिए था, "विनाश काले, विपरीत बुद्धि", लेकिन इनको तो तुष्टिकरण करते, सनातन धर्म को बदनाम करना है। पाटिल को इतना भी ज्ञान नहीं, कि सनातन धर्म को ख़त्म करने वाले मुग़लों का हिन्दुस्तान से बाहर कोई नाम लेवा भी नहीं, उसी तरफ ये कांग्रेस को भी धकेल रहे हैं। पाटिल को इतना मालूम होना चाहिए था कि अगर भगवान श्रीकृष्ण ने भागवत गीता में जिहाद सिखाया होता, हिन्दुओं को इतने वर्षों तक अयोध्या, और अब काशी, मथुरा और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।  

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितना सनातन धर्म की गहराई में जा रहे हैं,उतनी ही तेजी से कांग्रेस अपने पतन की ओर अग्रसर है। ये वही कांग्रेस है, जो इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम पर बेकसूर साधु/संत और साध्वियों को जेलों में डाल रही थी, आज वही कांग्रेस अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय दलों पर आश्रित होने को मजबूर हो गयी है। CAA से लेकर सिर तन से जुदा और अब हिजाब को लेकर जो हिन्दुओं को डराने का प्रयास कर रहे हैं, वास्तव में ये लोग अपने ही मजहब को बदनाम कर रहे हैं। वह दिन भी अधिक दूर नहीं, जब इन्ही के मजहब के लोग इनके और इनके नेताओं के विरुद्ध खड़े होंगे।  

दूसरे, कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ चोली-दामन बन भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल मुग़ल आतताइयों का गुणगान किया, वही आज इन सबके लिए दुखदायी हो रहा है। क्योकि जिस तरह से आज वास्तविक इतिहास सामने आना शुरू हो चूका है, उसने छद्दम धर्म-निरपेक्षों/सेक्युलरिस्ट्स और तुष्टिकरण करने वालों को दिन में तारे दिखाने शुरू कर दिए हैं।  
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाल यूपीए सरकार में शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) गृ​ह मंत्री हुआ करते थे। 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों (26/11 Mumbai Attack) के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। उससे पहले जब उसी साल दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट (Delhi Serial Bomb blast 2008) हुए थे तो वे बार-बार अपने कपड़े बदलने को लेकर विवादों में आ गए थे। अब उन्हीं पाटिल ने जिहाद पर ‘गीता ज्ञान’ दिया है। उनका कहना है कि गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से जो कहा वह ‘जिहाद’ ही था। 

जब इस बयान पर विवाद मचा तो पाटिल ने पत्रकारों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिहाद का संदेश देने की बात मीडिया कह रही, मैं नहीं कह रहा। इस दौरान पत्रकारों को चुप रहने के लिए कहते हुए भी वे दिखाई पड़े। न्यूज एजेंसी एएनआई का यह वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।

वैसे कांग्रेस नेताओं के लिए हिंदू धर्म को अपमानित करना नया नहीं है। भगवा आतंकवाद की थ्योरी भी कांग्रेस ने उसी तरह गढ़ी थी, जैसे पाटिल ने 20 अक्‍टूबर 2022 को जिहाद को गीता से जोड़ा। उन्‍होंने यह बताने की कोशिश की कि जिहाद का कॉन्‍सेप्‍ट गीता का भी हिस्सा है और श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन को इसका पाठ पढ़ाया था।

पाटिल ने कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई (Mohsina Kidwai) की किताब के विमोचन के मौके पर यह व‍िवादास्‍पद बयान द‍िया। उन्‍होंने कहा, “इस्लाम में जिहाद के बारे में बहुत चर्चा हुई है। भारतीय संसद में हमारा काम जिहाद के बारे में नहीं, बल्कि आदर्शों के बारे में है। जिहाद तभी पैदा होता है जब स्वच्‍छ दिमाग से किए गए सभी प्रयास विफल हो जाते हैं।”

पूर्व गृह मंत्री ने आगे कहा, “ऐसा कहा जाता है कि जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं, तो एक-दूसरे के खिलाफ शक्‍ति का उपयोग कर सकते है।” पाटिल दरअसल शक्ति और जिहाद की अवधारणा के बीच झूठी समानता का चित्रण कर रहे थे। जिहाद इस्लामवादियों द्वारा दुनिया भर में गैर-मुसलमानों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने दावा किया, “यह (जिहाद) केवल कुरान में नहीं है, बल्कि महाभारत, गीता में भी है। श्रीकृष्ण भी अर्जुन से जिहाद के बारे में बात करते हैं और यह चीज केवल कुरान या गीता में ही नहीं, बल्कि ईसाई धर्म में भी है।” पाटिल ने कहा, “अपनी पूरी कोशिश करने के बावजूद, अगर कोई आपके पास हथियार लेकर आता है, तो आप वहाँ से भाग के नहीं जा सकते। उसको आप जिहाद भी नहीं कह सकते हैं और आप इसे गलत भी नहीं कह सकते।”

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कांग्रेस नेताओं में हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने की लगी होड़, शिवराज पाटिल के बाद उदित राज ने दिया

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कांग्रेस नेताओं में हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने की लगी होड़, शिवराज पाटिल के बाद उदित राज ने दिया

बाद में उन्‍होंने हालाँकि बल प्रयोग को सहीं नहीं बताते हुए खुद को ठीक करने का प्रयास किया और कहा, “हाँ, किसी को कुछ समझाने के लिए बल प्रयोग नहीं करना चाहिए। यही मोहसिना जी ने अपनी किताब में लिखा है।”

अजमेर : मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हर दिन मंदिर में काटी गाय-गिराए मंदिर

अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए भड़काया

उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल और महाराष्ट्र में उमेश कोल्हे की हत्या का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा का कत्ल करने की खुलेआम धमकी देने पर FIR दर्ज कर लिया गया है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर शहर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है जिस पर जाँच जारी है। इसके अलावा इस मामले में एएसपी विकास सांगवान ने बताया कि सलमान चिश्ती के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है और उसकी तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सलमान चिश्ती दरगाह पुलिस थाने का एक हिस्ट्रीशीटर भी है, और उसके खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास के कई मामले दर्ज हैं। जो नूपुर शर्मा का सिर कलम करने वालों को अपना मकान देने की बात कहता नजर आता है। यह वीडियो वैसा ही है, जैसा वीडियो उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल के हत्यारे मोहम्मद रियाज अट्टारी और गौस मोहम्मद ने कन्हैयालाल की हत्या से पहले तैयार किया था। करीब दो मिनट पचास सेकंड के इस वायरल विडियो में सलमान चिश्ती खुलेआम नूपुर शर्मा का गर्दन काटने के लिए उकसा रहा है।

पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया जो जानकारी सामने आई है ये उसके हुजरे का ही वीडियो है। उसके खिलाफ हत्या के लिए उकसाने, धमकी देने और उसे धार्मिक रूप देने के साथ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो के बारे में तथ्यपूर्ण जानकारी तभी सामने आएगी जब आरोपित गिरफ्तार होगा। रात से ही उसकी तलाश जारी है।

कन्हैया लाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद द्वारा गला काटने के बाद अजमेर की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा था कि भारतीय मुस्लिम तालिबानी मानसिकता कबूल नहीं करेंगे। लेकिन अब दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह, नूपुर शर्मा की गर्दन लाने वाले को अपना मकान देने की बात कह रहा है।

यह दरगाह ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का है, जिन्हें हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी जाना जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन उन्हें राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था। संयोगवश ‘सूफी संत’ मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में इतिहास में दर्ज तथ्य बॉलीवुड की फिल्मों, गानों, सूफी संगीत और वामपंथी इतिहास से एकदम अलग हैं।

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संत जब इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों की बात करते थे, तो वे वास्तव में रूढ़िवादी और असहिष्णु विचार रखते थे, जो कि मुख्यधारा के जनमत के विपरीत था।

उदाहरण के लिए, सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती और औलिया इस्लाम के कुछ पहलुओं जैसे- नाच (रक़) और संगीत (सामा) को लेकर उदार थे, जो कि उन्होंने रूढ़िवादी उलेमा के धर्मगुरु से अपनाया, लेकिन एक बार भी उन्होंने कभी हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। औलिया ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।

इस पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया है गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।

यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।

मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।

इस अना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

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नूपुर शर्मा पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करने पर 117 रिटायर्ड जज-नौकरशाहों-सैन्य अधिकारियों का खुल
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नूपुर शर्मा पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करने पर 117 रिटायर्ड जज-नौकरशाहों-सैन्य अधिकारियों का खुल

मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया। चिश्ती ने खुशी से ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया।